Creating Positive Circumstances

Kmsraj51 की कलम से…..

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Creating Positive Circumstances

Why do we find it so hard to create positive circumstances, a positive future in our life? One reason is we all have the tendency to spend most of our time in the past, reliving and replaying our memories. Look back on your average day and you may find that more than 3/4ths of your time is spent in the past (a lot of times without you realizing it). Not only do we try to relive the past, but we also attempt to change it! We attempt the impossible and, in so doing, we live in very small cycles where tomorrow tends to turn out similar to yesterday, and then we wonder why we do not have the power to change our lives. It feels like we do not have the will-power, we do not have the ability to change the circumstances in our lives, our destiny.

The past cannot be relived; it cannot be changed. The past is like a cupboard of old files. When you arrive at work every day, do you step into such a cupboard and spend the day there? The past is a great resource for learning and sometimes, a resource for useful information, but it is not a place to live. We can build on the old, but we cannot rewrite it. The future is the result of what we think, feel and do today. If today is the same as yesterday (because of constantly thinking about yesterday) then tomorrow will look and feel like yesterday and in this way we feel we are stuck in a web and we get frustrated. We need to let go of the past if we want the future to shape up positively, different from yesterday, which is negative at times! The past is past. Drop it and keep dropping it.

Message

With the balance of love and discipline, energy can be saved while speaking.

Projection: Throughout the day I find myself having to give explanations or corrections to so many people. When I do this I find that I have to spend a lot of words. In the process I tend to lose a lot of my energy and find myself tired.

Solution: In order to save my energy and to use fewer words I need to have the balance of love and discipline. Discipline will enable me to give the right directions while love will make my directions effective. So I find that just a few words would be enough to get my message across.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

~KMSRAJ51

 

“तू ना हो निराश कभी मन से”

CYMT-KMSRAJ51

 

 

 

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Innate (Basic) And Acquired Value

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Innate (Basic) And Acquired Value

Everything we see has what can be called its acquired value and its innate or basic value. The acquired value is that which it has picked up by coming into contact with external objects throughout its existence or life. The innate value is what it always is irrespective of its external interactions. For example, the acquired value of gold changes with the fluctuations of its price in the market. Its innate or real value is that it’s one of the most beautiful metals; very ductile, malleable, etc.

If we were asked about the qualities of any good, peaceful relationship with someone, we would quickly reply: love, trust, patience, respect, honesty, sincerity, tolerance, humility, sympathy, etc. How do we know this? Is it purely from experience? Can we remember having really experienced any of these qualities in any relationship completely and constantly? Probably no. Then how can we say it is from experience? In such a case, where does this urge for rightness come from? Our heart tells us it comes from a basic, inherent sense of what is true and good, of our innate value. Though these qualities are what we see as our ideal qualities; when I am in a weakened state, I’m unable to bring them into practice, when I want, according to the needs of the moment. They need to be strengthened inside. One of the most immediate benefits of the practice of meditation then, is to bring about this internal strengthening. My basic qualities are just waiting for a chance to emerge out in the open. Like a light bulb without current, possibility of lighting up my qualities exists, but they need to be connected to a source of power, which is exactly what meditation gives us.

Message

Inner satisfaction brings creativity.

Projection: Quite often I find myself trying to keep pace with the things that I have always been doing. I seem to be caught up in the routine to the extent that I experience monotony. I then cannot think of any newness that I can bring in my life.

Solution: It is only with my inner satisfaction that can I bring creativity in my life. For this, while doing the routine jobs that I am involved in throughout the day, I need to make special effort to keep myself content with the things that are going on and also think of new ways of doing what I am already doing. Then I will never experience boredom in my life.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

 

 

 

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पान के पत्ते

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पान के पत्ते

PAN LEAF-KMSRAJ51

१- मुँह के छालों के लिए पान के पत्तों के रस में शहद मिलाकर लगाने से लाभ होता है , यह प्रयोग दिन में दो -तीन बार किया जा सकता है |

२-घाव के ऊपर पान के पत्ते को गर्म करके बांधें तो सूजन और दर्द शीघ्र ही ठीक होकर घाव भी ठीक हो जाता है |

३-शरीर में होने वाली पित्ती होने पर , एक चम्मच फिटकरी को थोड़े से पानी में डालें , तीन खाने वाले पान के पत्ते लें | फिटकरी वाले पानी में मिलाकर इन पत्तों को पीस लें | इस मिश्रण को पित्ती के चिकत्तों पर लेप करें , लाभ होगा |

४ – मोच आने पर पान के पत्ते पर सरसों का तेल लगाकर गर्म करें , फिर इसे मोच पर बांधें शीघ्र लाभ होगा |

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Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब) …..

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

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दादी माँ के नुस्खे।

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मीठे सेब के अचूक नुस्खे

Dadi maa ke nuske

मस्तिष्क की कमजोरी दूर करने के लिए सेब एक अचूक इलाज है। ऐसे रोगी को प्रतिदिन एक सेब खाने को दें। इसके अलावा रोगी को दोपहर तथा रात को भोजन में कच्चे सेबों की सब्जी दें। शाम को एक गिलास सेब का रस दें तथा रात को सोने से पहले एक पका मीठा सेब खिलाएं। इससे एक महीने में ही रोगी की दशा में सुधार आने लगता है।

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जिन लोगों की आंखें कमजोर हैं उन्हें एक ताजा सेब की पुल्टिस कुछ दिनों तक आंखों पर बाँधनी चाहिए। यदि भोजन के साथ प्रतिदिन ताजा मक्खन तथा मीठा सेब खाएं तो नेत्र ज्योति तो तेज होती ही है साथ ही चेहरा लाल हो जाता है।
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दिल के लिए शहद बहुत शक्ति बढाने वाला है। सोते वक्त शहद व नींबू का रस मिलाकर एक ग्लास पानी पीने से कमजोर हृदय में शक्ति का संचार होता है। पेट के छोटे-मोटे घाव और शुरुआती स्थिति का अल्सर शहद को दूध या चाय के साथ लेने से ठीक हो सकता है। सूखी खाँसी में शहद व नींबू का रस समान मात्रा में सेवन करने पर लाभ होता है।
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शहद से मांसपेशियाँ बलवती होती हैं। बढ़े हुए रक्तचाप में शहद का सेवन लहसुन के साथ करना लाभप्रद होता है। अदरक का रस और शहद समान मात्रा में लेकर चाटने से श्वास कष्ट दूर होता है और हिचकियाँ बंद हो जाती हैं। संतरों के छिलकों का चूर्ण बनाकर दो चम्मच शहद उसमें फेंटकर उबटन तैयार कर त्वचा पर मलें। इससे त्वचा निखर जाती है और कांतिवान बनती है।
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हैजा रोग होने पर जब शरीर में ऐंठन होने लगती है या सर्दी के कारण शरीर में ऐंठन होती है तो ऐसे में अखरोट के तेल की मालिश करने से रोग में आराम मिलता है। अमरूद के कोमल पत्तों को पीसकर गठिया रोग से सूजे हुए स्थान पर लेप करने से रोग में आराम मिलता है।
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बड़ की छाल और बबूल के पत्ते और छाल बराबर मात्रा में लेकर एक पानी में भिगो दें। इस पानी से कुल्ला करने पर गले का रोग ठीक होता है। बड़ की जटा का चूर्ण दूध की लस्सी के साथ पीने से नकसीर रोग ठीक होता है। बहेड़े और शक्कर बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से आँखों की रोशनी में बढ़ोतरी होती है।
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बिच्छू या बर्रे के दंश स्थान पर पुदीने का अर्क लगाने से यह विष को खींच लेता है और दर्द को भी शांत करता है। दस ग्राम पुदीना व बीस ग्राम गुड़ दो सौ ग्राम पानी में उबालकर पिलाने से बार-बार उछलने वाली पित्ती ठीक हो जाती है। पुदीने को पानी में उबालकर थोड़ी चीनी मिलाकर उसे गर्म-गर्म चाय की तरह पीने से बुखार दूर होकर बुखार के कारण आई कमज़ोरी भी दूर होती है।
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तलवे में गर्मी के कारण आग पड़ने पर पुदीने का रस लगाना लाभकारी होता है। हरे पुदीने की 20-25 पत्तियाँ, मिश्री व सौंफ 10-10 ग्राम और कालीमिर्च 2-3 दाने इन सबको पीस लें और सूती, साफ कपड़े में रखकर निचोड़ लें। इस रस की एक चम्मच मात्रा लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।
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छोटी इलायची और पीपरामूल का चूर्ण घी के साथ सेवन करने से ह्रदय रोग में फायदा होता है। एक चम्मच शहद प्रतिदिन खाने से ह्रदय की कमजोरी दूर होती है। अगर का चूर्ण शहद में मिलाकर प्रतिदिन खाने से ह्रदय की शक्ति बढ़ जाती है। गुड़ व घी मिलाकर खाने से दिल मजबूत होता है। अलसी के पत्ते और सूखे धनिए का क्वाथ बनाकर पीने से ह्रदय की दुर्बलता मिट जाती है।

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निम्न रक्तचाप हो तो गाजर के रस में शहद मिलाकर पिएँ। उच्च रक्तचाप में सिर्फ गाजर का रस पीने से रक्तचाप संतुलित हो जाता है। सर्पगंधा को कूटकर रख लें। सुबह-शाम 2-2 ग्राम खाने से बढ़ा हुआ रक्तचाप सामान्य हो जाता है। प्रतिदिन लहसुन की कच्ची कली छीलकर खाने से कुछ दिनों में ही रक्तचाप सामान्य हो जाता है।
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पहाड़ी नींबू भूख बढ़ाने वाला होता है। बेस्वाद मुँह होना, अधिक प्यास लगना, उल्टियाँ होना, कमजोर पाचन शक्ति, खाँसी, सांस लेने में परेशानी और पेट के कीड़ों के लिए यह बेहद लाभदायक है। अपच के लिए यह हितकारी है। नींबू के रस में थोड़ी शकर मिलाएं। इसे गर्म कर सिरप बना लें। इसमें थोड़ा पानी मिलाकर पिएं। पित्त के लिए यह अचूक औषधि है।
tulsi-kmsraj51
तुलसी के पौधे के पास बैठने मात्र से ऊर्जा और ऑक्सीजन मिलती है। तुलसी का पौधा मां समान होता है। यह कई बीमारियों से निजात पाने में सहायक होता है। खाँसी, दमा और अन्य सांस की बीमारियों में इसका उपयोग लाभप्रद साबित होता है और इसके नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। हम घर में ही तुलसी, नीम और अन्य विशेष पौधों को लगाकर बीमारियों को दूर रख सकते हैं।
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चार लौंग कूट कर एक कप पानी में डाल कर उबालें। आधा पानी रहने पर छान कर स्वाद के अनुसार मीठा मिला कर पी कर करवट लेकर सो जाएं। दिन भर में ऐसी चार मात्रा लें। उल्टियां बंद हो जाएंगी। चार लौंग पीस कर पानी में घोल कर पिलाने में तेज बुखार कम हो जाता है।

सावधानी: 

यहाँ बताए गए सभी नुस्खे पुराने समय से चले आ रहे हैं पर इन्हें आजमाने से पूर्व अपने चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

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