परमात्मा और किसान

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSपरमात्मा और किसान

एक बार एक  किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया ! कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये! हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जाये! एक  दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा ,देखिये प्रभु,आप परमात्मा हैं , लेकिन लगता है आपको खेती बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है ,एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये , जैसा मै चाहू वैसा मौसम हो,फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा! परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है, जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम  दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा!

किसान ने गेहूं की फ़सल बोई ,जब धूप  चाही ,तब धूप  मिली, जब पानी तब पानी ! तेज धूप, ओले,बाढ़ ,आंधी तो उसने आने ही नहीं दी, समय के साथ फसल बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी,क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई  थी !  किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को, की फ़सल कैसे करते हैं ,बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान करते रहे.

paysage bl?nuage 2फ़सल काटने का समय भी आया ,किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया, लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा ,एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया!  गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूं नहीं था ,सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी,  बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा ,प्रभु  ये  क्या हुआ ?

तब परमात्मा बोले,” ये तो होना ही था  ,तुमने पौधों  को संघर्ष का ज़रा  सा  भी मौका नहीं दिया . ना तेज  धूप में उनको तपने दिया , ना आंधी ओलों से जूझने दिया ,उनको  किसी प्रकार की चुनौती  का अहसास जरा भी नहीं होने दिया , इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए, जब आंधी आती है, तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पोधा अपने बल से ही खड़ा रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है वोही उसे शक्ति देता है ,उर्जा देता है, उसकी जीवटता को उभारता है.सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने , हथौड़ी  से पिटने,गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है,उसे अनमोल बनाती है !”

उसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो ,चुनौती  ना हो तो आदमी खोखला  ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता ! ये चुनोतियाँ  ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं ,उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं, अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनोतियाँ  तो स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे.  अगर जिंदगी में प्रखर बनना है,प्रतिभाशाली बनना है ,तो संघर्ष और चुनोतियो का सामना तो करना ही पड़ेगा !

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आखिरी खत

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आखिरी खत-

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यह खत है
एसएमएस के युग में
इसीलिए संभवत: अंतिम हो/

खत
उस पागल हवा के नाम
जो तुम्‍हारे नगमे सुनाती थी
और कहती थी
ख़तों जितनी हो
इस दुनिया की उम्र/
उस खुशबू के नाम
जो अब तक कहती है मैं हूं/
लगता है गलत था कि खत कभी
मरते नहीं
भटकते नहीं
उलझते नहीं
अटकते नहीं/

मैं हैरत लिए पूछ रहा हूं
कोई मुझे
एसएमएस की उम्र बताए
जो छोटा होकर भी खतों को निगल गया/
खतरे हैं कई
कुछ बौनों ने आदमकदों को नेपथ्‍य में धकेल दिया
कुछ बहरों ने सुरों को किया है तसदीक/

कहना हवाओं से
मैं फिर आऊंगा
इस बार नहीं कहा जा सका सबसे सब कुछ/
नदिया से कहना बहती रहे/
समंदर से कहना
पहाड़ याद करता है/
बादलों को देना
धूप में तपती भाषा का पता/

बावड़ी से कहना
अगली बार ऐसे नहीं आऊंगा
साथ होंगे मजबूत हाथ
तब झाडि़यां नहीं बावड़ी होगी/

कोयल से कहना
कोई सुने न सुने
गाती रहे
ठीक वैसे
जैसे बांसुरी चुप नहीं बैठती/

भीड़ से घबराई बच्‍ची को कहना
रास्‍ता भीड़ से ही निकलता है/

कहना मां से
बेटे इतने भी बुरे नहीं होते
तपती धरती पर ठिठुर रहे हैं संबंध/

भाइयों से कहना
बाजू मजबूरी नहीं, जरूरी होते हैं/

इस सदी में
बड़ा चाहिए बाजार
लेकिन
परिवार
त्‍योहार
विचार
आहार
व्‍यवहार
सब छोटे हों एसएमएस की तरह/
खतों की तफसील
नहीं है
युग की रफ्तार की मांग/

मरते हुए खतों की आखिरी बात याद रखना
भाषाविदों से कहना
व्‍याकरण को गंगाजी को न सौंप देना
उसकी जरूरत हो्गी फिर एक दिन/
समाजशास्त्रियों से कहना
अभी बैठे रहें
रात बीतते ही
अकेलेपन से ठिठुरे लोग आएंगे
उनके लिए रख लेना
संबंधों का थोड़ा सा ताप
मुक्‍त करने में समय लेता है कोई भी शाप

-नवनीत शर्मा

Post share by: नवनीत शर्मा

I am grateful to नवनीत शर्मा for sharing this inspirational poetry with KMSRAJ51. Thanks a lot for a bright future.

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