मुस्कुराहट को अपनी आदत बनाओ, मजबूरी नहीं।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

संसार में खिले फूल और खिले चेहरे पसन्द किए जाते हैं। अगर आप चाहते हैं कि दुनियाँ का प्यार आपको भी मिले तो उसके लिए अपनी मुस्कान को मत छोड़ना। हर हाल में मुस्कुराइये इससे आपकी कई समस्याएँ हल हो जायेंगी।

मुस्कुराहट को अपनी आदत बनाओ, मजबूरी नहीं। मजबूरी में मुस्कुराना, मुस्कुराना नहीं अपितु मात्र दूसरों को दिखाना है और याद रखना दिखावा कभी टिकता नहीं। यह दिखावा आपके काम न आयेगा। दिखावा आपको दुनिया का चहेता नहीं बनाता अपितु दुनियाँ वालों की नजरों में आप चतुर, चालाक जरूर बन जाते हैं।

मुस्कान से मात्र आपका चित्र ही सुन्दर नहीं लगता, आपका व्यक्तित्व भी सुन्दर बनता है। सच्ची मुस्कान मात्र आपके आवरण को ही सुन्दर नहीं बनाती अपितु आपके आचरण को भी सुन्दर बनाती है।

Quotes by: Sri Sri Ravi Shankar Ji(Art of Living) 

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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* चांदी की छड़ी।

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50 अनमोल वचन हिंदी में | 50 Great Quotations In Hindi

50 अनमोल वचन हिंदी में | 50 Great Quotations In Hindi

1. जिसने  ज्न्यान  को  आचरण  में  उतार  लिया , उसने  ईश्वर  को  मूर्तिमान  कर  लिया  – विनोबा भावे 

2. अकर्मण्यता  का  दूसरा  नाम  मर्त्यु  है  – मुसोलिनी

3. पालने  से  लेकर  कब्र  तक  ज्ञान  प्राप्त  करते  रहो  – पवित्र कुरान

4. इच्छा  ही  सब  दूखो   का  मूल  है  – गौतम बुद्ध

5. मनुष्य  का  सबसे  बड़ा  शत्रु  उसका  अज्न्यान  है  – चाणक्य

6. आपका  आज  का  पुरुषार्थ  आपका  कल  का  भाग्य  है  – पालशिरू

7. क्रोध  एक  किस्म  का  क्षणिक  पागलपन  है  – महात्मा  गांधी

8. ठोकर  लगती  है  और  दर्द  होता  है  तभी  मनुष्य  सीख  पाटा  है  – महात्मा  गांधी

9. अप्रिय  शब्द  पशुओ  को  भी  नहीं  सुहाते  है  – गौतम बुद्ध 

10. नरम  शब्दों  से  सख्त  दिलो  को  जीता  जा  सकता  है  – सुकरात

11. गहरी  नदी  का  जल  प्रवाह  शांत  व  गंभीर  होता  है  – शेक्सपीयर

12. समय  और  समुद्र  की  लहरे  किसी  का  इंतज़ार  नहीं  करती  – अज्ञात

13. जिस  तरह  जौहरी  ही  असली  हीरे  की  पहचान  कर  सकता  है , उसी  तरह  गुनी  ही  गुणवान  की  पहचान  कर  सकता  है  – कबीर

14. जो  आपको  कल  कर  देना  चाहिए  था , वही  संसार  का  सबसे  का थीं  कार्य  है  – कन्फ्यूशियस

15. ज्ञानी   पुरुषो  का  क्रोध  भीतर  ही , शान्ति  से  निवास  करता  है , बाहर  नहीं  – खलील  जिब्रान

16. कुबेर  भी  यदि  आय  से  अधिक  व्यय  करे  तो  निर्धन  हो  जाता  है  – चाणक्य

17. डूब  की  तरह  छोटे  बनाकर  रहो . जब  घास -पात  जल  जाते  है  तब  भी  डूब  जस  की  तस  बनी  रहती  है  – गुरु  नानक  देव

18. ईश्वर  के  हाथ  देने  के  लिए  खुले  है . लेने  के  लिए  तुम्हे  प्रयत्न  करना  होगा  – गुरु  नानक  देव 

19. जो  दूसरो  से  घृणा  करता  है  वह  स्वय  पतित  होता  है  – स्वामी विवेकानंद

20. जो  जैसा  शुभ  व  अशुभ  कार्य  करता  है , वो  वैसा  ही  फल  भोगता  है  – वेदव्यास 

21. मनुष्य  की  इच्छाओ  का  पेट  आज  तक  कोइ  नहीं  भर  सका  है  – वेदव्यास 

22. नम्रता  और  मीठे  वचन  ही  मनुष्य  के  सच्चे  आभूषण  होते  है  – तिरूवल्लुवर 

23. खुदा  एक  दरवाजा  बंद  करने  से  पहले  दूसरा  खोल  देता  है , उसे  प्रयत्न  कर  देखो  – शेख  सादी

24. बुरे  आदमी  के  साथ  भी  भलाई  करनी  चाहिए  – कुत्ते  को  रोटी  का  एक  टुकड़ा  डालकर  उसका  मुंह  बंद  करना  ही  अच्छा  है  – शेख  सादी 

25. अपमानपूर्वक  अमरत  पीने  से  तो  अच्छा  है  सम्मानपूर्वक  विषपान  – रहीम 

26. थोड़े  से  धन  से  दुष्ट  जन  उन्मत्त  हो  जाते  है  – जैसे  छोटी , बरसाती  नदी   में  थोड़ी  सी  वर्षा  से  बाढ़  आ  जाती  है  – गोस्वामी  तुलसीदास 

27. ईश  प्राप्ति  (शान्ति ) के  लिए  अंत: कारन  शुद्ध  होना  चाहिए  – रविदास 

28. जब  मई  स्वय  पर  हँसता  हूँ  तो  मेरे  मन  का  बोज़  हल्का  हो  जाता  है  – टैगोर 

29. जन्म  के  बाद  मर्त्यु , उत्थान  के  बाद  पतन , संयोग  के  बाद  वियोग , संचय  के  बाद  क्षय  निश्चित  है . ज्ञानी इन  बातो  का  ज्न्यान  कर  हर्ष  और  शोक  के  वशीभूत  नहीं  होते  – महाभारत  

30. जननी  जन्मभूमि  स्वर्ग  से  भी  बढाकर  है – अज्ञात

31. भरे  बादल  और  फले  वर्कश  नीचे  ज़ुकारे  है , सज्जन  ज्न्यान  और  धन  पाकर  विनम्र  बनाते  है – अज्ञात

32. सोचना, कहना  व  करना  सदा   सम्मान  हो – अज्ञात

33. न   कल  की  न  काल  की  फिकर  करो , सदा  हर्षित  मुख  रहो – अज्ञात

34. स्व  परिवर्तन  से  दूसरो  का  परिवर्तन  करो – अज्ञात

35. ते  ते  पाँव   पसारियो   जेती  चादर  होय – अज्ञात

36. महान  पुरुष  की  पहली  पहचान  उसकी  विनम्रता  है – अज्ञात

37. बिना  अनुभव  कोरा  शाब्दिक  ज्न्यान  अँधा  है – अज्ञात

38. क्रोध  सदैव  मूर्खता   से  प्रारम्भ  होता  है  और  पश्चाताप  पर  समाप्त – अज्ञात

39. नारी  की  उन्नति  पर  ही  राष्ट्र  की  उन्नति  निर्धारित  है – अज्ञात

40. धरती  पर  है  स्वर्ग  कहा  – छोटा  है  परिवार  जहा – अज्ञात

41. दूसरो  का  जो  आचरण  तुम्हे  पसंद  नहीं , वैसा  आचरण  दूसरो  के  प्रति  न  करो – अज्ञात

42. नम्रता  सारे  गुणों  का  दर्द  स्तम्भ  है – अज्ञात

43. बुद्धिमान  किसी  का  उपहास  नहीं  करते  है – अज्ञात

44. हर  अच्छा  काम  पहले असंभव  नजर  आता  है – अज्ञात

45. पुस्तक  प्रेमी  सबसे  धनवान  व  सुखी  होता  है – अज्ञात

46. सबसे   उत्तम  बदला  क्षमा  करना  है – अज्ञात

47. आराम  हराम  है – अज्ञात

48. दो  बच्चो  से  खिलाता  उपवन , हंसते -हंसते  कटता  जीवन – अज्ञात

49. अगर  चाहते  सुख  समर्द्धि , रोको  जनसंख्या  वर्द्धि – अज्ञात

५०. कार्य  मनोरथ  से  नहीं , उद्यम  से  सिद्ध  होते  है . जैसे  सोते  हुए  सिंह  के  मुंह  में  मुर्गे अपने  आप  नहीं  चले  जाते  – विष्णु  शर्मा!

प्रेम बांटने से प्रेम मिलता है।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ प्रेम बांटने से प्रेम मिलता है। ϒ

  • जीवन जीने के लिए है और वह भी अच्छी तरह से। तुम सबसे प्रेम करो और यह वैसा प्रेम हो जिसमें वियोग दुख नहीं देता है। तुम बहो नदी की तरह-लय में और अपने ज्ञान रूपी रेत के कण बांटते जाओ – दूसरों को, ताकि इस रेत से दूसरों के सुन्दर – सुन्दर घर बन सकें। जहां गति है वहीं दूरियां खत्म हो जाती हैं और तुम से जब दूसरों को कुछ प्राप्त होता है, तो यह अनुभव तुम्हें बेहद खुशी देता है।
  • आम की गुठली को देखकर ही उसके वृक्ष की पूरी आकृति याद आ जाती है या किसी देश का लहराता हुआ झंडा देखकर उससे संबंधित सारी बातें मन में विचारों के रूप में गुजरने लगती हैं। इस तरह से इस दुनिया में जो भी चीजें हैं वे बहुत सारी दूसरी चीजों से भी जुड़ी होती हैं। हर चीज बहुत सारी चीजों का प्रतीक है जैसे कलम भर कहने से कागज, स्याही, पुस्तकों के चित्र उभर कर सामने आ जाते हैं इस तरह के प्रतीक किसी भी पाठ के नोट्स बनाने के काम में मदद करते हैं।
  • नदियां हम से कहती हैं कि जब उनमें बहाव है तो एक न एक छुपी ताकत भी है जो उन्हें आगे की ओर भेज रही है। लेकिन वह ताकत अदृश्य है। ऐसा ही हर पाठ के साथ होता है।  जो लिखे हुए शब्द और विषय हैं, वे तो सामने हैं किन्तु उनके पीछे एक उद्देश्य होता है, यानि उन्हें पढऩे का कारण। ऐसे कारणों की जानकारी हमेशा पाठ को अच्छी तरह से समझने में मदद करती है।
  • शरीर में थोड़ा सा भी जख्म हुआ नहीं कि खून बहने लगा। नाव में छोटा सा भी छेद हुआ नहीं कि पानी भरने लगा। इस तरह की कितनी ही घटनाएं होती हैं जो तुम्हारे न चाहते हुए भी अपने आप घटने लगती है। जो बुरी चीजें हैं उनकी ओर तुमने जरा सा ध्यान दिया तो वे अपने आप तुम्हारे पास आने लगती हैं। इन चीजों पर बिल्कुल भी ध्यान न देकर अपने आपको बचाया जा सकता है। हमारा मन इसी तरह से काम करता है। जिन चीजों पर थोड़ा सा भी ध्यान दिया वही चीजें सक्रिय हो गईं।
  • हर चीज जो मौजूद है उसका एक इतिहास होता है तथा उससे जुड़ी बहुत सी बातें भी। धीरे- धीरे थोड़ा-थोड़ा करके ऐसी बहुत सारी चीजों को जाना जा सकता है। कई बार एक ही विषय को अलग-अलग पुस्तकों का अध्ययन करके बहुत सारी नई जानकारियां इकट्ठी कर ली जाती हैं और नया लेख तैयार हो जाता है। हमें कभी भी अपने ज्ञान को सीमा में नहीं बांधना चाहिए। हमेशा विचारों को विस्तृत और खुला रखना चाहिए। जैसे एक पतंग के उडऩे का कोई निश्चित मार्ग नहीं होता, कहीं भी वह उड़ सकती है और वापस लौट सकती है।
  • पत्रों में हमारी गहरी निजी भावनायें छिपी होती हैं। वे गाढ़े शहद की तरह हैं। एक सैनिक ही पत्रों का महत्व जानता है या कोई प्रेमी। इन पत्रों को व्यर्थ की चीज नहीं समझकर मन बहलाने का सशक्त साधन मानना चाहिए। जो मित्र तुमसे बिछुड़ गए थे उनसे भी पत्रों के द्वारा  संपर्क बनाये रखा जा सकता है। ये पत्र कभी भी काम चलाऊ नहीं होने चाहिए बल्कि पूरी तन्मयता से लिखे होने चाहिएं। एक पत्र में तुम अपने मन की पूरी बातें कह सकती हो और तुम्हारा पत्र मिलने पर दूसरे भी उसी के अनुरूप तुम्हें पत्र लिखते हैं। एक अच्छा पत्र प्राय: जिन्दगी भर हमारे साथ रहता है एवम् उसे बार-बार पढऩे से सुख मिलता है।
  • शरीर चाहे घुप्प अंधेरे में हो या पानी के तल में अपने भीतर सांस भरने का प्रयत्न कभी नहीं छोड़ेगा। हमारा स्वभाव ही है जानना और सीखना। जब तक उसे यह नहीं मिल जाता उसे पूरी तरह से, तृप्ति नहीं होती। कहीं भी मीठा रखो अपनी जिज्ञासा के कारण चीटियां पहुंच ही जाती हैं। कोई तुम्हें अच्छी तरह से पढ़ाये या न पढ़ाये तुम में दूसरों से कुछ लेने की काबिलीयत होनी चाहिए, बस चीजों को जानने की अपनी जिज्ञासा बनाये रखो। शेष कार्य शरीर खुद ही कर देगा।
  • हम जानते हैं कि एक छोटी सी चींटी हमारा कुछ भी बिगाड़ नहीं सकेगी लेकिन उसके काटने पर भी पूरा शरीर झनझना उठता है। वैसे ही यह ईर्ष्या अदृश्य होकर भी हमें भयभीत कर देती है। ईर्ष्या करके हम दूसरे की तरक्की को रोकना चाहते हैं तथा चाहते हैं कि वह जहां है उससे भी अधिक नीचे गिर जाये। लेकिन ऐसा करना हमारे हाथों में नहीं होता। सभी का अपना – अपना जीने का तरीका है।दूसरों की सोच में तुम्हारा हस्तक्षेप तुम्हें ही परेशान कर देता है।
  • शुभ रात्रि! रात्रि तुम्हें विदा। जब सोने के पहले इस तरह के भाव अपने आप तुम्हारे मन में आते हैं तो लगता है कि आज का दिन अच्छा रहा। बहुत सारी उपलब्धियां मिलीं। यानि पहले से अधिक अच्छी तरह से चीजों को समझा गया और जो भी कार्य किये गये वे निष्ठा पूर्वक किये गये, अत: संतोष हुआ। फिर यह संतोषपूर्ण रात्रि काफी आरामदायक होती है। कल फिर से तुम नयी होकर आती हो, हर नयी चीज में हाथ लगाती हो।
  • इस संसार में हर पल कुछ नया हो रहा है और उस नये को जानने के लिए तुम्हें भी एक बदला हुआ मनुष्य बनना होगा। केवल तथाकथित रूढि़वादी चीजों पर विश्वास करके तुम नया कुछ नहीं कर सकती। सभी चीजों को जानने की कोशिश करो, अपनी आंखों की शक्ति को पहचानो। इसी के सहारे तुम सारी चीजों को उभारना और ढालना सीखती हो।
  • रेगिस्तान में ऊंट पर बैठ कर यात्रा की जाती है और दुर्गम पहाड़ों के संकरे रास्तों पर घोड़ों की पीठ पर बैठ कर। इसी तरह से अलग-अलग विषयों को अपनी भिन्न-भिन्न मन: स्थितियों के सहारे समझना होता है या पढऩा होता है। अगर तुम गणित पढ़ रही हो, तो तुम्हें विशलेषण करने वाली बुद्धि का सहारा लेना होता है और इतिहास पढ़ते समय मन को पुराने जमाने में ले जाना होता है, उसी तरह विज्ञान पढ़ते समय इस युग की मौजूद सारी चीजों पर ध्यान केन्द्रित करना होता है। धीरे-धीरे परिस्थितियों के अनुसार हमारा दिमाग विषयों को पढ़ते ही उनके अनुसार ही तालमेल बैठा लेता है, जैसे गाने के अनुसार वाद्य यंत्रों में हाथ ऊपर-नीचे होने लगते हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

अपनी सफलता स्वयं सुनिश्चित करें।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ अपनी सफलता स्वयं सुनिश्चित करें। ϒ

  • एक पेड़ में अगर फूल केवल कुछ ही जगहों पर न होकर चारों तरफ फैले होते हैं, तो उसकी खूबसूरती बढ़ जाती है। उसी तरह अगर कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे बहुत से हों तो उन्हें देखकर एक शिक्षक का मन खुश होता रहता है। उन्हें लगता है कक्षा का स्तर बढ़ा हुआ है, इन्हें और अधिक ऊंची बातें बतायी जा सकती है। क्योंकि हीरा हमेशा सोने जैसी बहुमूल्य धातुओं पर ही जड़ा जाता है लोहे पर नहीं। हमेशा श्रेष्ठ चीजें, श्रेष्ठ आधार पर ही शोभा पाती है, इसलिए तुम हमेशा कक्षा में एक श्रेष्ठ आधार बनने की कोशिश करो। ~Kmsraj51
  • अपनी सफलता स्वयं सुनिश्चित करें। अपने Mind काे कुछ इस तरह से खुराक दें। – किसी भी इंसान का माइंड(Mind) काेई भी बात ज्यादातर चित्र(Image) Form में सोचता हैं, इसलिए अपने लक्ष्य का चित्र व महत्वपूर्ण कार्य का जर्नल(नाेटबुक या डायरी) Hard और Soft दोनों प्रारूप में रखें तथा Daily Base पर अपने अवचेतन मन काे याद दिलाये सुबह उठते ही व रात्रि में साेने से पहले। ~Kmsraj51
  • जिस कर्म काे करने से आप अंदर से Strong महसूस करते है, वही अच्छे कर्म हैं।
    और जिस कर्म काे करने से आप अंदर से Weak महसूस करते है, वही बुरे कर्म हैं॥ ~Kmsraj51
  • समस्याएँ हमारी बुद्धि काे पूर्ण विकसित बनाती हैं और हमारी बहुत सारी सुषुप्त(साेई हुई या शिथिल) शक्तियों काे जगाने का कार्य करती हैं। ~Kmsraj51
  • आपको अपने असीमित आंतरिक शक्तियों को पहचानने की जरूरत हैं, तथा अपने असीमित आंतरिक शक्तियों काे संपूर्ण(आत्मा, तन, मन व धन) रूप व सही तरीके से अपने एक लक्ष्य काे पाने में लगा दें। आपको निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। ~Kmsraj51
  • जीवन की कोई ऐसी परिस्थिति नहीं जिसे अवसर में ना बदला जा सके। हर परिस्थिति का “कुछ ना कुछ सन्देश” होता है। अगर तुम्हारे पास किसी दिन कुछ खाने को ना हो तो श्री सुदामा जी की तरह प्रभु को धन्यवाद दो “प्रभु आज आपकी कृपा से यह एकादशी जैसा पुण्य मुझे प्राप्त हो रहा है।”~Kmsraj51

  • धैर्य सदैव ही आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी, सच्ची लगन आपकाे आपके मंजिल तक अवश्‍य पहुचाएगी और मूल्यवान है आपके ज़िन्दगी का हर लम्हा इसे व्यतीत न करे – बल्कि जी भर के जीएँ।~Kmsraj51
  • जाे मनुष्य हर बात काे भूल जाता है अर्थात किसी भी बात काे मन में रखकर ढोता नहीं, उसका मस्तिष्क निगेटिव एनर्जी से मुक्त रहता है। इसलिए भूलने में ही भला हैं।~Kmsraj51
  • समस्या से बचना ही आवश्यक नहीं है, समझदार वाे हैं जाे समस्या से टकराये, और उसे मिटाकर ही दम ले। इतिहास वही बदलते हैं जाे दिन में सपने देखते हैं।~Kmsraj51
  • अहंकार सदैव ही सर्वनाश की ओर लेकर जाता हैं।~Kmsraj51
  • सदैव आपकी यही कोशिश हाे कि आपका अगला क्षण, पिछले क्षण से अच्छा(Best) हाे।~Kmsraj51

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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