त्वचा की देखभाल – सरल आयुर्वेद नुस्खे।

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त्वचा की देखभालसरल आयुर्वेद नुस्खे।

आजकल अधिकांश लोग खुद को खूबसूरत बनाने के लिए ढेरो कॉस्मेटिक प्रोडक्ट यूज करते हैं। ऐसे में कई बार उन्हें इन प्रोडक्ट के रिएक्शन भी झेलने पड़ते हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए हमें अब अपनी जड़ों तक जाना होगा, यानी सदियों से चला रहा परंपरागत हर्बल ज्ञान अपनाना होगा। आज हम कुछ चुनिंदा हर्बल नुस्खों का जिक्र करेंगे, जिनका उपयोग करके सालों से महिलाएं अपना सौंदर्य निखारती आई हैं।

 

1- खीरा एक ऐसी गुणकारी फल है, जिसका सेवन सप्ताह में एक बार जरूर करना चाहिए। साथ ही, खीरा स्किन के लिए भी बहुत लाभदायक माना जाता है। इसे खाने से शरीर की गर्मी छंट जाती है। स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए चेहरे पर खीरे का जूस बनाकर या खीरे का पेस्ट बनाकर लगाएं।

 

2- यदि आपके चेहरे पर काले धब्बे हैं तो आलू की स्लाइस लेकर हल्के-हल्के से मसाज करें। आलू का जूस चेहरे पर लगाएं। रोज इसे चेहरे पर लगाने से चेहरा निखर जाता है।

 

3- नारियल पानी बहुत ही गुणकारी होता है। इसीलिए रोजाना नारियल पानी पीने से चेहरा चमकने लगता है। नारियल पानी से चेहरा धोने से दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं। नारियल का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से रंग निखरने लगता है।

 

4- दो चम्मच टमाटर का रस और आधा चम्मच शहद मिलाएं। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट के बाद धो लें। चेहरा कांतिवान दिखेगा।

 

5- कई इलाकों में पारंपरिक हर्बल वैद्य शहद के साथ फेस पैक तैयार करते हैं। इन जानकारों के अनुसार बेसन, शहद, जैतून, दूध मलाई को मिलाकर चेहरे पर लगाएं। इस मिश्रण में 3 चम्मच बेसन, शहद, दूध मलाई और जैतून के तेल का 1-1 चम्मच मिलाएं। चेहरे पर लगाएं और करीब 20 मिनट बाद इसे साफ पानी से धो लें।

 

6- आयुर्वेद में हल्दी को रंगत निखारने वाली सबसे बेहतरीन औषधि माना जाता है। दूध में एक चुटकी हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाने से भी रंगत निखरती है। बेसन के उबटन में हल्दी मिलाकर लगाने से भी चेहरा ग्लौ करने लगता है।

 

7- दही कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर है। दही खाने और लगाने, दोनों का फायदा चेहरे पर दिखाई देने लगता है। रोज सुबह एक चम्मच दही लेकर चेहरे पर मसाज करें। सूखने के बाद चेहरा धो लें। इस नुस्खे को नियमित रूप से करने पर रंग गोरा हो जाता है और पिंपल्स भी खत्म हो जाते हैं।

 

8- केला त्वचा के लिए बहुत अच्छा होता है। पके हुए केले को अच्छी तरह से मैश कर लें। उसे चेहरे पर फेस पैक की तरह लगाएं। करीब 15 मिनट बाद इसे धो लें। चेहरा धुल जाने के बाद रक्त चंदन का लेप करें। माना जाता है कि ऐसा करने से चेहरे की त्वचा में जबरदस्त निखार आता है।

 

9- स्ट्राबेरी के पके हुए फलों को मैश करके चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद इसे धो लें तो यह चेहरे के लिए टॉनिक की तरह काम करता है।

 

10- दो चम्मच टमाटर का रस और आधा चम्मच शहद मिलाएं। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट के बाद धो लें। चेहरा कांतिवान दिखेगा।

 

11- टमाटर एंटीऑक्सीडेंट व पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसीलिए यह स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। आप सांवले रंग से परेशान हैं, तो टमाटर को पीसकर इसका पेस्ट चेहरे पर लगाएं। चेहरे के दाग-धब्बे दूर हो जाएंगे और रंग निखरने लगेगा।

 

12- अंडे का पीला भाग यानी जर्दी को चेहरे पर लगाने से रंग गोरा हो जाता है। अंडे में शहद और नींबू मिलाकर लगाएं। जब पैक सूख जाए तो ठंडे पानी से चेहरा धो लें। स्किन ग्लौ करने लगेगी।

 

13- स्किन को गोरा बनाने के लिए एक पपीता का टुकड़ा पीस लें। यह गाढ़ा पेस्ट अपने चेहरे पर लगाएं। एक घंटे तक यह पेस्ट चेहरे पर लगा रहने दें। फिर चेहरा धो लें। यह नुस्खा नियमित रूप से दोहराने पर रंग गोरा होने लगता है।

 

14- तुलसी भगवान का उपहार है। यह सिर्फ बीमारियों को ठीक नहीं करती है, बल्कि स्किन के लिए भी टॉनिक का काम करती है। तुलसी के कुछ पत्ते लेकर उनका जूस बना लेंं। इस जूस का हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज करें। कुछ देर रहने दें और फिर गुनगुने से पानी चेहरा धो लें। ऐसा रोज करने से धीरे-धीरे रंग गोरा होने लगता है।

 

15- नींबू स्किन के लिए एक चमत्कारी दवा की तरह काम करता हैं। रंग निखारने के लिए नींबू का रस चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद चेहरा धो लें। नींबू के रस में टमाटर का रस मिलाकर लगाने से भी त्वचा की सफाई हो जाती है और रंग गोरा होने लगता है।

 

16- संतरा विटामिन सी से भरपूर होता है। इसे स्किन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। संतरा खाने और लगाने से भी त्वचा सेहतमंद हो जाती है। त्वचा का रंग निखारने के लिए रोज संतरे का जूस बनाकर चेहरे पर लगाएं।

सूखने पर इसे धो लें। यदि चेहरे पर दाग-धब्बे हैं तो संतरे के छिलकों का उपयोग करें। संतरे के छिलकों को छांव में सुखाकर पाउडर बना लें। इस पाउडर की एक चम्मच मात्रा में कच्चा दूध मिलाकर उसे चेहरे पर लगाएं। रंग निखरने लगेगा।

 

17- यदि आप अपनी स्किन की केयर करने के लिए एक्स्ट्रा टाइम नहीं निकाल पाते हैं तो दूध और केसर का उपयोग करें। थोड़े-से दूध में केसर की पत्तियों को पीस लें। इस दूध से चेहरे की मसाज करें। कुछ देर रहने दें। फिर चेहरा धो लें। रंग निखर जाता है और फेस ग्लौ करने लगता है।

 

18- दूध त्वचा के लिए टोनर का काम करता है। कच्चे दूध से चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें। सूखने पर चेहरा धो लें। रंग गोरा हो जाएगा।

 

19- कश्मीर में महिलाएं सेब के रस का उपयोग अपने सौंदर्य को निखारने के लिए करती हैं। सेब लेकर उसे कुचलकर रस तैयार करें। इस रस को चेहरे पर लगाएं। सूखने पर चेहरा धो लें। यह काम नियमित रूप से करने पर पिंपल्स और दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं और चेहरा चमकने लगता है।

 

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जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

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Adding A Spiritual Vibration To My Actions

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Adding A Spiritual Vibration To My Actions

My quality of yoga or meditation is reflected through the karmas or actions that I perform. If I add meditation in my daily routine, whatever actions I perform, start carrying a different quality or vibration to them. Work itself (whether at home or in the office), far from being a routine affair and just a medium of survival, becomes the basis of real transformation or change. After all, it was through actions that the soul came down from its original, pure, positive state. It is through actions that it can return back to the same state.

It’s not just action for the self but action or karma becomes the means through which I can share the experience I have in meditation, with others – be it family members, my colleagues in the office, at the city mall, in the vegetable market, on the street etc. – just about anywhere and everywhere. My meditation isn’t an incognito (invisible) process but a very visible one. I can see the results of yoga through my karmas. If my actions are filled with irritation and anger, or are motivated by emotions such as ego, greed, attachment, jealousy, hatred, etc, or if I do not experience constant happiness or my mind still has a high percentage of waste thoughts, these are indicators that my meditation is inaccurate or insufficient. If there is the experience of a link with the Supreme, his peace, purity, love, joy and power will manifest themselves and be visible to others through my actions.

– Message –

Your humility enables people to realize their mistakes and correct themselves.

Contemplation: Real humility results in so much power of truth that you don’t need to say anything at all in words. The very power of your inner state of being will make the other person realize the error of their ways.

Application: When you are giving directions or corrections to someone, check your own attitude, remind yourself of the humility within and then say whatever you have to say. With humility your words will be for their benefit and this will enable them to learn.

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Being A Good Transformation Agent

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Being A Good Transformation Agent – Part 1

Often, we feel ourselves to be victims of different factors that seem to direct the course of our life without us being able to control them. The world does not seem to dance to our music and our will, and we feel ourselves to be victims because things do not work out or are not as we want. Therefore, we give up and decide to resign ourselves to this reality; to be victims of it and observe passively (non-actively), resisting what comes, getting frustrated and bad-tempered. However, we could position ourselves in another way: beingtransformation (change) agents (the ones who are able to change the external factors like people or situations) by creating a different reality. To do so we have to change our perception. Also, it is necessary to strengthen our capacity to tolerate, accept, let go and forget. Tolerance here also refers tounderstanding, love and compassion (kindness). Not to put up with people or things, but to remain above them, to go beyond them; to co-operate with trust and motivation. It is difficult for us to tolerate because we have expectations and pre-conceived ideas of how others should act and be. Then we create negative feelings towards them because they are not like that or don’t act in the manner that we want. This makes our relationship with them difficult.

When your vision towards others is positive, you see their qualities, their efforts and their values instead of their defects and their errors. You are open to listening to them and to understanding their intentions. That way it is easier to have good feelings towards them. Basing ourselves on a positive and objective vision and on good feelings, we do not have to put up with, or even tolerate the other – the relationship becomes streamlined.

– Message –

When your heart is open and clean you will be humble.

Contemplation: Humility needs a good home to dwell in. When the mind is filled with negative feelings or biased ideas towards anyone, you cannot use your humility. So fill your mind with positive thoughts towards everyone.

Application: If you have negative thoughts towards anyone, make an attempt to remove them. Tell yourself that you don’t like one particular aspect in that person and not the person himself. In this way you will help the other person also to bring about change.

Being A Good Transformation Agent – Part 2

If you go inside yourself and observe, with sincerity, your feelings towards someone that you consider unbearable or intolerable, you will see that your perception (way of looking at them), your expectations and your bad feelings make you feel that the other is unbearable or intolerable. You have allowed the other to influence you in the creation of your bad feelings. You have lost compassion (kindness) and the capacity to accept and understand the other.
Being a good transformation (change) agent requires having full control over your inner world. If you are the victim of your rapidly moving mind, your bad feelings, your aggressive emotional states and of your not-very-healthy habits, you will easily feel yourself to be the victim of others, of circumstances, of time and of society. In relationships, the key is in living with your consciousness awake and not to do anything that your conscience does not agree with. In doing so, you don’t have to fear the opinion of others. You don’t have to feel insecure or doubt yourself. If not, we will continue to act against our own consciousness and we will feel ourselves to be victims. To avoid pain or the unhappiness that arises automatically when we act against our own consciousness, we look for guilt excuses: “Because of… I haven’t acted as I should.” We blame or we make excuses. That way we suppress the voice of our consciousness until the suffering and unhappiness is such that our conscience scolds us, which increases our unhappiness even more. A good transformation agent will always obey the voice of the inner conscience. By remaining in tune with our conscience and creating right thoughts, words and actions, it becomes easier for us to move fromvictim consciousness to transformer consciousness (one who brings about change).

– Message –

When you are humble you can bring benefit to many.

Contemplation: Like the tree laden with fruit bows down, the one who is full is the one who is humble. Such a person can bring benefit to all those around. Your humility makes you a giver in all situations, also making it easy for others to take what you have to offer.

Application: In all your interactions with others, see what you can give them, instead of expecting from them. Then, even when you have to follow others’ directions there would be no difficulty. Your humility will help you give in very easily.

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The Role Play Of Thoughts In Relationships

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The Role Play Of Thoughts In Relationships – Part 1

Relationships can be defined on the surface as a state in which two or more people are connected, the state of being related or interrelated or if the definition is expanded, the way in which two people, talk to, regard and behave towards each other, and deal with each other. Spirituality sees relationships from a deeper perspective – “relationships are not only what we do or say to each other, but are built on the basis of what we think about each other”. So relationships, when seen from a spiritual view point, are an exchange of energy at the level of thoughts and feelings, and then words and actions thereafter.

Relationships are one of the most important wealth of our lives and one of the most important sources of our happiness. In order to make them successful i.e. to create the wealth of positive relationships and to experience joy through them continuously, it is important to base them on the right belief systems. One major incorrect belief that we carry inside ourselves with regards to our relationships is that relationships are all about behaving and talking in the right manner, because we think people see, know and judge only what we speak and do, they do not sense what we think, and so we don’t give enough significance to our thoughts. But thoughts are more in number and being a more powerful and subtle energy, travel faster than words. When we interact with someone let us take care that along with the right action our thoughts are also right. If we have negative thoughts containing any type of impurity of hatred, greed, jealousy, resentment, selfishness, ego, etc. and we perform pure actions filled with the energy of virtues, neither will we be internally content nor will we be able to satisfy the other person. In all our relationships, it is the intention, the packets of thought energy or vibrations that we transmit, which matter more than the action. Giving significance to the inner intentions while coming into relationships is true transparency in relationships. Performing right actions packaged with thoughts which are coloured with negative emotions, will only transmit pain to the other on a subtle level, even though we did it for their happiness.

– Message –

The power of truth is such that you need never be concerned about proving it.

Expression: Truth is always revealed at the right moment and at the right place. You don’t need to be concerned about proving it. You need only to be concerned with being it and living it. Trying to prove truth reveals stubbornness.

Experience: When you find that someone is not believing what you say, ask yourself if you believe in it. if you do, then you need not be concerned of proving it to others. Where there is doubt in yourself you’ll want to prove it to everyone.

The Role Play Of Thoughts In Relationships – Part 2

Husband-wife relationships, sometimes, are like castles of sand, extremely pleasing to the eye, but based on weak foundations and susceptible to destruction when challenged by negative tides of clash of opinions, personalities or lifestyles. In such relationships, the castles look good from outside because of energies like acceptance, trust, understanding and letting go existing on the surface i.e. these energies are displayed by both partners to each other in the form of words, gestures and actions but these castles can easily collapse because the foundations of these castles i.e. thoughts and feelings carried by the partners in their minds are filled with expectations, rejection, mistrust, misunderstandings, possessiveness and suspicion at times along with the positive emotions which are displayed in actions. Also both partners feel they have made their respective positive contributions in the relationship and so the same is expected from the other side, which is not fulfilled at times, further increasing the problems in the relationship. At the same time both partners are oblivious (not aware) of the negative emotional, much more powerful forces that exist inside them, which go against the positive contribution and are silently working on the castle of the relationship from below, ready to bring it down anytime.

Another e.g. – in corporate circles, apart from the external objective of profit making and generation of revenue and jobs, an important internal objective of any good corporate organization is creating a peace, love and happiness filled as well as obstacle free atmosphere in the company, which will be conducive (helpful) to the external objective. One spiritual principle states that the leader or CEO or Managing Director of the organization is like a seed of the organization, whose every thought reaches out to and influences every person of the organization as well as the organization as a whole. A second spiritual principle states that the internal ruling and controlling power of a leader of an organization is directly proportional to the handling (of the people of the organization) power of the leader. If in the inner confines (boundaries) of the leader’s mind, obstacles of waste and negative thoughts exist i.e. the inner atmosphere of the leader’s mind is not full of peace, love and joy, then as per the first spiritual principle, this gets transmitted to the people under the leader and as per the second spiritual principle, such a leader who is lacking in mind ruling power and mind controlling power is automatically lacking in handling power of people under him. Such a leader, due to the application of both these principles, is ineffective in creating a positive environment in the organization.

– Message –

True humility comes when you are in your self-respect.

Expression: When you are full and in your self-respect, you will be able to remain humble in all situations. When there is no self-respect, any comments or criticism hurts your ego and you tend to lose your humility.

Experience: When you find yourself getting affected by criticism, check whether you are sure of what you are doing. Increase your own confidence in whatever you do and you’ll find yourself humble.

The Role Play Of Thoughts In Relationships – Part 3

Parent-child relationships are the foundation of our complete life. The earliest habits that children acquire in their lives are from their parents. Very often parents try and impose positive habits on their children. A very common trend that we see nowadays where parents will scold their child for common negative actions like getting angry, for lying to them, for watching inappropriate stuff on different mediums of technology like television and the internet or for getting involved in relationships with the opposite gender at a young age. Very commonly parents are not satisfied with the change brought about by children by following the rules that they have set for them, causing parent-child relationships to get strained. Why is it that inspite of children knowing that parents are concerned for them, do not pay heed to their instructions and continue with the negative habits? A more powerful medium than words, which reaches children on a physical level, is the personality radiation of the parents which works on children and reaches them faster than and much before the words do. Parents dictate the change but don’t be the change i.e. similar habits of lust, anger, ego, greed, etc. exist inside them which keep travelling to the children on a subtle energy level and impacting (influencing) their minds negatively much sooner than positive words in the form of instructions, leaving the words as good as ineffective.

Also considering another common relationship that children have, the one with their school teachers; many investigations confirm that teachers’ expectations, whether negative or positive, form one of the most influential factors in the academic performance of their students. If teachers expect good results from their students and have complete faith and confidence that they will succeed, their performance will be much closer to their real capacity than if they are expecting poor results. Very often in schools, the teachers’ words regarding the performance of the children are not a direct reflection of their thoughts i.e. words are full of faith and hope in the students’ success but thoughts are lacking in optimism with regards to the same.Negative thoughts of fear of probable failure of the children, in the minds of teachers, inspite of positive words of encouragement, negatively impact impressionable minds of children leading to their poor show in school exams.

– Message –

Your humility makes you a learner in every situation

Contemplation: Where there is humility there is willingness to learn. When humility is lacking, ego comes which doesn’t let you learn from all situations and people. The power of humility enables you to learn and move forward.

Application: When you face any criticism from someone, see what you can learn from it, instead of feeling bad about it. Even things that go wrong have something to teach, for the ones who are willing to learn. With your humility continue to learn.

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66वाँ-गणतंत्र दिवस मुबारक हाे।

मेरे सभी प्रिय पाठकों काे गणतंत्र दिवस मुबारक हाे।

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26-january-kmsraj51

Image Source-santabanta.com/wallpapers

आजाद पक्षी की तरह उड़ान भराे अपने जीवन में।

तब तक ना रुकाे जब तक लक्ष्य तक पहुँच ना जाओं॥

~KMSRAJ51

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Checking Myself On The Stage Of Action

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Checking Myself On The Stage Of Action

Once we become aware of the possible types of thoughts that the mind creates at different times in the span of a particular day, then we are in a position to keep a check on our thoughts and understand where our energy is being wasted. Once we realize that there are patterns of waste and negative thinking at some times during the day, which are usually triggered by certain situations or people, we can apply a brake on the pattern ofhabitual negative thinking, thereby transforming this energy wastage into something more positive.

It does happen, that when we are informed about the benefits of meditation for the first time, perhaps in a course or a presentation either in the office, in a center of a spiritual organization or elsewhere; we realize the need for the same but we also feel that, in order to get the house of our minds in order, we need to leave our busy city lifestyles behind and head for the hills. There, we think, we will find the time and the physical and spiritual environment to practice meditation and get our mental state in order, but this is absolutely untrue. While going on an occasional spiritual retreat is certainly useful and recommended for the development of the spiritual self, the real workshop is life itself. Even if I am able to maintain a positive and powerful state of mind in a retreat, it is in our daily actions and relationships with others where the challenge lies, it is on the stage of action or karma kshetra that we have to check whether we can remain soul-conscious i.e. in the awareness of our spiritual identity. It is here where we have to see whether we can apply the brakes on patterns of negative thinking, establish and maintain patterns of positive thinking and test whether we have reached the stage where, no person or situation, however negative, can disturb our state of mind.

– Message –

When you are always truthful, you’ll have nothing to fear.

Expression: True courage comes when there is the power of truth within you. When you are constantly truthful, you will have nothing to fear. In all the challenges you face everyday you will be able to maintain your courage because of your power of truth.

Experience: Make sure your actions are based on truth and when things go wrong, you will still be able to maintain your courage. Keep reminding yourself that you have the power of truth with you and you will be victorious, whatever the challenges that come your way.

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

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अमरूद के फायदे अनेक।

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CYMT-23-JAN-15-KMSRAJ51

अमरूद के फायदे अनेक।

सर्दियों में हेल्थ को फिट रखने के लिए काफी सारे ऑप्शन होते हैं, क्योंकि इस सीज़न में फल और सब्जियों की भरमार होती है। सर्दियों में जितनी जल्दी वजन बढ़ता है, उतनी ही जल्दी आप डाइट कंट्रोल भी कर सकते हैं। आज हम आपको अमरूद के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सस्ता और सेहत के लिहाज से बहुत ही फायदेमंद है।

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अमरूद के फायदे

1- मुंह में छाले होने पर: अगर आपके मुंह में छाले हो गए हैं या फिर अक्‍सर आपको माउथ अल्‍सर की प्रॉब्‍लम बनी रहती है तो आप अमरूद की नई-नई कोमल पत्तियों को सेवन करें। इससे आराम मिलता है।

2- बॉडी को फिट  रखने के लिए: अमरूद में मौजूद पौष्टिक तत्‍व शरीर को फिट और फाइन रखने में मदद करते हैं, लेकिन अमरूद सही समय पर खाया जाए। रात में अमरूद खाने से खांसी होने का डर रहता है।

3- ज्यादा कब्‍ज होने पर : अमरूद बॉडी के मेटाबॉल्जिम को बैलेंस रखता है। इस वजह से इसके सेवन से कब्‍ज से छुटकारा मिल जाता है।

4- आंखों को बनाए स्‍वस्‍थ : अमरूद में विटामिन ए की मात्रा काफी होती है जो आंखों को स्‍वस्‍थ बनाए रखती है। इसके अलावा, अमरूद में विटामिन सी भी होता है जो बीमारियों को दूर भगाता है।

5- स्किन ग्‍लो करने के लिए: अमरूद में मौजूद पोटैशियम के कारण इसके नियमित सेवन से स्‍किन ग्‍लो करने लगती है और कील-मुंहासों से भी छुटकारा मिलता है।

6- अमरूद खाकर मोटापा घटा सकते हैं: मोटापे की मुख्‍य वजह बॉडी का कोलेस्‍ट्रॉल होता है। अमरूद में मौजूद तत्‍व कोलेस्‍ट्रॉल को कम कर देते हैं। इससे मोटापा घट जाता है। तो अगली डाइटिंग शेड्यूल में अमरूद को शामिल करना न भूलें।

7- नशे को कम करता है : अगर किसी व्‍यक्ति को भांग का नशा भयंकर चढ़ गया हो तो उसे अमरूद के पत्‍तों का रस पिलाने से नशा कम हो जाता है। रस की जगह अमरूद के पत्‍तों को भी खिलाया जा सकता है, बशर्ते नशे का शिकार व्‍यक्ति उसे अच्‍छे से चबा ले।

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8- महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाने के लिएअमरूद में फोलेट की मात्रा अधिक होती है। इससे महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ती है। अगर किसी भी महिला को मां बनने में परेशानी आ रही हो तो रोज़ अमरूद खाना चाहिए।

9- विटामिन सी: आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अमरूद में संतरे से चार गुना ज्यादा विटामिन सी होता है। विटामिन सी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और कैंसर से लड़ने में मददगार होते हैं।

10- पोटैशियन और सोडियम: अमरूद में मौजूद पोटैशियम शरीर में सोडियम के प्रभाव को कम करता है। इससे ब्लड प्रेशर का संतुलन बना रहता है। साथ ही, कोलेस्ट्रॉल स्तर भी कम होता है।

11- डायबिटीज: अमरूद के सेवन से खून में शुगर का स्तर कम होता है, क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है। यह शुगर को डाइजेस्ट करने और इन्सुलिन बढ़ाने में मदद करता है।

12- थायरॉइड: अमरूद में आयोडीन की मात्रा अधिक होती है। इससे थायरॉइड की समस्या में आराम होता है। इससे शरीर का हार्मोनल संतुलन बना रहता हैं।

13- ब्लड सर्कुलेशन के लिए: अमरूद में विटामिन बी अच्छी मात्रा में उपलब्ध है। साथ ही, नायसिन भी है जिससे ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है। ब्लड सर्कुलेशन सही होने पर दिमाग भी तेज होता है। इसके अलावा पायरीडॉक्सीन नामक तत्व दिमाग और नसों के लिए फायदेमंद है, जो अमरूद में पाया जाता है।

Source: http://www.bhaskar.com

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Serving Through Silence

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Serving Through Silence

In meditation you connect to the experience of silence in which both the mind and the heart are calmed. The mental chatter or noise stops. A gentle flow of slow, clear, transparent and peaceful thought is produced. The organs of the senses and the body are calmed and your emotions become peaceful. In this state you can listen to the voice of your conscience, the voice that guides you. That way you awaken the divine intuition. On listening to that voice, you are strengthened. In this way you start to align your life with your purpose, with what you really want. You begin to have more determination to carry out the things that you really want to do, without fear preventing it.

With meditation you learn to love the silence. A tender, beautiful and sweet silence. That way you value each word more, given that to not lose that experience of the sweet silence, you try to talk less, to speak with sweetness and gentleness. When you generate the love and pleasure in going to the silence, it helps you express the best of yourself. To help others, sometimes it is better not to speak, not to use words; to use the vibration of your thoughts and good feelings that emerge from that state of silence. That way you will enter the hearts that are trapped in darkness. Those hearts are in darkness, they have lost hope, and they are hurt, wounded, discouraged. From your silence you transmit to them the light with which they can find a way out. To receive it, they have to be willing. But if their time has not yet come, at least they will know that there are people willing to help from a silence that does not judge, does not complain. A silence that accepts, appreciates and loves, generating an atmosphere in which one can be oneself and feel free to change at their own speed, without feeling forced, but rather from understanding and love.

– Message –

Where there is truth there is victory.

Expression: As the saying goes, ‘the boat of truth may rock but it will never sink.’ When you are truthful you might temporarily experience dissatisfaction, but you will ultimately attain victory.

Experience: When you are going through a time which is difficult for you, remind yourself that the truth within you will ultimately get you victory. This faith will make you face all situations with a cheerful face.

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कुछ अनमोल वचन हिंदी में।

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कुछ अनमोल वचन हिंदी में।

1. नजर रखो अपने ‘विचार’ पर
क्योंकि वे ”शब्द” बनते हैँ. . .

2. नज़र रखो अपने ‘शब्द’ पर
क्योंकि वे ”कार्य” बनते हैँ. . .

3. नज़र रखो अपने ‘कार्य’ पर
क्योंकि वे ”स्वभाव” बनते हैँ. . .

4. नज़र रखो अपने ‘स्वभाव’ पर
क्योंकि वे ”आदत” बनते हैँ. . .

5. नज़र रखो अपने ‘आदत’ पर
क्योंकि वे ”चरित्र” बनते हैँ. . .

6. नज़र रखो अपने ‘चरित्र’ पर
क्योंकि
इससे ”जीवन आदर्श” बनते हैँ. . .!!

cymt-kmsraj51

1. बोल सको तो मीठा बोलो,
कटु बोलना मत सीखो।

2. जला सको तो दिये जलाओ,
दिलो को जलाना मत सीखो।

3. मिटा सको तो क्रोध मिटाओ,
प्रेम मिटाना मत सीखो।

4. बिछा सको तो ‪‎फुल‬ बिछाओ,
सुल बिछाना मत सीखो।

5. लगा सको तो बाग लगाओ,
आग लगाना मत सीखो।

6. कर सको तो काम करों,
नाम करना मत सीखों।

7. कर सको दान‬ करो,
जान लेना मत सीखों।

8. सीखों तो कुछ ऐसा सीखों,
लाखों में तुम एक दिखों।

9. क्या मार सकेंगी मौत उसे,
औरों के लिये जो जीतें है।

10. मिलता हैं दुनिया का प्यार उसे
औरों के जो आंसू‬ पाेछतें हाे।

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अलग-अलग दृष्टिकोण।

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अलग-अलग दृष्टिकोण।

मास्टर जी क्लास में पढ़ा रहे थे, तभी पीछे से दो बच्चों के आपस में झगड़ा करने की आवाज़ आने लगी। “क्या हुआ तुम लोग इस तरह झगड़ क्यों रहे हो ? ” मास्टर जी ने पूछा।

राहुल : सर, अमित अपनी बात को लेकर अड़ा है और मेरी सुनने को तैयार ही नहीं है।

अमित : नहीं सर, राहुल जो कह रहा है वो बिलकुल गलत है इसलिए उसकी बात सुनने से कोई फायदा नही।

और ऐसा कह कर वे फिर तू-तू मैं-मैं करने लगे।

मास्टर जी ने उन्हें बीच में रोकते हुए कहा, एक मिनट तुम दोनों यहाँ मेरे पास आ जाओ।

राहुल तुम डेस्क की बाईं और अमित तुम दाईं तरफ खड़े हो जाओ।

इसके बाद मास्टर जी ने कवर्ड से एक बड़ी सी गेंद निकाली और डेस्क के बीचो-बीच रख दी।

मास्टर जी : राहुल तुम बताओ, ये गेंद किस रंग की है।

राहुल : जी ये सफ़ेद रंग की है।

मास्टर जी : अमित तुम बताओ ये गेंद किस रंग की है ?

अमित : जी ये बिलकुल काली है। दोनों ही अपने जवाब को लेकर पूरी तरह कॉंफिडेंट थे की उनका जवाब सही है, और एक बार फिर वे गेंद के रंग को लेकर एक दुसरे से बहस करने लगे।

मास्टर जी ने उन्हें शांत कराते हुए कहा, “ठहरो, अब तुम दोनों अपने अपने स्थान बदल लो और फिर बताओ की गेंद किस रंग की है ?”
दोनों ने ऐसा ही किया, पर इस बार उनके जवाब भी बदल चुके थे।

राहुल ने गेंद का रंग काला तो अमित ने सफ़ेद बताया।

अब मास्टर जी गंभीर होते हुए बोले , “बच्चों, ये गेंद दो रंगो से बनी है और जिस तरह यह एक जगह से देखने पे काली और दूसरी जगह से देखने पर सफ़ेद दिखती है उसी प्रकार हमारे जीवन में भी हर एक चीज को अलग – अलग दृष्टिकोण से देखा जा सकता है।”

ये ज़रूरी नहीं है, की जिस तरह से आप किसी चीज को देखते हैं।

उसी तरह दूसरा भी उसे देखे….. इसलिए अगर कभी हमारे बीच विचारों को लेकर मतभेद हो तो ये ना सोचें की सामने वाला बिलकुल गलत है बल्कि चीजों को उसके नज़रिये से देखने और उसे अपना ‪‎नजरिया‬ समझाने का प्रयास करें। तभी आप एक अर्थपूर्ण संवाद कर सकते हैं।

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रिश्ताे में प्यार।

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रिश्ताे में प्यार। 

दोस्तों कहते हैं रिश्ताे में प्यार हाेना चाहिए। तभी रिश्ते बरकरार (बने) रहते हैं। अच्छी बाते हमे याद रखना चाहिए, और बुरे विचार मन में नहीं आने देना चाहिए। रिश्ताे में प्यार हाेना बहुत जरूरी हैं। बिना प्यार के रिश्ताे में दरार (मनमुटाव) ही आती हैं।

 रिश्ताे में कैसा हाेना चाहिए प्यार। एक छोटी कहानी के माध्यम से समझते हैं।

दो भाई समुद्र के किनारे टहल रहे थे,
दोनों के
बीच किसी बात को लेकर बहस
हो गई…!!

बड़े भाई
ने छोटे भाई को थप्पड़ मार दिया…!!

छोटे भाई ने
कुछ नहीं कहा…!!
सिर्फ रेत पे
लिखा-
“आज मेरे बड़े भाई ने मुझे मारा”

अगले दिन दोनों फिर
समुद्र किनारे घूमने के लिए
निकले छोटा भाई
समुद्र में नहाने लगा…!!

अचानक
वो डूबने लगा बड़े
भाई ने उसे बचाया…!!
छोटे भाई ने पत्थर पे
लिखा-
” आज मेरे भाई ने मुझे बचाया “

बड़े भाई
ने पूछा जब मैने तुम्हे मारा तब
तुमने रेत पे लिखा और
जब तुमको बचाया तो पत्थर पे
लिखा ऐसा क्यों…??

विवेकशील छोटे
भाई ने जवाब
दिया –
”जब हमे कोई दुःख दे तो रेत पे लिखना चाहिए”
ताकि
वे जल्दी मिट जाये…!!

परन्तु
जब कोई हमारे लिए अच्छा करता है
तो
हमें पत्थर पर
लिखना चाहिए…??
जहा मिट ना पाएं…!!’

भाव ये हैं की हमे अपने साथ हुई बुरी घटना को भूल जाना चाहिए…!!
जबकि अच्छी घटना को सदैव याद रखना चाहिए…!!

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विद्यार्थी जीवन।

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विद्यार्थी जीवन

हिंदू धर्म के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। इस बार ये पर्व 24 जनवरी, शनिवार को है।

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  1. मां सरस्वती हमेशा सफेद वस्त्रों में होती हैं। इसके दो संकेत हैं पहला हमारा ज्ञान निर्मल हो, विकृत न हो। जो भी ज्ञान अर्जित करें वह सकारात्मक हो। दूसरा संकेत हमारे चरित्र को लेकर है। विद्यार्थी जीवन में कोई दुर्गुण हमारे चरित्र में न हो। वह एकदम साफ हो।
  1. एक हाथ में पुस्तक, संदेश देती है कि हमारा लगाव पुस्तकों के प्रति, साहित्य के प्रति हो। विद्यार्थी कभी पुस्तकों से अलग न हों, भौतिक रूप से भले ही कभी किताबों से दूर रहें, लेकिन हमेशा मानसिक रूप से किताबों के साथ रहें।
  1. एक हाथ में माला है, यह बताती है कि हमें हमेशा चिंतन में रहना चाहिए, जो ज्ञान अर्जित कर रहे हैं, उसका लगातार मनन करते रहें, इससे आपकी मेधा बढ़ेगी।
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  1. दो हाथों से वीणा का वादन, यह संकेत करता है कि विद्यार्थी जीवन में ही संगीत जैसी ललित कलाओं प्रति भी हमारी रुचि होनी चाहिए। संगीत हमारी याददाश्त बढ़ाने में भी सहायक होता है।
  1. चित्र में देवी सरस्वती नदी किनारे एकांत में बैठी है, यह संकेत है कि विद्यार्जन के लिए एकांत भी आवश्यक है। विद्यार्थी को थोड़ा समय एकांत में भी बिताना चाहिए।
  1. सरस्वती के पीछे सूरज भी उगता दिखाई देता है, यह बताता है कि पढ़ाई के लिए सुबह का समय ही श्रेष्ठ है।
  1. सरस्वती के सामने दो हंस हैं, ये बुद्धि के प्रतीक हैं, हमारी बुद्धि रचनात्मक और विश्लेषणात्मक दोनों होनी चाहिए।

ये बातें सीखें मां सरस्वती के वाहन हंस से।

वसंत पंचमी के अवसर पर देवी सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है। धर्मशास्त्रों के अनुसार मां सरस्वती का वाहन सफेद हंस है। इसलिए उन्हें चित्रों में हंस पर बैठा हुआ प्रदर्शित किया जाता है। यही कारण है कि देवी सरस्वती को हंसवाहिनी भी कहा जाता है। देवी का वाहन हंस हमें कुछ संदेश भी देता है। शास्त्रों के अनुसार देवी सरस्वती विद्या की देवी हैं और उनका स्वरूप श्वेत वर्ण बताया गया है। उनका वाहन भी सफेद हंस ही है।सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है। यह रंग शिक्षा देता है कि अच्छी विद्या और संस्कार के लिए आवश्यक है कि आपका मन शांत और पवित्र हो। आज के समय में सभी को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करना होती है। मेहनत के साथ ही माता सरस्वती की कृपा भी उतनी आवश्यक है। यदि आपका मन शांत और पवित्र नहीं होगा तो देवी की कृपा प्राप्त नहीं होगी और न ही पढ़ाई में सफलता मिलेगी।

देवी का वाहन हंस यही संदेश देता है कि मां सरस्वती की कृपा उसे ही प्राप्त होती है जो हंस के समान विवेक धारण करने वाला है। केवल हंस में ही वह विवेक होता है कि वह दूध और पानी को अलग-अलग कर सकता है। सभी जानते हैं कि हंस दूध ग्रहण और पानी छोड़ देता है। इसी तरह हमें भी बुरी सोच को छोड़कर अच्छाई को ग्रहण करना चाहिए।

Source: http://religion.bhaskar.com/

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

Swami Vivekananda-kmsraj51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

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Reflection

Kmsraj51 की कलम से…..

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Reflection (thinking deeply)

Reflection (thinking deeply) is a necessary step in digesting knowledge. Reflection is an exercise of the mind and intellect that goes into the depths of understanding an idea, or realization, or point of knowledge with the aim of practicing it in daily life.
Values in my life are a sign that knowledge has been digested; without this, knowledge simply remains a beautiful aspect, appreciated, interesting information in my intellect but without the ability to give me strength because it is still external; it has not been internalised.

All quality action (quality action is that action which is truly appropriate to person, circumstance and the need of the moment), all newness of perception (understanding), all new insights, or vision, require a space for silent reflection as a preliminary step. Normally, we are lost in the business of action, its routine and ritual that make our life so mechanical and hence dull and boring, or demanding and hectic. A mind and intellect that do not give time and attention to reflective silence (meditation) become lazy, though externally there is lots of activity for hours and hours. No new heights are reached because there is no depth of awareness in what we are doing, no reflection on purpose. As a result, we get trapped by routine.

To be dictated to by external situations, which make us run around without stopping internally, brings about unnecessary stress on the mind, which keeps us tied to the strings of the external, like a puppet pulled, pressed and pushed by circumstances. To break free from this force, to relieve the mind of the weight of stress and waste and routine, I need to step inside and reflect (think) on who I am and where I am going and reassess my value system. Otherwise, life becomes like a wheel that keeps spinning faster and faster until we become dizzy – we want to get off but it is going so fast we do not know how. Reflection and taking time to understand spiritual knowledge bring us to the essence of everything.

– Message –

Your power of truth will enable you to learn from your mistakes.

Expression: The power of truth within you will enable you to learn from all situations. When things go wrong you will be able to check yourself and improve instead of giving excuses to yourself and others. When you give excuses you will not be able to learn and progress.

Experience: Take any situation that went wrong today. Check within yourself what your part was in the situation because of which things went wrong. Then correct yourself based on this understanding.

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Reversing The Flow Of Love In Relationships

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Reversing The Flow Of Love In Relationships

If we ask someone who do they think has caused them the most sorrow in life, most will point out to someone they love or had loved a lot. Why is it so? It happens like that because we believe that the energy of love will come from the outside and will fill us inside. The energy of love from the other will fulfill our inner desire for the experience of love. Due to our own need, we attach ourselves and hold on to a particular person whom we love a lot, believing that they will fill us with the love that they possess inside them, which will make us stronger, fuller and more content. So we start depending on the other person for this need. When he/she is not able to fill us, which happens many times, we experience sorrow. Love is an energy, which exists inside us. It always goes from the inside out and reaches out to the other and brings benefit to the other. It does not come from the outside in.

If we try and reverse the flow of love i.e. we make the energy of love come from outside in, we start depending on the outside for love, which results in the vacuuming effect. When you vacuum to clean your living room, you absorb the good and the bad. If you have dropped something very small, but valuable and of utmost importance to you, on your carpet, the vacuum cleaner absorbs it or takes it away, together with the dust, which is negative and of no value to you and which you do not want inside your home. When you live with the vacuuming effect on an emotional level, you absorb the love, care, concern, virtues, powers, specialties, energy, etc. of the person you love but you also end up absorbing their weaknesses, their worries, their fears, etc. That way, a dependency is generated that is counter-productive and causes emotional pain. That does not mean we become cold and stop accepting love from others, but we are no longer dependent on it for our inner well-being and happiness. Also, on the other hand, we keep radiating or giving love. When we give love, we experience it ourselves first and that’s what we want – an experience of love, isn’t it?

– Message –

When you are truthful, you are loved and trusted by all.

Expression: When you are truthful your words and actions will become equal. You will do what you say and say what you do. Because of this you will continue to receive love and regard from everyone.

Experience: Just take up one thing that you have not been able to fulfill and today take up this thought that you will do it. Tell yourself that you have the power of truth within which makes your words and actions equal.

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The Faculties (Energies) Of The Soul

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The Faculties (Energies) Of The Soul

When the soul is in the body it functions through three faculties (non-physical entities). Although each faculty (entity) can be given a different name, it is actually the same energy, the soul, functioning on three different levels simultaneously. These are the mind, the intellect and the sanskaras.

Mind is the thinking energy of the soul. It is the mind that imagines, thinks and forms ideas. The thought process is the basis of all emotions, desires and sensations. It is through this faculty that, in an instant, thoughts can be projected to a far off place (one can travel to a far off place on the thought level); past experiences and emotions can be relived or even the future anticipated in less than a second. It is the mind that experiences the variations of moods. The mind is an energy of the non-physical soul, not to be confused with the heart or even the brain.

The intellect is used to assess thoughts. This is the faculty (energy) of the soul used for understanding and decision-making which stands out as the most crucial faculty of the three. With the deepening and broadening of the intellect, clear understanding and realization of knowledge becomes natural, and the power to decide and reason becomes clear. It is the intellect which remembers, discriminates, judges and exercises its power in the form of will-power.

Sanskaras is a Hindi word which best describes what we could call impressions. They are the record of all the soul’s past experiences and actions. Sanskaras can take the forms of habits, talents, nature, personality traits, beliefs, values or instincts. Every action performed by a soul either creates a sanskar (this is how a habit begins) or reinforces an old one. Whatever impression is etched in the soul remains within the soul, forming a complete collection of all the experiences that the soul has had. When we speak of defects, specialties or virtues we are referring to the sanskaras. The sanskaras are the basis of the soul’s individuality.

– Message –

The one who is full of love is the one who is always happy.

Expression: When you are constantly having love for everyone, you’ll have no negativity. Your unselfish love will make you have only positive thoughts and you’ll find yourself in constant happiness.

Experience: Start your day with thinking of all the people you come into contact with. Then take a thought in your mind that you have love for all of them. This thought will help you throughout the day. You’ll find yourself accepting others as they are and having good wishes for them.

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