Denial

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Most catastrophes
give fair warning
that are ignored
until it is too late.

Pay attention.
Denial is foolish;
resolve issues
before they
become a crisis.

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ग्रीष्म ऋतू दिनचर्या

kmsraj51 की कलम से

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

ग्रीष्म ऋतू दिनचर्या —

ग्रीष्म ऋतु में सुबह सूर्योदय से पहले उठकर शौच क्रिया एवं स्नान से निवृत्त हो जाने से शरीर में अतिरिक्त उष्णता नहीं बढ़ पाती। कुछ महिलाएँ रसोई घर के काम से निवृत्त होकर दोपहर को स्नान करती हैं। इससे शरीर में उष्णता बढ़ती जाती है। ग्रीष्म ऋतु में ऐसा न करके सूर्योदय से पहले ही स्नान करलें, फिर रसोई घर में काम करें।
– दिन में 1-1 गिलास करके बार-बार ठंडा पानी पीते रहना चाहिए। विशेषकर घर से बाहर निकलते समय एक गिलास ठंडा पानी, बिना प्यास के भी, पीकर ही बाहर निकलना चाहिए। इस उपाय से लू नहीं लगती। इसी तरह रात को 10 बजे के बाद जागना पड़े तो हर घण्टे 1-1 गिलास पानी तब तक पीते रहें जब तक सो न जाएँ। इस उपाय से वात और पित्त का प्रकोप नहीं होता।
– ग्रीष्म ऋतु में साठी के पुराने चावल, गेहूँ, दूध, मक्खन, गौघृत के सेवन से शरीर में शीतलता, स्फूर्ति तथा शक्ति आती है। सब्जियों में लौकी, गिल्की, परवल, नींबू, करेला, केले के फूल, चौलाई, हरी ककड़ी, हरा धनिया, पुदीना और फलों में तरबूज, खरबूजा, एक-दो-केले, नारियल, मौसमी, आम, सेब, अनार, अंगूर का सेवन लाभदायी है।

summer days

– इस ऋतु में दिन बड़े और रात्रियाँ छोटी होती हैं। अतः दोपहर के समय थोड़ा सा विश्राम करना चाहिए। इससे इस ऋतु में धूप के कारण होने वाले रोग उत्पन्न नहीं हो पाते। वात पैदा करने वाले आहार-विहार के कारण शरीर में वायु की वृद्धि होने लगती है।
– रात को देर तक जागना और सुबह देर तक सोये रहना त्याग दें। अधिक व्यायाम, अधिक परिश्रम, धूप में टहलना, अधिक उपवास, भूख-प्यास सहना ये सभी वर्जित हैं।
– इस ऋतु में मुलतानी मिट्टी से स्नान करना वरदान स्वरूप है। इससे जो लाभ होता है, साबुन से नहाने से उसका 1 प्रतिशत लाभ भी नहीं होता। जापानी लोग इसका खूब लाभ उठातेहैं। गर्मी को खींचने वाली, पित्त दोष का शमन करने वाली, रोमकूपों को खोलने वाली मुलतानी मिट्टी से स्नान करें और इस के लाभों का अनुभव करें।
– चन्दन का टिका , इसका लेप लाभकारी है.
-ग्रीष्म ऋतु में सूर्य अपनी किरणों द्वारा शरीर के द्रव तथा स्निग्ध अंश का शोषण करता है, जिससे दुर्बलता, अनुत्साह, थकान, बेचैनी आदि उपद्रव उत्पन्न होते हैं। उस समय शीघ्र बल प्राप्त करने के लिए मधुर, स्निग्ध, जलीय, शीत गुणयुक्त सुपाच्य पदार्थों की आवश्यकता होती है। इन दिनों में आहार कम लेकर बार-बार जल पीना हितकर है परंतु गर्मी से बचने के लिए बाजारू शीत पदार्थ एवं फलों के डिब्बा बंद रस हानिकारक हैं। उनसे लाभ की जगह हानि अधिक होती है। उनकी जगह नींबू का शरबत, आम का पना, जीरे की शिकंजी, ठंडाई, हरे नारियल का पानी, फलों का ताजा रस, दूध आदि शीतल, जलीय पदार्थों का सेवन करें। ग्रीष्म ऋतु में स्वाभाविक उत्पन्न होने वाली कमजोरी, बेचैनी आदि परेशानियों से बचने के लिए धनियापंचक , ठंडाई ,गुलाब शरबत , बेल शरबत आदि ले .
– धनिया पंचकः धनिया, जीरा व सौंफ सम भाग मिलाकर कूट लें। इस मिश्रण में दुगनी मात्रा में काली द्राक्ष व मिश्री मिलाकर रखें।

उपयोगःएक चम्मच मिश्रण 200 मि.ली. पानी में भिगोकर रख दें। दो घंटे बाद हाथ से मसलकर छान लें और सेवन करें। इससे आंतरिक गर्मी, हाथ-पैर के तलुवों तथा आँखों की जलन, मूत्रदाह, अम्लपित्त, पित्तजनित शिरःशूल आदि से राहत मिलती है। गुलकंद का उपयोग करने से भी आँखों की जलन, पित्त व गर्मी से रक्षा होती है।
– गुलाब शरबत- डेढ़ कि.ग्रा. चीनी में देशी गुलाब के 100 ग्राम फूल मसलकर शरबत बनाया जाय तो वह बाजारू शरबतों से पचासों गुना हितकारी है। सेक्रीन, रासायनिक रंगों और विज्ञापन से बाजारू शरबत महंगे हो जाते हैं। आप घर पर ही यह शरबत बनायें। यह आँखों व पैरो की जलन तथा गर्मी का शमन करता है। पीपल के पेड़ की डालियाँ, पत्ते, फल मिलें तो उन्हें भी काट-कूट के शरबत में उबाल लें। उनका शीतलता दायी गुण भी लाभकारी होगा।

Post inspired by:

Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj-KMSRAJ51पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

मैं श्री आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का बहुत आभारी हूँ!!

आपको दिल से शुक्रिया;

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pink-sky-kmsraj51-10-Words for a success ful life

जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

-Kmsraj51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

kmsraj51- C Y M T

kmsraj51 की कलम से …..

Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

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