कथा एक राजकुमार की।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ कथा एक राजकुमार की। ϒ

एक था राजकुमार मितभाषी, सुन्दर, सुकुमार।
महलों में पला बढ़ा लोगों की नज़र में अत्यंत ईमानदार॥

तैंतालीस बसंत देख चुका। यह युवराज, राजगद्दी खाली, पर नहीं पहनता ताज। खुद को अभी नहीं समझता था उपुक्त। राज काज के झंझटों से था वह मुक्त। सारा राज-पाट बूढ़े मंत्री के कन्धों पर था। मंत्री था बड़ा वफ़ादार, था वो मंत्रियों का सरदार। एक दिन आखेट पर चला गया दूर तक साथ में मंत्री, सेवादार रथ, पालकी गाजे, बाजे बहुत-बहुत पहरेदार।  पहुँच गया सुदूर एक गांव मच गया हाहाकार राजकुमार आया, राजकुमार आया मच गया शोर हलचल चहु ओर, आनन् फानन में सभा बुलाई ढोल तमाशा, नाच-गाना, बढ़िया लज़ीज़ खाना।

राजकुमार मुखातिब हुए प्रजा से – बोलो भाई हमारे राज्य में कोई कष्ट हो तो बताओ खुल कर सुनाओ।

समवेत स्वरों में आवाज़ आई सरकार, हमलोगन गरीबी ते बहुतै दिक्क हन कौनो उपाय बतावा जाई।

युवराज को कुछ नहीं सूझा आँखों ही आँखों में सेवादार से पूछा और फुसफुसाहट भरी आवाज़ में बूझा फिर बाँहे समेट कर खड़े हुए और ज्ञान बघारा।

भई गरीबी तो केवल दिमाग की सोच है तुम लोग नाहक ही परेशान हो, मन में सोच लो तो सुखी इंसान हो।

यह सुनते ही पूरी सभा में सन्नाटा छा गया लोग तालियाँ बजाना भूल गए। कंठ रुंध गए चक्षुओ से अश्रुधार बह निकली।

सदिओं से जिस गरीबी को लेकर हमारे बाप-दादा, खून पसीना बहाते रहे, रहे पीढ़ियो तक परेशान। उसका समाधान कितना आसान।

मौक़ा देख सेवादारों ने आवाज़ लगाईं।

राजकुमार की जय हो !! युवराज की जय हो !!

भीड़ से आवाज़ आई युवराज की जय हो !! राजकुमार की जय हो !!

राज्य में सब सुखी थे लोगों के दिमाग से गरीबी ख़त्म हो गयी थी। तो क्या हुआ यदि लोग भूखों मर रहे थे। जवान बूढ़े लग रहे थे बूढ़े केवल ज़िंदा लाश थे। पर वो गरीब कतई नहीं थे।

तभी अचानक एक दिन कुछ सिर फिरों ने कहना शुरू किया। गरीबी के बारे में अनाप-शनाप बकना शुरू किया, कि हम गरीब इसलिए हैं क्योंकि ऊपर से भेजा हुआ पैसा, डाकू हड़प जाते है पूरा वैसे का वैसा।

लोगों ने कहा राजकुमार ने तो कुछ और ही बताया था। क्या राजकुमार को पता नहीं था?

सिरफिरों ने कहा उनको जरूर पता होगा। उनके परमपूज्य पिता श्री महाराजाधिराज ने एक बार गलती से बता दिया था।
कि सोलह आने में केवल दो आने ही जनता तक पहुँचते है बाकी सब डाकू लूट लेते हैं।

ये अलग बात है कि उन्होंने डाकुओं को कुछ नहीं कहा। उनकी इस साफगोई पर ही जनता गद्गद थी।

सिरफिरे ये भी कहने लगे कि काफी डाकू तो, मंत्रियो और दरबारिओं के कपड़े पहन कर अपनी बंदूके छुपा कर दरबारे ख़ास में हैं।

जनता को धीरे-धीरे विश्वास होने लगा। सिरफिरों को भी आभास होने लगा। लोग नंगे पैर, भूखे पेट चिथड़ो में लिपटे हुए।

राजधानी के चौक पर जमा हो गए, लम्बी-लम्बी तकरीरें बहुत सारे सुझाव।

सभी मंत्रियों दरबारियों की कपड़े उतरवाकर जांच हो। डाकुओं को पहचान कर बाहर निकाला जाए कुछ का कहना था। सारे मंत्रियों, दरबारियों को बर्खास्त किया जायें जितने मुह उतनी बातें।

लोगों का गुस्सा सरे आम हो गया, दरबारे ख़ास में कोहराम हो गया। सबने सिर से सिर मिलाकर मंत्रणा की चतुर मंत्रियों का गैंग बना।
सरकारी भोंपू से समझाया गया जनता को भरमाया गया।

ये सिरफिरे झूठ बोल रहे हैं इसमें विदेशी ताकतों का हाथ है। हम तो आपके साथ हैं। लोगों ने बूढ़े मंत्री की बात का भरोसा किया भीड़ छटने लगी। इस दौरान राजमाता विदेशी दौरे पर थीं युवराज कहीं दूर आखेट पर।

उनके लौटने तक सब शांत हो गया था डाकू खुश थे। चतुर मंत्रियों का गैंग मुस्कुरा रहा था, एक दुसरे की पीठ थप-थपा रहा था।

तभी अचानक राज्य के सबसे बुज़ुर्ग न्यायाधीश ने आदेश पारित कर दिया, कि जो भी डाकू रंगे हाथ डाका डालते हुए पकड़ा जाएगा, वो दरबारे ख़ास में नहीं बैठ पायेगा।

दरबारियों और मंत्रियों में गुस्सा था कुछ दरबारी भी दरबारे ख़ास को डाकुओं से मुक्त कराना चाहते थे और बहुत खुश थे बाकी सब नाखुश थे।

नाराज़ मंत्रियों, दरबारियों की संख्या बहुत ज्यादा थी। बूढ़े मंत्री की बात भी कोई सुन नहीं रहा था। राजकुमार सो रहा था। राजमाता का पता नहीं।

सब ने मिलकर हल निकाला। नया क़ानून बनायेंगे अपने डाकू भाइयों को बचायेंगे।

फिर क्या आनन्-फानन में अध्यादेश बनाया गया खूबसूरत शब्दों से सजाया गया। युवराज का अब भी पता नहीं शायद आखेट से लौट कर गहरी नींद में थे।

तभी राजकुमार ने सपने में देखा भारी भीड़ नंगे आदमी। चीथड़ो में लिपटी हुई औरतें बड़े पेट और पतली टांगों वाले बच्चे, आँखों में अंगारे, हाथो में बरछी, भाले, आरे।

राजकुमार की घिघ्घी बांध गयी बिस्तर छोड़ कर महल से नींद में ही भागे। रथ, सारथी, पहरेदार, सेवादार सब पीछे वो आगे।

बाहर पूरे राज्य में सारे मंत्री, दरबारी। जनता को डाकुओं के बारे में समझा रहे थे। डाकू समाज के लिए कितने जरूरी हैं ये बुझा रहे थे।
चोर उचक्के, छोटे मोटे मवाली आपको तंग नहीं कर सकते। अगर कोई सरकारी डाकू आपके संपर्क में है।

जनता फुसफुसाई लेकिन दरबारे ख़ास में। डाकुओं की नुमाइंदगी तो बहुत ज्यादा है मंत्री गुर्राए। उनका काम भी तो ज्यादा है हमारे लिए वो इतना करते हैं। क्या हम उनको इज्जत से दरबारे ख़ास में बैठा भी नहीं सकते।

जनता में सुगबुगाहट थी वो मंत्रियों की बात नहीं सुन रहे थे। सिरफिरे जनता को भड़का रहे थे डाकू हड़का रहे थे।

ऐसी सी ही एक सभा में युवराज हाँफते हांफते पहुचे। जनता, मंत्री, दरबारी सब खड़े हो गए युवराज अभी नींद में थे।
माथे पर पसीना लडखडाती आवाज़ उनको लग रहा था। चारों तरफ गरीबों की भीड़ है हथियारों से लैस।
युवराज का मुह सूख रहा था, मंत्री के हाथ से छीन कर अध्यादेश फाड़ दिया। जनता, मंत्री, दरबारी सब सन्न काटो तो खून नहीं थोड़ी देर तक छाया रहा सन्नाटा।

तभी चतुर मंत्रियों को कुछ याद आया सभी एक साथ चिल्लाये।

राजकुमार की जय !! युवराज की जय !!

पर इस बार भीड़ से एक भी आवाज़ नहीं आई। जनता चुप थी राजकुमार का सपना टूट चुका था, वो धीरे-धीरे थके हुए कदमों से अपने रथ की तरफ बढ़ रहा था, और भारत एक नया इतिहास गढ़ रहा था।

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We are grateful to my dear friend Mr. Rahul Jaiswal, for sharing this Inspirational Story in Hindi.

 

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

कोल्ड सीजन में गुलाब-सा खिले चेहरा !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

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ठंड में सबसे ज्यादा असर त्वचा पर पड़ता है। इसलिए उसे अधिक से अधिक केयर की आवश्यकता होती है। ऐसे में जरूरी है आप कुछ ऐसी बातों से अवगत हों, जो आपकी त्वचा की रौनक बनाए रखे। यहां हम आपको कुछ ऐसे ही फार्मूले बता रहे हैं, जिन्हें आप आसानी से अपनाकर अपनी त्वचा का ग्लो बढ़ा पाएंगे।

Face Beauti

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सनबर्न होने पर- अगर आपका काम ज्यादातर धूप में घूमने का है तो ठंड के दिनों की दोपहर की धूप से आपको सनटैन हो सकता है। धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें आपकी स्कीन की ऊपरी परत को झुलसा देती है।

अगर सनबर्न ज्यादा हो गया हो या फिर स्कीन पर लाल धब्बे हो गए हों या फिर उसका रंग काला हो रहा हो तो उसे दूर करने के लिए गुलाब जल को चेहरे पर लगाएं। ये त्वचा को काफी ठंडक पहुंचाता है। गुलाब जल एक स्प्रे करने वाली बोतल में डालें या फिर टिश्यू पेपर की सहायता से थपथपाते हुए लगाएं।


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बाद में खीरा, आलू और नीबू का रस मिलाकर थोड़ी-सी मुलतानी मिट्टी डालकर पतला पेस्ट बनाएं और उसे इफेक्टेड एरिया पर लगाएं। 1 5-20 मिनट बाद हल्का गीला करके मसाज करें, फिर ठंडे पानी से धो लें। इससे सनबर्न के निशान हल्के होकर धीरे-धीरे मिट जाएंगे।

Hindi Beauty Tips

सुपर फ्रेशनेस- इन दिनों में त्वचा के रूखेपन से आप डल लगने लगते हैं। ऐसे में फ्रेशनेस के लिए जरूरी है कि ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें, जिससे आप ताजगी के साथ नएपन का भी एहसास करें।

आप ऐसा जेल लें, जिसमें पिपरमेंट की खुशबू हो। जब भी आप इस जेल का इस्तेमाल करेंगी तो आपको सुपर फ्रेशनेस महसूस होगी। स्कीन के डेड सेल्स हटाने के लिए लूफा का इस्तेमाल करें।

चेहरे के दाग-धब्बे – चेहरे पर दाग-धब्बे हैं तो उन्हें हटाने के लिए थोड़ा ऑरेंज ज्यूस लेकर उसमें कपड़े को डिप करें, फिर उसे अच्छी तरह निचोड़कर अपने चेहरे पर लगा लें। इसमें विटामिन-सी होता है, जो आपकी त्वचा में चमक ला देगा।

बहुत-सी महिलाओं को पेट के बल सोने की आदत होती है। इससे उनका चेहरा तकिए पर उल्टा रखे रहने से चेहरे के आसपास निशान निकल आते हैं, जो देखने में भद्दे लगते हैं। इन्हें दूर करने के लिए इन पर कंसीलर की बूंदें लगाएं, जिससे निशान हल्के होंगे।

Note::-


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(((((~::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..~)))))

Understanding The True Self And The False Self

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ϒ Understanding The True Self And The False Self  ϒ

Meditation is an attempt to find the true self. It is this self which holds the identity of what I am, an identity which, when realized, gives fulfillment and direction to our life. This is what we call the consciousness of I am, which emerges in meditation when there is concentration on the present and we focus on the now of I am, rather than the past, or the future (I was, or I will be).

To remind us of this state, we use the word ‘Om’, which means I am a soul, the spiritual identity that acts as a key to human consciousness. As we find and realize the true self through meditation, we become aware of the false self and how deeply embedded it is in our lives, both in our way of thinking and being.

When we understand this illusory (false) self then we can begin the process of dissolving its negative effects on the original or true self.

In tomorrow’s message, we shall examine the various forms of the illusory or false self and its negative effects on us.

Message

The method to bring about a permanent change is to bring about newness in thinking.

Projection: To bring about a permanent change for the better means getting the mind trained to new ways of looking at the same situation. Only with this new understanding will there be a new response. Trying to bring about change in a superficial way will not bring about a long-lasting change.


Solution:
When I train my mind to think creatively I’m able to keep my mind busy. In this way I’m able to free it from thinking negative and waste. Also I find myself enjoying every scene that comes in front of me and I also find myself constantly progressing.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

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लोग मन्जिल को … हम मुश्किल को मन्जिल समझते है।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ लोग मन्जिल को … हम मुश्किल को मन्जिल समझते है। ϒ

लोग मन्जिल को मुश्किल समझते है।
हम मुश्किल को मन्जिल समझते है।

बडा फर्क है लोगो मे ओर हम मै।
लोग जिन्दगी को दोस्त और हम दोस्त को जिन्दगी-
समझते है।

आदते अलग हे हमारी दुनिया वालो से।
कम दोस्त रखते हे मगर लाजवाब रखते है।

क्योंकि बेशक हमारी माला छोटी है।
पर फूल उसमे सारे गुलाब रखते है।

© अमिताभ बच्चन जी। ®

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Where Do Our Thoughts Arise From?

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ϒ Where Do Our Thoughts Arise From? ϒ

A large percentage of your thoughts are determined by what you perceive through your senses. Everything you see, listen to, smell or feel causes some reaction or other in your mind. See how your senses are connected to your mind. Any negative thing that they pick up or produce will disturb the mechanisms of your mind. If you want to have spiritual peace, then use your eyes, ears and mouth with caution. Other thoughts arise from the impressions that have been recorded in your subconscious (identity, personality and/or character), and they may be positive or negative. The negative ones are often due to deep marks and/or habits caused by past events or experiences, and also everything that is deeply established and settled in your inner self (belief system).

The sight and hearing senses are those used most in human beings, with as much as 80 per cent of the information we receive being processed through these two senses. We should always be on the alert to ensure that nothing negative enters these two doors that might contaminate our mind. We need a guardian to ensure that does not happen. This guardian is our intellect, the part of our conscience that contains the wisdom (knowledge) and capacity to discriminate between right and wrong, beneficial and harmful, truth and falsehood. Observing the mind, we can be aware of the thought patterns that originate in our subconscious. It is important to understand that you are separate from your thoughts. You are not your thoughts, but your thoughts are created by you. With regular practice of meditation you will be able to choose at any time which thoughts you are going to focus your attention on and which ones you wish to disregard.

ϒ Message ϒ

The method to finish waste thoughts is to deal with the mind with love.

Projection: When there are waste thoughts in the mind which one tries to stop, it becomes difficult to do that. There is discomfort and difficulty experienced. On the other hand, when the mind is taught to take the right direction with love, there is a quick and dramatic change.

Solution: When I learn the art of speaking to my mind with love, I am able to free myself from waste thoughts without any feelings of suppression. Concentration too becomes easy and all thoughts are directed towards the right direction.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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मेरे कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह।

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ϒ मेरे कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह। ϒ

मेरे कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह – Some of my personal set of positive thoughts.

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अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना।

हमेशा मन को शांत रखना।

दिमाग को हमेशा अनुसंधान(New Research & Learn always) में लगाये रखना।

हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना।

हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना।

हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो।

हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी।

आपका कृष्ण मोहन सिंह “या” KMSRAJ51 ….. मैं एक पवित्र आत्मा हूँ॥

ओम शांति॥ ….. ओम शांति॥ ….. ओम शांति॥

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

The Eternal World Cycle

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ The Eternal World Cycle ϒ

This world is a vast amphitheatre of action in which souls, in their respective bodies, play their various parts. Planet Earth exists in an extremely tiny portion of the physical universe and is governed by well-defined physical, chemical and biological laws.

In India, the world, which we inhabit, is called karma kshetra (the field of action), because it is here that we sow the seeds of actions and reap their fruits. It is here that the soul takes on flesh and bones and expresses the role that it has hidden within itself, causing variations in the material environment. The state of the material world at any given moment is a direct reflection of the state of consciousness of the human beings, which inhabit it. If there is peace and harmony within the soul this is reflected in nature. If there is conflict and confusion, nature responds accordingly.

It is a world of three dimensions of space and one of time. Its principal characteristics are sound, movement, colour and form. On this immense stage of deserts, forests, mountains and seas; illuminated by the sun, moon and stars; the world drama is enacted. In the drama, the actor-souls move from pleasure to pain, purity to impurity, happiness to sorrow, new to old, positive to negative. A point is finally reached when the process is renewed i.e. all souls and the elements of matter are purified by the Supreme Soul and they move back to their points of origin, only to start again. This is called the eternal world cycle.

ϒ Message ϒ

The power of determination brings all thoughts into practice.

Projection: There are a lot of thoughts that come into the mind that should come into practice immediately. These thoughts come according to the demands of time or according to the kind of people that one comes into contact with. But the only way to bring all these thoughts into practice is to use the power of determination. Where there is determination there is the commitment to use all the resources for the realisation of that thought.

Solution: When I am able to use the power of determination, I am able to realise my inner potential and use it in the right way. So I am able to experience constant progress, because all my thoughts are for my own self progress and all these thoughts naturally come into practice. I never give up anything with temporary setbacks but am able to do everything for the constant progress of the self.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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The Circle Of Influence And Worry

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ The Circle Of Influence And Worry ϒ

Make a list of the things that worry you most and decide if they are in your circle of influence or worry. Think about what you can really do to have an influence on each of them in an effective way. By determining which of these two circles is the centre around which most of your time and energy revolves, you can discover a great deal about your level of positivity. Positive people focus on the things they can do something about. If necessary, they change their attitude. They are aware that perhaps they cannot change the circumstances but they can improve their inner attitude. This is what positive focusing is all about: being creative, thinking differently, being open to listening, being more understanding, more communicative and showing more solidarity.

Reactive people focus on the problems of the circle and on the circumstances about which they have no control. They react to the defects found in other people. From this worrying, accusations, destructive criticism, feelings of blame, a reactive language and feelings of weakness and frustration can arise. They want others or the circumstances to change first and when that happens, then they will change. Whenever they think that the problem is on the outside, this thought is the problem. The negative energy produced as a result of this approach, combined with the lack of attention to the areas in which they could do something to improve the situation, means that the area of influence decreases in size. They give power to what is external so that it dominates them. In other words they think that change must come from “outside towards the inside”; they think that something that is outside must change before they themselves change.

ϒ Message ϒ

Love creates the right environment for others’ positive growth.

Projection: Where there is love, a natural environment for others’ growth is created. Love gives the ability to perceive the positivity in others and gives the encouragement to others to bring about that positivity and use it for the benefit of the self and others.

Solution: When I have love for others, along with perceiving their specialities, I am also able to recognise and use my specialities and inner powers more and more. Knowing and using these specialities is naturally for the benefit of those around me. This gives me an inner experience of power which makes me a constant giver and a support for those around me.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

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समय का सदुपयोग !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

kmsraj51 की कलम से …..
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समय, सफलता की कुंजी है। समय का चक्र अपनी गति से चल रहा है या यूं कहें कि भाग रहा है। अक्सर इधर-उधर कहीं न कहीं, किसी न किसी से ये सुनने को मिलता है कि क्या करें समय ही नही मिलता। वास्तव में हम निरंतर गतिमान समय के साथ कदम से कदम मिला कर चल ही नही पाते और पिछङ जाते हैं। समय जैसी मूल्यवान संपदा का भंडार होते हुए भी हम हमेशा उसकी कमी का रोना रोते रहते हैं क्योंकि हम इस अमूल्य समय को बिना सोचे समझे खर्च कर देते हैं।

विकास की राह में समय की बरबादी ही सबसे बङा शत्रु है। एक बार हाँथ से निकला हुआ समय कभी वापस नही आता है। हमारा बहुमूल्य वर्तमान क्रमशः भूत बन जाता है जो कभी वापस नही आता। सत्य कहावत है कि बीता हुआ समय और बोले हुए शब्द कभी वापस नही आ सकते। कबीर दास जी ने कहा है कि,

काल करै सो आज कर, आज करै सो अब।
पल में परलै होयेगी, बहुरी करेगा कब।।

सच ही तो है मित्रों, किसी भी काम को कल पर नही टालना चाहिए क्योंकि आज का कल पर और कल का काम परसों पर टालने से काम अधिक हो जायेगा। बासी काम, बासी भोजन की तरह अरुचीकर हो जायेगा। समय जैसे बहुमूल्य धन को सोने-चाँदी की तरह रखा नही जा सकता क्योंकि समय तो गतिमान है। इस पर हमारा अधिकार तभी तक है जब हम इसका सदुपयोग करें अन्यथा ये नष्ट हो जाता है। समय का उपयोग धन के उपयोग से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि हम सभी की सुख-सुविधा इसी पर निर्भर है।

चाणक्य के अनुसार- जो व्यक्ति जीवन में समय का ध्यान नही रखता, उसके हाँथ असफलता और पछतावा ही लगता है।

समय जितना कीमती और वापस न मिलने वाला तत्व है उतना उसका महत्व हम लोग प्रायः नही समझते। परन्तु जो लोग इसके महत्व को समझते हैं वो विश्व पटल के इतिहास पर सदैव विद्यमान रहते हैं।


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“ईश्वरचन्द्र विद्यासागर समय के बङे पाबंद थे। जब वे कॉलेज जाते तो रास्ते के दुकानदार अपनी घङियाँ उन्हे देखकर ठीक करते थे।“

“गैलेलियो दवा बेचने का काम करते थे। उसी में से थोङा-थोङा समय निकाल कर विज्ञान के अनेक आविष्कार कर दिये।“

“घर-गृहस्थी के व्यस्त भरे समय में हैरियट वीचर स्टो ने गुलाम प्रथा के विरुद्ध आग उगलने वाली पुस्तक “टॉम काका की कुटिया” लिख दी जिसकी प्रशंसा आज भी बेजोड़ रचना के रूप में की जाती है।“कहने का आशय है कि प्रत्येक विकासशील एवं उन्नतशील लोगों में एक बात समान है- समय का सदुपयोग।

समय का प्रबंधन प्रकृति से स्पष्ट समझा जा सकता है। समय का कालचक्र प्रकृति में नियमित है। दिन-रात, ऋतुओं का समय पर आना-जाना है । यदि कहीं भी अनियमितता होती है तो विनाष की लीला भी प्रकृति सीखा देती है। समय की उपेक्षा करने पर कई बार विजय का पासा पराजय में पलट जाता है। नेपोलियन ने आस्ट्रिया को इसलिए हरा दिया कि वहाँ के सैनिकों ने पाँच मिनट का विलंब कर दिया था, लेकिन वहीं कुछ ही मिनटो में नेपोलियन बंदी बना लिया गया क्योंकि उसका एक सेनापति कुछ विलंब से आया। वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन की पराजय का सबसे बङा कारण समय की अवहेलना ही थी। कहते हैं खोई दौलत फिर भी कमाई जा सकती है। भूली विद्या पुनः पाई जा सकती है किन्तु खोया हुआ समय पुनः वापस नही लाया जा सकता सिर्फ पश्चाताप ही शेष रह जाता है।

समय के गर्भ में लक्ष्मी का अक्षय भंडार भरा हुआ है, किन्तु इसे वही पाते हैं जो इसका सही उपयोग करते हैं। जापान के नागरिक ऐसा ही करते हैं, वे छोटी मशीनों या खिलौनों के पुर्जों से अपने व्यावसायिक कार्य से फुरसत मिलने पर नियमित रूप से एक नया खिलौना या मशीनें बनाते हैं। इस कार्य से उन्हे अतिरिक्त धन की प्राप्ति होती है। उनकी खुशहाली का सबसे बङा कारण समय का सदुपयोग ही है।

समर्थ गुरू स्वामी रामदास कहते थे कि-

एक सदैव पणाचैं लक्षण।
रिकामा जाऊँ ने दो एक क्षण।।

अर्थात, “जो मनुष्य वक्त का सदुपयोग करता है, एक क्षण भी बरबाद नही करता, वह बड़ा सौभाग्यवान होता है।“

KMS-Peter_Michael_Hamel_-_Arrow_of_Time_&_The_Cycle_of_Time

समय तो उच्चतम शिखर पर पहुँचने की सीढी है। जीवन का महल समय की, घंटे-मिनटों की ईंट से बनता है। प्रकृति ने किसी को भी अमीर गरीब नही बनाया उसने अपनी बहुमुल्य संपदा यानि की चौबीस घंटे सभी को बराबर बांटे हैं। मनुष्य कितना ही परिश्रमी क्यों न हो परन्तु समय पर कार्य न करने से उसका श्रम व्यर्थ चला जाता है। वक्त पर न काटी गई फसल नष्ट हो जाती है। असमय बोया बीज बेकार चला जाता है। जीवन का प्रत्येक क्षण एक उज्जवल भविष्य की संभावना लेकर आता है। क्या पता जिस क्षण को हम व्यर्थ समझ कर बरबाद कर रहे हैं वही पल हमारे लिए सौभाग्य की सफलता का क्षण हो। आने वाला पल तो आकाश कुसुम की तरह है इसकी खुशबु से स्वयं को सराबोर कर लेना चाहिए।

फ्रैंकलिन ने कहा है – समय बरबाद मत करो, क्योंकि समय से ही जीवन बना है।

ये कहना अतिशयोक्ति न होगी कि, वक्त और सागर की लहरें किसी की प्रतिक्षा नही करती। हमारा कर्तव्य है कि हम समय का पूरा-पूरा उपयोग करें।

—————–——————-

Anita Sharma


अनिता शर्मा
E-mail ID: voiceforblind@gmail.com

अनिता जी दृष्टिबाधित छात्रों के लिए सराहनीय कार्य कर रही हैं। उन्होंने अपनी आवाज़ में 100+ educational YouTube videos post किये हैं, जिन्हें 470000 से अधिक बार देखा जा चुका है। आप इनके बारे में बताकर blind students की मदद कर सकते हैं। सामान्य विद्यार्थी भी जो Bank या Civil Services की तैयारी कर रहे हैं वो भी इन Audios का लाभ ले सकते है।

You may visit her blog :http://roshansavera.blogspot.in/

We are grateful to Anita Ji for sharing this inspirational write up on TIME in Hindi. Thanks.


Note::-

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सुबह जल्दी उठने की आदत कैसे डालें !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

kmsraj51 की कलम से …..
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sunrise

Early to bed and early to rise makes a man healthy wealthy and wise


Hi friends,


हममें से ज्यादातर लोगों ने कभी ना कभी ये कोशिश ज़रूर की होगी कि रोज़ सुबह जल्दी उठा जाये. हो सकता है कि आपमें से कुछ लोग कामयाब भी हुए हों, पर अगर majority की बात की जाये तो वो ऐसी आदत डालने में सफल नहीं हो पाते. लेकिन आज जो article मैं आपसे share कर रहा हूँ इस पढने के बाद आपकी सफलता की probability निश्चित रूप से बढ़ जाएगी. यह article इस विषय पर दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक का Hindi Translation है. इसे Mr. Steve Pavlina ने लिखा है . इसका title है “How to become an early riser.“. ये बताना चाहूँगा कि इन्ही के द्वारा लिखे गए लेख ”20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य ” का Hindi version इस ब्लॉग पर सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले लेखों में से एक है.

तो आइये जानें कि हम कैसे डाल सकते हैं सुबह जल्दी उठने की आदत.

mornign-exercise-kms

सुबह जल्दी उठने की आदत कैसे डालें?

sun-rising-good-morning


It is well to be up before daybreak, for such habits contribute to health, wealth, and wisdom.
-Aristotle

सूर्योदय होने से पहले उठाना अच्छा होता है , ऐसी आदत आपको स्वस्थ , समृद्ध और बुद्धिमान बनती है .

-अरस्तु

सुबह उठने वाले लोग पैदाईशी ऐसे होते हैं या ऐसा बना जा सकता है ? मेरे case में तो निश्चित रूप से मैं ऐसा बना हूँ . जब मैं बीस एक साल का था तब शायद ही कभी midnight से पहले बिस्तर पे जाता था . और मैं लगभग हमेशा ही देर से सोता था. और अक्सर मेरी गतिविधियाँ दोपहर से शुरू होती थीं .

पर कुछ समय बाद मैं सुबह उठने और successful होने के बीच के गहरे सम्बन्ध को ignore नहीं कर पाया , अपनी life में भी . उन गिने – चुने अवसरों पर जब भी मैं जल्दी उठा हूँ तो मैंने पाया है कि मेरी productivity लगभग हमेशा ही ज्यादा रही है , सिर्फ सुबह के वक़्त ही नहीं बल्कि पूरे दिन . और मुझे खुद अच्छा होने का एहसास भी हुआ है . तो एक proactive goal-achiever होने के नाते मैंने सुबह उठने की आदत डालने का फैसला किया . मैंने अपनी alarm clock 5 am पर सेट कर दी …

— और अगली सुबह मैं दोपहर से just पहले उठा .

ह्म्म्म…………

मैंने फिर कई बार कोशिश की , पर कुछ फायदा नहीं हुआ .मुझे लगा कि शायद मैं सुबह उठने वाली gene के बिना ही पैदा हुआ हूँ . जब भी मेरा alarm बजता तो मेरे मन में पहला ख्याल यह आता कि मैं उस शोर को बंद करूँ और सोने चला जून . कई सालों तक मैं ऐसा ही करता रहा , पर एक दिन मेरे हाथ एक sleep research लगी जिससे मैंने जाना कि मैं इस problem को गलत तरीके से solve कर रहा था . और जब मैंने ये ideas apply कीं तो मैं निरंतर सुबह उठने में कामयाब होने लगा .

गलत strategy के साथ सुबह उठने की आदत डालना मुश्किल है पर सही strategy के साथ ऐसा करना अपेक्षाकृत आसान है .

सबसे common गलत strategy है कि आप यह सोचते हैं कि यदि सुबह जल्दी उठाना है तो बिस्तर पर जल्दी जाना सही रहेगा . तो आप देखते हैं कि आप कितने घंटे की नीद लेते हैं , और फिर सभी चीजों को कुछ गहनते पहले खिसका देते हैं . यदि आप अभी midnight से सुबह 8 बजे तक सोते हैं तो अब आप decide करते हैं कि 10pm पर सोने जायेंगे और 6am पर उठेंगे . सुनने में तर्कसंगत लगता है पर ज्यदातर ये तरीका काम नहीं करता .

ऐसा लगता है कि sleep patterns को ले के दो विचारधाराएं हैं . एक है कि आप हर रोज़ एक ही वक़्त पर सोइए और उठिए . ये ऐसा है जैसे कि दोनों तरफ alarm clock लगी हो —आप हर रात उतने ही घंटे सोने का प्रयास करते हैं . आधुनिक समाज में जीने के लिए यह व्यवहारिक लगता है . हमें अपनी योजना का सही अनुमान होना चाहिए . और हमें पर्याप्त आराम भी चाहिए .

दूसरी विचारधारा कहती है कि आप अपने शरीर की ज़रुरत को सुनिए और जब आप थक जायें तो सोने चले जाइये और तब उठिए जब naturally आपकी नीद टूटे . इस approach की जड़ biology में है . हमारे शरीर को पता होना चाहिए कि हमें कितना rest चाहिए , इसलिए हमें उसे सुनना चाहिए .

Trial and error से मुझे पता चला कि दोनों ही तरीके पूरी तरह से उचित sleep patterns नहीं देते . अगर आप productivity की चिंता करते हैं तो दोनों ही तरीके गलत हैं . ये हैं उसके कारण :

यदि आप निश्चित समय पे सोते हैं तो कभी -कभी आप तब सोने चले जायेंगे जब आपको बहुत नीद ना आ रही हो . यदि आपको सोने में 5 मिनट से ज्यादा लग रहे हों तो इसका मतलब है कि आपको अभी ठीक से नीद नहीं आ रही है . आप बिस्तर पर लेटे -लेटे अपना समय बर्वाद कर रहे हैं ; सो नहीं रहे हैं . एक और problem ये है कि आप सोचते हैं कि आपको हर रोज़ उठने ही घंटे की नीद चाहिए , जो कि गलत है . आपको हर दिन एक बराबर नीद की ज़रुरत नहीं होती .

यदि आप उतना सोते हैं जितना की आपकी body आपसे कहती है तो शायद आपको जितना सोना चाहिए उससे ज्यादा सोएंगे —कई cases में कहीं ज्यादा , हर हफ्ते 10-15 घंटे ज्यदा ( एक पूरे waking-day के बराबर ) ज्यादातर लोग जो ऐसे सोते हैं वो हर दिन 8+ hrs सोते हैं , जो आमतौर पर बहुत ज्यादा है . और यदि आप रोज़ अलग -अलग समय पर उठ रहे हैं तो आप सुबह की planning सही से नहीं कर पाएंगे . और चूँकि कभी -कभार हमारी natural rhythm घडी से मैच नहीं करती तो आप पायंगे कि आपका सोने का समय आगे बढ़ता जा रहा है .

मेरे लिए दोनों approaches को combine करना कारगर साबित हुआ . ये बहुत आसान है , और बहुत से लोग जो सुबह जल्दी उठते हैं , वो बिना जाने ही ऐसा करते हैं , पर मेरे लिए तो यह एक mental-breakthrough था . Solution ये था की बिस्तर पर तब जाओ जब नीद आ रही हो ( तभी जब नीद आ रही हो ) और एक निश्चित समय पर उठो ( हफ्ते के सातों दिन ). इसलिए मैं हर रोज़ एक ही समय पर उठता हूँ ( in my case 5 am) पर मैं हर रोज़ अलग -अलग समय पर सोने जाता हूँ .

मैं बिस्तर पर तब जाता हूँ जब मुझे बहुत तेज नीद आ रही हो . मेरा sleepiness test ये है कि यदि मैं कोई किताब बिना ऊँघे एक -दो पन्ने नहीं पढ़ पाता हूँ तो इसका मतलब है कि मै बिस्तर पर जाने के लिए तैयार हूँ .ज्यादातर मैं बिस्तर पे जाने के 3 मिनट के अन्दर सो जाता हूँ . मैं आराम से लेटता हूँ और मुझे तुरंत ही नीद आ जाति है . कभी कभार मैं 9:30 पे सोने चला जाता हूँ और कई बार midnight तक जगा रहता हूँ . अधिकतर मैं 10 – 11 pm के बीच सोने चला जाता हूँ .अगर मुझे नीद नहीं आ रही होती तो मैं तब तक जगा रहता हूँ जब तक मेरी आँखें बंद ना होने लगे . इस वक़्त पढना एक बहुत ही अच्छी activity है , क्योंकि यह जानना आसान होता है कि अभी और पढना चाहिए या अब सो जाना चाहिए .

जब हर दिन मेरा alarm बजता है तो पहले मैं उसे बंद करता हूँ , कुछ सेकंड्स तक stretch करता हूँ , और उठ कर बैठ जाता हूँ . मैं इसके बारे में सोचता नहीं . मैंने ये सीखा है कि मैं उठने में जितनी देर लगाऊंगा ,उतना अधिक chance है कि मैं फिर से सोने की कोशिश करूँगा .इसलिए एक बार alarm बंद हो जाने के बाद मैं अपने दिमाग में ये वार्तालाप नहीं होने देता कि और देर तक सोने के क्या फायदे हैं . यदि मैं सोना भी चाहता हूँ , तो भी मैं तुरंत उठ जाता हूँ .

इस approach को कुछ दिन तक use करने के बाद मैंने पाया कि मेरे sleep patterns एक natural rhythm में सेट हो गए हैं . अगर किसी रात मुझे बहुत कम नीद मिलती तो अगली रात अपने आप ही मुझे जल्दी नीद आ जाती और मैं ज्यदा सोता . और जब मुझमे खूब energy होती और मैं थका नहीं होता तो कम सोता . मेरी बॉडी ने ये समझ लिया कि कब मुझे सोने के लिए भेजना है क्योंकि उसे पता है कि मैं हमेशा उसी वक़्त पे उठूँगा और उसमे कोई समझौता नहीं किया जा सकता .

इसका एक असर ये हुआ कि मैं अब हर रात लगभग 90 मिनट कम सोता ,पर मुझे feel होता कि मैंने पहले से ज्यादा रेस्ट लिया है . मैं अब जितनी देर तक बिस्तर पर होता करीब उतने देर तक सो रहा होता .

मैंने पढ़ा है कि ज्यादातर अनिद्रा रोगी वो लोग होते हैं जो नीद आने से पहले ही बिस्तर पर चले जाते हैं . यदि आपको नीद ना आ रही हो और ऐसा लगता हो कि आपको जल्द ही नीद नहीं आ जाएगी , तो उठ जाइये और कुछ देर तक जगे रहिये . नीद को तब तक रोकिये जब तक आपकी body ऐसे hormones ना छोड़ने लगे जिससे आपको नीद ना आ जाये.अगर आप तभी bed पे जाएँ जब आपको नीद आ रही हो और एक निश्चित समय उठें तो आप insomnia का इलाज कर पाएंगे .पहली रात आप देर तक जागेंगे , पर बिस्तर पर जाते ही आपको नीद आ जाएगी . .पहले दिन आप थके हुए हो सकते हैं क्योंकि आप देर से सोये और बहुत जल्दी उठ गए , पर आप पूरे दिन काम करते रहेंगे और दूसरी रात जल्दी सोने चले जायेंगे .कुछ दिनों बाद आप एक ऐसे pattern में settle हो जायेंगे जिसमे आप लगभग एक ही समय बिस्तर पर जायंगे और तुरंत सो जायंगे .

इसलिए यदि आप जल्दी उठाना चाहते हों तो ( या अपने sleep pattern को control करना चाहते हों ), तो इस try करिए : सोने तभी जाइये जब आपको सच -मुच बहुत नीद आ रही हो और हर दिन एक निश्चित समय पर उठिए .

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Note::-

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Note::- This article (Source) AchhiKhabar.Com ((Lot`s of thanks to Mr.Gopal Mishra & http://www.achhikhabar.com/ )).

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आपकी ब्यूटी का राज और दही !!

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हमारे खान-पान में ऐसी कई चीजें शामिल हैं, जिनमें खूबसूरती और स्वास्थ्य का खजाना छिपा होता है। दही भी एक ऐसा ही खजाना है, जिसका उपयोग हर तरह से फायदेमंद है। दही का स्वास्थ्य के साथ-साथ सौंदर्य निखारने में भी महत्वपूर्ण स्थान है। यह एक बढ़िया, सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने वाला सौंदर्य प्रसाधन है। जो हर घर में आसानी से पाया जाता है। आइए जानें दही के गुण-


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* दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गर्दन व हाथ-पांव में लगाएं । 20 मिनट बाद धो लें, हाथ-पैर मुलायम होंगे व चेहरे पर चमक आएगी।

* बाल धोने से 1 घंटा पहले यदि बालों में दही लगाया जाए तो शैंपू के बाद कंडीशनर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।

* चौकर के साथ दही मिलाकर लगाने से ब्लैक हैडस कम होते हैं।

* दही में बेसन मिलाकर उबटन की तरह लगाने से त्वचा के पोर अच्छी तरह से साफ होते हैं।

* दही में शहद मिलाकर बालों पर लगाने से यह कंडीशनर का काम करता है।

* मुल्तानी मिट्टी के साथ दही अच्छे क्लीजिंग एजेंट का काम करता है।

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दही चेहरे, गर्दन व बाजू आदि के सौंदर्य को तो निखारता ही है, साथ ही यह बालों को पोषण देने में भी बहुत सहायक है।

* अलग-अलग शैंपू और रंगों का उपयोग करने से बालों की चमक कम हो गई हैं तो दही में बेसन घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद सिर धो लें। इससे बालों की चमक लौट आएगी और बालों की रूसी की समस्या से भी आपको निजात मिलेगी।

* रूसी की शिकायत वाले बालों के लिए दही में कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सिर धोएँ। यह हफ्ते में दो बार अवश्य करें। इससे जहाँ बालों की रूसी खत्म होगी, वहीं बाल मुलायम, काले, लंबे व घने होंगे जो आपकी सुंदरता में चार चाँद लगाएंगे।

* अगर आप मुंहासे की समस्या से परेशान हैं तो अपने चेहरे पर खट्टी दही का लेप लगाएं और चेहरा सूख जाए तब धो लें। थोड़े ही दिनों में आपको अप्रत्याशित लाभ होगा।

* अगर गर्दन के पिछले भाग में कालापन जमा हो गया है तो घबराए नहीं नहाते समय गर्दन पर खट्टी दही से मालिश करें और धो लें।

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Note::-

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(((((((((((~kmsraj51 की कलम से …..~)))))))))))

कोल्ड सीजन में गुलाब-सा खिले चेहरा !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

kmsraj51 की कलम से …..
pen-kms

ठंड में सबसे ज्यादा असर त्वचा पर पड़ता है। इसलिए उसे अधिक से अधिक केयर की आवश्यकता होती है। ऐसे में जरूरी है आप कुछ ऐसी बातों से अवगत हों, जो आपकी त्वचा की रौनक बनाए रखे। यहां हम आपको कुछ ऐसे ही फार्मूले बता रहे हैं, जिन्हें आप आसानी से अपनाकर अपनी त्वचा का ग्लो बढ़ा पाएंगे।

Face Beauti

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सनबर्न होने पर- अगर आपका काम ज्यादातर धूप में घूमने का है तो ठंड के दिनों की दोपहर की धूप से आपको सनटैन हो सकता है। धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें आपकी स्कीन की ऊपरी परत को झुलसा देती है।

अगर सनबर्न ज्यादा हो गया हो या फिर स्कीन पर लाल धब्बे हो गए हों या फिर उसका रंग काला हो रहा हो तो उसे दूर करने के लिए गुलाब जल को चेहरे पर लगाएं। ये त्वचा को काफी ठंडक पहुंचाता है। गुलाब जल एक स्प्रे करने वाली बोतल में डालें या फिर टिश्यू पेपर की सहायता से थपथपाते हुए लगाएं।


hel

बाद में खीरा, आलू और नीबू का रस मिलाकर थोड़ी-सी मुलतानी मिट्टी डालकर पतला पेस्ट बनाएं और उसे इफेक्टेड एरिया पर लगाएं। 1 5-20 मिनट बाद हल्का गीला करके मसाज करें, फिर ठंडे पानी से धो लें। इससे सनबर्न के निशान हल्के होकर धीरे-धीरे मिट जाएंगे।

Hindi Beauty Tips

सुपर फ्रेशनेस- इन दिनों में त्वचा के रूखेपन से आप डल लगने लगते हैं। ऐसे में फ्रेशनेस के लिए जरूरी है कि ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें, जिससे आप ताजगी के साथ नएपन का भी एहसास करें।

आप ऐसा जेल लें, जिसमें पिपरमेंट की खुशबू हो। जब भी आप इस जेल का इस्तेमाल करेंगी तो आपको सुपर फ्रेशनेस महसूस होगी। स्कीन के डेड सेल्स हटाने के लिए लूफा का इस्तेमाल करें।

चेहरे के दाग-धब्बे – चेहरे पर दाग-धब्बे हैं तो उन्हें हटाने के लिए थोड़ा ऑरेंज ज्यूस लेकर उसमें कपड़े को डिप करें, फिर उसे अच्छी तरह निचोड़कर अपने चेहरे पर लगा लें। इसमें विटामिन-सी होता है, जो आपकी त्वचा में चमक ला देगा।

बहुत-सी महिलाओं को पेट के बल सोने की आदत होती है। इससे उनका चेहरा तकिए पर उल्टा रखे रहने से चेहरे के आसपास निशान निकल आते हैं, जो देखने में भद्दे लगते हैं। इन्हें दूर करने के लिए इन पर कंसीलर की बूंदें लगाएं, जिससे निशान हल्के होंगे।

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कोल्ड सीजन में गुलाब-सा खिले चेहरा !!

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ठंड में सबसे ज्यादा असर त्वचा पर पड़ता है। इसलिए उसे अधिक से अधिक केयर की आवश्यकता होती है। ऐसे में जरूरी है आप कुछ ऐसी बातों से अवगत हों, जो आपकी त्वचा की रौनक बनाए रखे। यहां हम आपको कुछ ऐसे ही फार्मूले बता रहे हैं, जिन्हें आप आसानी से अपनाकर अपनी त्वचा का ग्लो बढ़ा पाएंगे।

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सनबर्न होने पर- अगर आपका काम ज्यादातर धूप में घूमने का है तो ठंड के दिनों की दोपहर की धूप से आपको सनटैन हो सकता है। धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें आपकी स्कीन की ऊपरी परत को झुलसा देती है।

अगर सनबर्न ज्यादा हो गया हो या फिर स्कीन पर लाल धब्बे हो गए हों या फिर उसका रंग काला हो रहा हो तो उसे दूर करने के लिए गुलाब जल को चेहरे पर लगाएं। ये त्वचा को काफी ठंडक पहुंचाता है। गुलाब जल एक स्प्रे करने वाली बोतल में डालें या फिर टिश्यू पेपर की सहायता से थपथपाते हुए लगाएं।


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बाद में खीरा, आलू और नीबू का रस मिलाकर थोड़ी-सी मुलतानी मिट्टी डालकर पतला पेस्ट बनाएं और उसे इफेक्टेड एरिया पर लगाएं। 1 5-20 मिनट बाद हल्का गीला करके मसाज करें, फिर ठंडे पानी से धो लें। इससे सनबर्न के निशान हल्के होकर धीरे-धीरे मिट जाएंगे।

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सुपर फ्रेशनेस- इन दिनों में त्वचा के रूखेपन से आप डल लगने लगते हैं। ऐसे में फ्रेशनेस के लिए जरूरी है कि ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें, जिससे आप ताजगी के साथ नएपन का भी एहसास करें।

आप ऐसा जेल लें, जिसमें पिपरमेंट की खुशबू हो। जब भी आप इस जेल का इस्तेमाल करेंगी तो आपको सुपर फ्रेशनेस महसूस होगी। स्कीन के डेड सेल्स हटाने के लिए लूफा का इस्तेमाल करें।

चेहरे के दाग-धब्बे – चेहरे पर दाग-धब्बे हैं तो उन्हें हटाने के लिए थोड़ा ऑरेंज ज्यूस लेकर उसमें कपड़े को डिप करें, फिर उसे अच्छी तरह निचोड़कर अपने चेहरे पर लगा लें। इसमें विटामिन-सी होता है, जो आपकी त्वचा में चमक ला देगा।

बहुत-सी महिलाओं को पेट के बल सोने की आदत होती है। इससे उनका चेहरा तकिए पर उल्टा रखे रहने से चेहरे के आसपास निशान निकल आते हैं, जो देखने में भद्दे लगते हैं। इन्हें दूर करने के लिए इन पर कंसीलर की बूंदें लगाएं, जिससे निशान हल्के होंगे।

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खुशबू(सुगंध) से पाएं-खूबसूरत त्वचा।

Kmsraj51 की कलम से…..
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ϒ खुशबू(सुगंध) से पाएं-खूबसूरत त्वचा। ϒ

सुगंध का इतिहास बड़ा पुराना है। राजा-महाराजाओं के काल से विभिन्न प्रकार के इत्र-सुगंधादि के वर्णन पढ़ने को मिलते हैं। केसर, गुलाब, केवड़ा, मोगरा, चमेली, चंदन तथा लोभान आदि सुगंध न सिर्फ मन को बहलाने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे बल्कि इनके द्वारा रोगों का उपचार भी संभव था। इन्हीं प्राचीन उपचार पद्धतियों को आजकल फिर से अपनाया जा रहा है। ताे आज हम आप सब से कुछ महत्त्वपूर्ण सुगंधित तेलों की उपयोगिता की जानकारी Share कर रहें है…..

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बॉडी आइल्स

सूखी त्वचा : बेंजोनिन, पामारोज, पेचौली, गाजर, जिरेनियम, पेट्टी ग्रैन, लेवेण्डर, कुसुम, गुलाब, चंदन।

चिपचिपी त्वचा : लेवेण्डर, ऑरेंज, लेमन, कपूर, नेरोली, यांग-यांग, बर्गामोट।

सामान्य त्वचा : पामारोज, गाजर, जिरेनियम, लेवेण्डर, कुसुम, चमेली, नेरोली, यांग-यांग, लोबान, चंदन, पेचौली।

असामान्य त्वचा : जिरेनियम, लेवेण्डर, कुसुम, कपूर, यूकेलिप्टस थाइम गंधरस।

संवेदी त्वचा : जिरेनियम, लेवेण्डर, कुसुम।

c-b फेशियल आइल्स 

सामान्य त्वचा : बेंजोनिन, गाजर, कुसुम, लोबान, सीप्रेस, जिरेनियम, चमेली, जूनिपर, लेवेण्डर, लेमन, मार्जोटम, ऑरेंज, पामारोज, पेचौली, पिपरमिंट, पेट्टी ग्रैन, रोजमैरी, यांग-यांग।

सूखी त्वचा : बेंजोनिन, गाजर, कुसुम, जिरेनियम, हीसोप, लेमन, नेरोली, पामारोज, पेचौली, गुलाब, रोजमेरी, चंदन।

शुष्क त्वचा : गाजर, जिरेनियम, लेवेण्डर।

नम त्वचा : गाजर, सीप्रैस, जिरेनियम, हीसोप, लेवेण्डर, लेमन, पामारोज, पेचौली, गुलाब, चंदन।

संवेदी त्वचा : गाजर, कुसुम, जिरेनियम, लेवेण्डर।की

असामान्य त्वचा : गाजर, कुसुम, लोबान, जिरेनियम, हीसोप, जूनिपर, लेवेण्डर, लेमन, पेचौली, पामारोज, चंदन।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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Head Editor, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51