मन का एंटी-वायरस। 

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ मन का एंटी-वायरस। ϒ

सम्पूर्ण मन की शक्तियों को जागृत कर –
उसे सही तरीके से उपयोग कर, जीवन में सच्चे आनंद खुशी व पवित्रता का अनुभव करें।

जैसे कंप्यूटर में एंटीवायरस सॉफ्टवेयर अपना काम निरंतर करता रहता है, भीतर की सफार्इ करता है और बाहर से अवांछित चीजों को कम्प्युटर में प्रवेश करने से रोकता है।

वैसे ही हमारे मन-मस्तिष्क में प्रभु भक्ति, आत्म-ज्ञान व् ध्यान और प्रभु सानिद्ध भी बुराइयों की सफार्इ करता है और बाहर से अवांछित बुराइयां और विकार के लिए प्रवेश निषेध कर देता है।

एक मंदिर है जहां साफ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। मैं रोजाना वहां मंदिर सेवकों को नियमित सफाई करते, पोछा लगाते देखता हूँ। निरंतर मंदिर प्रांगण में पौछा लगते रहने पर भी रोजाना पौछे का पानी काला एवं मैला हो जाता है, यानी मैल निकल ही आता है। मैनें कभी ऐसा नहीं देखा कि पोछे का पानी, पोछा लगने के बाद साफ रहा हो।

मैं वो दिन देखना चाहता हूँ जब पोछे के बाद पानी एकदम स्वच्छ दिखे (यानी कोई गंदगी नहीं निकले), पर यह संभव नहीं लगता।क्योंकि दिन भर मंदिर में दर्शनार्थी का, सामान-सामग्री का आना जाना लगा रहता है।

ऐसे ही हमारे मन में भी सभी प्रकार के संसारिक विचारों का निरंतर आना-जाना लगा रहता है और इससे गंदगी होता रहता है।

शुद्ध अवस्था(शुद्ध स्थिति) के मन को भी मैला होते देर नहीं लगता।

उदाहरण स्वरूप – आप देखें कि एक बच्चे की २-३ वर्ष की अवस्था में मन कितना शुद्ध और विकार रहित होता है, फिर हर बढ़ते वर्ष में अशुद्धि बढ़ती जाती है।

अपने से बड़ों को देखकर बच्चा झूठ बोलना सीखता है, अन्य बहुत सारी बुराइयां आती जाती रहती है।

अच्छार्इ को देखकर सिखने में और अच्छार्इ को अपने मन-मस्तिष्क में उतारने में बड़ा श्रम है पर बुराइयां बिना श्रम ही मन में उतर कर, चिपक जाते है।

अच्छाई को ग्रहण करना और बनाये रखना बड़ा कठिन है, पर बुराइयों को ग्रहण करना और अपनाये रखना बड़ा आसान है क्योंकि यह स्वत: होने वाली प्रक्रिया है, इसमें हमारे श्रम की आवश्यकता नहीं होती।

बुराइयां हमसे चिपके नहीं, इसकी सावधानी रखने में श्रम की जरूरत होती है, और जो बुराइयां हमारे मन-मस्तिष्क में वास कर रही हैं, उन्हें त्यागने में भी श्रम की जरूरत होती है।

इसलिए सबसे सरलतम उपाय है, सबसे सरलतम साधन है कि नित्य प्रभु भक्ति व ज्ञान-ध्यान के द्वारा प्रभु सानिद्ध में रहकर मन-मस्तिष्क को पोछते रहना, भक्ति- ज्ञान-ध्यान का पोछा लगाते हुए स्वच्छ रखना। प्रभु सानिद्ध की एक विलक्षण और अदभूत शक्ति है कि स्वत: ही हमारे मन-मस्तिष्क का शुद्धिकरण और सफार्इ करता रहता है।

बिलकुल वैसे ही – जैसे कंप्यूटर में एंटीवायरस सॉफ्टवेयर अपना काम निरंतर करता रहता है, भीतर की सफार्इ करता है और बाहर से अवांछित चीजों को कम्प्युटर में प्रवेश करने से रोकता है।

वैसे ही हमारे मन-मस्तिष्क में प्रभु भक्ति व ज्ञान-ध्यान एवं प्रभु सानिद्ध भी बुराइयों की सफार्इ करता है और बाहर से अवांछित बुराइयां और विकार के लिए प्रवेश निषेध कर देता है।

विश्व के किसी भी व्यक्ति व अन्य वस्तु में सामर्थ्य नहीं, किसी भी चीज में इतनी ताकत नहीं कि वह हमारे मन-मस्तिष्क को शुद्ध कर सके।
यह ताकत – या सामर्थ्य सिर्फ और सिर्फ प्रभु सानिद्ध में ही है।

संसार में रहकर ऐसा दिन कभी भी नहीं आएगा कि हमारा मन मैला ही न हो। संसार तो हमेशा गंदगी देगा और प्रभु सानिद्ध से ही उसकी सफार्इ संभव है।

अशुद्ध विचार, अवांछित र्इच्छाओं, वासनाओं व् विकारो को मन-मस्तिष्क से दूर रखने का एकमात्र और सरलतम उपाय है – प्रभु की सच्चे मन से प्रभु की भक्ति….व ज्ञान-ध्यान और साधना करना जिससे प्रभु का सानिध्य सदैव ही प्राप्त हो।

प्रभु की भक्ति….ज्ञान-ध्यान और साधना ही सर्व शक्तियों, सम्पूर्ण पवित्रता और सच्चे आत्मिक आनंद का स्त्रोत है।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

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ये कैसा प्यार।

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ϒ ये कैसा प्यार। ϒ

आज स्कूल, कालेजो में बहुत अच्छा प्यार देखने को मिल रहा है। लड़का-लड़की कॉलेज के पास खोके के दुकान में सिगरेट, दारू और न जाने कौन सी नशीली पदार्थ का सेवन करके अपना प्यार प्रदर्शित कर रहे है। कॉलेज के घास के मैदानों में चुम्बन का सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन।रोज गले य हाथ मिलाओ तो प्यार। बताने को बहुत कुछ है पर आगे बढ़ा तो शब्द कम पढ़ेंगे।

सारांश में कहूँ तो कुछ तत्व ने प्यार की परिभाषा को ही कलंकित करने का काम किया है। जो फूहड़पन, अभद्रता है उसे प्यार समझ बैठे है। ऐसे काफी प्रेमी जोड़े से जब मैंने सवाल किया कि क्या आप उससे शादी करेंगे तो जवाब हाँ, ना कुछ नही कह सकते का था। जिन्हें अपने प्यार पे ही भरोसा नही तो काहे का प्यार।

सिर्फ मानसिक-शारीरिक संतुष्टि और अकेलेपन मिटाने के लिए जिसको प्यार का नाम दिया जा रहा है उसको समाज में कुछ और ही कहते है। हिम्मत हो तो किसी सभ्य व्यक्ति से पूछ लीजिये। अच्छा जवाब मिलेगा।

आज प्यार व्हाट्स से शुरू होता है तो ब्लाक पर जाकर खत्म होता है। प्यार विश्वास और सम्मान है न कि अपना स्वार्थ सिद्ध न होने पर उठाये गये ऐसे कृत्य जो प्यार को शर्मसार और उस को करने से भयभीत कर दे। आज प्यार न मिलने पर कोई हत्या, बलात्कार, आत्महत्या और न जाने क्या क्या अपराध करने लगते है।

नशा, चोर सब गुनाहों को करने से पीछे नही हटते। मै समझता हूँ प्यार को परिभाषित नही कर सकते बस महसूस कर सकते है। प्यार होना कोई बुरी बात नही है और ये किसी भी व्यक्ति को हो सकता है जो दिलदार हो जो खुले दिल का हो। अरे जानवर को भी प्यार होता है तो इन्सान को न हो ये अपने आप में अजीब बात होगी। पर प्यार को निभाना और उसे खत्म करना या उसे मंजिल देना ये अपने हाथ में होता है।

इसीलिए अपने प्यार को या तो गति तभी दीजिये जब आपको लगे आपका प्यार सच्चा, विश्वसनीय है क्योंकि मुखौटे पहने व्यक्ति प्यार का ढोंग करने वाले आज काफी है जो अपने आप को मानसिक रूप से संतुष्ट करने के लिए भी ये गलतियाँ कर देते है! और कृपया एक बात जरुर याद रखिये! किसी लड़के और लड़की के चक्कर में अपने जीवन को दांव पे मत लगाना, क्योंकि आपके जीवन से करोड़ो लोगो की आशाये जुडी है और उनका आपके प्रति प्यार भी।

अगर आप ठुकराए गये है तो नाराज मत होइए। अपने अंदर कमी तलाशिये और उस कमी को खत्म कीजिये! न कि खुद को फलाना लड़के-लड़की द्वारा ठुकराए जाने पर खुद को दिन-हिन् समझिये।

एक चमकीले पत्थर को सब्जी वाला तोलने के लिए देखता है, तो एक व्यापारी उसे कागज पर रखने वाला मात्र एक पत्थर! और जब वही चमकीला पत्थर एक जेवरात की दुकान में पहुँचता है तो उसकी कीमत करोड़ो में हो जाती है।

कमी आप अपने अंदर तलाशने इसीलिए कह रहा हूँ क्योंकि उससे आप में सकारात्मक बदलाव आयेंगे जिससे आपका जीवन और निखरेगा और भविष्य संवरेगा। आप उस चमकिले पत्थर की तरह ही है जो शायद एक सब्जी वाले के पास था लेकिन उसकी असली कीमत जेवरात के दुकान पे ही उसको पता चली। सोचिये अगर वो पत्थर जेवरात की दुकान पे न गया होता तो क्या उसको अपनी कीमत पता चलती !! नही न ??

इसीलिए यदि आप धोखे या ठुकराए जाने का शिकार है तो निराश न होए और अकेला बिलकुल न रहे। दोस्तों के संग रहे, भाई-बहन के साथ रहे। अपने साथ जो हुआ उसको न सोचे और जो कार्य आपको सबसे ज्यादा भाता है वो करे। अपने परिवार को या किसी विश्वसनीय को सब कुछ बता दे और जी भर कर रो ले और अगले दिन से अपने जीवन को नये सिरे से शुरू करे।

ये मत भूले कि आप भी वो चमकिले पत्थर की तरह है। बस दृष्टिकोण का फर्क है कोई आपको किसी नजर से देखता है तो कोई किसी नजर से। आप ये संकल्प ले कि अतीत में जो हुआ उसे वर्तमान में कभी आने नही दोगे। एक हादसे की तरह इसे भूल जाये और जीवन में बहुत कुछ है जो आपको पाना है।

अपने जीवन को देखे कि आपके जीवन से कितने लोग जुड़े हुए है और कितने लोगो की आशाये है। प्यार दो व्यक्तियों के विचारधारा के मिलने का एक प्रतीक है। उस विचारधारा को आगे बढाये और अपने प्यार की लहरों से समाज के असहाय वर्गो की नौका पार कराये।

हमारा जीवन सिर्फ खाना-खाने, स्कूल, कॉलेज, नौकरी, मस्ती के लिए नही बल्कि सामाजिक विसंगतियो को खत्म करने ! और कई तरह के जिम्मेदारी की पूर्ति हेतु हुआ है। उसे समझिये और उस जिम्मेदारी को पूरा करने हेतु तत्पर रहिये ! ऐसे प्यार का त्याग करना सर्वदा उचित है जो आपके विचार-धारा के विपरीत, आपके सिद्धांतो के विपरीत है इसीलिए शारीरक प्यास को तिलांजलि देते हुए अपने जिम्मेदारी भरे जीवन के महत्व को समझे।

वैसे भी मकान बनने से ज्यादा समय महल बनने में लगता है इसीलिए धैर्य रखिये और सकारात्मक सोच रखिये। अगर आप प्यारे व्यक्ति है सच्चे व्यक्ति है और सबका भला सोचते है तो आपको प्यार समय आने पर अवश्य मिलेगा बस अतीत की घटनाओ का वर्तमान क्रियाकलापों पर किसी भी तरह प्रभाव न पड़ने दे।

क्योंकि जिस तरह प्यार और सम्मान किसी तारिक विशेष की मोहताज नही उसी प्रकार समय किसी व्यक्ति की मोहताज नहीं। समय सबको बराबर मिला है चाहे वो पप्पू या कजरी ही क्यों न हो।

© सारांश सागर जी – नोएडा, उत्तर प्रदेश ®

हम दिल से आभारी हैं सारांश सागर जी के प्रेरणादायक हिन्दी Article ये कैसा प्यार साझा करने के लिए। हम आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

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पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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क्या करें – क्या ना करें।

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* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

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In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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