सच्ची मानवता – संवेदनशीलता।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ सच्ची मानवता – संवेदनशीलता ϒ

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प्यारे दोस्तों – एक Postman ने घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा, “चिट्ठी ले लिजिये”। अंदर से एक बालिका की आवाज़ आई, “आ रही हूँ”। लेकिन तीन से चार मिनट तक काेई न आया ताे Postman ने फिर कहा, “अरे भाई! घर में काेई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लाे”। लड़की की फिर आवाज़ आई, “Postman साहब, दरवाजे के नीचे से चिट्ठी अंदर डाल दीजिए, मैं आ रही हूँ”। “नहीं, मैं खड़ा हूँ, रजिस्टर्ड पत्र है, पावती पर तुम्हारे signature चाहिए”।

करीबन छह से सात मिनट के बाद दरवाज़ा खुला। Postman इस देरी के लिए झल्लाया हुआ ताे था ही और उस पर चिल्लाने वाला था लेकिन, दरवाज़ा खुलते ही वह चाैंक गया। एक अपाहिज कन्या जिसके पांव नहीं थे, सामने खड़ी थी

Postman चुपचाप पत्र देकर और उसके signature लेकर चला गया। सप्ताह – दो सप्ताह में जब कभी उस लड़की के लिए डाक आती, Postman एक आवाज़ देता और जब तक वह कन्या न आती तब तक खड़ा रहता। एक दिन लड़की ने Postman काे नंगे पांव देखा।
दिपावली नज़दीक आ रही थी। उसने सोचा Postman काे क्या उपहार दूँ।

एक दिन जब Postman डाक देकर चला गया, तब उस लड़की ने जहाँ मिट्टी में Postman के पांव के निशान बने थे, उस पर काग़ज रखकर उन पांवाे का चित्र उतार लिया। अगले दिन उसने अपने यहाँ काम करने वाली बाईं से उस नाप के जूते मंगवा लिये।

दिपावली आई और उसके अगले दिन Postman ने गली के सब लाेगाें से ताे उपहार माँगा और साेचा कि अब इस बिटिया से क्या उपहार लेना? पर गली में आया हूँ ताे उससे मिल ही लूँ। उसने दरवाज़ा खटखटाया। अंदर से आवाज़ आई, “काैन ?” Postman उत्तर मिला। कन्या हाथ में एक Gift पैक लेकर आई और कहा, “अंकल, मेरी तरफ से दिपावली पर आपकाे भेंट है। “Postman ने कहा” तुम मेरे लिए बेटी के समान हाे, तुमसे मैं उपहार कैसे लूँ?” कन्या ने आग्रह किया कि मेरी इस उपहार के लिए मना न करें।

ठिक है कहते हुए Postman ने पैकेट ले लिया। कन्या न कहा, “अंकल इस पैकेट काे घर ले जाकर खाेलना। घर जाकर जब उसने पैकेट खाेला ताे विस्मित रह गया, क्योंकि उसमें एक जाेड़ी जूते थे। उसकी आँखे भर आई। अगले दिन वह Office पहुंचा और Postmaster से फरियाद की कि उसका तबादला फाैरन कर दिया जाए। Postmaster ने कारण पूछा, ताे Postman ने वे जूते टेबल पर रखते हुए सारी कहानी सुनाई और भीगी आँखाें और रूंधे कंठ से कहा, “आज के बाद मैं उस गली में नहीं जा सकूंगा। उस अपाहिज बच्ची ने मेरे नंगे पाँवाें काे ताे जूते दे दिये पर मैं उसे पाँव कैसे दे पाऊंगा ?”

सीख : संवेदनशीलता का यह श्रेष्ठ दृष्टांत है। संवेदनशीलता यानि, दूसराें के दुःख दर्द काे समझना, अनुभव करना और उसके दुःख-दर्द में भागीदारी करना, उसमें शरीक हाेना। एक ऐसा मानवीय गुण है जिसके बिना इंसान अधूरा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

दयालु लकड़हारा।

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ϒ दयालु लकड़हारा। ϒ

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प्यारे दोस्तो – बहुत समय पहले किशनपुर गाँव में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह दूसराे की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता। जीवाें के प्रति उसके मन में बहुत दया थी। एक दिन वह जंगल से लकड़ी इकट्ठी करने के बाद थक गया ताे थाेड़ी देर सुस्ताने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गया। तभी उसे सामने के पेड़ से पक्षियों के बच्चाें के ज़ाेर-ज़ाेर से चीं-चीं करने की आवाज़ सुनाई दी।

उसने सामने देखा ताे डर गया। एक सांप घाेसले में बैठे चिड़िया के बच्चाें की तरफ बढ़ रहा था। बच्चे उसी के डर से चिल्ला रहे थे। रामू उन्हें बचाने के लिए पेड़ पर चढ़ने लगा। सांप लकड़हारे के डर से नीचे उतरने लगा। उसी दाैरान चिड़िया भी लाैट आई। उसने जब रामू काे पेड़ पर देखा ताे समझा कि उसने बच्चाें काे मार दिया।

वह रामू काे चाेच मार-मारकर चिल्लाने लगी। उसकी आवाज़ से और चिड़िया भी आ गईं। सभी ने रामू पर हमला कर दिया। बेचारा रामू किसी तरह पेड़ से नीचे उतरा। चिड़िया जब घाेसले में गई ताे उसके बच्चे सुरक्षित बैठे थे। बच्चाें ने चिड़िया काे सारी बात बताई ताे उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।

वह रामू से माफी मांगना चाहती थी और उसका शुक्रिया अदा करना चाहती थी। उसे कुछ दिन पहले दाना ढूंढ़ते हुए एक कीमती हीरा मिला था। उसने हीरे काे अपने घाेसले में लाकर रख लिया था। चिड़िया ने वह हीरा रामू के आगे डाल दिया और एक डाली पर बैठकर अपनी भाषा में धन्यवाद करने लगी। रामू ने हीरा उठा लिया और चिड़िया की तरफ हाथ उठाकर उसका धन्यवाद किया और वहां से चल दिया। तभी कई चिड़िया आईं और उसके ऊपर उड़कर साथ चलने लगीं मानाे वे उसका आभार करते हुए विदा करने आई हाें।

सीख – किसी भी जीव पर किये गये उपकार का फल सदैव ही सकारात्मक नतीजे के रूप में return मिलता हैं।

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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सच्ची गुरु दक्षिणा।

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ϒ सच्ची गुरु दक्षिणा। ϒ

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प्यारे दोस्तों – एक ऋषि के पास एक युवक ज्ञान प्राप्ती के लिए गया। ज्ञान प्राप्ती के बाद शिष्य ने गुरु दक्षिणा देने का आग्रह किया। इस पर गुरु जी ने युवक से कहा कि वह दक्षिणा में उन्हें वह चीज़ दे जाे बिल्कुल व्यर्थ है। शिष्य आज्ञा लेकर व्यर्थ चीज की खाेज में निकल पड़ा। रास्ते में उसे मिट्टी दिखी ताे उसे उससे ज्यादा व्यर्थ कुछ नहीं लगा। उसने मिट्टी की ओर हाथ बढ़ाया ताे मिट्टी बाेल पड़ी; “तुम मुझे व्यर्थ समझ रहे हाे! तुम्हें पता नहीं है कि इस दुनिया का सारा वैभव मेरे ही गर्भ से प्रकट हाेता है। ये विविध वनस्पतियाँ, ये रूप, रस और गंध कहाँ से आते हैं?”

शिष्य आगे बढ़ गया, थाेड़ी दूर पर उसे एक पत्थर मिला। शिष्य ने साेचा, इसे ही ले चलूँ। जैसे ही उसने उसे उठाने के लिए हाथ बढ़ाया, ताे पत्थर बाेला, तुम इतने ज्ञानी हाेकर भी मुझे बेकार मान रहे हाे! तुम अपने भवन और अट्टालिकाएं किससे बनाते हाे? तुम्हारे मंदिराें में किसे गढ़कर देव प्रतिमाएँ स्थापित की जाती हैं? मेरे इतने उपयाेग के बाद भी तुम मुझे व्यर्थ मान रहे हाे। यह सुनकर शिष्य निरूत्तर हाे गया और वहाँ से भी चल दिया। इसके बाद कई और ऐसी चीज़ें उसने गुरु जी के लिए लेनी चाही लेकिन उसे हर जगह काम की चीज़ें ही नज़र आई। उसने साेचा कि जब मिट्टी और पत्थर इतने उपयागी हैं ताे आखिर व्यर्थ क्या हाे सकता है? उसके मन से आवाज़ आई कि सृष्टि का हर पदार्थ अपने आप में उपयाेगी है।

वस्तुतः “व्यर्थ व तुच्छ वह है, जाे दूसराें काे व्यर्थ और तुच्छ समझता है। व्यक्ति के भीतर का अहंकार ही एक ऐसा तत्त्व है, जिसका कहीं काेई उपयाेग नहीं।”

वह गुरु के पास वापस लाैट आया और उनके पैराें में गिर पड़ा। वह गुरु दक्षिणा में अपना अहंकार देने आया था। गुरु जी प्रसन्न हुये कि – आज से तुम ज्ञान में संपूर्ण हुए, अब तुम लाेगाें काे ज्ञान-ध्यान व दिक्षा देने के योग्य हाे गये हाे।

याद रखें – अहंकार से ज्यादा बेकार और कुछ नहीं है, इस संसार में। अगर कुछ त्यागना ही है तो अहंकार का त्याग करें। आप कितने ही बड़े ज्ञानी क्यों न हाे, अगर अहंकार का त्याग नहीं किया ताे आपकी गिनती बुद्धिहीनाें मेें हाेगी। अहंकार काे त्याग कर ही आप सर्वश्रेष्ठ आसन पर आसिन हाे सकते है, अहंकार काे त्याग कर ही आप सभी के दिलाें काे जीत सकते हैं।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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मिलियन डॉलर की पेंटिंग।

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ϒ मिलियन डॉलर की पेंटिंग। ϒ

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प्यारे दोस्तों – पिकासो स्पेन में जन्में एक बहुत मशहूर चित्रकार थे। उनकी पेंटिंग दुनिया भर में कराेड़ाें- अरबाें रुपये में बिका करती थी। एक दिन रास्ते से गुज़रते समय एक महिला की नज़र पिकासो पर पड़ी और संयाेग से उस महिला ने उन्हें पहचान लिया। वह दाैड़ी हुई उसके पास आयी और बाेली- सर मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूँ। आपकी पेंटिंग्स मुझे बहुत ज्यादा पसंद हैं। क्या आप मेरे लिए भी एक पेंटिंग बना देंगे।

पिकासो हँसते हुए बाेले- मैं यहाँ खाली हाथ हूँ, मेरे पास कुछ नहीं है, मैं फिर कभी आपके लिए पेंटिंग बना दूंगा। लेकिन उस महिला ने जिद पकड़ ली कि मुझे अभी एक पेंटिंग बना के दाे, बाद में पता नहीं आपसे मिल पाऊंगी या नहीं। पिकासो ने जेब से एक कागज़ निकाला और अपने पेन से उसपे कुछ बनाने लगे। करीब दस सेकंड के अंदर पिकासो ने पेंटिंग बनायी और कहा, ये मिलियन डॉलर की पेंटिंग है! उस महिला काे बड़ा अजीब लगा कि बस दस सेकंड में जल्दी से एक काम चलाऊ पेंटिंग बना दी और बाेल रहे हैं कि मिलियन डॉलर की पेंटिंग है। उस महिला ने वाे पेंटिंग ली और बिना कुछ बाेले अपने घर आ गयी। उसकाे लगा कि पिकासो उसकाे पागल बना रहें है, इसलिए वाे बाज़ार गयी और उस पेंटिंग की कीमत पता की। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि वास्तव में वाे पेंटिंग मिलियन डॉलर की थी।

Link : Picasso painting sells for a record $179 million

वाे दाैड़ी-दाैड़ी फिर एक बार पिकासो के पास गयी और बाेली- सर आपने बिल्कुल सही कहा था, ये ताे मिलियन डॉलर की ही पेंटिंग है। पिकासो ने हँसते हुए कहा कि मैंने ताे पहले ही कहा था। वाे महिला बाेली- सर आप मुझे अपनी स्टूडेंट बना लीजिये और मुझे भी पेंटिंग बनाना सीखा दीजिये। जैसे आपने दस सेकंड में मिलियन डॉलर की पेंटिंग बना दी वैसे मैं भी दस सेकंड में ना सही दस मिनट में ही अच्छी पेंटिंग बना सकूँ मुझे ऐसा बना दीजिये। पिकासो ने हँसते हुए कहा- ये जाे मैंने दस सेकंड में यह पेंटिंग बनायी है, इसे सीखने में मुझे करीब तीस साल का समय लगा। मैंने अपने जीवन के तीस साल सीखने में दिए। तुम भी दाे ताे ज़रूर सीख जाओगी। वाे महिला अवाक निःशब्द पिकासो काे देखती रह गयी।

याद रखें- दोस्तों, जब हम दूसराें काे सफल हाेता देखते हैं ताे हमें ये सब बड़ा आसान लगता है। हमें लगता है कि ये इंसान ताे बड़ी आसानी से सफल हाे गया। लेकिन मेरे दोस्तों, उस एक सफलता के पीछे ना जाने कितने सालाें की मेहनत छिपी हुई हाेती है, ये काेई नहीं देख पाता। सफलता ताे बड़ी आसानी से मिल जाती है, लेकिन सफलता की तैयारी में अपना जीवन कुर्बान करना हाेता है। जाे लाेग खुद काे तपाकर, संघर्ष करके अनुभव हासिल करते हैं वाे कामयाब ज़रूर हाेते हैं, लेकिन दूसराें काे देखने में लगता है कि ये कितनी आसानी से सफल हाे गया। मेरे दोस्तों, परीक्षा ताे केवल तीन घंटे की हाेती है, लेकिन उस तीन घंटे के लिए पूरे साल तैयारी करनी पड़ती है। ताे फिर आप राताें-रात सफल हाेने का सपना कैसे देख सखते हाे? सफल अनुभव और संघर्ष मांगती है और अगर आप देने काे तैयार हैं ताे आपकाे आगे जाने अर्थात सफल हाेने से काेई नहीं राेक सकता।

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समय और धैर्य।

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ϒ समय और धैर्य। ϒ

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प्यारे दोस्तों – एक साधु था, वह राेज़ घाट के किनारे बैठकर चिल्लाया करता था, जाे “चाहाेगे साे पाओगे”, “चाहाेगे साे पाओगे”। बहुत से लाेग वहाँ से गुज़रते थे पर काेई भी उसकी बात पर ध्यान नहीं देता था, और सब उसे एक पागल आदमी समझते थे। एक दिन एक युवक वहाँ से गुज़रा और उसने साधु की आवाज़ सुनी, “चाहाेगे साे पाओगे”, “चाहाेगे साे पाओगे”। ये आवाज़ सुनते ही वह युवक उनके पास चला गया। उसने साधु से पूछा- “महाराज! आप बाेल रहे थे कि “चाहाेगे साे पाओगे”, ताे क्या आप मुझकाे वाे दे सकते हाे जाे मैं चाहता हूँ?

साधु उसकी बात काे सुनकर बाेले- “हा बेटा! तुम जाे कुछ भी चाहते हाे मैं उसे ज़रूर दूँगा, बस तुम्हें मेरी बात माननी हाेगी। लेकिन पहले ये ताे बताओ कि तुम्हें आखिर चाहिए क्या”? युवक बाेला – “मेरी एक ही ख्वाहिश है कि मैं हीराें का बहुत बड़ा व्यापारी बनना चाहता हूँ”। साधु बाेले – “काेई बात नहीं”, मैं तुम्हें एक हीरा और एक माेती दे देता हूँ, उससे तुम जितने भी हीरे-माेती बनाना चाहाेगे बना पाओगे! ऐसा कहते हुए साधु ने अपना हाथ उस युवक की हथेली पर रखते हुए कहा- `पुत्र! मैं तुम्हें दुनिया का सबसे अनमाेल हीरा दे रहा हूँ, लाेग इसे समय कहते हैं, इसे तेज़ी से अपनी मुट्ठी में पकड़ लाे और इसे कभी मत गंवाना, तुम इससे जितने चाहाे हीरे बना सकते हाे।

युवक अभी कुछ साेच ही रहा था कि साधु उसकी दूसरी हथेली पकड़ते हुए बाेले- “पुत्र, इसे पकड़ाे, यह दुनिया का सबसे कीमती मोती है, लाेग इसे धैर्य` कहते हैं, जब कभी समय देने के बावजूद परिणाम अच्छा न मिले ताे इस कीमती मोती काे धारण कर लेना, याद रखना जिसके पास यह मोती है वह दुनिया में कुछ भी प्राप्त कर सकता है।

युवक गहराई से साधु की बाताें पर विचार करता है और निश्चय करता है कि आज से मैं कभी भी अपना समय बर्बाद नहीं करूंगा व सदैव धैर्य से काम करूंगा। ऐसा सोचकर वह हीराें के एक बहुत बड़े व्यापारी के यहाँ काम शुरु करता है और अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल एक दिन खुद भी हीराें का बहुत बड़ा व्यापारी बनता है।

याद रखें- `समय और धैर्य` वह दाे हीरे-माेती हैं जिनके बल पर हम बड़े-से-बड़ा लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। अतः ज़रूरी है कि हम अपने कीमती समय काे बर्बाद न करें और अपनी मंज़िल तक पहुँचने के लिए धैर्य से काम लें।

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 ~Kmsraj51

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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पानी का ग्लास।

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ϒ पानी का ग्लास। ϒ

प्यारे दोस्तों – एक बार किसी रेलवे प्लेटफ़ार्म पर जब गाड़ी रुकी ताे एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला। ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज़ दी, ऐ लड़के इधर आ। लड़का दौड़कर आया। उसने पानी का गिलास भरकर सेठ की ओर बढ़ाया ताे सेठ ने पूछा कितने पैसे में ?  लड़के ने कहा पच्चीस पैसे। सेठ ने उससे कहा कि पंद्रह पैसे में देगा क्या?

kmsraj51-glass-of-water

यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया। उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे, जिन्हाेंने यह नज़ारा देखा था कि लड़का मुस्कराया पर माैन रहा। ज़रूर काेई रहस्य उसके मन में हाेगा। महात्मा जी नीचे उतरकर उस लड़के के पीछे-पीछे गए। बाेले, ऐ लड़के, ठहर ज़रा, यह ताे बता कि तू हँसा क्यों ? वह लड़का बाेला महाराज! मुझे हँसी इसलिए आई कि सेठ जी काे प्यास ताे लगी ही नहीं थी, वे ताे केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे।

महात्मा ने पूछा, लड़के तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठ जी काे प्यास लगी ही नहीं थी। लड़के ने जवाब दिया, महाराज! जिसे वाकई प्यास लगी हाे वह कभी रेट नहीं पूछता, वह ताे गिलास लेकर पहले पानी पीता है, फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं। पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है। वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में कुछ पाने की तमन्ना हाेती है, वे वाद विवाद में नहीं पड़ते।

सीख – जिनकी प्यास सच्ची नहीं हाेती, वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं। वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते। अगर खुदा नहीं है ताे उसका ज़िक्र क्यों ? और अगर खुदा है ताे फिर फिक्र क्यों ?

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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Note::-

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

कर्तव्य की उपेक्षा।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ कर्तव्य की उपेक्षा। ϒ

kmsraj51-dereliction-of-duty

एक सेठ के पास बहुत सारी गायें थी। उसने उनकी देखभाल के लिए दाे नाैकर रखे। कुछ दिनाें के बाद पता चला कि गायें बहुत दुबली हाे गई हैं और कुछ मर भी चुकी हैं। सेठ को इस पर बहुत गुस्सा आया। उसने इसके लिए दाेनाें नाैकराें काे जिम्मेदार ठहराया। जांच करने पर पता चला कि दाेनाें नाैकर अपने-अपने व्यसनाें में लगे रहे। एक काे जुआ खेलने की आदत थी। गायाें की देखभाल करने में उसका मन नहीं लगता था।

अक्सर वह जुआ खेलने बैठ जाता और गायाें की देखभाल नहीं हाे पाती थी। यही बात दुसरे के साथ भी थी। वह पूजा-पाठ का व्यसनी था। वह गायाे की तरफ ध्यान नहीं देता और पूजा-पाठ में लगा रहता था। सेठ दाेनाें काे राजा के पास ले गया। राजा काे उनके बारे में फैसला करना था। लाेगाें काे लगा कि राजा पूजा-पाठ करने वाले नाैकर काे क्षमा कर देगा। लेकिन राजा ने दाेनाें काे समान दंड दिया और कहा कर्तव्य की उपेक्षा अपराध है चाहे वह किसी भी कारण से किया जाए।

प्यारे दोस्तों – जब भी कभी काेई भी जिम्मेदारी वाला कार्य आपके ऊपर हाे, अर्थांत आपके ऊपर निर्भर हाे ताे सही समय पर कार्य काे प्रधानता देते हुए सही तरह से करें।

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* चांदी की छड़ी।

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In English

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शांत मन से सब कुछ संभव।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ शांत मन से सब कुछ संभव। ϒ

kmsraj51-everything-possible-to-calm-the-mind

एक बार की बात है, एक किसान था, जिसने अपनी “घड़ी” चारे से भरे हुए बाड़े में खाे दी थी। वह “घड़ी” बहुत कीमती थी, इसलिए किसान ने उसकी बहुत खाेजबीन की पर वह “घड़ी” नहीं मिली। बाड़े के बाहर कुछ बच्चे खेल रहे थे और किसान काे दूसरा काम भी था, उसने सोचा क्यों न मैं इन बच्चाें से “घड़ी” काे खाेजने के लिए कहूँ।

उसने बच्चाें से कहा जाे भी बच्चा उसे “घड़ी” खाेजकर देगा उसे वह अच्छा पुरस्कार देगा। यह सुनकर बच्चें पुरस्कार के लालच में बाड़े के अंदर दाैड़ गए और यहाँ-वहाँ “घड़ी” ढ़ूंढ़ने लगे। लेकिन किसी भी बच्चें काे “घड़ी” नहीं मिली। तब एक बच्चें ने किसान के पास जाकर कहा कि वह “घड़ी” खाेजकर ला सकता है, पर सारे बच्चाें काे बाड़े से बाहर जाना हाेगा। किसान ने उसकी बात मान ली और किसान तथा बाकी सभी बच्चें बाड़े के बाहर चले गए। कुछ देर बाद बच्चा लाैट आया और वह कीमती “घड़ी” उसके हाथ में थी। किसान अपनी “घड़ी” देखकर बहुत खुश व आश्चर्यचकित हाे गया।

उसने बच्चे से पूछा, तुमने "घड़ी" किस तरह खाेजी। जबकि बाकी बच्चे और खुद मैं इस काम में नाकाम हाे चुका था। बच्चे ने जवाब दिया मैंने कुछ नही किया, बस शांत मन से ज़मीन पर बैठ गया और “घड़ी” की आवाज़ सुनने की किेशिश करने लगा। क्योंकि बाड़े में शांति थी, इसलिए मैंने उसकी आवाज सुन ली, और उसी दिशा में देखा।

¤ याद रखें। ¤

प्यारे दोस्तों – एक शांत दिमाग बेहतर साेच सकता है, एक थके हुए दिमाग की तुलना में। दिन में कुछ समय के लिए आँखें बंद करके शांति से बैठिये। अपने मस्तिक को शांत होने दीजिए, फिर देखिये वह आपकी ज़िंदगी काे किस तरह से व्यवस्थित कर देता हैं। आत्मा हमेशा अपने आपकाे ठिक करना जानती है, बस मन काे शांत करना ही चुनाैती हैं। इसलिए मन काे शांत करने का अभ्यास करते रहें। अभ्यास करते-करते एक समय ऐसा भी आ जाएगा – जब आपका मन बिल्कुल शांत हो जायेगा।

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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बहन का स्नेह मिलना खुशनसीबी है।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ बहन का स्नेह मिलना खुशनसीबी है। ϒ

एक छोटा-सा पहाड़ी गांव था। वहां एक किसान, उसकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी रहते थे। एक दिन बेटी की इच्छा स्कार्फ खरीदने की हुई और उसने पिताजी की जेब से 10 रुपए चुरा लिए।

पिताजी को पता चला तो उन्होंने सख्ती से दोनों बच्चों से पूछा – पैसे किसने चुराए ?
अगर तुम लोगों ने सच नहीं बताया तो सजा दोनों को मिलेगी। बेटी डर गई, बेटे को लगा कि दोनों को सजा मिलेगी तो सही नहीं होगा।

वह बोला – पिताजी, मैंने चुराए, पिताजी ने उसकी पिटाई की और आगे से चोरी न करने की हिदायत भी दी। भाई ने बहन के लिए चुपचाप मार खा ली। वक्त बीतता गया। दोनों बच्चे बड़े हो गए।

एक दिन मां ने खुश होकर कहा – दोनों बच्चों के रिजल्ट अच्छे आए हैं। पिताजी (दुखी होकर) – पर मैं तो किसी एक की पढ़ाई का ही खर्च उठा सकता हूं।

बेटे ने फौरन कहा – पिताजी, मैं आगे पढ़ना नहीं चाहता।
बेटी बोली – लड़कों को आगे जाकर घर की जिम्मेदारी उठानी होती है, इसलिए तुम पढ़ाई जारी रखो। मैं कॉलेज छोड़ दूंगी। अगले दिन सुबह जब किसान की आंख खुली तो घर में एक चिट्ठी मिली।

उसमें लिखा था – मैं घर छोड़कर जा रहा हूं। कुछ काम कर लूंगा और आपको पैसे भेजता रहूंगा। मेरी बहन की पढ़ाई जारी रहनी चाहिए। एक दिन बहन हॉस्टल के कमरे में पढ़ाई कर रही थी।

तभी गेटकीपर ने आकर कहा – आपके गांव से कोई मिलने आया है। बहन नीचे आई तो फटे-पुराने और मैले कपड़ों में भी अपने भाई को फौरन पहचान लिया और उससे लिपट गई।

बहन – तुमने बताया क्यों नहीं कि मेरे भाई हो – भाई।

मेरे – ऐसे कपड़े देखकर तुम्हारे सहेलियाें में बेइज्जती होगी। मैं तो तुम्हें बस एक नजर देखने आया हूं।
भाई चला गया – बहन देखती रही।

बहन की शादी शहर में एक पढ़े – लिखे लड़के से हो गई। बहन का पति कंपनी में डायरेक्टर बन गया। उसने भाई को मैनेजर का काम ऑफर किया, पर उसने इनकार कर दिया।

बहन ने नाराज होकर वजह पूछी तो भाई बोला – मैं कम पढ़ा-लिखा होकर भी मैनेजर बनता तो तुम्हारे पति के बारे में कैसी-कैसी बातें उड़तीं, मुझे अच्छा नहीं लगता।

भाई की शादी गांव की एक लड़की से हो गई। इस मौके पर किसी ने पूछा कि उसे सबसे ज्यादा प्यार किससे है ?

वह बोला – अपनी बहन से, क्योंकि जब हम प्राइमरी स्कूल में थे तो हमें पढ़ने दो किमी दूर पैदल जाना पड़ता था। एक बार ठंड के दिनों में मेरा एक दस्ताना खो गया।

बहन ने अपना दे दिया – जब वह घर पहुंची तो उसका हाथ सुन्न पड़ चुका था और वह ठंड से बुरी तरह कांप रही थी। यहां तक कि उसे हाथ से खाना खाने में भी दिक्कत हो रही थी। उस दिन से मैंने ठान लिया कि अब जिंदगी भर मैं इसका ध्यान रखूंगा। बहन ने हमारी हर गलती का बचाव किया था बचपन से वो हमे मां-बाप से ज्यादा स्नेह करती है।

जीवन में कुछ मिले या ना मीले पर बहन का स्नेह मिलना खुशनसीबी है।

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

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भाई से भाई का सच्चा स्नेह।

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CYMT-KMSRAJ51-KMS

ϒ भाई से भाई का सच्चा स्नेह। ϒ

BTA-KMSRAJ51

सेठ धर्मदास को फल खाने का बहुत शौक था। वो रोज तरह – तरह के फल खरीदते थे। एक दिन वो संतरे खरीद रहे थे कि अचानक खरीदते -खरीदते, उनका मन किया और उन्होंने एक फांक खायी, खाते ही वो दंग रह गये और उन्होंने विक्रेता से पूछा;???

क्या ये संतर विदेश से आये हैं? इतने स्वादिष्ट संतरे मैने कभी नहीं खाये।

विक्रेता ने बताया कि ये संतरे इसी शहर के हैं, और आज एक बूढा आदमी उसे बेच कर गया है।

सेठ जी, स्वाद का रहस्य जानने के लिए बूढ़े के पास गये और उनसे पूछा कि आपके संतरे के स्वाद का रहस्य क्या हैं?

बूढ़े व्यक्ति ने कहा: “भाई के प्रति भाई का प्यार।”

सेठ जी ने कहा वो कैसे मैं समझा नहीं।

तब बूढ़े व्यक्ति ने कहा कि ये पेड़ उसकी माँ ने लगाया था। उसके जन्म से पहले। जब माँ इस पेड़ में रोज पानी डालती थी तब मैं माँ से पूछता था।

“माँ तुम इस पेड़ में रोज पानी लगाती हो, इसका कितना ध्यान रखती हो, ये कौन है? इससे हमको क्या फायदा होगा?

तब माँ ने कहा बेटा – ये तेरा बड़ा भाई है। तू हमेशा इसका ख्याल रखना, इसको कभी ना काटना, ये तेरा साथ तब भी देगा जब तुझे अपने ठुकरा देंगे।”

तब से मुझे भी इस से प्यार हो गया और मैने इसे अपना बड़ा भाई माना और अपनी हर खुशी, हर गम इसके साथ साझा किया। समय बीतता चला गया, मैं अमेरिका चला गया और बहुत पैसा वाला बन गया, माँ और अपने इस भाई को भूल गया ।

मेरे दो बच्चे हुए, धीरे – धीरे समय ने चक्र चलाया, मुझे बिजनेस में घाटा हुआ, मेरे सब मित्र, पत्नी, बच्चे मेरा साथ छोड़ गये।

सब अपने – अपने शेयर बेच कर अलग हो गए।

मैंने अपनी सारी संपत्ति बेच कर कर्ज पटाया।

मैं अपनों के बेगानेपन, अकेलेपन, निराशा, हताशा से टूट गया।

फिर मुझे बचपन में माता की बात याद आई, मेरे पास यहाँ Return आने लायक पैसे बचे थे।

फिर मैं अपने इस टूटे – फूटे घर वापस आया, आते ही मैं अपने इस भाई से मिलकर खूब रोया। फिर मैंने इसकी देखरेख की और आज ये अपने छोटे, बूढ़े भाई को सहारा दे रहा है।

मेरे प्रति जो इसके अंदर प्यार है, वो इसके फलों में स्वाद बनकर आता है। मेरा ये भाई आज भी मेरे साथ खड़ा है।

सेठ जी ने मुड़कर देखा तो पेड़ स्वीकृति में हिल रहा था ।

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ईश्वर से सच्चा प्रेम।

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CYMT-KMSRAJ51-KMS

ϒ ईश्वर से सच्चा प्रेम। ϒ

गाँव की एक अहीर बाला दूध बेचने के लिये रोजाना दूसरे गाँव जाती। रास्ते में एक नदी पड़ती। नदी किनारे दूध का डिब्बा खोलती और उसमें से एक लोटा दूध निकालती। दूध के डिब्बे में एक लोटा पानी मिलाती और नदी पार के गाँव की ओर चल पड़ती दूध बेचने। यह उसकी रोज की दिनचर्या थी।

नदी किनारे एक वृक्ष पर संत मलूकदास जी जप माला फेरते हुऐ इस अहीर बाला की गतिविधियों को रोज आश्चर्य से देखा करते। एक दिन उनसे रहा नहीं गया और ऊपर से आवाज लगा ही दी।

बेटी सुनो।

हाँ – बाबा, बोलिये ना।

बुरा न मानो तो तुमसे एक बात पूछना चाहता हूँ।

पूछिये ना बाबा, आपकी बात भी कोई बुरा मानने की होती है क्या?

बेटी – मैं रोज देखता हूँ। तुम यहाँ आती हो। दूध के डिब्बे में से एक लोटा दूध निकालती हो और डिब्बे में एक लोटा पानी मिला देती हो। क्यों करती हो तुम ऐसा?

लड़की ने नज़रें नीची कर ली।

कहा – बाबा, मैं जिस गाँव में दूध बेचने जाती हूँ ना….. वहाँ मेरी सगाई पक्की हुई है। मेरे वो वहीं रहते हैं। जबसे सगाई हुई है मैं रोज एक लोटा दूध उन्हें लेजाकर देती हूँ। दूध कम न पड़े इसलिये एक लोटा पानी डिब्बे में मिला देती हूँ।

पगली तू ये क्या कर रही है?

कभी हिसाब भी लगाया है तूने? कितना दूध – पानी कर चुकी है अभी तक तू। अपने मंगेतर के लिये?

लड़की नें नज़रें तनिक उठाते हुऐ उत्तर दिया – बाबा, जब सारा जीवन ही उसे सौंपने का फैसला हो गया तो फिर हिसाब क्या लगाना? जितना दे सकी दिया… जितना दे सकूंगी देती रहूंगी।

मलूक दास जी के हाथ से माला छूट कर नदी में जा गिरी। उस अहीर बाला के पाँव पकड़ लिये उन्होंने। बोले – बेटी, तूने तो मेरी आँखें ही खोल दी। माला का हिसाब लगाते-लगाते मैंने तो जप का मतलब ही नहीं समझा। जब सारा जीवन ही उसे सौंप दिया तो क्या हिसाब रखना? कितनी माला फेर ली?

यह है वास्तविक प्रेम ईश्वर से …..

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

वस्तुओं को बर्वाद ना करें।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-KMS

ϒ वस्तुओं को बर्वाद ना करें। ϒ

भगवान् बुद्ध के एक अनुयायी ने कहा – प्रभु!

मुझे आपसे एक निवेदन करना है।
बुद्ध : बताओ क्या कहना है ?

अनुयायी : मेरे वस्त्र पुराने हो चुके हैं। अब ये पहनने लायक नहीं रहे। कृपया मुझे नए वस्त्र देने का कष्ट करें।

बुद्ध ने अनुयायी के वस्त्र देखे, वे सचमुच बिलकुल जीर्ण हो चुके थे और जगह जगह से घिस चुके थे।

इसलिए उन्होंने एक अन्य अनुयायी को नए वस्त्र देने का आदेश दे दिए। कुछ दिनों बाद बुद्ध अनुयायी के घर पहुंचे।

बुद्ध : क्या तुम अपने नए वस्त्रों में आराम से हो ? तुम्हे और कुछ तो नहीं चाहिए?

अनुयायी : धन्यवाद प्रभु। मैं इन वस्त्रों में बिलकुल आराम से हूँ और मुझे और कुछ नहीं चाहिए।

बुद्ध : अब जबकि तुम्हारे पास नए वस्त्र हैं तो तुमने पुराने वस्त्रों का क्या किया?

अनुयायी : मैं अब उसे ओढने के लिए प्रयोग कर रहा हूँ ?

बुद्ध : तो तुमने अपनी पुरानी ओढ़नी का क्या किया?

अनुयायी : जी मैंने उसे खिड़की पर परदे की जगह लगा दिया है।

बुद्ध : तो क्या तुमने पुराने परदे फ़ेंक दिए ?

अनुयायी : जी नहीं, मैंने उसके चार टुकड़े किये और उनका प्रयोग रसोई में गरम पतीलों को आग से उतारने के लिए कर रहा हूँ।

बुद्ध : तो फिर रसॊइ के पुराने कपड़ों का क्या किया ?

अनुयायी : अब मैं उन्हें पोछा लगाने के लिए प्रयोग करूँगा।

बुद्ध : तो तुम्हारा पुराना पोछा क्या हुआ?

अनुयायी : प्रभु वो अब इतना तार – तार हो चुका था कि उसका कुछ नहीं किया जा सकता था। इसलिए मैंने उसका एक – एक धागा अलग कर दिए की बातियाँ तैयार कर लीं …. उन्ही में से एक कल रात आपके कक्ष में प्रकाशित था।

बुद्ध अनुयायी से संतुष्ट हो गए। वे प्रसन्न थे कि उनका शिष्य वस्तुओं को बर्वाद नहीं करता और उसमे समझ है कि उनका उपयोग किस तरह से किया जा सकता है।

मित्रों, आज जब प्राकृतिक संसाधन दिन – प्रतिदिन कम होते जा रहे हैं ऐसे में हमें भी कोशिश करनी चाहिए कि चीजों को बर्वाद ना करें और अपने छोटे छोटे प्रयत्नों से इस धरा को सुरक्षित बना कर रखें।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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ये समाज कभी ना छोड़े आपको।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ ये समाज कभी ना छोड़े आपको। ϒ

प्रिय पाठक मित्रों,

लोग सोचते है कि ये समाज के लोग क्या सोचेंगे?
जाे कार्य (कर्म) हम कर रहें हैं, अगर हम स्वयं उस कार्य से संतुष्ट नहीं हैं, ताे क्या सिर्फ समाज व दुनिया के लोगाे काे दिखावें के लिए काेई कार्य करना उचित हैं।

आजकल समाज के लोग एक-दूसरे का टांग(पैर) खिंचाई बहुत चतुराई के साथ करते हैं। स्वयं कार्य (कर्म) करके आगे बढ़ने कि नहीं साेचते, बल्कि यह साेचते है कि अगला(फ़लाना) Life में “मेरे से आगे कैसे बढ़ गया?” अब ताे इसकाे राेकना ही हाेगा, अर्थात इसकी टांग(पैर) खिंचाई कर नीचे गिराकर अपने बराबर लाना हैं।

प्रिय मित्रों,, आज मैं आप सभी से एक कहानी Share कर रहा हुँः  “ये समाज कभी ना छोड़े आपको।”

कहानी कुछ इस तरह से हैं …..    एक बार एक किसान अपने बेटे(पुत्र) के साथ बाहर किसी गाँव-देहात से आ रहा था और साथ में एक गधा (donkey) भी था। पिता और पुत्र दोनों अपनी मस्ती में धुन गीत गाते-गुनगुनाते चलें आ रहें थे। तभी रास्ते में एक तिराहे पर कुछ लाेग खड़े हुऐ मिलते है, जब पिता और पुत्र गधे के साथ उनके सामने से गुजरते है तब वहाँ खड़े लाेग आपस में बात करने लगते है कि “दोनों कितने बड़े मूर्ख है साथ में गधा है फिर भी पैदल जा रहें हैं।”

उनकी बातें सुनकर, पिता और पुत्र दोनों गधे के ऊपर बैठकर जाने लगें। अभी कुछ ही दुर आगे बढ़े थे कि एक जगह फिर से कुछ लाेग खड़े दिखाई दिये – जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब आपस में सब एक-दुसरे से बात करने लगते है कि “देखाें दोनों कितने बड़े निर्दयी है एक गधे पर दोनों सवार है।” 

उनकी बातें सुनकर, पिता गधे से उतर कर पैदल ही चलने लगता है। कुछ और दुर आगे बढ़ने पर फिर से एक जगह पर कुछ लाेग खड़े दिखाई देते हैं, जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब आपस में सब एक-दुसरे से बात करने लगते है कि देखाें क्या ज़माना आ गया है “बेटा कितना निर्दयी है खुद ताे गधे पर बैठा हैं और अपने पिता काे पैदल चलवा रहा हैं।”

उनकी बातें सुनकर, अब पुत्र गधे से उतर कर अपने पिता काे गधे के ऊपर बैठा कर, खुद पैदल ही चलने लगता है। थाेड़ा और दुर आगे बढ़ने पर फिर से एक जगह पर कुछ लाेग खड़े दिखाई देते हैं, जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब सभी आपस में एक-दुसरे से बात करने लगते है कि देखाें “पिता कितना निर्दयी है खुद ताे गधे पर बैठा हैं और अपने पुत्र काे पैदल चलवा रहा हैं।”

उनकी बातें सुनकर, अब पिता भी गधे से उतर कर पैदल ही चलने लगा। अर्थात अब पिता और पुत्र दोनों ही गधे काे साथ में लिए पैदल ही चलने लगे।

थाेड़ा और दुर आगे बढ़ने पर फिर से एक जगह पर कुछ लाेग खड़े दिखाई देते हैं, जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब सभी आपस में एक-दुसरे से बात करने लगते है कि देखाें: …..

“दोनों कितने बड़े मूर्ख है साथ में गधा है फिर भी दोनों पैदल जा रहें हैं।”

प्रिय मित्रों, अब ताे आप सभी काे समझ आ ही गया हाेगा कि “क्या करना उचित हैं।” और “क्या अनुचित करना हैं।” 

सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग। 

हमेशा याद रखें ¤ आपके शरीर काे चलाने वाली आत्मा कि तीन मुख्य शक्तियां हैं, “मन, बुद्धि और संस्कार।” बुद्धि निर्णय करने का कार्य करती हैं। अर्थात – बुद्धि अपने आप में बहुत बड़ी जज हैं, “बुद्धि रूपी जज काे सदैव समय प्रमाण निर्णय करने में उपयोग करें।”

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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प्रभु ने मेरी लाज रख ली।

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ϒ प्रभु ने मेरी लाज रख ली। ϒ

‘संत कंवर राम’ की प्रभु भक्ति….. सिंध प्रांत में ‘कंवर राम’ नामक एक प्रसिद्ध संत हो गए हैं। वे गांव-गांव जाकर भगवद्भजन के माध्यम से भक्ति का प्रचार करते और लोगों को अध्यात्म, नैतिक गुणों तथा सांप्रदायिक सद्भाव की सीख देते। एक बार उनका मुकाम डहरकी नामक एक गांव में था।

एक दिन एक गरीब विधवा का एकमात्र शिशु ईश्वर को प्यारा हो गया और वह उसके वियोग में जोर-जोर से विलाप करने लगी। उसका शोक एक वृद्ध पुरुष से देखा न गया और उसने महिला से कहा : “बेटी, वृथा शोक न कर यहां संत कंवर राम नामक एक महात्मा पधारे हैं। उनका आज रात्रि में मंदिर में भजन-कीर्तन है, तू संत से उसके चिरायु होने का आशीर्वाद मांगना। उनकी कृपा से तुम्हारा शिशु जीवित हो सकता है, मगर इसके मृतक होने की बात उनसे छिपाए रखना।”

महिला ने सुना, तो उसके मन में आशा जागी और अपने मृत बालक को चादर में लपेटकर वह रात्रि को मंदिर पहुंच गई और शिशु को कंवर राम जी के चरणों पर रखकर कहा : “भगत साहिब मैं अपने इस नन्हे शिशु के चिरजीवन की कामना लिए आपके पास आई हूं। कृपया इसे भागवत्राम का मंत्र देकर मुझ अबला को कृतार्थ करें।”

महिला की बातों पर विश्वास करके संत जी ने शिशु को भागवत्राम का श्रवण कराया। मंत्र के समाप्त होने की देर थी कि बेजान शिशु के शरीर में जान आ गई और वह हाथ-पैर हिलाने लगा। यह चमत्कार देखते ही महिला संत जी के चरणों पर गिर पड़ी और उसने सारी बात बताकर असत्य बोलने के लिए क्षमा मांगी।

किंतु कंवर रामजी को बड़ा दुख हुआ उन्होंने महिला से कहा : “आपको ऐसा नहीं करना था, हमें प्रभु की करनी को’ होनी मानकर स्वीकार कर लेना चाहिए, इसी में हमारी भलाई है। यह तो अच्छा ही हुआ कि प्रभु ने मेरी लाज रख ली और मुझे दुविधा से बचा लिया।”

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शिक्षा का निचोड़ क्या है?

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Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ शिक्षा का निचोड़ क्या है? ϒ

काशी में गंगा के तट पर एक संत का आश्रम था। एक दिन उनके एक शिष्य ने पूछा “गुरुवर, शिक्षा का निचोड़ क्या है?”

संत ने मुस्करा कर कहा….. “एक दिन तुम खुद-ब-खुद जान जाओगे।” बात आई गई हो गई।

कुछ समय बाद एक रात संत ने उस शिष्य से कहा….. “वत्स, इस पुस्तक को मेरे कमरे में तख्त पर रख दो।” शिष्य पुस्तक लेकर कमरे में गया लेकिन तत्काल लौट आया। वह डर से कांप रहा था।

संत ने पूछा….. क्या हुआ? इतना डरे हुए क्यों हो?

शिष्य ने कहा… “गुरुवर, कमरे में सांप है।”

संत ने कहा….. “यह तुम्हारा भ्रम होगा। कमरे में सांप कहां से आएगा। तुम फिर जाओ और किसी मंत्र का जाप करना। सांप होगा तो भाग जाएगा।”

शिष्य दोबारा कमरे में गया। उसने मंत्र का जाप भी किया लेकिन सांप उसी स्थान पर था। वह डर कर फिर बाहर आ गया और संत से बोला… “सांप वहां से जा नहीं रहा है।”

संत ने कहा….. “इस बार दीपक लेकर जाओ। सांप होगा तो दीपक के प्रकाश से भाग जाएगा।”

शिष्य इस बार दीपक लेकर गया तो देखा कि वहां सांप नहीं है। सांप की जगह एक रस्सी लटकी हुई थी। अंधकार के कारण उसे रस्सी का वह टुकड़ा सांप नजर आ रहा था।

बाहर आकर शिष्य ने कहा “गुरुवर, वहां सांप नहीं रस्सी का टुकड़ा है। अंधेरे में मैंने उसे सांप समझ लिया था।”

संत ने कहा….. “वत्स, इसी को भ्रम कहते हैं। यह संसार गहन भ्रम जाल में जकड़ा हुआ है। ज्ञान के प्रकाश से ही इस भ्रम जाल को मिटाया जा सकता है। यही शिक्षा का निचोड है।”

दोस्तों, वास्तव में अज्ञानता के कारण हम बहुत सारे भ्रमजाल पाल लेते हैं और आंतरिक दीपक के अभाव में उसे दूर नहीं कर पाते। यह आंतरिक दीपक का प्रकाश निरंतर स्वाध्याय और ज्ञानार्जन से मिलता है। जब तक आंतरिक दीपक का प्रकाश प्रज्वलित नहीं होगा, लोग भ्रमजाल से मुक्ति नहीं पा सकते।

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