रिश्तों के होते हैं दो छोर, एक सहयोग और एक विश्वास !!

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poetryरिश्तों के होते हैं दो छोर, एक सहयोग और एक विश्वास

रिश्तों के होते हैं दो छोर
एक सहयोग और एक विश्वास

रिश्तों में उठती तब भोर
जब हो उसमें प्रेम और अनुराग

रिश्तों में हो तभी मधुरता
ना हो शक और झूठ की दीवार

रिश्तें बनते तभी अनमोल
जब हो समझ और मधुर व्यवहार

रिश्तों में हो तभी मिठास
जब हो उसमें सांच और सोहार्द

रिश्तों में बन जाती दरार
जब हो दौलत की भूख और स्वार्थ

रिश्तों को बढ़ायें ये आधार
एक मधुर वाणी और दूसरा सम्मान

रिश्तों में पड़ जाती गांठ
जब होती उसमें इर्ष्या और जलन

रिश्तों में हो तभी महोब्बत
जब हो उसमें त्याग और समर्पण

ये कविता मैंने इसलिए लिखी-

क्यूंकि आजकल के रिश्तें ताश के पत्तों की तरह है ।
ना जानें कब और कहाँ पे आकर बिखर जाएँ ।
क्यूंकि आज के रिश्तों में सिर्फ स्वार्थ ही नजर आया ।
रिश्तें चलते हैं दो ही कड़ी पे तू मेरा हैं मैं तेरा हूँ ।
पर आज का रिश्ता दौलत की भूख और जलन से भरा पड़ा हैं ।
ना जाने क्यों लोग ख़ुद ही ख़ुद में खो गए है ।
किसी को किसी की ना तो आस है और ना विश्वास हैं ।
बदलते युग में खो गए ये अनमोल रिश्तें,
हर किसी को रोज मधुर-मधुर रिश्तो की तलाश हैं ।



poetry

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आप भगवान से क्या माँगते हैं, और ईश्वर आपको क्या देता है!!

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आप भगवान से क्या माँगते हैं, और ईश्वर आपको क्या देता है!!

(i) यदि आप भगवान से शक्ति माँगते हैं, तो वह आपको कठिनाई में
डाल देता है, ताकि आपकी हिम्मत बढ़े और आप शक्तिशाली बनें।

(ii) यदि आप भगवान से बुद्धि माँगते हैं, तो वह आपको उलझन मे डाल देता है,
ताकि आप उसे सुलझा सकें और बुद्धिमान होने का परिचय दे सकें।

(iii) यदि आप भगवान से समृद्धि माँगते हैं, तो वह आपको समझ प्रदान करता है,
ताकि आप श्रम करें, योग्यता बढ़ाएँ ओरआपकी समृद्धि हो सकें।

(iv) यदि आप भगवान से प्यार माँगते हैं, तो वह आपको दुखी लोगों के बीच खड़ा कर देता है,
ताकि आपके हाथ मदद के लिए आगे बढ़े, उदार बनें और प्यार करना सीखें।

==>> भगवान आपको वह नहीं देता जो आप माँगते हैं, वह देता है जो आपको चाहिए। इसलिए ईश्वर की रज़ा में खुश रहें वो कभी हमारा बुरा नही करेगा,
वशर्ते हम भी किसी का बूरा ना करे !!!

supreme_soul_9_2kms


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तुम क्यों प्रेम करते हो?

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तुम क्यों प्रेम करते हो?
Why do you love?

प्रेम में तुम न रहो सिर्फ प्रेम रहे-

यह विधि प्रेम से संबंधित है, क्योंकि तुम्हारे शिथिल होने के अनुभव में प्रेम का अनुभव निकटतम है। अगर तुम प्रेम नहीं कर सकते हो तो तुम शिथिल भी नहीं हो सकते। और अगर तुम शिथिल हो सके तो तुम्हारा जीवन प्रेमपूर्ण हो जाएगा।
एक तनावग्रस्त आदमी प्रेम नहीं कर सकता है। क्यों? क्योंकि तनावग्रस्त आदमी सदा उद्देश्य से, प्रयोजन से जीता है। वह धन कमा सकता है, लेकिन प्रेम नहीं कर सकता। क्योंकि प्रेम प्रयोजनरहित है। प्रेम कोई वस्तु नहीं है। तुम उससे अपने अहंकार की पुष्टि नहीं कर सकते हो। सच तो यह है कि प्रेम सबसे अर्थहीन काम है; उससे आगे उसका कोई अर्थ नहीं है, उससे आगे उसका कोई प्रयोजन नहीं है। प्रेम अपने आप में जीता है, किसी अन्य चीज के लिए नहीं।
तुम धन कमाते हो, किसी प्रयोजन से। वह एक साधन है। तुम मकान बनाते हो- किसी के रहने के लिए। वह भी एक साधन है। प्रेम साधन नहीं है। तुम क्यों प्रेम करते हो? किसलिए करते हो?

प्रेम अपना लक्ष्य आप है। यही कारण है कि हिसाब-किताब रखने वाला मन, तार्किक मन, प्रयोजन की भाषा में सोचने वाला मन प्रेम नहीं कर सकता। और जो मन प्रयोजन की भाषा में सोचता है वह तनावग्रस्त होगा। क्योंकि प्रयोजन भविष्य में ही पूरा किया जा सकता है, यहाँ और अभी नहीं।
प्रेम सदा यहाँ है और अभी है। प्रेम का कोई भविष्य नहीं है। यही वजह है कि प्रेम ध्यान के इतने करीब है। यही वजह है कि मृत्यु भी ध्यान के इतने करीब है क्योंकि मृत्यु भी यहाँ और अभी है, वह भविष्य में नहीं घटती।

95 kmsraj51 readers

प्रेम सदा वर्तमान

मृत्यु सदा वर्तमान में होती है। मृत्यु, प्रेम और ध्यान, सब वर्तमान में घटित होते हैं। इसलिए अगर तुम मृत्यु से डरते हो तो तुम प्रेम नहीं कर सकते। अगर तुम मृत्यु से भयभीत हो तो तुम ध्यान नहीं कर सकते।
क्या तुम भविष्य में मर सकते हो? वर्तमान में ही मर सकते हो। कोई कभी भविष्य में नहीं मरा। भविष्य में कैसे मर सकते हो? या अतीत में कैसे मर सकते हो? अतीत जा चुका है, वह अब नहीं है। इसलिए अतीत में नहीं मर सकते। और भविष्य अभी खोया नहीं है, इसलिए उसमें कैसे मरोगे?

मृत्यु सदा वर्तमान में होती है। मृत्यु, प्रेम और ध्यान, सब वर्तमान में घटित होते हैं। इसलिए अगर तुम मृत्यु से डरते हो तो तुम प्रेम नहीं कर सकते। अगर तुम मृत्यु से भयभीत हो तो तुम ध्यान नहीं कर सकते। और अगर तुम ध्यान से डरे हो तो तुम्हारा जीवन व्यर्थ होगा। किसी प्रयोजन के अर्थ में जीवन व्यर्थ नहीं होगा, वह व्यर्थ इस अर्थ में होगा कि तुम्हें उसमें किसी आनंद की अनुभूति नहीं होगी। जीवन अर्थहीन होगा।

क्या तुम भविष्य में मर सकते हो? वर्तमान में ही मर सकते हो। कोई कभी भविष्य में नहीं मरा। भविष्य में कैसे मर सकते हो? या अतीत में कैसे मर सकते हो? अतीत जा चुका है, वह अब नहीं है। इसलिए अतीत में नहीं मर सकते। और भविष्य अभी खोया नहीं है, इसलिए उसमें कैसे मरोगे?

मृत्यु सदा वर्तमान में होती है। मृत्यु, प्रेम और ध्यान, सब वर्तमान में घटित होते हैं। इसलिए अगर तुम मृत्यु से डरते हो तो तुम प्रेम नहीं कर सकते। अगर तुम मृत्यु से भयभीत हो तो तुम ध्यान नहीं कर सकते। और अगर तुम ध्यान से डरे हो तो तुम्हारा जीवन व्यर्थ होगा। किसी प्रयोजन के अर्थ में जीवन व्यर्थ नहीं होगा, वह व्यर्थ इस अर्थ में होगा कि तुम्हें उसमें किसी आनंद की अनुभूति नहीं होगी। जीवन अर्थहीन होगा।

इसलिए पहली चीज कि प्रेम के क्षण में अतीत और भविष्य नहीं होते हैं। तब एक नाजुक बिंदु समझने जैसा है। जब अतीत और भविष्य नहीं रहते तब क्या तुम इस क्षण को वर्तमान कह सकते हो? यह वर्तमान है दो के बीच, अतीत और भविष्य के बीच; यह सापेक्ष है। अगर अतीत और भविष्य नहीं रहे तो इसे वर्तमान कहने में क्या तुक! वह अर्थहीन है। इसीलिए शिव वर्तमान शब्द का व्यवहार नहीं करते; वे कहते हैं; नित्य जीवन। उनका मतलब शाश्वत से है- शाश्वत में प्रवेश करो।

प्रेम पहला द्वार है। इसके द्वारा तुम समय के बाहर निकल सकते हो। यही कारण है कि हर आदमी प्रेम चाहता है, हर आदमी प्रेम करना चाहता है और कोई नहीं जानता है कि प्रेम को इतनी महिमा क्यों दी जाती है? प्रेम के लिए इतनी गहरी चाह क्यों? और जब तक तुम यह ठीक से न समझ लो, तुम न प्रेम कर सकते हो और न पा सकते हो क्योंकि इस धरती पर प्रेम गहन से गहन घटना है।

हम सोचते हैं कि हर आदमी, जैसा वह है, प्रेम करने को सक्षम है। वह बात नहीं है। और इसी कारण से तुम प्रेम में निराश होते हो। प्रेम एक और ही आयाम है। यदि तुमने किसी को समय के भीतर प्रेम करने की कोशिश की तो तुम्हारी कोशिश हारेगी। समय के रहते प्रेम संभव नहीं है।

प्रेम अनंत का द्वार खोल देता है- अस्तित्व की शाश्वतता का द्वार। इसलिए अगर तुमने कभी सच में प्रेम किया है तो प्रेम को ध्यान की विधि बनाया जा सकता है। यह वही विधि है : ‘प्रिय देवी, प्रेम किए जाने के क्षण में प्रेम में ऐसे प्रवेश करो जैसे कि वह नित्य जीवन हो।’

बाहर-बाहर रहकर प्रेमी मत बनो, प्रेमपूर्ण होकर शाश्वत में प्रवेश करो। जब तुम किसी को प्रेम करते हो तो क्या तुम वहाँ प्रेमी की तरह होते हो? अगर होते हो तो समय में हो, और तुम्हारा प्रेम झूठा है, नकली है। अगर तुम अब भी वहाँ हो और कहते हो कि मैं हूँ तो शारीरिक रूप से नजदीक होकर भी आध्यात्मिक रूप से तुम्हारे बीच दो ध्रुवों की दूरी कायम रहती है।

प्रेम में तुम न रहो, सिर्फ प्रेम रहे; इसलिए प्रेम ही हो जाओ। अपने प्रेमी या प्रेमिका को दुलार करते समय दुलार ही हो जाओ। चुंबन लेते समय चूमने वाले या चूमे जाने वाले मत रहो, चुंबन ही बन जाओ। अहंकार को बिलकुल भूल जाओ, प्रेम के कृत्य में घुल-मिल जाओ। कृत्य में इतने गहरे समा जाओ कि कर्ता न रहे।

और अगर तुम प्रेम में नहीं गहरे उतर सकते तो खाने और चलने में गहरे उतरना कठिन होगा, बहुत कठिन होगा। क्योंकि अहंकार को विसर्जित करने लिए प्रेम सब से सरल मार्ग है। इसी वजह से अहंकारी लोग प्रेम नहीं कर पाते हैं। वे प्रेम के बारे में बातें कर सकते हैं, गीत गा सकते हैं, लिख सकते हैं; लेकिन वे प्रेम नहीं कर सकते। अहंकार प्रेम नहीं कर सकता है।

प्रेम ही हो जाओ। जब आलिंगन में हो तो आलिंगन हो जाओ, चुंबन हो जाओ। अपने को इस पूरी तरह भूल जाओ कि तुम कह सको कि मैं अब नहीं हूँ, केवल प्रेम है। तब हृदय नहीं धड़कता है, प्रेम ही धड़कता है। तब खून नहीं दौड़ता है, प्रेम ही दौड़ता है। तब आँखें नहीं देखती हैं, प्रेम ही देखता है। तब हाथ छूने को नहीं बढ़ते, प्रेम ही छूने को बढ़ता है। प्रेम बन जाओ और शाश्वत जीवन में प्रवेश करो।

प्रेम अचानक तुम्हारे आयाम को बदल देता है। तुम समय से बाहर फेंक दिए जाते हो, तुम शाश्वत के आमने-सामने खड़े हो जाते हो। प्रेम गहरा ध्यान बन सकता है – गहरे से गहरा। और कभी-कभी प्रेमियों ने वह जाना है जो संतों ने उस केंद्र को छुआ है जो अनेक योगियों ने नहीं छुआ।

लेकिन जब तक तुम अपने प्रेम को ध्यान में रूपांतरित नहीं करते तब तक यह एक झलक होगी। तंत्र का अर्थ ही है प्रेम का ध्यान में रूपांतरण। अब तुम समझ सकते हो कि तंत्र क्यों प्रेम और कामवासना के संबंध में इतनी बात करता है। क्यों? क्योंकि प्रेम वह सरलतम स्वाभाविक द्वार है जहाँ से तुम इस संसार का, इस क्षैतिज का आयाम का अतिक्रमण कर सकते हो।

काम का काम नहीं रहना है, यही तंत्र की शिक्षा है। उसे प्रेम में रूपांतरित होना ही चाहिए। और प्रेम को भी प्रेम ही नहीं रहना है, उसे प्रकाश में, ध्यान के अनुभव में, अंतिम, परम रहस्यवादी शिखर में रूपांतरित होना चाहिए। प्रेम को रूपांतरित कैसे किया जाए?

अगर यह यात्रा ध्यानपूर्ण हो जाए, अर्थात अगर तुम अपने को बिलकुल भूल जाओ और प्रेमी-प्रेमिका विलीन हो जाएँ और केवल प्रेम प्रवाहित होता रहे, तो – -शाश्वत जीवन तुम्हारा है।’

– तुम क्यों प्रेम करते हो? विचार ओशो द्वारा /////

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नवरात्रि मंत्र-नवरात्रि पूजा विधि हिंदी में॥

नवरात्रि मंत्र-नवरात्रि पूजा विधि हिंदी में॥

Kmsraj51 की कलम से…..

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“मां दुर्गा के नौ रूप”

1) शैलपुत्री : शैल” का मतलब पहाड़ है,”बेटी पुत्री” का मतलब है, इन्हे पर्वत हिमवान राजा की बेटी, कहा जाता है। माँ शैलपुत्री माँ दुर्गा का पहला स्वरूप हैं, इनके दो हाथों में त्रिशूल और एक में कमल प्रदर्शित हैं। नवरात्र के पहली रात इनकी पूजा की जाती हैं।

2) ब्रह्मचारिणी : माँ ब्रह्मचारिणी माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं… यहाँ “तप” “ब्रह्मा का मतलब है” इस देवी की मूर्ति बहुत सुंदर हैं… यह प्यार और वफादारी समर्पित करती हैं। भ्रंचारिणी ज्ञान और ज्ञान का भंडार है। मोती उनके सबसे सुंदर गहने हैं।

3) चंद्रघण्टा : माँ दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम है। उसके माथे में एक चाँद आधा परिपत्र है। वह उज्ज्वल हैं, उनका रंग स्वर्ण हैं, उनके दस हाथ और तीन आखें है, उनके हाथ आठ हथियार प्रदर्शित करने के लिए है, जबकि शेष दो वरदान देने और रोकने के नुकसान के इशारों को प्रदर्शित हैं।

4) कूष्माण्डा : चौथी शक्ति का नाम हैं। उनके पास आठ हथियार, वह एक हथियार और एक माला पकड़े बाघ पर बैठे चमक उत्पन्न करती हैं। इनकी पूजा नवरात्र के चौथे दिन की जाती हैं।

5) स्कंद माता : दुर्गा की पाँचवी शक्ति का नाम हैं। वह एक शेर पर बैठी अपनी गौद में बेटा स्कंद रखती है। वह तीन आँखें और चार हाथ को प्रदर्शित करता है, दो हाथ, कमल मानती है जबकि अन्य दो हाथ प्रदर्शन बचाव और मुद्राएं देने, को समर्पित करतीं हैं।

6) कात्यायनी : भरपूर बाल और हाथ 4, 2 एक क्लीवर और एक मशाल पकड़े, जबकि शेष 2 “देने” और “रक्षा” की मुद्राएं हैं के साथ काले रंग की त्वचा (या नीले रंग)। उसका वाहन एक वफादार गधा है। अंधकार और अज्ञान का नाश। माँ कालरात्रि माँ दुर्गा का छठा स्वरूप हैं। यह अंधेरे को नष्ट करती हैं।

7) कालरात्रि : दुर्गा माँ की सातवी शक्ति का नाम हैं। भरपूर बाल और हाथ 4, 2 एक क्लीवर और एक मशाल पकड़े, जबकि शेष 2 “देने” और “रक्षा” की मुद्राएं हैं के साथ काले रंग की त्वचा (या नीले रंग). उसका वाहन एक वफादार गधा है।

8) महागौरी : माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। इनकी उपासना से भक्तों को सभी कल्मष धुल जाते हैं, पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट हो जाते हैं। वह एक शंख, चाँद और जैस्मीन के रूप में सफेद है। वह आठ साल की उम्र की है। चार हथियार और सभी साथ टैग की गईं शक्तीस के खूबसूरत रंग के साथ, वह अक्सर एक सफेद या हरे रंग की साड़ी में तैयार रहती हैं.. वह अपने पास एक ड्रम और एक त्रिशूल रखती है और अक्सर एक बैल की सवारी करती हैं।

9) सिद्धिदात्री : दुर्गा जी का सिद्धिदात्री अवतार सर्व सिद्धियों की दाता “माँ सिद्धिदात्री” देवी दुर्गा का नौवां व अंतिम स्वरुप हैं। नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन के साथ ही नवरात्रों का समापन होता है।


“नवरात्रि पूजा विधि”

=> मां दुर्गा की पहली स्वरूपा और शैलराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री के पूजा के साथ ही नवरात्रि पूजा आरम्भ हो जाती है। नवरात्र पूजन के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ इनकी ही पूजा और उपासना की जाती है। माता शैलपुत्री का वाहन वृषभ है, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प रहता है। नवरात्र के इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को ‘मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं और यहीं से उनकी योग साधना प्रारंभ होता है। नवरात्रि के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा-वंदना इस मंत्र द्वारा की जाती है…..

वंदे वाद्द्रिछतलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम |
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्‌ ||

=> माँ ब्राहमाचारिणी की पूजा नवरात्र के दूसरे दिन की जाती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी प्यार और वफ़ादारी का प्रतीक है। इनकी पूजा करने से व्यक्ति आलस्य, विराग छोड़ देता हैं और वह कर्तव्य के पथ से विचलित नहीं होता। माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से उसकी सफलता और जीत हमेशा और हर जगह होती हैं। माता पार्वती मेडिटेटेड तो गेट लॉर्ड शिवा आस हज़्बेंड आंड ड्यू तो तीस शी इस कॉल्ड ब्रह्मचारिणी। माता ब्रह्मचारिणी इस वर्षिप्ड आंड फास्ट इस ओब्ज़र्व्ड तो गेट हेर ब्लेससिंग्स। इस दिन माँ ब्रह्मचारिणी को चीनी का भोग लगाया जाता है। जिससे परिवार के सदस्यो की ऊमर बढ़ती हैं। नवरात्र के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा इस मंत्र द्वारा की जाती हैं…..

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू ।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ॥

=> मां दुर्गा की 9 शक्तियों की तीसरी स्वरूपा भगवती चंद्रघंटा की पूजा नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है। माता के माथे पर घंटे आकार का अर्धचन्द्र है, जिस कारण इन्हें चन्द्रघंटा कहा जाता है। इनका रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। माता का शरीर स्वर्ण के समान उज्जवल है। इनका वाहन सिंह है और इनके दस हाथ हैं जो की विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र से सुशोभित रहते हैं। सिंह पर सवार मां चंद्रघंटा का रूप युद्ध के लिए उद्धत दिखता है और उनके घंटे की प्रचंड ध्वनि… असुर और राक्षस काे भयभीत करते हैं। भगवती चंद्रघंटा की उपासना करने से उपासक आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त करता है और जो श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक दुर्गा सप्तसती का पाठ करता है, वह संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान को प्राप्त करता है। नवरात्र के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा-वंदना इस मंत्र के द्वारा की जाती है…..

पिण्डज प्रवरारुढ़ा चण्डकोपास्त्र कैर्युता |
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्र घंष्टेति विश्रुता ||

=> माँ कूष्माडा की अराधना नवरात्र के चौथे दिन की जाती हैं। मां का यह दिव्य स्वरूप हमारे भतीर के रोग, तमस, शोक, विकास, अज्ञान, आलस्य व दुर्भावना आदि को दूर करता है। आज के दिन मां कूष्माडा की आराधना भक्तों को जड़ से चेतन की ओर ले जाती है व्यक्ति को यश, बल, बुद्धि प्रदान करती है। मां सिंह पर सवार अष्टभुजाधारी, मस्तक पर रत्नजडि़त स्वर्ण जडि़त मुकुट पहने अपने भक्तों को आर्शीवाद देने प्रकट होती है। आज के दिन मां के कूष्माडा रूप की स्तुति ही भक्तों को ढेरों कष्टों से मुक्त कराती है। मां के इस रूप पर कुम्हड़े (कद्दू) की बलि देनी की परम्परा है जिससे व्यक्ति के भीतर बसे हिंसक जीवन का नाश होता है। भक्त अपनी मां की आराधना कर कठिन लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकता है। नवरात्र के चौथे दिन माता कूशमंदा की पूजा इस मंत्र द्वारा की जाती हैं…..

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥

=> स्कंद माँ की पूजा नवरात्रि के पाँचवे दिन पर की जाती हैं। स्कंदमाता कुमार कार्तिकाए की माता हैं। यह दिन योगियो और साधको के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन होता हैं। इस दिन भक्त का मन विसुद्धा काकरा तक पहुँच जाता है और उसमें रहता है। स्कंदमाता के रूप में देवी की पूजा करके, भक्त की सभी इच्छाएँ को पूरा हो जाता है, उसकी दुनिया खुशियों से भर जाती हैं। भगवान स्कंद की पूजा करना स्वतः अपने बच्चे की पूजा करने के रूप में साधक उसकी पूजा करने के लिए विशेष रूप से चौकस होना चाहिए। सूर्य देवता के इष्टदेव होने के नाते, वह एक असामान्य और उसके भक्त पर चमक रखती हैं। वह हमेशा एक अदृश्य दिव्य प्रभामंडल है। हमे पूरी ईमानदारी से स्कंदमाता की पूजा करनी चहिये। इस दिन माँ को केले का भोग लगाना चाहिए। माँ अपने भक्तो की सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं। स्कंद माँ की पूजा करने से सारी बीमारियों से मुक्ति मिलती हैं। नवरात्र के पाँचवे दिन स्कंद माता की पूजा इस मंत्र द्वारा की जाती हैं…..

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया ।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ॥

=> माँ कत्यायनी की पूजा नवरात्रि के छठे दिन पर की जाती हैं। मां कात्यायनी की पूजा से हम शक्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं जो हमारे दुश्मन के साथ लड़ाई के लिए मददगार है। नवरात्र के छठे दिन पर निम्न मंत्र का जाप करें …..

चन्द्रहासोज्वलकरा शार्दूलवरवाहना ।
कात्यायनी शुभं दघाद्देवी दानवघातिनी ॥

मां कात्यायनी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए योगियों और साधकों द्वारा इस दिन पर आज्ञा चक्र के लिए अभ्यास की तपस्या करते हैं। इस दिन माँ कत्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए। इस दिन हमे लाल और सफेद कपड़े पहनने चाहिए। माँ अपने भक्तो की सभी समस्याओ को हल करती हैं। देवी की पूजा करने से व्यक्ति खुद में ज्ञान की एक मजबूत भावना महसूस कर सकता हैं।

=> नवरात्र के सातवे दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती हैं। माँ कालरात्रि की पूजा दुर्गा पूजा का सातवें दिन तांत्रिकों के लिए अपने अनुष्ठान के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन है। वे तांत्रिक अनुष्ठानों के साथ आधी रात के बाद देवी कालरात्रि की पूजा करते हैं। इस दिन देवी की आँखे खोली रहती हैं। इस दिन ब्रह्मांड में हर सिद्धि के दरवाजे खुल जाते है। भक्त मंदिर में इकट्ठा होने लगते हैं और पूरी भक्ति और समर्पण के साथ पूजा करते है। इस दिन विशेष प्रसाद और अनुष्ठान के साथ आधी रात को देवी की पूजा की पूजा का प्रदर्शन देखा जा सकता हैं। इस दिन माँ कालरात्रि को शराब भी चड़ाई जाती हैं। सिद्ध योगी और साधकों जो शशास्त्रा चक्र पर इस दिन पर तपस्या अभ्यास करते हैं। कलश के साथ देवी के सभी ग्रहों और परिवार के सदस्यों के साथ देवी के सभी ग्रहों की पूजा की जाती हैं। उसके बाद एक जप, “याइया देवया ततमिंद जग्दत्मशकता निशेशदेवगंशक्तिसमुहमूरत्या, … भगवान शिव और ब्रह्मा की पूजा देवी की पूजा करने के बाद की जाती है। माँ कालरात्रि की पूजा करने से सभी दुखो का निवारण होता है। माँ कालरात्रि सदा अपने भक्तो का कल्याण करती हैं। माँ कालरात्रि की पूजा इस मंत्र द्वारा की जाती है…..

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता ।
लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी ॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा ।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी ॥

=> माँ महागौरी की पूजा नवरात्रि के आठवे दिन की जाती हैं। इनकी पूजा करने से भक्त के सारे पाप धूल जाते हैं। माँ की शक्ति अमोघ और तुरंत परिणाम देने वाली हैं। मां महागौरी की पूजा से अविवाहित लड़कियों को अच्छा पति मिलता हैं और विवाहित महिलाओं काे सुखी विवाहित जीवन के साथ धन्य हो जाती हैं। महागौरी शांत, शांतिपूर्ण और शांत बुद्धि में मौजूद है। वह भक्त के दिल में रहती हैं। भक्त को इस दिन लाल, केसर, पीला, सफेद कपड़े पहनने चाहिए। इस दिन पर नारियल का भोग माँ महागौरी को पेश किया जाता हैं… नारियल ब्राह्मण को भी दिया जाता है। इस दिन इस मंत्र का जाप करना चाहिए …..

श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः ।
महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा ॥

सदा सुख और शांति देती हैं महागौरी-

देवी महागौरी बच्चे के साथ निःसंतान जोड़ों की इच्छाओं को पूरा करती हैं। इनकी पूजा करने से सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता हैं।

=> नवरात्र के नौवे दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। देश के कई भागों में यह दिन महानवमी के रूप में मनाया जाता है। माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से माँ प्रत्येक आत्मा को शुद्ध बना देती हैं। लोग इस दिन पर लाल, सफेद रंग के पहन सकते हैं। इस दिन पूजन, अर्चन, हवन, आदि माताजी का प्रदर्शन किया जाता हैं। शंख, चक्र, गदा और कमल माँ सिद्धिदात्री के चार हाथों का प्रतीक है जो हमेशा से हमारी मदद करने के लिए उत्सुक हैं। माँ सिद्धिदात्री की कृपा के कारण मनुष्य की सभी भौतिकवादी इच्छाएँ गायब हो जाती हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन हमे इस मंत्र का जाप करना चाहिए …..

सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि ।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ॥


माँ शैलपुत्री मन्त्र

वंदे वांच्छितलाभायाचंद्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढांशूलधरांशैलपुत्रीयशस्विनीम्॥
पूणेंदुनिभांगौरी मूलाधार स्थितांप्रथम दुर्गा त्रिनेत्रा।
पटांबरपरिधानांरत्नकिरीटांनानालंकारभूषिता॥
प्रफुल्ल वदनांपल्लवाधरांकांतकपोलांतुंग कुचाम्।
कमनीयांलावण्यांस्मेरमुखीक्षीणमध्यांनितंबनीम्॥


माँ ब्रह्मचारिणी मन्त्र

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू ।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ॥

ॐ नमो भगवती ब्रह्मचारणी सर्वजग मोहिनी,
सर्वकार्य करनी,
मम निकट संकट हरणी,
मम मनोरथ पूर्णी,
मम चिंता निवारानी,
ॐ भगवती ब्रह्मचारणी नमो स्वाहा!!


माँ चंद्रघंटा मन्त्र

पिण्डज प्रवरारुढ़ा चण्डकोपास्त्र कैर्युता |
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्र घंष्टेति विश्रुता ||

रहस्यं श्रणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।
श्री चन्द्रघण्टास्य कवचं सर्वसिद्धि दायकम्॥
बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोद्धारं बिना होमं।
स्नान शौचादिकं नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिकम॥
कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च।
न दातव्यं न दातव्यं न दातव्यं कदाचितम्॥

आपद्धद्धयी त्वंहि आधा शक्ति: शुभा पराम्।
अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यीहम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्ट मंत्र स्वरूपणीम्।
धनदात्री आनंददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायनीम्।
सौभाग्यारोग्य दायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्


माँ कूष्माण्डा मन्त्र

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥

हसरै मे शिर: पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्।
हसलकरीं नेत्रथ, हसरौश्च ललाटकम्॥
कौमारी पातु सर्वगात्रे वाराही उत्तरे तथा।
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम।
दिग्दिध सर्वत्रैव कूं बीजं सर्वदावतु॥

दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्।
जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुंदरी त्वंहि दु:ख शोक निवारिणाम्।
परमानंदमयी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥


स्कन्दमाता मन्त्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया ।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ॥

माँ कत्यायनी मन्त्र

चन्द्रहासोज्वलकरा शार्दूलवरवाहना ।
कात्यायनी शुभं दघाद्देवी दानवघातिनी ॥


माँ कालरात्रि मन्त्र

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता ।
लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी ॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा ।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी ॥


माँ महगौरी मन्त्र

श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः ।
महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा ॥

माँ सिद्धिदात्री मन्त्र

सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि ।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ॥

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

परमेश्वर से आस्था !!

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एक कहानी रामकृष्णा जी के सौजन्य से श्री रामा कृष्णा परमंहस हमेशा कहानियों से आत्म विश्वास के महत्ता को दर्शाने और बताने की कोशिश करते थे!

ये कहानी इस तथ्य को पूर्णतया प्रस्तुत करती हैं! कहानी एक ग़रीब किसान की लड़की की हैं जो अलग २ गावों के लोगों को दूध पहुचाने का काम करती थी ! उन्हीं लोगों मे एक पुरोहीत के घर भी दूध पहुचती थी ! उस पुरोहीत के घर जाने के लिए उस ग्वालिन को एक तेज धारा मे बहने वाली नदी को पार करके जाना पड़ता था !

दूसरे लोग उस नदी को एक टूटे से छोटी सी नाव से पार करते थे उसके बदले लोग, नाविक को एक छोटा सा धन का कुछ भाग नाविक को दे देते थे! एक दिन जब उस ग्वालिन को उस पुरोहित के घर आने मे देर हो गई और पुरोहित जो की रोज ताजे दूध से भगवान का अभिषेक करता था और देर हो जाने की वजह से उस पर चिल्लाया की अब मैं इससे क्या कर सकता हूँ? उस ग्वालिन ने कहा की रोज की तरह आज भी मैं सुबह ही घर से निकली थी लेकिन एक ही नाविक उस नदी मे नाव चलता हैं और उसी नाविक के वापस आने के इंतजार करने की वजह से देर हो गई! तब ये सुनकर पुरोहित ने गंभीर मुद्रा धारण करते हुए उसे कहा की लोग तो भगवान का नाम जपते हुए बड़े २ समुन्द्र पार कर जाते हैं और तुम ये छोटी सी नदी पार नही कर सकती?

उस ग्वालिन ने पुरोहित की इस बात को बड़ी ही गंभीरता से लिया! और रोज उस दिन के बाद से पुरोहित को सुबह ठीक समय पर दूध पहुचाने लगी! इतने सुबह सही समय पर ग्वालिन की आते देख, पुरोहित के मन मे उत्सुकता उत्पन्न हुई कि वो रोज सुबह समय पर कैसे आ जाती हैं ! तो एक दिन वो पुरोहित अपने आप को रोक नही पाया और उस ग्वालिन के आते ही पूछा कि अब तो तुम कभी देर नही करती लगता हैं नदी मे और भी नाविक आ गये हैं! तब वो ग्वालिन बोली नही पंडित जी अब तो मुझे नाविक की कोई ज़रूरत ही नही पड़ती ! आप ने ही तो उस दिन कहा था कि लोग बड़े २ समुंद्र भगवान का नाम जप कर पार कर लेते हैं और मैं ये छोटी सी नदी पार नही कर सकती ! तो बस रोज भगवान का नाम जपते हुए मैं वो छोटी सी नदी अब बस ५ मिनट मे पार कर लेती हूँ !

लेकिन उस पुरोहित को उस ग्वालिन की बातों पर विश्वास नही हुआ उसने कहा की तुम उस नदी को कैसे पैदल पार करती हो ये मुझे दिखा सकती हो? तब ग्वालिन और पुरोहित दोनो उस नदी की तरफ चल पड़े! और वो ग्वालिन उस नदी के पानी पर पैदल चलने लगी ये देख कर वो पुरोहित भी उसके पीछे २ नदी पर चलने को आगे बढ़ा लेकिन जैसे ही पैर आगे नदी मे बढ़ाया वो नदी मे गिर पड़ा तब वो ग्वालिन ज़ोर से चिल्लाई की आपने भगवान का नाम नही लिया देखो आपके सारे कपड़े गीले हो गये!

ये भगवान मे विश्वास नही हैं! अगर आप विश्वास नही करते किसी पर तो आप सब कुछ खो देते हैं! विश्वास अपने आप पर और विश्वास भगवान पर यही जीवन का रहस्य हैं! यदि आप सभी तीन सौ और तीस लाख देवताओं में विश्वास है … और अपने आप पर विश्वास नही हैं तो भी आपका उद्धार नही होगा! उस पुरोहित ने उस ग्वालिन को जो कहा उस ग्वालिन ने सच माना और वैसा ही किया लेकिन उस पुरोहित को न अपने द्वारा कही गई बातों पर ही विश्वास था और न ही भगवान पर विश्वास किया!!

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साईं राम साईंश्याम साईं भगवान !!

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“साईं राम साईंश्याम साईं भगवान”

SAI

साईं राम साईंश्याम साईं भगवान

साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |२|
करुणा के सागर दया निधान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

साईं चरण की धुल को माथे जो लगाओगे
पुण्य चारों धाम का शिर्डी में ही पाओगे |
होगा तुम्हारा वहीँ कल्याण
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

कोई शेहेंशा उनको कहें शिव का ही तो रूप हैं
छाया हैं वो धर्म की कर्म की वो धुप है
पढ़के जो आये हैं वेद पुराण
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

मानवता के साईं रवि , दया के साईं चाँद है
साचे प्रेम डोर से रहे वो सबको बांध हैं
मंदिर मस्जिद एक समान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

सबको समझते वो एक सा , राजा हो या रंक हो
भेद और भाव के मिटा रहे कलंक को
सबको समझते निज संतान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

साईं के द्वार हर घड़ी , सत्य की बरखा हो रही
झूठे इस जहान के पाप काले हो रही
करते हैं शंका का समाधान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

दर्द रहित कशिश भरी , साईंसेनिर्मल प्रीत लो
दुश्मनी जो कर रहे , उनके दिल भी जीत लो
सब पे चलते प्रेम के बान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

साईं हमें सिखा रहे , सबका मालिक एक है
एक सी नज़र से वो रहे सभी को देख हैं
करते न सहते जो अभिमान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

साईं के द्वार शीश धर , दो घड़ी जो सो गए
नफरतों के नाग भी , विस रहित वो हो गए
हर एक मुश्किल करते आसान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

साईं के दर असर होता , हर दिली फरियाद का
बे औलाद पा गए सुख वहां औलाद का
बेजान भी वहाँ पा गए जान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

दूर अँधेरा कर रही साईं भजन की रोशिनी
रोग सोग हर रही साईं नाम संजीविनी
श्रद्धा सबूरी का देते है दान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

साफ़ सुद्ध होती है जिन दिलों की भावना
पूरी होती उनकी ही साईं के द्वार कामना
कष्ट मिटाते कष्ट निधान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

साईं की झोली से कभी तुम भबूत ले भी लो
हर बला सेलड़नेकी देव्या शक्ति लेभी लो
जग मेंभडातेभक्तो की शान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

आस्था में गीत के साईं को पुकारते
साईं खेवैया बनके ही उनकी नैया तारते
मन की दशा वो लेते है जान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

चमत्कार साईं बाबा ने जब निराले खेल किये
दिव्या अनोखें पानी से जल गए थे सब दिये
पल में किया चूर था अभिमान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

जिन क्रूर दुष्टों ने डर दिलों में भर दिया
सीधे साधे संत ने सही मार्ग उनको दिखा दिया
दया धर्मं का वो देते हैं ज्ञान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

साईं के द्वार जो झुके , मैल मन का साफ़ कर
कुसूर सबके साईं ने , माफ़ किये उनको अपना कर
कहता तभी है सारा जहान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

दुनिया भर की नेमते , साईंजी के पास हैं
माँग ले जो है माँगना , फ़िर क्यों इतना उदास है
सबको ही सुखका देंगे वरदान
शिर्डी के दाता सबसे महान |
साईं राम साईं श्याम साईं भगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

निश्चय व्रिक्ष्य को यहाँ , फलते हमने देखा है
खोटों सिक्कों को भी तो , चलते हमने देखा है
श्रद्धा का देते सदा वरदान
शिर्डी केदाता सबसेमहान |
साईं राम साईंश्याम साईंभगवान
शिर्डी के दाता सबसे महान |

!!!!! ओम साई राम – ओम साई श्याम !!!!!

Sai-KMS

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मन के हारे हार है मन के जीते जीत !!

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“मन के हारे हार है मन के जीते जीत”

दोस्तों ,

बहुत दिनों से आप अपने आपको थका हुआ और कमजोर महसूस कर रहे हैं! मन में भी नकारात्मक भाव आ रहे हैं ,कोई उमंग महसूस नहीं हो रही है ! जिंदगी बोझिल सी हो रही है! ऐसे में आप किसी डॉक्टर के पास जाते हैं! वो आपकी पूरी जांच करने के बाद गंभीर स्वर में आपसे कहता है,–‘माफ़ कीजिएगा! लेकिन आपकी reports देख कर मुझे लगता है की अगले एक साल में आपको diabetes और heart problem होने वाली है,थोडा अपना ध्यान रखिए!!

आप ये सुन कर shocked हो जाते हैं! लेकिन अब इसके बाद जो आपकी प्रतिक्रिया होती है,वो महत्वपूर्ण है!

इस खबर को सुनने के बाद आप दो तरह से प्रतिक्रिया कर सकते हैं!

पहला, ये सुनते ही आपका मन कहता है, देखा, मैं तो पहले ही कह रहा था कुछ तो गड़बड़ है! तुम बीमार होने वाले हो! आप तुरंत doctor के prediction के आगे हथियार डाल देते हैं! आपकी नकारात्मक सोच आपकी उम्र को 10 साल आगे की स्थिति में पहुंचा देती है!!

आप हताश और निराश से कुर्सी से उठते हैं! किसी पराजित आदमी की तरह अपने कंधे झुका कर clinic से बाहर निकलते हैं! घर आकर चुपचाप या तो बिस्तर या TV के आगे बैठ जाते हैं!

आपके मन में ये prediction मजबूती से बैठ गई है की ये तो होना ही है तो क्यों मैं सुबह जल्दी उठूं ,व्यायाम करूँ, सही आहार लूँ, मेहनत करूँ! ये विचार आपके मनोमस्तिक्ष पर इतनी बुरी तरह हावी हो जाते हैं की सोते, जागते खाते-पीते आप बस ये ही सोचते रहते हैं की अब तो मुझे diabetes और heart problem होने वाली है आखिर अब तो doctor ने भी ये कह दिया है!

आप निरुत्साहित से अपने काम करते हैं! चिंता में TV के सामने बैठ कुछ ना कुछ खाते रहते हैं! आप अपनी चिंता को खाने की आड़ में दबाने की कोशिश करते हैं! फिर ऐसे ही हताशा, निराशा और आलस से भरी आपकी दिनचर्या हो जाती है!!

फिर एक दिन अचानक आपकी तबियत ज्यादा खराब हो जाती है! आप डॉक्टर के यहाँ जाते हैं! आपका सारा checkup करने के बाद doctor बड़े ही निराशा भरे स्वर में कहता है,– ‘मुझे अफ़सोस है! लेकिन मैं आपको ये बताना चाहता हूँ की आपको high BP, diabetes और heart problem हो चुका है! अगर अब भी आप अपना अच्छे से ख्याल नहीं रखेंगे तो गाडी ज्यादा देर और दूर तक नहीं चल पाएगी! आप shocked से सामने दिवार पर लगा कैलेंडर देखते हैं! अरे अभी तो केवल 5 महीने ही गुजरे हैं, डॉक्टर ने तो 1 साल की कहा था! आपकी सोच और मन की हार ने उस भविष्यवाणी को समय से पहले ही सच साबित कर दिया! आप फिर पहले से भी ज्यादा हताश, निराश और झुके हुए कन्धों के साथ clinic से बाहर निकलते हैं! और ये कहानी दोस्तों फिर ज्यादा लम्बी नहीं चलती है ……..!!

वहीं दूसरी तरफ doctor के ये कहते ही, की अगले एक साल में आपको diabetes और heart problem होने वाली है, आपको आपकी अंतरात्मा को एक झटका सा लगता है! आप इस बात को एक चुनोती की तरह लेते हैं! तुरंत आपका मन और आत्मबल एक निर्णय लेते हैं, की अरे ये सिर्फ एक prediction ही तो है, हकीकत नहीं है, और मैं इसे हकीकत बनने भी नहीं दूंगा! आप मन ही मन संकल्पित होते हैं, अपनी पिछली जिंदगी की कमियों, लापरवाहियों और आलस पर एक नजर डालते हैं और तुरंत निर्णय लेते हैं, बस अब और नहीं! अब मेरी जिंदगी, मेरी सेहत मेरे हाथ में है! आपकी सोच पूरा u-turn ले लेती है! आप ये ठान लेते हैं की आज से बल्कि अभी से मैं अपने आप को, अपनी आदतों को बदल दूंगा! इस prediction को मैं झूठा साबित कर के रहूँगा! आप एक संकल्प और मन के विश्वास के साथ कुर्सी से उठते हैं और clinic से बाहर निकलते हैं!!

आप अपनी दिनचर्या को पूरी तरह से बदल देते हैं! जल्दी उठना, ध्यान, व्यायाम, सही आहार, सकारात्मक सोच, श्रद्धा, आशावादिता, उमंग ,उत्साह और पर्याप्त मेहनत को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लेते हैं! कुछ दिनों के बाद जब मन में निराशा के भाव आने लगते हैं, आलस पुनः आप पर हावी होना चाहता है! तो डॉक्टर की भविष्यवाणी को याद कर आप अपनी हताशा को पीछे धकेल देते हैं!

आपका ये संकल्प की इस prediction को मैं सही साबित नहीं होने दूंगा, आप को वापस अपने सेहत के रास्ते पर अग्रसर कर देता है!!

फिर आप कई साल बाद ऐसे ही अपने routine checkup के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं! डॉक्टर बड़ी गर्मजोशी और उमंग से कहता है, -क्या बात है! आपने तो अपना कायाकल्प ही कर लिया है! आप तो पहले से भी ज्यादा सेहतमंद और जवान हो गए हैं! आप मुस्कुरा कर डॉक्टर से हाथ मिलाते हैं और सीटी बजाते हुए क्लिनिक से बाहर आ जाते हैं! और ये कहानी बहुत अच्छे तरीके से बहुत लम्बी चलती है!!

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तो दोस्तों ,
कहानी कैसी लगी? वैसे ये कहानी है ही नहीं! हकीकत है! हम लोगों में से 90 से 95 % लोग पहले वाली सोच के होते हैं, है ना? केवल 5 या 10 % लोग ही दूसरे नजरिये वाले होते हैं! जो अपने पुरुषार्थ, मनोबल और मेहनत से भविष्यवाणी को भी बदल देते हैं! आपके मन की नकारात्मक सोच आपको समय से पहले डूबा भी सकती हैं और सकारात्मक सोच अनेकों ऊँचाइयों तक उठा भी सकती है! इसलिए जिंदगी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और तदुपरांत सार्थक प्रयत्न आपकी सफल, सेहत भरी जिंदगी और उज्जवल भविष्य के लिए अति आवश्यक है! है ना?

तो मन का कैसा नजरिया रखना चाहेंगे आप? आखिर ………..

जैसा नजरिया है आपका, वैसी जिंदगी है आपकी ……………

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