रक्षाबंधन (भाई और बहन के पवित्र रिश्ते व सच्चे स्नेह का पर्व)।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ रक्षाबंधन (भाई और बहन के पवित्र रिश्ते व सच्चे स्नेह का पर्व)। ϒ

मेरे सभी प्रिय पाठकों काे रक्षाबंधन पर्व मुबारक हो।

kmsraj51-Rakashabandhan

रक्षाबंधन।

एक बहन की चिट्टी अपने प्यारे भैया के लिए।

“मेरे प्यारे भैया”

नहीं चाहिए मुझको हिस्सा माँ-बाबा की दौलत में।

चाहे वो कुछ भी लिख जाएँ भैया मेरे ! वसीयत में।

नहीं चाहिए मुझको झुमका, चूड़ी, पायल और कंगन।

नहीं चाहिए अपनेपन की कीमत पर बेगानापन।

मुझको नश्वर चीज़ों की दिल से कोई दरकार नहीं।

संबंधों की कीमत पर कोई सुविधा स्वीकार नहीं।

माँ के सारे गहने-कपड़े तुम भाभी को दे देना।

बाबूजी का जो कुछ है सब ख़ुशी – ख़ुशी तुम ले लेना।

चाहे पूरे वर्ष कोई भी चिट्ठी-पत्री मत लिखना।

मेरे स्नेह-निमंत्रण का भी चाहे मोल नहीं करना।

नहीं भेजना तोहफे मुझको चाहे तीज-त्योहारों पर।

पर थोडा-सा हक दे देना बाबुल के गलियारों पर।

रूपया पैसा कुछ ना चाहूँ, बोले मेरी राखी है।

आशीर्वाद मिले मैके से मुझको इतना ही काफी है।

तोड़े से भी ना टूटे जो ये ऐसा मन – बंधन है।

इस बंधन को सारी दुनिया कहती रक्षाबंधन है।

तुम भी इस कच्चे धागे का मान ज़रा – सा रख लेना।

कम से कम राखी के दिन बहना का रस्ता तक लेना।

ओ बहुत किस्मत वाले होते हैं जिनके पास बहन होती है।

मेरे प्रिय दोस्तों, रक्षाबंधन पर्व भाई और बहन के पवित्र रिश्ते व सच्चे स्नेह का पर्व हैं।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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हार्दिक शुभकामनाएं-रक्षाबंधन की

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बंधन स्नेह और विश्वास का 

मेरे सभी प्रिय पाठकों को रक्षाबंधन की  हार्दिक शुभकामनाएं॥

Raksha Bandhan –  best wishes to all my dear readers.

पवित्र रिश्ते को केवल धागे से न जोङो, हर दिन रक्षा बंधन समझो।

मूक दर्शक न बन मानव,  सब बेटी और बहनों की रक्षा का मन में प्रण हो। 

मानवता की रक्षा का संक्लप लिए रक्षाबंधन का ये पर्व समस्त सजीव जगत के लिए शुभ और सुरक्षित हो। 

           रक्षाबंधन की बहुत बहुत बधाई 

This post inspired byMrs. Anita Ji.

More details about Anita Ji,, please visit below link…..

Visit: http://roshansavera.blogspot.in/  

– आपका दोस्त –

कृष्ण मोहन सिंह51

 

नवरात्रि मंत्र-नवरात्रि पूजा विधि हिंदी में॥

नवरात्रि मंत्र-नवरात्रि पूजा विधि हिंदी में॥

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“मां दुर्गा के नौ रूप”

1) शैलपुत्री : शैल” का मतलब पहाड़ है,”बेटी पुत्री” का मतलब है, इन्हे पर्वत हिमवान राजा की बेटी, कहा जाता है। माँ शैलपुत्री माँ दुर्गा का पहला स्वरूप हैं, इनके दो हाथों में त्रिशूल और एक में कमल प्रदर्शित हैं। नवरात्र के पहली रात इनकी पूजा की जाती हैं।

2) ब्रह्मचारिणी : माँ ब्रह्मचारिणी माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं… यहाँ “तप” “ब्रह्मा का मतलब है” इस देवी की मूर्ति बहुत सुंदर हैं… यह प्यार और वफादारी समर्पित करती हैं। भ्रंचारिणी ज्ञान और ज्ञान का भंडार है। मोती उनके सबसे सुंदर गहने हैं।

3) चंद्रघण्टा : माँ दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम है। उसके माथे में एक चाँद आधा परिपत्र है। वह उज्ज्वल हैं, उनका रंग स्वर्ण हैं, उनके दस हाथ और तीन आखें है, उनके हाथ आठ हथियार प्रदर्शित करने के लिए है, जबकि शेष दो वरदान देने और रोकने के नुकसान के इशारों को प्रदर्शित हैं।

4) कूष्माण्डा : चौथी शक्ति का नाम हैं। उनके पास आठ हथियार, वह एक हथियार और एक माला पकड़े बाघ पर बैठे चमक उत्पन्न करती हैं। इनकी पूजा नवरात्र के चौथे दिन की जाती हैं।

5) स्कंद माता : दुर्गा की पाँचवी शक्ति का नाम हैं। वह एक शेर पर बैठी अपनी गौद में बेटा स्कंद रखती है। वह तीन आँखें और चार हाथ को प्रदर्शित करता है, दो हाथ, कमल मानती है जबकि अन्य दो हाथ प्रदर्शन बचाव और मुद्राएं देने, को समर्पित करतीं हैं।

6) कात्यायनी : भरपूर बाल और हाथ 4, 2 एक क्लीवर और एक मशाल पकड़े, जबकि शेष 2 “देने” और “रक्षा” की मुद्राएं हैं के साथ काले रंग की त्वचा (या नीले रंग)। उसका वाहन एक वफादार गधा है। अंधकार और अज्ञान का नाश। माँ कालरात्रि माँ दुर्गा का छठा स्वरूप हैं। यह अंधेरे को नष्ट करती हैं।

7) कालरात्रि : दुर्गा माँ की सातवी शक्ति का नाम हैं। भरपूर बाल और हाथ 4, 2 एक क्लीवर और एक मशाल पकड़े, जबकि शेष 2 “देने” और “रक्षा” की मुद्राएं हैं के साथ काले रंग की त्वचा (या नीले रंग). उसका वाहन एक वफादार गधा है।

8) महागौरी : माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। इनकी उपासना से भक्तों को सभी कल्मष धुल जाते हैं, पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट हो जाते हैं। वह एक शंख, चाँद और जैस्मीन के रूप में सफेद है। वह आठ साल की उम्र की है। चार हथियार और सभी साथ टैग की गईं शक्तीस के खूबसूरत रंग के साथ, वह अक्सर एक सफेद या हरे रंग की साड़ी में तैयार रहती हैं.. वह अपने पास एक ड्रम और एक त्रिशूल रखती है और अक्सर एक बैल की सवारी करती हैं।

9) सिद्धिदात्री : दुर्गा जी का सिद्धिदात्री अवतार सर्व सिद्धियों की दाता “माँ सिद्धिदात्री” देवी दुर्गा का नौवां व अंतिम स्वरुप हैं। नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन के साथ ही नवरात्रों का समापन होता है।


“नवरात्रि पूजा विधि”

=> मां दुर्गा की पहली स्वरूपा और शैलराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री के पूजा के साथ ही नवरात्रि पूजा आरम्भ हो जाती है। नवरात्र पूजन के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ इनकी ही पूजा और उपासना की जाती है। माता शैलपुत्री का वाहन वृषभ है, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प रहता है। नवरात्र के इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को ‘मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं और यहीं से उनकी योग साधना प्रारंभ होता है। नवरात्रि के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा-वंदना इस मंत्र द्वारा की जाती है…..

वंदे वाद्द्रिछतलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम |
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्‌ ||

=> माँ ब्राहमाचारिणी की पूजा नवरात्र के दूसरे दिन की जाती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी प्यार और वफ़ादारी का प्रतीक है। इनकी पूजा करने से व्यक्ति आलस्य, विराग छोड़ देता हैं और वह कर्तव्य के पथ से विचलित नहीं होता। माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से उसकी सफलता और जीत हमेशा और हर जगह होती हैं। माता पार्वती मेडिटेटेड तो गेट लॉर्ड शिवा आस हज़्बेंड आंड ड्यू तो तीस शी इस कॉल्ड ब्रह्मचारिणी। माता ब्रह्मचारिणी इस वर्षिप्ड आंड फास्ट इस ओब्ज़र्व्ड तो गेट हेर ब्लेससिंग्स। इस दिन माँ ब्रह्मचारिणी को चीनी का भोग लगाया जाता है। जिससे परिवार के सदस्यो की ऊमर बढ़ती हैं। नवरात्र के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा इस मंत्र द्वारा की जाती हैं…..

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू ।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ॥

=> मां दुर्गा की 9 शक्तियों की तीसरी स्वरूपा भगवती चंद्रघंटा की पूजा नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है। माता के माथे पर घंटे आकार का अर्धचन्द्र है, जिस कारण इन्हें चन्द्रघंटा कहा जाता है। इनका रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। माता का शरीर स्वर्ण के समान उज्जवल है। इनका वाहन सिंह है और इनके दस हाथ हैं जो की विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र से सुशोभित रहते हैं। सिंह पर सवार मां चंद्रघंटा का रूप युद्ध के लिए उद्धत दिखता है और उनके घंटे की प्रचंड ध्वनि… असुर और राक्षस काे भयभीत करते हैं। भगवती चंद्रघंटा की उपासना करने से उपासक आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त करता है और जो श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक दुर्गा सप्तसती का पाठ करता है, वह संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान को प्राप्त करता है। नवरात्र के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा-वंदना इस मंत्र के द्वारा की जाती है…..

पिण्डज प्रवरारुढ़ा चण्डकोपास्त्र कैर्युता |
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्र घंष्टेति विश्रुता ||

=> माँ कूष्माडा की अराधना नवरात्र के चौथे दिन की जाती हैं। मां का यह दिव्य स्वरूप हमारे भतीर के रोग, तमस, शोक, विकास, अज्ञान, आलस्य व दुर्भावना आदि को दूर करता है। आज के दिन मां कूष्माडा की आराधना भक्तों को जड़ से चेतन की ओर ले जाती है व्यक्ति को यश, बल, बुद्धि प्रदान करती है। मां सिंह पर सवार अष्टभुजाधारी, मस्तक पर रत्नजडि़त स्वर्ण जडि़त मुकुट पहने अपने भक्तों को आर्शीवाद देने प्रकट होती है। आज के दिन मां के कूष्माडा रूप की स्तुति ही भक्तों को ढेरों कष्टों से मुक्त कराती है। मां के इस रूप पर कुम्हड़े (कद्दू) की बलि देनी की परम्परा है जिससे व्यक्ति के भीतर बसे हिंसक जीवन का नाश होता है। भक्त अपनी मां की आराधना कर कठिन लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकता है। नवरात्र के चौथे दिन माता कूशमंदा की पूजा इस मंत्र द्वारा की जाती हैं…..

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥

=> स्कंद माँ की पूजा नवरात्रि के पाँचवे दिन पर की जाती हैं। स्कंदमाता कुमार कार्तिकाए की माता हैं। यह दिन योगियो और साधको के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन होता हैं। इस दिन भक्त का मन विसुद्धा काकरा तक पहुँच जाता है और उसमें रहता है। स्कंदमाता के रूप में देवी की पूजा करके, भक्त की सभी इच्छाएँ को पूरा हो जाता है, उसकी दुनिया खुशियों से भर जाती हैं। भगवान स्कंद की पूजा करना स्वतः अपने बच्चे की पूजा करने के रूप में साधक उसकी पूजा करने के लिए विशेष रूप से चौकस होना चाहिए। सूर्य देवता के इष्टदेव होने के नाते, वह एक असामान्य और उसके भक्त पर चमक रखती हैं। वह हमेशा एक अदृश्य दिव्य प्रभामंडल है। हमे पूरी ईमानदारी से स्कंदमाता की पूजा करनी चहिये। इस दिन माँ को केले का भोग लगाना चाहिए। माँ अपने भक्तो की सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं। स्कंद माँ की पूजा करने से सारी बीमारियों से मुक्ति मिलती हैं। नवरात्र के पाँचवे दिन स्कंद माता की पूजा इस मंत्र द्वारा की जाती हैं…..

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया ।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ॥

=> माँ कत्यायनी की पूजा नवरात्रि के छठे दिन पर की जाती हैं। मां कात्यायनी की पूजा से हम शक्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं जो हमारे दुश्मन के साथ लड़ाई के लिए मददगार है। नवरात्र के छठे दिन पर निम्न मंत्र का जाप करें …..

चन्द्रहासोज्वलकरा शार्दूलवरवाहना ।
कात्यायनी शुभं दघाद्देवी दानवघातिनी ॥

मां कात्यायनी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए योगियों और साधकों द्वारा इस दिन पर आज्ञा चक्र के लिए अभ्यास की तपस्या करते हैं। इस दिन माँ कत्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए। इस दिन हमे लाल और सफेद कपड़े पहनने चाहिए। माँ अपने भक्तो की सभी समस्याओ को हल करती हैं। देवी की पूजा करने से व्यक्ति खुद में ज्ञान की एक मजबूत भावना महसूस कर सकता हैं।

=> नवरात्र के सातवे दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती हैं। माँ कालरात्रि की पूजा दुर्गा पूजा का सातवें दिन तांत्रिकों के लिए अपने अनुष्ठान के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन है। वे तांत्रिक अनुष्ठानों के साथ आधी रात के बाद देवी कालरात्रि की पूजा करते हैं। इस दिन देवी की आँखे खोली रहती हैं। इस दिन ब्रह्मांड में हर सिद्धि के दरवाजे खुल जाते है। भक्त मंदिर में इकट्ठा होने लगते हैं और पूरी भक्ति और समर्पण के साथ पूजा करते है। इस दिन विशेष प्रसाद और अनुष्ठान के साथ आधी रात को देवी की पूजा की पूजा का प्रदर्शन देखा जा सकता हैं। इस दिन माँ कालरात्रि को शराब भी चड़ाई जाती हैं। सिद्ध योगी और साधकों जो शशास्त्रा चक्र पर इस दिन पर तपस्या अभ्यास करते हैं। कलश के साथ देवी के सभी ग्रहों और परिवार के सदस्यों के साथ देवी के सभी ग्रहों की पूजा की जाती हैं। उसके बाद एक जप, “याइया देवया ततमिंद जग्दत्मशकता निशेशदेवगंशक्तिसमुहमूरत्या, … भगवान शिव और ब्रह्मा की पूजा देवी की पूजा करने के बाद की जाती है। माँ कालरात्रि की पूजा करने से सभी दुखो का निवारण होता है। माँ कालरात्रि सदा अपने भक्तो का कल्याण करती हैं। माँ कालरात्रि की पूजा इस मंत्र द्वारा की जाती है…..

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता ।
लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी ॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा ।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी ॥

=> माँ महागौरी की पूजा नवरात्रि के आठवे दिन की जाती हैं। इनकी पूजा करने से भक्त के सारे पाप धूल जाते हैं। माँ की शक्ति अमोघ और तुरंत परिणाम देने वाली हैं। मां महागौरी की पूजा से अविवाहित लड़कियों को अच्छा पति मिलता हैं और विवाहित महिलाओं काे सुखी विवाहित जीवन के साथ धन्य हो जाती हैं। महागौरी शांत, शांतिपूर्ण और शांत बुद्धि में मौजूद है। वह भक्त के दिल में रहती हैं। भक्त को इस दिन लाल, केसर, पीला, सफेद कपड़े पहनने चाहिए। इस दिन पर नारियल का भोग माँ महागौरी को पेश किया जाता हैं… नारियल ब्राह्मण को भी दिया जाता है। इस दिन इस मंत्र का जाप करना चाहिए …..

श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः ।
महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा ॥

सदा सुख और शांति देती हैं महागौरी-

देवी महागौरी बच्चे के साथ निःसंतान जोड़ों की इच्छाओं को पूरा करती हैं। इनकी पूजा करने से सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता हैं।

=> नवरात्र के नौवे दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। देश के कई भागों में यह दिन महानवमी के रूप में मनाया जाता है। माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से माँ प्रत्येक आत्मा को शुद्ध बना देती हैं। लोग इस दिन पर लाल, सफेद रंग के पहन सकते हैं। इस दिन पूजन, अर्चन, हवन, आदि माताजी का प्रदर्शन किया जाता हैं। शंख, चक्र, गदा और कमल माँ सिद्धिदात्री के चार हाथों का प्रतीक है जो हमेशा से हमारी मदद करने के लिए उत्सुक हैं। माँ सिद्धिदात्री की कृपा के कारण मनुष्य की सभी भौतिकवादी इच्छाएँ गायब हो जाती हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन हमे इस मंत्र का जाप करना चाहिए …..

सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि ।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ॥


माँ शैलपुत्री मन्त्र

वंदे वांच्छितलाभायाचंद्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढांशूलधरांशैलपुत्रीयशस्विनीम्॥
पूणेंदुनिभांगौरी मूलाधार स्थितांप्रथम दुर्गा त्रिनेत्रा।
पटांबरपरिधानांरत्नकिरीटांनानालंकारभूषिता॥
प्रफुल्ल वदनांपल्लवाधरांकांतकपोलांतुंग कुचाम्।
कमनीयांलावण्यांस्मेरमुखीक्षीणमध्यांनितंबनीम्॥


माँ ब्रह्मचारिणी मन्त्र

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू ।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ॥

ॐ नमो भगवती ब्रह्मचारणी सर्वजग मोहिनी,
सर्वकार्य करनी,
मम निकट संकट हरणी,
मम मनोरथ पूर्णी,
मम चिंता निवारानी,
ॐ भगवती ब्रह्मचारणी नमो स्वाहा!!


माँ चंद्रघंटा मन्त्र

पिण्डज प्रवरारुढ़ा चण्डकोपास्त्र कैर्युता |
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्र घंष्टेति विश्रुता ||

रहस्यं श्रणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।
श्री चन्द्रघण्टास्य कवचं सर्वसिद्धि दायकम्॥
बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोद्धारं बिना होमं।
स्नान शौचादिकं नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिकम॥
कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च।
न दातव्यं न दातव्यं न दातव्यं कदाचितम्॥

आपद्धद्धयी त्वंहि आधा शक्ति: शुभा पराम्।
अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यीहम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्ट मंत्र स्वरूपणीम्।
धनदात्री आनंददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायनीम्।
सौभाग्यारोग्य दायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्


माँ कूष्माण्डा मन्त्र

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥

हसरै मे शिर: पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्।
हसलकरीं नेत्रथ, हसरौश्च ललाटकम्॥
कौमारी पातु सर्वगात्रे वाराही उत्तरे तथा।
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम।
दिग्दिध सर्वत्रैव कूं बीजं सर्वदावतु॥

दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्।
जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुंदरी त्वंहि दु:ख शोक निवारिणाम्।
परमानंदमयी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥


स्कन्दमाता मन्त्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया ।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ॥

माँ कत्यायनी मन्त्र

चन्द्रहासोज्वलकरा शार्दूलवरवाहना ।
कात्यायनी शुभं दघाद्देवी दानवघातिनी ॥


माँ कालरात्रि मन्त्र

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता ।
लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी ॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा ।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी ॥


माँ महगौरी मन्त्र

श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः ।
महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा ॥

माँ सिद्धिदात्री मन्त्र

सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि ।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ॥

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व। ϒ

आज 31 मार्च, 2014 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ) से संवत्सर 2071 से नए संवत्सर का उदय होगा। इस नए संवत्सर का नाम `प्लवंग’ है।

समय भागता हुआ वह कालपुरुष है, जिसके सिर के पीछे बाल नहीं हैं। इस दृष्टांत का तात्पर्य यह है कि समय को पकड़ पाना संभव नहीं है क्योंकि गतिमान होने के साथ-साथ वह अनंत और असीम है। किंतु हमारे त्रिकालदर्शी ऋषियों ने समय को मापने का भरपूर प्रयत्न किया था। उन्होंने समय की सर्वाधिक सूक्ष्म इकाई (त्रुटि) से लेकर महायुग, कल्प, ब्राह्म वर्ष आदि वृहद इकाईयों में समय की गणना करके काल का निर्धारण किया है। लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व भारतीय ज्योतिषियों ने ऋषि परंपरा के अनुरूप कालगणना की वैज्ञानिक पद्धति का विकास कर लिया था जो आज विश्व के वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणाप्रद है।

चैत्रे मासि जगद् ब्रह्म ससर्ज प्रथमे अहनि, शुक्ल पक्षे समग्रेतु तु सदा सूर्योदयो सति। ब्रह्म पुराण में वर्णित इस श्लोक के अनुसार चैत्र मास के प्रथम सूर्योदय पर ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसी दिन से विक्रमी संवत की शुरुआत होती है। आज भले ही ग्रेगेरियन कैलेंडर के अनुसार एक जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष ज्यादा चर्चित हो, लेकिन इससे कहीं पहले से अस्तित्व में आया हिंदू विक्रमी संवत आज भी धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक कार्यों में तिथि व काल की गणना का आधार बना हुआ है। अपनी सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को याद करते हुए एक नजर नवसंवत्सर पर-

  • खूबी ⇒
    विक्रमी संवत का संबंध किसी भी धर्म से न होकर सारे विश्व की प्रकृति, खगोल सिद्घांत और ब्रह्मांड के ग्रहों एवं नक्षत्रों से है। इसलिए भारतीय काल गणना पंथ निरपेक्ष होने के साथ सृष्टि की रचना और राष्टर की गौरवशाली परम्पराओं को दर्शाती है। यही नहीं, ब्रह्मांड के सबसे पुरातन ग्रंथ वेदों में भी इसका वर्णन है। नवसंवत यानी संवत्सरों का वर्णन यजुर्वेद के 27वें एवं 30वें अध्याय के मंत्र क्रमांक क्रमश: 45 व 15 मिनट में विस्तार से दिया गया है। विश्व में सौर मंडल के ग्रहों एवं नक्षत्रों के चाल, उनकी निरंतर बदलती स्थिति पर भी हमारे दिन, महीने, साल और उनके सूक्ष्मतम भाग आधारित होते हैं।
  • विक्रमी संवत ⇒
    ग्रेगेरियन कैलेंडर से अलग देश में कई संवत प्रचलित है। इसमें विक्रम संवत, शक संवत, बौद्घ एवं जैन संवत और तेलुगू संवत प्रमुख है। इन हर एक संवत का अपना एक नया साल होता है। देश में सर्वाधिक प्रचलित विक्रम और शक संवत है।
  • शुरुआत ⇒
    विक्रम संवत को सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को पराजित करने के उपलक्ष्य में 57 ईसा पूर्व शुरू किया था। विक्रम संवत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है। भारतीय पंचांग और काल निर्धारण का आधार विक्रम संवत है।
  • अपना ही श्रेष्ठ ⇒
    विक्रम संवत के वैज्ञानिक आधार के कारण ही पश्चिमी देशों की संस्कृति के अंधानुकरण के बावजूद आज भी हम किसी भी शुभ लग्न चाहे वह बच्चे के जन्म की बात हो, नामकरण की बात हो, गृह प्रवेश या व्यापार करने की बात हो, सभी में हम पंडित के पास जाकर शुभ मुहूर्त पूछते है।
  • राष्ट्रीय कैलेंडर ⇒
    आजादी के बाद नवंबर, 1952 में वैज्ञानिक और औद्योगिक परिषद के द्वारा पंचाग सुधार समिति की स्थापना की गई। समिति ने 1955 में सौंपी अपनी रिपोर्ट में विक्रमी संवत को भी स्वीकार करने की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर ग्रेगेरियत कैलेंडर को ही सरकारी कामकाज हेतु उपयुक्त मानकर 22 मार्च, 1957 को इसे राष्टï्रीय कैलेंडर के रूप में स्वीकार किया गया।
  • चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व ⇒
    – चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा से एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 113 साल पहले इसी दिन को ब्रह्मा जी ने सृष्टि का सृजन किया था।
    – सम्राट विक्रमादित्य ने 2071 साल पहले इसी दिन राज्य स्थापित कर विक्रम संवत की शुरुआत की।
    – लंका में राक्षसों का संहार कर अयोध्या लौटे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का राज्याभिषेक इसी दिन किया गया।
    – शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात नवरात्र स्थापना का पहला दिन यही है। प्रभु राम के जन्मदिन रामनवमी से पूर्व नौ दिन उत्सव मनाने का प्रथम दिन।
    – शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ दिवस। विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु इसी दिन का चयन किया।
    – समाज को अच्छे मार्ग पर ले जाने के लिए स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की।
    – सिख परंपरा के द्वितीय गुरु अंगददेव का जन्म दिवस।
    – सिंध प्रांत के प्रसिद्घ समाज रक्षक वरुणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रकट हुए।
    – युगाब्द संवत्सर का प्रथम दिन, 5116 वर्ष पूर्व युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ।
    – इसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार का जन्मदिवस भी है।
  • प्राकृतिक महत्व ⇒
    – वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है, जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चहुं ओर पुष्पों की सुगंध से भरी होती है।
    – फसल पकने का प्रारंभ यानी किसान की मेहनत का फल मिलने का समय भी यही होता है।
    – नक्षत्र शुभ स्थिति में होते है। यानी किसी भी कार्य प्रारंभ करने के लिए शुभ मुहूर्त होता है।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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नव उल्लास का त्योहार है, होली !!

kmsraj51 की कलम से …..
holy
नव उल्लास का त्योहार है, होली

भारत के सभी त्योहारों की एक विशेषता है कि सभी पर्व समाज को महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। होलिका दहन का पर्व भी सामाजिक बुराईंयों के विनाष का प्रतीक है। होलीकोत्सव को वैदिक काल में ‘नव सस्येष्टि यज्ञ’ कहा जाता था, उस समय खेत के अध पके अन्न को यज्ञ में दान करके प्रसाद लेने का विधान प्रचलित था। अन्न को होला कहते हैं, इसी से इसका नाम होलिकोत्सव पङा। होली एक सामाजिक पर्व है जिसे समाज के सभी लोग साथ मिलकर मनाते हैं। ये त्योहार, समाज में समरसता, सौजन्यता, समानता और सामाजिक विकास का संदेश देता है।

Main jithe jithe javan tera chehra dikhda e
EH tera kasoor nahin ajj har chera rangya hoya e te bhoot lagda e

Happy holi

kms-holi

भारत वर्ष में होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन शाम को होलीका जलाकर उसकी पूजा की जाती है एवं अगले दिन सुबह रंगो से होली खेली जाती है। उत्सव के ये दोनो ही दिन प्रेरणा, ऊर्जा तथा उत्साह के प्रतीक हैं। रंगों के इस त्योहार में लोग एक दूसरे को रंग एवं गुलाल लगाते हैं और गले मिलकर बधाई देते हैं। रंगो के इस त्योहार में व्यक्ति विशेष की पहचान नही रहती, सभी लोग भाषा, धर्म एवं जाति से परे एक ही रंग यानि की इसानियत के रंग में रंग जाते हैं। परन्तु वर्तमान समय में कुछ विकृत मानसिकता वाले लोग बदला लेने की भावना से रंगो में कैमिकल मिला देते हैं, जो त्वचा के लिए हानिकारक होता है। पैसे कमाने की होङ में कुछ लोग होली की मिठाइयों में कुछ ऐसी चीजों की मिलावट कर देते हैं जिससे इंसान के जीवन को भी खतरा हो जाता है। इस कारण आज-कल कई लोग स्वंय को घरों में ही कैद कर लेते हैं और होली के उल्लास से दूर हो जाते हैं।

मित्रों, होली तो अनेका में एकता का प्रतीक है। इसे दुषित भावों से नही मनाना चाहिए बल्कि इस दिन सभी बैर-भाव भूलकर दोस्ती के रंग में रंग जाना चाहिए। होली तो अपनी खुशियों को व्यक्त करने का माध्यम है। होली के इस सामाजिक पर्व पर आत्मियता का रंग इस तरह चढे कि नीरस दिलों में भी उल्लास का सृजन हो सके और सब मिलकर बोलें Happy Holi.

नोट-
Post inspired by रौशन सवेरा. I am grateful to Mrs. Anita Sharma ji & रौशन सवेरा (http://roshansavera.blogspot.in/) Thanks a lot !!

Anita Sharma
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MERRY CHRISTMAS ALL OF HUMANITY ~ क्रिसमस की हार्दिक बधाई आप सभी को !!


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