महान शिक्षाविद डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन – जीवन परिचय।

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ϒ महान शिक्षाविद डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन – जीवन परिचय। ϒ

सर्व प्रथम आदिगुरु को नमन…..

5 सितम्बर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिन और ये दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

महान शिक्षाविद, महान दार्शनिक, महान वक्ता, हिन्दू विचारक एवं भारतीय संस्कृति के ज्ञानी डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। भारत को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाले महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन प्रतिवर्ष 5 सितंबर को शिक्षकों के सम्मान के रूप में सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है।

डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन बचपन से किताबें पढने के शौकीन राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरुतनी गॉव में 5 सितंबर 1888 को हुआ था। साधारण परिवार में जन्में राधाकृष्णन का बचपन तिरूतनी एवं तिरूपति जैसे धार्मिक स्थलों पर बीता । वह शुरू से ही पढाई-लिखाई में काफी रूचि रखते थे, उनकी प्राम्भिक शिक्षा क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथर्न मिशन स्कूल में हुई और आगे की पढाई मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पूरी हुई। स्कूल के दिनों में ही डॉक्टर राधाकृष्णन ने बाइबिल के महत्त्वपूर्ण अंश कंठस्थ कर लिए थे , जिसके लिए उन्हें विशिष्ट योग्यता का सम्मान दिया गया था। कम उम्र में ही आपने स्वामी विवेकानंद और वीर सावरकर को पढा तथा उनके विचारों को आत्मसात भी किया। आपने 1902 में मैट्रिक स्तर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और छात्रवृत्ति भी प्राप्त की । क्रिश्चियन कॉलेज, मद्रास ने भी उनकी विशेष योग्यता के कारण छात्रवृत्ति प्रदान की। डॉ राधाकृष्णन ने 1916 में दर्शन शास्त्र में एम.ए. किया और मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में इसी विषय के सहायक प्राध्यापक का पद संभाला।

डॉ. राधाकृष्णन के नाम में पहले सर्वपल्ली का सम्बोधन उन्हे विरासत में मिला था। राधाकृष्णन के पूर्वज ‘सर्वपल्ली’ नामक गॉव में रहते थे और 18वीं शताब्दी के मध्य में वे तिरूतनी गॉव में बस गये। लेकिन उनके पूर्वज चाहते थे कि, उनके नाम के साथ उनके जन्मस्थल के गॉव का बोध भी सदैव रहना चाहिए। इसी कारण सभी परिजन अपने नाम के पूर्व ‘सर्वपल्ली’ धारण करने लगे थे।

डॉक्टर राधाकृष्णन पूरी दुनिया को ही एक विद्यालय के रूप में देखते थे । उनका विचार था कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सही उपयोग किया जा सकता है। अत: विश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन करना चाहिए।

अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से भारतीय दर्शन शास्त्र कों विश्व के समक्ष रखने में डॉ. राधाकृष्णन का महत्त्वपूर्ण योगदान है। सारे विश्व में उनके लेखों की प्रशंसा की गई। किसी भी बात को सरल और विनोदपूर्ण तरीके से कहने में उन्हें महारथ हांसिल था , यही कारण है की फिलोसोफी जैसे कठिन विषय को भी वो रोचक बना देते थे। वह नैतिकता व आध्यात्म पर विशेष जोर देते थे; उनका कहना था कि, “आध्यात्मक जीवन भारत की प्रतिभा है।“

1915 में डॉ.राधाकृष्णन की मुलाकात महात्मा गाँधी जी से हुई। उनके विचारों से प्रभावित होकर राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय आन्दोलन के समर्थन में अनेक लेख लिखे। 1918 में मैसूर में वे रवीन्द्रनाथ टैगोर से मिले । टैगोर ने उन्हें बहुत प्रभावित किया , यही कारण था कि उनके विचारों की अभिव्यक्ति हेतु डॉक्टर राधाकृष्णन ने 1918 में ‘रवीन्द्रनाथ टैगोर का दर्शन’ शीर्षक से एक पुस्तक प्रकाशित की। वे किताबों को बहुत अधिक महत्त्व देते थे, उनका मानना था कि, “पुस्तकें वो साधन हैं जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं।“ उनकी लिखी किताब ‘द रीन आफ रिलीजन इन कंटेंपॅररी फिलॉस्फी’ से उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली ।

गुरु और शिष्य की अनूठी परंपरा के प्रवर्तक डॉ.राधाकृष्णन अपने विद्यार्थियों का स्वागत हाँथ मिलाकर करते थे। मैसूर से कोलकता आते वक्त मैसूर स्टेशन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जय-जयकार से गूँज उठा था। ये वो पल था जहाँ हर किसी की आँखे उनकी विदाई पर नम थीं। उनके व्यक्तित्व का प्रभाव केवल छात्राओं पर ही नही वरन देश-विदेश के अनेक प्रबुद्ध लोगों पर भी पङा। रूसी नेता स्टालिन के ह्रदय में फिलॉफ्सर राजदूत डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रति बहुत सम्मान था। राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन अनेक देशों की यात्रा किये। हर जगह उनका स्वागत अत्यधिक सम्मान एवं आदर से किया गया। अमेरिका के व्हाईट हाउस में अतिथी के रूप में हेलिकॉप्टर से पहुँचने वाले वे विश्व के पहले व्यक्ति थे।

डॉ. राधाकृष्णन ने कई विश्वविद्यालयों को शिक्षा का केंद्र बनाने में अपना योगदान दिया। वे देश की तीन प्रमुख यूनिवर्सिटीज में कार्यरत रहे :

  • 1931 -1936 :वाइस चांसलर , आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय
  • 1939 -1948 : चांसलर , बनारस के हिन्दू विश्वविद्यालय
  • 1953 – 1962 :चांसलर ,दिल्ली विश्वविद्यालय

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिभा का ही असर था कि, उन्हें स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्मात्री सभा का सदस्य बनाया गया। 1952 में जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर राधाकृष्णन सोवियत संघ के विशिष्ट राजदूत बने और इसी साल वे उपराष्ट्रपति के पद के लिये निर्वाचित हुए।

1954 में उन्हें भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

1962 में राजेन्द्र प्रसाद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति का पद संभाला। 13 मई, 1962 को 31 तोपों की सलामी के साथ ही डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की राष्ट्रपति के पद पर ताजपोशी हुई।

प्रसिद्द दार्शनिक बर्टेड रसेल ने डॉ राधाकृष्णन के राष्ट्रपति बनने पर कहा था – “यह विश्व के दर्शन शास्त्र का सम्मान है कि महान भारतीय गणराज्य ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति के रूप में चुना और एक दार्शनिक होने के नाते मैं विशेषत: खुश हूँ। प्लेटो ने कहा था कि दार्शनिकों को राजा होना चाहिए और महान भारतीय गणराज्य ने एक दार्शनिक को राष्ट्रपति बनाकर प्लेटो को सच्ची श्रृद्धांजलि अर्पित की है।“

बच्चों को भी इस महान शिक्षक से विशेष लगाव था , यही कारण था कि उनके राष्ट्रपति बनने के कुछ समय बाद विद्यार्थियों का एक दल उनके पास पहुंचा और उनसे आग्रह किया कि वे ५ सितम्बर उनके जन्मदिन को टीचर्स डे यानि शिक्षक दिवस के रूप में मनाना चाहते हैं। डॉक्टर राधाकृष्णन इस बात से अभिभूत हो गए और कहा, ‘मेरा जन्मदिन ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाने के आपके निश्चय से मैं स्वयं को गौरवान्वित अनुभव करूँगा।’  तभी से 5 सितंबर देश भर में शिक्षक दिवस या Teachers Day के रूप में मनाया जा रहा है।

डॉ. राधाकृष्णन 1962 से 1967 तक भारत के राष्ट्रपति रहे , और कार्यकाल पूरा होने के बाद मद्रास चले गए। वहाँ उन्होंने पूर्ण अवकाशकालीन जीवन व्यतीत किया। उनका पहनावा सरल और परम्परागत था , वे अक्सर सफ़ेद कपडे पहनते थे और दक्षिण भारतीय पगड़ी का प्रयोग करते थे। इस तरह उन्होंने भारतीय परिधानों को भी पूरी दुनिया में पहचान दिलाई। डॉ राधाकृष्णन की प्रतिभा का लोहा सिर्फ देश में नहीं विदेशों में भी माना जाता था। विभिन्न विषयों पर विदेशों में दिए गए उनके लेक्चर्स की हर जगह प्रशंशा होती थी ।

अपने जीवन काल और मरणोपरांत भी उन्हें बहुत से सम्मानो से नवाजा गया , आइये उनपे एक नज़र डालते हैं :

1931: नाइट बैचलर / सर की उपाधि , आजादी के बाद उन्होंने इसे लौटा दिया
1938: फेलो ऑफ़ दी ब्रिटिश एकेडमी .
1954: भारत रत्न
1954: जर्मन “आर्डर पौर ले मेरिट फॉर आर्ट्स एंड साइंस ”
1961: पीस प्राइज ऑफ़ थे जर्मन बुक ट्रेड .
1962: उनका जन्मदिन ५ सितम्बर शिक्षक दिवस में मानाने की शुरुआत
1963: ब्रिटिश आर्डर ऑफ़ मेरिट .
1968: साहित्य अकादमी फ़ेलोशिप , डॉ राधाकृष्णन इसे पाने वाले पहले व्यक्ति थे
1975: टेम्प्लेटों प्राइज ( मरणोपरांत )
1989: ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा उनके नाम से Scholarship की शुरुआत

“मौत कभी अंत या बाधा नहीं है बल्कि अधिक से अधिक नए कदमो की शुरुआत है।” ऐसे सकारात्मक विचारों को जीवन में अपनाने वाले असीम प्रतिभा का धनी सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन लम्बी बीमारी के बाद 17 अप्रैल, 1975 को प्रातःकाल इहलोक लोक छोङकर परलोक सिधार गये। देश के लिए यह अपूर्णीय क्षति थी। परंतु अपने समय के महान दार्शनिक तथा शिक्षाविद् के रूप में वे आज भी अमर हैं। शिक्षा को मानव व समाज का सबसे बड़ा आधार मानने वाले डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शैक्षिक जगत में अविस्मरणीय व अतुलनीय योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। उनके अमुल्य विचार के साथ अपनी कलम को यहीं विराम देते हैं। सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन का कहना है कि,

“जीवन का सबसे बड़ा उपहार एक उच्च जीवन का सपना है।”

धन्यवाद !

अनिता शर्मा

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

विंडोज एक्सपी के बाद इस्तेमाल करें कुछ नया – By-kmsraj51

विंडोज एक्सपी के बाद इस्तेमाल करें कुछ नया

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अप्रैल 2014 में माइक्रोसॉफ्ट एक्सपी के लिए सपोर्ट बंद करने से विंडोज एक्सपी इस्तेमाल करने वाले लाखों यूजर्स को इस ऑपरेटिंग सिस्टम से अलविदा कहना पड़ सकता है। ऑपरेटिंग सिस्टम ‘उबन्टु’ ऐसे में विंडोज एक्सपी की जगह ले सकता है।

क्या है ‘उबन्टु’

कुछ वर्षों में लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम ‘उबन्टु’ काफी लोकप्रिय हुआ है। एक्सपी के जाने के बाद यूजर्स लिए ‘उबन्टु’ एक अच्छा विकल्प हो सकता है। अगर आप एंड्रॉयड आधारित टैबलेट या स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं तो लाइनक्स से परिचित होंगे। गूगल की तरफ से पेश किया गया एंड्रॉयड, जो स्मार्टफोन यूजर्स में लोकप्रिय मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम है, लिनक्स पर ही आधारित है।

हालांकि यह मुफ्त होने के बावजूद लोकप्रियता में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज और एप्पल मैक से पीछे है, लेकिन कामकाज में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर सॉफ्टवेयर (जैसे ऑडियो-वीडियो सॉफ्टवेयर, ऑफिस सॉफ्टवेयर, फोटो एडिटर, इंटरनेट ब्राउजिंग, पेजमेकिंग, आदि) भी मुफ्त उपलब्ध है। 

क्षमताओं और फीचर्स के मामले में विंडोज या मैक से कम भी नहीं हैं। इसमें वे सभी फीचर्स हैं, जिनकी जरूरत आम कंप्यूटर यूजर को पड़ती है। दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए आपको जेब ढीली करनी पड़ती है। लेकिन उबन्टु समेत लाइनक्स के ज्यादातर संस्करण मुफ्त में मौजूद हैं।

यहां है काफी कुछ

सॉफ्टवेयर डेवलपर, वीडियो एडिटर, एनिमेशन आर्टिस्ट या फिर गेम प्लेयर; उबन्टु में सबकी जरूरत के फीचर्स मौजूद हैं। विंडोज में बनाई गई कई फाइलें भी इसमें खुल जाती हैं। विंडोज इंस्टॉल करते समय कई सॉफ्टवेयर और सुविधाएं खुद-ब-खुद इंस्टॉल हो जाती हैं, जैसे वर्डपैड, नोटपैड, इंटरनेट एक्सप्लोरर, माइक्रोसॉफ्ट पेंट आदि।

उबन्टु के साथ भी कई सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होते हैं। वे ठीक उसी तरह काम करते हैं, जैसे विंडोज आधारित सॉफ्टवेयर। इनमें लिबर-ऑफिस (एमएस ऑफिस जैसा ऑफिस पैकेज), मोजिला फायरफोक्स (ब्राउजर), थंडरबर्ड (ईमेल क्लाइंट), जिम्प (इमेज एडिटिंग सॉफ्टवेयर) आदि खास हैं।

कहां से करें डाउनलोड

सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए इसमें एक एप-स्टोर भी है, जिसे ‘उबन्टु सॉफ्टवेयर सेंटर’ कहा जाता है। उबन्टु को कहीं से खरीदने की जरूरत नहीं है। बस www.ubuntu.com पर जाकर डाउनलोड कर लीजिए और एक डीवीडी डिस्क पर कॉपी कर लीजिए।

क्या है अलग

उबन्टु में स्टार्ट बटन, स्टार्ट मेनू या टास्कबार की जगह ‘लांचर’ नाम से मेनू मौजूद है, जिसमें प्रमुख सॉफ्टवेयरों के आइकन स्क्रीन के बाईं तरफ लंबी कतार में दिखाई देते हैं। उबन्टु में ‘डैश’ नामक पावरफुल सर्च यूटिलिटी का भी इस्तेमाल होता है, जो विंडोज8 के सर्च बॉक्स जैसा ही है। 

विंडोज ‘कंट्रोल पैनल’ की ही तरह उबन्टु में भी ‘कंट्रोल सेंटर’ उपलब्ध है और ‘माई कंप्यूटर’ का काम ‘प्लेसेज’ करता

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हम-भी-जिद-के-पक्के-है — By-kmsraj51

हम-भी-जिद-के-पक्के-है —

क्या बात करें किससे बात करें 
जब किसी ने सुनना ही नहीं है तो 
कितना भी विरोध प्रदर्शन कर लो, 
कुछ नहीं होने वाला लेकिन 
इतना तो जानते ही है 
वक्त किसी का नहीं होता. 
आज उनका तो कल हमारा 
कर लीजिये कितने भी जुल्म। 
अभी वक्त तुम्हारा है। 
हम भी जिद के पक्के है, 
इस गुस्से को शांत नहीं होने देंगे। 
भरोसा है अपने पर, बदलेगा वक्त जरुर 
आज नहीं तो कल, जवाब तो देना होगा 
अभी तो यह आगाज़ है, अंजाम बाकी है 
कदम अब उठ चुके मंजिल की ओर 
नहीं रुकेगे किसी के रोकने से 
हर जुल्म का हिसाब लेगें हम 
अब नहीं होने देंगे मनमानी 
क्योंकि अब हम भी जागे है 
हम भी जिद के पक्के है, 
इस गुस्से को शांत नहीं होने देंगे।

Chunar Fort – By-kmsraj51

Chunar Fort

 

The Chunar fort is situated in the Vindhya Range at a distance of about 45 odd km from Varanasi. The Chunar fort is located in the Mirzapur district. According to the Puranas the oldest name of Chunar was Charanadri as Lord Vishnu had taken his first step in his Vaman incarnation in the dynasty of Great king Bali. However Chunar came into prominence after the visit of Babar followed by Shershah Suri, Humayun, Akbar, Aurangzeb and finally the Britishers.

It is said that Maharaja Vikramaditya, the king of Ujjain established the fort of Chunar. According to the Alha Khand, King Sahadeo made this fort as his capital and established the statue of Naina Yogini in a cave of Vindhya hill. To commemorate his victory on 52 rulers, King Sahadeo built a stone umbrella inside the fort.

The Chunar fort became important for its association with the Mughal king, Babar and later Shershah Suri, who got the possession of the fort by marrying the wife of Taj Khan Sarang-Khani, the Governer of Ibrahim Lodi. In 1531 AD Humayun made an unsuccessful effort to capture this fort but later in 1574AD, Akbar the great captured this fort and since that very time it remained under the Mughals up to 1772AD. In the year 1772AD the East India Company captured the Chunar fort.

पृथ्वी से परे – ईश्वरीय संकल्पनाओं की संभावनाएं – By-kmsraj51

पृथ्वी से परे – ईश्वरीय संकल्पनाओं की संभावनाएं

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति होना एक विलक्षण, अति दुर्लभ संयोग सा था… पर अथाह बृह्माँड में हो सकता है कि यह विलक्षण, दुर्लभ संयोग कुछ या अनेक जगहों पर हुआ या हो रहा हो… मानवीय दर्शन शास्त्र के अनुसार इस सभी जगहों की चेतना भी अपने अपने विकास की ऐतिहासिक परिस्थितियों के अनुसार ही रूप लेगी… यह भी हो सकता है कि इनमें से कुछ, कई या सभी में ईश्वर की संकल्पना ही न उभरे… ऐसा ही होगा भी, संभावना यही है… पर, केवल तर्क के लिये ही मान लें, यदि भविष्य में मानव जाति बृह्माँड के अन्य हिस्सों में पनप रही कुछ जातियों के संपर्क में आये व उनमें भी किसी परम चेतना की संकल्पना मिलती है, तो यह मामला थोड़ा पेचीदा हो सकता है…

 

आपने एकदम सही कहा है, जीवन की उत्पत्ति के लिए आवश्यक संयोग, अभी तक उपलब्ध विपुल जानकारी में, इतने सारे है कि अभी तक ब्रह्मांड़ में जहां तक हमारी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष पहुंच संभव हो पाई है, जीवन की उत्पत्ति की संभावनाएं बहुत कम ही हैं। यह लगभग सुनिश्चित सा ही लगता है इतने सारे संयोगों का एक साथ होना असंभव सा है। इस नीले ग्रह पर हुआ है तो, और साथ ही ब्रह्मांड़ की असीमता को देखते हुए, इसे तार्किक रूप से, सिरे से ही नकारा तो नहीं जा सकता लेकिन फिर भी, इस मामले में हमारी कल्पनाशीलता की भी कुछ सीमाएं तो होनी ही चाहिएं।
 
हमारा ब्रह्मांड, पदार्थ की उपस्थिति और उसका विस्तार ही है और जाहिरा तौर पर वह इसी के कुछ मूलभूत नियमों से सक्रिय है। तो इसके विकास स्वरूप अस्तित्व में आए जटिल प्रोटीन अणुओं ( जो कि जीवन का मूल हैं ) के निर्माण और उसके विकसित होने की प्रक्रिया और नियम भी सभी जगह एक जैसे ही होंगे। जीवन के विकास की हर जगह, कुछ पारिस्थितिक विशिष्टताएं तो होंगी, पर उसके आधारभूत गुणधर्म, संरचना और नियमसंगतियां एक समान ही होंगी। भूतद्रव्य और उसके बहुत ही जटिल विकास से उत्पन्न जैव-कोशिकाओं की प्रतिक्रियात्मकता के भी जटिल विकास के रूप में ही, विभिन्न इन्द्रियों और चेतना का सफ़र तय हुआ है। जीवन के साथ, चेतना ( जिसे हम मनुष्य का विशिष्ट लक्षण ) की उत्पत्ति के लिए तो और भी कई विशिष्ट संयोगों की उपस्थिति जुड़ी हुई है।
 
इसलिए हमें तो यह लगता है कि चेतना के विकास और उससे संबद्ध क्रियाविधियों की नियमसंगतियां भी लगभग एक जैसी ही रहने की संभावनाएं हैं। तार्किक रूप से हम कल्पना भी करना चाहें, कि कहीं और भी इसी तरह के चेतना संपन्न प्राणी हो सकते हैं, तो जाहिरा तौर पर चेतना की उपस्थिति भय के आधारों पर ही ख़ड़ी मिलेगी। जीवनीय द्रव अपने को बनाए रखने के लिए प्रयत्नशील रहता है, जाहिर है कि वह उसको नष्ट कर सकने वाली परिस्थितियों से दूर रहने को गतिशील करता है। यानि उसका रासायनिक और भौतिक संघटन, स्वयं को विघटित कर सकने वाले कारकों के प्रति प्रतिक्रिया करता है। ये कारक उसके लिए खतरे के रूप में उपस्थित होते हैं। और यदि साथ में चेतना होगी, तो ये खतरे उसके लिए चेतन भय का रूप लेंगे, और इसी भय और अज्ञान से वही प्रक्रिया चल निकलेगी जो अंततः इसी तरह की किसी अलौकिक अवधारणाओं का, कोई विशिष्ट पारिस्थितिक रूप लेने को अभिशप्त होगी।
 
यह उनके विकास और परिस्थितियों की अवस्थाओं पर निर्भर करेगा कि ईश्वर की अवधारणा उनमें किस रूप में होगी। पर यदि चेतना विकसित होगी तो जाहिरा तौर पर वह ऐसी ही क्रम-प्रक्रिया से गुजरने को अभिशप्त होगी। हां उसका रूप थोड़ा या अधिक भिन्न हो सकता है, बिल्कुल उसी तरह, जिस तरह से हमारी पृथ्वी पर भी अलग-अलग चेतना-विकास की धाराओं के कारण, इसमें भिन्नताएं पाई जाती हैं। अब चूंकि हम यह कल्पना करना चाह ही रहे हैं, तो फिर उनमें भी उनकी परिस्थितियों के अनुसार ही इस तरह की अवधारणाएं मिलना सुनिश्चित सी ही लगती है। बजाए ऐसा कहने के, कि इसकी संभावनाए ही नहीं है।
 
अतएव, मामला स्पष्ट नहीं हुआ। अब जैसा कि आपने कहा है, हम मान रहे हैं कि उनमें भी परम चेतना की संकल्पना मिलती है, तो इसमें मामला थोड़ा पेचीदा कैसे हुआ…? हमें तो लगता है, मामला तब पेचीदा होगा, जब उनमें इस तरह की अवधारणाएं नहीं मिलें। 🙂
 
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क्या ध्यान लगाने व चित्त को एकाग्र करने के लिये बताये गये आध्यात्मिक तरीके जिनमें सामान्यत: स्वचालित श्वसन क्रिया को नियंत्रित करने पर जोर दिया जाता है के दौरान, या कीर्तन-सत्संग-समागम-गुरू दर्शन के दौरान कुछ लोगों को हुऐ अलौकिक अनुभवों को Hypo या Hyper Ventilation के कारण हुऐ अथवा उनके दिमाग की कंडिशनिंग के कारण हुऐ आनुभाविक भ्रम कहा जा सकता है… 🙂
 
सही है :-)। इस तरह के आनुभाविक भ्रमों के आधार में दिमाग के अनुकूलन साथ ही, दिमाग़ की क्रियाशील कमजोरी भी है। दिमाग़ के काम करने की अपनी सीमाएं हैं। अनुभवों की सीमाओं, अज्ञान, और कई सारे नये अनुभवों के दिमाग़ में पूर्व-संदर्भ नहीं होने के कारण, व्यक्ति इन्हें मिलते-जुलते से काल्पनिक, अवास्तविक, अनुकूलित संदर्भों के साथ जोड़ लेता है। इन्हीं क्रियात्मक सीमाओं के कारण, दिमाग़ को आसानी से भ्रम हो सकता है, भ्रमित किया जा सकता है।
 
पर दिमाग को भ्रमित कर पाने की इस क्षमता का अभी तक नकारात्मक प्रयोग ही दिखा है, सकारात्मक प्रयोग के उदाहरण नहीं दिखते ज्यादा… 😦
 
भ्रम अपने आप में ही एक नकारात्मक अवधारणा है, तो जाहिरा तौर पर इसके नकारात्मक प्रयोग ही अस्तित्व में होंगे और दिखेंगे। 🙂 अभी के यथार्थ में, कुछ मानसिक समस्याओं के समाधानों में कुछ लोग इसका सकारात्मक सा प्रयोग कर लिया करते हैं। जैसे कि अधिक गंभीर से दिखते भ्रमों के ईलाज के लिए उसके समक्ष उसके मूल सरोकारों से अलग कम गंभीर और नये भ्रमों की रचना का ताना-बाना उसके सामने बुन देते हैं। मानसिक अपरिपक्व व्यक्ति नये भ्रमों में उलझ जाता है और पुराने भ्रमों से तात्कालिक राहत सी पा लेता है। 🙂

 

 

 

5 चीजें जो आपको नहीं करनी चाहिए और क्यों ? – By-kmsraj51

5 चीजें  जो  आपको  नहीं  करनी  चाहिए  और  क्यों ?

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1) दूसरे  की  बुराई  को  enjoy करना 

ये  तो  हम  बचपन  से  सुनते  आ  रहे  हैं  की  दुसरे  के  सामने  तीसरे  की  बुराई  नहीं  करनी  चाहिए , पर  एक और  बात  जो  मुझे  ज़रूरी  लगती  है  वो  ये  कि  यदि  कोई  किसी  और  की  बुराई  कर  रहा  है  तो  हमें  उसमे  interest नहीं  लेना  चाहिए  और  उसे  enjoy नहीं  करना  चाहिए . अगर  आप  उसमे  interest दिखाते  हैं  तो  आप  भी  कहीं  ना  कहीं  negativity को  अपनी  ओर  attract करते  हैं . बेहतर  तो  यही  होगा  की  आप  ऐसे  लोगों  से  दूर  रहे  पर  यदि  साथ  रहना  मजबूरी  हो  तो  आप  ऐसे  topics पर  deaf and dumb हो  जाएं  , सामने  वाला  खुद  बखुद  शांत  हो  जायेगा . For example यदि  कोई  किसी  का  मज़ाक  उड़ा रहा  हो  और  आप  उस पे  हँसे  ही  नहीं  तो  शायद  वो  अगली  बार  आपके  सामने  ऐसा  ना  करे . इस  बात  को  भी  समझिये  की  generally जो  लोग  आपके  सामने  औरों  का  मज़ाक  उड़ाते  हैं  वो  औरों  के  सामने  आपका  भी  मज़ाक  उड़ाते  होंगे . इसलिए  ऐसे  लोगों  को  discourage करना  ही  ठीक  है .

2) अपने  अन्दर  को  दूसरे  के  बाहर  से  compare करना 

इसे  इंसानी  defect कह  लीजिये  या  कुछ  और  पर  सच  ये  है  की  बहुत  सारे  दुखों  का  कारण  हमारा  अपना  दुःख  ना  हो  के  दूसरे   की  ख़ुशी  होती  है . आप  इससे  ऊपर  उठने  की  कोशिश  करिए , इतना  याद  रखिये  की  किसी  व्यक्ति  की  असलियत  सिर्फ  उसे  ही  पता  होती  है , हम  लोगों  के  बाहरी यानि नकली रूप  को  देखते  हैं  और  उसे  अपने  अन्दर के यानि की असली  रूप  से  compare करते  हैं . इसलिए  हमें लगता  है  की  सामने  वाला  हमसे  ज्यादा  खुश  है , पर  हकीकत  ये  है  की  ऐसे  comparison का  कोई  मतलब  ही  नहीं  होता  है . आपको  सिर्फ  अपने  आप  को  improve करते  जाना  है और व्यर्थ की comparison नहीं करनी है.

3) किसी  काम  के  लिए  दूसरों  पर  depend करना 

मैंने  कई  बार  देखा  है  की  लोग  अपने  ज़रूरी काम  भी  बस  इसलिए  पूरा  नहीं  कर  पाते क्योंकि  वो  किसी  और  पे  depend करते  हैं . किसी  व्यक्ति  विशेष  पर  depend मत  रहिये . आपका  goal; समय  सीमा  के  अन्दर  task का  complete करना  होना चाहिए  , अब  अगर  आपका  best  friend तत्काल  आपकी  मदद  नहीं  कर  पा  रहा  है  तो  आप  किसी  और  की  मदद  ले  सकते  हैं , या  संभव  हो  तो  आप  अकेले  भी  वो  काम  कर  सकते  हैं .

ऐसा  करने  से  आपका  confidence बढेगा , ऐसे  लोग  जो  छोटे  छोटे  कामों  को  करने  में  आत्मनिर्भर  होते  हैं  वही  आगे  चल  कर  बड़े -बड़े  challenges भी  पार  कर  लेते  हैं , तो  इस  चीज  को  अपनी  habit में  लाइए  : ये  ज़रूरी  है की  काम  पूरा  हो  ये  नहीं  की  किसी  व्यक्ति  विशेष  की  मदद  से  ही  पूरा  हो .

4) जो बीत गया  उस  पर  बार  बार  अफ़सोस  करना

अगर  आपके  साथ  past में  कुछ  ऐसा  हुआ  है  जो  आपको  दुखी  करता  है  तो  उसके  बारे  में  एक  बार  अफ़सोस  करिए…दो  बार  करिए….पर  तीसरी  बार  मत  करिए . उस  incident से जो सीख  ले  सकते  हैं  वो  लीजिये  और  आगे  का  देखिये . जो  लोग  अपना  रोना  दूसरों  के  सामने  बार-बार  रोते  हैं  उसके  साथ  लोग  sympathy दिखाने  की  बजाये उससे कटने  लगते  हैं . हर  किसी  की  अपनी  समस्याएं  हैं  और  कोई  भी  ऐसे  लोगों  को  नहीं  पसंद  करता  जो  life को  happy बनाने  की  जगह  sad बनाए . और  अगर  आप  ऐसा  करते  हैं  तो  किसी  और  से  ज्यादा  आप ही  का  नुकसान  होता  है . आप  past में  ही  फंसे  रह  जाते  हैं , और  ना  इस  पल  को  जी  पाते  हैं  और  ना  future के  लिए  खुद  को prepare कर  पाते  हैं .

5) जो  नहीं  चाहते  हैं  उसपर  focus करना 

सम्पूर्ण ब्रह्मांड में हम जिस चीज पर ध्यान केंद्रित करते हैं उस चीज में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती है.  इसलिए   आप  जो  होते  देखना  चाहते  हैं  उस  पर  focus करिए , उस  बारे  में  बात  करिए  ना  की  ऐसी  चीजें  जो  आप  नहीं  चाहते  हैं . For example: यदि  आप अपनी  income बढ़ाना  चाहते  हैं  तो  बढती  महंगाई  और  खर्चों  पर  हर  वक़्त  मत  बात  कीजिये  बल्कि  नयी  opportunities और  income generating ideas पर  बात  कीजिये .

 

इन  बातों पर  ध्यान  देने  से  आप  Self Improvement के  रास्ते  पर  और  भी  तेजी  से  बढ़ पायेंगे  और  अपनी  life को  खुशहाल  बना  पायेंगे . Always Think Positive.

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Aapka – kmsraj51

बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो – By-kmsraj51

बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो …………..

बड़ा सोचो

 

अत्यंत गरीब परिवार का एक  बेरोजगार युवक  नौकरी की तलाश में  किसी दूसरे शहर जाने के लिए  रेलगाड़ी से  सफ़र कर रहा था | घर में कभी-कभार ही सब्जी बनती थी, इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटीयां ही रखी थी |

आधा रास्ता गुजर जाने के बाद उसे भूख लगने लगी, और वह टिफिन में से रोटीयां निकाल कर खाने लगा | उसके खाने का तरीका कुछ अजीब था , वह रोटी का  एक टुकड़ा लेता और उसे टिफिन के अन्दर कुछ ऐसे डालता मानो रोटी के साथ कुछ और भी खा रहा हो, जबकि उसके पास तो सिर्फ रोटीयां थीं!! उसकी इस हरकत को आस पास के और दूसरे यात्री देख कर हैरान हो रहे थे | वह युवक हर बार रोटी का एक टुकड़ा लेता और झूठमूठ का टिफिन में डालता और खाता | सभी सोच रहे थे कि आखिर वह युवक ऐसा क्यों कर रहा था | आखिरकार  एक व्यक्ति से रहा नहीं गया और उसने उससे पूछ ही लिया की भैया तुम ऐसा क्यों कर रहे हो, तुम्हारे पास सब्जी तो है ही नहीं फिर रोटी के टुकड़े को हर बार खाली टिफिन में डालकर ऐसे खा रहे हो मानो उसमे सब्जी हो |

तब उस युवक  ने जवाब दिया, “भैया , इस खाली ढक्कन में सब्जी नहीं है लेकिन मै अपने मन में यह सोच कर खा रहा हू की इसमें बहुत सारा आचार है,  मै आचार के साथ रोटी खा रहा हू  |”

 फिर व्यक्ति ने पूछा , “खाली ढक्कन में आचार सोच कर सूखी रोटी को खा रहे हो तो क्या तुम्हे आचार का स्वाद आ रहा है ?”

“हाँ, बिलकुल आ रहा है , मै रोटी  के साथ अचार सोचकर खा रहा हूँ और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा है |”, युवक ने जवाब दिया|

अत्यंत गरीब परिवार का एक  बेरोजगार युवक  नौकरी की तलाश में  किसी दूसरे शहर जाने के लिए  रेलगाड़ी से  सफ़र कर रहा था | घर में कभी-कभार ही सब्जी बनती थी, इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटीयां ही रखी थी |

आधा रास्ता गुजर जाने के बाद उसे भूख लगने लगी, और वह टिफिन में से रोटीयां निकाल कर खाने लगा | उसके खाने का तरीका कुछ अजीब था , वह रोटी का  एक टुकड़ा लेता और उसे टिफिन के अन्दर कुछ ऐसे डालता मानो रोटी के साथ कुछ और भी खा रहा हो, जबकि उसके पास तो सिर्फ रोटीयां थीं!! उसकी इस हरकत को आस पास के और दूसरे यात्री देख कर हैरान हो रहे थे | वह युवक हर बार रोटी का एक टुकड़ा लेता और झूठमूठ का टिफिन में डालता और खाता | सभी सोच रहे थे कि आखिर वह युवक ऐसा क्यों कर रहा था | आखिरकार  एक व्यक्ति से रहा नहीं गया और उसने उससे पूछ ही लिया की भैया तुम ऐसा क्यों कर रहे हो, तुम्हारे पास सब्जी तो है ही नहीं फिर रोटी के टुकड़े को हर बार खाली टिफिन में डालकर ऐसे खा रहे हो मानो उसमे सब्जी हो |

तब उस युवक  ने जवाब दिया, “भैया , इस खाली ढक्कन में सब्जी नहीं है लेकिन मै अपने मन में यह सोच कर खा रहा हू की इसमें बहुत सारा आचार है,  मै आचार के साथ रोटी खा रहा हू  |”

 फिर व्यक्ति ने पूछा , “खाली ढक्कन में आचार सोच कर सूखी रोटी को खा रहे हो तो क्या तुम्हे आचार का स्वाद आ रहा है ?”

“हाँ, बिलकुल आ रहा है , मै रोटी  के साथ अचार सोचकर खा रहा हूँ और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा है |”, युवक ने जवाब दिया|

 उसके इस बात को आसपास के यात्रियों ने भी सुना, और उन्ही में से एक व्यक्ति बोला , “जब सोचना ही था तो तुम आचार की जगह पर मटर-पनीर सोचते, शाही गोभी सोचते….तुम्हे इनका स्वाद मिल जाता | तुम्हारे कहने के मुताबिक तुमने आचार सोचा तो आचार का स्वाद आया तो और स्वादिष्ट चीजों के बारे में सोचते तो उनका स्वाद आता | सोचना ही था तो भला  छोटा क्यों सोचे तुम्हे तो बड़ा सोचना चाहिए था |”

मित्रो इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की जैसा सोचोगे वैसा पाओगे | छोटी सोच होगी तो छोटा मिलेगा, बड़ी सोच होगी तो बड़ा मिलेगा | इसलिए जीवन में हमेशा बड़ा सोचो | बड़े सपने देखो , तो हमेश बड़ा ही पाओगे | छोटी सोच में भी उतनी ही उर्जा और समय खपत होगी जितनी बड़ी सोच में, इसलिए जब सोचना ही है तो हमेशा बड़ा ही सोचो|

झील बन जाओ ! – By-kmsraj51

झील बन जाओ ! By-kmsraj51

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एक बार एक नवयुवक किसी जेन मास्टर के पास पहुंचा .

“ मास्टर , मैं अपनी ज़िन्दगी से बहुत परेशान हूँ , कृपया इस परेशानी से  निकलने का उपाय बताएं !” , युवक बोला .

मास्टर बोले , “ पानी के ग्लास में एक मुट्ठी नमक डालो और उसे पीयो .”

युवक ने ऐसा ही किया .

“ इसका स्वाद कैसा लगा ?”, मास्टर ने पुछा।

“ बहुत ही खराब … एकदम खारा .” – युवक थूकते हुए बोला .

मास्टर मुस्कुराते हुए बोले , “एक बार फिर अपने हाथ में एक मुट्ठी नमक लेलो और मेरे पीछे -पीछे आओ . “

दोनों धीरे -धीरे आगे बढ़ने लगे और थोड़ी दूर जाकर स्वच्छ पानी से बनी एक झील के सामने रुक गए .

“ चलो , अब इस नमक को पानी में दाल दो .” , मास्टर ने निर्देश दिया।

युवक ने ऐसा ही किया .

“ अब इस झील का पानी पियो .” , मास्टर बोले .

युवक पानी पीने लगा …,

एक बार फिर मास्टर ने पूछा ,: “ बताओ इसका स्वाद कैसा है , क्या अभी भी तुम्हे ये खरा लग रहा है ?”

“नहीं , ये तो मीठा है , बहुत अच्छा है ”, युवक बोला .

मास्टर युवक के बगल में बैठ गए और उसका हाथ थामते हुए बोले , “ जीवन के दुःख बिलकुल नमक की तरह हैं ; न इससे कम ना ज्यादा . जीवन में दुःख की मात्र वही रहती है , बिलकुल वही . लेकिन हम कितने दुःख का स्वाद लेते हैं ये इस पर निर्भर करता है कि हम उसे किस पात्र में डाल रहे हैं . इसलिए जब तुम दुखी हो तो सिर्फ इतना कर सकते हो कि खुद को बड़ा कर लो …ग़्लास मत बने रहो झील बन जाओ .”

अच्छे लोग बुरे लोग ! – By-kmsraj51

अच्छे लोग बुरे लोग ! …………..

 

 गुरु जी

 

बहुत समय पहले की बात है. एक बार एक गुरु जी गंगा किनारे स्थित किसी गाँव में अपने शिष्यों के साथ स्नान कर रहे थे .

तभी एक राहगीर आया और उनसे पूछा , ” महाराज, इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं, दरअसल मैं अपने मौजूदा निवास स्थान से कहीं और जाना चाहता हूँ ?”

गुरु जी बोले, ” जहाँ तुम अभी रहते हो वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं ?”

” मत पूछिए महाराज , वहां तो एक से एक कपटी, दुष्ट और बुरे लोग बसे हुए हैं.”, राहगीर बोला.

गुरु जी बोले, ” इस गाँव में भी बिलकुल उसी तरह के लोग रहते हैं…कपटी, दुष्ट, बुरे…” और इतना सुनकर राहगीर आगे बढ़ गया.

कुछ समय बाद एक दूसरा राहगीर वहां से गुजरा. उसने भी गुरु जी से वही प्रश्न पूछा , ”

मुझे किसी नयी जगह जाना है, क्या आप बता सकते हैं कि इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं ?”

” जहाँ तुम अभी निवास करते हो वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं?”, गुरु जी ने इस राहगीर से भी वही प्रश्न पूछा.

” जी वहां तो बड़े सभ्य , सुलझे और अच्छे लोग रहते हैं.”, राहगीर बोला.

” तुम्हे बिलकुल उसी प्रकार के लोग यहाँ भी मिलेंगे…सभ्य, सुलझे और अच्छे ….”, गुरु जी ने अपनी बात पूर्ण की और दैनिक कार्यों में लग गए. पर उनके शिष्य ये सब देख रहे थे और राहगीर के जाते ही उन्होंने पूछा , ” क्षमा कीजियेगा गुरु जी पर आपने दोनों राहगीरों को एक ही स्थान के बारे में अलग-अलग बातें क्यों बतायी.

बहुत समय पहले की बात है. एक बार एक गुरु जी गंगा किनारे स्थित किसी गाँव में अपने शिष्यों के साथ स्नान कर रहे थे .

तभी एक राहगीर आया और उनसे पूछा , ” महाराज, इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं, दरअसल मैं अपने मौजूदा निवास स्थान से कहीं और जाना चाहता हूँ ?”

गुरु जी बोले, ” जहाँ तुम अभी रहते हो वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं ?”
” मत पूछिए महाराज , वहां तो एक से एक कपटी, दुष्ट और बुरे लोग बसे हुए हैं.”, राहगीर बोला.

गुरु जी बोले, ” इस गाँव में भी बिलकुल उसी तरह के लोग रहते हैं…कपटी, दुष्ट, बुरे…” और इतना सुनकर राहगीर आगे बढ़ गया.

कुछ समय बाद एक दूसरा राहगीर वहां से गुजरा. उसने भी गुरु जी से वही प्रश्न पूछा , ”
मुझे किसी नयी जगह जाना है, क्या आप बता सकते हैं कि इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं ?”

” जहाँ तुम अभी निवास करते हो वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं?”, गुरु जी ने इस राहगीर से भी वही प्रश्न पूछा.

” जी वहां तो बड़े सभ्य , सुलझे और अच्छे लोग रहते हैं.”, राहगीर बोला.

” तुम्हे बिलकुल उसी प्रकार के लोग यहाँ भी मिलेंगे…सभ्य, सुलझे और अच्छे ….”, गुरु जी ने अपनी बात पूर्ण की और दैनिक कार्यों में लग गए. पर उनके शिष्य ये सब देख रहे थे और राहगीर के जाते ही उन्होंने पूछा , ” क्षमा कीजियेगा गुरु जी पर आपने दोनों राहगीरों को एक ही स्थान के बारे में अलग-अलग बातें क्यों बतायी.

गुरु जी गंभीरता से बोले, ” शिष्यों आमतौर पर हम चीजों को वैसे नहीं दखते जैसी वे हैं, बल्कि उन्हें हम ऐसे देखते हैं जैसे कि हम खुद हैं. हर जगह हर प्रकार के लोग होते हैं यह हम पर निर्भर करता है कि हम किस तरह के लोगों को देखना चाहते हैं.”

शिष्य उनके बात समझ चुके थे और आगे से उन्होंने जीवन में सिर्फ अच्छाइयों पर ही ध्यान केन्द्रित करने का निश्चय किया.

स्वामी जी का उपदेश – By-kmsraj51

स्वामी जी का उपदेश …… समर्थ स्वामी रामदासजी …………………

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एक बार समर्थ स्वामी रामदासजी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी

Inspirational Hindi Story

स्वामी रामदासजी

– “जय जय रघुवीर समर्थ !” घर से महिला बाहर आयी। उसने उनकी झोलीमे भिक्षा डाली और कहा, “महात्माजी, कोई उपदेश दीजिए !”

स्वामीजी बोले, “आज नहीं, कल दूँगा।”

दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन: उस घर के सामने आवाज दी – “जय जय रघुवीर समर्थ !”उस घर की स्त्रीने उस दिन खीर बनायीं थी, जिसमे बादाम-पिस्ते भी डाले थे।वह खीर का कटोरा लेकर बाहर आयी। स्वामीजीने अपना कमंडल आगे कर दिया। वह स्त्री जब खीर डालने लगी, तो उसने देखा कि कमंडल में गोबर और कूड़ा भरा पड़ा है। उसके हाथ ठिठक गए। वह बोली, “महाराज ! यह कमंडल तो गन्दा है।”

स्वामीजी बोले, “हाँ, गन्दा तो है, किन्तु खीर इसमें डाल दो।” स्त्री बोली, “नहीं महाराज, तब तो खीर ख़राब हो जायेगी। दीजिये यह कमंडल, में इसे शुद्ध कर लाती हूँ।”

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स्वामीजी बोले, मतलब जब यह कमंडल साफ़ हो जायेगा, तभी खीर डालोगी न ?”

स्त्री ने कहा : “जी महाराज !”

स्वामीजी बोले, “मेरा भी यही उपदेश है। मन में जब तक चिन्ताओ का कूड़ा-कचरा और बुरे संस्करो का गोबर भरा है, तब तक उपदेशामृत का कोई लाभ न होगा। यदि उपदेशामृत पान करना है, तो प्रथम अपने मन को शुद्ध करना चाहिए, कुसंस्कारो का त्याग करना चाहिए, तभी सच्चे सुख और आनन्द की प्राप्ति होगी।”

डरो मत ! स्वामी विवेकानंद प्रेरक प्रसंग – By-kmsraj51

डरो मत ! स्वामी विवेकानंद प्रेरक प्रसंग …………..

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स्वामी  विवेकानंद  बचपन  से  ही  निडर  थे , जब  वह  लगभग  8 साल  के  थे  तभी  से  अपने  एक  मित्र  के  यहाँ  खेलने  जाया  करते  थे , उस  मित्र  के  घर  में  एक  चम्पक  पेड़  लगा  हुआ  था . वह  स्वामी  जी  का  पसंदीदा  पेड़  था  और  उन्हें  उसपर  लटक कर  खेलना  बहुत  प्रिय  था .

रोज  की  तरह  एक  दिन  वह  उसी  पेड़  को  पकड़  कर  झूल  रहे  थे  की  तभी   मित्र  के  दादा  जी  उनके  पास  पहुंचे , उन्हें  डर था  कि  कहीं  स्वामी  जी  उसपर  से  गिर  न  जाए  या  कहीं  पेड़  की  डाल  ही  ना  टूट  जाए  , इसलिए  उन्होंने  स्वामी  जी  को  समझाते  हुआ  कहा , “ नरेन्द्र   ( स्वामी  जी  का  नाम ) , तुम  इस  पेड़  से  दूर  रहो  , अब  दुबारा  इसपर  मत  चढना ”

“क्यों  ?” , नरेन्द्र  ने  पूछा .

“ क्योंकि  इस  पेड़  पर  एक  ब्रह्म्दैत्य  रहता  है  , वो रात  में  सफ़ेद  कपडे  पहने  घूमता  है , और   देखने  में  बड़ा  ही  भयानक  है .” उत्तर  आया .

नरेन्द्र  को  ये  सब  सुनकर  थोडा  अचरज  हुआ  , उसने दादा जी  से  दैत्य  के  बारे  में  और  भी  कुछ  बताने  का  आग्रह  किया  .

दादा जी  बोले ,”  वह  पेड़  पर  चढ़ने  वाले  लोगों  की  गर्दन  तोड़  देता  है .”

नरेन्द्र  ने  ये  सब  ध्यान  से  सुना  और  बिना  कुछ  कहे  आगे  बढ़  गया . दादा  जी  भी  मुस्कुराते  हुए  आगे  बढ़  गए , उन्हें  लगा  कि  बच्चा  डर  गया  है . पर  जैसे  ही  वे  कुछ  आगे  बढे  नरेन्द्र  पुनः  पेड़  पर  चढ़  गया  और  डाल  पर  झूलने  लगा .

यह  देख  मित्र  जोर  से  चीखा , “ अरे  तुमने  दादा  जी  की  बात  नहीं  सुनी , वो  दैत्य  तुम्हारी  गर्दन  तोड़  देगा .”

बालक नरेन्द्र  जोर  से  हंसा  और  बोला   , “मित्र डरो मत ! तुम  भी  कितने  भोले  हो  ! सिर्फ  इसलिए  कि  किसी  ने  तुमसे  कुछ  कहा  है  उसपर  यकीन  मत  करो ; खुद  ही  सोचो  अगर  दादा  जी  की  बात  सच  होती  तो  मेरी  गर्दन  कब  की  टूट चुकी  होती .”

सचमुच  स्वामी विवेकानंद  बचपन  से  ही  निडर  और  तीक्ष्ण  बुद्धि  के  स्वामी  थे .

लकड़ी का कटोरा – By-kmsraj51

लकड़ी का कटोरा …………………………

एक  वृद्ध  व्यक्ति अपने  बहु – बेटे  के  यहाँ  शहर  रहने  गया . उम्र  के  इस  पड़ाव  पर   वह  अत्यंत  कमजोर  हो  चुका  था , उसके  हाथ  कांपते  थे  और  दिखाई  भी  कम   देता  था .  वो एक छोटे से घर में रहते थे , पूरा  परिवार  और  उसका  चार  वर्षीया  पोता  एक  साथ  डिनर  टेबल  पर  खाना  खाते  थे . लेकिन  वृद्ध  होने  के  कारण  उस  व्यक्ति  को खाने  में  बड़ी  दिक्कत  होती  थी . कभी  मटर  के  दाने  उसकी  चम्मच  से  निकल  कर  फर्श  पे  बिखर  जाते  तो  कभी  हाँथ  से  दूध  छलक   कर  मेजपोश   पर  गिर  जाता  .

बहु -बेटे   एक -दो   दिन   ये   सब   सहन   करते   रहे   पर   अब   उन्हें  अपने  पिता  की  इस   काम  से  चिढ  होने  लगी . “ हमें  इनका  कुछ  करना  पड़ेगा ”, लड़के  ने  कहा . बहु  ने  भी  हाँ  में  हाँ  मिलाई  और  बोली ,” आखिर  कब तक  हम  इनकी  वजह  से  अपने  खाने  का  मजा किरकिरा रहेंगे , और  हम  इस  तरह  चीजों  का  नुक्सान  होते  हुए  भी  नहीं  देख  सकते .”

अगले दिन जब  खाने  का  वक़्त  हुआ  तो  बेटे  ने  एक  पुरानी  मेज  को  कमरे  के  कोने  में  लगा  दिया  , अब बूढ़े पिता  को  वहीँ  अकेले  बैठ  कर  अपना  भोजन  करना  था .  यहाँ  तक की  उनके  खाने  के  बर्तनों   की  जगह  एक  लकड़ी  का  कटोरा  दे  दिया  गया  था  , ताकि  अब  और  बर्तन  ना  टूट -फूट  सकें . बाकी  लोग  पहले की तरह ही आराम   से   बैठ  कर  खाते  और  जब  कभी -कभार  उस  बुजुर्ग  की  तरफ   देखते  तो  उनकी  आँखों  में  आंसू  दिखाई  देते  . यह देखकर भी बहु-बेटे का मन नहीं पिघलता ,वो  उनकी  छोटी  से  छोटी  गलती  पर  ढेरों  बातें  सुना  देते .  वहां  बैठा  बालक  भी  यह  सब  बड़े  ध्यान  से  देखता  रहता , और  अपने  में  मस्त   रहता .

एक  रात  खाने  से  पहले  , उस  छोटे  बालक  को  उसके  माता -पिता  ने  ज़मीन  पर  बैठ  कर  कुछ  करते  हुए  देखा ,  ”तुम  क्या  बना  रहे  हो ?”   पिता ने  पूछा ,

बच्चे  ने  मासूमियत  के  साथ  उत्तर  दिया , “ अरे  मैं  तो  आप  लोगों  के  लिए  एक  लकड़ी  का  कटोरा  बना  रहा  हूँ , ताकि  जब  मैं बड़ा हो  जाऊं  तो  आप  लोग  इसमें  खा  सकें .” ,और  वह  पुनः  अपने  काम  में  लग  गया . पर  इस  बात  का  उसके  माता -पिता  पर  बहुत  गहरा  असर  हुआ  ,उनके  मुंह  से  एक  भी  शब्द  नहीं  निकला  और आँखों  से  आंसू  बहने  लगे . वो  दोनों  बिना  बोले  ही  समझ  चुके  थे  कि  अब  उन्हें  क्या  करना  है . उस  रात  वो  अपने  बूढ़े पिता  को   वापस  डिनर  टेबल  पर  ले  आये , और  फिर  कभी  उनके  साथ  अभद्र  व्यवहार  नहीं  किया .

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20 सबसे प्रसिद्ध उद्धरण – By~kmsraj51…..

20 सबसे प्रसिद्ध उद्धरण …………

20 Famous Quotes ………………………..

 

Quote 1: Early to bed and early to rise, Makes a man healthy, wealthy, and wise.

In Hindi: जल्दी सोना और जल्दी उठना इंसान को स्वस्थ ,समृद्ध और बुद्धिमान बनाता है.

Benjamin Franklin बेंजामिन फ्रैंकलिन

Quote 2: Never leave that till tomorrow which you can do to-day.

In Hindi: कभी भी जो काम आप आज कर सकते हैं उसे कल पर मत टालिए.

Benjamin Franklin बेंजामिन फ्रैंकलिन

Quote 3: Knowledge is power.

In Hindi: ज्ञान शक्ति है.

Francis Bacon फ्रैंसिस बैकन

Quote 4: Time is money.

In Hindi: समय धन है.

Benjamin Franklin बेंजामिन फ्रैंकलिन 

Quote 5: The child is father of the man.

In Hindi: बच्चा आदमी का बाप है..

William Wordsworth विल्लियम वर्डस्वर्थ

Quote 6: A thing of beauty is a joy forever.

In Hindi: सौंदर्य की एक चीज हमेशा का आनंद है.

John Keats जॉन कीट्स

Quote 7: To err is human, to forgive divine.

In Hindi: गलती करना मानवीय है, क्षमा करना ईश्वरीय.

Alexander Pope एलेक्जेंडर  पोप

Quote 8: God helps them that help themselves.

In Hindi: भगवान उसकी मदद करता है जो खुद अपनी मदद करता है.

Benjamin Franklin बेंजामिन  फ्रैंकलिन 

Quote 9: An eye for an eye only ends up making the whole world blind.

In Hindi: आँख के बदले में आँख पूरे विश्व को अँधा बना देगी.

Mahatma Gandhi  महात्मा गाँधी

Quote 10: Be the change that you want to see in the world.

In Hindi: खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं.

Mahatma Gandhi  महात्मा गाँधी

Quote 11: No one can make you feel inferior without your consent.

In Hindi: आपकी इज़ाज़त के बिना कोई आपको नीचा नहीं दिखा सकता है.

Eleanor Roosevelt ईलेनौर रूजवेल्ट 

Quote 12: If you tell the truth, you don’t have to remember anything.

In Hindi: यदि आप सच बोलते हैं तो आपको कुछ याद रखने की ज़रुरत नहीं रहती.

Mark Twain मार्क ट्वैन

Quote 13: What’s in a name? That which we call a rose by any other name would smell as sweet.

In Hindi:  नाम में क्या रखा है? जिसे हम गुलाब कहते हैं उसे किसी और नाम से पुकारें तो भी वो उतना ही अच्छा महकेगा .

William Shakespeare विल्लियम शेक्सपीयर

Quote 14: Give a man a fish and you feed him for a day. Teach a man to fish and you feed him for a lifetime.

In Hindi: किसी आदमी को एक मछली दीजिये और आप एक दिन के लिए उसका पेट भरेंगे. किसी आदमी को मछली पकड़ना सीखा दीजिये और आप जीवन भर के लिए उसका पेट भर देंगे.

Chinese Proverb चाइनीज कहावत

Quote 15: Choose a job you love, and you will never have to work a day in your life.

In Hindi: उस काम का चयन कीजिये जिसे आप पसंद करते हों, फिर आप पूरी ज़िन्दगी एक दिन भी काम नहीं करंगे.

Confucius कन्फ्यूशियस

Quote 16: Three things cannot be long hidden: the sun, the moon, and the truth.

In Hindi: तीन चीजें अधिक समय तक नहीं छुप सकती, सूरज, चंद्रमा और सत्य.

Lord Buddha  भगवान गौतम बुद्ध

Quote 17: It’s not the size of the dog in the fight, it’s the size of the fight in the dog.

In Hindi: लड़ाई में कुत्ते का आकर मायने नहीं रखता, कुत्ते मं लड़ाई का आकार मायने रखता है.

Mark Twain मार्क  ट्वैन

Quote 18: The word impossible is not in my dictionary.

In Hindi: मेरे शब्दकोष में असंभव शब्द नहीं है.

Napoleon Bonaparte  नेपोलियन बोनापार्ट

Quote 19: It is not length of life, but depth of life.

In Hindi: जीवन की लम्बाई नहीं , गहराई मायने रखती है.

Ralph Waldo Emerson राल्फ वाल्डो इमर्सन

Quote 20:  Winners don’t do different things, they do things differently.

In Hindi: जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को  अलग तरह से करते हैं.

Shiv Khera शिव खेड़ा

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कहावतें मुहावरे और वाक्यांश By- kmsraj51

हिंदी और अंग्रेजी में अर्थ के साथ नीतिवचन कहावतें मुहावरे और वाक्यांश …

Proverbs Sayings Idioms and Phrases With Meaning in Hindi and English ……

 

………………………………………… By-kmsraj51 ………………………………………………………

 

Proverb 1:  Might is right.

Hindi Equivalent:  जिसकी  लाठी  उसकी  भैंस.

Meaning:  जो  ताकतवर  होता  है  उसी  की  बात  माननी  पड़ती  है .

Proverb 2:  A fog cannot be dispelled by a fan .

Hindi Equivalent:  ओस  चाटने  से  प्यास  नहीं  बुझती .

Meaning:  बड़े  काम  के  लिए  बड़ा  प्रयत्न  करना  पड़ता  है .

Proverb 3:  An empty vessel sounds much .

Hindi Equivalent:  थोथा  चना  बाजे  घना . / अधजल गगरी छलकत जाय.

Meaning:  जिसको  कम  ज्ञान  होता  है  वो  दिखावा  करने  के  लिए  अधिक  बोलता  है .

Proverb 4:  Birds of same feather flock together.

Hindi Equivalent:  चोर – चोर  मौसेरे भाई . / एक ही थैली के चट्टे-बट्टे.

Meaning:  एक  जैसे  लोग  एक  साथ  रहते  हैं .

Proverb 5:  Do evil & look for like.

Hindi Equivalent:  कर बुरा  तो  होय  बुरा.  / जैसी  करनी  वैसी  भरनी.

Meaning:  जो  जैसा  करता  है  उसके  साथ  वैसा  ही  होता  है .

Proverb 6:  Good mind, good find.

Hindi Equivalent:  आप  भले  तो  जग  भला .

Meaning:  जो  खुद  अच्छा  है  उसके  लिए  सब  अच्छा  है .

Proverb 7:  It takes two to make a quarrel.

Hindi Equivalent:  एक  हाथ  से  ताली  नहीं  बजती .

Meaning:   जब  दो  लोगो  में  विवाद होता  है  तो  दोनों  की  ही  कुछ  न  कुछ  गलती  होती  है .

Proverb 8:  Barking dogs seldom bite .

Hindi Equivalent:  जो  गरजते  हैं  वो  बरसते  नहीं .

Meaning:  जो  ज्यादा  बोलते  हैं  वे  कुछ  करते  नहीं  हैं .

Proverb 9:  Avarice is root of all evils.

Hindi Equivalent: लालच  बुरी  बला  है .

Meaning: लालच  करना  बुरी  बात  है .

Proverb 10:  Gather thistles & expect pickles .

Hindi Equivalent:  बोए पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय .

Meaning:  जैसा  कर्म  करोगे  वैसा  फल  मिलेगा .

Proverb 11:  Drowning man catches at straw.

Hindi Equivalent:  डूबते  को  तिनके  का  सहारा .

Meaning: मुसीबत  में  पड़ा  व्यक्ति  उससे  निकलने  का  हर  एक  प्रयास  करता  है .

Proverb 12:  As the king so are the subjects.

Hindi Equivalent:  जैसा  राजा वैसी  प्रजा .

Meaning:  जैसा  नेत्रित्व  होगा  वैसे  ही  अनुयायी  होंगे .

Proverb 13:  A honey tongue , a heart of gall.

Hindi Equivalent:  मुख  में  राम  बगल  में  छूरी .

Meaning:  ऊपर  से  चिकनी -चुपड़ी  बातें  करना  और  अन्दर  से  बुरे  विचार  रखना .

Proverb 14:  Pure gold does not fear the flame.

Hindi Equivalent:  सांच  को  आंच क्या .

Meaning:  जो  सच्चा  होता  है  उसे  किसी  बात  का  डर  नहीं  होता  है .

Proverb 15:  Great cry little wool.

Hindi Equivalent:  ऊंची  दूकान  फीके  पकवान ./ नाम  बड़े  और  दर्शन  छोटे.

Meaning:  देखने  में  अच्छा  पर  असलियत  में  सामान्य  होना.

Proverb 16:  A drop in the Ocean .

Hindi Equivalent:  ऊँट  के  मुंह  में  जीरा .

Meaning:  जहाँ  ज्यादा  ज़रुरत  हो  वहां  बहुत  कम  होना .

Proverb 17:  A nine days wonder .

Hindi Equivalent:  चार  दिन  की  चांदनी  फिर  अँधेरी  रात .

Meaning:  थोड़े  समय  के  लिए  सबकुछ  बहुत  अच्छा  होना .

Proverb 18:  Crying in wilderness .

Hindi Equivalent:  भैंस  के  आगे  बीन  बजाना . / मूर्ख के आगे रोए अपने नैन खोए.

Meaning:  किसी  मूर्ख  को  अपनी  बात  समझाना .

Proverb 19:  Do good & cast in to the river.

Hindi Equivalent:  नेकी  कर  दरिया  में  डाल .

Meaning:  भलाई  करने  के  बदले  में  कुछ  अपेक्षा  न  रखना .

Proverb 20:  Diamonds cut diamonds.

Hindi Equivalent:  लोहा  लोहे  को  काटता है .

Meaning:  शक्तिशाली  को  शक्तिशाली  ही  हरा  सकता  है .

Proverb 21:  A burnt child dreads the fire. / Once bitten twice shy.

Hindi Equivalent:  दूध  का  जल  छाछ  को  भी  फूंक – फूंक  कर  पीता  है .

Meaning:  एक  बार गलती  हो  जाने  पर  व्यक्ति  सावधान  हो  जाता  है .

Proverb 22:  A figure among ciphers.

Hindi Equivalent:  अन्धो  में  काने  राजा .

Meaning:  कम  बुद्धिमान  लोगों  में  अधिक  बुद्धिमान  होना .

Proverb 23:  A little knowledge is a dangerous thing ./ Half knowledge is dangerous.

Hindi Equivalent:  नीम हकीम ख़तरा-ए-जान

Meaning:  चीजों  की  अधूरी  जानकारी  होना  खतरनाक  हो  सकता  है .

Proverb 24:  A wolf in lamb’s clothing.

Hindi Equivalent: भेड़ की खाल में भेड़िया.

Meaning:  ऊपर  से  भला  और  अन्दर  से  बुरा .

Proverb 25:  All is well that ends well.

Hindi Equivalent: अंत  भला  तो  सब  भला .

Meaning:  आखिर  में  क्या  होता  है  वही  मायने  रखता  है .

Proverb 26:  Grass on the other side always looks greener.

Hindi Equivalent: दूर  के  ढोल  सुहावने  लगते  हैं.

Meaning: दूर  से  चीजें  अच्छी  लगती  हैं . /  जो  दूसरों  के  पास  होता  है  वो  अधिक  महत्त्व  का  लगता  है .

Proverb 27:  A bad workman blames his tools.

Hindi Equivalent: नाच न जाने आंगन टेढ़ा.

Meaning: अपनी कमी से कुछ  ना  कर  पाने  का  दोष  अन्य  चीजों  पर  देना .

Proverb 28:  All that glitters is not gold.

Hindi Equivalent: हर चमकने  वाली  चीज सोना  नहीं  होती .

Meaning: बाहरी  रंग -रूप  से  प्रभावित  नहीं  होना  चाहिए .

Proverb 29: You cannot live in Rome and fight with the Pope.

Hindi Equivalent: जल में रहकर मगर से बैर ठीक नहीं.

Meaning: अपने  क्षेत्र  के  ताकतवर  व्यक्ति  से  दुश्मनी  नहीं  करनी  चाहिए.

Proverb 30:  Tit for tat.

Hindi Equivalent: जैसे को तैसा.

Meaning:  अच्छे  के  साथ  अच्छा  और  बुरे  के  साथ  बुरा  करना .

Proverb 31:  A friend in need is a friend in deed.

Hindi Equivalent: अपना वहि जॊ आवे काम्.

Meaning: मुसीबत में  काम  आने  वाला  व्यक्ति  ही  सच्चा  मित्र  होता  है .

Proverb 32:  Don’t look a gift horse in the mouth.

Hindi Equivalent: दान की बछिया के दांत नहीं देखे जाते.

Meaning: दान  में  मिली  चीजों  में  कमी  नहीं  निकालनी  चाहिए .

Proverb 33:  The pot is calling the kettle black ”

Hindi Equivalent: उल्टा चोर कोतवाल को डांटे.

Meaning:  खुद  गलती  करना  और  दूसरे   को  भला  बुरा  कहना .

Proverb 34: As you sow, so shall you reap.

Hindi Equivalent: जैसा  बोओगे वैसा काटोगे.

Meaning:  कर्म  के  हिसाब  से ही  फल  मिलता  है .

Proverb 35:  More to it than meets the eye

Hindi Equivalent: दाल  में  काला.

Meaning: कुछ  गड़बड़  होना .

Proverb 36:  Between the devil and the deep sea.

Hindi Equivalent: आगे  कुआँ  पीछे  खाई.  / आसमान से गिरा खजूर में अटका.

Meaning : हर तरफ मुसीबत होना.

Proverb 37: Speak/Think of the devil and the devil is here.

Hindi Equivalent: नाम लिया और शैतान हाजिर .

Meaning : किसी के बारे में सोचते/बोलते  ही उसका सामने आ जाना.

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Proverb 38:  To turn tail ./ To show a clear pairs of heels.

Hindi Equivalent: दुम दिखाकर भाग जाना.

Meaning : डर के भाग जाना .

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Proverb 39: When in Rome, do as Romans do.

Hindi Equivalent:जैसा देश वैसा भेष .

Meaning : जगह के अनुसार रहना चाहिए.

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Proverb 40: It is no use crying over spilt milk.

Hindi Equivalent: अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत.

Meaning :  कुछ हो जाने के बाद उस पर पछताना नहीं चाहिए.

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Proverb 41:  A black sheep.

Hindi Equivalent: घर का भेदी लंका ढाहे.

Meaning : करीबी व्यक्ति दुश्मन के साथ मिल कर अधिक नुक्सान पहुंचा सकता है.

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Aapka kmsraj51 …. Communication ID: kmsraj51@yahoo.in

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मित्रता पर महान लोगों के विचार।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ मित्रता पर महान लोगों के विचार। ϒ

Quote 1 :  A friend to all is a friend to none.

In Hindi : जो सबका मित्र होता है वो किसी का मित्र नहीं होता है।

Aristotle अरस्तु 

Quote 2 : A single rose can be my garden… a single friend, my world.

In Hindi : एक अकेला गुलाब मेरा बगीचा हो सकता है, एक अकेला दोस्त मेरी दुनिया।

Leo Buscaglia लिओ बुस्कग्लिया

Quote 3:  A friend is one who knows you and loves you just the same.

In Hindi : मित्र वो होता है जो आपको जाने और आपको उसी रूप में चाहे।

Elbert Hubbard  अल्बर्ट हब्बार्ड

Quote 4: A friendship founded on business is better than a business founded on friendship.

In Hindi : व्यवसाय पर आधारित दोस्ती, दोस्ती पे आधारित व्यवसाय से बेहतर है।

John D. Rockefeller  जॉन डी रॉकफेलर

Quote 5 : A true friend never gets in your way unless you happen to be going down.

In Hindi :  एक सच्चा दोस्त कभी आपके रास्ते में नहीं आता जब तक कि आप गलत रास्ते पे ना जा रहे हों।

Arnold H. Glasow  अर्नोल्ड एच ग्लासो

Quote 6:  An insincere and evil friend is more to be feared than a wild beast; a wild beast may wound your body, but an evil friend will wound your mind.

 In Hindi :  किसी जंगली जानवर की अपेक्षा एक कपटी और दुष्ट मित्र से  ज्यादा डरना चाहिए, जानवर तो बस आपके शरीर को नुक्सान पहुंचा सकता है, पर एक बुरा मित्र आपकी बुद्धि को नुक्सान पहुंचा सकता है।

Lord Buddha भागवान बुद्ध

Quote 7 :  Be courteous to all, but intimate with few, and let those few be well tried before you give them your confidence.

In Hindi :  सभी के साथ विनम्र रहिये, पर कुछ के साथ ही घनिष्ठता बनाइये, और इन कुछ को भी पूर्ण विश्वास करने से पहले अच्छी तरह से जांच लीजिये।

George Washington  जार्ज वाशिंगटन

Quote 8 : Friendship is a single soul dwelling in two bodies.

In Hindi :  मित्रता दो शरीरों में रहने वाली एक आत्मा है।

Aristotle अरस्तु

Quote 9 : Don’t walk behind me; I may not lead. Don’t walk in front of me; I may not follow. Just walk beside me and be my friend.

In Hindi :  मेरे पीछे मत चलो, हो सकता है मैं नेत्रित्व ना कर पाऊं. मेरे आगे मत चलो हो सकता है मैं अनुगमन ना कर सकूँ. बस मेरे साथ चलो मेरे मित्र बनकर।

Albert Camus  अल्बर्ट  केमस

Quote 10 : Friends and good manners will carry you where money won’t go.

In Hindi : दोस्त और शिष्टाचार आपको वहां ले जायेंगे जहाँ धन नहीं ले जा पायेगा।

Margaret Walker  मार्गरेट वाकर

Quote 11: Be slow to fall into friendship; but when thou art in, continue firm and constant.

In Hindi : मित्रता  करने  में  धीमे  रहिये, पर  जब  कर  लीजिये  तो उसे मजबूती से  निभाइए  और  उसपर स्थिर रहिये।

Socrates सुकरात

Quote 12: Be slow in choosing a friend, slower in changing.

In Hindi : मित्र बनाने में धीमे रहिये और बदलने में और भी।

Benjamin Franklin  बेंजामिन  फ्रैंकलिन

Quote 13 : It’s the friends you can call up at 4 a.m. that matter.

In Hindi : वो मित्र जिन्हें अप सुबह चार बजे फोन कर सकते हैं मायने रखते हैं।

Marlene Dietrich मार्लीन दाय्त्रीच

Quote 14 : The language of friendship is not words but meanings.

In Hindi : मित्रता की भाषा शब्द नहीं अर्थ है।

Henry David Thoreau हेनरी डेविड थोरेओ

Quote 15 : Friendship… is not something you learn in school. But if you haven’t learned the meaning of friendship, you really haven’t learned anything.

In Hindi : दोस्ती कुछ ऐसा नहीं है जो आप स्कूल में सीख सकते हैं। लेकिन यदि आपने दोस्ती का मतलब नहीं सीखा है तो वास्तविकता में आपने कुछ भी नहीं सीखा।

Muhammad Ali मोहम्मद अली

Quote 16 : A true friend is someone who is there for you when he’d rather be anywhere else.

In Hindi : एक सच्चा मित्र वो है जो उस वक़्त आपके साथ खड़ा है जब उसे कहीं और होना चाहिए था।

Len Wein लेन वेन

Quote 17 : A true friend , advises justly, assists readily, adventures boldly, takes all patiently, defends courageously, and continues a friend unchangeably.

In Hindi : एक सच्चा दोस्त, उचित सलाह देता है, सहजता से मदद करता है, आसानी से जोखिम उठता है, सबकुछ धैर्यपूर्वक सहता है, हिम्मत से बचाव करता है और बिना बदले दोस्ती बरक़रार रहता है।

William Penn विलीयम पेन

Quote 18 : Lots of people want to ride with you in the limo, but what you want is someone who will take the bus with you when the limo breaks down.

In Hindi : बहुत सारे लोग आपके साथ शानदार गाड़ियों में घूमना चाहते हैं, पर आप चाहते हैं की कोई ऐसा हो जो गाड़ी खराब हो जाने पर आपके साथ बस में जाने को तैयार रहे।

Oprah Winfrey ओपरा विनफ्रे

Quote 19 : Friendship is unnecessary, like philosophy, like art… It has no survival value; rather it is one of those things that give value to survival.

In Hindi : मित्रता अनावश्यक है, दर्शन और कला की तरह … इसके जीवन का कोई महत्त्व नहीं है; बल्कि ये उन चीजों में है जो जीवन को महत्त्व  देता है।

C. S. Lewis सी.यस. लुईस

Quote 20 : But friendship is precious, not only in the shade, but in the sunshine of life, and thanks to a benevolent arrangement the greater part of life is sunshine.

In Hindi : 3लेकिन दोस्ती कीमती है, केवल मुश्किल में नहीं, बल्कि जीवन के सुखद क्षणों में भी, और धन्यवाद है उस उदार व्यवस्था को कि जीवन का बड़ा हिस्सा सुखद होता है।

Thomas Jefferson थोमस जेफ़रसन

Quote 21 : I value the friend who for me finds time on his calendar, but I cherish the friend who for me does not consult his calendar.

In Hindi : मैं उस दोस्त को महत्त्व देता हूँ जो अपने कैलेण्डर परमेरे लिए वक़्त निकालता है, लेकिन मैं उसे दोस्त को संजोंता हूँ जो मेरे लिए अपना कैलेण्डर नहीं देखता।

Robert Brault रोबर्ट ब्रौल्ट

Quote 22 : A friend is someone who gives you total freedom to be yourself.

In Hindi : दोस्त वो होता है जो आपको आप जैसे हैं वैसा होने की पूरी आज़ादी देता है।

Jim Morrison जिम मोरिसन

Quote 23 : I don’t need a friend who changes when I change and who nods when I nod; my shadow does that much better.

In Hindi : मैं ऐसा दोस्त नहीं चाहता जो जब मैं बदलूं तब वो बदले और जब मैं सर हिलाऊं तो वो सर हिलाए; मेरी परछाईं ये काम कहीं बेहतर कर सकती है।

Plutarch प्लूटार्क

Quote 24 : True friends stab you in the front.

In Hindi : सच्चे दोस्त सामने से छुरा भोंकते हैं।

Oscar Wilde ओस्कर वाईल्ड

Quote 25 : Am I not destroying my enemies when I make friends of them?

In Hindi : शत्रुओं  को  मित्र  बना  कर  क्या  मैं   उन्हें  नष्ट  नहीं  कर  रहा?

Abraham Lincoln अब्राहम लिंकन

Quote 26 : Friends show their love in times of trouble.

In Hindi : मित्र संकट के समय प्रेम दिखाते हैं।

Euripides युरिपाईड्स

Quote 27 : Friends are born, not made.

In Hindi : दोस्त पैदा होते हैं, बनाये नहीं जाते।

Henry B. Adams हेनरी बी. एडम्स

Quote 28 : It is one of the blessings of old friends that you can afford to be stupid with them.

In Hindi : पुराने दोस्त होने का एक फायदा ये है कि आप उनके साथ मूर्खतापूर्ण होना वहन कर सकते हैं।

Ralph Waldo Emerson राल्फ वाल्डो एमर्सन

Quote 29 : Never explain – your friends do not need it and your enemies will not believe you anyway.

In Hindi : कभी समझाएं नहीं – आपके मित्रों को इसकी ज़रुरत नहीं है और वैसे भी आपके शत्रु आप पर यकीन नहीं करेंगे।

Elbert Hubbard ऐल्बर्ट हब्बार्ड

Quote 30 : Be true to your work, your word, and your friend.

In Hindi : अपने काम, अपने कथन और अपने मित्र के प्रति सच्चे रहिये।

Henry David Thoreau हेनरी डेविड थोरेओ

Quote 31 : Men kick friendship around like a football, but it doesn’t seem to crack. Women treat it like glass and it goes to pieces.

In Hindi : पुरुष  मित्रता को फ़ुटबाल की तरह चारो ओर मारते हैं, लेकिन वो टूटती नहीं है. महिलाएं इसे शीशे की तरह लेती हैं और वो टुकड़े -टुकड़े हो जाती है।

Anne Morrow Lindbergh एन मोरो लिंडबर्ग

Quote 32 : If it’s very painful for you to criticize your friends – you’re safe in doing it. But if you take the slightest pleasure in it, that’s the time to hold your tongue.

In Hindi : यदि आपके लिए अपने मित्र की आलोचना करना पीड़ादायक है-  आप बिना डरे कर सकते हैं. लेकिन यदि आपको इसमें थोडा सा भी मजा आता है तो ये समय ज़ुबान पर लगाम देने का है।

Alice Duer Miller एलिस डयुअर मिलर

Quote 33 : Friendship and money: oil and water.

In Hindi : मित्रता और पैसा : तेल और पानी।

Mario Puzo मारिओ प्युजो

Quote 34 : One of the most beautiful qualities of true friendship is to understand and to be understood.

In Hindi : सच्ची मित्रता के सबसे अच्छे गुणों में से एक है समझना और समझे जाना।

Lucius Annaeus Seneca ल्युशियस अन्नेस सेनेसा

Quote 35 : When you choose your friends, don’t be short-changed by choosing personality over character.

In Hindi : जब आप अपने मित्रों का चुनाव करें, तो चरित्र की जगह व्यक्तित्व का चयन करने का धोखा ना खाएं।

W. Somerset Maugham डब्ल्यू. सोमरसेट मौगम

Quote 36 : Friendship is one mind in two bodies.

In Hindi : मित्रता दो शरीरों में एक दिमाग है।

Mencius मेंशियस

Note :

Post inspired by AKC http://www.achhikhabar.com/

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51