भगवान के दोस्त।

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT-2016

ϒ भगवान के दोस्त। ϒ

एक बच्चा फटे पुराने जूतों के साथ प्लास्टिक की गेंद से खेल रहा था। लोगों को उसके जूते देखकर बहुत दुःख हुआ। तभी किसी सज्जन ने बाज़ार से नया जूता ख़रीदा और उसे देते हुए कहा “बेटा लो, ये जूता पहन लो”। लड़के ने फ़ौरन जूते निकाले और पहन लिए, उसका चेहरा ख़ुशी से दमक उठा था।

वो मेरी तरफ़ पल्टा और मेरा हाथ थाम कर पूछा  “आप भगवान हैं ? उसने घबरा कर हाथ छुड़ाया और कानों को हाथ लगा कर कहा – “नहीं बेटा, नहीं, मैं भगवान नहीं”। लड़का फिर मुस्कराया और कहा “तो फिर ज़रूर आप भगवान के दोस्त होंगे।

क्योंकि मैंने कल रात में ही भगवान से कहा था कि मुझे नऐ जूते दे-दें। 

“वो सज्जन मुस्कुरा दिया और उसके माथे को प्यार से चूमकर अपने घर की तरफ़ चल पड़ा।

अब वो सज्जन भी जान चुके थे कि भगवान का दोस्त होना कोई मुश्किल काम नहीं……॥

और हम…..??

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
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of,,  http://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

जीतने की प्रबल इच्छा।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ जीतने की प्रबल इच्छा। ϒ

Strong desire to win-Kmsraj51

यह बात बहुत समय पहले कि है, एक महान शुरवीर योद्धा अपने दुश्मन राज्य से जब युद्ध करने जा रहा था, ताे उसने देखा की उसके सैनिकों में दुश्मनाें से युद्ध करने काे लेकर भय हैं। भय का मुख्य कारण था, दुश्मन राज्य के सैनिकों की संख्या बहुत अधिक थी।

युद्ध करने के लिए सागर के पार जाना था। वह महान शुरवीर योद्धा अपने सभी सैनिकों के साथ बड़े समुद्री जहाजाें व बड़े नावाें से सागर के किनारे पहुँचने पर सारे जहाजाें और नावाें काे जला दिया।

फिर उस महान शुरवीर योद्धा ने अपने सैनिकों का उत्साह बढ़ाते हुए बाेला अगर आप सभी काे वापस घर जाना है, ताे हर हाल में हम सभी काे दुश्मनाें से जीतना ही हाेगा, क्योंकी वापस जाने के लिए नाव व जहाज अब नहीं रहे । अगर हम सभी दुश्मनाें से युद्ध ना जीत पाए ताे यही मारे जायेगे। इसलिए हर हाल में हम सभी काे दुश्मनाें से युद्ध जीतना ही हैं।

साेचियें मित्रों क्या हुआँ हाेगा।

वह महान शुरवीर योद्धा, युद्ध जीत गया था। सभी सैनिकों काे आंतरिक प्रबल इच्छा शक्ति का एहसास हाे गया था।

सीख: अगर किसी भी कार्य काे करने की प्रबल आंतरिक दृढ़ इच्छा हाे, ताे सफलता जरूर मिलेगीं।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

 ~KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

CYMT-KMS-KMSRAJ51

अधूरी भक्ति।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ अधूरी भक्ति। ϒ

Incomplete Bhakti-kmsraj51

मृत्यु के उपरांत एक साधु तथा डाकू साथ-साथ यमराज की सभा में पहुँचे। यमराज ने अपने बही-खातों की जाँच-पड़ताल करके उनसे कहा-यदि तुम दोनों को अपने लिए कुछ कहना हो तो कह सकते हो।

“डाकू विनम्र स्वर में बोला-महाराज मैंने जीवन में बहुत पाप किए हैं। जो भी दंड विधान आपके यहाँ मेरे लिए हो वह करें। मैं प्रस्तुत हूँ।” फिर साधु बोले-आप तो जानते ही हैं, मैंने जीवनभर भक्ति की है। कृपया मेरे सुख साधनों का प्रबंध शीघ्र करवाएँ।

“यमराज ने दोनों की इच्छा सुनकर डाकू से कहा-तुम्हें यह दंड दिया जाता है कि तुम आज से इस साधु की सेवा किया करो।” डाकू ने सिर झुकाकर आज्ञा शिरोधार्य की, परंतु साधु ने आपत्ति की-महाराज इस दुष्ट के स्पर्श से मैं भ्रष्ट हो जाऊँगा। मेरी भक्ति तथा तपस्या खंडित हो जाएगी।

अब यमराज के आदेश के स्वर में आक्रोश बोले-निरपराध भोले व्यक्तियों का वध करने वाला तो इतना विनम्र हो गया कि तुम्हारी सेवा करने को तत्पर है और तुम हो कि वर्षों की तपस्या के पश्चात् भी यह न जान सके कि सबमें एक ही आत्म-तत्त्व समाया हुआ है। जाओ तुम्हारी भक्ति अभी अधूरी है, अतः आज से तुम इसकी सेवा किया करो।’

सीख: अहंकार काे त्याग कर, विनम्रता के गुण काे धारण करना ही सच्ची भक्ति हैं।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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माँ के दिल जैसा दुनिया मेँ कोई दिल नहीं।

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KMSRAJ51-CYMT

ϒ माँ का दिल।~सुमित वत्स। ϒ

एक १६ साल के लड़के ने
अपनी मम्मी से कहा की
मम्मी मुझे मेरे १८ वे साल के
जन्मदिन पर क्या गिफ्ट
दोगी?
तो उस लड़के की मम्मी ने
उस से कहा की जब
तेरा १८
सालवा आएगा तो अलमारी के
ऊपर देख लेना उसमे
तेरा गिफ्ट
रहेगा। अभी बता दूंगी तो
गिफ्ट
का मज़ा नहीं आएगा।
कुछ दिन बाद
वो लड़का बीमार
हो गया उसके
मम्मी पापा उसको अस्पताल
लेकर गए।

जाँच के बाद डॉक्टर ने
लड़के के माता-पिता से
कहा की इसके दिल में छेद
है ये अब २ महीने से
ज्यादा नही जी पायेगा।

२ साल भर बाद लड़का ठीक
होकर घर गया।
तो उसे पता चला की उसकी
माँ नही रही।
उसे ये पता चलते ही उसने
अलमारी खोली और उसने देखा की
अलमारी में एक गिफ्ट
पड़ा था। उसने जल्दी से
वो गिफ्ट खोला
उस गिफ्ट में एक
चिठ्ठी थी उस चिट्टी में
लिखा था की

” मेरे जिगर के टुकड़े अगर तू
ये चिठ्ठी पढ़ रहा है
तो तू बिलकुल ठीक
होगा तुझे याद है जब तू
बीमार हुआ था तब हम तुझे
अस्पताल लेकर गए थे।

डॉक्टर ने कहा की तेरे
दिल में छेद है तो उस दिन
मै बहुत रोई और
फैसला किया की मेरा दिल
तुजे दूंगी याद है एक दिन
तूने कहा था की मम्मी मुझे
१८ साल वे जन्मदिन पर
क्या दोगी तो बेटा मैं तुझे
अपना दिल दे रही हुँ,
उसको हमेशा संभाल कर
रखना। ……

“हैप्पी बर्थडे बेटा”

सार : एक माँ इसलिए मर
गयी क्यों की उसका बेटा जी
सके।
दुनिया में माँ से बड़ा दिल
किसी का नही।

माँ के दिल जैसा दुनिया मेँ
कोई दिल नहीं।

© सुमित वत्स।

Sumit Vats-kmsraj51

सुमित वत्स।

हम दिल से आभारी हैं सुमित वत्स जी के प्रेरणादायक हिन्दी कहानी साझा करने के लिए।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

 

 

 

 

सच्चा उपहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT04

सच्चा उपहार।

सोनू और मिंटू में गहरी मित्रता थी। सोनू साधारण परिवार से सम्बन्ध रखता था जबकि मिंटू बहुत अमीर परिवार से सम्बंधित था। मिंटू को अपने अमीर होने पर घमंड था। सभी उसे समझाते कि घमंड करना अच्छी बात नहीं है पर मिंटू के सामने सभी व्यर्थ थीं।

उस दिन मिंटू का जन्मदिन था। उसके सभी मित्र बड़े बड़े उपहार लेकर आये थे । सोनू भी दावत में उपस्थित हुआ परन्तु एक छोटे से उपहार के साथ । सोनू बड़े प्रेम से अपने मित्र को जन्मदिन की बधाई देता हुआ अपना उपहार जिसमे एक रुमाल था मिंटू को भेंट  देता है। उपहार में रुमाल को देख कर मिंटू  ने गुस्से में कहा-” मुझे यह रुमाल नहीं चाहिए,देखो मेरे पास कितने बड़े बड़े और सुन्दर उपहार हैं । राजेश मेरे लिए साइकिल लाया है। अभय मेरे लिए गिटार लाया है…।”

      इसी तरह मिंटू ने सबके नाम गिनवाने शुरू कर दिए।

यह देख कर मिंटू के दादा जी को बहुत बुरा लगा। उन्हें एक तरकीब सूझी। उन्होंने कहा-“आह ! मेरी आँख में कुछ चला गया है – क्या करूँ? अरे मिंटू ज़रा ,अपनी साइकिल तो लेकर आना। मुझे अपनी आँख पर लगानी है।”

                 “लेकिन वो तो साइकिल है दादाजी ,आपको तो रुमाल की ज़रूरत है।” मिंटू ने कहा।

दादा जी ने तुरंत कहा – “लेकिन रुमाल तो बहुत छोटा है ।”

मिंटू को समझते देर न लगी और तुरंत अपने मित्र सोनू के  पास दौड़ा। वह कुछ बोल नहीं पा रहा था परन्तु उसकी आँखों में पश्चाताप के आंसू थे। उसे अहसास हो रहा था कि यही सच्चा उपहार  है जिसमें सोनू की सुन्दर भावना छिपी है। सोनू ने मिंटू को गले से लगा लिया।

सभी ओर आनंद का वातावरण बन गया था। दादाजी उनके पीछे खड़े होकर मुस्कुरा रहे थे।

℘ नंदिता भारद्वाज (नोएडा, उत्तर प्रदेश)

© हम “नंदिता भारद्वाज जी” के आभारी हैं, “सच्चा उपहार।” कहानी हिंदी में साझा करने के लिए। हम सभी आपके (Team of Kmsraj51.com) उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

 

 

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क्या लडकियां ही करती है, सिर्फ़ मनमानी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT04

ϒ क्या लडकियां ही करती है, सिर्फ़ मनमानी। ϒ

क्या लडकियां ही करती है, सिर्फ़ मनमानी।
जो बन जाती है, वो देश की दामिनी॥

हक है तुम्हारा ऐ हर एक हिन्दुस्तानी।
जियो तुम अपनी तरह से अपनी ये जिंदयानी॥

दर्द है, सिसक है, एक खामोशी-सी उनकी कहानी।
क्यों शर्मसार कर शापित कर रहे हो,
हमसे हमारी जवानी॥

तुम्हें क्यों दिक्कत होती है जब होते है हम सयानी।
ऐ अनपढ़ अफसोस है आज हर उस मां को,
जो कह न सकती है, मैं हूं उस हैवान की जननी॥

हम तो है एक ऐसी धानी,
जिसकी चोट वो दरारें लाती है।

जो अगर खत्म न हुआ तो फट जायेगी ये धानी,
और…………
खत्म हो जायेगी सृष्टि से,
हैवानियत की ये कहानी………!!

-संदीप वर्मा – बीकानेर (राज.)

Sandeep Verma-kmsraj51

संदीप वर्मा।

Post share by Mr. Sandeep Verma, from Bikaner (Raj.).

We are grateful to Mr. Sandeep Verma, for sharing inspirational  Hindi Poetry.

We wish you a great & bright future. Thanks a lot dear Sandeep Verma.

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आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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नारी की इच्छा।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

नारी की इच्छा। ∗

असंभव के विरुद्ध:- “नारी की इच्छा” हम समझ क्यों नहीं पाते?

“तुम तो नदी की धारा के साथ दौड़ रहे हो।
उस सुख को कैसे समझोगे, जो हमें नदी को देखकर मिलता है।”

– रामधारी सिंह ‘दिनकर’

मैं जब बच्ची थी।
पेड़ पर चढ़ने को मचलती, मां डांटती
कहती ये लड़कों जैसी गलत मस्तियां हैं।

उछलना, कूदना, दौड़ना, चढ़ना, गिरना,
उड़ना।

पिता हंसते, शाम को कंधे पर बिठाकर ले जाते।
अमरूद के पेड़ पर चढ़ना सिखाते, समझाते – शरीर
सब कुछ कर सकता है।
अगर “तुम्हारी इच्छा हो”

मैं जब कुछ बड़ी हुई।
दादी को जैसे बस एक ही काम था।
काम सीख लो, कल ससुराल में बदनामी होगी।

दादा न जाने क्या-क्या खिलाते,
मेरे खेलने- खाने के दिन होने का विश्वास दिलाते।
बस करो। कोशिश करो। देखो। सुनो। करो।
नहीं आया तो फिर करो।

सब होगा – अगर “तुम्हारी इच्छा हो”

एक नाज़ुक समय आया।
हर बात पर रोकना, हर काम पर पूछना, हर साथ
पर संदेह।

जीवन लगने लगा बोझ, अपने लगने लगे फांस घुटन।

छटपटाहट। घबराहट।

कहां गए वो खेलने-खाने के दिन?
पिता का लाड़, लगने लगा लताड़। भाई की
शरारत, देने लगी हरारत।

“मेरी इच्छा”? क्यों नहीं चलती?
मैं कहां जाती हूं, कब लौटती हूं, क्या पहनकर
जाती हूं,
किसके साथ बैठती हूं, किससे हंसती-बोलती
हूं।

इस पर घरवाले पहरा बिठा देना चाहते हैं?
आखिर क्यों?
“मेरी इच्छा”का क्या? और वे होते कौन हैं?
और समझते क्यों नहीं
कि मैं बड़ी हो चुकी हूं। पढ़ी-लिखी हूं।

अपना अच्छा-बुरा समझती हूं।
बेटा, जमाना ठीक नहीं है। आजकल किसी
का भरोसा नहीं।

कॉलेज के बाद सीधे घर आना। दिल्ली का पता है न?
क्यों? “मेरी इच्छा”का क्या?
लड़की हूं न, इसलिए इतनी रोक।
यह उम्र ही ऐसी होती है। बंधन तोड़ने की उग्र इच्छा होती है।
बंधन।

पढ़ाई करो। और पढ़ो। शादी के बाद,
आत्मनिर्भर रहना चाहिए।
अपने पैरों पर खड़े होना, संसार की सबसे बड़ी
चुनौती, सबसे अच्छा उपाय।

“मेरी इच्छा”क्या है?
उनके इस प्रश्न ने मानो मुझे नींद से जगाया
आपको, किसी को “मेरी इच्छा”का क्या?
उन्होंने लाड़ से हाथ फेरा। बच्ची है। बड़ी कब होगी।
कल शादी होगी। कितनी जिम्मेदारियां निभानी हैं।
अरे…। मैं तो खुश हुई थी कि आज “मेरी इच्छा” जानी जाएगी।
ये तो फिर।

और एक पल में मैं बच्ची हूं। दूसरे ही पल में मेरी शादी।
मां, कभी तो मुझे मेरी इच्छा से कुछ करने दो…
सबको तुम पर नाज़ है बच्चा।
तो इतने बंधन क्यों है?
तू नहीं समझेगी। ये प्यार होता है!
फिर नैराश्य भरी बातें।

अब शादी के बाद बंधन टूटने चाहिए
या कि अपने पैरों पर खड़े रहने वाली नई बेड़ियों की चिंता करें?
मैं तो ढेर सारी मस्ती करना चाहती हूं। ढेर सारे दोस्त बनाना चाहती हूं,आज़ाद होना चाहती हूं।
ये हैं कि फिर फंसाना चाहते हैं। होते कौन हैं,ये?
“मेरी इच्छा”।

रात को मां से मुलाकात हुई, कई दिनों बाद, उन्हें ध्यान से देखा
पापा की तबीयत को लेकर, भारी चिंता में थी वह
भाई की नौकरी का किस्सा, कई तरह की घर की समस्याएं
लेकिन मुझे न जाने क्या-क्या सिखाने की कोशिश करती रहीं
मैं अपनी ज़िंदगी जीना चाहती हूं। मैं शादी करना ही न चाहूं …
पागल हो गई हो क्या – ऐसे गन्दे शब्द …

हम तो, संगीत में क्या होगा, जोड़ा कैसा होगा और फेरे कहां करवाएंगे
यह सोच भी चुके हैं।

ये क्या कह रहे हैं।
आंखों में आंसू, गालों पर गढ्ढे और ओठों पर
थरथराहट
घर पर हुआ निर्णय।
लेकिन मैं शादी नहीं करूंगी।
फिर बना दृश्य विचित्र
झड़प। समझ। सलाह। तड़प।
तय हुआ जो वे चाहते थे।
“मेरी इच्छा”का क्या?

पढ़ाई का चक्र चलता ही रहता है।
मैंने वहां पूरी की। एक दूर की बहन थी उसने यहां,
चिंता का चक्र भी निरन्तर है,
बड़ी होती लड़कियों पर चलता ही रहता है।

मैं इतना पढ़ ली कि लड़का मिलना मुश्किल।
वो बहन पढ़ी। लेकिन लड़के वालों ने कहा और पढ़ी होती तो कमाती।
नानी के बगल वाले घर में थी एक लड़की। पढ़ न सकी।

सबको है डर। कौन होगा इसका वर।
पिता कहते, होगा सब अच्छा । हुआ ।
चाचा जानते थे मिलेगा समझदार। मिला ।
पढ़ न सकने का अर्थ नहीं है अनपढ़। उसके दूल्हे ने
कहा।

घरवालों का सपना हुआ साकार। था उनका
आधार :
बुद्धि चलानी है। विद्या चलेगी पीछे-पीछे।
दक्षता। क्षमता। योग्यता। लड़कियों में गुण
होते ही हैं, बहुत अच्छा चलेगा
अगर “तुम्हारी इच्छा”हो।

और लोग? समाज? पुरुष? वो क्या समझते हैं मुझे?
कि वो मेरे साथ दुर्व्यवहार करेंगे? अत्याचार
करेंगे?

नहीं मैं उनसे भयभीत, नहीं मैं उनसे निराश
नहीं मेरा किसी पुरुष में विश्वास।
शिक्षा ली है मैंने घटनाओं से। सीखा है मैंने
दुर्घटनाओं से।

रहा होगा सफल दादी, नानी, मां, दीदी
का जीवन
मैं उसे कहूंगी विफल, क्योंकि संभवत: वे परम्परा
ही निभा रही थीं
निश्चित ही वे जिम्मेदारियां ढो रही थीं
वे “स्वयं’ कुछ, क्या थीं?
पिता, भाई, श्वसुर, पति और परिवार इन्हीं से
उनके विचारों का आकार
सहानुभूति पर जीती रहीं वे, प्रेम बांटती,
करती रहीं वे।

पुरुष तो पुरुष, बच्चों से भी डरती रहीं वे।
मैं अपनी इच्छा से जीऊंगी, क्योंकि मैं “अलग’
हूं, क्योंकि मुझे चुनना आता है
क्योंकि मैं ब्रह्मांड हूं,
मैं यूनिवर्स हूं।

मेरा शरीर। मेरा दिमाग। मेरी इच्छा। माय चॉइस।
“मेरी इच्छा सब समझेंगे, असंभव है। किन्तु समझनी ही होगी।”

 क्योंकि संसार की जननी, जब एक मुट्ठी
भर पापियों से त्रस्त होकर, रुष्ट होकर,
कुंठित होकर, क्रुद्ध होकर परिवार की
जगह “मैं’ को चुनने की घोषणा करने पर
विवश हो जाए, तो हमारे पालन-पोषण
और संस्कार देने में भारी कमी हो गई है।

वह जीवन के सबसे सुंदर भाव “प्रेम” को भी
ठुकरा रही है। यह सबसे बड़ी चिंता है।
क्योंकि नारी ने ही हमें प्रेम सिखाया है।

©- (लेखक – कल्पेश याग्निक) दैनिक भास्कर के ग्रुप एडिटर हैं।

-संदीप वर्मा – बीकानेर (राज.)

Sandeep Verma-kmsraj51

संदीप वर्मा।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

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