दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-5

KMSRAJ51-Problem Solve

दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

अक्सर कई छात्र मेल के द्वारा या फोन के माध्यम से हमसे पूछते हैं कि हम प्रवेश परिक्षाओं में कैसे सफलता पायें या किस तरह तैयारी करें कि हमें कामयाबी मिले?  सच तो ये है कि, कामयाबी की चाह लिये हम सब अपने-अपने क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं। परन्तु अपने कार्य सम्पादन के दौरान अक्सर एक दुविधा में भी रहते हैं कि हमारे द्वारा किया गया कार्य सफल होगा या नही, ये हम कर पायेंगे या नही  इत्यादि इत्यादी. मित्रों, इस तरह की आशंकायें हमारी ऊर्जा को छींण करने का प्रयास करती हैं और स्वंय के विश्वास पर एक प्रश्न चिन्ह लगा देती हैं।  यही दुविधा सफलता की सबसे बङी बाधा है। किसी भी कार्य को करने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करना कार्य की रणनीति होती है परंतु जब नकारात्मक पहलु योजना पर हावी होता है तो यही संशय सफलता की सबसे बङी अङचन होती है। जिसके कारण हम एक कदम भी आगे नही रख पाते। जबकि जिवन का सबसे बङा सच है कि हमेशा परिस्थिति एक जैसी नही रहती, लक्ष्य की सफलता में कई रोङे आते हैं। जो इन रुकावटों को आत्मविश्वास के साथ पार करता है वो लक्ष्य हासिल करने में सफल होता है। लेकिन दूसरी ओर जो दुविधा के जंजाल में फंस जाता है, वो कभी भी आशाजनक सफलता नही अर्जित कर पाता है। ज्यादातर लोग ज्ञान और प्रतिभा की कमी से नही हारते बल्की इसलिये हार जाते हैं कि दुविधा में पङकर जीत से पहले ही मैदान छोङ देते हैं।

दुविधा तो एक द्वंद की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति निर्णय नही ले पाता और न ही स्वतंत्र ढंग से सोच पाता है। इतिहास गवाह है कि प्रत्येक सफल व्यक्तियों के रास्ते में अनेक मुश्किलें आईं किन्तु उन्होने उसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया समझा और आगे के कार्य हेतु कोशिश करते रहे। कई बार हम लोग किसी कार्य को करने से पहले इतना ज्यादा सोचते हैं कि समय पर काम नही हो पाता या हम अवसर को दुविधा के भंवर में कहीं खो देते हैं। यदि हम विद्यार्थी की बात करें तो कई बार ऐसा होता है कि कुछ छात्र विषय को लेकर इतने ज्यादा संशय में रहते हैं कि वो फार्म भरने में लेट हो जाते हैं या आशंकाओं के चक्कर में गलत विषय का चयन कर लेते हैं। जबकि सच तो ये है कि सभी विषय में मेहनत करनी होती है तभी अच्छे अंक मिलते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि एक बुद्धिमान व्यक्ति भी लंबे समय तक दुविधाग्रस्त रहता है तो उसका भी मानसिक क्षरण हो जाता है। जिसके कारण सक्षम व्यक्ति भी उन्नति नही कर पाता। दुविधा सफलता की राह में सबसे बङी अङचन है। अत्यधिक संशय आत्मविश्वास को भी कमजोर बना देता है। यदि हम एक परशेंट असफल भी होते हैं, तो भी हमारे अनुभव में इजाफा ही होता है और अनुभव से आत्मविश्वास बढता है। मन में ये विश्वास रखना भी जरूरी है कि सब कुछ संभव है।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि,  संभव की सीमा जानने का सबसे अच्छा तरीका है, असंभव से भी आगे निकल जाना।

जो लोग सफलता की इबारत लिखे हैं उन्हे भी दुविधाओं के कोहरे से गुजरना पढा है परन्तु ऐसे में उन लोगों ने परिस्थिति को इस तरह ढाला कि वे अपनी योजनाएं  स्वयं निर्धारित कर सके। सफलता के लिये ये भी आवश्यक है कि हम हर परिस्थिति में स्वंय को तैयार रखें। किसी भी सफलता के लिये ये जरूरी है कि हम निर्णय लेने की भूमिका में आगे बढें; क्योंकि एक कदम भी आगे बढाने के लिये निर्णय तो लेना ही पङता है, तद्पश्चात जिंदगी हमें धीरे-धीरे खुद ही निर्णय लेना सीखा देती है। अतः सबसे पहले हम दुविधापूर्ण मनः स्थिति के शिकार न होते हुए स्वंय को संतुलित रखते हुए दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें, जिससे आशंकाओं और दुविधाओं का तिमिर नष्ट हो तथा सफलता की और हमसब का कदम अग्रसर हो।

डॉ.ए.पी.जे. कलाम के अनुसार,  Confidence & hard work is the best medicine to kill the disease called failure. It will make you a successful person. 

Post inspired by Mrs. अनिता शर्मा जी

Educational & Inspirational VIdeos (9.8 lacs+ Views):  YouTube videos Link

(http://www.youtube.com/channel/UCRh-7JPESNZWesMRfjvegcA?feature=watch)

Blog:  http://roshansavera.blogspot.in/

E-mail ID:  voiceforblind@gmail.com

अनीता जी नेत्रहीन विद्यार्थियों के सेवार्थ काम करती हैं।

एक अपील

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful article with KMSRAJ51 Readers.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

———– @ Best of Luck @ ———–

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“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥”

 ~KMSRAJ51

 

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

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मुझे तेरी कमी महसूस होती है …..

 

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMS

अधूरी ज़िन्दगी महसूस होती है….. मुझे तेरी कमी महसूस होती है

kmsraj51-5051

अधूरी ज़िन्दगी महसूस होती है…..

मुझे तेरी कमी महसूस होती है…..

तुने मुझे देखा, मुझे सोचा, फिर तुम मुझे भूले

मुझे ये बात भी आज महसूस होती है…..

हमेशा साथ रहने की क़सम खाई थी कभी तुमने, (याद है )

क़सम तेरी आज kmsraj51 को,बड़ी महसूस होती है…..

बदन तेरा था, उसमें जान मेरी थी,

तुझे क्या ये कमी, कभी महसूस होती है…..

‘kmsraj51’ उसको बहुत दिन से नहीं देखा तुने

इन आँखों में नमी बस, मुझे आज महसूस होती है…..

Note::-

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सच्चें मन से अगर कुछ करने की ठान लाे, ताे आपकाे सभी काम में सफलता मिल जाती हैं।

जीवन में जाे भी काम कराें पुरे मन से कराें, ताे सफलता आपकाे जरूर मिलेगी।

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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Seven Techniques To Let Go Off The Past

Kmsraj51 की कलम से…..

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Seven Techniques To Let Go Off The Past – Part 1

Almost each one of us carries a heavy or subtle burden of negative events and happenings that have taken place in our life sometime in the past, either an immediate past or a far-off one; which reduce our present contentment levels immensely. The negative past could be of any form – you experienced the loss of a close loved one due to a break-up or sudden death; you went through a serious physical illness or a very lean phase of financial loss, you were abused on a mental or physical level; you were not treated properly by a colleague at office and undue advantage was taken of you; you performed an inappropriate action and you repent up till now, even after many years have passed, and many such similar and different types of incidents.

There are three different types of processes for removing negative past memories from our consciousness:

* Modifying – A negative past event is modified into a positive, beneficial form and then stored in the consciousness.

* Forgetting – Memories of a negative past event are forgotten and do not exist either in our conversations or in our conscious mind or thoughts, but traces of those memories exist in the sub-conscious mind.

* Erasing – No traces of the negative past exist in the consciousness and memories of it are completely removed from the sub-conscious also.

We need to take the help of all the different aspects or techniques of spirituality and not depend on only one or two for these removal processes. In the next two days’ messages, we will explain all these different techniques of spirituality, which if incorporated in our life, help us experience lightness and emotional freedom from the past. All of them have their own unique importance.

Message

The one who takes inspiration from others keeps moving forward.

Projection: When I look at the specialities of others, I sometimes tend to get discouraged. At such times my own weakness(es) look very prominent and my specialities remain hidden. Such comparision might not actually lead to jealousy but subtly continues to have its influence on me in a negative way.

Solution: At all times I must make sure I am constantly moving forward. Looking at others’s specialities I need to take inspiration from them. I need to see what aspect I can imbibe in myself too. When I do this I will be able to experience constant progress being free from negativity.

 

Seven Techniques To Let Go Off The Past – Part 2

Positive Information and Intoxication – The more we listen or read positive and constructive spiritual knowledge, even if it is for 10 minutes daily, and imbibe (absorb) it, the more our negative memories fade into the background. Also the regular input of knowledge lifts our consciousness to a higher level and gives us an experience of intoxication or spiritual bliss, in which the memory of our past sorrows and negative experiences gets dissolved. Even on a physical level, there are lots of people who indulge in some kind of addiction or intoxication only because it temporarily helps them to overcome and forget the negatives in their life.

Karma Realization – Another benefit of spiritual knowledge is that it makes us realize the various shades and details of the Law of Karma and its application in the World Drama, which helps us immensely in letting go of the past and concentrating on our present so that a bright future can be built, irrespective of the quality of the past.

Self and God Realization – One of the most important benefits of meditation, an important aspect of spirituality, is that it makes us realize and experience the spiritual self and the Father of the spiritual self, the Supreme Soul, accurately. This is an experience of liberation, in which there is no room for past repentances. Past repentances are more a reflection of excessive attachment to the physical or material or attachment to incorrect emotions related to body-consciousness, remembering the damage caused by it to the self and experiencing sorrow due to the same.

Connection and Relation – Also, meditation being a deep connection between me and the Supreme Father, it fills me with immense power and it is also an intense relationship, which fills me with love, happiness and peace. In the experience of these attainments, over a period of time, my past ceases to burden my consciousness.

Message

The right kind of support makes people independent.

Projection: When I provide help and support to others, sometimes I find that they become dependent on me. They continue to expect the same kind of support that they had got from me before, when I am not in a position to give. Then my good gesture becomes a bondage or difficulty for me.

Solution: When I am providing help to someone, I need to check the kind of help that I am providing. True help is to provide assistance in such a way that slowly the person learns to rely on his own resources and becomes independent. Then there will be no expectations from me.

 

Seven Techniques To Let Go Off The Past – Part 3

Correction – Memories inside the soul are like imprints or impressions on the soul. Some impressions are deep, some are not. Negative past experiences leave very deep negative impressions or scars on the soul, which sometimes take a lot of time to heal and sometime an entire lifetime can be sent without them getting healed. Negative past experience imprints and negative emotions like anger, hatred, attachment etc. are closely linked. So, correcting the self or incorporating positive sanskars fills the spiritual self with positive impressions. This, over a period of time, nullifies the effect of these negative impressions and as a result, the related negative memories.

Donation – Donation can be simply defined as the distribution of the invisible attainments one has experienced through spiritual self transformation, to others. It helps one receive blessings or positive energy of those whom we donate to and gives life a focused positive purpose, both of which help us immensely in forgetting our past. People who live only for themselves will find it more difficult to forget their past as compared to ones who spend a lot of time for others. Giving happiness to others helps us in forgetting our griefs.

Interaction – The more we interact with and remain in the company of positive minded people and have positive conversations with them, we give and receive positive energy and the more our past gets erased from my consciousness. Spirituality teaches us to look inwards and experience introvertness, which we haven’t experienced for a long time. At the same time, spirituality also teaches us to keep a balance between looking inwards and outwards. Composed and balanced extrovertness and healthy, happy relationships with virtuous people help us remain more in a present consciousness, not giving the mind to drift too much into the past.

Message

The power of positivity helps finish all negativity.

Projection: When I am faced with negativity in people or in situations, I too usually tend to have negative thoughts. When my mind is caught up with negativity of any kind-fear, anger or tension, I cannot think anything positive. I then find myself totally caught up in the situation finding no solution.

Solution: The only way to finish negativity is to work with positivity. I need to make a conscious effort to look at some positive aspect in the situation or person with whom I am facing difficulty. When I do this I can relate to them with this positivity which will slowly make the situation better again.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

soulpower-kmsraj51

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Kmsraj51 की कलम से …..

Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब) …..

CYMT-KMSRAJ51

“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

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विल्मा रुडोल्फ – अपंगता से ओलम्पिक गोल्ड मैडल तक

kmsraj51 की कलम से

Soulword_kmsraj51 - Change Y M Tयह कहानी है उस लड़की की जिसे ढाई साल की उम्र में पोलियो हुआ, जो 11 साल की उम्र तक बिना ब्रेस के चल नहीं पाई पर जिसने 21 साल की उम्र में 1960 के ओलम्पिक में दौड़ में 3 गोल्ड मैडल जीते…..

यह कहानी है उस लड़की की जिसका जन्म बेहद गरीब परिवार में हुआ पर गरीबी जिसके होंसलो को नहीं तोड़ पाई…..

यह कहानी है उस लड़की की जिसका जन्म  एक अश्वेत परिवार में हुआ (तब अमेरिका में अश्वेतों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता था ), पर जिसके सम्मान में आयोजित भोज समारोह में, पहली बार अमेरिका में, श्वेतो और अश्वेतों ने एक साथ हिस्सा लिया….

यह कहानी है विल्मा रुडोल्फ की….

Tribute

Wilma Rudolph-kmsraj51

Wilma Rudolph

  • Born: June 23, 1940
  • Died: November 12, 1994
  • Location: Brentwood , Tennessee

 

विल्मा का जन्म 1939 में अमेरिका के टेनेसी राज्य के एक कस्बे में हुआ। विल्मा के पिता रुडोल्फ कुली व माँ सर्वेंट का काम करती थी। विल्मा 22 भाई – बहनों में 19 वे नंबर की थी।
विल्मा बचपन से ही बेहद बीमार रहती थी, ढाई साल की उम्र में उसे पोलियो हो गया।  उसे अपने पेरों को हिलाने में भी बहुत दर्द होने लगा। बेटी की ऐसी हालत देख कर, माँ ने बेटी को सँभालने के लिए अपना काम छोड़ दिया और उसका इलाज़ शुरू कराया।  माँ सप्ताह में दो बार उसे, अपने कस्बे से 50 मील दूर स्तिथ हॉस्पिटल में इलाज के लिए लेकर जाती, क्योकि वो ही सबसे नजदीकी हॉस्पिटल था जहा अश्वेतों के इलाज की सुविधा थी। बाकी के पांच दिन घर में उसका इलाज़ किया जाता। विल्मा का मनोबल बना रहे इसलिए माँ ने उसका प्रवेश एक विधालय में करा दिया।  माँ उसे हमेशा अपने आपको बेहतर समझने के लिए प्रेरित करती।

पांच साल तक इलाज़ चलने के बाद विल्मा की हालत में थोडा सुधर हुआ।  अब वो एक पाँव में ऊँचे ऐड़ी के जूते पहन कर खेलने लगी। डॉक्टर ने उसे बास्केट्बाल खेलने की सलाह दी। विल्मा का इलाज कर रहे डॉक्टर के. एमवे. ने कहा था की विल्मा कभी भी बिना ब्रेस के नहीं चल पाएगी।  पर माँ के समर्पण और विल्मा की लगन के कारण, विल्मा ने 11 साल की उम्र में अपने ब्रेस उतारकर पहली बार बास्केट्बाल खेली।

Wilma Rudolph-file-kmsraj51

यह उनका इलाज कर रहे डॉक्टर के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। जब यह बात डॉक्टर के. एम्वे. को पता चली तो वो उससे मिलने आये। उन्होंने उससे ब्रेस उतारकर दौड़ने को कहा।  विल्मा ने फटाफट ब्रेस उतारा और चलने लगी।  कुछ फीट चलने के बाद वो दौड़ी और गिर पड़ी।  डॉक्टर एम्वे. उठे और किलकारी मारते हुए विल्मा के पास पहुचे।  उन्होंने विल्मा को उठाकर सीने से लगाया और कहा शाबाश बेटी। मेरा कहा गलत हुआ, पर मेरी साध पूरी हुई। तुम दौडोगी, खूब दौडोगी और सबको पीछे छोड़ दौगी। विल्मा ने आगे चलकर एक इंटरव्यू में कहा था की डॉक्टर एम्वे. की उस शाबाशी ने जैसे एक चट्टान तोड़ दी और वहां  से एक उर्जा की धारा बह उठी। मेनें सोच लिया की मुझे संसार की सबसे तेज धावक बनना है।

इसके बाद विल्मा की माँ ने उसके लिए एक कोच का इंतजाम किया। विल्मा की लगन और संकल्प को देखकर स्कुल ने भी उसका पूरा सहयोग किया।  विल्मा पुरे जोश और लग्न के साथ अभ्यास करने  लगी।  विल्मा ने 1953 में पहली बार अंतर्विधालीय दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।  इस प्रतियोगिता में वो आखरी स्थान पर रही।  विल्मा ने अपना आत्मविश्वास कम नहीं होने दिया उसने पुरे जोर – शोर से अपना अभ्यास जारी रखा।  आखिरकार आठ असफलताओं के बाद नौवी प्रतियोगिता में उसे  जीत  नसीब हुई। इसके बाद विल्मा ने पीछे मुड कर नहीं देखा वो लगातार बेहतरीन  प्रदर्शन करती रही जिसके फलस्वरूप उसे 1960 के रोम ओलम्पिक मे देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला ।

ओलम्पिक मे विल्मा ने 100 मिटर दौड, 200 मिटर दौड और 400 मिटर रिले दौड मे गोल्ड मेडल जीते । इस तरह विल्मा, अमेरिका की प्रथम अश्वेत महिला खिलाडी बनी जिसने दौड की तीन प्रतियोगिताओ मे गोल्ड मेडल जीते। अखबारो ने उसे ब्लैक गेजल की उपाधी से नवाजा जो बाद मे धुरंधर अश्वेत खिलाडीयो  का पर्याय बन गई।

national-day-in-black-history-wilma-rudolph-kmsraj51Wilma Rudolph was inducted into the Olympic Hall of Fame on Oct. 6, 1983. Rudolph was the first American woman to win three Olympic Gold Medals in track.
वतन वापसी पर उसके सम्मान में एक भोज समारोह का आयोजन हुआ जिसमे पहली बार श्वेत और अश्वेत अमेरिकियों ने एक साथ भाग लिया, जिसे  की विल्मा अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी जीत मानती थी।

Wilma Rudolph-olympic-kmsraj51Wilma Rudolph became the first American woman to win three gold medals in track and field during a single Olympic Games.
आखिर में एक बात विल्मा ने हमेशा अपनी जीत का सार श्रेय अपनी माँ को दिया, विल्मा ने हमेशा कहा की अगर माँ उसके लिय त्याग नहीं करती तो वो कुछ नहीं कर पाती।


Wilma Rudolph

  • Born: June 23, 1940
  • Died: November 12, 1994
  • Location: Brentwood , Tennessee

 

First American Woman to win three gold medals in track and field during a single Olympic Games


Wilma Rudolph became the first American woman to win three gold medals in track and field during a single Olympic Games, despite running on a sprained ankle.

Born Wilma Glodean Rudolph on June 23, 1940 in St. Bethlehem Tennessee, she was the twentieth of twenty-two children. When Wilma was four years old, her parents Ed and Blanche Rudolph were informed that their daughter had polio. By 1947 Blanche was making the 50 mile journey to Nashville twice a week for medical treatments for Wilma. Mrs. Rudolph would often treat Wilma herself with homemade remedies and nightly massages on her legs, promising she would one day walk without braces.

In 1952, when Wilma turned 12, her dream was realized and she no longer needed the braces that made her “different” from the other kids. While In high school, Wilma followed her older sisters and participated in basketball, eventually setting state records and leading her team to a state championship. However, a Tennessee state track and field coach, Edward Temple, spotted her and foresaw her amazing potential. He knew he had found a natural athlete. Wilma had already gained some track experience on Burt High School’s track team two years before, mostly as a way to keep busy between basketball seasons. By the age of 16, she had secured her place on the U.S. Olympic track and field team and returned from the 1956 Melbourne Games with a bronze medal in the 4 X 100 relay.

She returned to the 1960 Rome Olympic games to compete and won gold in three events, the 100m, 200m, and the 4 x 100 relay. She achieved Olympic records in all of her Rome competitions. She wanted her victories to pay tribute to Jesse Owens, who had been her inspiration.

Wilma Rudolph next won two races at a U.S. – Soviet meet and then announced her retirement from track competition in 1962.

1963 proved to be a busy year. She married her high school sweetheart with whom she had four children. After retiring from amateur sports, Wilma was granted a full scholarship to Tennessee State University and thus began her studies in 1963. She completed her studies and earned her bachelor’s degree in elementary education. She later coached at Burt High School and then moved on to serve as a sports commentator.

Wilma Rudolph was decorated with multiple awards and honors. She was named United Press Athlete of the Year in 1960 and Associated Press Woman Athlete of the Year in 1960. In 1961 she won the James E. Sullivan Award as the top amateur athlete in the United States. Her father died in that same year. She was voted in and inducted into four different Halls of Fame: National Black Sports and Entertainment hall of Fame in 1973 and the National Track and Field Hall of Fame in 1974, U.S. Olympic Hall of Fame in1983, and National Women’s Hall of Fame in 1994.

Wilma published her autobiography Wilma, “The Story of Wilma Rudolph,” in 1977, which NBC made into a movie that same year.

Wilma Rudolph was diagnosed with brain and throat cancer in July of 1994. She died four months later at age 54, on November 12, 1994. She was survived by four children, eight grandchildren, and over 100 nieces and nephews.



 

KENNEDY MEETS WITH WILMA RUDOLPHPresident Kennedy chats in his White House office April 14, 1961, with Wilma Rudolph, winner of three gold medals in the 1960 Olympic games. Wilma, a student at Tennessee State, won the 100- and 200-meter races in Rome and was the anchor runner on the winning 400-meter relay team.

 

ED TEMPLE RYLAND HOSKINSA statue of Olympic track star Wilma Rudolph makes up a portion of the Tennessee Sports Hall of Fame as member Ed Temple, left, looks over the track and field section with Ryland Hoskins, during the grand opening in the Gaylord Entertainment Center in Nashville, Tenn., on Tuesday, Jan. 11, 2000.

hitesh-KMSRAJ51मैं श्री-हितेश नरेंद्र सिंह का आभारी हूं.

सफलता प्रेरक कहानी साझा करने के लिए.

Mr. Hitesh Narendra Singh

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एक सफल जीवन के लिए-आत्मा का दैनिक भोजन-08-May-2014

kmsraj51 की कलम से…..

Soulword_kmsraj51 - Change Y M TFor a successful life the daily food of the soul-08-May-2014

English Murli

Essence: Sweet children, the Father has come to change thorns into flowers. The biggest thorn is body consciousness. It is through this that all other vices come. Therefore, become soul conscious.

Question: Due to not understanding which of the Father’s tasks have devotees considered Him to be omnipresent?
Answer: The Father is the One with many forms and, wherever there is a need, He enters any child in a second and benefits the soul in front of that one. He grants visions to devotees. He is not omnipresent but is a very fast rocket. It doesn’t take the Father long to come and go. Due to not understanding this, devotees say that He is omnipresent.

Essence for dharna:
1. In order to become worthy and sensible, become pure. Do service with the Father in order to change the whole world from hell into heaven. Become a helper of God.
2. Renounce the systems of the iron-aged world, the opinion of society and the code of conduct of the family and observe the true code of conduct. Become full of divine virtues and establish the deity community.

Blessing: May you be truthful and, with the foundation of truth, give the experience of divinity through your face and your activity.
In the world, many souls are called truthful or consider themselves to be truthful, but complete truthfulness is based on purity. Where there is no purity, there cannot be truth. The foundation of truth is purity and the practical proof of truth is the divinity on your face and in your activity. On the basis of purity, there is naturally and easily the form of truth. When both the soul and body become pure, you would then be said to be truthful, that is, you would be a deity who is filled with divinity.

Slogan: Remain busy in unlimited service and there will automatically be unlimited disinterest.


 

Hindi Murli-हिन्दी मुरली

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – बाप आये हैं कांटों को फूल बनाने, सबसे बड़ा कांटा है देह-अभिमान, इससे ही सब विकार आते हैं, इसलिए देहीअभिमानी बनो”

प्रश्न:- भक्तों ने बाप के किस कर्त्तव्य को न समझने के कारण सर्वव्यापी कह दिया है?
उत्तर:- बाप बहुरूपी है, जहाँ आवश्यकता होती सेकण्ड में किसी भी बच्चे में प्रवेश कर सामने वाली आत्मा का कल्याण कर देते हैं। भक्तों को साक्षात्कार करा देते हैं। वह सर्वव्यापी नहीं लेकिन बहुत तीखा राकेट है। बाप को आने-जाने में देरी नहीं लगती। इस बात को न समझने के कारण भक्त लोग सर्वव्यापी कह देते हैं।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) लायक और समझदार बनने के लिए पवित्र बनना है। सारी दुनिया को हेल से हेविन बनाने के लिए बाप के साथ सर्विस करनी है। खुदाई खिदमतगार बनना है।
2) कलियुगी दुनिया की रस्म-रिवाज, लोक-लाज, कुल की मर्यादा छोड़ सत्य मर्यादाओं का पालन करना है। दैवीगुण सम्पन्न बन दैवी सम्प्रदाय की स्थापना करनी है।

वरदान:- सत्यता के फाउण्डेशन द्वारा चलन और चेहरे से दिव्यता की अनुभूति कराने वाले सत्यवादी भव
दुनिया में अनेक आत्मायें अपने को सत्यवादी कहती वा समझती हैं लेकिन सम्पूर्ण सत्यता पवित्रता के आधार पर होती है। पवित्रता नहीं तो सदा सत्यता नहीं रह सकती। सत्यता का फाउण्डेशन पवित्रता है और सत्यता का प्रैक्टिकल प्रमाण चेहरे और चलन में दिव्यता होगी। पवित्रता के आधार पर सत्यता का स्वरूप स्वत: और सहज होता है। जब आत्मा और शरीर दोनों पावन होंगे तब कहेंगे सम्पूर्ण सत्यवादी अर्थात् दिव्यता सम्पन्न देवता।

स्लोगन:- बेहद की सेवा में बिजी रहो तो बेहद का वैराग्य स्वत: आयेगा।


 

Hinglish Murli

Murli Saar : – Meethe Bacche – Baap Aaye Hai Kaanton Ko Phul Banane, Sabse Bada Kaanta Hai Deh – Abhiman, Isse Hi Sab Vikaar Aate Hai, Isliye Dehi – Ahimani Banno”

Prashna : – Bhakto Ne Baap Ke Kis Kartavya Ko Na Samajhne Ke Karan Sarvavyapi Kah Dia Hai ?

Uttar : – Baap Bahurupi Hai, Jaha Aavasyak Hoti Second Mei Kisi Bhi Bacche Mei Pravesh Kar Samne Vaali Atma Ka Kalyan Kar Dete Hai. Bhakto Ko Sakshatkar Kara Dete Hai. Vah Sarvavyapi Nahi Lekin Bahut Teekha Rocket Hai. Baap Ko Aane – Jane Mei Dairi Nahi Lagti. Is Baat Ko Na Samajhne Ke Karan Bhakt Log Sarvavyapi Kah Dete Hai.

Dharan Ke Liye Mukhya Saar : –

1 ) Layak Aur Samajdar Banne Ke Liye Pavitra Bannna Hai. Saari Dunia Ko Hell Se Heaven Banane Ke Liye Baap Ke Saath Service Karni Hai. Khudayi Khidmadgar Bannna Hai.

2 ) Kaliyugi Dunia Ki Rasm – Rivaz, Lok – Laaz, Kul Ki Maryada Chod Satya Maryadaon Ka Palan Karna Hai. Daivigun Sampann Ban Daivi Sampradaye Ki Stapna Karni Hai.

Vardan : – Satyata Ke Foundation Dwara Chalan Aur Chehre Se Divyata Ki Anubhuti Karane Wale Satyavadi Bhav

Dunia Mei Anek Atmae Apne Ko Satyavadi Kehti Va Samajti Hai Lekin Sampurn Satyata Pavitrata Ke Aadhar Par Hoti Hai. Pavitrata Nahi Toh Sada Satyata Nahi Rah Sakti. Satyata Ka Foundation Pavitrata Hai Aur Satyata Ka Practical Praman Chehre Aur Chalan Mei Divyata Hogi. Pavitrata Ke Aadhar Par Satyata Ka Swarup Swatah : Aur Sahaj Hota Hai. Jab Atma Aur Sharir Dono Paavan Honge Tab Kahenge Sampurn Satyavadi Arthat Divyata Sampann Devta.

Slogan : – Behad Ki Seva Mei Busy Raho Toh Behad Ka Vairagya Swatah : Aayega.

 

आध्यात्मिक सेवा में, 
ब्रह्माकुमारी

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100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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“सफल लोग अपने मस्तिष्क को इस तरह का बना लेते हैं कि उन्हें हर चीज सकारात्मक व खूबसूरत लगती है।”
-KMSRAJ51

“हमारी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने जीवन का कुछ सेकंड, प्रतिघंटा और प्रतिदिन कैसे बिताते हैं”
-KMSRAJ51

-A Message To All-

मत करो हतोत्साहित अपने शब्दों से ……आने वाली नयी पीढ़ी को ,
वो भी करेंगे कुछ ऐसा एक दिन…. जिसे देखेगा ज़माना ….पकड़ती हुई नयी सीढ़ी को ॥

कुछ भी आप के लिए संभव है ॥

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

~kmsraj51

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वजन बढ़ाने के 10 आसान तरीके।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ वजन बढ़ाने के 10 आसान तरीके(पुरुषों के लिए ) ϒ

Ayurvedic-Tips-in-Hindi-kmsraj51

वजन बढ़ाने के लिए धीरे-धीरे प्रयास करें, जंक फूड और फास्‍ट फूड न खायें।
रोज एक कटोरी बीन्स खायें, इसमें पौष्टिकता के साथ 300 कैलोरी होती है॥

खरबूजा और तरजबू जैसे मौसमी फल खाने से वजन तेजी से बढ़ा सकते हैं।
बादाम, खजूर और अंजीर के साथ गरम दूध पीने से वजन तेजी से बढ़ता है॥

वजन बढ़ाना और सही प्रकार से वजन बढ़ाना, दोनों बिलकुल अ‍लग बाते हैं। अगर आपका वजन कम है और आप उसे सही प्रकार से बढ़ाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको कुछ कारगर उपायों को आजमाना होगा। अधिकतर लोग वजन कम करने की चुनौती से जूझते हैं। लेकिन, कई लोग ऐसे भी होते हैं, जिनकी समस्‍या इससे ठीक विपरीत होती है।

इन लोगों का वजन जरूरी मापदंडों से अनुसार कम होता है और इनकी जरूरत होती है वजन बढ़ाना। लेकिन, यह काम इतना आसान नहीं होता। सही प्रकार से वजन बढ़ाना एक मुश्किल काम है और इसके लिए भी सही मेहनत की जरूरत होती है। आप कुछ सप्‍लीमेंट्स की मदद से वजन बढ़ा तो सकते हैं, लेकिन इसका लाभ कम और नुकसान अधिक होते हैं। इसलिए जरूरी है कि वजन बढ़ाने के लिए स्‍वस्‍थ तरीके अपनाए जाएं।

वजन बढ़ाने के आसान टिप्‍स।

हर वक्‍त खाते रहना जरूरी नहीं।

डायट चार्ट वजन बढ़ाने के लिए भी बेहद जरूरी होता है। अपनी दिनचर्या में संतुलित व स्वास्थ्‍यवर्द्धक आहार के साथ वर्कआउट को भी शामिल करें। कुछ ही दिनों में आपको फर्क नजर आना शुरू हो जाएगा।

प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट।

वजन बढ़ाने के लिए प्रोटीन का सेवन जरूरी है इसलिए अपने आहार में चिकन, मछली, अंडा, दूध, बादाम व मूंगफली आदि को शामिल करें। इसके अलावा कार्बोहाइड्रेट भी वजन बढ़ाने में मददगार होता है जैसे पास्ता, ब्राउन राइस, ओटमील आदि। इन सबके साथ फलों व सब्जियों का सेवन भी जरूर करें।

केला है फायदेमंद।

वजन बढ़ाने का सबसे प्रभावी और आसान तरीका है केले का सेवन। दिन में कम से कम तीन केले खाएं। दूध या दही के साथ केला और भी फायदेमंद है। रोज सुबह नाश्ते के साथ बनाना-मिल्कशेक जरूर लें। महीने भर में परिणाम आपके सामने होंगे।

दूध में शहद।

शहद वजन संतुलित करता है। अगर आपका वजन अधिक हो, तो शहद उसे कम करने में मदद करता है और अगर वजन कम हो तो उसे बढ़ाने का काम करता है। रोज सोने से पहले या नाश्ते में दूध के शहद का सेवन आपका वजन बढ़ा सकता है। इससे आपकी पाचन शक्ति भी अच्‍छी रहती है।

डॉक्टर से संपर्क करें।

अधूरा भोजन, भोजन के समय में ज्यादा अंतराल, कम भोजन का सेवन करना और उससे ज्‍यादा मेहनत करना, वजन कम होने के कारणों में से एक है। इसके अलावा अन्य कारण है लंबी बीमारी जिनमें टीबी, कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और एनोरेक्सिया नर्वोसा जैसी बीमारियों के कारण हो सकता है। तो ऐसे में आपको डॉक्टर से संपर्क करें और उचित सलाह लें।

बीन्स भी फायदेमंद।

अगर आप शाकाहारी हैं तो आपके लिए बीन्स से अच्छा कोई विकल्प नहीं है। बीन्स के एक कटोरी में 300 कैलोरी होती है यहां सिर्फ वजन बढ़ने में ही मदत नहीं करता बल्कि पौष्टिक भी होता है।

खरबूजा है फायदेमंद।

जिन लोगों का वजन कम होता है डॉक्टर उन्हें खरबूजा खाने की सलाह देते हैं। हालांकि यह मौसमी फल है लेकिन इसे खाने से भी वजन तेजी से बढ़ता है। साथ ही यह आपको डीहाइड्रेशन से भी बचाता है।

मेवे के साथ दूध।

वजन बढ़ाने के लिए सुबह-सुबह ‌सूखे मेवे को दूध में पीसकर या कूटकर उबाल लें और इसे पिएं। खासतौर पर बादाम, खजूर और अंजीर के साथ गर्म दूध पीने से भी वजन तेजी से बढ़ता है। किशमिश खाने से वजन तेजी से बढ़ता है। नियमित रुप से अपनी डायट में 30 ग्राम किशमिश को शामिल करें। रोज इसके सेवन से महीने भर में आप अपने वजन में फर्क महसूस करेंगे।

पीनट बटर।

पीनट बटरमें मोनोअनसेचुरेटेड फैट की अच्छी मात्रा पाई जाती है। ये न सिर्फ वजन बढाने में मदद करता है बल्कि टोस्ट और बिस्कुट के साथ खाए तो बहुत स्वादिष्ट भी लगता है।

व्यायाम भी जरूरी।

वजन बढ़ाने के लिए व्यायाम भी उतना ही जरूरी है जितना कि आहार। इसके लिए आप पुल अप्स, स्वाट्स, डेडलिफट्स आदि व्यायाम कर सकते हैं। इन व्यायामों के मदद से हार्मोन्स की गतिविधि बढ़ती है और आपको भूख लगती है।

~हरि कृष्णमूर्ति जी

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Mr. Hari Krishnamurthy Ji

हरि कृष्णमूर्ति जी के बारे में संक्षिप्त विवरण-

मानवता को बचाने का अनुपम काय॔ कर रहें हैं॥

Blog: http://harikrishnamurthy.wordpress.com/

Email ID- krishnamurthy.hari@gmail.com,

Phone nO. 09868369793

@twitter lokakshema_hari
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हिन्दी में स्वास्थ्य युक्तियाँ Share करने के लिए मैं हरि कृष्णमूर्ति जी का बहुत आभारी हूँ ॥

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आप सभी का प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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Bringing The Consciousness Back In Shape

kmsraj51 की कलम से…..

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Brahma Kumaris –

Soul Sustenance and Message for the day

 

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Soul Sustenance 27-04-2014
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Bringing The Consciousness Back In Shape 

If we try and find the root causes of all forms of stress, we would find that both lazy and wrong thinking lie behind various stressful emotions. No one right from our childhood to when we are grown-ups puts this into our heads that we are each responsible for our own thoughts and feelings. Instead we are taught that others are responsible for what we think and feel. No one teaches us how to think. We are taught what to think in terms of knowledge of the world, but not how to shape our own thoughts and feelings. 

In spirituality the self gets the required training to create positive and powerful thoughts, thoughts: 

1. which are connected to true spiritual knowledge of the self, 
2. which are beneficial to your own spiritual well-being, 
3. that inject positive energy in the form of happiness, love and enthusiasm to those around you, 
4. which are absolutely necessary in the context in which you find yourself, 
5. which use all your subtle energies in an economical way, 
6. which ensure that the result of any response you may create does not result in stress. 

When no one teaches us that any mental or emotional discomfort comes from within our own consciousness, we also do not ever realize that any negative state of being is unnatural and a sign that our consciousness is out of shape. The above thought training helps us to return our consciousness to its true, natural and original shape. 

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Message for the day 27-04-2014
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To use one value with commitment is to guarantee the use of all values. 

Expression: Values are related to each other as if they were members of a great family. For the one who is committed to one value is the one who is able to emerge the other connected values. Such a person is able to add quality to everything he does and speaks. 

Experience: When I am able to recognise my own special value and use it with commitment in my daily life, I am able to experience success in all I do. This is because I have the satisfaction of giving my best and of having added quality to everything I do. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

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100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

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Factors That Bring Us Closer To Success

kmsraj51 की कलम से…..

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Brahma Kumaris –

Soul Sustenance and Message for the day

 

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Soul Sustenance 26-04-2014
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Factors That Bring Us Closer To Success 

Given below are some factors that bring us closer to success: 

• High self-esteem. 
• Constancy. 
• Courage and determination. 
• Integrity and honesty. 
• Self-acceptance and acceptance of others. 
• Believing in what you do, regardless of external factors. 
• Responsibility. 
• Dedication, determination and tranquility. 
• Being positive in the face of adversities (negative circumstances). 
• Being consistent with your values. 
• Precision in decisions and choices. 
• Focus. 
• Performing all karmas with love and happiness. 
• Giving the maximum of yourself in everything you do. 
• Creativity. 
• Thoughts and actions in tune with each other. 
• Appreciation and blessings (good wishes) from others. 
• Gratitude toward oneself and others. 

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Message for the day 26-04-2014
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To have an open mind is to be prepared for mistakes too. 

Expression: The one with an open mind is the one who is able to see things for what they are and accept them. He is able to take the lesson from each situation that happens and move forward with confidence. He never lets any situation or even his own mistake discourage him, but he is able to move forward with renewed confidence. 

Experience: I am able to learn from my mistakes and be ready for the next learning too when I am able to keep my mind open. Each mistake that happens is also a beautiful teaching when I am willing to learn. With each new situation I find myself growing very beautifully within. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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Definitions of Success !!

kmsraj51की कलम से…..

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“सफलता की परिभाषा”

 

Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

 

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Soul Sustenance 25-04-2014
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Defining Success 

Given below are some definitions of success: 

• Feeling yourself to be full of inner contentment and happiness, with an optimistic mental state, without fear, happy and in a good mood. Being fine, in balance and at peace with oneself. 
• Finding meaning in what you do. 
• Discovering what will bring you closer to your dream. 
• Success is about more than just possessing; it is facing all situations, even the negative ones, transforming them into the positive and feeling yourself realized, personally and emotionally. 
• Having courage to take forward what you want, in spite of what you find against it. 
• Achieving in each moment the desired objectives at all levels of the inner being. Fulfilling set objectives and adopting a positive attitude. 
• Being able to be beyond noise i.e. experience silence wherever and whenever you wish to – silence being the key to all spiritual treasures. 
• Remaining humble in the wake of all achievements and glory that may come your way. 
• Not being afraid of failure. 
• Satisfaction at work. 
• In harmony with one’s inner conscience (while performing all actions). 

Tomorrow we shall discuss some factors that bring us closer to success. 

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Message for the day 25-04-2014
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To be a giver is to be flexible. 

Expression: The one who does not expect from others, but is able to give others from whatever resources he has, is the one who is flexible. Being flexible means to be able to recognize the other person’s value system and moulding one self according to it without losing touch with one’s own value system. 

Experience: When I am a giver, I do not expect others to change according to my value system, but am very easily able to find a way to adapt to the other person’s value system. I never expect from others to understand me, but am able to understand others. So there is never any feeling of negativity for anyone. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए – (100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

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Performing A Spiritual Audit At The End Of The Day !!

 

KMSRAJ51की कलम से…..

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Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

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Soul Sustenance 24-04-2014
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Performing A Spiritual Audit At The End Of The Day – Part 2 

Yesterday we had explained how self evaluation at the end of the day is extremely vital to one’s progress and development. A useful exercise in this regard is keeping a daily chart for about 3 personality traits or pointsand filling it up every night (lesser than 3 is also fine, but not more , because then you might feel lazy in keeping the chart after a few days and also you might lose focus and the personality traits may not transform as much as you want). You could either evaluate yourself with a yes or no or perform a percentage wise evaluation like 50% or 90% for e.g. We have mentioned below, some of the common traits from which you could select the traits to keep a daily chart for. You could incorporate some other specific traits (not mentioned in this list), which you want to change or develop, depending on your personality: 

In the entire day, today; not only in my words and actions, but also in my thoughts: 
* Did I see everyone’s specialties and keep good wishes for each one, in spite of obvious weaknesses being visible? 
* Did I remain free from all forms of anger, like irritation, frustration, grudge, revenge, etc.? 
* Did I ensure that I neither give nor take sorrow, hurt, pain from anyone? 
* Did I remain free from waste and negative? 
* Did I remain ego less? 
* Did I remain untouched by name, fame, praise, insult? 
* Did I remain stable? 
* Did I remain free from judgments, criticism, jealousy, comparison, hatred, etc.? 
* Did I keep a conscious of serving each one whom I met? 
* Did I bring the 8 main powers into practice and experience being powerful? 
* Did I remain in self-respect and give respect to everyone? 
* Did I practice being soul-conscious in actions and interactions? 
* Did I take a one minute break every hour to reflect, meditate and control the traffic of thoughts in the mind?

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Message for the day 24-04-2014
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Humility is to respect everything that comes our way. 

Expression: To love simple things is humility. It teaches to respect all that life brings. That means there is an ability to appreciate and value everything appropriately. So one is able to use everything that comes one way to the fullest extent for the benefit of the self and that of others. 

Experience: When I am humble I am able to remain focused on my inner peace and not lose my sense of personal well-being. I am able to simply learn from everything that happens to my life and add on to this sense of well-being. No situation is difficult or impossible to work on, but I am able to overcome all challenges with ease. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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Soul Sustenance 23-04-2014
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Performing A Spiritual Audit At The End Of The Day – Part 1 

Our normal day at the office or/and at home is filled with lots of actions and interactions. On a normal day, without realizing consciously, we create almost 30,000-40,000 thoughts. So, not only are we active physically but extremely active on a subtle or non-physical level also. Imagine sleeping with all this burden of thoughts, words and actions which have been created throughout the day, many of which have been waste and negative in nature. What would be the resulting quality of my sleep? So it is extremely important to perform a spiritual/emotional audit or evaluation at the end of each day. 

In a lot of professional sectors of life today, people recognize the need for reflection and audit, not only of financial records but also a general evaluation of the respective sector, to maintain and improve both the service to customers and the job satisfaction of people working in the sector. Checking my own behavior, as a daily exercise; not just checking, but also bringing about respective changes for the next day, enables me to continue to develop and grow, as a human being and in the quality of my work and personal and professional relationships. Have gone through the self-evaluation, it is also advised to become completely light by submitting the mistakes made and heaviness accumulated in the day to the Supreme Being. Doing this helps me put a full-stop to the same and settle all my spiritual accounts at the end of the day. I need to put an end to all commas (when looking at scenes that caused me to slow down and reduced the speed of my progress), question marks (when looking at scenes which caused a why, what, how, when, etc…. in my consciousness) and exclamation marks (when looking at negative or waste scenes, which were unexpected and surprising) which were created in the day’s activities. Along with remembering what all good happened during the day, what did I achieve and what good actions did I perform, there is lots to forget at the end of the day, which should not be carried into my sleep at any cost. Disturbed, thought-filled, unsound sleep, will result in a not so fresh body and mind the next morning, which will cause my mood to be disturbed, adversely affecting the following day. 


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Message for the day 23-04-2014
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To be clean at heart is to give happiness to others. 

Expression: The one who has a clean heart is the one who always tries to do the best for those with whom he comes in contact. Thus, the person develops the ability to accept others as they are and ignore anything wrong done by them. Instead, he is able to do the right action without losing the balance. So such a person brings happiness for himself and for others through every action he performs. 

Experience: When I have a clean heart I am able to have an experience of my inner qualities. I am able to enjoy the beauty of the different relationships, each relationship and each person being unique. Thus others are able to get in touch with their inner beauty too. So there is happiness experienced by all. 


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Brahma Kumaris

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Your Identity is Your Destiny !!

 kmsraj51 की कलम से…..

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

(Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से)

Author Of-

“तू न हो निराश कभी मन से” 

– KMSRAJ51

 

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

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Soul Sustenance 22-04-2014
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Your Identity is Your Destiny 

There is a direct connection between identity and destiny. It’s a simple process to see and understand, even on a daily basis. If you wake up irritated (in a bad mood) it means you are seeing yourself as an irritated being (soul). Perhaps you even think and sometimes say to your self, “I’m irritated today.” 

It means your self-identity is negative. So you filter the world through your negative filter and the world actually looks like an irritable place. As a result, you think negative thoughts, generate a negative attitude and give negative energy to others. They in turn will likely return the same negative energy, which you are sending to them and perhaps avoid you altogether. So your destiny of the day becomes …. Not so positive! Now see the same principle and process in life on larger scale. Look around outside you now, and you will see a reflection of how you see your self inside. Your circumstances, your relationships and even the events of the day reflect back to you how you see yourself. 

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Message for the day 22-04-2014
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The one who is able to discriminate well is able to bring about real benefit. 

Expression: Everyone naturally works for the benefit of the self and others. But the one who discriminates well is able to understand the other person’s need and give accordingly. So whatever is done naturally brings benefit for others and also for the self. 

Experience: When I am able to bring benefit for the right person at the right time with the right thing, I am able to win the trust of the other person. I expect nothing in return, but have the satisfaction of helping at the right time. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

brahmakumaris-kmsraj51

 

विशेष:- Coming Soon …..

Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

in English & Hindi(अंग्रेजी और हिंदी में) …..

Note::-

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 Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए – (100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

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Stress Management !!

 

kmsraj51 की कलम से …..

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Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

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Soul Sustenance 18-04-2014
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Stress Management 

Standing Back, Observing and Steering – 

Standing Back : We can do this individually or as a team, when stressful situations occur. We may take a few minutes to stand back mentally and physically from the situation or scene. 

Observing : The next step is to re-view the situation, as if we are an onlooker or a detached observer. Being as silent as possible, we can ask ourselves if the thoughts we are having are the ones we wish to keep, if they are going where we would choose them to. 

Steering : In the resulting silence, it is possible to steer (change direction) our thinking to where we want it to be; perhaps to personal affirmations (positive thoughts) we use to calm us. The affirmations can be: ‘I am aware of myself as calm and peaceful or, ….as happy and satisfied’, etc. 

This technique changes our attitudes and feelings, which influences positively the situation as well as how others respond. 

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Message for the day 18-04-2014
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To have a clear aim of where the action will lead is to be successful in everything. 

Expression: Many a times it so happens that one acts immediately seeing a situation. But the one who is successful analyses the situation and predicts the outcome of the action that he performs and then acts keeping the end result in mind. Because of knowing the consequences of the actions before actually performing that action, he is able to continue putting in effort in spite of the challenges and difficulties. So he continues to give his best to the task. 

Experience: When I am able to give time to myself to think before performing any action, I am able to take the opportunity to be clear in my thinking. The consequences of the action I wish to take are clear in my mind and so, the action taken to overcome the situation is right. Hence, I receive easy and sure success. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

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Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

 

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Soul Sustenance 17-04-2014
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The Pledge Of Responsibility 

A very important aspect of progress in the self and my relationships, which we all desire is restoring a sense of responsibility in my inner world, so that by doing that, I and others around me are benefitted. Even on a physical or non-spiritual level, someone who is responsible while playing his/her role or performing his/her duties either in the family, at the workplace or in some other setting e.g. a club group or a team in a particular sport or a social service group, not only feels content with his/her actions himself/herself but spreads ripples of contentment to others and receives similar energy from each one he/she is involved with. In the same way on an emotional or spiritual level, when I start my day I need to remind myself of my responsibility towards myself.I need to remind myself that I am responsible for the choices I make in my life which influence and color everyone around me. So do my thoughts, feelings, the way my personality functions internally and externally the whole day and my responses to people and situations, for all of which I am responsible. 

It is like taking a pledge of responsibility with the self in the morning that today I will not create a single thought, word or action which is against the texture of my innate, positive nature i.e. irresponsible. And what will provide my pledge the much required strength of determination? An injection of positive thoughts, emotions and sanskaras within me in the morning, using a suitable technique of self empowerment like meditation or spiritual study or some other. By taking such a pledge of responsibility and by watering it with the energy of my attention from time to time during the day, I am able to implement it and can make a difference to not only the people around me, but to a lot more than that. In this way, as I change, the world around me changes, because the energy I create in my inner world starts flowing into my circumstances, my interactions, my sphere of karmas, etc. to make them positive, which benefits me in return in the form of a cyclic process. As I take this pledge and abide by it for a few days, I start realizing the immense potential that it possesses. 

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Message for the day 17-04-2014
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To transform waste into something purposeful and powerful is to remain light. 

Expression: To successfully transform something waste into something powerful and meaningful is to look beyond the situation and see what it has to teach. When there is the ability to do this, there is the ability to go on in spite of the most challenging obstacles. There is the deep understanding that nothing happens without a purpose. There is no time or energy wasted in wasteful company. 

Experience: When I understand the significance of everything that happens, I am able to transform in a second. So I am able to remain light because I am able to put in sincere effort and free myself from the burden of waste. I also find that there is no problem in my relationships too, as I am able to understand others and behave accordingly. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

 

 

Note::-

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 By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

100 शब्द – एक सफल जीवन के लिए-(100 Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

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आप भगवान से क्या माँगते हैं, और ईश्वर आपको क्या देता है!!

kmsraj51 की कलम से …..
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आप भगवान से क्या माँगते हैं, और ईश्वर आपको क्या देता है!!

(i) यदि आप भगवान से शक्ति माँगते हैं, तो वह आपको कठिनाई में
डाल देता है, ताकि आपकी हिम्मत बढ़े और आप शक्तिशाली बनें।

(ii) यदि आप भगवान से बुद्धि माँगते हैं, तो वह आपको उलझन मे डाल देता है,
ताकि आप उसे सुलझा सकें और बुद्धिमान होने का परिचय दे सकें।

(iii) यदि आप भगवान से समृद्धि माँगते हैं, तो वह आपको समझ प्रदान करता है,
ताकि आप श्रम करें, योग्यता बढ़ाएँ ओरआपकी समृद्धि हो सकें।

(iv) यदि आप भगवान से प्यार माँगते हैं, तो वह आपको दुखी लोगों के बीच खड़ा कर देता है,
ताकि आपके हाथ मदद के लिए आगे बढ़े, उदार बनें और प्यार करना सीखें।

==>> भगवान आपको वह नहीं देता जो आप माँगते हैं, वह देता है जो आपको चाहिए। इसलिए ईश्वर की रज़ा में खुश रहें वो कभी हमारा बुरा नही करेगा,
वशर्ते हम भी किसी का बूरा ना करे !!!

supreme_soul_9_2kms


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मन के हारे हार है मन के जीते जीत !!

kmsraj51 की कलम से …..
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“मन के हारे हार है मन के जीते जीत”

दोस्तों ,

बहुत दिनों से आप अपने आपको थका हुआ और कमजोर महसूस कर रहे हैं! मन में भी नकारात्मक भाव आ रहे हैं ,कोई उमंग महसूस नहीं हो रही है ! जिंदगी बोझिल सी हो रही है! ऐसे में आप किसी डॉक्टर के पास जाते हैं! वो आपकी पूरी जांच करने के बाद गंभीर स्वर में आपसे कहता है,–‘माफ़ कीजिएगा! लेकिन आपकी reports देख कर मुझे लगता है की अगले एक साल में आपको diabetes और heart problem होने वाली है,थोडा अपना ध्यान रखिए!!

आप ये सुन कर shocked हो जाते हैं! लेकिन अब इसके बाद जो आपकी प्रतिक्रिया होती है,वो महत्वपूर्ण है!

इस खबर को सुनने के बाद आप दो तरह से प्रतिक्रिया कर सकते हैं!

पहला, ये सुनते ही आपका मन कहता है, देखा, मैं तो पहले ही कह रहा था कुछ तो गड़बड़ है! तुम बीमार होने वाले हो! आप तुरंत doctor के prediction के आगे हथियार डाल देते हैं! आपकी नकारात्मक सोच आपकी उम्र को 10 साल आगे की स्थिति में पहुंचा देती है!!

आप हताश और निराश से कुर्सी से उठते हैं! किसी पराजित आदमी की तरह अपने कंधे झुका कर clinic से बाहर निकलते हैं! घर आकर चुपचाप या तो बिस्तर या TV के आगे बैठ जाते हैं!

आपके मन में ये prediction मजबूती से बैठ गई है की ये तो होना ही है तो क्यों मैं सुबह जल्दी उठूं ,व्यायाम करूँ, सही आहार लूँ, मेहनत करूँ! ये विचार आपके मनोमस्तिक्ष पर इतनी बुरी तरह हावी हो जाते हैं की सोते, जागते खाते-पीते आप बस ये ही सोचते रहते हैं की अब तो मुझे diabetes और heart problem होने वाली है आखिर अब तो doctor ने भी ये कह दिया है!

आप निरुत्साहित से अपने काम करते हैं! चिंता में TV के सामने बैठ कुछ ना कुछ खाते रहते हैं! आप अपनी चिंता को खाने की आड़ में दबाने की कोशिश करते हैं! फिर ऐसे ही हताशा, निराशा और आलस से भरी आपकी दिनचर्या हो जाती है!!

फिर एक दिन अचानक आपकी तबियत ज्यादा खराब हो जाती है! आप डॉक्टर के यहाँ जाते हैं! आपका सारा checkup करने के बाद doctor बड़े ही निराशा भरे स्वर में कहता है,– ‘मुझे अफ़सोस है! लेकिन मैं आपको ये बताना चाहता हूँ की आपको high BP, diabetes और heart problem हो चुका है! अगर अब भी आप अपना अच्छे से ख्याल नहीं रखेंगे तो गाडी ज्यादा देर और दूर तक नहीं चल पाएगी! आप shocked से सामने दिवार पर लगा कैलेंडर देखते हैं! अरे अभी तो केवल 5 महीने ही गुजरे हैं, डॉक्टर ने तो 1 साल की कहा था! आपकी सोच और मन की हार ने उस भविष्यवाणी को समय से पहले ही सच साबित कर दिया! आप फिर पहले से भी ज्यादा हताश, निराश और झुके हुए कन्धों के साथ clinic से बाहर निकलते हैं! और ये कहानी दोस्तों फिर ज्यादा लम्बी नहीं चलती है ……..!!

वहीं दूसरी तरफ doctor के ये कहते ही, की अगले एक साल में आपको diabetes और heart problem होने वाली है, आपको आपकी अंतरात्मा को एक झटका सा लगता है! आप इस बात को एक चुनोती की तरह लेते हैं! तुरंत आपका मन और आत्मबल एक निर्णय लेते हैं, की अरे ये सिर्फ एक prediction ही तो है, हकीकत नहीं है, और मैं इसे हकीकत बनने भी नहीं दूंगा! आप मन ही मन संकल्पित होते हैं, अपनी पिछली जिंदगी की कमियों, लापरवाहियों और आलस पर एक नजर डालते हैं और तुरंत निर्णय लेते हैं, बस अब और नहीं! अब मेरी जिंदगी, मेरी सेहत मेरे हाथ में है! आपकी सोच पूरा u-turn ले लेती है! आप ये ठान लेते हैं की आज से बल्कि अभी से मैं अपने आप को, अपनी आदतों को बदल दूंगा! इस prediction को मैं झूठा साबित कर के रहूँगा! आप एक संकल्प और मन के विश्वास के साथ कुर्सी से उठते हैं और clinic से बाहर निकलते हैं!!

आप अपनी दिनचर्या को पूरी तरह से बदल देते हैं! जल्दी उठना, ध्यान, व्यायाम, सही आहार, सकारात्मक सोच, श्रद्धा, आशावादिता, उमंग ,उत्साह और पर्याप्त मेहनत को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लेते हैं! कुछ दिनों के बाद जब मन में निराशा के भाव आने लगते हैं, आलस पुनः आप पर हावी होना चाहता है! तो डॉक्टर की भविष्यवाणी को याद कर आप अपनी हताशा को पीछे धकेल देते हैं!

आपका ये संकल्प की इस prediction को मैं सही साबित नहीं होने दूंगा, आप को वापस अपने सेहत के रास्ते पर अग्रसर कर देता है!!

फिर आप कई साल बाद ऐसे ही अपने routine checkup के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं! डॉक्टर बड़ी गर्मजोशी और उमंग से कहता है, -क्या बात है! आपने तो अपना कायाकल्प ही कर लिया है! आप तो पहले से भी ज्यादा सेहतमंद और जवान हो गए हैं! आप मुस्कुरा कर डॉक्टर से हाथ मिलाते हैं और सीटी बजाते हुए क्लिनिक से बाहर आ जाते हैं! और ये कहानी बहुत अच्छे तरीके से बहुत लम्बी चलती है!!

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तो दोस्तों ,
कहानी कैसी लगी? वैसे ये कहानी है ही नहीं! हकीकत है! हम लोगों में से 90 से 95 % लोग पहले वाली सोच के होते हैं, है ना? केवल 5 या 10 % लोग ही दूसरे नजरिये वाले होते हैं! जो अपने पुरुषार्थ, मनोबल और मेहनत से भविष्यवाणी को भी बदल देते हैं! आपके मन की नकारात्मक सोच आपको समय से पहले डूबा भी सकती हैं और सकारात्मक सोच अनेकों ऊँचाइयों तक उठा भी सकती है! इसलिए जिंदगी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और तदुपरांत सार्थक प्रयत्न आपकी सफल, सेहत भरी जिंदगी और उज्जवल भविष्य के लिए अति आवश्यक है! है ना?

तो मन का कैसा नजरिया रखना चाहेंगे आप? आखिर ………..

जैसा नजरिया है आपका, वैसी जिंदगी है आपकी ……………

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चिंता या घबराहट।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ चिंता या घबराहट। ϒ

  • अगर इन्सान सुख-दुःख की चिंता से ऊपर उठ जाए, तो आसमान की ऊंचाई भी उसके पैरों तले आ जाय। -शेख सादी
  • कार्य की अधिकता मनुष्य को नहीं मारती, बल्कि चिंता मारती है। -स्वेट मार्डेन

TU NA HO NIRASH KABHI MAN SE

  • चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह।
    जिनको कछू न चाहिए, सोई साहंसाह ॥
    -कबीरदास
  • चिंता एक काली दिवार की भांति चारों ओर से घेर लेती है, जिसमें से निकलने की फिर कोई गली नहीं सूझती। -प्रेमचंद
  • चिंता रोग का मूल है। – प्रेमचंद
  • बिस्तर पर चिंताओं को ले जाना, पीठ पर गट्ठर बाँध कर सोना है। -हैली बर्टन
  • प्राणियों के लिए चिंता ही ज्वर है। -शंकराचार्य
  • चिंताएं, परेशानियां, दुःख और तकलीफें परिस्थितियों से लड़ने से नहीं दूर हो सकतीं, वे दूर होंगी अपनी अंदरूनी कमजोरी दूर करने से जिसके कारण ही वे सचमुच पैदा हुईं है। -स्वामी रामतीर्थ
  • चिंता करता हूँ मैं जितनी,
    उस अतीत की, उस सुख की,
    उतनी ही अनंत में बनती
    जातीं रेखाएं दुःख की। -जयशंकर प्रसाद

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51