वाणी का व्यवहार

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

वाणी का व्यवहार

एक राजा थे। बन-विहार को निकले। रास्ते में प्यास लगी। नजर दौड़ाई एक अन्धे की झोपड़ी दिखी। उसमें जल भरा घड़ा दूर से ही दीख रहा था।
राजा ने सिपाही को भेजा और एक लोटा जल माँग लाने के लिए कहा।

सिपाही वहाँ पहुँचा और बोला- ऐ अन्धे एक लोटा पानी दे दे।
अन्धा अकड़ू था।
उसने तुरन्त कहा- चल-चल तेरे जैसे सिपाहियों से मैं नहीं डरता। पानी तुझे नहीं दूँगा। सिपाही निराश लौट पड़ा।

इसके बाद सेनापति को पानी लाने के लिए भेजा गया। सेनापति ने समीप जाकर कहा अन्धे। पैसा मिलेगा पानी दे।

अन्धा फिर अकड़ पड़ा। उसने कहा, पहले वाले का यह सरदार मालूम पड़ता है। फिर भी चुपड़ी बातें बना कर दबाव डालता है, जा-जा यहाँ से पानी नहीं मिलेगा।

सेनापति को भी खाली हाथ लौटता देखकर राजा स्वयं चल पड़े।

समीप पहुँचकर वृद्ध जन को सर्वप्रथम नमस्कार किया और कहा- ‘प्यास से गला सूख रहा है।

एक लोटा जल दे सकें तो बड़ी कृपा होगी।’
अंधे ने सत्कारपूर्वक उन्हें पास बिठाया और कहा- ‘आप जैसे श्रेष्ठ जनों का राजा जैसा आदर है।

जल तो क्या मेरा शरीर भी स्वागत में हाजिर है। कोई और भी सेवा हो तो बतायें।

राजा ने शीतल जल से अपनी प्यास बुझाई फिर नम्र वाणी में पूछा-
‘आपको तो दिखाई पड़ नहीं रहा है, फिर जल माँगने वालों को सिपाही, सरदार और राजा के रूप में कैसे पहचान पाये?’

अन्धे ने कहा- “वाणी के व्यवहार से हर व्यक्ति के वास्तविक स्तर का पता चल जाता है।”

दोस्तो वाणी उस तीर की तरह हाेती हैं, जाे एक बार कमान(धनुष) से निकलने के बाद वापस नहीं आती। इस लिए जब भी कुछ बाेलाे बहुँत सोच-समझ कर बाेलाे, आपकी वाणी में ऐसा मिठास हाें की सुनने वाला गदगद़(खुश) हाे जायें। ऐसी वाणी कभी ना बाेलाे, जिससे किसी काे दुःख पहुँचे।

आपका दोस्त – कृष्ण मोहन सिंह।

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।

 ~KMSRAJ51

CYMT-Kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

_______Copyright © 2014 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सफलता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सफलता।

संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सक्सेस शेक्सपियर ने लिखा था, “हमारे संदेह गद्दार हैं। हम जो सफलता प्राप्त कर सकते हैं, वह नहीं कर पाते, क्यूंकि संदेह में पड़कर प्रयत्न ही नहीं करते।” इंसान का स्वाभाव ही ऐसा होता है कि कोई काम शुरू करता है और थोडा सा भी संदेह होने पर काम को रोक देता है और उत्साह पर पानी फिर जाता है। संदेह कि बजाय इंसान को विश्वास को ज्यादा तरजीह देनी चाहिए।
जीवन में आगे बढ़ने के लिए इंसान प्रयत्न करता है और इस प्रयत्न पर संदेह के कारण पानी फिर जाता है। संदेह व्यक्ति के उत्साह को कम कर देता है। संदेह के कारण इंसान सही समय का इंतजार करता रह जाता है। उसे लगता है कि उचित अवसर आने पर काम करूंगा। जो लोग अपनी योग्यता पर शक करते हैं, वे हमेशा दुविधा में रहते हैं कि काम को शुरू भी किया जाए या नहीं। वे हमेशा काम को टालते रहते हैं। उन्हें हमेशा यही महसूस होता है कि अभी सही समय नहीं आया है। वे अपनी दिशा तय नहीं कर पाते और इधर-उधर भटकते रहते हैं। संदेह से पीछा छुड़ाने के लिए मन में विश्वास पैदा करना होगा कि जो काम शुरू किया है, उसमें सफलता जरूर मिलेगी।

“अगर सच्चे-मन से जीवन में कुछ करने की ठान लाे, ताे सफलता आपकाे जरुर मिलेगी।”-Kmsraj51

अगर व्यक्ति अपने मन में विश्वास रखे कि वह एक बड़े पुरस्कार के लिए काम कर रहा है और जीत उसी की होगी, तो सफलता निश्चित है। विश्वास एक टॉनिक है, जो इंसान की सारी शक्तियों को सक्रिय कर देता है। संदेह होने पर इंसान कोशिश करना बंद कर देता है और विश्वास के कारण वह मुश्किलों में भी आगे बढ़ता रहता है। अब यह आप पर है कि आप किसे चुनते हैं। मन में बैठे संदेहों को दूर करने के लिए सफलता की मनोकामना भी जरूरी है। जब तक आप खुद संदेह को मौका नहीं देते, तब तक वह आप पर हावी नहीं हो सकता। एक कहावत है, “निश्चय कर लो कि तुम सही हो और फिर आगे बढ़ते जाओ, पर सारा दिन निश्चय करने में व्यतीत मत कर दो।”

मेरा यही मानना है कि, किसी चीज या परिस्थिति पर शक करने की बजाय आपको तुरंत फैसले लेने होंगे, तभी तेजी से तरक्की कर पाएंगे। आपको अपने मन को समझना होगा और तय करना होगा कि आपको कहां जाना है। संदेह के कारण आप बैठे रहेंगे और दुनिया आगे बढ़ती जाएगी। अपने मन में छुपे डरों को दूर करके विश्वास की ताकत को समझिए। ज्यादातर लोग संदेह इसलिए करते हैं, क्योंकि उनके मन में नकारात्मकता होती है।

उन्हें लगता है कि वे सफलता के काबिल नहीं है। अगर उन्हें थोड़ी सी विफलता मिलती है तो वे हार मान लेते हैं। इसकी बजाय विफलता मिलने पर ज्यादा ताकत के साथ आगे बढ़ना चाहिए। संदेह को दूर भगाएं। मन में विश्वास जगाएं कि आप आगे बढ़ सकते हैं, आप काबिल हैं और आप भी सफल हो सकते हैं।

– In English –

Will not doubt would success Shakespeare wrote, “our suspicions are a traitor. We can achieve success, which he cannot do because not only suspected padkar endeavours.”There is no such human according to work and a little bit too doubt stops the work and enthusiasm are defeated on. Doubt that instead should be more inclined to trust. Striving to move forward in human life and endeavour goes awry due to doubts. Reduces the enthusiasm of individual suspicion. Due to the suspicion is the right person waits of time. It will work on that reasonable opportunity. Those who doubt their abilities, they always live in a dilemma whether to even start that work. They always keep to avoid work. They always feel that there is just the right time. They may not be able to determine your direction and around languish. Rigid suspiciously must instill confidence in mind for what is success will of course began to work. If the person believes in his mind that he is working for a big prize and win would be the same, then success is sure. Faith is a tonic, which gives all powers of the active person. Doubt stops the person try and believe in odds because he moves forward. Now it’s up to you to whom you choose. To overcome the doubts in the minds of her desire is also required. As long as you do not suspect himself, he could not prevail upon you. Get a saying, “surely you’re right and then moving on to decide to go, don’t spend all day on the two.” I only believe that, instead of doubting a thing or situation you will immediately the fast decisions may be able to elevate. You have to understand his mind and decide whether you where to go. Doubt you will be seated and the world will grow further. By removing hidden in your mind and persisted in faith know the power of. Most people suspect so, because his mind is negativity. They think they don’t deserve the success. If they lose the slightest failure if they assume. Instead when a failure should move forward with more force. The suspicion bhagaen. Jagaen believe in mind that you can proceed, you deserve it and you too can be successful. 

Priyank Dubey

Roorkee-Uttarakhand

We are grateful to Priyank Dubey Ji for sharing this inspirational Hindi story with KMSRAJ51 readers.

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।

यह गिफ्ट में या धनी परिवार में पैदा होने से नहीं मिलती है।

-Kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

_______Copyright © 2014 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

हिंदी-English-मुरली!!

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT09

हिंदी मुरली (23-Sep-2014)

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – यह वन्डरफुल सतसंग है जहाँ तुम्हें जीते जी मरना सिखलाया जाता है, जीते जी मरने वाले ही हंस बनते हैं”

प्रश्न:- तुम बच्चों को अभी कौन-सी एक फिकरात है?
उत्तर:- हमें विनाश के पहले सम्पन्न बनना है। जो बच्चे ज्ञान और योग में मजबूत होते जाते हैं, उन्हें मनुष्य को देवता बनाने की हॉबी (आदत) होती जाती है। वह सर्विस के बिना रह नहीं सकते हैं। जिन्न की तरह भागते रहेंगे। सर्विस के साथ-साथ स्वयं को भी सम्पन्न बनाने की चिंता होगी।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) लास्ट सो फर्स्ट जाने के लिए महावीर बन पुरूषार्थ करना है। माया के तूफानों में हिलना नहीं है। बाप समान रहमदिल बन मनुष्यों के बुद्धि का ताला खोलने की सेवा करनी है।
2) ज्ञान सागर में रोज़ ज्ञान स्नान कर परीज़ादा बनना है। एक दिन भी पढ़ाई मिस नहीं करनी है। भगवान के हम स्टूडेन्ट हैं-इस नशे में रहना है।

वरदान:- निश्चय और नशे के आधार से हर परिस्थिति पर विजय प्राप्त करने वाले सिद्धि स्वरूप भव
योग द्वारा अब ऐसी सिद्धि प्राप्त करो जो अप्राप्ति भी प्राप्ति का अनुभव कराये। निश्चय और नशा हर परिस्थिति में विजयी बना देता है। आगे चलकर ऐसे पेपर भी आयेंगे जो सूखी रोटी भी खानी पड़ेगी। लेकिन निश्चय, नशा और योग के सिद्धि की शक्ति सूखी रोटी को भी नर्म बना देगी। परेशान नहीं करेगी। आप सिद्धि स्वरूप की शान में रहो तो कोई भी परेशान नहीं कर सकता। कोई भी साधन हैं तो आराम से यूज करो लेकिन समय पर धोखा न दें – यह चेक करो।

स्लोगन:- निमित्त बन यथार्थ पार्ट बजाओ तो सर्व के सहयोग की मदद मिलती रहेगी।

English Murli (23-Sep-2014)

Essence: Sweet children, this is a wonderful spiritual gathering (satsung) where you are taught to die alive. Only those who die alive become swans.

Question: What one concern do you children have now?
Answer: That you have to become complete before destruction takes place. The children who become strong in knowledge and yoga develop the hobby of changing human beings into deities. They cannot stay without doing service. They continue to run around like genies. Together with doing service, they also have the concern to make themselves complete.

Essence for dharna:
1. In order to become first from being last make effort like a mahavir. Do not fluctuate in the storms of Maya. Become merciful like the Father and do the service of opening the locks on the intellects of human beings.
2. Bathe daily in the ocean of knowledge and become angels. Do not miss this study for a single day. Maintain the intoxication that you are God’s students.

Blessing: May you be an embodiment of success who gains victory over every adverse situation on the basis of faith and intoxication.
Through yoga, now attain such success that any lack of attainment also gives you the experience of attainment. Faith and intoxication make you victorious over every situation. As you progress further, you will have such test papers that you might have to eat dry chappatis, but faith, intoxication and the power of success in yoga will make even dry chappatis soft; you will not be distressed. Maintain the honour of being an embodiment of success and no one will be able to distress you. If you have any facilities, then use them comfortably, but check that you are not deceived at that time.

Slogan: Be an instrument and play your part accurately and you will continue to receive co-operation from everyone.

आध्यात्मिक सेवा में ब्रह्मकुमारी,

In Spiritual Service Brahmakumari,

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

 

Kmsraj51-CYMT08

 

 

_______Copyright © 2014 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

हिंदी और अंग्रेजी में मुरली

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-Kmsraj51

हिंदी मुरली (19-Sep-2014)

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – तुम सर्व आत्माओं को कर्मबन्धन से सैलवेज़ करने वाले सैलवेशन आर्मी हो, तुम्हें कर्मबन्धन में नहीं फँसना है”

प्रश्न:- कौन-सी प्रैक्टिस करते रहो तो आत्मा बहुत-बहुत शक्तिशाली बन जायेगी?
उत्तर:- जब भी समय मिले तो शरीर से डिटैच होने की प्रैक्टिस करो। डिटैच होने से आत्मा में शक्ति वापिस आयेगी, उसमें बल भरेगा। तुम अण्डर-ग्राउण्ड मिलेट्री हो, तुम्हें डायरेक्शन मिलता है – अटेन्शन प्लीज़ अर्थात् एक बाप की याद में रहो, अशरीरी हो जाओ।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) लाइट हाउस बन सबको शान्तिधाम, सुखधाम का रास्ता बताना है। सबकी नईया को दु:खधाम से निकालने की सेवा करनी है। अपना भी कल्याण करना है।
2) अपने शान्त स्वरूप स्थिति में स्थित हो शरीर से डिटैच होने का अभ्यास करना है, याद में आंखे खोलकर बैठना है, बुद्धि से रचता और रचना का सिमरण करना है।

वरदान:- कोई भी बात कल्याण की भावना से देखने और सुनने वाले परदर्शन मुक्त भव
जितना संगठन बड़ा होता जाता है, बातें भी उतनी बड़ी होंगी। लेकिन अपनी सेफ्टी तब है जब देखते हुए न देखें, सुनते हुए न सुनें। अपने स्वचिंतन में रहें। स्वचिंतन करने वाली आत्मा परदर्शन से मुक्त हो जाती है। अगर किसी कारण से सुनना पड़ता है, अपने आपको जिम्मेवार समझते हो तो पहले अपनी ब्रेक को पावरफुल बनाओ। देखा-सुना, जहाँ तक हो सका कल्याण किया और फुल स्टॉप।

स्लोगन:- अपने सन्तुष्ट, खुशनुम: जीवन से हर कदम में सेवा करने वाले ही सच्चे सेवाधारी हैं।

English Murli (19-Sep-2014)

Essence: Sweet children, you are the Salvation Army who will salvage all souls from their karmic bondages. You must not become trapped in karmic bondages.

Question: What should you continue to practise so that the soul becomes very powerful?
Answer: Whenever you have time, practise becoming detached from the body. By becoming detached, the soul will regain power and become filled with strength. You are the underground military and are given the direction, “Attention please!”, that is, “Stay in remembrance of the one Father and become bodiless.”

Essence for dharna:
1. Become a lighthouse and show everyone the way to the land of peace and the land of happiness. Do the service of removing everyone’s boat from the land of sorrow. Also benefit yourself.
2. Remain stable in your peaceful form and practise becoming detached from your body. Sit in remembrance with your eyes open. Remember the Creator and creation with your intellect.

Blessing: May you be free from looking at others, and have feelings of benevolence when seeing or hearing about any situation.
The bigger the gathering, the bigger the situations will be. However, your safety lies in looking but not seeing and hearing but not listening. Maintain pure and positive thoughts for the self. Souls who maintain pure and positive thoughts for the self remain free from looking at others. If due to any reason you have to listen to anything and you consider yourself to be responsible, then, first of all, make your brake powerful. You saw, you heard and brought as much as benefit possible and put a full stop.

Slogan: Those who do service at every step through their contented and happy lives are true servers.

आध्यात्मिक सेवा में ब्रह्मकुमारी,

In Spiritual Service Brahmakumari,

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.comपसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

In-English…..

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

 

In-Hindi…..

पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है.

यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

~KMSRAJ51

CYMT-Beautiful Flower-kmsraj51

आप कुछ भी कर सकते हैं, स्वयं पर विश्वास करना सीखें।

You can also learn to trust themselves.

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

 

 

 

_____ all @rights reserve under Kmsraj51-2013-2014 ______

ईश्वर पर विश्वास रखें

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMS

ईश्वर पर विश्वास रखें!

Faith-God-kmsraj51

ईश्वर पर विश्वास रखें!

एक दिन एक छोटे बच्चे ने अपनी माँ को उपवास करते देखा। उसने माँ से पुछा कि वो खा क्यो नही रही है और उसे पेट दर्द हो रहा होगा, तो माँ ने कहा कि मै ये
इसलिए कर रही हूँ ताकि भगवान हमारी मनोकामना पूरी करेंगे। बच्चे ने सोचा हो सकता है खुद को तकलीफ देने से उसे भी जो चाहिए वो मिल जाएगा। अगले
दिन माँ ने देखा कि उसका बेटा कड़ी धूप मे खड़ा है। माँ ने कारण पूछा तो बच्चे ने कहा, उसे एक खिलौना चाहिए इसलिए वह अपने आपको तकलीफ दे रहा था। तो माँ ने कहा, बेटे अगर तुम मुझसे प्यार से मांगते तो मै तुम्हे खिलौना ला देती, मुझ पर विश्वास करो ऒर तुम्हे अपने आप को दर्द देने की जरुरत नही। मै तुमसे प्यार करती हूँ और इस तरह तुम्हे नही देख सकती। तो बच्चे ने कहा, क्या भगवान तुमसे प्यार नही करते ? वह तुम्हे उपवास करते और तकलीफ लेते देख खुश होते है? तुम भी तो उनसे प्यार से, बिना दर्द लिए, जो चाहिए मांग सकती हो!!


ईश्वर पर विश्वास रखें…..

सामान्य जीवन जियें…

विनम्रता से चलें और..

ईमानदारी पूर्वक प्यार करें…

आपका दोस्त

कृष्ण मोहन सिंह ५१

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@yahoo.inपसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

CYMT-KMSRAJ51

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

_____ all @rights reserve under Kmsraj51-2013-2014 ______

 

Wearing The Crown Of Servant Leadership Gracefully

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMS

Wearing The Crown Of Servant Leadership Gracefully – Part 1

Mera Baba

मेरा बाबा

It is commonly stated that perhaps those who are best suited to leadership power are those who never seek it. On the other hand, those who have leadership thrust upon them, and take up the mantle because they must, find to their own surprise that they wear it well. This process starts as early as our school life, when we become monitors and prefects and are granted significant responsibilities. We learn leadership at a young age. The type of leadership skills we inculcate at that age are important.

Importantly, a good leader, starting at an early age, should inspire and not aspire. Personal aspirations that are regardless (irrelevant) to others always convert a humble and successful leader into a failed one. A good leader should influence, not control – controlling i.e. passing orders, policies, rules, goals, targets, reports, visions and changes to force team members to work the way they believe it should be done; failing to listen or only perfunctorily listening (listening with little interest); exhibiting the “Do as I say, not as I do” mentality and providing inadequate support. Negative thoughts, words, actions or inactions expressing emotions like:

* Why aren’t they performing better?

* What’s wrong with that person?

* Why don’t they know their job?

* They should know their job!

lead team members to believe that leaders disrespect them and do not care for them at all. It results in failure of an organization or the task in hand.

Message

The one who has attention on the self is the one who constantly experiences progress.

Projection: Whenever I am faced with a situation, it is very easy to think and talk about others and their mistakes. I hardly have any time to look at and understand myself and my mistakes. I then continue to repeat the same mistakes again and again.

Solution: Whatever the kind of situations I am faced with, I need to remind myself that I am the one who is going to benefit by bringing about a change in myself. So with this thought I need to constantly continue to check myself and bring about a positive change in myself.


Wearing The Crown Of Servant Leadership Gracefully – Part 2

A good leader, before orchestrating (controlling) his team members will learn to orchestrate (control) his inner orchestra of thoughts, feelings, attitudes, emotions, moods and perceptions to create the desired tune or team result. When leaders become dictators or start orchestrating (controlling) their team members first, the fall of the team gets certain. A good leader is characterized by the way he makes his fellow members work as a team with him being a part of it. Misuse of leader power has a negative effect on team members’ perceptions of the leader’s ability and desire to engage in open communication. Because open communication is vital to any project, these perceptions can hurt team performance. These negative effects of leader power can be virtually eliminated simply by clearly communicating the idea that every team member is individually instrumental for any given task at hand.

Traditional leadership generally involves the accumulation and exercise of power by one at the “top of the pyramid”. By comparison, the servant leader shares power and puts the needs of others first and helps people develop and perform as highly as possible. Servant leaders spread an energy of trust in the group, which catalyzes higher levels of engagement of team members, greater involvement of their effort and ideas and greater speed in change and creation of the new, which is the objective of every team. As a result, an excellent team culture is developed.

Message

To be free from negative thoughts is to be free from punishment.

Projection: Whenever there is a negative situation I tend to react very negatively to it. I tend to have a lot of negative thoughts and experience a lot of difficulty at that time. I then begin to blame the situation and feel that I am facing punishment because of it.

Solution: I need to understand the fact that the biggest punishment I experience is through my own negative thoughts. The more I can free myself from these kind of negative thoughts I can free myself from experiencing any kind of punishment.


 Wearing The Crown Of Servant Leadership Gracefully – Part 3

Servant leaders are sacrificial leaders, ready to make the sacrifice when required. We explain with an example –

Jessica and Ruchika were close childhood and school friends. Jessica was the Head Girl of the school. One day there was a home assignment to be completed by the class. Jessica had forgotten to complete her assignment. She was afraid of the consequences and even more of the humiliation that she was not ready to face being in such a respectable post. She was also afraid of Ruchika’s assignment as being selected as the best one by the class teacher. Jessica’s mind was in a state of turmoil. On one hand was her self identity based on her role of the Head Girl and also the attachment to the same and on the other hand was her friendship and the voice of her conscience. If she chose the former and prevented Ruchika’s homework from being selected as the best, she would be seen in the same light as Ruchika and would save herself embarrassment. If she chose the latter and allowed Ruchika’s homework from being selected as the best, she would lose, but earn respect in the form of blessings and good wishes of her best friend Ruchika. Finally insecurity and the fear of loss of face in front of the class and the class teacher took grip over her. She chose the former, she harmed Ruchika’s homework and prevented Ruchika from submitting it on time and as a result prevented it from being adjudged as the best. She had won. Her ‘id’ – Head Girl had won. But the servant leader inside her had lost. Her relationship had lost. She did not pay heed to the voice of her conscience and her special relationship with Ruchika. As a result she brought about sorrow to her friend. Later on she repented and realized, that day she had not worn the crown of leadership well enough. She had not heard the voice of the servant leader inside her, a leader who could sacrifice the I and keep her friend ahead of her. She realized her mistake and decided to hear the voice henceforth.

Many times, while playing leadership roles, we are also faced with similar situations as Jessica found herself in, whether it’s in school, in the family, in our social circle or at the workplace, when we have to make a choice,when the I has to be sacrificed and the other has to be kept ahead – sometimes we do that easily, sometimes we find it difficult. There is a servant leader inside each one of us, which favours the sacrifice. We need to awaken that servant leader. Spiritual knowledge helps us in doing the same.

Message

Patience enables one to easily overcome obstacles.

Projection: Usually, when faced with obstacles there is an urgency to remove it without any proper planning. That means we want to overcome the obstacle without putting in any effort. And when it is not possible, it tends to create impatience and frustration in us.

Solution: It is important to do some internal work to overcome an obstacle. First, it is good to check to what extent there is faith in the self. With faith in ourselves, we need to plan out before we act to remove or overcome the obstacle and we will, then, find ourselves successful.


 Wearing The Crown Of Servant Leadership Gracefully – Part 4

Very often in a group or team, while moving towards a common goal or objective or purpose, the leader of the group or gathering is required to give his opinion to make the objective of the team possible. Servant leaders are extremely active, positive and authoritative in giving their ideas, when they are required to do so, but are able to keep a relationship of detachment with their ideas. They maintain a right balance ofauthority (while giving the idea) and humility (while accepting the result of the idea, the result could be rejection or even acceptance of the idea). Also servant leaders are detached when accepting or receiving or listening to ideas from team members. The more the attachment to one’s own ideas, the more will be the tendency to resist or reject the others’ ideas, which they do not do.

Also, when a leader starts misusing his leadership for his own good and greed, and becomes egoistic, his team members start staying away. Servant leaders, through their humility, become an inspiration for others. Experiencing power and autonomy is healthy, but when a false sense of ownership sets up in leadership and the leader starts taking his role for granted, it is the time when a leader will experience great downfall in his role as a leader.

Altogether, a good leader is one who uses his mind or law to handle himself and his heart or love to handle others which ultimately brings justice to his role. Such a leader who maintains this balance of love and law wears the crown of servant leadership gracefully through various stages of life, enjoying the respect and earning the good wishes of all whom he comes into contact with.

Message

To be free from negative thoughts is to be free from punishment.

Projection: Whenever there is a negative situation I tend to react very negatively to it. I tend to have a lot of negative thoughts and experience a lot of difficulty at that time. I then begin to blame the situation and feel that I am facing punishment because of it.

Solution: I need to understand the fact that the biggest punishment I experience is through my own negative thoughts. The more I can free myself from these kind of negative thoughts I can free myself from experiencing any kind of punishment.

 

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

Mera Baba

मेरा बाबा

 

 

 

 

 

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@yahoo.inपसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

CYMT-KMSRAJ51

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

 

 

 

_____ all @rights reserve under Kmsraj51-2013-2014 ______

 

The Five Powers of a Focused Mind

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMS

– The Five Powers of a Focused Mind –

Mera Baba

मेरा बाबा

The power of perception (understanding) allows us to see into things and truly understand them, with neither complication nor confusion.

The power of mindfulness, by which we absorb ourselves into any action or thought without interference or complication, further energizes us by allowing the power of our mind to become concentrated, freeing us from frustration, stress and anger.

The power of injection can permit us to energize others with our own positivity. As we help them to feel positive, good energy bounces back towards us to maintain the positive cycle.

The power of choice requires us to differentiate right from wrong, good from bad. Having done so, we can select our choice, and at every moment choose to be positive.

The power of inner energy can guide us into new things, encourage us to change where we feel uncomfortable with ourselves and help us to enjoy life completely.

Message

The one who is free from expectations is the one who is constantly cheerful.

Projection: Usually I am quick to percieve my own desires and I do realise that desires give sorrow. So I make effort to overcome them. But most often I am not able to recognise my own expectations that I have from people which destroy my own cheer. My expectations from others prevent me from bringing about a positive change in myself.

Solution: I need to recognise that each and every individual is unique with his own unique specialities and values. When I recognise this uniqueness I will not expect people to behave according to what I feel is right but will respect them for what they are. Thus I’ll be able to be constantly cheerful.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@yahoo.inपसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

CYMT-KMSRAJ51

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

 

 

 

_____ all @rights reserve under Kmsraj51-2013-2014 ______