प्रेम बांटने से प्रेम मिलता है।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ प्रेम बांटने से प्रेम मिलता है। ϒ

  • जीवन जीने के लिए है और वह भी अच्छी तरह से। तुम सबसे प्रेम करो और यह वैसा प्रेम हो जिसमें वियोग दुख नहीं देता है। तुम बहो नदी की तरह-लय में और अपने ज्ञान रूपी रेत के कण बांटते जाओ – दूसरों को, ताकि इस रेत से दूसरों के सुन्दर – सुन्दर घर बन सकें। जहां गति है वहीं दूरियां खत्म हो जाती हैं और तुम से जब दूसरों को कुछ प्राप्त होता है, तो यह अनुभव तुम्हें बेहद खुशी देता है।
  • आम की गुठली को देखकर ही उसके वृक्ष की पूरी आकृति याद आ जाती है या किसी देश का लहराता हुआ झंडा देखकर उससे संबंधित सारी बातें मन में विचारों के रूप में गुजरने लगती हैं। इस तरह से इस दुनिया में जो भी चीजें हैं वे बहुत सारी दूसरी चीजों से भी जुड़ी होती हैं। हर चीज बहुत सारी चीजों का प्रतीक है जैसे कलम भर कहने से कागज, स्याही, पुस्तकों के चित्र उभर कर सामने आ जाते हैं इस तरह के प्रतीक किसी भी पाठ के नोट्स बनाने के काम में मदद करते हैं।
  • नदियां हम से कहती हैं कि जब उनमें बहाव है तो एक न एक छुपी ताकत भी है जो उन्हें आगे की ओर भेज रही है। लेकिन वह ताकत अदृश्य है। ऐसा ही हर पाठ के साथ होता है।  जो लिखे हुए शब्द और विषय हैं, वे तो सामने हैं किन्तु उनके पीछे एक उद्देश्य होता है, यानि उन्हें पढऩे का कारण। ऐसे कारणों की जानकारी हमेशा पाठ को अच्छी तरह से समझने में मदद करती है।
  • शरीर में थोड़ा सा भी जख्म हुआ नहीं कि खून बहने लगा। नाव में छोटा सा भी छेद हुआ नहीं कि पानी भरने लगा। इस तरह की कितनी ही घटनाएं होती हैं जो तुम्हारे न चाहते हुए भी अपने आप घटने लगती है। जो बुरी चीजें हैं उनकी ओर तुमने जरा सा ध्यान दिया तो वे अपने आप तुम्हारे पास आने लगती हैं। इन चीजों पर बिल्कुल भी ध्यान न देकर अपने आपको बचाया जा सकता है। हमारा मन इसी तरह से काम करता है। जिन चीजों पर थोड़ा सा भी ध्यान दिया वही चीजें सक्रिय हो गईं।
  • हर चीज जो मौजूद है उसका एक इतिहास होता है तथा उससे जुड़ी बहुत सी बातें भी। धीरे- धीरे थोड़ा-थोड़ा करके ऐसी बहुत सारी चीजों को जाना जा सकता है। कई बार एक ही विषय को अलग-अलग पुस्तकों का अध्ययन करके बहुत सारी नई जानकारियां इकट्ठी कर ली जाती हैं और नया लेख तैयार हो जाता है। हमें कभी भी अपने ज्ञान को सीमा में नहीं बांधना चाहिए। हमेशा विचारों को विस्तृत और खुला रखना चाहिए। जैसे एक पतंग के उडऩे का कोई निश्चित मार्ग नहीं होता, कहीं भी वह उड़ सकती है और वापस लौट सकती है।
  • पत्रों में हमारी गहरी निजी भावनायें छिपी होती हैं। वे गाढ़े शहद की तरह हैं। एक सैनिक ही पत्रों का महत्व जानता है या कोई प्रेमी। इन पत्रों को व्यर्थ की चीज नहीं समझकर मन बहलाने का सशक्त साधन मानना चाहिए। जो मित्र तुमसे बिछुड़ गए थे उनसे भी पत्रों के द्वारा  संपर्क बनाये रखा जा सकता है। ये पत्र कभी भी काम चलाऊ नहीं होने चाहिए बल्कि पूरी तन्मयता से लिखे होने चाहिएं। एक पत्र में तुम अपने मन की पूरी बातें कह सकती हो और तुम्हारा पत्र मिलने पर दूसरे भी उसी के अनुरूप तुम्हें पत्र लिखते हैं। एक अच्छा पत्र प्राय: जिन्दगी भर हमारे साथ रहता है एवम् उसे बार-बार पढऩे से सुख मिलता है।
  • शरीर चाहे घुप्प अंधेरे में हो या पानी के तल में अपने भीतर सांस भरने का प्रयत्न कभी नहीं छोड़ेगा। हमारा स्वभाव ही है जानना और सीखना। जब तक उसे यह नहीं मिल जाता उसे पूरी तरह से, तृप्ति नहीं होती। कहीं भी मीठा रखो अपनी जिज्ञासा के कारण चीटियां पहुंच ही जाती हैं। कोई तुम्हें अच्छी तरह से पढ़ाये या न पढ़ाये तुम में दूसरों से कुछ लेने की काबिलीयत होनी चाहिए, बस चीजों को जानने की अपनी जिज्ञासा बनाये रखो। शेष कार्य शरीर खुद ही कर देगा।
  • हम जानते हैं कि एक छोटी सी चींटी हमारा कुछ भी बिगाड़ नहीं सकेगी लेकिन उसके काटने पर भी पूरा शरीर झनझना उठता है। वैसे ही यह ईर्ष्या अदृश्य होकर भी हमें भयभीत कर देती है। ईर्ष्या करके हम दूसरे की तरक्की को रोकना चाहते हैं तथा चाहते हैं कि वह जहां है उससे भी अधिक नीचे गिर जाये। लेकिन ऐसा करना हमारे हाथों में नहीं होता। सभी का अपना – अपना जीने का तरीका है।दूसरों की सोच में तुम्हारा हस्तक्षेप तुम्हें ही परेशान कर देता है।
  • शुभ रात्रि! रात्रि तुम्हें विदा। जब सोने के पहले इस तरह के भाव अपने आप तुम्हारे मन में आते हैं तो लगता है कि आज का दिन अच्छा रहा। बहुत सारी उपलब्धियां मिलीं। यानि पहले से अधिक अच्छी तरह से चीजों को समझा गया और जो भी कार्य किये गये वे निष्ठा पूर्वक किये गये, अत: संतोष हुआ। फिर यह संतोषपूर्ण रात्रि काफी आरामदायक होती है। कल फिर से तुम नयी होकर आती हो, हर नयी चीज में हाथ लगाती हो।
  • इस संसार में हर पल कुछ नया हो रहा है और उस नये को जानने के लिए तुम्हें भी एक बदला हुआ मनुष्य बनना होगा। केवल तथाकथित रूढि़वादी चीजों पर विश्वास करके तुम नया कुछ नहीं कर सकती। सभी चीजों को जानने की कोशिश करो, अपनी आंखों की शक्ति को पहचानो। इसी के सहारे तुम सारी चीजों को उभारना और ढालना सीखती हो।
  • रेगिस्तान में ऊंट पर बैठ कर यात्रा की जाती है और दुर्गम पहाड़ों के संकरे रास्तों पर घोड़ों की पीठ पर बैठ कर। इसी तरह से अलग-अलग विषयों को अपनी भिन्न-भिन्न मन: स्थितियों के सहारे समझना होता है या पढऩा होता है। अगर तुम गणित पढ़ रही हो, तो तुम्हें विशलेषण करने वाली बुद्धि का सहारा लेना होता है और इतिहास पढ़ते समय मन को पुराने जमाने में ले जाना होता है, उसी तरह विज्ञान पढ़ते समय इस युग की मौजूद सारी चीजों पर ध्यान केन्द्रित करना होता है। धीरे-धीरे परिस्थितियों के अनुसार हमारा दिमाग विषयों को पढ़ते ही उनके अनुसार ही तालमेल बैठा लेता है, जैसे गाने के अनुसार वाद्य यंत्रों में हाथ ऊपर-नीचे होने लगते हैं।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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Note::-

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

अच्छे अनुभवों का मूल्य।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ अच्छे अनुभवों का मूल्य। ϒ

  • दवा की सूक्ष्म मात्रा भी जीवन देती है, दवा सूक्ष्म होकर भी प्राण है। आर्द्रता? पानी का ही एक रूप है। इसी तरह जो चुपचाप हैं, वे अपने में श्रेष्ठता छुपाये हुए हैं। श्रेष्ठ चीजें झूठ-मूठ के वार्तालाप नहीं करती, बल्कि स्वयं श्रेष्ठ तौर-तरीकों से अपनी बात बताती हैं। अच्छे विज्ञापन मौन रहकर भी बहुत कुछ कह जाते हैं।
  • मैं अब भी जब कभी अपने पुराने विद्यालय की ओर देखता हूं तो लगता है कि मेरे जैसे  कितने ही छात्र यहां आए होंगे और पढ़ाई खत्म करके चले गए होंगे। मुझे इस विद्यालय में  बिताया हुआ हर खूबसूरत क्षण याद है और दूसरे छात्र भी होंगे जो यहां से पढक़र विदा हुए हैं, उन्हें भी यह सब याद होगा। इस तरह से तुम देखोगी कि हजारों बच्चे ऐसे हैं जो एक ही जगह पढऩे पर भी अलग-अलग अनुभव रखते हैं। इसलिए उन सभी के अच्छे अनुभवों का  मूल्य है। लेकिन सभी अपने अनुभवों को खुले दिल से सबके सामने नहीं रख पाते, फिर भी जो अपने अनुभव संस्मरण के रूप में किताबों के द्वारा सबके सामने रखते हैं, उन्हें पढऩा दूसरे लोगों को समझने जैसा है।
  • परीक्षा देते समय सबसे पहले आसान प्रश्नों को हल किया जाता है, फिर धीरे-धीरे कठिन  प्रश्नों को। इसी तरह से अपना पाठ याद करते समय सबसे आसान चीजों को पहले समझना होता है। फिर उसी समझ के सहारे कठिन चीजों को। सारे पाठ एक आधार पर खड़े होते हैं। जिन्हें जाने बिना दूसरी चीजों को समझना बिल्कुल मुश्किल है। लेकिन इस क्रिया में विषयों के संबंध में अत्यधिक रुचि बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। एक बार मार्ग निकाल लेने के बाद फिर कहीं भी कठिनाई नहीं होती।
  • जब पेड़ों पर फल आते हैं, तो पेड़ का सारा ध्यान उन्हें बड़ा एवम् स्वादिष्ट बनाने में लग जाता है। जैसे ही वे फल तोड़ लिये जाते हैं, पेड़ अपनी शाखाओं को बढ़ाने एवं मजबूत करने में अपना ध्यान लगाने लगता है। कोई भी शारीरिक कार्य करते समय हाथ-पांव, कान-आंखें दिमाग आदि सभी एक साथ लगे होते हैं। लेकिन पढ़ते वक्त वे अपनी सारी शक्ति पाठ को समझने में लगा देते हैं। तुम जितना ही अपनी शक्ति को इस तरह से पुस्तकों पर केन्द्रित करोगी, उतना ही अधिक लाभ मिलेगा।
  • जब कहीं आग लग जाती है, सबसे पहले मनुष्यों को बचाने की कोशिश की जाती है, फिर बाकी चीजों को। इससे समझ सकती हो कि मनुष्य जीवन का कितना अधिक महत्व है। मनुष्य ही पृथ्वी पर सबसे बड़ा बुद्धिजीवी है जो कुछ न कुछ नया करने का प्रयत्‍न करता  रहता है। इसलिए अपने में जो भी खास बातें हैं तथा जिनके कारण तुम मनुष्य हो, उन्हें पहचानो। ताकि तुम महसूस कर सको कि तुम्हारे पास इतने सारे गुण हैं। कलम अगर मेज पर पड़ी रही, तो प्लास्टिक का टुकड़ा भर थी। लेकिन जब इससे लिखा गया तो यह महत्वपूर्ण चीज बन गयी। इसलिए अपनी उपयोगिता को सुला कर मत रखो, उसे जगाये रखो।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* चांदी की छड़ी।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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Real Education Continuous………….kmsraj51 ki kalam se

 जितने भी खनिज हैं सभी जमीन के नीचे हैं, कोई ऊपर नहीं. जो बहुमूल्य होता है वह छुपा हुआ होता है. इसलिए कुछ लोगों को विद्या कहां है, इसका आभास तक नहीं होता.

Education Continuous………….

होली ने तुम्हें रंगों से भिंगो दिया, पानी डाला कि सब कुछ बह गया. क्षणिक होती है सारी खुशियां, आयी नहीं कि समय इन्हें धोने लगा. फिर भी ज्ञान हमेशा वर्तमान है, यह बर्फ की तरह पिघलता नहीं.

Education Continuous………….

रेत के छोटे-छोटे कण मिलकर ढेर बनते हैं. घड़ी की जो सूई सबसे तेज रफ्तार से चलती है वही बाकी दूसरी दो सूइयों की दिशा निर्धारित करती है तुमने केवल एक साँस ली और समय बीत गया. लेकिन इन्हीं छोटे-छोटे पल में भी तुम कुछ न कुछ तो कर ही रही थी. इसलिए जो बिल्कुल धीरे-धीरे भी काम किये जा रहे हैं वे दिमाग में संकलित होकर कोई न कोई विस्तृत आकार एक दिन धारण कर लेंगे, इसलिए व्यर्थ के कामों में अपना समय गंवा कर तुम अच्छी चीजें संकलित नहीं कर पाती. बल्कि जो कुछ अच्छा संकलित होना चाहिए था, उसमें भी बाधा डालती हो या विकृति लाती हो. इसलिए पढऩा छोडऩे पर तुम्हें पछतावा होने लगता है.

Education Continuous………….

फल पकते रहते हैं, फूल खिलते रहते हैं और यों समय गुजरता चला जाता है. वह तुम्हारे निर्णय के लिए इंतजार नहीं करता. तुममें अगर यह क्षमता नहीं आई कि किस तरह से इस समय को रोककर उसका इस्तेमाल करो तो समझ लो कि अब देर नहीं करनी चाहिए. जो भी खोया है उसे भुलाकर, सामने जो समय गुजर रहा है उसे पहचानो और उसी के अनुसार अपना निर्णय लो.

Education Continuous………….

kmsraj51 ki pen se…………..

 

बच्चों के जूते अलग तरह के होते हैं एवं बड़ों के दूसरी तरह के. जैसे-जैसे तुम बड़ी होती जाती हो, तुमसे भी एक पुराने वृक्ष की तरह फल पाने की आशा की जाती है, यानि तुमसे भी  कुछ दूसरों को मिलना चाहिए. सभी उम्मीद रखते हैं कि उम्र बढऩे के हिसाब से तुम्हारी बात, व्यवहार एवं तौर तरीकों में परिपक्वता आनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है, तो तुम  दीवार पर लगे एक वट वृक्ष की तरह हो, जो सिर्फ अपने को बचाने के लिए ही संघर्ष कर रहा होता है.

Education Continuous……………

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हू-ब-हू तुम्हारे नाम या बातों की नकल करने वाला तोता बुद्धिमान नहीं होता, ना ही तुम्हारी लगायी हुई टोपी को छीनकर अपने सिर पर पहनकर इतराने वाला बंदर. ये सिर्फ नकलची कहलाते हैं. अत: अपने में जो कुछ है उसमें उसके मौलिक रूप में ही निखार लाओ. दुनिया की सारी घडिय़ां साधारण ही हैं, जो सभी केवल समय बतलाती हैं. लेकिन जो बतलाता है कि समय के बीतने के साथ-साथ बहुत सारी घटनाओं की  घटना भी है, वही बुद्धिमान है. प्रत्येक चीज को अपनी तरह से देखो, उन्हें अच्छी तरह से समझो, अच्छी तरह से लिखो और जब कुछ अच्छी चीजें बनती हैं तो तुम्हारी उन्नति निश्चित है. नकल करके कुछ भी नया नहीं पाया जा सकता, बस उसके सहारे अपने आप को छुपाया जा सकता है परंतु मैं चाहता हूं कि तुम छुपो नहीं, प्रज्वलित करो अपने आपको और तुम्हारा तेज चारों ओर दिखाई दे.

Education Continuous……….

kmsraj51 ki pen se………….

 

जब खेतों में बारिश होती है तो किसान जल्द से जल्द बीज बोकर फसल उगा  लेना चाहता है, क्योंकि वह जानता है यह पानी अधिक दिनों तक जमीन में रहेगा नहीं, उडऩे लगेगा. इस तरह से जब भी तुम्हें कोई सुअवसर मिले  उसका उपयोग करो, अन्यथा देखते-देखते सब कुछ हाथ से निकल जाएगा.