यह जीवन सच है !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

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भारत की शान है हिंदी !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

इस सदी के महानायक हिंदी फिल्मों के सरताज आदरणीय अमिताभ बच्चन जी की एक फिल्म नमक हलाल का एक संवाद था ,”आई केन टाक इंग्लिश ,आई केन वाक् इंग्लिश एंड आई केन लाफ इंग्लिश बिकाज़ इंग्लिश इज ए फन्नी लैग्वेज ,भैरो बिकम्स बायरन एंड बायरन बिकम्स भैरों ,देयर माइंड इज नैरो ” जी हाँ अच्छी टांग तोड़ अंग्रेजी बोली थी उन्होंने उस फिल्म में और ऐसी ही टूटी फूटी हास्यप्रद अंग्रेजी बोल कर हमारे ही देश भारत के वासी अपने पढ़े लिखे होने का सबूत देते है ,कितनी शर्म की बात है कि अपनी मातृ भाषा हिंदी में बात न कर के हम विदेशी भाषा बोल कर गर्व महसूस करते है,और ऐसा करने के लिए मजबूर हो जाते है हिंदी भाषी स्कूलों से शिक्षित हुए हमारे देश के कई युवावर्ग जो अपने आप को अंगेजी भाषा बोलने वालों के समक्ष हीन भावना से बचने की कोशिश में उपहास का पात्र बन जाते है ,जबकि हम सहजता से हिंदी में बोल कर अपनी बात को सरलता से अभिव्यक्त कर सकते है | क्या हमारी मानसिकता अभी भी अंग्रेजों की गुलाम बनी हुई है ?क्या पढ़े लिखे होने का अर्थ केवल अंग्रेजी का ज्ञान होना है ?क्या बुद्धिजीवी सिर्फ अंग्रेजी भाषी ही हो सकते है ?ऐसे कई अनगिनत प्रश्न है जो भारत की प्रगति के आड़े आ रहे है ,इसके लिए कौन दोषी है ?कब तक इस देश की विकलांग शिक्षा प्रणाली को हम घसीटते जाएँ गे ? क्या कभी हिंदी भाषी सरकारी स्कूलों में पढने वाले छात्रों और अंग्रेजी भाषी स्कूलों में पढने वाले छात्रों के बीच बढ़ती हुई खाई भर पाए गी ? हमारी शिक्षा प्रणाली में स्नातक होने के लिए छात्रों को अंग्रेजी विषय लेना और उसमे उतीर्ण होना आवश्यक है ,क्यों अंग्रेजी की तरह ही हिंदी भाषा को भी शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत मुख्यधारा में नही लाया जा सकता जबकि इस दुनिया का हर देश अपनी शिक्षा प्रणाली में अपने देश की भाषा को प्राथमिकता देते है ,जैसा की रूस में शिक्षा ग्रहण करने के लिए रूसी भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है और ,चीन में शिक्षा लेने के लिए चीनी भाषा आनी चाहिए तो भारत में हिंदी को क्यों नही प्राथमिकता दी जाती ?जब तक हमारी शिक्षा प्रणाली में हिंदी को उचित स्थान नही मिलता तब तक हिंदी सम्मानजनक रूप से मुख्य धारा में उचित स्थान कैसे प्राप्त कर सकती है | हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जिसने अनेकता में एकता को बाँध रखा है ,गीतकार इकबाल का लिखा गीत सारे ”जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा”की पंक्ति ,”हिंदी है हम वतन है हिन्दोस्तान हमारा ”ने स्वतंत्रता की लड़ाई के समय सभी धर्मों के लोगों को एकजुट कर महत्वपूर्ण योगदान दिया था ,इस में कोई दो राय नही कि सम्मान की हकदार है हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी, हमारे भारत की शान है हिंदी ,केवल यही एक भाषा है जिसे अनेक राज्यों में बोला जाता है|आज़ादी के बाद हमारे संविधान ने इसे राज भाषा का मान दिया जिसके अनुसार सभी राजकीय कार्य हिंदी भाषा में ही होने चाहिए ,लेकिन इस भाषा का उपयोग करते समय कई बार ऐसे जटिल शब्द प्रयोग में लाये जाते है जिनके अर्थ समझना थोड़ा कठिन हो जाता है| अगर इस भाषा को जटिल न बना कर हम इसे सरल और व्यवहारिक रूप में इस्तेमाल करें तो न केवल इसका रूप निखरेगा बल्कि इस भाषा को अधिक से अधिक लोग इस्तेमाल करेने लगेंगे |
|

हिंदी हमारी
पहचान
अपनी
जान हमारी
……………

राष्ट्र की भाषा
मिले सम्मान इसे
है मातृ भाषा
……………..

आन है यह
भारत हमारे की
शान है यह

जय भारत जय हिंदी

<><><><> Aapka kmsraj51 <><><><>

Note::-


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हिंगलिश एक वरदान !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

हिंगलिश शब्द हिंदी और इंग्लिश से मिलकर बना है जिसका अर्थ है हिंदी और इंग्लिश का आपस में समावेश कर लिखित या मोखिक रूप में नई भाषा का प्रयोग करना|आज कल हर माँबाप अपने बच्चे को अंग्रेजी माध्धम स्कूल में पढ़ाना चाहता है ताकि जिन्दगी की दौड़ में उनका बच्चा पीछे ना रह जाये| चहू ओर अंग्रेजी का ही बोलबाला है | बेशक बच्चा स्कूल में अंग्रेजी में पढ़ता लिखता है पर आज भी उसकी मातरभाषा हिंदी ही है | घर आकर वो अपने माँ पापा, दादा दादी से हिंदी में ही बात करता है | हाँ उसमे अंग्रेजी के शब्द मिले होते है|

भाषा संचार का साधन है,जो एक दुसरे को करीब लाती है ना कि एक दुसरे से दूर करती है | पुरातन समय में में हिंदी की उत्पति संस्कृति से हुई थी | हिंदी में बहुत से ऐसे कठिन शब्द थे जिनका रोज की बोलचाल की भाषा में प्रयोग करना मुश्किल था नतीजन हिदी ने अपने आप को सवारना शुरू कर दिया| कुछ देशी विदेशी भाषाओँ को ग्रहण किया ताकि लोग आपसे में आसानी से बातचीत कर सके|यह शब्द आज हिंदी शब्दकोष के अभिन्न अंग बन गये है |जैसे :-
विद्धालय – स्कूल
चलचित्र -टेलीविज़न
दूरभाष -टेलीफोन
लोपथ्गामिनी -रेलगाड़ी
कंठलंगोट-नेकटाई
उपरोक्त हिंदी के शब्दों के स्थान पर अंग्रेजी के शब्द ही प्रयोग किये जाते है | जो आसान भी है| इस प्रकार अगर हिंगलिश का प्रयोग करने से अपने विचारो को आसानी से व्यक्त किया जा सकता है तो मेरे ख्याल से हिंगलिश में कोई बुराई नही| बल्कि अब तो हिंगलिश हमारे खून में रस गयी है अमीर,गरीब ,शहरी,ग्रामीण,बच्चा बुजर्ग हर व्यक्ति जाने अनजाने ही हिंगलिश शब्दों का प्रयोग करता है |
दूसरा वर्तमान युग कंप्यूटर का युग है | तकनिकी विकास तीव्र गति से हो रहा| जिस वजह से भारत में अंग्रेजी तेजी से अपने पाँव पसार रही है|बेशक आज कई भाषाओ में सॉफ्टवेर बनने शुरू हो गये है बाबजूद इसके युवा वर्ग का झुकाव अंगेजी की तरफ ही ज्यादा है जिससे हिंदी को नुक्सान होने लगा पर तकनीकी विकास हिंगलिश को एक वरदान के रूप में लेकर आया | जो लोग हिंदी बोल तो सकते है पर लिख नही सकते जिस कारण से वो हिंदी से टूट चुके थे उनके के लिए हिंगलिश एक जादुई कलम के रूप में उभर कर आई उनको लिखने की क्षमता प्रदान की| फेस बुक,ट्विटर,जागरण जंक्शन का हिंदी ब्लाग ,आदि उदाह्रने है जिसमे हिंगलिश ने हिंदी के प्रयोग को व्यापक बनाया है
तीसरा आज भी हिंदी में टाइप करना मुश्किल है |बहुत कम ऐसे स्थान है जहाँ पर हिंदी की टाइपिंग सिखाई जाती है| हिंगलिश इस लिए भी सफलता की सीड़ियाँ चढ़ रही है क्युकी हिंगलिश में लिखना ज्यादा आसान है जिससे हर आम आदमी अपने भाव उसी भाषा में लिख सकता जिस में वो सोचता, समझता और बोलता है| इसके इलावा हिंगलिश उन लोगो के लिए भी उत्तम है जो बहुत ज्यादा अच्छी अंग्रेजी नही जानते पर साधारणता अंग्रेजी लिख पढ़ लेते है हिंगलिश के द्वारा वोह हर बात दुसरो के साथ सांझी कर सकते है
मैं अपनी ही उदारण लेती हूँ| लिखने का शोंक मुझे शुरू से ही था पर मुझे कोई ऐसी वेबसाइट नही मिली.जिस पर मैं अपने भावों को हिंदी में उकेर सकू इसके लिए पहले अंग्रेजी में लिल्खो फिर ट्रांसलेट करो इन मुश्किलों के कारण मेरे लिखने का उत्साह ठंडा पड़ गया पर फिर मुझे जागरणजंक्शन मिला जिस पर हिंगलिश के द्वारा मैं अपने विचारों को आप से साँझा करने लगी इस प्रकार हिंगलिश ने मुझे लिकने का और अपने विचार व्यक्तकरने का मौका दिया इस तरह हिंदी टाइपिंग आ नाते हुए भी मैं अपने भावों को हिंदी में व्यक्त कर पाई मेरे जैसी अनेको ऐसे इंसान होगे जिनके लिए हिंगलिश जादुई कलम साबित हुई है जिससे हिंदी का हनन नहीं बल्कि हिंदी को बढ़ावा ही मिल रहा है !!

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