कभी कुछ मिल नही पाता …..

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMS

कभी कुछ मिल नही पाता …..

kmsraj51-5051

कभी कुछ मिल नही पाता 

उनकी दोस्ती को छूकर पत्थर भी हो जाता था सोना…..

उन दोनों के प्यार से महकता था कोना कोना

फिर वक्त की दीवारों में…..

एक ऐसा दरार आया

जो दोस्ती जागती थी रात भर…..

अब टहल कर kmsraj51, सो जाती है छत पर

कोई नही जानता, कि किसकी थी खता…..

पर वो लड़की, रातों को पुकारकर कहती है सदा

मैं तेरी हूँ बस kmsraj51, और रहूंगी सदा…..

Note::-

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सच्चें मन से अगर कुछ करने की ठान लाे, ताे आपकाे सभी काम में सफलता मिल जाती हैं।

जीवन में जाे भी काम कराें पुरे मन से कराें, ताे सफलता आपकाे जरूर मिलेगी।

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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मुझे तेरी कमी महसूस होती है …..

 

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMS

अधूरी ज़िन्दगी महसूस होती है….. मुझे तेरी कमी महसूस होती है

kmsraj51-5051

अधूरी ज़िन्दगी महसूस होती है…..

मुझे तेरी कमी महसूस होती है…..

तुने मुझे देखा, मुझे सोचा, फिर तुम मुझे भूले

मुझे ये बात भी आज महसूस होती है…..

हमेशा साथ रहने की क़सम खाई थी कभी तुमने, (याद है )

क़सम तेरी आज kmsraj51 को,बड़ी महसूस होती है…..

बदन तेरा था, उसमें जान मेरी थी,

तुझे क्या ये कमी, कभी महसूस होती है…..

‘kmsraj51’ उसको बहुत दिन से नहीं देखा तुने

इन आँखों में नमी बस, मुझे आज महसूस होती है…..

Note::-

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सच्चें मन से अगर कुछ करने की ठान लाे, ताे आपकाे सभी काम में सफलता मिल जाती हैं।

जीवन में जाे भी काम कराें पुरे मन से कराें, ताे सफलता आपकाे जरूर मिलेगी।

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह …..

:- गहराई से सोचना प्रत्येक शब्द 

मेरे(kmsraj51) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

हमेशा मन को शांत रखना …..

दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

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आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
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कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

APT-KMSRAJ51-CYMT

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥”

 ~KMSRAJ51

 

 

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मोगरा फूलों के आयुर्वेदिक लाभ।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ मोगरा फूलों के आयुर्वेदिक लाभ। ϒ

 

मोगरा –

सूरज की धूप प्रखर होते ही सूखे से मोगरे के पौधे में नई कोंपले आने लगती है और आने लगती है मोती सी शुभ्र कलियाँ, फिर वे खिल कर अपनी सुन्दर खुशबु बिखर देते है। जैसे-जैसे गर्मी बढती है और हमें परेशान करने लगती है इसकी खुशबू हमें तरोताजा कर देती है। अपनी सुन्दरता के साथ-साथ मोगरा बहुत गुणकारी भी है।

  • इसका इत्र कान के दर्द में प्रयोग किया जाता है।
  • मोगरा कोढ़, मुंह और आँख के रोगों में लाभ देता है।
  • मोगरे का उपयोग एरोमा थेरेपी में किया जाता है। इसकी खुशबू शान्ति देती है और उत्साह से भरती है।
  • मोगरे की चाय बुखार, इन्फेक्शंस और मूत्र रोगों में लाभकारी होती है।
  • मोगरे वाली चाय रोज़ पीने से केंसर से बचाव होता है। इसमें मोगरे के फूलों और कलियों का उपयोग होता है।
  • मोगरे की ४ पत्तियों को पीसकर एक कप पानी में मिला दे। इसमें मिश्री मिला कर दिन में ४ बार पिने से दस्त में लाभ होता है।
  • मोगरे के पत्तों को पीसकर जहां भी दाद, खुजली और फोड़े – फुंसियां हो वहां लगाने से लाभ होता है।
  • बच्चों के लीवर बढ़ने में मोगरे की पत्तियों का ४-५ बूँद रस शहद के साथ देने से लाभ होता है।
  • कोई घाव ठीक ना हो रहा हो तो बेल वाले मोगरे के पत्तों को पीस कर लगाने से ठीक हो जाता है।
  • इसकी जड़ का काढा पीने से अनियमित मासिक ठीक होता है।
  • इसके दो पत्तों का काला नमक लगा कर सेवन करने से पेट की गैस दूर होती है।
  • इसके फूलों के उपयोग से से पेट के कीड़ों, पीलिया, त्वचा रोग, कंजक्टिवाईटिस, आदि में लाभ होता है।

Post Inspired by : Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj

http://patanjaliayurved.org/

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

 

“गृहस्थी का आधार सिर्फ धन या वासना ना रहे”

kmsraj51 की कलम से …..

anniversary-1x


“गृहस्थी का आधार सिर्फ धन या वासना ना रहे”


SOLUTION

समाज या देश कोई भी हो, अक्सर लोगों का वैवाहिक जीवन दो ही चीजों पर टिक जाता है अर्थ और काम। या तो रिश्ते को अर्थ की भूख ढंक लेती है या पति-पत्नी वासना की चादर ओढ़ लेते हैं। दोनों ही परिस्थितियों में गृहस्थी केवल एक समझौता हो जाती है। दाम्पत्य एक दिव्य संबंध होता है, जो सीधे परमात्मा से जोड़ता है। अपनी गृहस्थी को मंदिर बनाइए। इसमें जैसे ही परमात्मा का प्रवेश होगा, ये सांसारिकता से ऊपर उठ जाएगी।
विवाह केवल शारीरिक आवश्यकता या वंश वृद्धि के लिए नहीं होता। भागवत के प्रसंग में चलिए। जहां सृष्टि का निर्माण हुआ। पहले पुरुष मनु और पहली स्त्री शतरूपा का जन्म हुआ। उन पर ही मानव वंश की वृद्धि का भार भी था लेकिन उन्होंने कभी अपने रिश्ते का आधार वासना को नहीं बनाया। उन्होंने संतान उत्पत्ति को भी परमात्मा को समर्पित किया। घोर तपस्या की। ब्रह्मा को प्रसन्न किया। वरदान मांगा देव तुल्य संतानों की उत्पत्ति का।
मनु और शतरूपा ने ही सारे मानव और देव वंश को आगे बढ़ाया लेकिन उनके संबंध में न तो अर्थ था और ना ही कभी काम आया। दोनों ही भाव उनसे दूर रहे। दोनों ने अपने दाम्पत्य में कुछ कड़े नियम तय किए। जैसे संभोग सिर्फ संतान उत्पत्ति का साधन रहे, ना कि वो पूरे रिश्ते का आधार बने। देव पूजा नियमित हो, जो भी संतान उत्पन्न हो उसमें उच्च संस्कारों का संचार किया जाए। इसलिए मनु को आदि पुरुष माना गया है। जिन्होंने समाज को पूरी व्यवस्था दी।

हम भी गृहस्थी में रहें तो पति-पत्नी दोनों अपने लिए कुछ नियम तय करें। जिसमें परिवार, संतान, समाज और परमात्मा सभी के लिए कुछ सकारात्मक और रचनात्मक हो। तभी दाम्पत्य सफल भी होगा।

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परिवार वह है जो सिर्फ खुद के बारे में ही ना सोचे !!


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“परिवार वह है जो सिर्फ खुद के बारे में ही ना सोचे”

mom

रामचरित मानस के एक प्रसंग में चलते हैं। रावण का वध करके राम अयोध्या लौटे। भरत ने उन्हें राजकाज समर्पित किया। एक दिन राम एक पेड़ के नीचे बैठकर अपने तीनों भाई भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जीवन में देश, समाज और परिवार का महत्व समझा रहे हैं।
राम अपने भाइयों को समझा रहे हैं कि समाज और राष्ट्र का हित सबसे बड़ा है। हर परिवार को उसके बारे में सोचना चाहिए। जब तक हम दूसरे की पीड़ा और व्यथा नहीं समझेंगे, राष्ट्र का विकास संभव नहीं है।
राम कहते हैं – परहित सरिस धरम नहीं भाई। परपीड़ा सम नहीं अधमाई।।
यानी दूसरों के हित और सुख से बढ़कर कोई धर्म नहीं है और दूसरों को पीड़ा देने से बड़ा कोई पाप नहीं।
राम ने अपने परिवार में जो संस्कार और विचारों की नींव रखी वे विचार और संस्कार आज हमारे परिवारों में भी आवश्यक हैं। हर परिवार को केवल खुद के लिए ही नहीं, दूसरों के लिए, समाज और राष्ट्र के लिए भी सोचना चाहिए।
इंसानों के प्रेमपूर्ण मिलन से परिवार बनता है और परिवारों के व्यवस्थित समूह को ही समाज कहते हैं। यह तो जाहिर सी बात है कि श्रेष्ठ समाज ही किसी विकसित और प्रगतिशील देश का आधार बनता है। लोगों की जनसंख्या या बसावट को ही समाज नहीं कहते, वह तो समाज कम और भीड़ अधिक है।
वास्तव में समाज उस मानव समुदाय को कहते हैं जिसके सारे परिवार और सदस्य एक-दूसरे के साथ इस तरह से मिल-जुल कर रहते हैं कि सभी के विकास में सहयोगी बनते हैं। इंसानी जिंदगी का जो अंतिम मकसद है उसे पाने या उस तक पहुंचने में समाज सहायक हो सकता है। यदि समाज मानव जीवन के असली और सबसे बड़े मकसद को पाने में सहायक नहीं हो सकता तो उस समाज को सफल नहीं कहा जा सकता।

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’पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो !!


Happy Anniversary!
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’पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो

अप्रैल माह की सातवीं और अंतिम रचना एक गीत है जिसके रचनाकार निशीथ द्विवेदी की यह हिंद-युग्म पर पहली दस्तक है। अक्टूबर 1979 मे जन्मे निशीथ शाजापुर (म.प्र) से तअल्लुक रखते हैं। निशीथ ने रासायनिक अभियांत्रिकी मे आइ आइ टी रुड़की से बी टेक और आइ आइ टी दिल्ली से एम टेक की उपाधि हासिल की है। कविताकर्म मे रुचि रखने वाले निशीथ सम्प्रति आयुध निर्माणी भंडारा मे कार्यरत हैं।
हम यहाँ माँ विषयक हृदयस्पर्शी कविताएं पहले भी पढ़ते रहे हैं, वही पिता के जिम्मेदारी और अनुशासन के तले दबे व्यक्तित्व का कोमल पक्ष अक्सर कविताओं मे उतनी प्रमुखता से उजागर नही हो पाता है। प्रस्तुत कविता अपने पारंपरिक कलेवर मे एक पिता की ऐसी ही अनुच्चारित भावनाओं मे छिपे प्रेम और विवशता को स्वर देती है।

गीत

माँ को गले लगाते हो, कुछ पल मेरे भी पास रहो !
’पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो !
मैनेँ भी मन मे जज़्बातोँ के तूफान समेटे हैँ,
ज़ाहिर नही किया, न सोचो पापा के दिल मेँ प्यार न हो!

थी मेरी ये ज़िम्मेदारी घर मे कोई मायूस न हो,
मैँ सारी तकलीफेँ झेलूँ और तुम सब महफूज़ रहो,
सारी खुशियाँ तुम्हेँ दे सकूँ, इस कोशिश मे लगा रहा,
मेरे बचपन मेँ थी जो कमियाँ, वो तुमको महसूस न हो!

हैँ समाज का नियम भी ऐसा पिता सदा गम्भीर रहे,
मन मे भाव छुपे हो लाखोँ, आँखो से न नीर बहे!
करे बात भी रुखी-सूखी, बोले बस बोल हिदायत के,
दिल मे प्यार है माँ जैसा ही, किंतु अलग तस्वीर रहे!

भूली नही मुझे हैँ अब तक, तुतलाती मीठी बोली,
पल-पल बढते हर पल मे, जो यादोँ की मिश्री घोली,
कन्धोँ पे वो बैठ के जलता रावण देख के खुश होना,
होली और दीवाली पर तुम बच्चोँ की अल्हड टोली!

माँ से हाथ-खर्च मांगना, मुझको देख सहम जाना,
और जो डाँटू ज़रा कभी, तो भाव नयन मे थम जाना,
बढते कदम लडकपन को कुछ मेरे मन की आशंका,
पर विश्वास तुम्हारा देख मन का दूर वहम जाना!

कॉलेज के अंतिम उत्सव मेँ मेरा शामिल न हो पाना,
ट्रेन हुई आँखो से ओझल, पर हाथ देर तक फहराना,
दूर गये तुम अब, तो इन यादोँ से दिल बहलाता हूँ,
तारीखेँ ही देखता हूँ बस, कब होगा अब घर आना!

अब के जब तुम घर आओगे, प्यार मेरा दिखलाऊंगा,
माँ की तरह ही ममतामयी हूँ, तुमको ये बतलाऊंगा,
आकर फिर तुम चले गये, बस बात वही दो-चार हुई,
पिता का पद कुछ ऐसा ही हैँ फिर खुद को समझाऊंगा!

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Contradictions can be a boon !!

kmsraj51 की कलम से …..
PEN KMSRAJ51-PEN

प्रतिकूलताएँ भी वरदान बन सकती हैं
Capture

प्रकृति हमारी जननी है, जो हमें सदैव ऐसी परिस्थिती प्रदान करती है, जिसमें हम सभी का विकास होता है। जीवन में धूप-छाँव की स्थिती हमेशा रहती है। सुख-दुख एवं रात-दिन का चक्र अपनी गति से चलता रहता है। ये आवश्यक नही है कि, हर पल हमारी सोच के अनुरूप ही हो। प्रतिकूलताएँ तो जीवन प्रवाह का एक सहज स्वाभाविक क्रम है। सम्पूर्ण विकास के लिए दोनो का महत्व है। दिन का महत्व रात्री के समय ही समझ में आता है।
मनोवैज्ञानिक जेम्स का कथन है कि, ये संभव नही है कि सदैव अनुकूलता बनी रहे प्रतिकूलता न आए।

कई बार जीवन में ऐसी परिस्थिती आती है, जब लगता है कि सफलता की गाङी सही ट्रैक (रास्ते) पर चल रही है, परन्तु स्पीड ब्रेकर (गति अवरोधक) रूपी प्रतिकूलताएं लक्ष्य की गति को धीमा कर देती हैं। कभी तो ऐसी स्थिती भी बन जाती है कि सफलता की गाङी का पहिया रुक जाता है। अचानक आए अवरोध से परेशान होना एक मानवीय आदत है जिसका असर किसी पर भी हो सकता है। परन्तु जो व्यक्ति मानसिक सन्तुलन के साथ अपनी गाङी को पुनः गति देता है, वही सफलता की सीढी चढता है।

डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल्ल कलाम साहब का मानना है कि,
“Waves are my inspiration, not because they rise and fall,
But whenever they fall, they rise again.”

विपरीत परिस्थिती में निराशा का भाव पनपना एक साधरण सी बात है, किन्तु निराशा के घने कुहांसे से वही बाहर निकल पाता है जो अदम्य साहस के साथ अविचल संकल्प शक्ति का धनि होता है। ऐसे लोग पर्वत के समान प्रतिकूलताओं को भी अपने आशावादी विचारों से अनुकूलता में बदल देते हैं।

रविन्द्र नाथ टैगोर ने कहा है कि, “हम ये प्रर्थना न करें कि हमारे ऊपर खतरे न आएं, बल्कि ये प्रार्थना करें कि हम उनका सामना करने में निडर रहें”

विपरीत परिस्थितियों में भी अपार संभावनाएं छुपी रहती है। अल्फ्रेड एडलर के अनुसार, “मानवीय व्यक्तित्व के विकास में कठिनाइंयों एवं प्रतिकूलताओं का होना आवश्यक है। ‘लाइफ शुड मीन टू यु’ पुस्तक में उन्होने लिखा है कि, यदि हम ऐसे व्यक्ति अथवा मानव समाज की कल्पना करें कि वे इस स्थिती में पहुँच गये हैं, जहाँ कोई कठिनाई न हो तो ऐसे वातावरण में मानव विकास रुक जायेगा।“

अनुकूल परिस्थिती में सफलता मिलना कोई आश्चर्य की बात नही है। परन्तु विपरीत परिस्थिती में सफलता अर्जित करना, किचङ में कमल के समानहै। जो अभावों में भी हँसते हुए आशावादी सोच के साथ लक्ष्य तक बढते हैं, उनका रास्ता प्रतिकूलताओं की प्रचंड आधियाँ भी नही रोक पाती। अनुकूलताएं और प्रतिकूलताएँ तो एक दूसरे की पर्याय हैं। इसमें स्वंय को कूल (शान्त) रखते हुए आगे बढना ही जीवन का सबसे बङा सच है।

Capture-1

Anita SharmaAnita Sharma

Post inspired by रौशन सवेरा. I am grateful to Mrs. Anita Sharma ji & रौशन सवेरा (http://roshansavera.blogspot.in/) Thanks a lot !!

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जज्बे को सलामः 21 साल की उम्र में जीत लिए 186 मेडल ~ Slamः determination to win 186 medals at the age of 21 !!

kmsraj51 की कलम से …..
PEN KMSRAJ51-PEN

==> 21 साल की उम्र में जीत लिए 186 मेडल

pooja-chaurasiPooja-Chaurasi

परिवार में बहनें बेहतर दोस्त होती हैं, लेकिन मेरी बहन तो फरिश्ता है। इसलिए इस वुमन डे पर मैं अपनी बहन पूजा चौरसिया का नाम नॉमिनेट करना चाहता हूं। जो इंटरनेशनल टाइटल जीतने वाली पहली भारतीय महिला ट्रायएथलीट है। पूजा के खेल सफर की शुरुआत सन 2002 में स्वीमिंग से हुई। उस समय उसकी उम्र मात्र 9 साल थी। बचपन से ही पूजा का सपना गोल्ड मेडल जीतने का था। उसके जुनून और प्रयासों को देखते हुए इंडियन ट्रायथलान फेडरेशन (आईटीएफ) ने उसे ट्रायथलान जूनियर स्क्वैड कैंप 2004 के लिए सेलेक्ट किया।

ट्रायथलान एक ऐसी दौड़ स्पर्धा है, जिसमें प्रतियोगी को एक के बाद एक होने वाली तीनों प्रतियोगिताओं – तैराकी, साइकिलिंग और दौड़ में हिस्सा लेना होता है। पूजा हमेशा से ही ट्रायथलान में हिस्सा लेने की इच्छुक थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। दरसअल खेल के ये तीनों प्रारूपों की तैयारियों में काफी खर्च आता है।

सन 2006 में जब उसने नेशनल एक्वाथलन चैंपियनशिप में बड़ी लीड के साथ गोल्ड मेडल जीता तो आईटीएफ ने उसे ट्रायथलान में हिस्सा लेने का मौका दिया। पूजा की किस्मत ने इस अवसर पर उसका साथ दिया। हालांकि, ट्रॉयथलान प्रतियोगिता के लिए उसकी प्रैक्टिस ठीक नहीं थी। साइक्लिंग के लिए उसके पास बाइक भी नहीं थी। लेकिन उसने एक किराए की साधारण सी साइकिल से ट्रायथलान में पहला गोल्ड मेडल जीतते हुए सबको चौंकाकर रख दिया।

पूजा के इस हैरतअंगेज परफॉरमेंस को देखते हुए दो महीने बाद ही गुजरात स्टेट ट्रॉयथलान एसोसिएशन से उसे सन 2007 में असम में आयोजित होने वाले 33वें नेशनल गेम्स में भाग लेने का मौका दिया।

नेशनल गेम्स की तैयारी के लिए हमने उसे 10 हजार रुपए एक साइकिल खरीद कर दी। असम में अन्य प्रतियोगी उसकी साधारण सी साइकिल को देखकर उसका खूब मजाक उड़ाया करते थे। क्योंकि उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक से बढ़कर एक महंगी साइकिल थीं, जिनकी कीमत 1.5 लाख रुपए से भी ऊपर की थी। यह सब देखकर पूजा शुरुआत में अपसेट भी होने लगी थी। अंतत: उसने सारी बातों को दरकिनार करते हुए अपना मन प्रैक्टिस में लगाया। वह जानती थी कि ईश्वर कोशिश करने वालों को ही सफलता प्रदान करता है। पूजा ने यहां भी इतिहास रचते हुए गोल्ड मेडल जीतकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया।

यह गौरव न सिर्फ पूजा को प्राप्त हुआ, बल्कि गुजरात राज्य के इतिहास में भी पहला मौका था, जब वहां के किसी प्रतियोगी ने ट्रॉयथलान में पहला गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।

इन सफलताओं के बाद आईटीएफ ने चीन में आयोजित होने वाले एशियन चैंपियनशिप के लिए पूजा का सेलेक्शन किया। इसके बाद पूजा ने कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और देश के लिए अनेकों मेडल्स भी जीते।

हालांकि, उसके पास अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड की साइकिल नहीं थी, जिसके चलते उसे अनेकों जगह परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। इसी बीच गुजरात के एक स्थानीय बिजनेसमैन राजन शाह ने पूजा के लिए स्पेशल बाइक खरीदने में मदद की। पूजा की उपलब्धियों को देखते हुए सन् 2009 में राजन शाह व गुजरात सरकार की मदद से पूजा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड की साइकिल खरीदी गई।

मैं जब भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से ऊब जाता था या कभी निराश होता तो पूजा ही मुझे प्रोत्साहित करती। ट्रॉयथलान स्पर्धा के लिए रोजाना की 6 घंटों की प्रैक्टिस के बाद भी वह मेरे और अपनी एमएससी की पढ़ाई के लिए समय निकाल लिया करती है।

अब तक पूजा 4 अंतरराष्ट्रीय, 28 राष्ट्रीय स्तर के मेडल्स के साथ 186 मेडल्स जीत चुकी है। इस दौरान उसने जीवन में कई बार जानलेवा खतरों का भी सामना किया और कई बार घायल भी हुई, लेकिन उसने कभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी। उसके जीवन में अनेकों बाधाएं आईं, लेकिन वे उसे कमजोर नहीं कर सकीं। इसलिए इस वुमन डे पर मैं अपनी बहन को दिल से बधाई देता हूं। मुझे उसका भाई होने का गर्व है।

note::- This post source by : http://www.bhaskar.com/article-hf/WD-pooja-chaurasi-story-for-woman-pride-award-4539919-NOR.html


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काश माँ आज जिंदा होती !!



kmsraj51 की कलम से …..
mom

काश माँ आज जिंदा होती,,,

कुछ बरस पहले हमारी माँ आज ही के दिन साथ छोड़ चली गयी थी,
आज उनकी बहुत याद आती है और जीवन की ये कमी कभी पूरी ना होगी.

अपनी पूजनिए माँ को समर्पित,

————————

काश माँ आज जिंदा होती,,,
काश मेरी माँ जिंदा होती.!
सुख-दुख में साथ होती.!!
कुछ कहता उस से,
कुछ उस की सुनता,
कोई अरमान अधूरा ना रहता,
दुनियाँ में मेरी भी बात होती,
काश माँ आज जिंदा होती,,,
माँ तू क्या गयी,
मेरी जान ही गयी,
अब फ़र्ज़ निभाने को जीता हूँ,
कब दिन निकले कब रात होती,
काश माँ आज जिंदा होती,,,
माँ से अक्चा कोई नहीं,
मतलब के बाकी यार,
ज़रूरत पड़े आयें सब पास,
रिश्तों में कोई मिठास ना होती,
काश माँ आज जिंदा होती,,,
मालिक नही देखा हमने,
माँ में रब ही देखा है,
जीना-चलना माँ सिखाती,
माँ ईश्वर जैसी ही है होती,
काश मान आज जिंदा होती,,,

I am grateful to Advo.Ravinder Ravi’Sagar’ for sharing this inspirational poetry.


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लड़की को मत समझो बेकार।।

kmsraj51 की कलम से …..
SOLUTIONSave Girl !!


लड़की को मत समझो बेकार।

लड़की को मत समझो बेकार।
इसके बिना है अधूरा हर परिवार।।

बहन बनकर जिसने है हर भाई को प्यार से सम्भाला।
बेटी बनकर जिसने है भरा हर बाप के दिल में खुशियो का उजाला।।

फ्रेंड बनकर समझाया जिसने।
शादी कर के दूसरा घर चलाया भी इसने।।

लड़की न होती तो आज माँ न होती।
माँ न होती तो आज जननी कौन होती?

जीना बस लड़को का नही है अधिकार।
लड़की से ही है खुश हर परिवार।।

लड़की को मत समझो बेकार।
इसके बिना है अधूरा हर परिवार।।
– “kmsraj51”

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Women`s Day !!



kmsraj51 की कलम से …..
women`s dayWomen`s Day !!

Women in Freedom Struggle

विश्व में भारत ही ऐसा देश है, जिसकी स्वतंत्रता के लिए पुरूषों के साथ महिलाओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर अपना पूरा योगदान दिया। गाँधी जी के आह्वान पर अनेक महिलाओं ने विभिन्न क्रांतिकारी गतिविधियों में अपने प्राणों की परवाह किये बिना स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। जिन महिलाओं ने कभी घर से बाहर कदम भी नही रखा था, उन्होने भी भारत माता की आजादी के लिए अनेक महिलाओं को नेतृत्व प्रदान किया। हजारों महिलाओं ने स्वतंत्रता के यज्ञ को अपनी आहुती से सफल बनाया। सत्याग्रह के दौरान लगभग 15000 से भी ज्यादा महिलाएं जेल गईं। उन्होने जेलखानों को आराधना गृह का नाम दिया। लाठियों या गोलियों की परवाह न करते हुए अनगिनत महिलाओं ने इस देश की बेटी एवं बहु होने का फर्ज हँसते-हँसते अदा किया। ये महिलाएं नारी शक्ति के लिए प्रेरणा स्वरूप हैं, इन्होने अपने अदम्य साहस से भारत माता को गुलामी की जंजीर से मुक्त कराकर स्वतंत्रता का शंखनाद किया…………..

मैडम भिकाजी कामाः- ये भारत की प्रथम क्रान्तिकारी महिला थीं। विदोषों में निष्काशित जीवन व्यतीत करते हुए भारत की लङाई को जिवित रखा। 24 सितंबर 1861 को बंब्ई में एक पारसी परिवार में जन्म हुआ था। विदोषों में रहते हुए ये प्रमुख रूप से श्यामा जी, लाला हरदयाल, वीर सावरकर, आदि के साथ सक्रिय रहीं। 1907 में जर्मनी में अंर्तराष्ट्रिय समाजवादी सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए इन्हे राष्ट्रिय ध्वज फैराने का गौरव प्राप्त हुआ था। इंग्लैण्ड में इन्हे अपराधी घोषित किया गया और वहां से निकल जाने का हुक्म दिया गया। ये इंग्लौण्ड से फ्रांस आ गईं, वहां से इन्होने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों को जारी रखा। 13 अगस्त 1936 को आपका निधन हो गया।

श्रीमति एनीबेसेन्टः- एक अक्टुबर 1847 को लंदन में जन्मी एनीबेसेन्ट एक आइरिश महिला थीं। परन्तु भारतिय दर्शन एवं संस्कृति से प्रभावित होकर भारत आईं। उन्होने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1917 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनी। 1919 में होमरूल लीग की स्थापना की। कांग्रेस के अधिवेशनो में वे सदैव पूर्ण स्वराज की मांग उठाती रहीं। एनीबेसेन्ट गरमदल की प्रमुख नेता थीं। 1916 में बनारस हिंदुविश्वविद्यालय की स्थापना में इनका महत्वपूर्ण योगदान था। 86 वर्ष की आयु में 20 सितंबर1933 को मद्रास में उनका निधन हो गया।

कु. प्रीती लता:- यह एक सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी महिला थीं। प्रीती लता का जन्म 8 मई 1911 को चटगॉव में हुआ था, जो अब बंगाला देश में है। चटगॉव शस्त्रागार काण्ड में आपने भाग लिया था। ये इस काण्ड में गंभीर रूप से जख्मी हो गीई थी। अंग्रेज सिपाहियों ने उन्हे घेर लिया था। अंग्रेजो के हाँथ वे न लगें इसलिए उन्होने सायनाइड खाकर अपने को देश के लिए बलिदान कर दिया।

कस्तूरबा गाँधीः- राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पत्नी, कस्तूरबा गाँधी का जन्म 1869 में पोरबंदर में हुआ था। स्वतंत्रता के कार्यक्रमों में वे सदैव गाँधी जी के साथ रहीं और अनेक बार जेल गईं अंतिम बार 9अगस्त 1942 को उन्हे गाँधी जी के साथ आगा खाँ जेल में नजरबंद कर दिया गया था, वहीं बन्दी जीवन में ही 22 फरवरी 1944 को उनका निधन हो गया।

कु. खुर्शिद बैन नौरोजीः- राष्ट्रीय नेता दादा भाई नौरोजी की पोती कु. खुर्शिद बैन नौरोजी का जन्म 1894 में हुआ था। विदेषों से शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद इनपर वहाँ का रंग नही चढा। भारत की स्वतंत्रता के लिए लोगों को जागरूक करती रहीं और आजादी के आन्दोलन में 8 बार जेल गईं। सन् 1966 में आपकी मृत्यु हुई।

कमला देवी चट्टोपाध्याः- 3 अप्रैल 1903 समाज सेविका कमला देवी चट्टोपाध्या का जन्म बंगौलर में हुआ था। राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के लिए चलाए गये सभी आन्दोलनो में उन्होने हिस्सा लिया और अनेकों बार जेल भी गईं। आजादी के दौरान सोशलिष्ट पार्टी की स्थापना में उनका प्रमुख योगदान रहा।

सरोजनी नायडु:- प्रथम श्रेणीं की राष्ट्रीय नेता एवं सुप्रसिद्ध कवित्री सरोजनी नायडु का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। ओजस्वी कविताओं के कारण भारत कोकिला के नाम से प्रख्यात सरोजनी नायडु को 1925 के कानपुर राष्ट्रीय अधिवेशन में कांग्रेस की अध्यक्ष चुना गया था। एतिहासिक दांडी यात्रा में गाँधी जी के साथ थीं। गाँधी इरविन पैक्ट के अर्न्तगत दूसरे गोलमेज सम्मेलन में गाँधी जी के साथ लंदन गईं थीं। सभी राष्ट्रीय आन्दोलन में उन्होने हिस्सा लिया और अनेक बार जेल यात्राएं की। आगा खाँ जेल में नजर बंदी के दौरान ये भी गाँधी जी के साथ थीं। भारत की स्वतंत्रता के बाद सरोजनी नायडु को पहली महिला गर्वनर नियुक्त किया गया था।

कु. कल्पना दत्तः- एम.ए. तक शिक्षा प्राप्त कल्पना दत्त का जन्म चटगॉव में हुआ था। चटगॉव शस्त्रागार काण्ड में सूर्यसेन के नेतृत्व में क्रियाशील रहीं किन्तु उस समय पुलिस उन्हे गिरफ्तार नही सकी। 1933 में कङे संघर्ष के बाद सूर्यसेन के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। 12 फरवरी 1934 को आजीवन कारावास की सजा दी गई।

विजय लक्ष्मी पंडितः- मोती लाल नेहरु की पुत्री विजय लक्ष्मी का जन्म 1900 में इलाहाबाद में हुआ था। सदैव स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहते हुए नमक सत्याग्रह में हिस्सा लेने के साथ ही विदेशी कपङों की दुकानो पर धरने दिये। 1937 में जब प्रांतिय सरकारों की स्थापना हुई तब उत्तर प्रदेश के मंत्रीमंडल में पहली महिला मंत्री का कार्यभार संभाला।

डॉ. सुशिला नैय्यरः- इनका लगभग समस्त परिवार स्वतंत्रता संग्राम से जुङा हुआ था। बङे भाई प्यारे लाल नैय्यर गाँधी जी के सचिव थे। ये प्रायः सेवा ग्राम में रहती थीं। 1942 में नजरबंद के दौरान आगा खाँ जेल में 21 महिने रहीं। इन्होने सेवा ग्राम में कस्तूरबा हेल्थ सोसाइटी की स्थापना की जिसके माध्यम से आपने, आस-पास के गाँवों के लोगों के लिए उपाचार की व्यवस्था की। सेवाग्राम में ही गाँधी जी की स्मृति में महात्मा गाँधी साइंस इन्सटीट्यूशनकी स्थापना की थी। 3 जनवरी 2001 को सुशिला नैय्यर जी का निधन सेवाग्राम में हुआ।

अरुणा आसफ अलीः- राष्ट्रीय नेता आसफअली की पत्नी अरुणा आसफ अलि का जन्म 1906 में हुआ था। लाहौर और नैनिताल में शिक्षा प्राप्त अरुणा, नमक सत्याग्रह और असहयोग आन्दोलन में प्रमुख रूप से सक्रिय रहीं। 1942 के भारत छोङो आन्दोलन में आपका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनिय है। 9 अगस्त 1942 को जब अनेक बङे नेताओं को गिरफ्तार किया गया तो इन्होने भुमिगत रहकर राष्ट्रीय आन्दोलन को गतिशील बनाए रखा। तत्कालीन सरकार ने इनकी गिरफ्तारी के लिए 5000 नकद पुरस्कार की घोषित किया था, लेकिन ये अंत तक पुलिस के हाँथ नहीं आईं इसलिए अरुणा आसफ अलि को 1942 की हिरोइन कहा जाता है। जब 26 जनवरी 1946 को अंग्रेज सरकार ने इनके वारंट को रद्द करने की घोषणा की तभी ये सार्वजनिक रूप से सामने आईं।

राजकुमारी अमृत कौरः- सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और गाँधी जी की निकट सहयोगिनी थीं। 2 फरवरी 1889 को कपूरथला में जन्मी राजकुमारी अमृत कौर ने ऐशो आराम का जीवन त्यागकर देश की स्वतंत्रता हेतु अनेकों बार जेल गईं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात ये प्रथम केन्द्रिय मंत्रीमंडल में स्वास्थ मंत्री बनी।

लेडी अब्दुल्ल कादिरीः- 1883 में लाहौर में जन्मी लेडी अब्बदुल कादिरी ने 1922 से खिलाफत आन्दोलन और सविनय अवज्ञा आनदोलन में प्रमुख रूप से हिस्सा लिया था। लेडी अब्दुल्ल कादिरी का कार्यक्षेत्र उत्तर प्रदेश में लखनऊ में था।

अम्तु सलाम बेनः- गाँधी जी के सभी प्रमुख रचनात्मक कार्यो में निकट से जुङी रहीं। 1942 के आन्दोलन में रेहाना बहन के साथ सक्रिय रहीं। 1946 में नोआखली के सामप्रदायिक दंगो के शिकार लोगों की सहायता हेतु शान्ति यात्रा में गाँधी जी के साथ थीं।

दुर्गा बाई देशमुखः- सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाज सेविका दुर्गा बाई देशमुख का जन्म 1909 में आन्ध्रप्रदेश में हुआ था। एल.एल.बी तक शिक्षा प्राप्त की थी। स्वदेशी आन्दोलन में इन्होने अपने विवाह के समय के सभी विदेषी कपङों को जला दिया था। अपने किमती आभूषणों को देश हित के लिए गाँधी जी को समर्पित कर दिया था। राष्ट्रीय कार्यक्रमों के आन्दोलन में ये तीनबार जेल गईं थीं। 9 मई 1981 को आपका निधन हैदराबाद में हुआ था।

दुर्गा भाभीः- दुर्गा का जन्म 7 अक्टुबर 1907 को लाहौर में हुआ था। इनके पति भगवति चरण बोहरा सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी थे। दुर्गा भाभी ने लगभग सभी क्रान्तिकारी गतिविधियों में अपना योगदान दिया। दुर्गा भाभी क्रान्तिकारियों के छिपने के लिए गुप्त व्यवस्था करती थीं। चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, यशपाल आदि क्रान्तिकारियों की गतिविधियों से निकट से जुङी हुईं थीं।

कु. बिना दासः- 24 अगस्त 1911 में बंगाल में जन्मी बिना दास ने बी.ए. तक की शिक्षा प्राप्त की थी। अध्ययन के दौरान ही ये क्रान्तिकारी गतिविधियों में सक्रिय हो गईं थीं। 6 फरवरी 1932 को कॉलेज के एक समारोह में बंगाल के गर्वनर स्टेनले जेक्सन पर गोली चला दी, लेकिन गर्वनर बच गये तब इन्हे पकङ लिया गया और 9 वर्ष की कङी कैद की सजा दी गई। 1942 के आन्दोलन में भी सक्रिय रहीं किन्तु तब इनको अंग्रेज गिरफ्तार न कर सके।

श्रीमति जानकी देवी बजाजः- प्रसिद्ध उद्योगपति जमना लाल बजाज की पत्नि श्रीमति जानकी देवी बजाज ने अपने घर की सभी विदेशी वस्तुओं को जला दिया था। सरकार विरोधी भाषणों के कारण उन्हे अंग्रेज सरकार ने कुछ समय तक जेल में रखा था।

श्रीमति सुचेता कृपलानीः- 1908 में अम्बाला में जन्मी सुचेता कृपलानी देशभक्त, आचार्य जे बी कृपलानी की पत्नी थीं। श्रीमति सुचेता कृपलानी भारत छोङो आन्दोलन में अरुणा आसफ अलि के साथ भुमिगत रहकर आन्दोलन का संचालन करती रहीं। इन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. की परिक्षा पास की थी। आजादी के उपरान्त अनेक बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुईं। अक्टुबर 1963 से 1967 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। ये स्वतंत्र भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं। आजादी के बाद देश में कई जगह साम्प्रदायिक दंगे भङक उठे थे, सुचिता कृपलानी ने दंगा पिङीत लोगों को राहत पहुँचाने का कार्य किया था।

बहन सत्यवतिः- दिल्ली की सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तथा समाज सेविका सत्यवति का जन्म 1906 में दिल्ली में हुआ था। लगभग सभी आन्दोलनों में सक्रिय भागीदारी देते हुए, खराब स्वास्थ के बावजूद कई बार जेल भी गईं। उस समय की टी.बी. जैसी गंभीर बिमारी के बावजूद उन्होने अपने प्रयासो से दिल्ली में महिलाओं के मन में स्वतंत्रता के प्रति जागरुकता का शंखनाद किया। सत्यवति जी की प्रेरणा से हजारों महिलाओं ने उनका अनुसरण करते हुए स्वतंत्रता के आंदोलन में अपना योगदान दिया।

मृदुला सारा भाईः- 1911 में अहमबदाबाद में जन्मी मृदुला सारा भाई का समस्त परिवार स्वतंत्रता के आन्दोलनो में सक्रिय रहा। स्वतंत्रता के लिए अनेकों बार जेल गईं और जब भारत विभाजन में साम्प्रदायिक दंगे भङके तो दंगा पिङीत लोगों की सहायता में सक्रिय रहीं।

लाडो रानी जुत्सीः- लाडो रानी जुत्सी ने पंजाब में महिलाओं का जागरुक किया और महिलाओं को एकत्र कर शराब की दुकाने बंद कराने एवं विदेषी वस्तुओं के बहिष्कार में महत्वपूर्ण भुमिका का निर्वाह किया। 1930 में नमक सत्याग्रह के दौरान इन्हे एक वर्ष तक के लिए जेल में बंद कर दिया गया था। 1932 में विषेधाग्या भंग करने के आरोप में पुनः 18 महिने के लिए जेल गईं।

सरला बहनः- 5 अप्रैल 1900 में लंदन में जन्मी कु. कैथलिन 1938 में समाज सेवा के लिए भारत आईं। गाँधी जी से प्रभावित होकर उनके अनेक कार्यक्रमें से जुङी रहीं। 1942 के भारत छोङो आन्दोलन में विशेष रूप से सक्रिय रहीं। ये जीवन पर्यन्त अलमोङा में समाज सेवा का कार्य करती रहीं। इस क्षेत्र में रचनात्मक कार्यो को बढाने हेतु कौशानी आश्रम की स्थापना की। 40 वर्षों तक निरंतर देश सेवा के उपरान्त 8 जुलाई 1962 को उनका निधन हो गया।

रानी गाइनडिल्युः- जॉन ऑफ आर्क नाम से प्रख्यात रानी गाइनडिल्यु का जन्म 26 जनवरी 1915 को नागालैण्ड में हुआ था। ये सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी महिला थीं। रानी गाइनडिल्यु ने 17 वर्ष की अल्प आयु में ही अपने हजार अनुयाइयों के साथ अंग्रेजों के प्रति गोरिल्ला युद्ध छेङ कर उन्हे पराजित किया। 17 अक्टूबर 1942 को इन्हे अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया तथा गंभीर प्रताङना दी गई। आजिवन कारावास का दंड मिला। जब प्रान्तिय शासन आरंम्भ हुआ तब अनेक स्वतंत्रता सेनानियों को छोङा गया किन्तु जवहारलाल नेहरु के प्रयासों के बावजूद इन्हे रिहा नही किया गया। भारत की आजादी के उपरान्त ही इनको जेल से रिहाई मिली, तद्पश्चात ये जीवन भर लोकप्रिय नागानेता के रूप में सामाजिक सुधार के कार्यक्रमों में सक्रिय रहीं।

सुशिला दीदीः- प्रसिद्ध क्रान्तिकारी महिला सुशिला दीदी का जन्म 5 मार्च 1905 को गुजरात में हुआ था। काकोरी कांड के केस में खर्च हो रहे रूपये हेतु इन्होने अपने सारे जेवर दान कर दिये थे। अपने अध्ययन काल के दौरान से ही ये चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, भगवतिचरण वोहरा एवं दुर्गा भाभी के साथ क्रानितिकारी गतिविधियों में सदैव सक्रिय रहीं। दिल्ली में वायसराय लार्ड इरविन की ट्रेन उङाने की जो योजना बनाई गयी थी। उसमें इन्होने क्रान्तिकारियों तक सभी सुचनाएं पहुँचाने का दायित्व निभाया था।

स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्य न्यौछावर करने वाली अमर बलिदानी महिलाओं को कभी भी भुलाया नही जा सकता, उनके बलिदान को महिला दिवस पर नमन करने का प्रयास है। भारत की स्वतंत्रता से लेकर स्वयं की एवं समाज तथा देश की रक्षा करने में सक्षम है नारी, सिर्फ उसे अपनी शक्ति को आज के परिपेक्ष में नई पहचान की जरूरत है, जिससे कोई भी उसके साथ अराजकता का व्यवहार न कर सके।
Everyday remind yourself that You are the best.
Happy Women’s Day

Anita Sharma
Post inspired by रौशन सवेरा. I am grateful to Mrs. Anita Sharma ji & रौशन सवेरा (http://roshansavera.blogspot.in/) Thanks a lot !!



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नीम है आपकी सुंदरता का साथी ~ Neem beauty of your partner !!

kmsraj51 की कलम से…..
pen-kms

नीम के पत्ते को पानी में उबालकर इस पानी को ठंडा करके इससे मुंह धोने पर पिंपल्स दूर होते हैं। नीम की पत्तियों को पीसकर उसके लेप को चेहरे पर लगाने से फुंसियां व मुहांसों के दाग मिट जाते हैं। एक कटोरी गेहूं के आटे में एक चम्मच चंदन पावडर, दो चम्मच शहद और गुलाबजल मिलाकर इस उबटन को चेहरे पर लगाएं। यह एक आसान सौन्दर्य नुस्खा है।

चेहरे के दाग-धब्बे हटाने में नीम का फेस पैक बहुत ही कारगर होता है। नीम के फेस पैक बनाने के लिए चार-पांच ताजी नीम की पत्तियों को मिक्सी में पीसकर उसमें एक चम्मच मुलतानी मिट्टी पावडर मिलाएं। अब इस गाढ़े फेस पैक में थोड़ा गुलाबजल मिलाएं तथा इस पैक को पूरे चेहरे पर लगाएं। पैक के सूखने पर गरम पानी से चेहरा धो लें। नीम रक्त साफ करता है।


neem

दाद,खाज,ब्लडप्रेशर में प्रातः 25 ग्राम नीम की पत्ती का रस लेना लाभदायक है। नीम के पत्ते कीड़े मारते हैं, इसलिए पत्तों को अनाज, कपड़ों में रखते हैं। नीम के तेल से मालिश करने से विभिन्न प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। नीम की पत्तियों को उबालकर और पानी ठंडा करके नहाया जाए तो उससे भी बहुत फायदा होता है। नीम की छाल में ऐसे गुण होते हैं, जो दांतों और मसूढ़ों में लगने वाले तरह-तरह के बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते हैं, जिससे दांत स्वस्थ व मजबूत रहते हैं।

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(((((::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..)))))

कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 in Hindi !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

kmsraj51 की कलम से …..
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** ~ Krishna Mohan Singh(kmsraj51) ~ Great Thoughts of KMSRAJ51 ~ **


::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
KMS-2014-51
kmsraj51

** कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह ….. **

:: Imp. Note :: ** ~ गहराई से सोचना प्रत्येक शब्द ~ **


** मेरे(kmsraj51) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

** अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

** हमेशा मन को शांत रखना …..

** दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

** हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

** हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

** हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

** हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

** आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

** आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

** ~ kmsraj51 – (my personal picture/photo) ~ **

KMS-2014-51

KMSRAJ51


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::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
kms1006


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** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

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