कभी कुछ मिल नही पाता …..

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMS

कभी कुछ मिल नही पाता …..

kmsraj51-5051

कभी कुछ मिल नही पाता 

उनकी दोस्ती को छूकर पत्थर भी हो जाता था सोना…..

उन दोनों के प्यार से महकता था कोना कोना

फिर वक्त की दीवारों में…..

एक ऐसा दरार आया

जो दोस्ती जागती थी रात भर…..

अब टहल कर kmsraj51, सो जाती है छत पर

कोई नही जानता, कि किसकी थी खता…..

पर वो लड़की, रातों को पुकारकर कहती है सदा

मैं तेरी हूँ बस kmsraj51, और रहूंगी सदा…..

Note::-

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सच्चें मन से अगर कुछ करने की ठान लाे, ताे आपकाे सभी काम में सफलता मिल जाती हैं।

जीवन में जाे भी काम कराें पुरे मन से कराें, ताे सफलता आपकाे जरूर मिलेगी।

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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मुझे तेरी कमी महसूस होती है …..

 

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMS

अधूरी ज़िन्दगी महसूस होती है….. मुझे तेरी कमी महसूस होती है

kmsraj51-5051

अधूरी ज़िन्दगी महसूस होती है…..

मुझे तेरी कमी महसूस होती है…..

तुने मुझे देखा, मुझे सोचा, फिर तुम मुझे भूले

मुझे ये बात भी आज महसूस होती है…..

हमेशा साथ रहने की क़सम खाई थी कभी तुमने, (याद है )

क़सम तेरी आज kmsraj51 को,बड़ी महसूस होती है…..

बदन तेरा था, उसमें जान मेरी थी,

तुझे क्या ये कमी, कभी महसूस होती है…..

‘kmsraj51’ उसको बहुत दिन से नहीं देखा तुने

इन आँखों में नमी बस, मुझे आज महसूस होती है…..

Note::-

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सच्चें मन से अगर कुछ करने की ठान लाे, ताे आपकाे सभी काम में सफलता मिल जाती हैं।

जीवन में जाे भी काम कराें पुरे मन से कराें, ताे सफलता आपकाे जरूर मिलेगी।

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह …..

:- गहराई से सोचना प्रत्येक शब्द 

मेरे(kmsraj51) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

हमेशा मन को शांत रखना …..

दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

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आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

APT-KMSRAJ51-CYMT

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥”

 ~KMSRAJ51

 

 

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मोगरा फूलों के आयुर्वेदिक लाभ।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ मोगरा फूलों के आयुर्वेदिक लाभ। ϒ

 

मोगरा –

सूरज की धूप प्रखर होते ही सूखे से मोगरे के पौधे में नई कोंपले आने लगती है और आने लगती है मोती सी शुभ्र कलियाँ, फिर वे खिल कर अपनी सुन्दर खुशबु बिखर देते है। जैसे-जैसे गर्मी बढती है और हमें परेशान करने लगती है इसकी खुशबू हमें तरोताजा कर देती है। अपनी सुन्दरता के साथ-साथ मोगरा बहुत गुणकारी भी है।

  • इसका इत्र कान के दर्द में प्रयोग किया जाता है।
  • मोगरा कोढ़, मुंह और आँख के रोगों में लाभ देता है।
  • मोगरे का उपयोग एरोमा थेरेपी में किया जाता है। इसकी खुशबू शान्ति देती है और उत्साह से भरती है।
  • मोगरे की चाय बुखार, इन्फेक्शंस और मूत्र रोगों में लाभकारी होती है।
  • मोगरे वाली चाय रोज़ पीने से केंसर से बचाव होता है। इसमें मोगरे के फूलों और कलियों का उपयोग होता है।
  • मोगरे की ४ पत्तियों को पीसकर एक कप पानी में मिला दे। इसमें मिश्री मिला कर दिन में ४ बार पिने से दस्त में लाभ होता है।
  • मोगरे के पत्तों को पीसकर जहां भी दाद, खुजली और फोड़े – फुंसियां हो वहां लगाने से लाभ होता है।
  • बच्चों के लीवर बढ़ने में मोगरे की पत्तियों का ४-५ बूँद रस शहद के साथ देने से लाभ होता है।
  • कोई घाव ठीक ना हो रहा हो तो बेल वाले मोगरे के पत्तों को पीस कर लगाने से ठीक हो जाता है।
  • इसकी जड़ का काढा पीने से अनियमित मासिक ठीक होता है।
  • इसके दो पत्तों का काला नमक लगा कर सेवन करने से पेट की गैस दूर होती है।
  • इसके फूलों के उपयोग से से पेट के कीड़ों, पीलिया, त्वचा रोग, कंजक्टिवाईटिस, आदि में लाभ होता है।

Post Inspired by : Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj

http://patanjaliayurved.org/

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

 

“गृहस्थी का आधार सिर्फ धन या वासना ना रहे”

kmsraj51 की कलम से …..

anniversary-1x


“गृहस्थी का आधार सिर्फ धन या वासना ना रहे”


SOLUTION

समाज या देश कोई भी हो, अक्सर लोगों का वैवाहिक जीवन दो ही चीजों पर टिक जाता है अर्थ और काम। या तो रिश्ते को अर्थ की भूख ढंक लेती है या पति-पत्नी वासना की चादर ओढ़ लेते हैं। दोनों ही परिस्थितियों में गृहस्थी केवल एक समझौता हो जाती है। दाम्पत्य एक दिव्य संबंध होता है, जो सीधे परमात्मा से जोड़ता है। अपनी गृहस्थी को मंदिर बनाइए। इसमें जैसे ही परमात्मा का प्रवेश होगा, ये सांसारिकता से ऊपर उठ जाएगी।
विवाह केवल शारीरिक आवश्यकता या वंश वृद्धि के लिए नहीं होता। भागवत के प्रसंग में चलिए। जहां सृष्टि का निर्माण हुआ। पहले पुरुष मनु और पहली स्त्री शतरूपा का जन्म हुआ। उन पर ही मानव वंश की वृद्धि का भार भी था लेकिन उन्होंने कभी अपने रिश्ते का आधार वासना को नहीं बनाया। उन्होंने संतान उत्पत्ति को भी परमात्मा को समर्पित किया। घोर तपस्या की। ब्रह्मा को प्रसन्न किया। वरदान मांगा देव तुल्य संतानों की उत्पत्ति का।
मनु और शतरूपा ने ही सारे मानव और देव वंश को आगे बढ़ाया लेकिन उनके संबंध में न तो अर्थ था और ना ही कभी काम आया। दोनों ही भाव उनसे दूर रहे। दोनों ने अपने दाम्पत्य में कुछ कड़े नियम तय किए। जैसे संभोग सिर्फ संतान उत्पत्ति का साधन रहे, ना कि वो पूरे रिश्ते का आधार बने। देव पूजा नियमित हो, जो भी संतान उत्पन्न हो उसमें उच्च संस्कारों का संचार किया जाए। इसलिए मनु को आदि पुरुष माना गया है। जिन्होंने समाज को पूरी व्यवस्था दी।

हम भी गृहस्थी में रहें तो पति-पत्नी दोनों अपने लिए कुछ नियम तय करें। जिसमें परिवार, संतान, समाज और परमात्मा सभी के लिए कुछ सकारात्मक और रचनात्मक हो। तभी दाम्पत्य सफल भी होगा।

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परिवार वह है जो सिर्फ खुद के बारे में ही ना सोचे !!


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“परिवार वह है जो सिर्फ खुद के बारे में ही ना सोचे”

mom

रामचरित मानस के एक प्रसंग में चलते हैं। रावण का वध करके राम अयोध्या लौटे। भरत ने उन्हें राजकाज समर्पित किया। एक दिन राम एक पेड़ के नीचे बैठकर अपने तीनों भाई भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जीवन में देश, समाज और परिवार का महत्व समझा रहे हैं।
राम अपने भाइयों को समझा रहे हैं कि समाज और राष्ट्र का हित सबसे बड़ा है। हर परिवार को उसके बारे में सोचना चाहिए। जब तक हम दूसरे की पीड़ा और व्यथा नहीं समझेंगे, राष्ट्र का विकास संभव नहीं है।
राम कहते हैं – परहित सरिस धरम नहीं भाई। परपीड़ा सम नहीं अधमाई।।
यानी दूसरों के हित और सुख से बढ़कर कोई धर्म नहीं है और दूसरों को पीड़ा देने से बड़ा कोई पाप नहीं।
राम ने अपने परिवार में जो संस्कार और विचारों की नींव रखी वे विचार और संस्कार आज हमारे परिवारों में भी आवश्यक हैं। हर परिवार को केवल खुद के लिए ही नहीं, दूसरों के लिए, समाज और राष्ट्र के लिए भी सोचना चाहिए।
इंसानों के प्रेमपूर्ण मिलन से परिवार बनता है और परिवारों के व्यवस्थित समूह को ही समाज कहते हैं। यह तो जाहिर सी बात है कि श्रेष्ठ समाज ही किसी विकसित और प्रगतिशील देश का आधार बनता है। लोगों की जनसंख्या या बसावट को ही समाज नहीं कहते, वह तो समाज कम और भीड़ अधिक है।
वास्तव में समाज उस मानव समुदाय को कहते हैं जिसके सारे परिवार और सदस्य एक-दूसरे के साथ इस तरह से मिल-जुल कर रहते हैं कि सभी के विकास में सहयोगी बनते हैं। इंसानी जिंदगी का जो अंतिम मकसद है उसे पाने या उस तक पहुंचने में समाज सहायक हो सकता है। यदि समाज मानव जीवन के असली और सबसे बड़े मकसद को पाने में सहायक नहीं हो सकता तो उस समाज को सफल नहीं कहा जा सकता।

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KRISHNA MOHAN SINGH
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