लक्ष्यहीन कौवा।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ लक्ष्यहीन कौवा। ϒ

प्यारे दोस्तो – जीवन में लक्ष्य का हाेना ताे बहुत ज़रूरी है। बिना लक्ष्य का जीवन भेड़ चाल जीवन है, कहा जा रहे है क्यों जा रहे है कुछ भी पता नहीं।

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एक बार एक नदी में हाथी की लाश बही जा रही थी। एक काैए ने लाश देखी, ताे प्रसन्न हाे उठा, तुरंत उस पर आ बैठा। यथेष्ट मांस खाया! नदी का जल पिया। उस लाश पर इधर-उधर फुदकते हुए काैए ने परम तृप्ति की डकार ली। वह सोचने लगा, अहा! यह ताे अत्यंत सुंदर यान है, यहा भाेजन और जल की भी कमी नहीं। फिर इसे छाेड़कर अन्यत्र क्यों भटकता फिरूं ?

काैवा नदी के साथ बहने वाली उस लाश के ऊपर कई दिनाें तक रमता रहा। भूख लगने पर वह लाश काे नाेचकर खा लेता, प्यास लगने पर नदी का पानी पी लेता। अगाध जलराशि, उसका तेज प्रवाह, किनारे पर दूर-दूर तक फैले प्रकृति के मनाेहर दृश्य इन्हें देख-देखकर वह विभाेर हाेता रहा।

नदी एक दिन आखिर महासागर में मिली। वह मुदित थी कि उसे अपना गंतव्य प्राप्त हुआ। सागर से मिलना ही उसका चरम लक्ष्य था, किंतु उस दिन लक्ष्यहीन कौए की ताे बड़ी दुर्गति हाे गई। चार दिन की माैज-मस्ती ने उसे ऐसी जगह ला पटका था, जहां उसके लिए न भाेजन था, न पेयजल और न ही काेई आश्रय। सब ओर सीमाहीन अनंत खारी जल-राशि तरंगायित हाे रही थी।

काैवा थका-हारा और भूखा-प्यासा कुछ दिन तक ताे चाराें दिशाओं में पंख फटकारता रहा, अपनी छिछली और टेढ़ी-मेढ़ी उड़ानाें से झूठा राैब फैलाता रहा, किंतु महासागर का ओर-छाेर उसे कहीं नजर नहीं आया। आखिरकार थककर, दुःख से कातर हाेकर वह सागर की उन्हीं गगनचुंबी लहराें में गिर गया। एक विशाल मगरमच्छ उसे निगल गया।

सीख – शारीरिक सुख में लिप्त मनुष्याें की भी गति उसी काैए की तरह हाेती है, जाे आहार और आश्रय काे ही परम गति मानते हैं और अंत में अनंत संसार रूपी सागर में समा जाते है।

जीत किसके लिए, हार किसके लिए।
ज़िदगीभर ये तकरार किसके लिए॥

जाे भी आया है वाे जायेगा एकदिन।
फिर ये इतना अहंकार किसके लिए॥

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Krishna Mohan Singh(KMS)
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

अज्ञानता की निद्रा से जगे।

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ϒ अज्ञानता की निद्रा से जगे। ϒ

मानव तन अति दुर्लभ और क्षणभंगुर भी है, इसलिए सोचने में समय नष्ट करने की बजाय उस परमात्मा को प्राप्त करने का प्रयास आज और अभी से शुरू कर देना चाहिए।एक बार एक राजा कहीं जा रहा था, उसने एक सफाई कर्मचारी को देखा, राजा को उसकी निर्धनता देखकर दया आ गई। उसने हीरे-मोतियों से जड़ित एक स्वर्ण थाल दिया, ताकि वह उससे धन कमाकर आराम की जिंदगी बिता सके।

कुछ वर्षों के पश्चात राजा ने उस व्यक्ति को पुन: सफाई करते हुए देखा, तो पूछा कि मैंने जो थाल तुम्हें दिया था, वह कहां है?

उस व्यक्ति ने उत्तर दिया कि आपकी बहुत कृपा है, मैं बहुत समय से उसमें गंदगी डालकर फेंकता रहा हूं।

राजा यह सुनकर क्रोधित हो गया, उसने अपने सेवकों को आदेश दिया कि इससे थाल लेकर किसी अन्य साधनहीन व्यक्ति को दे दो। इसी तरह परमात्मा भी जीव को मनुष्य तन देता है, लेकिन वह इसे विषय-वासना से गंदा कर देता है और बाद में दुखी होता है।

गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि जो जीव मानव तन धारण करने के पश्चात भी भवसागर से पार होने का प्रयत्न नहीं करता, वह कृतघ्न, मंदबुद्धि और आत्महंता है। यदि जीव प्रभु-कृपा का लाभ उठाकर परमात्मा की भक्ति करता है, तो वह सदा के लिए कर्म-बंधनों से मुक्त हो जाता है।

इंसान इस शरीर रूपी नगर में एक सीमित समय के लिए आया है। इस नगर में वह अकेला नहीं है, बल्कि काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार आदि चारे भी इसमें उसके साथ निवास करते हैं। यदि वह इनसे सावधान नहीं रहेगा, तो फिर पश्चाताप के अतिरिक्त कुछ भी हाथ आने वाला नहीं है।

इस संसार में संत- महापुरुष एक पहरेदार का काम करते हैं। जैसे यदि गांव में पहरेदार को जरा भी संशय हो जाता है कि इस गांव में चोरी होने की आशंका है, तो वह उच्च स्वर में आवाज लगाता है। उसकी आवाज सुनकर जो जाग जाते हैं, उनका घर बच जाता है। जो नहीं जागते और यह सोचकर ही सोये रहते हैं कि शोर करना तो इसका काम ही है, वे सूर्योदय होने तक लुट चुके होते हैं।

महापुरुष भी जीव को जगाकर कहते हैं कि किसी भी इंसान के शरीर रूपी घर के अंदर दिन-रात पांच चोर (काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार) चोरी करने का प्रयत्न करते रहते हैं, इसलिए उनसे सावधान होने की जरूरत है।

यदि किसी जीव को काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह के विकारों ने लूट लिया, तो उसका संपूर्ण जीवन बेकार है, इसलिए महापुरुष बार-बार इंसान को जगाते हैं। इस अज्ञानता की निद्रा से जागकर उस प्रभु रूपी औषधि का प्रयोग करना चाहिए, ताकि इस जीवन को सार्थक बनाया जा सके। मानव तन अति दुर्लभ और क्षणभंगुर भी है, इसलिए सोचने में समय नष्ट करने की बजाय उस परमात्मा को प्राप्त करने का प्रयास आज और अभी से शुरू कर देना चाहिए।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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बहन का स्नेह मिलना खुशनसीबी है।

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ϒ बहन का स्नेह मिलना खुशनसीबी है। ϒ

एक छोटा-सा पहाड़ी गांव था। वहां एक किसान, उसकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी रहते थे। एक दिन बेटी की इच्छा स्कार्फ खरीदने की हुई और उसने पिताजी की जेब से 10 रुपए चुरा लिए।

पिताजी को पता चला तो उन्होंने सख्ती से दोनों बच्चों से पूछा – पैसे किसने चुराए ?
अगर तुम लोगों ने सच नहीं बताया तो सजा दोनों को मिलेगी। बेटी डर गई, बेटे को लगा कि दोनों को सजा मिलेगी तो सही नहीं होगा।

वह बोला – पिताजी, मैंने चुराए, पिताजी ने उसकी पिटाई की और आगे से चोरी न करने की हिदायत भी दी। भाई ने बहन के लिए चुपचाप मार खा ली। वक्त बीतता गया। दोनों बच्चे बड़े हो गए।

एक दिन मां ने खुश होकर कहा – दोनों बच्चों के रिजल्ट अच्छे आए हैं। पिताजी (दुखी होकर) – पर मैं तो किसी एक की पढ़ाई का ही खर्च उठा सकता हूं।

बेटे ने फौरन कहा – पिताजी, मैं आगे पढ़ना नहीं चाहता।
बेटी बोली – लड़कों को आगे जाकर घर की जिम्मेदारी उठानी होती है, इसलिए तुम पढ़ाई जारी रखो। मैं कॉलेज छोड़ दूंगी। अगले दिन सुबह जब किसान की आंख खुली तो घर में एक चिट्ठी मिली।

उसमें लिखा था – मैं घर छोड़कर जा रहा हूं। कुछ काम कर लूंगा और आपको पैसे भेजता रहूंगा। मेरी बहन की पढ़ाई जारी रहनी चाहिए। एक दिन बहन हॉस्टल के कमरे में पढ़ाई कर रही थी।

तभी गेटकीपर ने आकर कहा – आपके गांव से कोई मिलने आया है। बहन नीचे आई तो फटे-पुराने और मैले कपड़ों में भी अपने भाई को फौरन पहचान लिया और उससे लिपट गई।

बहन – तुमने बताया क्यों नहीं कि मेरे भाई हो – भाई।

मेरे – ऐसे कपड़े देखकर तुम्हारे सहेलियाें में बेइज्जती होगी। मैं तो तुम्हें बस एक नजर देखने आया हूं।
भाई चला गया – बहन देखती रही।

बहन की शादी शहर में एक पढ़े – लिखे लड़के से हो गई। बहन का पति कंपनी में डायरेक्टर बन गया। उसने भाई को मैनेजर का काम ऑफर किया, पर उसने इनकार कर दिया।

बहन ने नाराज होकर वजह पूछी तो भाई बोला – मैं कम पढ़ा-लिखा होकर भी मैनेजर बनता तो तुम्हारे पति के बारे में कैसी-कैसी बातें उड़तीं, मुझे अच्छा नहीं लगता।

भाई की शादी गांव की एक लड़की से हो गई। इस मौके पर किसी ने पूछा कि उसे सबसे ज्यादा प्यार किससे है ?

वह बोला – अपनी बहन से, क्योंकि जब हम प्राइमरी स्कूल में थे तो हमें पढ़ने दो किमी दूर पैदल जाना पड़ता था। एक बार ठंड के दिनों में मेरा एक दस्ताना खो गया।

बहन ने अपना दे दिया – जब वह घर पहुंची तो उसका हाथ सुन्न पड़ चुका था और वह ठंड से बुरी तरह कांप रही थी। यहां तक कि उसे हाथ से खाना खाने में भी दिक्कत हो रही थी। उस दिन से मैंने ठान लिया कि अब जिंदगी भर मैं इसका ध्यान रखूंगा। बहन ने हमारी हर गलती का बचाव किया था बचपन से वो हमे मां-बाप से ज्यादा स्नेह करती है।

जीवन में कुछ मिले या ना मीले पर बहन का स्नेह मिलना खुशनसीबी है।

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दिमाग को सकारात्मक विचारों से भरे, न कि नकारात्मक कूड़े से।

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ϒ दिमाग को सकारात्मक विचारों से भरे, न कि नकारात्मक कूड़े से। ϒ

जब मानव दिमाग में सकारात्मक विचार भरे हाे, ताे नकारात्मक विचार काे कभी भी जगह नहीं मिलेगी। सदैव अपने दिमाग में सकारात्मक विचाराें रूपी टानिक भरते रहें। अपने मन काे सदैव ही सकारात्मक विचाराें के सागर में गाेते लगवाते रहें। जब आपका मन सकारात्मक विचाराें से पूर्ण हाेगा, तो आपके सारे कर्म अति सुंदर तरीके से होंगे।

एक दिन एक व्यक्ति ऑटो से रेलवे स्टेशन जा रहा था। ऑटो वाला बड़ी ही सावधानी पूर्वक आराम से ऑटो चला रहा था। पार्किंग से अचानक ही एक कार निकलकर सड़क पर आ गई। ऑटो चालक ने तेज़ी से ब्रेक लगाया और कार, ऑटो से टकराते-टकराते बची।

कार चालक गुस्से में ऑटो वाले काे ही भला-बुरा कहने लगा जबकी गलती कार चालक की थी। ऑटो चालक एक सत्संगी(सकारात्मक विचार सुनने-सुनाने)वाला था। उसने कार वाले की बाताें पर गुस्सा नहीं किया और क्षमा मांगते हुए आगे बढ़ गया। ऑटो में बैठें व्यक्ति काे कार वाले की हरकत पर गुस्सा आ रहा था और उसने ऑटो वाले से पूछा, तुमने उस कार वाले काे बिना कुछ कहे ऐसे ही क्यों जाने दिया? उसने तुम्हे भला-बुरा कहा जबकि गलती ताे उसकी थी। हमारी किस्मत अच्छी थी, नहीं ताे उसकी वजह से हम अभी अस्पताल में हाेते।

ऑटो वाले ने कहा, साहब! बहुत से लाेग garbage truck (कचरे का ट्रक) की तरह हाेते हैं। वे बहुत सारा कचरा अपने दिमाग में भरे हुए चलते हैं। जिन चीज़ाें की जीवन में काेई ज़रूरत नहीं हाेती उनकाे मेहनत करके जाेड़ते रहते हैं, जैसे – अहंकार, कामुकता, क्रोध, निराशा, चिंता, घृणा, लाेभ आदि। जब उनके दिमाग में ये बहुत सारा कचरा हाे जाता है ताे वे अपना बाेझ हल्का करने के लिए इसे दूसराें पर फेंकने का माैका ढूंढ़ने लगते हैं। इसलिए मैं ऐसे लाेगाें से दूरी बनाए रखता हूँ और उन्हे दूर से ही मुस्कुरा कर अलविदा कह देता हूँ, क्योंकि अगर उन जैसे लाेगाें द्वारा गिराया हुआ कचरा(कूड़ा-कर्कट) मैंने स्वीकार कर लिया ताे मैं भी एक “कचरे का ट्रक” बन जाऊगा और अपने साथ-साथ आसपास के लाेगाें पर भी वह कचरा गिराता रहुँगा।

मैं साेचता हूँ जिंदगी बहुत खूबसूरत है, इसलिए जाे हमसे अच्छा व्यवहार करते हैं उन्हे धन्यवाद कहाे और जाे हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते उन्हे मुस्कुराकर माफ कर दाे। हमें यह याद रखना चाहिए कि सभी मानसिक राेगी केवल अस्पताल में ही नहीं रहते हैं। कुछ हमारे आस-पास खुले में भी घूमते रहते हैं।

  • याद रखें – प्रकृति का यह नियम है कि यदि खेत में बीज न डाला जाएं ताे कुदरत उसे घास-फूस से भर देती है, उसी तरह यदि दिमाग में सकारात्मक विचार न भरे जाएं ताे नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं।

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थोड़ी सी हिम्मत से फर्क बड़ा।

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ϒ थोड़ी सी हिम्मत से फर्क बड़ा। ϒ

बहुत समय पहले की बात है ….. एक चरवाहा था जिसके पास 10 भेड़े थीं। वह रोज उन्हें चराने ले जाता और शाम को बाड़े में डाल देता। सब कुछ ठीक चल रहा था कि एक सुबह जब चरवाहा भेडें निकाल रहा था तब उसने देखा कि बाड़े से एक भेड़ गायब है। चरवाहा इधर-उधर देखने लगा, बाड़ा कहीं से टूटा नहीं था और कंटीले तारों की वजह से इस बात की भी कोई सम्भावना न थी कि बहार से कोई जंगली जानवर अन्दर आया हो और भेड़ उठाकर ले गया हो।

चरवाहा बाकी बची भेड़ों की तरफ घूमा और पुछा :- “क्या तुम लोगों को पता है कि यहाँ सेएक भेंड़ गायब कैसे हो गयी…क्या रात को यहाँ कुछ हुआ था?”

सभी भेड़ों ने ना में सर हिला दिया।

उस दिन भेड़ों के चराने के बाद चरवाहे ने हमेशा की तरह भेड़ों को बाड़े में डाल दिया। अगली सुबह जब वो आया तो उसकी आँखें आश्चर्य से खुली रह गयीं, आज भी एक भेंड़ गायब थी और अब सिर्फ आठ भेडें ही बची थीं।इस बार भी चरवाहे को कुछ समझ नहीं आया कि भेड़ कहाँ गायब हो गयी। बाकी बची भेड़ों से पूछने पर भी कुछ पता नहीं चला। ऐसा लगातार होने लगा और रोज रात में एक भेंड़ गायब हो जाती। फिर एक दिन ऐसा आया कि बाड़े में बस दो ही भेंड़े बची थीं।

चरवाहा भी बिलकुल निराश हो चुका था, मन ही मन वो इसे अपना दुर्भाग्य मान सब कुछ भगवान् पर छोड़ दिया था।आज भी वो उन दो भेड़ों के बाड़े में डालने के बाद मुड़ा। तभी पीछे से आवाज़ आई :-
“रुको-रुको मुझे अकेला छोड़ कर मत जाओ वर्ना ये भेड़िया आज रात मुझे भी मार डालेगा.!”
चरवाहा फ़ौरन पलटा और अपनी लाठी संभालते हुए बोला, “ भेड़िया ! कहाँ है भेड़िया.?”

भेड़ इशारा करते हुए बोली : “ये जो आपके सामने खड़ा है दरअसल भेड़ नहीं, भेड़ की खाल में भेड़िया है। जब पहली बार एक भेड़ गायब हुई थी तो मैं डर के मारे उस रात सोई नहीं थी। तब मैंने देखा कि आधी रात के बाद इसने अपनी खाल उतारी और बगल वाली भेड़ को मारकर खा गया!”

भेड़िये ने अपना राज खुलता देख वहां से भागना चाहा, लेकिन चरवाहा चौकन्ना था और लाठी से ताबड़तोड़ वार कर उसे वहीँ ढेर कर दिया।चरवाहा पूरी कहानी समझ चुका था और वह क्रोध से लाल हो उठा, उसने भेड़ से चीखते हुए पूछा – “जब तुम ये बात इतना पहले से जानती थीं तो मुझे बताया क्यों नहीं?”

भेड़ शर्मिंदा होते हुए बोली : “मैं उसके भयानक रूप को देख अन्दर से डरी हुई थी, मेरी सच बोलने की हिम्मत ही नहीं हुई, मैंने सोचा कि शायद एक-दो भेड़ खाने के बाद ये अपने आप ही यहाँ से चला जाएगा पर बात बढ़ते-बढ़ते मेरी जान पर आ गयी और अब अपनी जान बचाने का मेरे पास एक ही चारा था- हिम्मत करके सच बोलना, इसलिए आज मैंने आपसे सब कुछ बता दिया!”

चरवाहा बोला : “तुमने ये कैसे सोच लिया कि एक-दो भेड़ों को मारने के बाद वो भेड़िया यहाँ से चला जायेगा…भेड़िया तो भेड़िया होता है…वो अपनी प्रकृति नहीं बदल सकता ! जरा सोचो तुम्हारी चुप्पी ने कितने निर्दोष भेड़ो की जान ले ली। अगर तुमने पहले ही सच बोलने की हिम्मत दिखाई होती तो आज सब कुछ कितना अच्छा होता?”

दोस्तों, ज़िन्दगी में ऐसे कई मौके आते हैं जहाँ हमारी थोड़ी सी हिम्मत एक बड़ा फर्क डाल सकती है पर उस भेड़ की तरह हममें से ज्यादातर लोग तब तक चुप्पी मारकर बैठे रहते हैं जब तक मुसीबत अपने सर पे नहीं आ जाती। चलिए इस कहानी से प्रेरणा लेते हुए हम सही समय पर सच बोलने की हिम्मत दिखाएं और अपने देश को भ्रष्टाचार, आतंकवाद और बलात्कार जैसे भेड़ियों से मुक्त कराएं।

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51