मन से कभी भी जीवन में निराश ना हाेना।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

“कभी भी मन से निराश हाेकर जीवन में बैठ ना जाना,
माना कि समस्यायें ताे जीवन में बहुत आयेगी,
लेकिन काेई भी समस्या लंबे समय तक, टिक नहीं सकती।”

-KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं,

ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

हर एक शब्द दो-अर्थी (Positive “or” Negative) हाेता हैं,
यह ताे साेंचने वाले पर निर्भर करता है।
की वह क्या (Positive “or” Negative) साेंच रहा हैं॥

-KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”

-Kmsraj51 

अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 –KMSRAJ51

जिस बात काे आप (स्वयं) अपने आप तक सिमित नहीं रख सकते,
भला काेई आैर कैसे, उस बात काे अपने आप तक सिमित रख सकता हैं।

 –KMSRAJ51

“अपने मन काे इतना संयमित करले कि जिस समय जाे भी कार्य करें,
उस कार्य काे करने में इस कदर खाे जायें कि, उस कार्य के अलावा,
उस समय आपकाे आैर कुछ भी ना सुझे॥”

 –KMSRAJ51

जीवन का लक्ष्य पता करें, उसे पाने की इच्छा पैदा करें।

ऐसा नहीं करेंगे तो आप एक काम छोड़कर दूसरा और फिर तीसरा करते रहेंगे और खुद को नाकाम मानने लगेंगे। 

-KMSRAJ51

काम या लक्ष्य पर दृढ़ न रहना मानसिक थकावट को बताता है।

महत्वपूर्ण मौके पर पीछे हट गए। जबकि यह सफलता के सबसे करीब पहुंचने की स्थिति होती है। 

-KMSRAJ51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-5

KMSRAJ51-Problem Solve

दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

अक्सर कई छात्र मेल के द्वारा या फोन के माध्यम से हमसे पूछते हैं कि हम प्रवेश परिक्षाओं में कैसे सफलता पायें या किस तरह तैयारी करें कि हमें कामयाबी मिले?  सच तो ये है कि, कामयाबी की चाह लिये हम सब अपने-अपने क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं। परन्तु अपने कार्य सम्पादन के दौरान अक्सर एक दुविधा में भी रहते हैं कि हमारे द्वारा किया गया कार्य सफल होगा या नही, ये हम कर पायेंगे या नही  इत्यादि इत्यादी. मित्रों, इस तरह की आशंकायें हमारी ऊर्जा को छींण करने का प्रयास करती हैं और स्वंय के विश्वास पर एक प्रश्न चिन्ह लगा देती हैं।  यही दुविधा सफलता की सबसे बङी बाधा है। किसी भी कार्य को करने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करना कार्य की रणनीति होती है परंतु जब नकारात्मक पहलु योजना पर हावी होता है तो यही संशय सफलता की सबसे बङी अङचन होती है। जिसके कारण हम एक कदम भी आगे नही रख पाते। जबकि जिवन का सबसे बङा सच है कि हमेशा परिस्थिति एक जैसी नही रहती, लक्ष्य की सफलता में कई रोङे आते हैं। जो इन रुकावटों को आत्मविश्वास के साथ पार करता है वो लक्ष्य हासिल करने में सफल होता है। लेकिन दूसरी ओर जो दुविधा के जंजाल में फंस जाता है, वो कभी भी आशाजनक सफलता नही अर्जित कर पाता है। ज्यादातर लोग ज्ञान और प्रतिभा की कमी से नही हारते बल्की इसलिये हार जाते हैं कि दुविधा में पङकर जीत से पहले ही मैदान छोङ देते हैं।

दुविधा तो एक द्वंद की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति निर्णय नही ले पाता और न ही स्वतंत्र ढंग से सोच पाता है। इतिहास गवाह है कि प्रत्येक सफल व्यक्तियों के रास्ते में अनेक मुश्किलें आईं किन्तु उन्होने उसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया समझा और आगे के कार्य हेतु कोशिश करते रहे। कई बार हम लोग किसी कार्य को करने से पहले इतना ज्यादा सोचते हैं कि समय पर काम नही हो पाता या हम अवसर को दुविधा के भंवर में कहीं खो देते हैं। यदि हम विद्यार्थी की बात करें तो कई बार ऐसा होता है कि कुछ छात्र विषय को लेकर इतने ज्यादा संशय में रहते हैं कि वो फार्म भरने में लेट हो जाते हैं या आशंकाओं के चक्कर में गलत विषय का चयन कर लेते हैं। जबकि सच तो ये है कि सभी विषय में मेहनत करनी होती है तभी अच्छे अंक मिलते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि एक बुद्धिमान व्यक्ति भी लंबे समय तक दुविधाग्रस्त रहता है तो उसका भी मानसिक क्षरण हो जाता है। जिसके कारण सक्षम व्यक्ति भी उन्नति नही कर पाता। दुविधा सफलता की राह में सबसे बङी अङचन है। अत्यधिक संशय आत्मविश्वास को भी कमजोर बना देता है। यदि हम एक परशेंट असफल भी होते हैं, तो भी हमारे अनुभव में इजाफा ही होता है और अनुभव से आत्मविश्वास बढता है। मन में ये विश्वास रखना भी जरूरी है कि सब कुछ संभव है।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि,  संभव की सीमा जानने का सबसे अच्छा तरीका है, असंभव से भी आगे निकल जाना।

जो लोग सफलता की इबारत लिखे हैं उन्हे भी दुविधाओं के कोहरे से गुजरना पढा है परन्तु ऐसे में उन लोगों ने परिस्थिति को इस तरह ढाला कि वे अपनी योजनाएं  स्वयं निर्धारित कर सके। सफलता के लिये ये भी आवश्यक है कि हम हर परिस्थिति में स्वंय को तैयार रखें। किसी भी सफलता के लिये ये जरूरी है कि हम निर्णय लेने की भूमिका में आगे बढें; क्योंकि एक कदम भी आगे बढाने के लिये निर्णय तो लेना ही पङता है, तद्पश्चात जिंदगी हमें धीरे-धीरे खुद ही निर्णय लेना सीखा देती है। अतः सबसे पहले हम दुविधापूर्ण मनः स्थिति के शिकार न होते हुए स्वंय को संतुलित रखते हुए दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें, जिससे आशंकाओं और दुविधाओं का तिमिर नष्ट हो तथा सफलता की और हमसब का कदम अग्रसर हो।

डॉ.ए.पी.जे. कलाम के अनुसार,  Confidence & hard work is the best medicine to kill the disease called failure. It will make you a successful person. 

Post inspired by Mrs. अनिता शर्मा जी

Educational & Inspirational VIdeos (9.8 lacs+ Views):  YouTube videos Link

(http://www.youtube.com/channel/UCRh-7JPESNZWesMRfjvegcA?feature=watch)

Blog:  http://roshansavera.blogspot.in/

E-mail ID:  voiceforblind@gmail.com

अनीता जी नेत्रहीन विद्यार्थियों के सेवार्थ काम करती हैं।

एक अपील

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful article with KMSRAJ51 Readers.

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-KMSRAJ51

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“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

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हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए।

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हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए।

हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए। जैसे रोजाना के जीवन में खाने-पीने काम करने, दौड़ भाग करने, खेलने-कूदने, मनोरंजन आदि सबकी सीमा निर्धारित हो, तो समय का सही नियोजन और उपयोग होगा। समय ही जीवन है। एक-एक क्षण मिलकर जीवन बनता है। जीवन थोक नहीं है, चिल्हरों से बनता है जैसे एक-एक पैसे से रुपया फिर रुपये से सौ, हजार, लाख, करोड़ बनते हैं तो सब इकाई से शुरू होता है इसी तरह जीवन है एक-एक सोच मतलब रखती है।

सोच का संग्रह ही लेखन है, उद्बोधन है, कार्य है चाहे जिस क्षेत्र में हो सब एक सोच से प्रारंभ होता है। अब इसमें आता है, सही दिशा में सही सोच जिसे सकारात्मक सोच कहते हैं। गलत दिशा में सोचा गया तो उसे नकारात्मक सोच कहते हैं। पर हम समय प्रबंधन, व्यवसाय या नौकरी प्रबंधन, स्वास्थ्य प्रबंधन और अन्य कई प्रबंधन जो जीवन में होते हैं या हम करते हैं, वे सब सोच से प्रारंभ होते हैं। हमें सोच की सीमा तय करना आना चाहिए। कोई सदस्य घर का बीमार है, हमें सोचना है उसके इलाज के बारे में, डॉक्टर दवा के बारे में उसे सांत्वना देता है कि कोई बात नहीं, जल्दी ठीक हो जाओगे यदि हम सोचते ही रहे कुछ नहीं किया तो सोच चिंता में बदल जायेगा एक चिन्ता घुसी मन में तो वह अपने पूरे रिश्तेदारों को बुला लेती है भय, मोह, आसक्ति, हड़बड़ी आदि।

मैंने एक डॉक्टर को अपनी विवाहिता पुत्री के डिलवरी पेन दर्द के समय इतना चिंतित भयभीत और हड़बड़ी करते देखा कि मुझे आश्चर्य हुआ कि ये कैसे डॉक्टर हैं जो घर के एक सदस्य के प्रसूति दर्द से इतने परेशान हो गये तो मरीज या उसके सदस्यों का क्या हाल हुआ होगा। मैं मानता हूं कि डॉक्टर भी आखिर इंसान होता है पर उसे इतनी जल्दी घबराना नहीं चाहिए। वह अपने मरीजों को कैसे दिलासा देगा। हर चीज की सीमा तय होनी चाहिए। सीमा से बाहर उसका प्रभाव ऋणात्मक हो सकता है। ऋणात्मकता बहुत नुकसान दायक है, आपके पूरे वजूद को हिला देती है। हम पर हमारा मन ही शासन करता है उसे सुधार लें सकारात्मकता से भर लें तो सब ठीक हो जायेगा।

श्रीमत-भागवत गीता अनुसार-

चिन्ता मत करें चिन्तन करें और व्यथा को स्थान न दें व्यवस्था करें।

छोटे-छोटे से शब्द हैं पर जीवन को नया मतलब देते हैं। यही तो है जीवन प्रबंधन जिस पर महान चिन्तक विजय शंकरजी मेहता हमेशा बोलते लिखते रहते हैं। उनकी किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। सब कुछ उपलब्ध है दुनिया में अच्छे विचार, अच्छी किताबें, अच्छे लोग, अच्छे कैसेट, रेडियो, टी.व्ही. के कुछ चैनल आस्था और संस्कार अच्छी चीजें परोस रहे हैं। आपको शांत रहकर पढ़ना-सुनना, सोचना करना, चलना है तो ही आप मंजिल पर पहुंचेंगे। बस कोशिश करिये। सोचिये और सोच की सीमा तय करिये। अच्छी सोच बढ़ाइए, घटिया सोच को घटा कर शून्य कर दीजिए, बस यही मेरा संदेश है।

In English

Everything should be set limit.

Everything must be kisimanirdharit. Such as daily life to race to work, food, play-jump, entertainments etc all the time limit sahiniyojnaauraupyoghoga. Samyahi life. A-together life is a moment. Life is not, wholesale chilharon is made from a money like rupee then bucks hundred, thousand, million, million are made then all unit begins with a similar life thinking holds meaning.
Thinking is only a collection of writings, is whether the served area, exhortations seemed all starts with a thought. Now it comes in the right direction are correct thinking jiseskaratmak sochkahte. Are the usenkaratmak sochkahte been thought in the wrong direction. We at time management, business or job management, health management and other management who are in life or we do they start sabsochse. We must come to frame of thinking. No member of the House is sick we have to think about her treatment, doctors give him consolation about the drug that’ll be no problem, quick fix if we think there are only a few will turn into concern didn’t think exactness in mind so he takes his entire relatives calling haibhay, infatuation, attachment, hadbadiadi.
I married a daughter of dilvari your pen do so fearful and worried about the pain of time rush saw that surprised me was how doctor who is a member of the House have become so upset the patient obstetrics pain or what its members have occurred. I recognize that even doctors finally is on the person so quickly should not go haywire. How will the console my patients. Everything should be fixed limits. Out of bounds is the effect may be negative. Rinatmakta is your whole existence to dayak much damage is nodding. We rule our mind itself is so filled with bike repair positivity will be all right.

According to Shrimat-Bhagwat Gita-

“Do not worry, do not put in place to meditate and soreness.”

Small little words mean to give new life. That is the great life management thinkers speak vijyashankarji Mehta always keep writing. His books have also been published. Everything is available in the world, good ideas, good books, good people, good cassette, radio, TV … Whee. Some are serving faith & values channel, good stuff. Do you think staying calm walk, listen to read-only if you will on the floor. Just try some.Imagine some of the thinking and frame. Boost good thinking, let the poor thinking minus zero, that is my message.

Priyank Dubey

Roorkee-Uttarakhand

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सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।

यह गिफ्ट में या धनी परिवार में पैदा होने से नहीं मिलती है।

-Kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

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अधूरापन ज़रूरी है जीने के लिए।

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अधूरापन ज़रूरी है जीने के लिए

kmsraj51-G-of-Water

Incompleteness is necessary to live

अधूरापन शब्द सुनते ही मन में एक negative thought आ जाती है. क्योंकि यह शब्द अपने आप में जीवन की किसी कमी को दर्शाता है। पर सोचिये कि अगर ये थोड़ी सी कमी जीवन में ना हो तो जीवन खत्म सा नहीं हो जायेगा?

अगर आप ध्यान दीजिए तो आदमी को काम करने के लिए प्रेरित ही यह कमी करती है. कोई भी कदम, हम इस खालीपन को भरने की दिशा में ही उठाते हैं। Psychologists का कहना है कि मनुष्य के अंदर कुछ जन्मजात शक्तियां होती हैं जो उसे किसी भी नकारात्मक भाव से दूर जाने और available options में से best option चुनने के लिए प्रेरित करती हैं। कोई भी चीज़ जो life में असंतुलन लाती है, आदमी उसे संतुलन की दिशा में ले जाने की कोशिश करता है।

“अगर कमी ना हो तो ज़रूरत नहीं होगी, ज़रूरत नहीं होगी तो आकर्षण नहीं होगा, और अगर आकर्षण नहीं होगा तो लक्ष्य भी नहीं होगा।”

अगर भूख ना लगे तो खाने की तरफ जाने का सवाल ही नहीं पैदा होता। इसलिए अपने जीवन की किसी भी कमी को negative ढंग से देखना सही नहीं है।असल बात तो ये है कि ये कमी या अधूरापन हमारे लिए एक प्रेरक का काम करता है।

कमियां सबके जीवन में होती हैं बस उसके रूप और स्तर अलग-अलग होते हैं, और इस दुनिया का हर काम उसी कमी को पूरा करने के लिए किया जाता रहा है, और किया जाता रहेगा। चाहे जैसा भी व्यवहार हो , रोज का काम हो, office जाना हो, प्रेम सम्बन्ध हो या किसी से नए रिश्ते बनाने हो सारे काम जीवन के उस खालीपन को भरने कि दिशा में किये जाते है। हाँ, ये ज़रूर हो सकता है कि कुछ लोग उस कमी के पूरा हो जाने के बाद भी उसकी बेहतरी के लिए काम करते रहते हैं।

आप किसी भी घटना को ले लीजिए आज़ादी की लड़ाई, कोई क्रांति, छोटे अपराध, बड़े अपराध या कोई परोपकार, हर काम किसी न किसी अधूरेपन को दूर करने के लिए हैं। कई शोधों से तो ये तक proof हो चुका है कि व्यक्ति किस तरह के कपड़े पहनता है, किस तरह कि किताब पढता है, किस तरह का कार्यक्रम देखना पसंद करता है और कैसी संस्था से जुड़ा है ये सब अपने जीवन की उस कमी को दूर करने से सम्बंधित है।

महान psychologist Maslow (मैस्लो) ने कहा है कि व्यक्ति का जीवन पांच प्रकार कि ज़रूरतों के आस – पास घूमता है।

पहली मौलिक ज़रूरतें – भूख, प्यास और सेक्स की।
दूसरी – सुरक्षा की।
तीसरी – संबंधों या प्रेम की।
चौथी आत्मा – सम्मान की।
और पांचवी – आत्म सिद्धि (Self-accomplishment) की जिसमे व्यक्ति अपनी क्षमताओं का पूरा प्रयोग करता है।

ज़रूरी नहीं की हम अपने जीवन में Maslow’s Hierarchy of needs में बताई गयी सारी stages तक पहुँच पाएं और हर कमी को दूर कर पाएं, पर प्रयास ज़रूर करते हैं.
कई घटनाएँ ऐसी सुनने में आती हैं जहाँ लोगों ने अपने जीवन की कमियों को अपनी ताकत में बदला हैं और जिसके कारण पूरी दुनियां उन्हें जानती है जिसमे Albert Einstein और Abraham Lincoln का नाम सबसे ऊपर आता है.
Albert Einstein जन्म से ही learning disability का शिकार थे , वह चार साल तक बोल नहीं पाते थे और नौ साल तक उन्हें पढ़ना नहीं आता था। College Entrance के पहले attempt में वो fail भी हो गए थे. पर फिर भी उन्होंने जो कर दिखाया वह अतुलनीय है।
Abraham Lincoln ने अपने जीवन में health से related कई problems face कीं। उन्होंने अपने जीवन में कई बार हार का मुंह देखा यहाँ तक की एक बार उनका nervous break-down भी हो गया, पर फिर भी वे 52 साल की उम्र में अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति बने।

“सच ही है अगर इंसान चाहे तो अपने जीवन के अधूरेपन को ही अपनी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बना सकता है।
जो अधूरापन हमें जीवन में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा दे , भला वह Negative कैसे हो सकता है।”

“ज़रा सोचिये! कि अगर ये थोडा सा अधूरापन हमारे जीवन में न हो तो जीवन कितना अधूरा हो जाये।”

In English

– Incompleteness is necessary to live –

Adhurapna shabd melody is a negative thought in mind. Because the term itself refers to a loss of life. But imagine that if it’s not in the slightest bit short life will not end life?

If you give notice to the person to work it does lack. Any steps we take in the direction of filling emptiness.Psychologists say that humans have innate powers which something inside her move away from any negative sense and available options to choose the best option simulates. Any thing life brings imbalance in men it is carrying koshishkarta towards balance.
If not then do not need shortage won’t have the draw will not, and will not, will not target if charm. if hunger took the side of the asylum right question arises. Therefore lack any of your life watching negative manner is not correct. The real thing is that these lack or incompleteness of a motivator for us.
Drawbacks are just as her life and everybody levels vary. And of this world every thing is to meet the shortage and will continue to be. Even as the work of the practice day, go to office, love relationship or a new relationship may only fill the emptiness of all things life that are made in that direction. Yes, these may of course that some people even after the reduction is completed his work for better living.
You collect any event freely fight, no revolution, no big small crime, guilt or benevolence, nailed every thing adhurepan to remove these from the proof many are oversees research has been that person wears, what kind of fabric that is, what kind of program book padhta likes to watch and what institution is connected to all of your life to overcome the constraints associated with the Is.
The great psychologist Maslow (maislo) said that five types of life that revolve around needs – pass.
Pahlimaulik needs; Hunger, thirst, and sex.
Dusrisurksha chauthiatma-tisrisambandhon or of love, honor aurpanchaviatmasiddhi (self-actualization) of which uses his abilities of the person.
Not we your life Maslow Hierarchy of needs ‘ s added in all the stages reached by e-mail and every vulnerability able, make sure to try on.
Many events in such hearing where people in your life are changed and the shortcomings of its strength due to which the whole world’s best parathas Albert Einstein and Abraham Lincoln that they know the name comes at the top.
Albert Einstein was a victim of the learning disability since birth, she cannot speak and four years nine years did not read them. In the first attempt fail College Entrance were also. Still, he showed that he is incomparable.
Abraham Lincoln did face many problems related to health in their lives did. He looked lost at times in my life mouth even once his nervous break-down is also done, but still they are 52-year-old American President as sixteenths.
True if the person wants your life adhurepan your motivation could make the largest source.
Do the things in life that inspire the passage of incompleteness give us, how could he not negative.
“Just imagine! If it’s a little bit not incompleteness in our lives should be so incomplete life!

Priyank Dubey

Roorkee-Uttarakhand

We are grateful to Priyank Dubey Ji for sharing this inspirational Hindi Quotes-Story with KMSRAJ51 readers.

“अगर सच्चे-मन से जीवन में कुछ करने की ठान लाे, ताे सफलता आपकाे जरुर मिलेगी। -KMSRAJ51”

Note::-

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सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।

यह गिफ्ट में या धनी परिवार में पैदा होने से नहीं मिलती है।

-Kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सफलता।

Kmsraj51 की कलम से…..

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संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सफलता।

संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सक्सेस शेक्सपियर ने लिखा था, “हमारे संदेह गद्दार हैं। हम जो सफलता प्राप्त कर सकते हैं, वह नहीं कर पाते, क्यूंकि संदेह में पड़कर प्रयत्न ही नहीं करते।” इंसान का स्वाभाव ही ऐसा होता है कि कोई काम शुरू करता है और थोडा सा भी संदेह होने पर काम को रोक देता है और उत्साह पर पानी फिर जाता है। संदेह कि बजाय इंसान को विश्वास को ज्यादा तरजीह देनी चाहिए।
जीवन में आगे बढ़ने के लिए इंसान प्रयत्न करता है और इस प्रयत्न पर संदेह के कारण पानी फिर जाता है। संदेह व्यक्ति के उत्साह को कम कर देता है। संदेह के कारण इंसान सही समय का इंतजार करता रह जाता है। उसे लगता है कि उचित अवसर आने पर काम करूंगा। जो लोग अपनी योग्यता पर शक करते हैं, वे हमेशा दुविधा में रहते हैं कि काम को शुरू भी किया जाए या नहीं। वे हमेशा काम को टालते रहते हैं। उन्हें हमेशा यही महसूस होता है कि अभी सही समय नहीं आया है। वे अपनी दिशा तय नहीं कर पाते और इधर-उधर भटकते रहते हैं। संदेह से पीछा छुड़ाने के लिए मन में विश्वास पैदा करना होगा कि जो काम शुरू किया है, उसमें सफलता जरूर मिलेगी।

“अगर सच्चे-मन से जीवन में कुछ करने की ठान लाे, ताे सफलता आपकाे जरुर मिलेगी।”-Kmsraj51

अगर व्यक्ति अपने मन में विश्वास रखे कि वह एक बड़े पुरस्कार के लिए काम कर रहा है और जीत उसी की होगी, तो सफलता निश्चित है। विश्वास एक टॉनिक है, जो इंसान की सारी शक्तियों को सक्रिय कर देता है। संदेह होने पर इंसान कोशिश करना बंद कर देता है और विश्वास के कारण वह मुश्किलों में भी आगे बढ़ता रहता है। अब यह आप पर है कि आप किसे चुनते हैं। मन में बैठे संदेहों को दूर करने के लिए सफलता की मनोकामना भी जरूरी है। जब तक आप खुद संदेह को मौका नहीं देते, तब तक वह आप पर हावी नहीं हो सकता। एक कहावत है, “निश्चय कर लो कि तुम सही हो और फिर आगे बढ़ते जाओ, पर सारा दिन निश्चय करने में व्यतीत मत कर दो।”

मेरा यही मानना है कि, किसी चीज या परिस्थिति पर शक करने की बजाय आपको तुरंत फैसले लेने होंगे, तभी तेजी से तरक्की कर पाएंगे। आपको अपने मन को समझना होगा और तय करना होगा कि आपको कहां जाना है। संदेह के कारण आप बैठे रहेंगे और दुनिया आगे बढ़ती जाएगी। अपने मन में छुपे डरों को दूर करके विश्वास की ताकत को समझिए। ज्यादातर लोग संदेह इसलिए करते हैं, क्योंकि उनके मन में नकारात्मकता होती है।

उन्हें लगता है कि वे सफलता के काबिल नहीं है। अगर उन्हें थोड़ी सी विफलता मिलती है तो वे हार मान लेते हैं। इसकी बजाय विफलता मिलने पर ज्यादा ताकत के साथ आगे बढ़ना चाहिए। संदेह को दूर भगाएं। मन में विश्वास जगाएं कि आप आगे बढ़ सकते हैं, आप काबिल हैं और आप भी सफल हो सकते हैं।

– In English –

Will not doubt would success Shakespeare wrote, “our suspicions are a traitor. We can achieve success, which he cannot do because not only suspected padkar endeavours.”There is no such human according to work and a little bit too doubt stops the work and enthusiasm are defeated on. Doubt that instead should be more inclined to trust. Striving to move forward in human life and endeavour goes awry due to doubts. Reduces the enthusiasm of individual suspicion. Due to the suspicion is the right person waits of time. It will work on that reasonable opportunity. Those who doubt their abilities, they always live in a dilemma whether to even start that work. They always keep to avoid work. They always feel that there is just the right time. They may not be able to determine your direction and around languish. Rigid suspiciously must instill confidence in mind for what is success will of course began to work. If the person believes in his mind that he is working for a big prize and win would be the same, then success is sure. Faith is a tonic, which gives all powers of the active person. Doubt stops the person try and believe in odds because he moves forward. Now it’s up to you to whom you choose. To overcome the doubts in the minds of her desire is also required. As long as you do not suspect himself, he could not prevail upon you. Get a saying, “surely you’re right and then moving on to decide to go, don’t spend all day on the two.” I only believe that, instead of doubting a thing or situation you will immediately the fast decisions may be able to elevate. You have to understand his mind and decide whether you where to go. Doubt you will be seated and the world will grow further. By removing hidden in your mind and persisted in faith know the power of. Most people suspect so, because his mind is negativity. They think they don’t deserve the success. If they lose the slightest failure if they assume. Instead when a failure should move forward with more force. The suspicion bhagaen. Jagaen believe in mind that you can proceed, you deserve it and you too can be successful. 

Priyank Dubey

Roorkee-Uttarakhand

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सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।

यह गिफ्ट में या धनी परिवार में पैदा होने से नहीं मिलती है।

-Kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

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Conquering The Emotion Of Jealousy

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT04

Conquering The Emotion Of Jealousy – Part 1

Man was handed the master key of the knowledge of good and evil karma by God. He used the key to perform good karma for some time. That was the day of humanity. Over a period of time, while playing the game of different roles in the world theatre, the key was lost and man started to perform evil karma. The evil man started identifying with evil so much that he forgot his original good self and thought that evil is the eternal self. That was and is the night of humanity. That is why in the scriptures, mistakenly it is said that even angels used to sometimes feel jealous. In Indian scriptures, devis and devtas, the original good men and women, have mistakenly been shown to possess the emotion of jealousy at times. Poor perception of the evil men, who made the scriptures and temples in the remembrance of the good men and women, the angels, after they had ceased to exist! The good men and women were nothing but our early births as we started our journey of birth and rebirth as flawless beings.

Today humans are empowered beings who have the capacity to experience so many emotions, both positive and negative. Sadness, anger, happiness, sympathy and the list is endless. Out of all these one very powerful and dominating emotion is jealousy.When we see different players in this game of life playing different roles, sometimes while seeing them with the spectacles of role consciousness, feelings of jealousy or a desire to be like the other are experienced. Comparisons emerge in our minds.

While being competitive and having aspirations to succeed are absolutely fine and there is no doubt that to do that sometimes we have to look at the other or even others and this drive helps us meet life’s challenges also, but when this look at the other is accompanied by comparisons and feelings of low self esteem as a result and takes the form of jealousy; it gets out of control and starts having an adverse effect on our relationships, that steps should be taken to curb those feelings.

– Message –

To forgive the self is to have the ability to forgive others too.

Expression: I sometimes find it very difficult to forgive the mistakes committed by others. I do try to understand but am not able to understand the other person’s behaviour and so find it difficult to forgive them.

Experience: When I have love for myself and am able to learn from all that happens, I am able to forgive myself. When I know to do this, I can understand the other person too from his perspective and can easily forgive him.

Conquering The Emotion Of Jealousy – Part 2

In the 21st century, there are so many mediums which inculcate the feeling of jealousy in a person. Social Media is one such platform. While Facebook and Twitter rule the roost, commonly people wonder * How does he get so many likes? * How is she so photogenic? * Again a ‘check in’! * His life is so eventful. You never know how and when these thoughts start affecting your life, mental peace and behavior greatly.

Jealousy is a complex emotion, which often stems from insecurity or a fear of losing control. Everybody expresses and handles jealousy in a different way, but certain universal techniques can be used to help conquer it. Being aware of jealous feelings is the first step towards keeping it under control. Also conquering jealousy requires an honest conversation about how you feel. It’s far healthier to talk about your negative feelings than to reveal them through your actions. The more you communicate with them, and seek reassurance the more your feelings of jealousy will subside.

Hold a strong and determined belief inside yourself that jealousy is an emotion you will never face. Your idol or perfect self just doesn’t deserve the existence of the emotion. For instance, if you have an acquaintance of yours who is extremely pretty and sometimes, you envy her. That is the time when you need to firmly tell yourself that this is just not your perfect self. You can’t feel that way. Take a few minutes tostand back mentally from the person. The next step is to observe your thoughts as if you were an onlooker or a detached observer. Being as silent as possible, ask yourself as if the thoughts you are having are the ones you wish to keep, if they are going where you would choose them to go. In the resulting silence, steer (change direction) your thinking to where you want it to be; perhaps to personal affirmations (positive thoughts) you use to establish yourself on your seat of self-respect. The affirmations can be: * I am aware of myself as a special person with my own unique specialties or * I am aware of myself as internally rich, full of many invisible treasures, * I am aware of myself as a content being and overflowing with happiness, etc. This technique changes our attitudes and feelings and influences us positively.

– Message –

To have learnt means to bring about a practical change.

Expression: From all that happens, I usually understand a lot of things and take important lessons. But sometimes I find myself making the same mistakes again and again. So I am not able to bring about real change.

Experience: Once I realise and learn from a mistake that has happened, I need to spend some time in understanding it even further. I need to ensure I don’t ever repeat the same mistake. This will enable me to bring about real change.

Conquering The Emotion Of Jealousy – Part 3

Internal contentment or satisfaction is the antidote (neutralizer or healing agent) for jealousy. People with strong self-esteem and self-respect are the ones who remain satisfied or content and away from the emotion of jealousy while coming in contact with different people with their own unique specialties, virtues and attainments.

Self-respect or self-esteem depends on knowing who I am, knowing my eternal (ageless), internal self. When I have found that sense of internal identity, I feel I have a right to be here, to exist. Without this dimension, it is very difficult to really respect myself deeply. If I base my self-respect on identifying with the superficial (artificial) aspects of my being: my looks, personality, wealth, success, my friends, intelligence or my role, I will never have a stable sense of self-respect, because all these aspects are changeable. Thus I will end up fluctuating all the time.To stay stable in my self-respect, I need to have a deeper understanding of my internal self and tap into those riches that are within me forever, waiting to blossom, like the flower from the seed. As I become internally aware, those riches and resources start flowing out of me. The more stable I am in my self-respect, the more I radiate what I truly am. I feel a deep sense of contentment and I am happy to be me, however I am. I accept myself as I am.

Let us be honest a person who is jealous just cannot sit stably on the seat of self-respect – they keep moving i.e. fluctuating. Today they meet a person with lesser specialties or attainments than them and they are on top of the world – they rise above the seat of self-respect and enter the dimension of ego. Tomorrow they meet a person with more specialties or attainments than them and that is a bad day for them – they go underneath the seat of self-respect and enter the dimension of low self-esteem. What a shallow way of living! The ideal way of living – in both cases, remain in self-respect and give respect to the other. Remember that the jealous, the angry, the bitter and the egotistical are the first to race to the top of mountains. A confident and internally content person enjoys the journey, the people they meet along the way and sees life not as a competition. They reach the summit last because they know God isn’t at the top waiting for them. He is down below helping his followers to understand that the view is glorious where ever you stand.

– Message –

The ability to find solutions comes when I know the art of listening.

Expression: I normally get to hear a lot of things and tend to get coloured by all that I hear. The more I hear about negative things, the more difficult it becomes to maintain my own positivity. Yet I can do nothing to ignore the things that make me feel negative.

Experience: I need to know to listen to people rather than just hearing them. To know to listen means the ability to transform negative into positive. Just as a doctor listens to all the negative aspects about the disease etc and still knows only to give the medicine, I too need to listen in order to give what is required.

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

 

 

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बस यही बताना था

Kmsraj51 की कलम से…..

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बस यही बताना था(अनुराधा त्रिवेदी सिंह)

आज अपने बेटे को झूठ भी सिखाना है

चाँद जैसे माथे पर

असत का काला टीका, कैसे भी सजाना है

आज मुझे बेटे को झूठ भी सिखाना है ।

आज तक बताया था कुछ गलत नहीं करना

चाहे जो भी हो जाये सच से तुम नहीं डरना

सत की राह पर चलते दण्ड के भागी बनना

पर कभी तुम्हें न सिर ग्लानि से झुकाना है ।

आज मैं बताऊँगी कि कभी-कभी दुनिया

सच से रूठ जाती है, मान झूठ जाती है

आज मैं बताऊँगी कैसे कुछ सगे रिश्ते

सच से टूट जाते हैं,फिर नहीं जुड़ पाते हैं।

और ये कि जीवन में सब सही नहीं होता

एक रंग सिलेटी भी कैनवास पे होता है

हर कहीं सफ़ेदी या स्याह रंग नहीं होता।

आज वो ये जानेगा, नज़रें फेर लेने में,

भी बड़ी दिलेरी है, सबने नज़रें फेरीं हैं।

आम आदमी हैं हम, हर कथा के नायक हैं

पर हरेक मौक़े पर मूक ही रहे हैं हम

ये नहीं कि कायर थे, वक़्त का तक़ाज़ा था ।

साथ ही बताऊँगी, जब भी तुम बड़े होगे

सच का साथ ही देना

बस यही बताना था इस अनोखी दुनिया में

सबके सच अलहदा हैं, सबकी कसौटी अपनी ।

आज साँझ की बेला शीशे जैसी आँखों में

एक बाल रखना है

आज साँझ की बेला नन्ही भोली आँखों से

एक सच परखना है ।

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स्वत्व

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स्वत्व-(अनुराधा त्रिवेदी सिंह)

अभी कुछ और

                  जियेंगे

        हम तुम

अपने स्वत्व के साथ।

                      वक़्त केवल

            आसमान की छाती पर

दाग बनकर नहीं रह जायेगा

                        कल का सूरज हमारा होगा

                     हर चौराहे पर

 आग उगलती नज़रो के

                     अलावा भी बहुत कुछ होगा

     स्वागत की बाहें बढेंगी हमारी ओर

           और तुम

 विजयगान लिखोगे

                  कल चौक की धूप

              पर हमारा भी

 हक़ होगा बराबर का

                     हर रात

                              चाँदनी

             और हर सुबह का

नर्म कोहरा

हम भी बाँटेंगे अपने बीच

                 कुछ और ठहरो

अभी कुछ और

                   जियेंगे

हम तुम  अपने स्वत्व के साथ।

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The Law of Focus and Attention

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The Law of Focus and Attention – Part 1

Wherever we focus our attention is where our thoughts are directed with most frequency and interest. Thus energy is produced in this direction, whether positive and beneficial energy or negative and harmful energy.

If we have a complicated mind, which thinks too much about certain things unnecessarily, our attention may be led towards the obstacles, problems, upsets and the things we worry about from a critical and negative viewpoint. By paying more attention to difficulties and problems, we feed these types of thoughts with our attention, so that we end up attracting these situations towards us. Finally, the problems and obstacles absorb us due to the amount of energy we have invested in them, turning what was perhaps a molehill (something very small) into a mountain.

The situation does not necessarily change immediately on changing our attitude. With this inner change, however, we will have more energy, clarity and determination to face up to and change the situation. When we focus on seeking solutions to problems and difficulties with a positive and enthusiastic attitude, we attract positive energy towards us, and this helps us transform mountains into molehills.

– Message –

The method to stay in constant enthusiasm and to keep others enthusiastic is to see specialities in others.

Expression: Many times while I am sincerely working towards my task, I find myself losing my enthusiasm. I also might find people not very happy with me or my work. I do make an attempt to understand their feelings but fail to do so. Such negative responses further reduce my enthusiasm.

Experience: I need to develop the art of looking at specialities in people. The more I am able to see their positive qualities, the more I am able to relate to them with that speciality. This encourages the other person further to use that speciality This will naturally keep me constantly enthusiastic.

 

The Law of Focus and Attention – Part 2

If our attention is focused on people’s defects and weaknesses, we transmit energy to these aspects and strengthen these weaknesses in the other person and in ourselves. If, on the other hand, our attention is directed at the positive aspects of others, we reinforce these qualities and virtues and help this person express them, which is also beneficial to us.

Our personality is made up of a series of values, beliefs and habits. If we wish to transfer our energy to new and positive aspects of ourselves, we must choose the personality traits that we want to emerge from us, focusing our time and energy on them and, in this way, this virtue, value or quality will manifest itself in our life.

– Message –

The way to bring transformation in others is to have mercy for them.

Expression: Inspite of wanting to bring about a positive change in people and working towards it, I rarely find that kind of change that I expect. People continue to display their old patterns of behavior and finally I end up only feeling disappointed or frustrated.

Experience: Real change can come in people only when I am able to have a vision of mercy for them. With mercy I am able to percieve and bring out the best in people without actually being caught up with expectations. Once I am able to see the positive qualities I am able to encourage them to use these qualities.

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स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

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Understanding And Overcoming Repetitive Thoughts

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Understanding And Overcoming Repetitive Thoughts

Repetitive thoughts are mental dependences that arise due to a badly channeled imagination, false beliefs or mental weakness. For example, this happens when the pattern of negative repetitive thoughts makes us experience continuous feelings of guilt. Or we think, almost obsessively and continuously, that someone wants to hurt us or are after us. Or we create continuous thoughts of jealousy, hatred and violence with regards to another individual. They are negative and self-destructive habits. We fall into repetitive thoughts, which make us live in constant unhappiness.

We spend a lot of time during the day with these types of unnecessary thoughts. They are leaks of energy that weaken us. We have created the habit of thinking like that and, therefore, it is in our hands to learn to change it. We can free ourselves of these dependencies and the result is to be freer, mentally, of negative and repetitive thoughts, which are like a constant hammering. It is a question of learning to control what we think, thinking positively and in a focused manner, meditating and exercising the mind. We exercise to keep the body healthy and strong; in order to have a healthy and strong mind we have to learn exercises like meditation and relaxation that help us to free ourselves from repetitive thoughts which are nothing but bad positions or postures of the mind.

– Message –

To be free from weaknesses is to move forward constantly.Expression: Most of the times I do win over my weaknesses and achieve progress but sometimes I find that I am defeated at the wrong moment by my own weakness and I experience failure. So instead of finding the progress that I should I find that I am moving back.Experience: In order to bring benefit to others and to myself, I should recognize and remove even the last trace of weakness that is working within me. For that I need to have a constant checking about the real cause of the weakness and remove it. Such checking and changing helps me to overcome my weaknesses.

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Marrying Spiritual Practices With Actions

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Marrying Spiritual Practices With Actions 

Spiritual practices and life are interconnected; so are my thoughts and actions. It is not possible to separate them. The immediate influence of any spiritual practice like meditation is on the quality of my thoughts. The quality of my thoughts is then reflected in my day-to-day actions. As the quality of my actions improves, it starts influencing my thoughts positively and the quality of my spiritual practice also starts improving. When I really understand this, it becomes clear that the right way to live is to marry both these sides within my life – meditation and practical life, marry the process of improving the quality of my thoughts with my actions, because both are interconnected with each other.

Actions performed by being too action conscious, in a wrong, non-spiritual consciousness, have led to a monotonous and meaningless existence, an existence without permanent peace, love and joy, causing feelings of discontentment and an emptiness in many hearts. On the other hand, religious or meditation practices, which were done with the aim of bringing peace and happiness in our personal life as well as in relationships, but were performed in seclusion (by detaching or becoming aloof from society), did not achieve the desired objectives and was unable to influence life positively. This caused spirituality to become disconnected from reality.

I want my consciousness to become such that I can experience the richness of a life of actions, interactions and relationships of the world, but adorned (decorated) with the jewels of the energy and spiritual power that only meditation can provide.

– Message –

The method for easy progress is to claim the blessings of all.

Expression: Sometimes we find ourselves making a lot of effort and putting in a lot of energy for getting something done. Yet we find that the results are not according to the efforts that we have put in. We then begin to wonder it happens so.

Experience: To be able to give happiness to those around is to increase the speed of my progress. For this I need to pay special attention to keep giving happiness and not giving sorrow to those around me. This brings me their blessings and these subtle wishes bring me happiness and success easily.

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दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !!

Kmsraj51 की कलम से…..

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दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !!

मेरे सभी प्रिय पाठकों काे।

आत्म-ज्योति जगाने का त्योहार(पर्व) दीपावली मुबारक हाे सभी काे।

Happy-DIwali-kmsraj51

 

Deepmala-Diwali-CYMT-kmsraj51 Diwali-CYMT-kmsraj51 Festiwal of Deepmal-CYMT-Kmsraj51 Multi-Deep-CYMT-kmsraj51

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ओम नमः शिवाय: ओम शांति!!__ ओम नमः शिवाय: ओम शांति!!

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Nurturing My Relationship With Myself

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Nurturing My Relationship With Myself

One of the most significant areas of importance in any human’s life is that ofrelationships. Someone with very good, close, harmonious and loveful relationships with loved ones, friends, colleagues, etc. is normally considered very fortunate or lucky. But of all relationships, the first and most basic one is the one I have with myself. So, how good, close or deep is my relationship with myself? How well do I know myself? Am I my own friend? If I think over the last week or fortnight, how many of my reactions were unexpected or uncontrolled or basically not the right ones? How many reactions left me confused, sad, unenthusiastic, peaceless, depressed, negative in any other way or in short uncomfortable? If there have been several such situations, it is an indication that there are still things deep within me that I do not know.

Normally a friend is someone whose company I enjoy, for whom there is love and from whom there is some benefit. As in any worldly relationship, without knowing a particular person to the core I can never have a deep relationship with that person. As the phrase ‘spiritual knowledge’ implies, it is the knowledge of the spirit or the self. Only by knowing myself completely and having a good relationship with the self, can I channelize my inner potential that I have within myself – just as water from a river, when properly channelized, provides water for various purposes. In any worldly relationship, if enough time and attention is not given to it and it is not nourished, it gets affected negatively. In the same way, though it’s obvious that I have to spend a large chunk of each day involved in situations arising from my duties, routine activities, responsibilities and worldly relationships; my relationship with myself should also be given enough time and attention, so that it does not suffer. If I am not careful about that, my worldly life may use up my energy completely and discharge my inner battery. I need to find times in the day when I give time to my relationship with the self and recharge myself. The peace and happiness I long for internally will be obtained by having a good, positive relationship with the self.

– Message –

The one who has attention on the self is the one who constantly experiences progress.

Expression: Whenever I am faced with a situation, it is very easy to think and talk about others and their mistakes. I hardly have any time to look at and understand myself and my mistakes. I then continue to repeat the same mistakes again and again.

Experience: Whatever the kind of situations I am faced with, I need to remind myself that I am the one who is going to benefit by bringing about a change in myself. So with this thought I need to constantly continue to check myself and bring about a positive change in myself.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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दूसरों को देखने के बजाए स्वयं को देखो और याद रखो – “जो कर्म हम करेंगे हमें देख और करेंगे”।

अनुभवी आत्मायें कभी वायुमण्डल वा संग के रंग में नहीं आ सकती।

प्रत्यक्ष प्रमाण वह है जिसका हर कर्म सर्व को प्रेरणा देने वाला है।

ब्रह्म कुमारी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय

 

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मेरे सभी प्रिय पाठकों आप सबका प्यार यू हि मिलता रहें, मेरी लेखनी(कलम) यू हि चलती रहें हमेशा॥

आप सबका दोस्त,

कृष्ण मोहन सिंह (KMSRAJ51)

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

 

 

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Overcoming The Fear Of Interaction Or Socializing

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Overcoming The Fear Of Interaction Or Socializing

There are various activities that you are perhaps afraid of doing, but that you know they are very useful activities to indulge in e.g. if you are afraid of socializing or interacting with people, either on a one-to-one basis or in a group. In a party or a situation where lots are people are enjoying the company of each other or in a meeting with your boss for e.g., you feel out of place and uncomfortable. The problem might lie in a negative image of the self or low self-esteem, lack of confidence, fear of the other’s opinion about you, lack of spiritual strength, past failure in having done so, being influenced by the other person’s role or position etc. How do you overcome this fear? By interacting with more and more people. The more you interact and mix up with them and express your viewpoint fearlessly, you realize that it is not a problem. Even if you make a mistake or you feel unsure, with practice you will see that there is no problem.

Most of our fears are overcome with the practice of doing what you are afraid of. If you do not make a brave step forward in order to overcome the fear of expressing yourself, you will continue to be the victim of this fear. This fear is then a negative energy that paralyses your intellect as a result of which your concentration and your decision-making power reduces. It also disorganizes your ideas, and confuses you whenever you express yourself in front of a person or people. What is more, fear produces clumsiness in your words, body movements and actions and makes you lose your image of credibility. It gives an impression of nervousness and low self-respect to the other. You have to overcome it, and you will manage to do it with practice and by changing the vision that you have of others: they are not a threat, they are not judges who are going to pass a judgment against you, they are offering you the opportunity to express yourself. If you value yourself, you will not be afraid of not being appreciated by them and others will finally appreciate you. If you do not value yourself, the opposite will happen.

– Message –

The one who is free from expectations is the one who is constantly cheerful.

Expression: Usually I am quick to percieve my own desires and I do realise that desires give sorrow. So I make effort to overcome them. But most often I am not able to recognise my own expectations that I have from people which destroy my own cheer. My expectations from others prevent me from bringing about a positive change in myself.

Experience: I need to recognise that each and every individual is unique with his own unique specialities and values. When I recognise this uniqueness I will not expect people to behave according to what I feel is right but will respect them for what they are. Thus I’ll be able to be constantly cheerful.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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In-English…..

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

 

In-Hindi…..

पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है.

यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

 ~KMSRAJ51

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

 

 

 

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