सच्ची मानवता – संवेदनशीलता।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ सच्ची मानवता – संवेदनशीलता ϒ

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प्यारे दोस्तों – एक Postman ने घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा, “चिट्ठी ले लिजिये”। अंदर से एक बालिका की आवाज़ आई, “आ रही हूँ”। लेकिन तीन से चार मिनट तक काेई न आया ताे Postman ने फिर कहा, “अरे भाई! घर में काेई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लाे”। लड़की की फिर आवाज़ आई, “Postman साहब, दरवाजे के नीचे से चिट्ठी अंदर डाल दीजिए, मैं आ रही हूँ”। “नहीं, मैं खड़ा हूँ, रजिस्टर्ड पत्र है, पावती पर तुम्हारे signature चाहिए”।

करीबन छह से सात मिनट के बाद दरवाज़ा खुला। Postman इस देरी के लिए झल्लाया हुआ ताे था ही और उस पर चिल्लाने वाला था लेकिन, दरवाज़ा खुलते ही वह चाैंक गया। एक अपाहिज कन्या जिसके पांव नहीं थे, सामने खड़ी थी

Postman चुपचाप पत्र देकर और उसके signature लेकर चला गया। सप्ताह – दो सप्ताह में जब कभी उस लड़की के लिए डाक आती, Postman एक आवाज़ देता और जब तक वह कन्या न आती तब तक खड़ा रहता। एक दिन लड़की ने Postman काे नंगे पांव देखा।
दिपावली नज़दीक आ रही थी। उसने सोचा Postman काे क्या उपहार दूँ।

एक दिन जब Postman डाक देकर चला गया, तब उस लड़की ने जहाँ मिट्टी में Postman के पांव के निशान बने थे, उस पर काग़ज रखकर उन पांवाे का चित्र उतार लिया। अगले दिन उसने अपने यहाँ काम करने वाली बाईं से उस नाप के जूते मंगवा लिये।

दिपावली आई और उसके अगले दिन Postman ने गली के सब लाेगाें से ताे उपहार माँगा और साेचा कि अब इस बिटिया से क्या उपहार लेना? पर गली में आया हूँ ताे उससे मिल ही लूँ। उसने दरवाज़ा खटखटाया। अंदर से आवाज़ आई, “काैन ?” Postman उत्तर मिला। कन्या हाथ में एक Gift पैक लेकर आई और कहा, “अंकल, मेरी तरफ से दिपावली पर आपकाे भेंट है। “Postman ने कहा” तुम मेरे लिए बेटी के समान हाे, तुमसे मैं उपहार कैसे लूँ?” कन्या ने आग्रह किया कि मेरी इस उपहार के लिए मना न करें।

ठिक है कहते हुए Postman ने पैकेट ले लिया। कन्या न कहा, “अंकल इस पैकेट काे घर ले जाकर खाेलना। घर जाकर जब उसने पैकेट खाेला ताे विस्मित रह गया, क्योंकि उसमें एक जाेड़ी जूते थे। उसकी आँखे भर आई। अगले दिन वह Office पहुंचा और Postmaster से फरियाद की कि उसका तबादला फाैरन कर दिया जाए। Postmaster ने कारण पूछा, ताे Postman ने वे जूते टेबल पर रखते हुए सारी कहानी सुनाई और भीगी आँखाें और रूंधे कंठ से कहा, “आज के बाद मैं उस गली में नहीं जा सकूंगा। उस अपाहिज बच्ची ने मेरे नंगे पाँवाें काे ताे जूते दे दिये पर मैं उसे पाँव कैसे दे पाऊंगा ?”

सीख : संवेदनशीलता का यह श्रेष्ठ दृष्टांत है। संवेदनशीलता यानि, दूसराें के दुःख दर्द काे समझना, अनुभव करना और उसके दुःख-दर्द में भागीदारी करना, उसमें शरीक हाेना। एक ऐसा मानवीय गुण है जिसके बिना इंसान अधूरा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

दयालु लकड़हारा।

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ϒ दयालु लकड़हारा। ϒ

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प्यारे दोस्तो – बहुत समय पहले किशनपुर गाँव में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह दूसराे की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता। जीवाें के प्रति उसके मन में बहुत दया थी। एक दिन वह जंगल से लकड़ी इकट्ठी करने के बाद थक गया ताे थाेड़ी देर सुस्ताने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गया। तभी उसे सामने के पेड़ से पक्षियों के बच्चाें के ज़ाेर-ज़ाेर से चीं-चीं करने की आवाज़ सुनाई दी।

उसने सामने देखा ताे डर गया। एक सांप घाेसले में बैठे चिड़िया के बच्चाें की तरफ बढ़ रहा था। बच्चे उसी के डर से चिल्ला रहे थे। रामू उन्हें बचाने के लिए पेड़ पर चढ़ने लगा। सांप लकड़हारे के डर से नीचे उतरने लगा। उसी दाैरान चिड़िया भी लाैट आई। उसने जब रामू काे पेड़ पर देखा ताे समझा कि उसने बच्चाें काे मार दिया।

वह रामू काे चाेच मार-मारकर चिल्लाने लगी। उसकी आवाज़ से और चिड़िया भी आ गईं। सभी ने रामू पर हमला कर दिया। बेचारा रामू किसी तरह पेड़ से नीचे उतरा। चिड़िया जब घाेसले में गई ताे उसके बच्चे सुरक्षित बैठे थे। बच्चाें ने चिड़िया काे सारी बात बताई ताे उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।

वह रामू से माफी मांगना चाहती थी और उसका शुक्रिया अदा करना चाहती थी। उसे कुछ दिन पहले दाना ढूंढ़ते हुए एक कीमती हीरा मिला था। उसने हीरे काे अपने घाेसले में लाकर रख लिया था। चिड़िया ने वह हीरा रामू के आगे डाल दिया और एक डाली पर बैठकर अपनी भाषा में धन्यवाद करने लगी। रामू ने हीरा उठा लिया और चिड़िया की तरफ हाथ उठाकर उसका धन्यवाद किया और वहां से चल दिया। तभी कई चिड़िया आईं और उसके ऊपर उड़कर साथ चलने लगीं मानाे वे उसका आभार करते हुए विदा करने आई हाें।

सीख – किसी भी जीव पर किये गये उपकार का फल सदैव ही सकारात्मक नतीजे के रूप में return मिलता हैं।

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

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* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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सच्ची गुरु दक्षिणा।

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ϒ सच्ची गुरु दक्षिणा। ϒ

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प्यारे दोस्तों – एक ऋषि के पास एक युवक ज्ञान प्राप्ती के लिए गया। ज्ञान प्राप्ती के बाद शिष्य ने गुरु दक्षिणा देने का आग्रह किया। इस पर गुरु जी ने युवक से कहा कि वह दक्षिणा में उन्हें वह चीज़ दे जाे बिल्कुल व्यर्थ है। शिष्य आज्ञा लेकर व्यर्थ चीज की खाेज में निकल पड़ा। रास्ते में उसे मिट्टी दिखी ताे उसे उससे ज्यादा व्यर्थ कुछ नहीं लगा। उसने मिट्टी की ओर हाथ बढ़ाया ताे मिट्टी बाेल पड़ी; “तुम मुझे व्यर्थ समझ रहे हाे! तुम्हें पता नहीं है कि इस दुनिया का सारा वैभव मेरे ही गर्भ से प्रकट हाेता है। ये विविध वनस्पतियाँ, ये रूप, रस और गंध कहाँ से आते हैं?”

शिष्य आगे बढ़ गया, थाेड़ी दूर पर उसे एक पत्थर मिला। शिष्य ने साेचा, इसे ही ले चलूँ। जैसे ही उसने उसे उठाने के लिए हाथ बढ़ाया, ताे पत्थर बाेला, तुम इतने ज्ञानी हाेकर भी मुझे बेकार मान रहे हाे! तुम अपने भवन और अट्टालिकाएं किससे बनाते हाे? तुम्हारे मंदिराें में किसे गढ़कर देव प्रतिमाएँ स्थापित की जाती हैं? मेरे इतने उपयाेग के बाद भी तुम मुझे व्यर्थ मान रहे हाे। यह सुनकर शिष्य निरूत्तर हाे गया और वहाँ से भी चल दिया। इसके बाद कई और ऐसी चीज़ें उसने गुरु जी के लिए लेनी चाही लेकिन उसे हर जगह काम की चीज़ें ही नज़र आई। उसने साेचा कि जब मिट्टी और पत्थर इतने उपयागी हैं ताे आखिर व्यर्थ क्या हाे सकता है? उसके मन से आवाज़ आई कि सृष्टि का हर पदार्थ अपने आप में उपयाेगी है।

वस्तुतः “व्यर्थ व तुच्छ वह है, जाे दूसराें काे व्यर्थ और तुच्छ समझता है। व्यक्ति के भीतर का अहंकार ही एक ऐसा तत्त्व है, जिसका कहीं काेई उपयाेग नहीं।”

वह गुरु के पास वापस लाैट आया और उनके पैराें में गिर पड़ा। वह गुरु दक्षिणा में अपना अहंकार देने आया था। गुरु जी प्रसन्न हुये कि – आज से तुम ज्ञान में संपूर्ण हुए, अब तुम लाेगाें काे ज्ञान-ध्यान व दिक्षा देने के योग्य हाे गये हाे।

याद रखें – अहंकार से ज्यादा बेकार और कुछ नहीं है, इस संसार में। अगर कुछ त्यागना ही है तो अहंकार का त्याग करें। आप कितने ही बड़े ज्ञानी क्यों न हाे, अगर अहंकार का त्याग नहीं किया ताे आपकी गिनती बुद्धिहीनाें मेें हाेगी। अहंकार काे त्याग कर ही आप सर्वश्रेष्ठ आसन पर आसिन हाे सकते है, अहंकार काे त्याग कर ही आप सभी के दिलाें काे जीत सकते हैं।

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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मिलियन डॉलर की पेंटिंग।

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ϒ मिलियन डॉलर की पेंटिंग। ϒ

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प्यारे दोस्तों – पिकासो स्पेन में जन्में एक बहुत मशहूर चित्रकार थे। उनकी पेंटिंग दुनिया भर में कराेड़ाें- अरबाें रुपये में बिका करती थी। एक दिन रास्ते से गुज़रते समय एक महिला की नज़र पिकासो पर पड़ी और संयाेग से उस महिला ने उन्हें पहचान लिया। वह दाैड़ी हुई उसके पास आयी और बाेली- सर मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूँ। आपकी पेंटिंग्स मुझे बहुत ज्यादा पसंद हैं। क्या आप मेरे लिए भी एक पेंटिंग बना देंगे।

पिकासो हँसते हुए बाेले- मैं यहाँ खाली हाथ हूँ, मेरे पास कुछ नहीं है, मैं फिर कभी आपके लिए पेंटिंग बना दूंगा। लेकिन उस महिला ने जिद पकड़ ली कि मुझे अभी एक पेंटिंग बना के दाे, बाद में पता नहीं आपसे मिल पाऊंगी या नहीं। पिकासो ने जेब से एक कागज़ निकाला और अपने पेन से उसपे कुछ बनाने लगे। करीब दस सेकंड के अंदर पिकासो ने पेंटिंग बनायी और कहा, ये मिलियन डॉलर की पेंटिंग है! उस महिला काे बड़ा अजीब लगा कि बस दस सेकंड में जल्दी से एक काम चलाऊ पेंटिंग बना दी और बाेल रहे हैं कि मिलियन डॉलर की पेंटिंग है। उस महिला ने वाे पेंटिंग ली और बिना कुछ बाेले अपने घर आ गयी। उसकाे लगा कि पिकासो उसकाे पागल बना रहें है, इसलिए वाे बाज़ार गयी और उस पेंटिंग की कीमत पता की। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि वास्तव में वाे पेंटिंग मिलियन डॉलर की थी।

Link : Picasso painting sells for a record $179 million

वाे दाैड़ी-दाैड़ी फिर एक बार पिकासो के पास गयी और बाेली- सर आपने बिल्कुल सही कहा था, ये ताे मिलियन डॉलर की ही पेंटिंग है। पिकासो ने हँसते हुए कहा कि मैंने ताे पहले ही कहा था। वाे महिला बाेली- सर आप मुझे अपनी स्टूडेंट बना लीजिये और मुझे भी पेंटिंग बनाना सीखा दीजिये। जैसे आपने दस सेकंड में मिलियन डॉलर की पेंटिंग बना दी वैसे मैं भी दस सेकंड में ना सही दस मिनट में ही अच्छी पेंटिंग बना सकूँ मुझे ऐसा बना दीजिये। पिकासो ने हँसते हुए कहा- ये जाे मैंने दस सेकंड में यह पेंटिंग बनायी है, इसे सीखने में मुझे करीब तीस साल का समय लगा। मैंने अपने जीवन के तीस साल सीखने में दिए। तुम भी दाे ताे ज़रूर सीख जाओगी। वाे महिला अवाक निःशब्द पिकासो काे देखती रह गयी।

याद रखें- दोस्तों, जब हम दूसराें काे सफल हाेता देखते हैं ताे हमें ये सब बड़ा आसान लगता है। हमें लगता है कि ये इंसान ताे बड़ी आसानी से सफल हाे गया। लेकिन मेरे दोस्तों, उस एक सफलता के पीछे ना जाने कितने सालाें की मेहनत छिपी हुई हाेती है, ये काेई नहीं देख पाता। सफलता ताे बड़ी आसानी से मिल जाती है, लेकिन सफलता की तैयारी में अपना जीवन कुर्बान करना हाेता है। जाे लाेग खुद काे तपाकर, संघर्ष करके अनुभव हासिल करते हैं वाे कामयाब ज़रूर हाेते हैं, लेकिन दूसराें काे देखने में लगता है कि ये कितनी आसानी से सफल हाे गया। मेरे दोस्तों, परीक्षा ताे केवल तीन घंटे की हाेती है, लेकिन उस तीन घंटे के लिए पूरे साल तैयारी करनी पड़ती है। ताे फिर आप राताें-रात सफल हाेने का सपना कैसे देख सखते हाे? सफल अनुभव और संघर्ष मांगती है और अगर आप देने काे तैयार हैं ताे आपकाे आगे जाने अर्थात सफल हाेने से काेई नहीं राेक सकता।

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समय और धैर्य।

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ϒ समय और धैर्य। ϒ

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प्यारे दोस्तों – एक साधु था, वह राेज़ घाट के किनारे बैठकर चिल्लाया करता था, जाे “चाहाेगे साे पाओगे”, “चाहाेगे साे पाओगे”। बहुत से लाेग वहाँ से गुज़रते थे पर काेई भी उसकी बात पर ध्यान नहीं देता था, और सब उसे एक पागल आदमी समझते थे। एक दिन एक युवक वहाँ से गुज़रा और उसने साधु की आवाज़ सुनी, “चाहाेगे साे पाओगे”, “चाहाेगे साे पाओगे”। ये आवाज़ सुनते ही वह युवक उनके पास चला गया। उसने साधु से पूछा- “महाराज! आप बाेल रहे थे कि “चाहाेगे साे पाओगे”, ताे क्या आप मुझकाे वाे दे सकते हाे जाे मैं चाहता हूँ?

साधु उसकी बात काे सुनकर बाेले- “हा बेटा! तुम जाे कुछ भी चाहते हाे मैं उसे ज़रूर दूँगा, बस तुम्हें मेरी बात माननी हाेगी। लेकिन पहले ये ताे बताओ कि तुम्हें आखिर चाहिए क्या”? युवक बाेला – “मेरी एक ही ख्वाहिश है कि मैं हीराें का बहुत बड़ा व्यापारी बनना चाहता हूँ”। साधु बाेले – “काेई बात नहीं”, मैं तुम्हें एक हीरा और एक माेती दे देता हूँ, उससे तुम जितने भी हीरे-माेती बनाना चाहाेगे बना पाओगे! ऐसा कहते हुए साधु ने अपना हाथ उस युवक की हथेली पर रखते हुए कहा- `पुत्र! मैं तुम्हें दुनिया का सबसे अनमाेल हीरा दे रहा हूँ, लाेग इसे समय कहते हैं, इसे तेज़ी से अपनी मुट्ठी में पकड़ लाे और इसे कभी मत गंवाना, तुम इससे जितने चाहाे हीरे बना सकते हाे।

युवक अभी कुछ साेच ही रहा था कि साधु उसकी दूसरी हथेली पकड़ते हुए बाेले- “पुत्र, इसे पकड़ाे, यह दुनिया का सबसे कीमती मोती है, लाेग इसे धैर्य` कहते हैं, जब कभी समय देने के बावजूद परिणाम अच्छा न मिले ताे इस कीमती मोती काे धारण कर लेना, याद रखना जिसके पास यह मोती है वह दुनिया में कुछ भी प्राप्त कर सकता है।

युवक गहराई से साधु की बाताें पर विचार करता है और निश्चय करता है कि आज से मैं कभी भी अपना समय बर्बाद नहीं करूंगा व सदैव धैर्य से काम करूंगा। ऐसा सोचकर वह हीराें के एक बहुत बड़े व्यापारी के यहाँ काम शुरु करता है और अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल एक दिन खुद भी हीराें का बहुत बड़ा व्यापारी बनता है।

याद रखें- `समय और धैर्य` वह दाे हीरे-माेती हैं जिनके बल पर हम बड़े-से-बड़ा लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। अतः ज़रूरी है कि हम अपने कीमती समय काे बर्बाद न करें और अपनी मंज़िल तक पहुँचने के लिए धैर्य से काम लें।

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 ~Kmsraj51

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क्या करें – क्या ना करें।

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समोसे की दुकान।

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ϒ समोसे की दुकान। ϒ

दोस्तों – सदैव ही अपने आत्मा की आवाज काे सुने। जाे कर्म करने से आपकाे अंदर से ख़ुशी(आनंद) महसूस हाे वही कर्म आपके लिए Perfect हैं।

अर्थात – यदि आपकाे आर्ट करना अच्छा लगता है, ताे इसे ही अपना Career बना लें। वह काेई भी कार्य हाे सकता है – जैसे तैराकी, कढ़ाई, बुनाई, सिलाई, व्यवसायी, खाना बनाना, प्रेरक वक्ता बनना, अध्यापक, अभिनेता, किसी भी प्रकार के खेल कूद, नृत्य इत्यादि।

Samosa shop-KMSRAJ51

एक बडी कंपनी के गेट के सामने एक प्रसिद्ध समोसे की दुकान थी। लंच टाइम मे अक्सर कंपनी के कर्मचारी वहा आकर समोसे खाया करते थे। एक दिन कंपनी के एक मैनेजर समोसे खाते-खाते समोसे वाले से मजाक के मूड मे आ गये।

मैनेजर साहब ने समोसे वाले से कहा, “यार गोपाल, तुम्हारी दुकान तुमने बहुत अच्छे से मेंटेन की है। लेकीन क्या तुम्हे नही लगता की तुम अपना समय और टॅलेंट समोसे बेचकर बर्बाद कर रहे हो ? सोचो अगर तुम मेरी तरह इस कंपनी मे काम कर रहे होते तो आज कहा होते ~ हो सकता है शायद तुम भी आज मैनेजर होते मेरी तरह।”

इस बात पर समोसे वाले गोपाल ने बडा सोचा, और बोला – ” सर ये मेरा काम अापके काम से कही बेहतर है। 10 साल(10 Year) पहले जब मै टोकरी मे समोसे बेचता था तभी आपकी जाॅब लगी थी। तब मै महीना हजार रुपये कमाता था और आपकी पगार थी 10 हजार।

इन 10 सालो मे हम दोनो ने खूब मेहनत की – आप सुपरवाइजर से मैनेजर बन गये, और मै टोकरी से इस प्रसिद्ध दुकान तक पहुच गया। आज आप महीना 40,000 रुपये कमाते है, और मै महीना 2,00,000 रुपये।

लेकीन इस बात के लिए मै मेरे काम को आपके काम से बेहतर नही कह रहा हूँ। ये तो मै बच्चो के कारण कह रहा हूँ।

जरा सोचिए सर मैने तो बहुत कम कमाइ पर धंधा शुरू किया था, मगर मेरे बेटे को यह सब नही झेलना पडेगा। मेरी दुकान मेरे बेटे को मिलेगी। मैने जिंदगी मे जो मेहनत की है, वो उसका लाभ मेरे बच्चे उठाएंगे।

जबकी आपकी जिंदगी भर की मेहनत का लाभ आपके मालिक के बच्चे उठाएंगे ….. अब आपके बेटे को आप Direct अपनी पोस्ट पर तो नही बिठा सकते ना। उसे भी आपकी ही तरह जीरो से शुरूआत करनी पडेगी, और अपने कार्यकाल के अंत मे वही पहुच जाएगा जहा अभी आप हो।

जबकी मेरा बेटा बिजनेस को यहा से और आगे ले जाएगा, और अपने कार्यकाल मे हम सबसे बहुत आगे निकल जाएगा। अब आप ही बताइये की किसका समय और टॅलेंट बर्बाद हो रहा है ?” मैनेजर साहब ने समोसेवाले को 2 समोसे के 20 रुपये दिये और बिना कुछ बोले वहा से खिसक लिये।

सीख – सदैव याद रखें – जाे कर्म करने से आपकाे अंदर से ख़ुशी(आनंद) महसूस हाे वही कर्म आपके लिए Perfect हैं।

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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Note::-

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

प्यार ही सर्वोपरि है।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ प्यार ही सर्वोपरि है। ϒ

Love is paramount-kmsraj51

 

प्यार ही सर्वोपरि है – एक बार गोपाल बहुत परेशान था। उसके घर में शांति नहीं थी। सभी एक दूसरे से लड़ते झगड़ते रहते थे। एक दूसरे को  दोषी ठहराते थे और अंत में भगवान् पर भी दोषारोपण करते -“कि भगवान् तूने हमे क्यों जन्म दिया ? या फिर तुम सबकुछ देखते रहते हो और आनंद उठाते हो।”

एक दिन गोपाल ने कहा – “आज शाम को छः  बजे  सभी घर के आँगन में जमा होंगे, लड़ाई झगड़ा करते हुए तो हमने काफी समय बिताया है पर आज हम कहीं घूमने जाएंगे।”

घूमने की बात सुनकर सभी राजी हो गए। शाम के छः बजे तो सभी आँगन में इकट्ठे हो गए। सभी जानने के लिए उत्सुक थे कि आखिर घूमने कहाँ चलेंगे?

गोपाल ने कहा – “मैंने गाडी बुलाई है, उसी में बैठ कर चलेंगे।” तभी दो तीन रिक्शा आ गयी। फिर से झगड़ा शुरू हो गया। खैर समझाने पर वो सब रिक्शा में बैठ गए। लेकिन रिक्शा में बैठते ही मुंह सुकोड़ने लगे और भगवान् को ताने देना शुरू -“हे भगवान् ! कहाँ फंसा दिया? कहाँ घूमने जाएंगे ? “मंदिर घूमने आये हैं क्या हम ?

“हाँ क्यों नहीं ? अभी सभी तो भगवान् को याद  कर रहे थे। चलो इन्ही से पूछ लेते हैं—- ” – गोपाल ने कहा।

मुंह बनाकर सभी मंदिर में गए – गोपाल ने कहा “देखो – हम सब भगवान् से बहुत कुछ मांगते हैं, अपना दुःख दर्द इन्हें बताते हैं। कभी कभी गुस्से में इन्हें बहुत कुछ कह भी देते हैं पर कभी सोचा है कि ये तो भगवान् हैं परंतु वो जीव भी जो इनके संपर्क में है कितनी सादगी, प्रेम, सहनशीलता और शान्ति के साथ रहते हैं जो आवश्यक रूप से एक दूसरे के शत्रु होते हैं, यहाँ उनमें भी मित्रता है फिर तुम लोग तो भाई बहिन हो।”

बच्चों  की समझ में कुछ न आया तब गोपाल ने कहा -“शिवजी का वाहन – नंदी बैल, माता जी का वाहन – शेर, अर्थात – शेर बैल का शत्रु  होता है। शिवजी के गले का अलंकार / गहना -सांप, कार्तिकेय का वाहन – मोर, अर्थात मोर सांप का शत्रु होता है लेकिन कभी सुना है इन्हें आपस में झगड़ते हुए ?”

बच्चों ने कहा – “नहीं ये सब एक दूसरे के शत्रु नहीं बल्कि ये तो भगवान् का परिवार है।”

सीख:- गोपाल ने कहा – “ठीक कहा तुमने कि ये भगवान् का परिवार है पर हम भी तो उन्ही की संतान हैं और फिर तुम सब भी तो भाई बहन हो शत्रु नहीं। जब प्रकृति अनुरूप शत्रुता होने के बाद भी कुछ प्राणी प्रेम करना नहीं भूलते तो फिर मित्रता भाव प्रकृति होने पर हम एक दूसरे के शत्रु क्यों बन जाते हैं?”

सभी को गोपाल की बात अच्छी लगी, सभी ने मिलकर कहा – “प्यार ही सर्वोपरि है।” तभी से वो सभी लोग घर में शांतिपूर्वक और प्रेम से रहने लगे।

©- नंदिता शर्मा जी। (नोएडा, उत्तर प्रदेश)®

Nandita-Kmsraj51

नंदिता शर्मा जी।

हम दिल से आभारी हैं नंदिता शर्मा जी के “प्रेरणादायक कहानी – प्यार ही सर्वोपरि है।” हिन्दी में साझा करने के लिए।

नंदिता शर्मा जी के लिए मेरे विचार: 

“नंदिता शर्मा जी” ने Love is paramount (“ प्यार ही सर्वोपरि है। “) का कितना सुंदर-रमणीय वर्णन कहानी के माध्यम से किया हैं। जिसके हर एक शब्दों में सकारात्मक ऊर्जा रूपी अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कहानियों काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

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KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

सही उपयोग।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ सही उपयोग। ϒ

Correct Usage-Kmsraj51

बहुत समय पहले की बात हैं – एक गरीब वृद्ध पिता के पास अपने अंतिम समय में दो बेटों को देने के लिए मात्र एक आम था। पिताजी आशीर्वादस्वरूप दोनों को वही देना चाहते थे। किंतु बड़े भाई ने आम हठपूर्वक ले लिया। रस चूस लिया छिल्का अपनी गाय को खिला दिया। गुठली छोटे भाई के आँगन में फेंकते हुए कहा – “लो, ये पिताजी का तुम्हारे लिए आशीर्वाद है।”

छोटे भाई ने ब़ड़ी श्रद्धापूर्वक गुठली को अपनी आँखों व सिर से लगाकर गमले में गाढ़ दिया। छोटी बहू पूजा के बाद बचा हुआ जल गमले में डालने लगी। कुछ समय बाद आम का पौधा उग आया, जो देखते ही देखते बढ़ने लगा।

छोटे भाई ने उसे गमले से निकालकर अपने आँगन में लगा दिया। कुछ वर्षों बाद उसने वृक्ष का रूप ले लिया। वृक्ष के कारण घर की धूप से रक्षा होने लगी, साथ ही प्राणवायु भी मिलने लगी। बसंत में कोयल की मधुर कूक की आवाज सुनाई देने लगी। बच्चे पेड़ की छाँव में किलकारियाँ भरकर खेलने लगे।

पेड़ की शाख से झूला बाँधकर झूलने लगे। पेड़ की छोटी – छोटी लक़िड़याँ हवन करने एवं बड़ी लकड़ियाँ घर के दरवाजे-खिड़कियों में भी काम आने लगीं। आम के पत्ते त्योहारों पर तोरण बाँधने के काम में आने लगे।

धीरे-धीरे वृक्ष में कैरियाँ लग गईं। कैरियों से अचार व मुरब्बा डाल दिया गया। आम के रस से घर-परिवार के सदस्य रस-विभोर हो गए तो बाजार में आम के अच्छे दाम मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई।

रस से पाप़ड़ भी बनाए गए, जो पूरे साल मेहमानों व घर वालों को आम रस की याद दिलाते रहते।

ब़ड़े बेटे को आम फल का सुख क्षणिक ही मिला तो छोटे बेटे को पिता का “आशीर्वाद’ दीर्घकालिक व सुख- समृद्धिदायक मिला।”

सीख – दोस्तों, आज के सभी मनुष्यों का यही हाल है। परमात्मा हमे सब कुछ देता है, सही उपयोग हम करते नही हैं और सदैव ही दोष परमात्मा और किस्मत को देते रहते हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

इंसान स्वयं ही भस्मासुर।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ इंसान स्वयं ही भस्मासुर। ϒ

प्रिय दोस्ताें, 

आज का इंसान खुद ही भस्मासुर बन गया हैं। अाज का इंसान स्वयं ही अपने आप काे यू ही नष्ट कर रहा हैं। इस बात पर मुझे हाल ही में हुए एक Research  की याद आती है। ताे दोस्ताें Research कुछ इस तरह से हैं:-

अमेरिका में जब एक कैदी काे फाँसी की सजा सुनाई गई ताे वहां के कुछ वैज्ञानिकाें ने साेचा कि क्याें न इस कैदी पर कुछ प्रयाेग किया जाये! तब कैदी काे बताया गया कि हम तुम्हें फाँसी देकर नहीं, परन्तु ज़हरीला काेबरा साँप डसाकर मारेंगे।

उसके सामने बड़ा सा ज़हरीला काेबरा साँप ले आने के बाद कैदी की आंखें बंद करके कुर्सी से बांधा गया और उसकाे साँप नहीं बल्कि दाे सेफ्टी पिन चुभाई गई! और क्या हुआ कि कैदी की कुछ सेकंड में ही माैत हाे गई। पोस्टमार्टम के बाद पाया गया कि कैदी के शरीर में साँप के ज़हर के समान ही ज़हर है। अब साेचने वाली बात यह है कि ये ज़हर कहां से आया जिसने उस कैदी की जान ले ली….. वाे ज़हर उसके खुद के शरीर ने ही सदमे में उत्पन्न किया था।

हमारे हर संकल्प से Positive एवंम Negative Energy उत्पन्न हाेती है, और आे हमारे शरीर में उसी अनुसार हार्मोन्स उत्पन्न करती है। 75% to 83% बीमारियाें का मूल कारण नकारात्मक सोच(Negative thinkingसे उत्पन्न Energy ही हैं। आज का इंसान ही अपनी गलत साेच के कारण भस्मासुर बन खुद का विनाश कर रहा है।

अपनी साेच काे सदैव सकारात्मक (Positive) रखें और खुश रहें। 

२५ साल की उम्र तक हमें परवाह नहीं हाेती कि “लोग क्या सोचेंगे!”

५० साल की उम्र तक इसी डर में जीते है कि “लोग क्या सोचेंगे!!”

५० साल के बाद पता चलता है कि “हमारे बारे में काेई सोच ही नहीं रहा था!!!”

प्रिय दोस्ताें, एक बात सदैव याद रखें, जिस कार्य काे करने से आपकाे कभी भी बाेरीयत नहीं लगती, उसी कार्य काे अपने आजीविका का साधन बना लें। क्योंकी जिस कार्य काे करने से आप बाेर नहीं हाेते! उसी कार्य काे ही आप लंबे समय तक आंनद पूर्वक कर सकते हैं। हमेशा सकारात्मक ही साेचे, सकारात्मक ही पढ़ें, सकारात्मक ही देखें, सकारात्मक ही करें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती हैं। ϒ

एक संत अपने शिष्य के साथ किसी अजनबी नगर में पहुंचे। रात हो चुकी थी और वे दोनों सिर छुपाने के लिए किसी आसरे की तलाश में थे।

उन्होंने एक घर का दरवाजा खटखटाया, वह एक धनिक का घर था और अंदर से परिवार का मुखिया निकलकर आया। वह संकीर्ण वृत्ति का था, उसने कहा – “मैं आपको अपने घर के अंदर तो नहीं ठहरा सकता लेकिन तलघर में हमारा स्टोर बना है। आप चाहें तो वहां रात को रुक सकते हैं, लेकिन सुबह होते ही आपको जाना होगा।”

वह संत अपने शिष्य के साथ तलघर में ठहर गए। वहां के कठोर फर्श पर वे सोने की तैयारी कर रहे थे कि तभी संत को दीवार में एक दरार नजर आई। संत उस दरार के पास पहुंचे और कुछ सोचकर उसे भरने में जुट गए।

शिष्य के कारण पूछने पर संत ने कहा-“चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती हैं।” अगली रात वे दोनों एक गरीब किसान के घर आसरा मांगने पहुंचे।

किसान और उसकी पत्नी ने प्रेमपूर्वक उनका स्वागत किया। उनके पास जो कुछ रूखा-सूखा था, वह उन्होंने उन दोनों के साथ बांटकर खाया और फिर उन्हें सोने के लिए अपना बिस्तर दे दिया। किसान और उसकी पत्नी नीचे फर्श पर सो गए।

सवेरा होने पर संत व उनके शिष्य ने देखा कि किसान और उसकी पत्नी रो रहे थे क्योंकि उनका बैल खेत में मरा पड़ा था।

यह देखकर शिष्य ने संत से कहा- ‘गुरुदेव, आपके पास तो कई सिद्धियां हैं, फिर आपने यह क्यों होने दिया?
उस धनिक के पास सब कुछ था, फिर भी आपने उसके तलघर की मरम्मत करके उसकी मदद की, जबकि इस गरीब ने कुछ ना होने के बाद भी हमें इतना सम्मान दिया फिर भी आपने उसके बैल को मरने दिया।”

संत फिर बोले-“चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती हैं।”

उन्होंने आगे कहा- ‘उस धनिक के तलघर में दरार से मैंने यह देखा कि उस दीवार के पीछे स्वर्ण का भंडार था। चूंकि उस घर का मालिक बेहद लोभी और कृपण था, इसलिए मैंने उस दरार को बंद कर दिया, ताकि स्वर्ण भंडार उसके हाथ ना लगे।

इस किसान के घर में हम इसके बिस्तर पर सोए थे। रात्रि में इस किसान की पत्नी की मौत लिखी थी और जब यमदूत उसके प्राण हरने आए तो मैंने रोक दिया। चूंकि वे खाली हाथ नहीं जा सकते थे, इसलिए मैंने उनसे किसान के बैल के प्राण ले जाने के लिए कहा।

अब तुम्हीं बताओ, मैंने सही किया या गलत।

यह सुनकर शिष्य संत के समक्ष नतमस्तक हो गया।

प्रिय दोस्तों,

ठीक इसी तरह “दुनिया हमें वैसी नहीं दिखती जैसी वह हैं, बल्कि वैसे दिखती हैं जैसे हम हैं।” अगर कुछ बदलना है ताे सबसे पहले अपने सोच, कर्म व अपने आप काे बदलें।

Jaya Kishori Ji-kmsraj51

जया शर्मा किशोरी जी।

Post inspired by जया शर्मा किशोरी जी। We are grateful to “Jaya Kishori Ji” for this inspirational Hindi Story for Kmsraj51.com readers.

जया शर्मा किशोरी जी। Facebook Page: Follow Now

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 पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

धर्म भ्रष्ट या अहंकार।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ धर्म भ्रष्ट या अहंकार। ϒ

एक दिन पंडित को प्यास लगी, संयोगवश घर में पानी नही था। इसलिए उनकी पत्नी पडोस से पानी ले आई। पानी पीकर पंडित ने पूछा…..

पंडित – कहाँ से लायी हो बहुत ठंडा पानी है।

पत्नी – पडोस के कुम्हार के घर से। (पंडित ने यह सुनकर लोटा फैंक दिया और उसके तेवर चढ़ गए वह जोर-जोर से चीखने लगा).

पंडित – अरी तूने तो मेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया, कुंभार (शुद्र) के घर का पानी पिला दिया। पत्नी भय से थर-थर कांपने लगी, उसने पण्डित से माफ़ी मांग ली।

पत्नी – अब ऐसी भूल नही होगी। शाम को पण्डित जब खाना खाने बैठा तो घर में खाने के लिए कुछ नहीं था।

पंडित – रोटी नहीं बनाई, भाजी नहीं बनाई।

पत्नी – बनायी तो थी लेकिन अनाज पैदा करनेवाला कुणबी(शुद्र) था, और जिस कढ़ाई में बनाया था वो लोहार (शुद्र) के घर से आई थी। सब फेक दिया।

पंडित – तू पगली है क्या कही अनाज और कढ़ाई में भी छुत होती है? यह कह कर पण्डित बोला की पानी तो ले आओ।

पत्नी – पानी तो नही है जी।

पंडित – घड़े कहाँ गए?

पत्नी – वो तो मेने फैंक दिए क्योंकि कुम्हार के हाथ से बने थे।

पंडित – बोला दूध ही ले आओ वही पीलूँगा।
पत्नी – दूध भी फैंक दिया जी क्योंकि गाय को जिस नौकर ने दुहा था वो तो नीची (शुद्र) जाति से था न।

पंडित – हद कर दी तूने तो यह भी नही जानती की दूध में छूत नही लगती है।

पत्नी – यह कैसी छूत है जी जो पानी में तो लगती है, परन्तु दूध में नही लगती। पंडित के मन में आया कि दीवार से सर फोड़ ले। गुर्रा कर बोला – तूने मुझे चौपट कर दिया है जा अब आंगन में खाट डाल दे मुझे अब नींद आ रही है।

पत्नी – खाट! उसे तो मैने तोड़ कर फैंक दिया है क्योंकि उसे शुद्र (सुतार) जात वाले ने बनाया था।

पंडित चीखा – ओ फुलो का हार लाओ भगवन को चढ़ाऊंगा ताकि तेरी अक्ल ठिकाने आये।

पत्नी – फेक दिया उसे माली (शुद्र) जाती ने बनाया था।

पंडित चीखा – सब में आग लगा दो, घर में कुछ बचा भी हैं या नहीं।

पत्नी – हाँ यह घर बचा है, इसे अभी तोडना बाकी है क्योंकि इसे भी तो पिछड़ी जाति के मजदूरों ने बनाया है। पंडित के पास कोई जबाब नही था। उसकी अक्ल तो ठिकाने आ गई। पंडित काे अपने अहंकार व अज्ञान का बाेध हाे गया था।

दोस्तों, कहने काे ताे २१ वीं सदी में इंसान ने बहुत तरक़्क़ी की है, लेकिन अभी भी छूत व अछूत के राेग में जक़ड़ा हुआँ हैं। आखिर कब तक इंसान इस छूत व अछूत के राेग से मुक्त हाे पायेगा।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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इज्ज़त, क़र्ज़ और पिता का सम्मान।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ तीन विकल्प- इज्जत, क़र्ज़ और पिता का सम्मान। ϒ

बहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में एक किसान रहता था। उस किसान की एक बहुत ही सुन्दर बेटी थी। दुर्भाग्यवश, गाँव के जमींदार से उसने बहुत सारा धन उधार लिया हुआ था। जमीनदार बूढा और कुरूप था। किसान की सुंदर बेटी को देखकर उसने सोचा क्यूँ न कर्जे के बदले किसान के सामने उसकी बेटी से विवाह का प्रस्ताव रखा जाये।

जमींदार किसान के पास गया और उसने कहा – तुम अपनी बेटी का विवाह मेरे साथ कर दो, बदले में मैं तुम्हारा सारा कर्ज माफ़ कर दूंगा। जमींदार की बात सुन कर किसान और किसान की बेटी के होश उड़ गए।

तब जमींदार ने कहा – चलो गाँव की पंचायत के पास चलते हैं और जो निर्णय वे लेंगे उसे हम दोनों को ही मानना होगा। वो सब मिल कर पंचायत के पास गए और उन्हें सब कह सुनाया।

उनकी बात सुन कर पंचायत ने थोडा सोच विचार किया और कहा-

ये मामला बड़ा उलझा हुआ है अतः हम इसका फैसला किस्मत पर छोड़ते हैं। जमींदार सामने पड़े सफ़ेद और काले रोड़ों के ढेर से एक काला और एक सफ़ेद रोड़ा उठाकर एक थैले में रख देगा फिर लड़की बिना देखे उस थैले से एक रोड़ा उठाएगी, और उस आधार पर उसके पास तीन विकल्प होंगे :

१. अगर वो काला रोड़ा उठाती है तो उसे जमींदार से शादी करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्ज माफ़ कर दिया जायेगा।

२. अगर वो सफ़ेद पत्थर उठती है तो उसे जमींदार से शादी नहीं करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्ज भी माफ़ कर दिया जायेगा।

३. अगर लड़की पत्थर उठाने से मना करती है तो उसके पिता को जेल भेज दिया जायेगा।

पंचायत के आदेशानुसार जमींदार झुका और उसने दो रोड़े उठा लिए। जब वो रोड़ा उठा रहा था तब तेज आँखों वाली किसान की बेटी‬ ने देखा कि उस जमींदार ने दोनों काले रोड़े ही उठाये हैं और उन्हें थैले में डाल दिया है।

लड़की इस स्थिति से घबराये बिना सोचने लगी कि वो क्या कर सकती है, उसे तीन रास्ते नज़र आये:

१. वह रोड़ा उठाने से मना कर दे और अपने पिता को जेल जाने दे।

२. सबको बता दे कि जमींदार दोनों काले पत्थर उठा कर सबको धोखा दे रहा हैं।

३. वह चुप रह कर काला पत्थर उठा ले और अपने पिता को कर्ज से बचाने के लिए जमींदार से शादी करके अपना जीवन बलिदान कर दे।

उसे लगा कि दूसरा तरीका सही है, पर तभी उसे एक और भी अच्छा उपाय सूझा, उसने थैले में अपना हाथ डाला और एक रोड़ा अपने हाथ में ले लिया। और बिना रोड़े की तरफ देखे उसके हाथ से फिसलने का नाटक किया, उसका रोड़ा अब हज़ारों रोड़ों के ढेर में गिर चुका था और उनमे ही कहीं खो चुका था।

लड़की ने कहा – हे भगवान! मैं कितनी फूहड़ हूँ। लेकिन कोई बात नहीं। आप लोग थैले के अन्दर देख लीजिये कि कौन से रंग का रोड़ा बचा है, तब आपको पता चल जायेगा कि मैंने कौन सा उठाया था जो मेरे हाथ से गिर गया।

थैले में बचा हुआ रोड़ा काला था, सब लोगों ने मान लिया कि लड़की ने सफ़ेद पत्थर ही उठाया था। जमींदार के अन्दर इतना साहस नहीं था कि वो अपनी चोरी मान ले। लड़की ने अपनी सोच से असम्भव को संभव कर दिया।

प्यारे दोस्तों,

हमारे जीवन‬ में भी कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जहाँ सबकुछ धुंधला दिखता है, हर रास्ता नाकामयाबी की तरफ जाता महसूस होता है पर ऐसे समय में यदि हम परंपरा से हटकर सोचने का प्रयास करें तो उस लड़की की तरह अपनी मुश्किलें दूर कर सकते हैं।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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निश्चय ही आप विजयी होंगे, यदि आप अपनी दुर्बलता (Weakness) को अपनी ताकत में तब्दील करना सीख लें।