विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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विचारों की शक्ति

विचारों की शक्ति – एक ऐसी शक्ति जिसे खुद(स्वयं) अनुभव ना कराें जब तक, तब तक विश्वास ही नहीं हाेता। अपने मन से निगेटिव विचारों काे हटाने का आसान तरिका है, कि नकारात्मक ना हि देखें, ना हीं सुने, ना हि पढ़ें। हमेशा सकारात्मक हि देखें, सकारात्मक हीं सुने, सकारात्मक हि पढ़ें आैर सकारात्मक हि करे। अपने विचारों की शक्ति काे आप तभी समझ सकते हैं, जब आपका मन शांत हाेगा, आैर मन शांत तब हाेगा जब मन के अंदर विचारों की संख्या कम हाेगी। मन के अंदर विचारों की संख्या कम करने का आसान तरिका है, कि अपनी मानसिक शक्तियाें काे याद करें, अथा॔त ध्यान(Meditation) कि मदद से अपने अच्छे(सही) आैर बुरे(गलत) विचारों काे समझना सीखें। मन के अंदर विचारों की संख्या कम आैर सकारात्मक (Positive) विचारों के हाेने से किसी भी मानव की निर्णय शक्ति अपने आप अच्छी हाे जाती हैं। निर्णय शक्ति अच्छी हाेने से मानव सही फैसला(निर्णय) लेने लगता है, जिससे सब काम(कार्य) सरलता पूर्वक पूर्ण हाेने लगते हैं। मानव स्वतः सुखीं और आनंदपूर्ण जीवन जीने लगता हैं।

विचारों की शक्ति से कुछ भी करना संभव है। मन जब शांत हाेगा, कुछ भी स्मरण रखना भी आसान हाेगा। मन शांत रहने से स्मरण शक्ति अतितीव्र हाे जाती हैं।

  1. मन के विचारों की शक्ति,
  2. कैसे मन के विचारों काे नियंत्रण में करें,
  3. मन के अंदर चलने वाले विचारों काे कैसे पढ़ें,

अब बहुत जल्द प्रकाशित हाेने वाला है…..

कृष्ण मोहन सिंह(Krishna Mohan Singh) द्वारा लिखित किताब,, 

“तू ना हो निराश कभी मन से” 

“मन के विचारों और शक्तियाें” पर लिखी गई एक अनमाेल ग्रंथ,, 

मन काे कैसे नियंत्रण में करें।

मन के विचारों काे कैसे नियंत्रित करें॥

विचारों के प्रकार-एक खुशी जीवन के लिए।

अपनी सोच काे हमेशा सकारात्मक कैसे रखें॥

“मन के बहुत सारे सवालाें का जवाब-आैर मन काे कैसे नियंत्रित कर उसे सहीं तरिके से संचालित कर शांतिमय जीवन जियें”

Thoughts: “तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से,,

Note::-

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

खुद को साबित करने के लिए मौका मिलने के आप हकदार हैं। सफलता की नींव आप खुद हैं। 

दूसरे क्या सोच रहे हैं, इस बारे में अनुमान लगाते रहना नकारात्मक सोच की निशानी है।

 

 

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प्यार के एक पल

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प्यार के एक पल (‘रंजना’ रंजू भाटिया)

प्यार के एक पल ने
जन्नत को दिखा दिया
प्यार के उसी पल ने
मुझे ता -उमर रुला दिया
एक नूर की बूँद की तरह पिया
हमने उस पल को
एक उसी पल ने
हमे खुदा के क़रीब ला दिया !!

रुका हुआ वक़्त

इजहार -इनकार

आज ज़िन्दगी की साँझ में
खुद से ही कर रही हूँ सवाल जवाब
कि जब बीते वक़्त में
रुकी हवा से इजहार किया
तो वह बाहों में सिमट आई
जब मुरझाते फूलों से
किया इक्क्रार तो
वह खिल उठे

जाते बादलों को
प्यार से पुचकारा मैंने
तो वह बरस गए
पर जब तुम्हे चाहा शिद्दत से तो
सब तरफ सन्नाटा क्यों गूंज उठा
ज़िन्दगी से पूछती हूँ आज
कि क्या हुआ ..
क्या यह रुका हुआ वक़्त था
जो आकर गुजर गया??

We are grateful to ‘रंजना’ रंजू भाटिया Ji for sharing this very inspirational poetry with KMSRAJ51 readers.

‘रंजना’ रंजू भाटिया

जन्म हरियाणा के रोहतक ज़िले के कलनौर गाँव में १४ अप्रैल,१९६६ को हुआ। आरम्भिक शिक्षा दिल्ली में और कॉलेज जम्मू से किया। बी॰एड॰ तक की शिक्षा ली है। बचपन से ही लिखने में रुचि थी। कई लेख और कविता शुरू में दैनिक जागरण, अमर उजाला और भाटिया प्रकाश [मासिक पत्रिका] आदि में छपे, फिर घर में व्यस्त होने के कारण लिखना सिर्फ़ डायरी तक सीमित रह गया। सैकड़ों कविता लिखी हुई हैं। १२ साल तक स्कूल में अध्यपिका रहीं। पत्रकारिता में ली गई डिप्लोमा की डिग्री बहुत काम आई। लगभग दो वर्षों तक मधुबन पब्लिशर के साथ जुड़ी रहीं जहाँ उपन्यास सम्राट प्रेमचंद के उपन्यासों की प्रूफ़-रीडिंग और एडीटिंग का अनुभव प्राप्त हुआ। कविता और हिंदी-साहित्य में विशेष रुचि है। बच्चन ,अमृता प्रीतम और दुष्यंत जी को पढ़ना बहुत पसंद है।.घुमक्कडी यात्राये और खाना खाना बंनाने के विषय भी मेरे प्रिय शौक में शामिल हैं ,थोड़ी समझ आई तो “बुक रिव्यूज़” भी लिखे हुए पसंद किये जाने लगे, कुल मिला कर यह ब्लॉग “कुछ मेरी कलम से “नाम को सार्थक करता हुआ अब विभिन्न विषयों का घर बन गया है, यहाँ आइये, बैठिये, कुछ पल बिताएं और अपनी अनमोल राय देना न भूलें!

Blogs:- http://ranjanabhatia.blogspot.in/

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

खुद को साबित करने के लिए मौका मिलने के आप हकदार हैं। सफलता की नींव आप खुद हैं। 

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सर्व श्रेष्ठ सम्पत्तिवान काैन?

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सर्व श्रेष्ठ सम्पत्तिवान काैन?

किसी के पास अगर सिर्फ स्थूल सम्पत्ति है तो भी सदा सन्तुष्ट नहीं रह सकते। स्थूल सम्पत्ति के साथ अगर सर्व गुणों की सम्पत्ति, सर्व शक्तियों की सम्पत्ति और ज्ञान की श्रेष्ठ सम्पत्ति नहीं है तो सन्तुष्टता सदा नहीं रह सकती।  दुनिया वाले सिर्फ स्थूल सम्पत्ति वाले को सम्पत्तिवान समझते हैं।

सर्व श्रेष्ठ सम्पत्तिवान वह हैं जिसके पास स्थूल सम्पत्ति के साथ अगर सर्व गुणों की सम्पत्ति, सर्व शक्तियों की सम्पत्ति और ज्ञान की श्रेष्ठ सम्पत्ति है

वाे ही सर्व श्रेष्ठ सम्पत्तिवान है।

किसी भी मनुष्य की तीन मुख्य-सम्पत्ति (Property)

  1. गुणों की सम्पत्ति,
  2. ज्ञान की श्रेष्ठ सम्पत्ति,
  3. आत्मिक शक्तियों की सम्पत्ति,

ये तीनाे शक्तिया जिस मनुष्य के पास “न” हाे, सिर्फ स्थूल सम्पत्ति है तो भी सदा सन्तुष्ट नहीं रह सकता।

कर्म-अकर्म-विकर्म की गति को जान विकर्मों से बचना ही ज्ञान हाेने का बाेध कराता है।

साभार-

“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

खुद को साबित करने के लिए मौका मिलने के आप हकदार हैं। सफलता की नींव आप खुद हैं। 

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‘‘सच्चा शिष्य’’

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‘‘सच्चा शिष्य’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बहुत पुरानी बात है। एक विद्वान आचार्य थे। उनका एक गुरूकुल था।

प्राचीन काल में आचार्य विद्यार्थीयाें को निशुल्क शिक्षा दिया करते थे।

एक दिन आचार्य जी ने गुरूकुल के सारे विद्यार्थियों को अपने पास बुलाया और कहा-

‘‘प्रिय विद्यार्थियों मेरी कन्या विवाह योग्य हो गयी है। परन्तु इसका विवाह करने के लिए मेरे पास धन नही है। मेरी समझ में नही आ रहा है कि कैसे इसका विवाह करूँ।’’

कुछ विद्यार्थी जिनके माता-पिता धनवान थे।

उनसे बोले- ‘‘गुरू जी! हम लोग अपने माता‘पिता से कह कर आपको धन दिलवा देंगे।’’

आचार्य जी बोले- ‘‘शिष्यों! मुझे संकोच होता है, मैं लालची आचार्य नही कहाना चाहता।’’ फिर बोले कि मैं अपनी पुत्री का विवाह अपने शिष्यों के धन से ही करना चाहता हूँ। परन्तु ध्यान रहे कि तुममे से कोई भी धन माँग कर नही लायेगा। जो विद्यार्थी धनी परिवारों के नही थे उनसे आचार्य जी ने कहा कि तुम लोग भी अपने घरों से कुछ न कुछ ले आना परन्तु किसी को पता नही लगना चाहिए और उस वस्तु पर किसी की दृष्टि भी नही पड़नी चाहिए।”

कुछ ही दिनों में आचार्य जी के पास पर्याप्त धन व वस्तुएँ एकत्रित हो गयी।

तभी आचार्य जी के पास एक अत्यन्त धनी परिवार का शिष्य आकर बोला-

‘‘आचार्य जी मेरे घर में किसी प्रकार की कमी नही है, परन्तु मैं आपके लिए कुछ भी नही ला पाया हूँ।’’

आचार्य जी बोले- ‘‘ क्यों ? क्या तुम गुरू की सेवा नही करना चाहते हो?’’

शिष्य ने उत्तर दिया- ‘‘नही गुरू जी! ऐसी बात नही है। आपने ही तो कहा था कि कोई वस्तु या धन लाते हुए किसी को पता नही लगना चाहिए और उस वस्तु पर किसी की दृष्टि भी नही पड़नी चाहिए। मुझे वह स्थान नही मिला, जहाँ कोई देख न रहा हो।’’

आचार्य जी बोले- ‘‘तुम झूठ बोलते हो। कहीं तो कोई ऐसा समय व स्थान रहा होगा जब तुम्हें कोई देख नही रहा होगा।’’

शिष्य आँखों में आँसू भर कर बोला- ‘‘गुरू जी! ऐसा समय व स्थान तो अवश्य मिला परन्तु मैं भी तो उस समय अपने इस कृत्य को देख रहा था।’’

आचार्य जी ने उस शिष्य को गले से लगा लिया और बोले-

‘‘तू ही मेरा सच्चा शिष्य है। मुझे अपनी कन्या के लिए विवाह के लिए धन की आवश्यकता नही थी। मैं तो उसके वर के रूप में तेरे जैसा ही सदाचारी वर खोज रहा था।’’

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

We are grateful to DR. Rupcndra Shastri ‘Mayank Ji for sharing this very inspirational Hindi story with KMSRAJ51 readers.

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

DR. Rupcndra Shastri ‘Mayank` Blog:- http://powerofhydro.blogspot.in/

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“सपने देखना बेहद जरुरी है, लेकिन केवल सपने देखकर ही मंजिल को हासिल नहीं किया जा सकता,
सबसे ज्यादा जरुरी है जिंदगी में खुद के लिए कोई लक्ष्य तय करना|”

-Kmsraj51

 

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मेरी याँदे

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मेरी याँदे

शाम सवेरे तेरे बांहों के घेरे ,
बन गए हैं दोनों जहाँ अब मेरे
क्या मांगू ईश्वर से पा कर तुझे मैं
क्या सबको मिलता है ऐसा दीवाना
फिर लौट आएगा वो गुजरा ज़माना ।

चले जाते ऑफिस, कैसी ये मुश्किल
तुम बिन कुछ में भी नहीं लगता दिल
मेरे पास बैठो, छुट्टी आज ले लो
हो रही बारिश,है मौसम कितना सुहाना
फिर लौट आएगा वो गुजरा ज़माना ।

वो घर से निकला, हजार कपडे बदलना
लबों पे लाली लगाना मिटाना
इतरा के पूछना कैसी लग मैं रही हूँ
आज फिर भूल गई नेल पालिश लगाना
फिर लौट आएगा वो गुजरा ज़माना ।

बेसब्री से करती इतंजार, जल्दी आये शुक्रवार
कुछ अच्छा बनाती ,ज्यादा ही आता प्यार
धीमी रौशनी में फ़िल्म देखते देखते
कभी नींबू पानी पीना कभी आइसक्रीम खाना
फिर लौट आएगा वो गुजरा ज़माना ।

फूले गालों को खींचना , थपकियों से जगाना
शनिवार इतवार कितना मुश्किल उठाना
पांच मिनट बोल फिर से सो जाते
भला कब तुम छोड़ोगे मुझको सताना
फिर लौट आएगा वो गुजरा ज़माना ।

बांतों ही बांतो में कभी जो बढ़ जातीं बातें
रूठे रहते ,दिनों तक नहीं नज़र मिलाते
मुझे रोता छोड़,मुँह फेर सो जाते
क्या इतना मुश्किल था गले से लगाना
फिर लौट आएगा वो गुजरा ज़माना ।

डरते डरते तुम्हे सोते हुए प्यार करते
तुम से झगड़ के जीते न मरते
घंटो कंधे पे तुम्हारे सर रख के रोते रहते
तुम बिन आंसुओं का नहीं अब ठिकाना
फिर लौट आएगा वो गुजरा ज़माना ।

जब पहली बार साथ रहने आई
कितना में खुश थी हाँ थोड़ी घबड़ाई
कितनी मस्ती की हमने, थोड़ी लड़ाई
बहुत याद आता अपना प्यारा आशियाना
फिर लौट आएगा वो गुजरा ज़माना ।

Post share by:- Mr. निशिकांत तिवारी,,

Nishikant Blog – http://nishikantworld.blogspot.in/

We are grateful to Nishikant Tiwari Ji for sharing this very romantic poetry with Kmsraj51 readers.

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खुद को साबित करने के लिए मौका मिलने के आप हकदार हैं। सफलता की नींव आप खुद हैं। 

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क्या बनेंगे ये ?

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Kya Banenge Ye क्या बनेंगे ये

क्या बनेंगे ये ?

यूनिवर्सिटी के एक प्रोफ़ेसर ने अपने विद्यार्थियों को एक एसाइनमेंट दिया।  विषय था मुंबई की धारावी झोपड़पट्टी में रहते 10 से 13 साल की उम्र के लड़कों के बारे में अध्यन करना और उनके घर की तथा सामाजिक परिस्थितियों की समीक्षा करके भविष्य में वे क्या बनेंगे, इसका अनुमान निकालना।

कॉलेज विद्यार्थी काम में लग गए।  झोपड़पट्टी के 200 बच्चो के घर की पृष्ठभूमिका, मा-बाप की परिस्थिति, वहाँ के लोगों की जीवनशैली और शैक्षणिक स्तर, शराब तथा नशीले पदार्थो के सेवन , ऐसे कई सारे पॉइंट्स पर विचार किया गया ।  तदुपरांत हर एक  लडके के विचार भी गंभीरतापूर्वक सुने तथा ‘नोट’ किये गए।

करीब करीब 1 साल लगा एसाइनमेंट पूरा होने में।  इसका निष्कर्ष ये  निकला कि उन लड़कों में से 95% बच्चे गुनाह के रास्ते पर चले जायेंगे और 90% बच्चे बड़े होकर किसी न किसी कारण से जेल जायेंगे।  केवल 5% बच्चे ही अच्छा जीवन जी पाएंगे।

बस, उस समय यह एसाइनमेंट तो पूरा हो गया , और बाद में यह बात का विस्मरण हो गया। 25 साल के बाद एक दुसरे प्रोफ़ेसर की नज़र इस अध्यन पर पड़ी , उसने अनुमान कितना सही निकला यह जानने के लिए 3-3 विद्यार्थियो की 5 टीम बनाई और उन्हें धारावी भेज दिया ।  200 में से कुछ का तो देहांत हो चुका था तो कुछ  दूसरी जगह चले गए थे।  फिर भी 180 लोगों से मिलना हुवा।  कॉलेज विद्यार्थियो ने जब 180 लोगों की जिंदगी की सही-सही जानकारी प्राप्त की तब वे आश्चर्यचकित हो गए।   पहले की गयी स्टडी के  विपरीत ही परिणाम दिखे।

उन में से केवल 4-5 ही सामान्य मारामारी में थोड़े समय के लिए जेल गए थे ! और बाकी सभी इज़्ज़त के साथ एक सामान्य ज़िन्दगी जी रहे थे। कुछ तो आर्थिक दृष्टि से बहुत अच्छी स्थिति में थे।

अध्यन कर रहे विद्यार्थियो तथा उनके प्रोफ़ेसर साहब को बहुत अचरज हुआ कि जहाँ का माहौल गुनाह की और ले जाने के लिए उपयुक्त था वहां लोग महेनत तथा ईमानदारी की जिंदगी पसंद करे, ऐसा कैसे संभव हुवा ?

सोच-विचार कर के विद्यार्थी पुनः उन 180 लोगों से मिले और उनसे ही ये जानें की कोशिश की।  तब उन लोगों में से हर एक ने कहा कि “शायद हम भी ग़लत रास्ते पर चले जाते, परन्तु हमारी एक टीचर के कारण हम सही रास्ते पर जीने लगे।  यदि बचपन में उन्होंने हमें सही-गलत का ज्ञान नहीं दिया होता तो शायद आज हम भी अपराध में लिप्त होते…. !”

विद्यार्थियो ने उस टीचर से मिलना तय किया।  वे स्कूल गए तो मालूम हुवा कि वे  तो सेवानिवृत हो चुकी हैं ।  फिर तलाश करते-करते वे उनके घर पहुंचे ।  उनसे सब बातें बताई और फिर पूछा कि “आपने उन लड़कों पर ऐसा कौन सा चमत्कार किया कि वे एक सभ्य नागरिक बन गए ?”

शिक्षिकाबहन ने सरलता और स्वाभाविक रीति से कहा : “चमत्कार ? अरे ! मुझे कोई चमत्कार-वमत्कार तो आता नहीं।  मैंने तो मेरे विद्यार्थियो को मेरी संतानों जैसा ही प्रेम किया।  बस ! इतना ही !” और वह ठहाका देकर जोर से हँस पड़ी।

मित्रों , प्रेम व स्नेह से पशु भी वश हो जाते है।  मधुर संगीत सुनाने से गौ भी अधिक दूध देने लगती है।  मधुर वाणी-व्यवहार से पराये भी अपने हो जाते है।  जो भी काम हम करे थोड़ा स्नेह-प्रेम और मधुरता की मात्रा उसमे मिला के करने लगे तो हमारी दुनिया जरुर सुन्दर होगी।  आपका दिन मंगलमय हो, ऐसी शुभभावना।  

Note:- Post inspired by- http://www.achhikhabar.com/

We are grateful to My dear Friend Mr. Gopal Mishra & AKC for sharing this very inspirational incident with Kmsraj51 readers. 

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

प्रश्न :- दोस्त क्या है?\मित्र क्या है?

उत्तर :- “एक आत्मा जाे दाे शरीराें में निवास करती है”

सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।”

 

 

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माँ तू मुझे क्यू याद आती है..

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माँ तू मुझे क्यू याद आती है..

maa

माँ तू मुझे क्यू याद आती है..

माँ तू मुझे क्यू याद आती है…..

पौष की सर्द रातों को सीने से लगाकर सुलाती थी जो,

पकड़कर दोनों बाजूओं को जमीं पर चलना सिखाती थी जो,

जब चलते चलते गिरता था, गिरे हुए को उठाती थी जो,

गोद में बिठाकर अपने हाथों से खाना खिलाती थी जो,

अपनी बांहों में उठाकर झूला झुलाती थी जो,

रातों को सुलाने के लिए लोरियां सुनाती थी जो,

आज वो मां बहुत याद आती है,

मुश्किल में उसकी कमी बहुत सताती है,

उसकी बातें करते ही आँख भर आती है,

नहीं इस दुनिया में वो, मगर राहुल को

आज भी कहीं से देकर आवाज मुझे बुलाती है वो…….

Rahul Sir

Note:- Post share by My dear Friend Mr. Rahul  Sharma.

श्रीमान- राहुल शर्मा मेरे बहुत पुराने दोस्त और एक कवि हृदय है।

मैं हृदय से श्री- राहुल शर्मा का बहुत आभारी हूँ. दिल काे छुने वाली हिंदी कविता शेयर करने लिए।

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ज्ञान का अर्थ है समझ। समझदार उसे कहा जाता है जो समय प्रमाण समझदारी से कार्य करते हुए सफलता को प्राप्त करे।समझदार की निशानी है वह कभी धोखा नहीं खा सकते। और योगी की निशानी है क्लीन और क्लीयर बुद्धि। जिसकी बुद्धिक्लीन और क्लीयर है वह कभी नहीं कहेगा कि पता नहीं ऐसा क्यों हो गया! यह शब्द ज्ञानी और योगी आत्मायें नहीं बोल सकती, वे ज्ञान और योग को हर कर्म में लाती हैं।

ब्रह्म कुमारी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

 

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Radiating Positive And Powerful Energy

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Radiating Positive And Powerful Energy

Radiating Positive And Powerful Energy

You will notice many people in your life who are very much in need of love but they attract the opposite energy. This is because the negative energy of lack of love for the self and low self esteem which they continuously radiate causes them to attract that same negative energy from others. In the same way, there are many people who are very much in need of success but they attract failure repeatedly. Failure is directly related to the quality of energy we radiate i.e. how positive and powerful our expectations of success are. Once we set the goals that we wish to reach, we need to be careful that we move towards our aim without creating the negative energy of fear inside our consciousness. Failure appears when we make an effort to achieve those goals and we damage the result or attract failure without us desiring so, simply because of our fears of failure.Even then, if at that step we feel that we have failed, we need to have a positive and constructive attitude.

We need to emerge the power to face and power of acceptance inside us. That way our creative energies will flow and we will carry on going forward without the failure (whether real or only perceived by us to be real but actually not real) becoming an obstacle in our path from doing so. Although at that time it may seem as though we have missed an opportunity or that some openings have closed for us, have faith and be fearless. If we are fearless and radiate positive and powerful energy, other possibilities will open up. We have this deep rooted belief that our fear will keep us safe, and we treat it like a comfort zone, a red signal that tells us that we should stop. Creating a time every day to do something that you fear, helps you to re-condition yourself internally to begin to see the fear as a green signal and to develop inner courage, so that you can move towards your goal of success. Each day, do what you fear and the fear will soon be removed.

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Understanding brings happiness.

Expression: Happiness lies in understanding the secret of whatever is happening. When one is able ot remain happy in this way, he is able to spread this happiness to those around too, influencing the lives of all.

Experience: When I am able to remain happy under all circumstances, I am able to be free from the influence of others’ negativity. Instead I will be able to become a major source of positive influence to those around me.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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बिन्दु रूप में स्थित रहो तो समस्याओं को सेकण्ड में बिन्दु लगा सकेंगे।

तैयारी इतनी खामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे |

 ~KMSRAJ51

 

 

 

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Natural Qualities and Acquired Qualities

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Natural Qualities and Acquired Qualities 

Natural Qualities and Acquired Qualities

When we look at ourselves from outside we can only see the surface of what we have become. We can’t see or perhaps cannot even imagine the inner core (center), which, like in the example of the coconut, is the only part that really can nourish us and give us energy. The shell (in the case of the coconut) serves as a protection but we certainly can’t eat it.

In our case, the core (center) consists of natural or inner qualities such as peace, love, power, truth, happiness and so on. The shell is the ego which consists of features or personality characteristics we have acquired through the journey of our lives such as experiences, abilities, memories, learning, habits and beliefs – in short, all that we are referring to when we say: ‘I am so-and-so, from such-and-such family or organization or city’.

While we are limited to these acquired characteristics, our true qualities remain inaccessible. Through deep reflection and meditation we can break the shell and activate our inner qualities from which our values or principles are born.

<> Message <>

Creativity comes when there is happiness.

Expression: Happiness touches the heart and enables the creativity to come from within. The one who is happy doesn’t wait for the right opportunity to be creative, but uses each moment as a chance for using creativity – for bringing newness.

Experience: When I am happy I am able to enjoy and make the best use of each and every moment of my life. I will want to do something new, unique and different. So I also have the satisfaction of having done my best.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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फिर शाम ढल गयी, तुम आये नही आज भी…

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दर्द जो रह गया……………………..

अब आँसुओं को आँखों में सजाना होगा…..

चिराग भुज गए हैं राहुल, खुद को जलाना होगा….

ना समझना की तुमसे दूर रहकर के खुश हूँ…

लेकिन मुझ को लोगों की खातिर मुस्कुराना होगा….

फिर शाम ढल गयी, तुम आये नही आज भी…

दिल को आज फिर उमीदों से बहलाना होगा….

ये भी मालूम है मुझे…

इन्ही उमीदों पर कट जायेगी ये जिन्दगी मेरी…

और आखिर में राहुल को खाली हाथ ही…..

तेरे बिना, तेरी यादों के साथ ही इस दुनिया से जाना होगा……..

Rahul Sir

Note:- Post share by My dear Friend Mr. Rahul  Sharma.

श्रीमान- राहुल शर्मा मेरे बहुत पुराने दोस्त और एक कवि हृदय है।

मैं हृदय से श्री- राहुल शर्मा का बहुत आभारी हूँ. दिल काे छुने वाली हिंदी कविता शेयर करने लिए।

Note::-

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Meditation For Personality Transformation

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Meditation For Personality Transformation

At the heart of every human being or soul there is a spiritual energy, pure, of peace, love, truth and happiness without dependence. Being aware and experiencing this energy provides you with the inner strength necessary for change. Meditation is the method of access in order to allow that energy to come to the surface of your consciousness and in your mind in order to color your thoughts and feelings. In a way very similar to that of a volcano whose melted lava, hot, flows from the centre of the Earth to the surface, we, on meditating, can create volcanoes of power (which emerge in our conscious minds) required for personality transformation.

You can do an exercise, a meditation whereby you choose a habit or sanskar that you don’t want, and you will replace it with a characteristic that you would like to incorporate, like a thread, into the cloth of your personality. For example, replace impatience with patience.

Decide on a habit that you want to change e.g. impatience. We will focus this meditation on changing impatience. You can apply it to other habits also:

I relax and prepare to look inwards…
I am aware of the unwanted habit of becoming impatient…
As I sit in meditation, I relax my body.
I become the observer of my own thoughts and feelings…
Realizing my true identity as soul – a subtle point of light situated at the center of my forehead, just above my eyebrows, I remember my real nature is one of calmness, peace and power…
I focus on the power of peace, inviting it in and welcoming it into my thoughts and feelings from deep within…. enjoying the calm contentment which it brings…
On the screen of my mind, I begin to visualize patience…
I see myself in a situation where I normally become impatient…
I now see myself as being completely full with the virtue of patience…
I shape my feelings around the idea and image of patience…. unhurried and relaxed… calm and watchful…
If necessary, I can wait… forever…. with patience
I am free of the desire for certain outcomes…
I see how I respond with patience…
I see the effect of my patience in others within the situation…
I now know how I will speak with patience, walk with patience and act patiently in the real life situations…
I maintain this peace, which generates serenity and patience in me…

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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Practical Positive Response Training To The Mind

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Practical Positive Response Training To The Mind

Meditation is a process in which I train the mind to consciously create those right type of thoughts that I wish to have, inside my mind, regularly in my daily routine. On the field of action, I am faced with various different types of negative and uncomfortable situations, which have the first and most immediate effect on my thoughts, before showing on my face in my expressions or in my words or actions. I do realize inside, that the thoughts (and as a result my physical response) created at these times are not the right ones. I want to inculcate a habit, whereby my thought patterns are only which I like or are the right, positive and powerful ones no matter what happens.

So where do I start? Meditation is the start. Meditation is the time, when I consciously create positive thoughts. What benefit do I achieve from that? In these few moments, I am changing the deep and very old habit (not limited only to this birth) of creating the wrong type of thoughts, whenever I am faced with a situation which I do not like. How do I do this? I do this through the intellect. The intellect takes hold of the reins of the mind and chooses the direction in which it will travel. Why is it able to do this? Because, during meditation, I bring myself back to the knowledge or belief that I am a soul and my intellect accepts and absorbs this awareness. This belief then becomes the key to taking charge of what is going on in my mind.

If I believe that I am just the physical body and that my thoughts are simply results of chemical and electrical processes in the brain, and not something I can consciously control, I let go of the key of taking charge of what is going on inside my mind. In meditation, my intellect recognizes and realizes that my thoughts are my own creation, of me the soul and not the body and that I, the soul, using the intellect, which is also a part of the soul, can make choices about them.

When I realize that my natural state is to be the master of my mind and not to be dictated by it or dictated by the brain, I start taking charge of what is going on inside. When I practice being a master of my mind repeatedly by practicing meditation regularly, the new habit of creating only positive thoughts settles inside me and my habit of responding negatively with a negative state of mind to negative situations, begins to change over a period of time. I start responding positively even to negative situations. So, meditation is a major transformation process of the habit of thinking negatively, which then has positive results on my personality and behavior.

Tomorrow we shall further clarify the process which has been explained in today’s and yesterday’s message, with an example.

Meditation is a process in which I train the mind to consciously create those right type of thoughts that I wish to have, inside my mind, regularly in my daily routine. On the field of action, I am faced with various different types of negative and uncomfortable situations, which have the first and most immediate effect on my thoughts, before showing on my face in my expressions or in my words or actions. I do realize inside, that the thoughts (and as a result my physical response) created at these times are not the right ones. I want to inculcate a habit, whereby my thought patterns are only which I like or are the right, positive and powerful ones no matter what happens.

So where do I start? Meditation is the start. Meditation is the time, when I consciously create positive thoughts. What benefit do I achieve from that? In these few moments, I am changing the deep and very old habit (not limited only to this birth) of creating the wrong type of thoughts, whenever I am faced with a situation which I do not like. How do I do this? I do this through the intellect. The intellect takes hold of the reins of the mind and chooses the direction in which it will travel. Why is it able to do this? Because, during meditation, I bring myself back to the knowledge or belief that I am a soul and my intellect accepts and absorbs this awareness. This belief then becomes the key to taking charge of what is going on in my mind.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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हिंदी-English-मुरली!!

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हिंदी मुरली (23-Sep-2014)

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – यह वन्डरफुल सतसंग है जहाँ तुम्हें जीते जी मरना सिखलाया जाता है, जीते जी मरने वाले ही हंस बनते हैं”

प्रश्न:- तुम बच्चों को अभी कौन-सी एक फिकरात है?
उत्तर:- हमें विनाश के पहले सम्पन्न बनना है। जो बच्चे ज्ञान और योग में मजबूत होते जाते हैं, उन्हें मनुष्य को देवता बनाने की हॉबी (आदत) होती जाती है। वह सर्विस के बिना रह नहीं सकते हैं। जिन्न की तरह भागते रहेंगे। सर्विस के साथ-साथ स्वयं को भी सम्पन्न बनाने की चिंता होगी।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) लास्ट सो फर्स्ट जाने के लिए महावीर बन पुरूषार्थ करना है। माया के तूफानों में हिलना नहीं है। बाप समान रहमदिल बन मनुष्यों के बुद्धि का ताला खोलने की सेवा करनी है।
2) ज्ञान सागर में रोज़ ज्ञान स्नान कर परीज़ादा बनना है। एक दिन भी पढ़ाई मिस नहीं करनी है। भगवान के हम स्टूडेन्ट हैं-इस नशे में रहना है।

वरदान:- निश्चय और नशे के आधार से हर परिस्थिति पर विजय प्राप्त करने वाले सिद्धि स्वरूप भव
योग द्वारा अब ऐसी सिद्धि प्राप्त करो जो अप्राप्ति भी प्राप्ति का अनुभव कराये। निश्चय और नशा हर परिस्थिति में विजयी बना देता है। आगे चलकर ऐसे पेपर भी आयेंगे जो सूखी रोटी भी खानी पड़ेगी। लेकिन निश्चय, नशा और योग के सिद्धि की शक्ति सूखी रोटी को भी नर्म बना देगी। परेशान नहीं करेगी। आप सिद्धि स्वरूप की शान में रहो तो कोई भी परेशान नहीं कर सकता। कोई भी साधन हैं तो आराम से यूज करो लेकिन समय पर धोखा न दें – यह चेक करो।

स्लोगन:- निमित्त बन यथार्थ पार्ट बजाओ तो सर्व के सहयोग की मदद मिलती रहेगी।

English Murli (23-Sep-2014)

Essence: Sweet children, this is a wonderful spiritual gathering (satsung) where you are taught to die alive. Only those who die alive become swans.

Question: What one concern do you children have now?
Answer: That you have to become complete before destruction takes place. The children who become strong in knowledge and yoga develop the hobby of changing human beings into deities. They cannot stay without doing service. They continue to run around like genies. Together with doing service, they also have the concern to make themselves complete.

Essence for dharna:
1. In order to become first from being last make effort like a mahavir. Do not fluctuate in the storms of Maya. Become merciful like the Father and do the service of opening the locks on the intellects of human beings.
2. Bathe daily in the ocean of knowledge and become angels. Do not miss this study for a single day. Maintain the intoxication that you are God’s students.

Blessing: May you be an embodiment of success who gains victory over every adverse situation on the basis of faith and intoxication.
Through yoga, now attain such success that any lack of attainment also gives you the experience of attainment. Faith and intoxication make you victorious over every situation. As you progress further, you will have such test papers that you might have to eat dry chappatis, but faith, intoxication and the power of success in yoga will make even dry chappatis soft; you will not be distressed. Maintain the honour of being an embodiment of success and no one will be able to distress you. If you have any facilities, then use them comfortably, but check that you are not deceived at that time.

Slogan: Be an instrument and play your part accurately and you will continue to receive co-operation from everyone.

आध्यात्मिक सेवा में ब्रह्मकुमारी,

In Spiritual Service Brahmakumari,

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Vegetables for Glowing Skin

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 चमकती त्वचा के लिए सब्जिया

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चमकती त्वचा के लिए सब्जिया

Glowing skin is not just a result of expensive products or external skincare routines. The food you eat also has a major effect on your skin. Loaded with antioxidant and vitamins, here are a few vegetables, which can help you get a glowing complexion.

Carrots
Carrots can effectively aid in skin health. They are high in beta carotene, which is converted to vitamin A by the body. This then helps fight wrinkles and fine lines, giving you a youthful glow.

Sweet potatoes

Sweet potatoes are a good source of vitamin A and C, which helps prevent and heal acne. It also has anti-inflammatory properties that aid in skin health.

Tomatoes
Tomatoes are rich in lycopene, an antioxidant that acts as a sunscreen and also helps fight ageing. You can either add tomatoes to your diet or you can use its pulp externally on your pores to tighten them.

Spinach
Spinach is packed with antioxidants that help slow down the early signs of ageingand also help tighten your skin tissue. Apart from that, they have anti-inflammatory properties that help flush out toxins, thereby giving your skin a healthy glow.

Beetroots
Beetroots are a good source of anthocyanins, an antioxidant that decreases inflammation of the skin and slows downageing. Adding beetroot to your regular diet will help improve your complexion and give it a healthy glow.

Read more Personal Health, Diet & Fitness stories on – http://healthmeup.com/

Source:- http://healthmeup.com/

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जब तुम जानते हो कि तुम क्या कर सकते हो, तो तुम कुछ कर सकते हो|

जब तुम नहीं जानते कि तुम क्या कर सकते हो, तो तुम उससे भी बेहतर कर सकते हो|

~Sri Sri Ravi Shankar

 

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How to Increase Notebook Battery Life

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नोटबुक की बैटरी लाइफ बढ़ाने के लिए टिप्स

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नोटबुक की बैटरी लाइफ बढ़ाने के लिए टिप्स

How to Increase Notebook Battery Life

Having your notebook die on you when you’re working on the move is one of the worst things that can happen. Conserve battery life and stay productive with our tips.

Modern notebook PCs are much better at conserving their power than older computers. If you believe in running an environmentally friendly business, the newer green hard drives and solid state drives help you minimise power consumption. Notebooks with green settings also cut down on power usage while extending battery life.

Even so, business users can often extend the battery life of notebooks by changing a few key settings. Here’s a quick guide to ecologically friendly notebook power settings that can extend battery life significantly.

Notebook Settings In Windows

Notebooks that use Windows 7*, XP* or Vista* have a few predetermined power plans for users to choose from as well as a Custom option. To view these plans, open Control Panel from your computer’s Start menu. Choose Power Options from either the System and Maintenance (Windows 7 and Vista) or Performance and Maintenance (XP) menus.

Power Options

The Power Options menu offers both simple and advanced settings. Some notebooks have a special eco-friendly plan, which limits screen brightness while lowering the time it takes for a computer to go to sleep or hibernate. Choosing custom options will allow you to choose each setting separately, so sleep and hibernate times can be manually set.

Brightness

To get really great battery life, have your staff lower their screen brightness through the Display menu in the Control Panel. Some notebooks also have special graphics card programs, which can be used to minimize power consumption while a computer’s unplugged.

Optimise from the Start

With all modern notebooks, it’s a good idea to set power settings as soon as possible after buying a computer. When a computer is unplugged, running down its battery completely before recharging may extend battery life. Check your computer’s manual to find out if this is the case.

Mac OS Notebooks

Apple notebooks have similar power settings, although changing them is a bit different. Go to your computer’s Apple menu and selected System Preferences. The Hardware tab has several power-related settings that can be changed by computer users. Sleep settings can be changed under the Energy Saver tab. Processor performance can also be changed. Lower processor speeds mean a slower computer, but can also mean better battery life.

Making these simple adjustments to a notebook’s power settings is a great way to keep a battery running for longer, reduce your power bill and keep your staff on the go. With a slightly dimmer screen and manually adjusted sleep settings, a computer can often get 20% or more battery life. It’s well worth the time make a few key adjustments, especially if you frequently use your notebook on battery power.

Source: http://smb.intel.in/

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