बहाने Vs सफलता।

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CYMY-KMSRAJ51-N

बहाने Vs सफलता।

1. मुझे उचित शिक्षा लेने का
अवसर नही मिला…
उचित शिक्षा का अवसर
फोर्ड मोटर्स के मालिक
हेनरी फोर्ड को भी नही मिला ।

2. मै इतनी बार हार चूका ,
अब हिम्मत नही…
अब्राहम लिंकन 15 बार
चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने।

3. मै अत्यंत गरीब घर से हूँ …
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी
गरीब घर से थे।

4. बचपन से ही अस्वस्थ था…
आँस्कर विजेता अभिनेत्री
मरली मेटलिन भी बचपन से
बहरी व अस्वस्थ थी।

5. मैने साइकिल पर घूमकर
आधी ज़िंदगी गुजारी है…
निरमा के करसन भाई पटेल ने भी
साइकिल पर निरमा बेचकर
आधी ज़िंदगी गुजारी।

6. एक दुर्घटना मे
अपाहिज होने के बाद
मेरी हिम्मत चली गयी…
प्रख्यात नृत्यांगना
सुधा चन्द्रन के पैर नकली है ।

7. मुझे बचपन से मंद बुद्धि
कहा जाता है…
थामस अल्वा एडीसन को भी
बचपन से मंदबुद्धि कहा जता था।

8. बचपन मे ही मेरे पिता का
देहाँत हो गया था…
प्रख्यात संगीतकार
ए.आर.रहमान के पिता का भी
देहांत बचपन मे हो गया था।

9. मुझे बचपन से परिवार की
जिम्मेदारी उठानी पङी…
लता मंगेशकर को भी
बचपन से परिवार की जिम्मेदारी
उठानी पङी थी।

10. मेरी लंबाई बहुत कम है…
सचिन तेंदुलकर की भी
लंबाई कम है।

आज आप जहाँ भी है,
या कल जहाँ भी होगे।
इसके लिए आप किसी और को
जिम्मेदार नही ठहरा सकते।
इसलिए आज चुनाव करिये,
सफलता और सपने चाहिए
या खोखले बहाने।

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आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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भावुकता और सतर्कता में संतुलन की आवश्यकता है और यह संतुलन ध्यान से आता है।

A balance between sensitivity and sensibility is required and this balance comes from meditation.

~Sri Sri Ravi Shankar Ji

निश्चय ही आप विजयी होंगे, यदि आप अपनी दुर्बलता (Weakness) को अपनी ताकत में तब्दील करना सीख लें।

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

 

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सफलता और तरक्की पाने के 7 अचूक तरीके।

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सफलता और तरक्की पाने के 7 अचूक तरीके।

सफलता हर इंसान की चाहत होती है, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि सफलता सभी को नहीं मिलती है। आखिर ऐसा क्यों होता है? इस संबंध में कई कारण ढूंढे जा सकते हैं, लेकिन मोटे तौर कामयाबी नसीब न होने के पीछे लक्ष्य को लेकर उदासीनता, विचार और कर्म में सही तालमेल का अभाव बड़ा कारण नजर आता है। यही नहीं, सफलता में निरंतरता भी अहम होती है, क्योंकि उसके बिना तरक्की संभव नहीं। किंतु अगर मकसद साफ हो, सही विचार हो और कर्मशक्ति भी मौजूद हो तब भी सफलता और तरक्की दूर रह जाए तो फिर इसके क्या कारण हो सकते हैं?

इस सवाल का जवाब हिन्दू धर्म ग्रंथ महाभारत में बताए सफलता व तरक्की के सटीक सूत्रों में मिलता है। सफलता व तरक्की के ये 7 सूत्र जीवन में उतार साधारण इंसान भी असाधारण बन मनचाही ऊंचाइयों को पा सकता है-
हिन्दू धर्मग्रंथ महाभारत में लिखा गया है कि-
उत्थानं संयमो दाक्ष्यमप्रमादो धृति: स्मृति:।
समीक्ष्य च समारम्भो विद्धि मूलं भवस्य तु।।
इस श्लोक में जीवन में कर्म, विचार और व्यवहार से जुड़ी 7 बातें उन्नति का मूल मंत्र मानी गई है। ये बाते हैं- 
1. उद्यम
2. संयम
3. दक्षता
4. धैर्य
5. सावधानी
6. स्मृति
7. सोच विचार
उद्यम या परिश्रम – अक्सर सफलता पाने की जल्दबाजी या बेचैनी में कई लोग आसान और छोटे रास्ते या तरीकों को चुन तो लेते हैं। लेकिन मनचाही सफलता से दूर रहने पर निराशा के दौर से गुजरते हैं। असल में सफलता के लिए संकल्प, कर्म के साथ उद्यम यानी परिश्रम की भावना के तय पैमानों को अपनाए बिना कामयाबी की मंजिल को छूना व उस पर कायम रहना मुश्किल है।
संयम– छोटी या थोड़ी-सी सफलता मिलने पर मन व विचार पर काबू या उतावलेपन से बचना, क्योंकि बिना धैर्य और संयम के सफलता साथ छोड़ देती है, बल्कि तरक्की के रास्ते भी बंद हो जाते हैं।
दक्षता- सफलता को अवसरों को भुनाने व जल्द लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किसी भी कार्य या कला में कुशलता या महारत बड़ी मददगार होती है। इसलिए बिना अहंकार के सीखने की जिज्ञासा बनाए रखें।
धैर्य- तमाम कोशिशों के बाद भी अगर मनचाहे परिणाम न मिलने या अपेक्षा पूरा न होने पर लक्ष्य से न भटकें या न उसे छोडऩे का विचार करें। बल्कि मजबूत संकल्प और दोगुनी मेहनत के साथ उसे पाने में जुट जाएं।
सावधानी – किसी भी तरह की सफलता के रास्ते में कई बाधाएं भी मुमकिन है। इसलिए सारी संभावनाओं और स्थितियों के आंकलन और विश्लेषण के साथ विषय, कार्य और स्थिति के प्रति जागरूकता व सावधानी रखें।
स्मृति – इसकी अलग-अलग अर्थों व परिस्थितियों में अलग-अलग अहमियत है। जैसे ज्ञान व स्मरण शक्ति के अलावा दूसरों के उपकारों, सहयोग या प्रेम को न भूलना आदि।
सोच-विचार – विवेक का साथ न छोडऩा। सफलता व तरक्की के लिए कोई भी कदम बढ़ाने से पहले सही और गलत की विचार शक्ति अहम होती है, जिसके लिए अधिक से अधिक ज्ञान व अनुभव बंटोरें।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

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दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

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KMSRAJ51-Problem Solve

दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

अक्सर कई छात्र मेल के द्वारा या फोन के माध्यम से हमसे पूछते हैं कि हम प्रवेश परिक्षाओं में कैसे सफलता पायें या किस तरह तैयारी करें कि हमें कामयाबी मिले?  सच तो ये है कि, कामयाबी की चाह लिये हम सब अपने-अपने क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं। परन्तु अपने कार्य सम्पादन के दौरान अक्सर एक दुविधा में भी रहते हैं कि हमारे द्वारा किया गया कार्य सफल होगा या नही, ये हम कर पायेंगे या नही  इत्यादि इत्यादी. मित्रों, इस तरह की आशंकायें हमारी ऊर्जा को छींण करने का प्रयास करती हैं और स्वंय के विश्वास पर एक प्रश्न चिन्ह लगा देती हैं।  यही दुविधा सफलता की सबसे बङी बाधा है। किसी भी कार्य को करने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करना कार्य की रणनीति होती है परंतु जब नकारात्मक पहलु योजना पर हावी होता है तो यही संशय सफलता की सबसे बङी अङचन होती है। जिसके कारण हम एक कदम भी आगे नही रख पाते। जबकि जिवन का सबसे बङा सच है कि हमेशा परिस्थिति एक जैसी नही रहती, लक्ष्य की सफलता में कई रोङे आते हैं। जो इन रुकावटों को आत्मविश्वास के साथ पार करता है वो लक्ष्य हासिल करने में सफल होता है। लेकिन दूसरी ओर जो दुविधा के जंजाल में फंस जाता है, वो कभी भी आशाजनक सफलता नही अर्जित कर पाता है। ज्यादातर लोग ज्ञान और प्रतिभा की कमी से नही हारते बल्की इसलिये हार जाते हैं कि दुविधा में पङकर जीत से पहले ही मैदान छोङ देते हैं।

दुविधा तो एक द्वंद की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति निर्णय नही ले पाता और न ही स्वतंत्र ढंग से सोच पाता है। इतिहास गवाह है कि प्रत्येक सफल व्यक्तियों के रास्ते में अनेक मुश्किलें आईं किन्तु उन्होने उसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया समझा और आगे के कार्य हेतु कोशिश करते रहे। कई बार हम लोग किसी कार्य को करने से पहले इतना ज्यादा सोचते हैं कि समय पर काम नही हो पाता या हम अवसर को दुविधा के भंवर में कहीं खो देते हैं। यदि हम विद्यार्थी की बात करें तो कई बार ऐसा होता है कि कुछ छात्र विषय को लेकर इतने ज्यादा संशय में रहते हैं कि वो फार्म भरने में लेट हो जाते हैं या आशंकाओं के चक्कर में गलत विषय का चयन कर लेते हैं। जबकि सच तो ये है कि सभी विषय में मेहनत करनी होती है तभी अच्छे अंक मिलते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि एक बुद्धिमान व्यक्ति भी लंबे समय तक दुविधाग्रस्त रहता है तो उसका भी मानसिक क्षरण हो जाता है। जिसके कारण सक्षम व्यक्ति भी उन्नति नही कर पाता। दुविधा सफलता की राह में सबसे बङी अङचन है। अत्यधिक संशय आत्मविश्वास को भी कमजोर बना देता है। यदि हम एक परशेंट असफल भी होते हैं, तो भी हमारे अनुभव में इजाफा ही होता है और अनुभव से आत्मविश्वास बढता है। मन में ये विश्वास रखना भी जरूरी है कि सब कुछ संभव है।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि,  संभव की सीमा जानने का सबसे अच्छा तरीका है, असंभव से भी आगे निकल जाना।

जो लोग सफलता की इबारत लिखे हैं उन्हे भी दुविधाओं के कोहरे से गुजरना पढा है परन्तु ऐसे में उन लोगों ने परिस्थिति को इस तरह ढाला कि वे अपनी योजनाएं  स्वयं निर्धारित कर सके। सफलता के लिये ये भी आवश्यक है कि हम हर परिस्थिति में स्वंय को तैयार रखें। किसी भी सफलता के लिये ये जरूरी है कि हम निर्णय लेने की भूमिका में आगे बढें; क्योंकि एक कदम भी आगे बढाने के लिये निर्णय तो लेना ही पङता है, तद्पश्चात जिंदगी हमें धीरे-धीरे खुद ही निर्णय लेना सीखा देती है। अतः सबसे पहले हम दुविधापूर्ण मनः स्थिति के शिकार न होते हुए स्वंय को संतुलित रखते हुए दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें, जिससे आशंकाओं और दुविधाओं का तिमिर नष्ट हो तथा सफलता की और हमसब का कदम अग्रसर हो।

डॉ.ए.पी.जे. कलाम के अनुसार,  Confidence & hard work is the best medicine to kill the disease called failure. It will make you a successful person. 

Post inspired by Mrs. अनिता शर्मा जी

Educational & Inspirational VIdeos (9.8 lacs+ Views):  YouTube videos Link

(http://www.youtube.com/channel/UCRh-7JPESNZWesMRfjvegcA?feature=watch)

Blog:  http://roshansavera.blogspot.in/

E-mail ID:  voiceforblind@gmail.com

अनीता जी नेत्रहीन विद्यार्थियों के सेवार्थ काम करती हैं।

एक अपील

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful article with KMSRAJ51 Readers.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥”

 ~KMSRAJ51

 

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संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सफलता।

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संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सफलता।

संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सक्सेस शेक्सपियर ने लिखा था, “हमारे संदेह गद्दार हैं। हम जो सफलता प्राप्त कर सकते हैं, वह नहीं कर पाते, क्यूंकि संदेह में पड़कर प्रयत्न ही नहीं करते।” इंसान का स्वाभाव ही ऐसा होता है कि कोई काम शुरू करता है और थोडा सा भी संदेह होने पर काम को रोक देता है और उत्साह पर पानी फिर जाता है। संदेह कि बजाय इंसान को विश्वास को ज्यादा तरजीह देनी चाहिए।
जीवन में आगे बढ़ने के लिए इंसान प्रयत्न करता है और इस प्रयत्न पर संदेह के कारण पानी फिर जाता है। संदेह व्यक्ति के उत्साह को कम कर देता है। संदेह के कारण इंसान सही समय का इंतजार करता रह जाता है। उसे लगता है कि उचित अवसर आने पर काम करूंगा। जो लोग अपनी योग्यता पर शक करते हैं, वे हमेशा दुविधा में रहते हैं कि काम को शुरू भी किया जाए या नहीं। वे हमेशा काम को टालते रहते हैं। उन्हें हमेशा यही महसूस होता है कि अभी सही समय नहीं आया है। वे अपनी दिशा तय नहीं कर पाते और इधर-उधर भटकते रहते हैं। संदेह से पीछा छुड़ाने के लिए मन में विश्वास पैदा करना होगा कि जो काम शुरू किया है, उसमें सफलता जरूर मिलेगी।

“अगर सच्चे-मन से जीवन में कुछ करने की ठान लाे, ताे सफलता आपकाे जरुर मिलेगी।”-Kmsraj51

अगर व्यक्ति अपने मन में विश्वास रखे कि वह एक बड़े पुरस्कार के लिए काम कर रहा है और जीत उसी की होगी, तो सफलता निश्चित है। विश्वास एक टॉनिक है, जो इंसान की सारी शक्तियों को सक्रिय कर देता है। संदेह होने पर इंसान कोशिश करना बंद कर देता है और विश्वास के कारण वह मुश्किलों में भी आगे बढ़ता रहता है। अब यह आप पर है कि आप किसे चुनते हैं। मन में बैठे संदेहों को दूर करने के लिए सफलता की मनोकामना भी जरूरी है। जब तक आप खुद संदेह को मौका नहीं देते, तब तक वह आप पर हावी नहीं हो सकता। एक कहावत है, “निश्चय कर लो कि तुम सही हो और फिर आगे बढ़ते जाओ, पर सारा दिन निश्चय करने में व्यतीत मत कर दो।”

मेरा यही मानना है कि, किसी चीज या परिस्थिति पर शक करने की बजाय आपको तुरंत फैसले लेने होंगे, तभी तेजी से तरक्की कर पाएंगे। आपको अपने मन को समझना होगा और तय करना होगा कि आपको कहां जाना है। संदेह के कारण आप बैठे रहेंगे और दुनिया आगे बढ़ती जाएगी। अपने मन में छुपे डरों को दूर करके विश्वास की ताकत को समझिए। ज्यादातर लोग संदेह इसलिए करते हैं, क्योंकि उनके मन में नकारात्मकता होती है।

उन्हें लगता है कि वे सफलता के काबिल नहीं है। अगर उन्हें थोड़ी सी विफलता मिलती है तो वे हार मान लेते हैं। इसकी बजाय विफलता मिलने पर ज्यादा ताकत के साथ आगे बढ़ना चाहिए। संदेह को दूर भगाएं। मन में विश्वास जगाएं कि आप आगे बढ़ सकते हैं, आप काबिल हैं और आप भी सफल हो सकते हैं।

– In English –

Will not doubt would success Shakespeare wrote, “our suspicions are a traitor. We can achieve success, which he cannot do because not only suspected padkar endeavours.”There is no such human according to work and a little bit too doubt stops the work and enthusiasm are defeated on. Doubt that instead should be more inclined to trust. Striving to move forward in human life and endeavour goes awry due to doubts. Reduces the enthusiasm of individual suspicion. Due to the suspicion is the right person waits of time. It will work on that reasonable opportunity. Those who doubt their abilities, they always live in a dilemma whether to even start that work. They always keep to avoid work. They always feel that there is just the right time. They may not be able to determine your direction and around languish. Rigid suspiciously must instill confidence in mind for what is success will of course began to work. If the person believes in his mind that he is working for a big prize and win would be the same, then success is sure. Faith is a tonic, which gives all powers of the active person. Doubt stops the person try and believe in odds because he moves forward. Now it’s up to you to whom you choose. To overcome the doubts in the minds of her desire is also required. As long as you do not suspect himself, he could not prevail upon you. Get a saying, “surely you’re right and then moving on to decide to go, don’t spend all day on the two.” I only believe that, instead of doubting a thing or situation you will immediately the fast decisions may be able to elevate. You have to understand his mind and decide whether you where to go. Doubt you will be seated and the world will grow further. By removing hidden in your mind and persisted in faith know the power of. Most people suspect so, because his mind is negativity. They think they don’t deserve the success. If they lose the slightest failure if they assume. Instead when a failure should move forward with more force. The suspicion bhagaen. Jagaen believe in mind that you can proceed, you deserve it and you too can be successful. 

Priyank Dubey

Roorkee-Uttarakhand

We are grateful to Priyank Dubey Ji for sharing this inspirational Hindi story with KMSRAJ51 readers.

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सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।

यह गिफ्ट में या धनी परिवार में पैदा होने से नहीं मिलती है।

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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* चांदी की छड़ी।

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Meditation For Personality Transformation

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Kmsraj51-CYMT08

Meditation For Personality Transformation

At the heart of every human being or soul there is a spiritual energy, pure, of peace, love, truth and happiness without dependence. Being aware and experiencing this energy provides you with the inner strength necessary for change. Meditation is the method of access in order to allow that energy to come to the surface of your consciousness and in your mind in order to color your thoughts and feelings. In a way very similar to that of a volcano whose melted lava, hot, flows from the centre of the Earth to the surface, we, on meditating, can create volcanoes of power (which emerge in our conscious minds) required for personality transformation.

You can do an exercise, a meditation whereby you choose a habit or sanskar that you don’t want, and you will replace it with a characteristic that you would like to incorporate, like a thread, into the cloth of your personality. For example, replace impatience with patience.

Decide on a habit that you want to change e.g. impatience. We will focus this meditation on changing impatience. You can apply it to other habits also:

I relax and prepare to look inwards…
I am aware of the unwanted habit of becoming impatient…
As I sit in meditation, I relax my body.
I become the observer of my own thoughts and feelings…
Realizing my true identity as soul – a subtle point of light situated at the center of my forehead, just above my eyebrows, I remember my real nature is one of calmness, peace and power…
I focus on the power of peace, inviting it in and welcoming it into my thoughts and feelings from deep within…. enjoying the calm contentment which it brings…
On the screen of my mind, I begin to visualize patience…
I see myself in a situation where I normally become impatient…
I now see myself as being completely full with the virtue of patience…
I shape my feelings around the idea and image of patience…. unhurried and relaxed… calm and watchful…
If necessary, I can wait… forever…. with patience
I am free of the desire for certain outcomes…
I see how I respond with patience…
I see the effect of my patience in others within the situation…
I now know how I will speak with patience, walk with patience and act patiently in the real life situations…
I maintain this peace, which generates serenity and patience in me…

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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प्रभु जरुर खुश होंगे।

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एक बार एक अजनबी किसी के घर गया। वह अंदर गया और मेहमान कक्ष मे बैठ गया। वह खाली हाथ आया था तो उसने सोचा कि कुछ उपहार देना अच्छा रहेगा। तो उसने वहा टंगी एक पेन्टिंग उतारी और जब घर का मालिक आया,उसने पेन्टिंग देते हुए कहा, यह मै आपके लिए लाया हुँ। घर का मालिक, जिसे पता था कि यह मेरी चीज मुझे ही भेंट दे रहा है, सन्न रह गया। अब आप ही बताएं कि क्या वह भेंट पा कर, जो कि पहले से ही उसका है, उस आदमी को खुश होना चाहिए ? मेरे ख्याल से नहीं। लेकिन यही चीज हम भगवान के साथ भी करते है। हम उन्हें फूल, फल और हर चीज जो उनकी ही बनाई है, उन्हे भेंट करते हैं और सोचते हैं कि ईश्वर खुश हो जाएगें। हम यह नहीं समझते कि उनको इन सब चीजो कि जरुरत नही। अगर आप सच मे उन्हे कुछ देना चाहते हैं तो अपना प्यार दीजिए उन्हे अपने हर एक श्वास मे याद करके और विश्वास मानिए प्रभु जरुर खुश होंगे ।

English-

Once an alien has the inside someone’s House and guests sat in the room came up empty handed so she thought that would be nice to give some gifts so he find the owner of the House and launched a tangi came when painting, he said, were painting it I brought for you at work. the master of the House, which knew it is only offering me my stuffTell you now, shocking live. whether it can find, which is already offering his, that man should be happy? My guess is no, but the same thing we do with God we have them flowers, fruits and everything that has made his own, called them and think that God will be happy we don’t understand that they don’t need all these things with that. If you really want to give them something in your love remember every single breathing them in your hand and believe will be happy the Lord manie notice.

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kmsraj51 की कलम से …..

Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

-KMSRAJ51 

 

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अर्श रोग (बवासीर)-Piles – का आयुर्वेदिक उपचार

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अर्श रोग (बवासीर)-Piles 

Piles -अर्श रोग - बवासीर

अर्श रोग (बवासीर)-Piles

बवासीर गुदा मार्ग की बीमारी है । यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है — खूनी बवासीर और बादी बवासीर। इस रोग के होने का मुख्य कारण ” कोष्ठबद्धता ” या ”कब्ज़ ” है। कब्ज़ के कारण मल अधिक शुष्क व कठोर हो जाता है और मल निस्तारण हेतु अधिक जोर लगाने के कारण बवासीर रोग हो जाता है। यदि मल के साथ बूंद -बूंद कर खून आए तो उसे खूनी तथा यदि मलद्वार पर अथवा मलद्वार में सूजन मटर या अंगूर के दाने के समान हो और मल के साथ खून न आए तो उसे बादी बवासीर कहते हैं। अर्श रोग में मस्सों में सूजन तथा जलन होने पर रोगी को अधिक पीड़ा होती है।

बवासीर का विभिन्न औषधियों द्वारा उपचार —

१- जीरा – एक ग्राम तथा पिप्पली का चूर्ण आधा ग्राम को सेंधा नमक मिलाकर छाछ के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से बवासीर ठीक होती है।

२- जामुन की गुठली और आम की गुठली के अंदर का भाग सुखाकर इसको मिलाकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में हल्के गर्म पानी या छाछ के साथ सेवन से खूनी बवासीर में लाभ होता है। 

३- पके अमरुद खाने से पेट की कब्ज़ दूर होती है और बवासीर रोग ठीक होता है।

४- बेल की गिरी के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर , ४ ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ मिलता है।

५- खूनी बवासीर में देसी गुलाब के तीन ताज़ा फूलों को मिश्री मिलाकर सेवन करने से आराम आता है।

६ – जीरा और मिश्री मिलकर पीस लें। इसे पानी के साथ खाने से बवासीर (अर्श ) के दर्द में आराम रहता है।

७- चौथाई चम्मच दालचीनी चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन एक बार लेना चाहिए। इससे बवासीर नष्ट हो जाती है।

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पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

मैं श्री आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का बहुत आभारी हूँ!!

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पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

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KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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पिपरमिंट (Peppermint)

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पिपरमिंट (Peppermint) –

पिपरमिंट (Peppermint) -

पिपरमिंट (Peppermint)

यह विश्व में यूरोप,एशिया,उत्तरी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। समस्त भारत में यह बाग़-बगीचों में विशेषतः उत्तर भारत तथा कश्मीर में लगाया जाता है। यह अत्यंत सुगन्धित क्षुप होता है। इसके तेल,सत तथा स्वरस आदि का चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। इसके पुष्प बैंगनी,श्वेत अथवा गुलाबी वर्ण के तथा पुष्पदण्ड के अग्र भाग पर लगे होते हैं। इसके फल चिकने अथवा खुरदुरे तथा बीज छोटे होते हैं। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल सितम्बर से अप्रैल तक होता है।

पिपरमिंट का औषधीय प्रयोग –

१- पिपरमिंट के क्रिस्टल को दांतों के बीच में रखकर दबाने से दांत दर्द में लाभ होता है ।

२- पिपरमिंट को छाती पर लगाने से श्वसन संस्थान गत सूजन में लाभ होता है ।

३- पिपरमिंट क्रिस्टल का सेवन करने से उलटी,अतिसार,आध्मान तथा अजीर्ण में लाभ होता है ।

४- २५ ग्राम पिपरमिंट सत में शक्कर मिलाकर सेवन करने से पेटदर्द तथा पेट के विकार ठीक होते हैं ।

५- पिपरमिंट के पत्तों को पीसकर लगाने से चींटी आदि कीटों के काटने से होने वाली वेदना का शमन होता है ।

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In English

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Exercise On Self Discovery

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Exercise On Self Discovery

Mera Baba

मेरा बाबा

Exercise On Self Discovery – Part 1

Many people today do not have a clear sense of identity. In fact, when you ask people about the image they have of themselves, it is usually negative, and they see their weaknesses (negative sanskaras) and mistakes committed in the past more easily than their qualities (positive sanskaras) and achievements. This negative image of oneself leads us to an identity crisis. A negative image causes feelings of dissatisfaction to accumulate within oneself. Then our lifestyle is affected by the need for recognition and approval, by the need to justify ourselves, of obtaining material achievements and success.

Given below is an exercise to experience your true self:
Sit back and observe yourself. What is the image you have of yourself? How do you see yourself? Who are you really? What is there left when you have removed all the labels? Are you thoughts, feelings, free will, energy, ideas, being, conscience, intellect, life? What do the majority have in common? They are internal, incorporeal and invisible: they are non-physical aspects. The true self is incorporeal and invisible.

Now experience your ideal self: Make a list of which qualities you think your ideal self should have, the self you deeply long to be and experience in your life. The list may include qualities such as: joyful, tolerant, generous, fearless, free, loving, among others.

— Message —

To see specialities in all is to become special.

Projection: Most of the time, I’m caught up in looking at people’s negativity. When I see some negative quality in someone, I immediately make his specialities a background and start focusing on his negative traits. The more I think of these negative qualities, the more they occupy my conscious mind, changing my reactions too.

Solution: It is natural to be coloured or influenced by what I see. If I see specialities, I’ll take on a little of that and if I see weaknesses, I’ll take on a little of that too. So I need to make an attempt to look at only specialities and encourage others too to use their specialities.

 


 

Exercise On Self Discovery – Part 2

Think about which qualities you need to possess as a professional or as a homemaker e.g. qualities of a team leader in a corporate organization would be: efficiency, responsibility, focus, precision, determination, etc. Then, leaving aside the professional aspect, explore your basic, innate qualities. Reflect on your inner and spiritual values. Which values make you happy? Look deep into your inner self. Take some time in this and note down three of these essential values in your life. What conclusion have you come to? What are these values?

The more we really understand ourselves, with our defects, weaknesses, virtues and values, the better our relationships will be with others. We will understand when they have little understanding of themselves and others. Knowing oneself in-depth, taking into account everything described above as well as in yesterday’s message, requires time, effort, observation and the practice of silence. In silence one can begin a conversation with oneself. In this way we can gradually discover our inner beauty and strength, and be aware of the basis of our value and dignity as human beings. When we relearn to see ourselves with our original qualities and innate values, it is also easier to recognise these qualities in others.

— Message —

To do a task with love is to be constantly successful.

Projection: When I start with something new, I usually notice that I’m successful for sometime, but I do not experience long lasting success. This is because I did the task on being told or being forced by the situation. External force makes me use my resources with commitment for sometime.

Solution: Love brings constant success because once I’ve experienced the joy of doing the task itself, I’ll never give it up. Because it is done with love, I’ll put in all my resources and do my best. So I’ll experience constant success.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

आपका दोस्त

कृष्ण मोहन सिंह ५१

Note::-

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CYMT-KMSRAJ51

 

पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है.

यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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ईश्वर पर विश्वास रखें

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ईश्वर पर विश्वास रखें!

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ईश्वर पर विश्वास रखें!

एक दिन एक छोटे बच्चे ने अपनी माँ को उपवास करते देखा। उसने माँ से पुछा कि वो खा क्यो नही रही है और उसे पेट दर्द हो रहा होगा, तो माँ ने कहा कि मै ये
इसलिए कर रही हूँ ताकि भगवान हमारी मनोकामना पूरी करेंगे। बच्चे ने सोचा हो सकता है खुद को तकलीफ देने से उसे भी जो चाहिए वो मिल जाएगा। अगले
दिन माँ ने देखा कि उसका बेटा कड़ी धूप मे खड़ा है। माँ ने कारण पूछा तो बच्चे ने कहा, उसे एक खिलौना चाहिए इसलिए वह अपने आपको तकलीफ दे रहा था। तो माँ ने कहा, बेटे अगर तुम मुझसे प्यार से मांगते तो मै तुम्हे खिलौना ला देती, मुझ पर विश्वास करो ऒर तुम्हे अपने आप को दर्द देने की जरुरत नही। मै तुमसे प्यार करती हूँ और इस तरह तुम्हे नही देख सकती। तो बच्चे ने कहा, क्या भगवान तुमसे प्यार नही करते ? वह तुम्हे उपवास करते और तकलीफ लेते देख खुश होते है? तुम भी तो उनसे प्यार से, बिना दर्द लिए, जो चाहिए मांग सकती हो!!


ईश्वर पर विश्वास रखें…..

सामान्य जीवन जियें…

विनम्रता से चलें और..

ईमानदारी पूर्वक प्यार करें…

आपका दोस्त

कृष्ण मोहन सिंह ५१

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Wearing The Crown Of Servant Leadership Gracefully

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Wearing The Crown Of Servant Leadership Gracefully – Part 1

Mera Baba

मेरा बाबा

It is commonly stated that perhaps those who are best suited to leadership power are those who never seek it. On the other hand, those who have leadership thrust upon them, and take up the mantle because they must, find to their own surprise that they wear it well. This process starts as early as our school life, when we become monitors and prefects and are granted significant responsibilities. We learn leadership at a young age. The type of leadership skills we inculcate at that age are important.

Importantly, a good leader, starting at an early age, should inspire and not aspire. Personal aspirations that are regardless (irrelevant) to others always convert a humble and successful leader into a failed one. A good leader should influence, not control – controlling i.e. passing orders, policies, rules, goals, targets, reports, visions and changes to force team members to work the way they believe it should be done; failing to listen or only perfunctorily listening (listening with little interest); exhibiting the “Do as I say, not as I do” mentality and providing inadequate support. Negative thoughts, words, actions or inactions expressing emotions like:

* Why aren’t they performing better?

* What’s wrong with that person?

* Why don’t they know their job?

* They should know their job!

lead team members to believe that leaders disrespect them and do not care for them at all. It results in failure of an organization or the task in hand.

Message

The one who has attention on the self is the one who constantly experiences progress.

Projection: Whenever I am faced with a situation, it is very easy to think and talk about others and their mistakes. I hardly have any time to look at and understand myself and my mistakes. I then continue to repeat the same mistakes again and again.

Solution: Whatever the kind of situations I am faced with, I need to remind myself that I am the one who is going to benefit by bringing about a change in myself. So with this thought I need to constantly continue to check myself and bring about a positive change in myself.


Wearing The Crown Of Servant Leadership Gracefully – Part 2

A good leader, before orchestrating (controlling) his team members will learn to orchestrate (control) his inner orchestra of thoughts, feelings, attitudes, emotions, moods and perceptions to create the desired tune or team result. When leaders become dictators or start orchestrating (controlling) their team members first, the fall of the team gets certain. A good leader is characterized by the way he makes his fellow members work as a team with him being a part of it. Misuse of leader power has a negative effect on team members’ perceptions of the leader’s ability and desire to engage in open communication. Because open communication is vital to any project, these perceptions can hurt team performance. These negative effects of leader power can be virtually eliminated simply by clearly communicating the idea that every team member is individually instrumental for any given task at hand.

Traditional leadership generally involves the accumulation and exercise of power by one at the “top of the pyramid”. By comparison, the servant leader shares power and puts the needs of others first and helps people develop and perform as highly as possible. Servant leaders spread an energy of trust in the group, which catalyzes higher levels of engagement of team members, greater involvement of their effort and ideas and greater speed in change and creation of the new, which is the objective of every team. As a result, an excellent team culture is developed.

Message

To be free from negative thoughts is to be free from punishment.

Projection: Whenever there is a negative situation I tend to react very negatively to it. I tend to have a lot of negative thoughts and experience a lot of difficulty at that time. I then begin to blame the situation and feel that I am facing punishment because of it.

Solution: I need to understand the fact that the biggest punishment I experience is through my own negative thoughts. The more I can free myself from these kind of negative thoughts I can free myself from experiencing any kind of punishment.


 Wearing The Crown Of Servant Leadership Gracefully – Part 3

Servant leaders are sacrificial leaders, ready to make the sacrifice when required. We explain with an example –

Jessica and Ruchika were close childhood and school friends. Jessica was the Head Girl of the school. One day there was a home assignment to be completed by the class. Jessica had forgotten to complete her assignment. She was afraid of the consequences and even more of the humiliation that she was not ready to face being in such a respectable post. She was also afraid of Ruchika’s assignment as being selected as the best one by the class teacher. Jessica’s mind was in a state of turmoil. On one hand was her self identity based on her role of the Head Girl and also the attachment to the same and on the other hand was her friendship and the voice of her conscience. If she chose the former and prevented Ruchika’s homework from being selected as the best, she would be seen in the same light as Ruchika and would save herself embarrassment. If she chose the latter and allowed Ruchika’s homework from being selected as the best, she would lose, but earn respect in the form of blessings and good wishes of her best friend Ruchika. Finally insecurity and the fear of loss of face in front of the class and the class teacher took grip over her. She chose the former, she harmed Ruchika’s homework and prevented Ruchika from submitting it on time and as a result prevented it from being adjudged as the best. She had won. Her ‘id’ – Head Girl had won. But the servant leader inside her had lost. Her relationship had lost. She did not pay heed to the voice of her conscience and her special relationship with Ruchika. As a result she brought about sorrow to her friend. Later on she repented and realized, that day she had not worn the crown of leadership well enough. She had not heard the voice of the servant leader inside her, a leader who could sacrifice the I and keep her friend ahead of her. She realized her mistake and decided to hear the voice henceforth.

Many times, while playing leadership roles, we are also faced with similar situations as Jessica found herself in, whether it’s in school, in the family, in our social circle or at the workplace, when we have to make a choice,when the I has to be sacrificed and the other has to be kept ahead – sometimes we do that easily, sometimes we find it difficult. There is a servant leader inside each one of us, which favours the sacrifice. We need to awaken that servant leader. Spiritual knowledge helps us in doing the same.

Message

Patience enables one to easily overcome obstacles.

Projection: Usually, when faced with obstacles there is an urgency to remove it without any proper planning. That means we want to overcome the obstacle without putting in any effort. And when it is not possible, it tends to create impatience and frustration in us.

Solution: It is important to do some internal work to overcome an obstacle. First, it is good to check to what extent there is faith in the self. With faith in ourselves, we need to plan out before we act to remove or overcome the obstacle and we will, then, find ourselves successful.


 Wearing The Crown Of Servant Leadership Gracefully – Part 4

Very often in a group or team, while moving towards a common goal or objective or purpose, the leader of the group or gathering is required to give his opinion to make the objective of the team possible. Servant leaders are extremely active, positive and authoritative in giving their ideas, when they are required to do so, but are able to keep a relationship of detachment with their ideas. They maintain a right balance ofauthority (while giving the idea) and humility (while accepting the result of the idea, the result could be rejection or even acceptance of the idea). Also servant leaders are detached when accepting or receiving or listening to ideas from team members. The more the attachment to one’s own ideas, the more will be the tendency to resist or reject the others’ ideas, which they do not do.

Also, when a leader starts misusing his leadership for his own good and greed, and becomes egoistic, his team members start staying away. Servant leaders, through their humility, become an inspiration for others. Experiencing power and autonomy is healthy, but when a false sense of ownership sets up in leadership and the leader starts taking his role for granted, it is the time when a leader will experience great downfall in his role as a leader.

Altogether, a good leader is one who uses his mind or law to handle himself and his heart or love to handle others which ultimately brings justice to his role. Such a leader who maintains this balance of love and law wears the crown of servant leadership gracefully through various stages of life, enjoying the respect and earning the good wishes of all whom he comes into contact with.

Message

To be free from negative thoughts is to be free from punishment.

Projection: Whenever there is a negative situation I tend to react very negatively to it. I tend to have a lot of negative thoughts and experience a lot of difficulty at that time. I then begin to blame the situation and feel that I am facing punishment because of it.

Solution: I need to understand the fact that the biggest punishment I experience is through my own negative thoughts. The more I can free myself from these kind of negative thoughts I can free myself from experiencing any kind of punishment.

 

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

Mera Baba

मेरा बाबा

 

 

 

 

 

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

 

 

 

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The Five Powers of a Focused Mind

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– The Five Powers of a Focused Mind –

Mera Baba

मेरा बाबा

The power of perception (understanding) allows us to see into things and truly understand them, with neither complication nor confusion.

The power of mindfulness, by which we absorb ourselves into any action or thought without interference or complication, further energizes us by allowing the power of our mind to become concentrated, freeing us from frustration, stress and anger.

The power of injection can permit us to energize others with our own positivity. As we help them to feel positive, good energy bounces back towards us to maintain the positive cycle.

The power of choice requires us to differentiate right from wrong, good from bad. Having done so, we can select our choice, and at every moment choose to be positive.

The power of inner energy can guide us into new things, encourage us to change where we feel uncomfortable with ourselves and help us to enjoy life completely.

Message

The one who is free from expectations is the one who is constantly cheerful.

Projection: Usually I am quick to percieve my own desires and I do realise that desires give sorrow. So I make effort to overcome them. But most often I am not able to recognise my own expectations that I have from people which destroy my own cheer. My expectations from others prevent me from bringing about a positive change in myself.

Solution: I need to recognise that each and every individual is unique with his own unique specialities and values. When I recognise this uniqueness I will not expect people to behave according to what I feel is right but will respect them for what they are. Thus I’ll be able to be constantly cheerful.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

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How Often And Why Do I Need To Meditate

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How Often And Why Do I Need To Meditate (Part 1)? 

Mera Baba

मेरा बाबा

As with anything else, the more we practice meditation, the more we feel the benefit of what we are doing. We do need to practice meditation regularly because the habits of:

i. identifying with our physical form,

ii. succumbing to mental and emotional negativity (in the form of waste and negative thoughts) along with negativity in words and actions,

iii. becoming attached to the physical as well as the non-physical, and

iv. being dependent upon the experience of physical stimulation of any sort (from e.g. food, movies, people, sports etc.) for happiness are extremely deep.

These habits have deepened over a period of many many births, because of repeating them regularly, due to a lack of spiritual awareness. As a result, in the present moment also we regularly and quite easily slip into these four habits.

Message

Truth is effective when it is combined with tact.

Projection: I usually react when something goes wrong. In the heat of the moment I give corrections and others don’t seem to understand. Then I tend to become confused, as it is difficult to make a choice whether to leave the situation as it is or to prove my point to the others.

Solution: Unless truth is combined with tact I cannot make people realise their mistakes. When I find something going wrong, I need to wait for the right time for saying what I have to. I also need to tell it in a way that the other person can understand. Only then will my words have their impact on others.

 

How Often And Why Do I Need To Meditate (Part 2)?

As explained yesterday, we regularly and quite easily slip into four main negative habits. So meditation is not only sitting in a quiet corner, and connecting with the self and the Supreme, at a couple of fixed times during the day, but it is also the way to gently remember and remind ourselves, many times in a day, that we as well as others, are souls or spiritual beings not physical beings, by detaching ourselves from actions and also while being involved in actions. These reminders given to the self over a period of time become natural and prevent us from succumbing to these four habits. Given below is a basic meditation, which you could use to remind yourself regularly during the day:

I have a body but this body is not me…
I have thoughts but these thoughts are not me …
I have feelings but these feelings are not me …
I have attitudes but these attitudes are not me …
I have emotions but these emotions are not me …
I have beliefs but these beliefs are not me …
I perform many actions through my sense organs, but these sense organs are not me…
I play many roles but I am not my roles…
I experience joy or sorrow through my sense organs, but these experiences are not me …
I am a soul – a being of energy, which is neither created nor can be destroyed, and my original and true nature is one of peace, love, joy and power…

Message

True service is to serve equally through thoughts, words and actions.

Projection: Whenever I think of serving others, I think of only serving through actions or maybe even through words. I never think of serving through my thoughts too. So sometimes I do find that my service is not complete and doesn’t have a true impact.

Solution: Before I can think of helping someone through words or through actions, I need to make sure I have good wishes for them. Only when my feelings for them are full of positive and powerful wishes can my service create its impact on others.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

Note::-

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

CYMT-T N H N K M S-KMSRAJ51

 

 

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Practical Exercise On Intellect Reawakening And Empowerment

Kmsraj51 की कलम से…..

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Practical Exercise On Intellect Reawakening And Empowerment

Mera Baba

मेरा बाबा

It has been estimated that for around 80% of our daily routine we are ruled by habits. This means that most of the time we go straight from thought (created by the mind) to action, without checking the quality of our thoughts. In this way, we bypass the intellect, and do not use our capacity to judge right from wrong and to make conscious decisions. What we need to do now is reawaken, use and empower the intellect, which is true spiritual empowerment.

Practical Exercise
Withdraw your attention from everything around you. Create a simple thought in your mind. Concentrate on the thought. Then use your intellect to judge to what extent the thought is right or wrong and what the quality of that thought is (is it a negative thought, a waste or unnecessary thought, a necessary thought, a positive one etc.?). If you decide it is not a good thought, leave it and create a better thought. In this way, you consciously exercise control of your mind and intellect thereby strengthening your mental and intellectual capacities. This will also help you regain your feelings of rule over the self.

If thoughts or images come from your memories or from sources outside your own mind while you are busy in this inner exercise, don’t give them any mental energy. Let them go and bring your attention back to your own ‘conscious’ creation (mentioned above).

Once, you have mastered this in this exercise; try the same process while you busy in your daily routine.

Message

The one with contentment is neither upset nor upsets others.

Projection: Many times I find that my words, actions or behaviour tends to upset others inspite of my not wanting to hurt them. I seem to be very happy with the situation, but others don’t seem to be. At that time I am not really able to understand the reason for this and I consider the others to be unreasonable.

Solution: I need to check myself when others are getting upset with me. I need to make effort to check and change myself constantly so that I am able to move along with the demands of time. This is what will bring about true contentment – such contentment that neither will I be upset nor will I upset others.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

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Purity is the foundation of true peace & happiness…..

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purity-kmsraj51

पवित्रता

पवित्रता सच शांति और खुशी का धार है.

In-English…..

 

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

 

In-Hindi…..

 

पवित्रता सच शांति और खुशी का धार है.

यह पके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

 

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