फूल – हिंदी कविता

Kmsraj51 की कलम से…..

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 – Poem on Flowers in Hindi !!

रंगों की पहचान है फूल
हम सबकी मुस्कान है फूल
ऋतु बसंत की शान है फूल
ईश्वर का वरदान है फूल.

काँटों में भी ये उग जाते
हर मुश्किल को धता बताते
कीचड़ में भी ये खिल जाते
फिर भी सबके मन को भाते.

ख़ुश्बू की पहचान है फूल
माँ धरती की आन है फूल
सुन्दरता का मान है फूल
उपवन की तो जान है फूल.

मिलकर रहना ये सिखलाते
भेदभाव ना ये दिखलाते
कोमलता का पाठ पढ़ाते
मुस्काना हमको सिखलाते.

रंग-बिरंगे प्यारे फूल
सबसे सुन्दर न्यारे फूल
जांत-पांत से परे है फूल
लाल, गुलाबी, हरे ये फूल.

Note::-

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खुद को साबित करने के लिए मौका मिलने के आप हकदार हैं। सफलता की नींव आप खुद हैं। 

दूसरे क्या सोच रहे हैं, इस बारे में अनुमान लगाते रहना नकारात्मक सोच की निशानी है।

 

 

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हम प्रेम करें और वो तंग करें !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

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हर रिश्ते में हम यही चाहते हैं कि दूसरा हमें समझे, और वैसा ही बरताव करे जैसा हम चाहते हैं। जब ऐसा नहीं हो पाता तो रिश्ते में कड़वाहट और फिर दरार आनी शुरु हो जाती है। अगर हम उस दरार को बढ़ने से रोक नही पाए तो रिश्ते टूट भी जाते हैं।
आप इस दुनिया में ज़िंदगी जी रहे हैं तो जाहिर है कई तरह के पेचीदा रिश्ते बनते ही रहेंगे। आपको लोगों की सीमाओं और क्षमताओं को समझना होगा, और फिर सोचिए कि आप क्या कर सकते हैं; जो आप कर सकते हैं वो करिए। तभी आपको हालात को अपने मुताबिक बदलने की शक्ति मिल पाएगी। अगर आप इस बात का इंतज़ार करेंगे कि लोग आपको जान-समझ कर आपके मुताबिक काम करेंगे तो यह बस खयाली पुलाव है; ऐसा कभी नहीं होने वाला।
रिश्ते जितने करीबी होंगे उनको समझने के लिए आपको उतनी ही ज़्यादा कोशिश करनी होगी। एक आदमी के साथ ऐसा हुआ कि वह कई महीनों के लिए ‘कोमा’ में जाता और फिर होश में आ जाता। ऐसा काफी दिनों से चलता आ रहा था। उसकी पत्नी दिन-रात उसके सिरहाने बैठी रहती। एक बार जब उसको होश आया तो होशो-हवास के कुछ ही पलों में उसने अपनी पत्नी को और पास आने का इशारा किया। जब वह उसके करीब बैठ गयी तो उसने कहना शुरु किया, “मैं सोचता रहा हूं……… तुम मेरी ज़िंदगी के हर बुरे दौर में मेरे साथ रही हो। जब मेरी नौकरी छूट गयी तो तुम मेरे साथ थी। जब मेरा कारोबार ठप्प हो गया तो तुम दिन-रात काम करके घर चलाती रही। जब मुझे गोली मारी गयी तब भी तुम मेरे पास थी। जब उस कानूनी लड़ाई में हमने अपना घर खो दिया तब भी तुम मेरे बिल्कुल पास थी। अब मेरी सेहत कमज़ोर हो चली है तब भी तुम मेरे बगल में हो। जब मैं इन सब बातों पर गौर करता हूं तो मुझे लगता है कि तुम मेरे लिए हमेशा दुर्भाग्य ही लाती रही हो!”

ऐसा नहीं है कि दूसरे इंसान में समझदारी नाम की कोई चीज़ ही नहीं है। अपनी समझदारी से आप ऐसे हालात पैदा कर सकते हैं कि दूसरा इंसान आपको बेहतर ढंग से समझ सके। दूसरे इंसान की सीमाओं को समझे बिना, उसकी जरूरतों को जाने बिना, उसकी काबिलियत और संभावनाओं को आंके बिना अगर आप यह उम्मीद करते हैं कि वह हरदम आपको जान-समझ कर आपके अनुसार चलता रहे, तो फिर लड़ाई के अलावा और क्या होगा! यह तो होना ही है। ऐसा इसलिए होता है कि आपकी और उनकी सोच की सीमा-रेखा बिलकुल अलग-अलग है। अगर आप इस एल.ओ.सी. को पार कर जाएंगे तो फिर उनको गुस्सा आना लाजिमी है। और अगर वे पार करें तो आपका नाराज़ होना लाजिमी है।

अगर आप अपनी समझ की सीमा को इतना बढ़ा लें की उनकी समझ भी उसमें समा जाए तो आप उनकी सीमाओं और क्षमताओं को अपना सकेंगे। हर इंसान में कुछ चीज़ें सकारात्मक होती हैं और कुछ नकारात्मक। अगर आप इन सब चीज़ों को अपनी समझ में शामिल कर लेंगे तो आप रिश्ते को अपने मुताबिक ढाल सकेंगे। अगर आप इसको उनकी समझ पर छोड़ देंगे तो यह महज संयोग होगा कि कुछ अच्छा हो जाए। अगर वे उदारमना हैं तो आपके लिए सब-कुछ बहुत अच्छा होगा और नहीं तो रिश्ता टूट जाएगा।

मैं आपसे बस यह पूछ रहा हूं: क्या आप चाहते हैं कि आप खुद इस बात को तय कर सकें कि आपकी ज़िंदगी के साथ क्या हो? रिश्ते चाहे निजी हों या व्यावसायिक, राजनीतिक, या किसी और तरह के हों, क्या आप नहीं चाहते कि ये आप तय करें कि आपकी ज़िंदगी में क्या होना चाहिए? अगर आप ऐसा चाहते हैं तो ये ज़रूरी है कि आप हर चीज़ और हर इंसान को अपनी समझ में शामिल कर लें। आपको अपनी समझ का दायरा इतना ज़्यादा बढ़ाना होगा कि आप लोगों के पागलपन तक को समझ सकें। आपके इर्द-गिर्द बड़े अच्छे लोग हैं जो कभी-कभार कुछ पलों के लिए पगला जाते हैं। अगर आप यह बात नहीं समझेंगे, उनके पागलपन को नहीं समझेंगे तो उनको निश्चित रूप से खो देंगे। अगर समझते हैं तो फिर यह भी आप जान जाते हैं कि उनसे कैसे पेश आया जाए।

ज़िंदगी हमेशा सीधी लकीर की तरह नहीं होती। इसे चलाने के लिए आपको बहुत-कुछ करना होता है। अगर आप अपनी समझ को किनारे कर देंगे तो आपकी काबिलियत घट जाएगी। सवाल चाहे निजी रिश्तों का हो या फिर व्यावसायिक प्रबंधन का दोनों के लिए आपको एक विशेष समझ चाहिए; वरना आपके रिश्ते कामयाब नहीं हो पायेंगे।

Note::-

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माँ दुर्गा का अनुपम पर्व !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

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जब हम भय की जगह निर्भय होकर प्रत्येक कठिनाई को परास्त करने में सक्षम हो जाते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं तब शक्ति की कृपा का अनुभव होने लगता है। माँ दुर्गा शक्ति का रूप हैं। रणक्षेत्र में श्री कृष्ण ने युद्ध शुरु होने से पहले अर्जुन को माँ शक्ति की उपासना और आह्वान करने के लिए कहा था, जिससे न्यायसंगत शक्ति के साथ सफलता प्राप्त हो। जीवन भी एक प्रकार का संग्राम है। इसमें पल-पल परिस्थितियाँ बदलती रहती है। विपरीत परिस्थिती में भी स्वयं को कायम रखने के लिए एक विषेश प्रकार की शक्ति की आवश्यकता होती है। जो जीवन मझधार में अटकी नैया को सकुशल अपने लक्ष्य तक पहुँचाने में मदद करती है। ऐसी ही अपरिमित शक्ति का भंडार गायत्री मंत्र (ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुवर्रेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्) के तीसरे अक्षर ‘स’ में समया हुआ है। जो शक्ति की प्राप्ति और सदुपयोग की शिक्षा देता है।

शक्ति और सत्ता, ईश्वर कृपा से प्राप्त होने वाली पवित्र धरोहर है, जो मनुष्य को इसलिए दी जाती है कि वह निर्बलों की रक्षा कर सके। परंतु यत्र-तत्र अक्सर देखने को मिल जाता है कि दुर्बल सबलों का आहार हैं। शक्ति तो वह तत्व है जिसके आह्वान से अविद्या, अंधकार तथा सभी परेशानियों का अंत हो जाता है। मन में शक्ति का उदय होने पर साधारण मनुष्य भी गाँधी, आर्कमडीज, कोलंबस, लेनिन, आइंस्टाइन जैसी हस्ती बन जाते हैं। बौद्धिक बल की जरा सी चिंगारी तुलसी, सूर, वाल्मिकी, कालीदास जैसे रचनाकारों को जन्म दे देती है।

माँ के इस अनुपम पर्व पर हम सभी अष्टभुजी दुर्गा की पूजा करते हैं। आठ भुजाओं से तात्पर्य हैः- स्वास्थ, संगठन, यश, शौर्य, सत्य, व्यवस्था, विद्या तथा धन। इन आठ विधओं का सम्मलित रूप ही शक्ति है। यदि हम सच्ची लगन के साथ माँ की उपासना निरंतर करें तो जीवन की यात्रा शक्ति की कृपा से निःसंदेह सुखद और सफल हो जाती है।

सर्वसम्पन्न माँ शक्ति की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रही इसी मंगल कामना के साथ कलम को विराम देते हैं।

Note::-

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Hello Friends , I am Krishna Mohan Singh

आज़ाद ख्यालों Wala मनमानी बाबू …..

दोस्तों द्वारा मैं Simple, KMS, Rajyogi, 21st Century Yug-Purush, KMSRAJ51, KRISHNA, PRABHU Ji, Always Positive Thinker, Sweet, Cute, Innocent, Intelligent, Sensitive, Emotional, Loving, Caring, Logical, Thought Provoking, Versatile, Profound, Helping और Mad :p जैसे कई प्यारे-प्यारे शब्दों से Navaja Gya हूँ. वैसे इस list में मैं अपनी ओर से Rational और Unbiased ये दो शब्द और जोड़ना Chahta हूँ. क्योंकि गलत बातों और गलत लोगों का समर्थन मैं नहीं कर Pata चाहे उसमें मेरा स्वार्थ ही क्यूँ ना छिपा हो. किसी की नेतागिरी और अच्छे विचारों को कैद करने और दबाने की कोशिश यह भी मुझसे बर्दाश्त नहीं होता. मैं आज़ाद हूँ और हमेशा आज़ाद रहना Chahta हूँ.

मैंने यह Website (https://kmsraj51.wordpress.com/) क्यों बनायी ?

 अपने जीवन को अपनी क्षमता के अनुरूप सार्थक बनाना Chahta हूँ तो यह Blog भी उसी दिशा में उठाया गया मेरा कदम है. सामाजिक मुद्दों ( Positive Thoughts & Spirituality ) पर लिखना मुझे बहुत पसंद है. संवेदनशील हूँ इसलिए ऐसी बातें बहुत जल्दी मेरा ध्यान आकर्षित करती है.

 सामाजिक बुराइयों का खात्मा, लोगों में जागरूकता पैदा करना, धर्म के सही और सच्चे स्वरुप की रक्षा करना और उसे जन-जन तक पहुँचाना यही इस blog का उद्देश्य है.

 आज दुनिया की सारी समस्याओं की जड़ नैतिक मूल्यों (Moral Values) का अवमूल्यन है. मुझसे किसी ने कहा था मेरे शब्दों में दुनिया को बदलने की ताकत है. बस इसी ताकत को आजमाना Chahta हूँ और इस blog के माध्यम से मानव मूल्यों की रक्षा करना Chahta हूँ. अगर एक व्यक्ति की भी सोच सही दिशा में बदलती है तो मेरा लिखना सार्थक होगा.

 सरल हिंदी भाषा में अपने विचारों को जन-जन तक पहुँचाना भी इस blog का उद्देश्य है. कहीं-कहीं Hinglish का प्रयोग इसलिए किया गया है क्योंकि यह technical कारणों से blog के लिए जरुरी है और आज की युवा पीढ़ी को भी यही भाषा सबसे ज्यादा अच्छे तरह से समझ आती है. विचारों को मैं भाषा से ज्यादा महत्त्व Deta हूँ और हर पीढ़ी के लोगों को अपने लेखन से जोड़ना Chahta हूँ. बाकि हिंदी के लिए जो प्यार और सम्मान है वह तो हमेशा रहेगा ही.

 लिखने और पढने वाले लोगों के लिए एक platform उपलब्ध करवाना Chahta हूँ.
 हर विषय पर आसान हिंदी भाषा में content उपलब्ध करवाना भी इस blog का उद्देश्य है.

More Details About Me


Name : Krishna Mohan Singh

Nick Names : Rajyogi, Manmani Babu, Krishna, KMS, KMSRAJ51, Prabhu Ji, 21st Century Yug-Purush, ETC.

Education : MSc-IT from Mahatma Gandhi University

Occupation : Freelance Writing, Teaching, Administrator (IT Software, Hardware & Networking) .

Residence : Chunar, Mirzapur, U.P. India

Hobbies : Writing, Blogging, Drawing, Public Speaking, Playing Badminton & Football, Swimming, Cycling, Shopping, Creative Works ETC.

Religious Views : Humanity and Ahinsa

Languages : Hindi, English, Punjabi, Marathi, Bojpuri

Websites : https://kmsraj51.wordpress.com/

And

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(:-Thank You Friends….. Aapka – kmsraj51 ….. अपना ख्याल रखियेगा -:)