करौंदा : गर्मी के दिनों में आयुर्वेद

kmsraj51 की कलम से

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॰तु ना हो निराश कभी मन से॰

 

करौंदा

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करौंदा-


करौंदे के विषय में हम सब जानते हैं | इसके कच्चे फल खट्टे होते हैं तथा पके हुए फल कुछ मीठे होते हैं | इसकी हमेशा हरी-भरी रहने वाली झाड़ी होती है| इसके कंटक अत्यंत तीक्ष्ण तथा मजबूत होते हैं | आयुर्वेदीय संहिताओं में दो प्रकार के करौंदों का वर्णन प्राप्त होता है (१)करौंदा तथा (२)करौंदी | करौंदे के फल पकने के बाद काले पड़ जाते हैं इसलिए इनको कृष्णपाक फल कहते हैं | आइये जानते हैं करौंदे के कुछ औषधीय प्रयोगों के विषय में –

१- करौंदे के फल की चटनी बनाकर खाने से मसूड़ों के रोग मिटते हैं |

२- पांच मिलीलीटर करौंदा पत्र स्वरस में शहद मिलाकर चटाने से सूखी खांसी में लाभ होता है |

३- करौंदे के पके हुए फलों को खाने से अरुचि तथा पित्त विकारों में लाभ होता है |

४- जलोदर के रोगी को करौंदे के पत्तों का स्वरस पहले दिन ५ मिली,दुसरे दिन १० मिली,इस तरह प्रतिदिन ५-५ मिली बढ़ाते हुए ५० मिली तक सेवन कराएं तथा पुनः घटाते हुए ५ मिली तक प्रयोग करें| इस प्रकार नित्य प्रातःकाल पिलाने से जलोदर में लाभ होता है |

५- पांच ग्राम करौंदे के पत्तों को पीसकर दही के साथ मिलाकर खिलाने से मिर्गी में लाभ होता है |

६- करौंदे के बीजों को पीसकर पैरों पर लगाने से बिवाई (पैरों का फटना ) में लाभ होता है |

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Post Inspired by:

Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj-KMSRAJ51Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj

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