भटकता इंसान।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ भटकता इंसान। ϒ

Wandering-humen-kmsraj51

भटकता इंसान।

एक किसान के घर एक दिन उसका कोई परिचित मिलने आया। उस समय वह घर पर नहीं था। उसकी पत्नी ने कहा-‘वह खेत पर गए हैं। मैं बच्चे को बुलाने के लिए भेजती हूं। तब तक आप इंतजार करें।’ कुछ ही देर में किसान खेत से अपने घर आ पहुंचा। उसके साथ-साथ उसका पालतू कुत्ता भी आया। कुत्ता जोरों से हांफ रहा था। उसकी यह हालत देख, मिलने आए व्यक्ति ने किसान से पूछा-‘क्या तुम्हारा खेत बहुत दूर है?’ किसान ने कहा-‘नहीं, पास ही है। लेकिन आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं?’ उस व्यक्ति ने कहा-‘मुझे यह देखकर आश्चर्य हो रहा है कि तुम और तुम्हारा कुत्ता दोनों साथ-साथ आए, लेकिन तुम्हारे चेहरे पर रंच मात्र थकान नहीं जबकि कुत्ता बुरी तरह से हांफ रहा है।’ किसान ने कहा-‘मैं और कुत्ता एक ही रास्ते से घर आए हैं। मेरा खेत भी कोई खास दूर नहीं है। मैं थका नहीं हूं। मेरा कुत्ता थक गया है। इसका कारण यह है कि मैं सीधे रास्ते से चलकर घर आया हूं, मगर कुत्ता अपनी आदत से मजबूर है। वह आसपास दूसरे कुत्ते देखकर उनको भगाने के लिए उसके पीछे दौड़ता था और भौंकता हुआ वापस मेरे पास आ जाता था।

फिर जैसे ही उसे और कोई कुत्ता नजर आता, वह उसके पीछे दौड़ने लगता। अपनी आदत के अनुसार उसका यह क्रम रास्ते भर जारी रहा।
इसलिए वह थक गया है।’ देखा जाए तो यही स्थिति आज के इंसान की भी है। जीवन के लक्ष्य तक पहुंचना यूं तो कठिन नहीं है, लेकिन लोभ, मोह अहंकार और ईर्ष्या जीव को उसके जीवन की सीधी और सरल राह से भटका रही है। अपनी क्षमता के अनुसार जिसके पास जितना है, उससे वह संतुष्ट नहीं। आज लखपति, कल करोड़पति, फिर अरबपति बनने की चाह में उलझकर इंसान दौड़ रहा है। अनेक लोग ऐसे हैं जिनके पास सब कुछ है।


भरा-पूरा परिवार, कोठी, बंगला, एक से एक बढ़िया कारें, क्या कुछ नहीं है। फिर भी उनमें बहुत से दुखी रहते हैं। बड़ा आदमी बनना, धनवान
बनना बुरी बात नहीं, बनना चाहिए। यह हसरत सबकी रहती है। उसके लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी तो थकान नहीं होगी। लेकिन दूसरों के सामने खुद को बड़ा दिखाने की चाह के चलते आदमी राह से भटक रहा है और यह भटकाव ही इंसान को थका रहा है।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

Please Share your comment`s.

आप सभी का प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

———– @ Best of Luck @ ———–

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

 ~KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

CYMT-KMS-KMSRAJ51

रिश्ताे में प्यार।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

रिश्ताे में प्यार। 

दोस्तों कहते हैं रिश्ताे में प्यार हाेना चाहिए। तभी रिश्ते बरकरार (बने) रहते हैं। अच्छी बाते हमे याद रखना चाहिए, और बुरे विचार मन में नहीं आने देना चाहिए। रिश्ताे में प्यार हाेना बहुत जरूरी हैं। बिना प्यार के रिश्ताे में दरार (मनमुटाव) ही आती हैं।

 रिश्ताे में कैसा हाेना चाहिए प्यार। एक छोटी कहानी के माध्यम से समझते हैं।

दो भाई समुद्र के किनारे टहल रहे थे,
दोनों के
बीच किसी बात को लेकर बहस
हो गई…!!

बड़े भाई
ने छोटे भाई को थप्पड़ मार दिया…!!

छोटे भाई ने
कुछ नहीं कहा…!!
सिर्फ रेत पे
लिखा-
“आज मेरे बड़े भाई ने मुझे मारा”

अगले दिन दोनों फिर
समुद्र किनारे घूमने के लिए
निकले छोटा भाई
समुद्र में नहाने लगा…!!

अचानक
वो डूबने लगा बड़े
भाई ने उसे बचाया…!!
छोटे भाई ने पत्थर पे
लिखा-
” आज मेरे भाई ने मुझे बचाया “

बड़े भाई
ने पूछा जब मैने तुम्हे मारा तब
तुमने रेत पे लिखा और
जब तुमको बचाया तो पत्थर पे
लिखा ऐसा क्यों…??

विवेकशील छोटे
भाई ने जवाब
दिया –
”जब हमे कोई दुःख दे तो रेत पे लिखना चाहिए”
ताकि
वे जल्दी मिट जाये…!!

परन्तु
जब कोई हमारे लिए अच्छा करता है
तो
हमें पत्थर पर
लिखना चाहिए…??
जहा मिट ना पाएं…!!’

भाव ये हैं की हमे अपने साथ हुई बुरी घटना को भूल जाना चाहिए…!!
जबकि अच्छी घटना को सदैव याद रखना चाहिए…!!

Please Share your comment`s.

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

———– @ Best of Luck @ ———–

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

Swami Vivekananda-kmsraj51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

_______Copyright © 2015 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

प्रभु हममें अपनी मौजूदगी का अहसास हरदम कराते रहते।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-Kmsraj51

प्रभु हममें अपनी मौजूदगी का अहसास हरदम कराते रहते।

एक संत के आश्रम में दीक्षा ग्रहण समारोह चल रहा था। आश्रम में पधारे महा गुरु ने दीक्षा देने से पहले शिष्यों से प्रश्न किया, ‘ईश्वर कहां बसते हैं?’ किसी ने कहा संसार में तो किसी ने जीव-जंतुओं में। किसी ने पेड़-पौधों में बताया तो किसी ने ब्रहमांड में। शिष्यों के उत्तरों से नाखुश गुरुजी बोले- ‘परमात्मा प्रकृति के रोम-रोम में तो बसते ही हैं, लेकिन वे मनुष्य की अंतरात्मा में सर्वाधिक वास करते हैं। इसीलिए कहा गया है कि आत्मा परमात्मा का एक अंश है।’

हम सभी जानते हैं कि हमारे शरीर में परमात्मा की आत्मा का वास है। हमारा नश्वर शरीर एक दिन पृथ्वी में मिल जाएगा और आत्मा परमात्मा में एक हो जाएगी। अंत में रह जाएंगे तो सिर्फ हमारे द्वारा किए गए सत्कर्म। इसलिए जीवन रहते कुछ न कुछ अच्छा कर जाना जरूरी है। कम से कम जरूरतमंदों की मदद कर कुछ पुण्य ही कमाने का प्रयास करें, ताकि नेक कर्मों द्वारा हम खुद को हासिल कर सकें।

हमारे मन, दिल, और शरीर पर रजस, तमस और सात्विक गुणों का प्रभाव शुरू से ही पड़ने लगता है। जो इंसान अपनी जीवन यात्रा के दौरान इन सभी पर संतुलन रख पाता है वही आगे चलकर अपने इष्ट देवता को खोज पाता है। जिसने सत्कर्मों से खुद को खोज लिया है, उसने दूसरों को भी पा लिया है। ऐसे व्यक्ति शाश्वत परमेश्वर का स्वरूप होते हैं। उनका अपने अहम पर काबू होता है। वे स्वभाव से निर्मल, मन से कोमल, दिल के प्रेमी और आत्मा के मधुर होते हैं। वे हमेशा दूसरों का भला पहले चाहते हैं।

ऐसे लोगों ने स्वयं को खुद से जीत लिया है। वे अपनी आत्मा की आवाज जानते और सुनते हैं। उसमें समाये ईश्वर के स्वरूप को भी पहचानते हैं। वे खुद ईश्वर का प्रतीक हैं। ईश्वर से संवाद करना ऐसे इंसानों के लिए बहुत आसान होता है। यह संभव है तो फिर ईश्वर को कहीं ओर क्यों खोजें? जो लोग ईश्वर को नहीं पहचान पाते, उसे आत्मसात नहीं कर पाते, उन पर दुखों का पहाड़ यहीं गिरता है। वे अंधकार में जीते हैं। अधूरी लालसा पूरा करने के लिए उनकी आत्मा अपने परमात्मा को खोजने में लगी रहती है।

बाइबल में लिखा है- ‘क्या आप यह नहीं जानते कि आपका शरीर पवित्र आत्मा का मंदिर है? वह आप में निवास करता है और आपको ईश्वर से मिला है।’ अगर हम अपने भीतर बसने वाले ईश्वर को पहचान लें तो हमारी आत्मा का मिलन परमात्मा से हो जाएगा। जरूरत है बस अपने अंदर झांकने की। क्योंकि प्रभु हममें अपनी मौजूदगी का अहसास बराबर कराते रहते हैं। बस जरा ध्यान देने की जरूरत है? आप ही परमात्मा हैं, आपके द्वारा किए गए सभी कार्य परम हैं। आइये, संसार में परमत्व लाएं और क्यों न कुछ अच्छा कर जाएं।

Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

———– @ Best of Luck @ ———–

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

_______Copyright © 2014 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

परोपकारी बनें, स्वार्थी नहीं।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-Kmsraj51

paropkar-kmsraj51

परोपकारी बनें, स्वार्थी नहीं।

परोपकारी बनें, स्वार्थी नहीं।

एक दिन मैं किसी काम से कहीं जा रहा था। रास्ते में बहुत से लोग आते-जाते दिखे, लेकिन तभी एक बुजुर्ग महिला मुझे मिलीं। उन्होंने मुझसे कहा, ‘बेटा, मुझे मेट्रो स्टेशन के गेट तक छोड़ दो।’ मैंने उनका हाथ पकड़ा और उन्हें मेट्रो स्टेशन की सीढ़ियों के पास तक छोड़ दिया। वह प्रेम से सौ रुपये देने लगीं तो मैंने लेने से इनकार कर दिया और कहा, ‘ये रुपये आप उस जरूरतमंद इंसान को दे दीजिए, जिसे इसकी जरूरत हो।’ इस पर वह मुझे बहुत गौर से देखने लगीं और कहने लगीं- ‘बेटा, तुम हमेशा यही कोशिश करना और जरूरतमंदों की मदद करते रहना।’

वह दिन आज तक मुझे याद है। स्वार्थ भावना से रहित दूसरों के कल्याण के लिए मन, वचन और कर्म से किया गया कार्य परोपकार कहलाता है। पारस्परिक विरोध की भावना का नाश करना और प्रेम-भाव को बढ़ाना परोपकार कहलाता है। प्रकृति हमें निरंतर यह संदेश देती रहती है। पवन, प्राण वायु देकर हमारी गति को संचालित करता है। नदियां अपना अनंत जल जगत के लिए अर्पित कर देती हैं। वृक्ष अपनी छाया और फल दूसरों के लिए प्रस्तुत करते हैं।

यदि हम महान लोगों के इतिहास को देखें तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और मदर टेरेसा की याद आना स्वाभाविक है। गांधी जी ने देश के हित के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया और मदर ने अनगिनत अनाथों, विकलागों और रोगियों को अपने सीने से लगाया। लेकिन आज का मनुष्य इंसानियत को भूलता जा रहा है। वह परोपकारी लोगों को मूर्ख समझने लगा है। ऐसे लोग उसके लिए हंसी का पात्र बन जाते हैं।

आमतौर पर लोगों के हृदय से दया, करुणा और सहानुभूति जैसी मानवीय प्रवृत्तियां निकल भागी हैं। आज का मनुष्य स्वार्थ की जीती जागती परिभाषा बनकर रह गया है। राह चलते सड़क पर अगर कोई असहाय मिल जाए तो उसे देखते ही लोग अपना मुंह मोड़ लेते हैं। सड़क पर पड़ा कराहता घायल और दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति जैसे उसके लिए ध्यान देने का विषय ही नहीं रह गया है। जबकि सच यह है कि इंसान इस संसार में परोपकार के लिए ही जन्म लेता है।

मानव जीवन की सार्थकता इसी में है कि अपने बारे में सोचने के साथ-साथ हम दूसरों के बारे में भी सोचें। परोपकार करने से खुद को भी खुशी मिलती है। कभी किसी जरूरतमंद की मदद करके देखिए, आप पाएंगे कि अपने जीने की सार्थकता का अहसास होने लगा है। परोपकारी व्यक्ति दुखियों के प्रति उदार, निर्बलों के रक्षक और जन-कल्याण की भावना से ओत-प्रोत होते हैं। परोपकार से जो आनंद हमें मिलता है, वह एकदम अलौकिक होता है। इसीलिए परोपकारी व्यक्ति खुद भी सुखी रहता है और दूसरों में भी सुख बांटता चलता है। वह खुद तो ऐसा करता ही है, दूसरों को भी प्रेरित करता है।

Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

———– @ Best of Luck @ ———–

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

_______Copyright © 2014 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

निष्काम कर्म से जीवन सफल।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

karm-kmsraj51

निष्काम कर्म से जीवन सफल।

एक कलाकार के सामने बिक्री के लिए लगभग एक जैसी दो लकड़ी की मूर्तियां रखी हुई थीं। एक मूर्ति की कीमत थी दो हजार रुपए और दूसरी की कीमत थी पांच हजार रुपए। मूर्तियों की कीमतों में भारी अंतर के विषय में पूछने पर कलाकार ने बताया कि जो ज्यादा कीमती मूर्ति है उसकी लकड़ी बहुत अच्छी है और उसके रेशों की बनावट ऐसी है कि उस पर की गई खुदाई एकदम साफ और सुंदर दिखाई पड़ती है। लेकिन जो कम दाम की मूर्ति है, उस पर किया गया काम भी उतना सुंदर और साफ नहीं है।

ये पूछने पर कि बढ़िया मूर्ति को बनाने में समय भी ज्यादा लगा होगा, कलाकार ने उत्तर दिया, ‘समय तो बराबर ही लगता है। लकड़ी अच्छी निकल आए तो काम जल्दी और अच्छा हो जाता है और दाम भी अच्छे मिल जाते हैं।’ ‘काम जल्दी और अच्छा हो और दाम भी अच्छे मिल जाएं, इसलिए आप हमेशा अच्छी लकड़ी का चुनाव क्यों नहीं करते?’ कलाकार ने बताया कि कोशिश तो होती है, लेकिन यह हमेशा संभव नहीं हो पाता। एक ही प्रजाति में हर पेड़ की लकड़ी की क्वालिटी में भी काफी अंतर मिल जाता है। कई बार लकड़ी पर कुछ काम करने के बाद लकड़ी टूट या फट जाती है। इससे सारी मेहनत बेकार चली जाती है।

जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसा ही होता है। कहा जाता है कि जितना गुड़़ डालोगे उतना ही मीठा होगा, लेकिन जीवन में यह हमेशा संभव नहीं होता। आज अधिकांश माता-पिता बच्चों की शिक्षा और पढ़ाई-लिखाई को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं। वे इसके लिए कोई कसर नहीं छोड़ते। और जब बच्चा उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता तो वे मायूस हो जाते हैं। जरूरी है कि हमारे लक्ष्य ऊंचे हों और हम उन्हें पाने के प्रयास करें। हमारे प्रयास महत्वपूर्ण होते हैं जबकि अपेक्षाएं कर्म के लिए उत्प्रेरक तत्व।

अलग-अलग प्रकार की लकड़ियों के रेशों की बनावट की तरह ही हर बच्चे के व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों की बनावट भी अलग और विशिष्ट होती है। हर बच्चे को एक जैसा तथाकथित बड़ा आदमी बनाना संभव नहीं, लेकिन हर बच्चे को किसी न किसी निश्चित आकार में ढालना तो संभव है ही। यही स्वीकार करने को हम तैयार नहीं होते और इसी से पैदा होती हैं ज्यादातर समस्याएं।

हम किसी भी धातु, पत्थर या लकड़ी के टुकड़े को बेशक बेशकीमती कलाकृति में न परिवर्तित कर सकें, लेकिन यदि उसे एक उपयोगी आकार और स्थान ही उपलब्ध करवा दें तो यह कलात्मकता ही होगी। कलात्मकता महत्वपूर्ण है न कि कलाकृति की कीमत। गीता में कहा गया अकारण नहीं है कि हम कर्म करें, फल की इच्छा नहीं। फल चाहे जो भी हो निष्काम कर्म के द्वारा हम जीवन में उत्कृष्टता ही पाते हैं।

Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

———– @ Best of Luck @ ———–

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

_______Copyright © 2014 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

“श्री हरि कथा”

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-Kmsraj51

“श्री हरि कथा”

गरुड़जी की जिज्ञासा…..

एक बार भगवान विष्णु गरुड़जी पर सवार होकर कैलाश पर्वत पर जा रहे थे।
रास्ते में गरुड़जी ने देखा कि एक ही दरवाजे पर दो बाराते ठहरी थी।
मामला उनके समझ में नहीं आया।

फिर क्या था, पूछ बैठे प्रभु को।

गरुड़जी बोले! प्रभु ये कैसी अनोखी बात है कि विवाह के लिए कन्या एक और दो बारातें आई है।
मेरी तो समझ में कुछ नहीं आ राह है।

प्रभु बोले- हां एक ही कन्या से विवाह के लिए दो अलग अलग जगह से बारातें आई है।
एक बारात पिता द्वारा पसंद किये गये लड़के की है, और दूसरी माता द्वारा पसंद किये गये लड़के की है।

यह सुनकर गरुड़जी बोले- आखिर विवाह किसके साथ होगा?

प्रभु बोले- जिसे माता ने पसंद किया और बुलाया है उसी के साथ कन्या का विवाह होगा।

भगवान की बाते सुनकर गरुड़जी चुप हो गए और भगवान को कैलाश पर पहुंचाकर कौतुहल वस पुनः वापस उसी जगह आ गए जहां दोनों बारातें ठहरी थी।

गरुड़जी ने मन में विचार किया कि यदि मैं माता के बुलाए गए वर को यहां से हटा दूं तो कैसे विवाह संभव होगा।

फिर क्या था; उन्होंने भगवद्विधान को देखने की जिज्ञासा के लिए तुरन्त ही उस वर को उठाया और ले जाकर समुद्र के एक टापु पर धर दिए।

ऐसा कर गरुड़जी थोड़ी देर के लिए ठहरे भी नहीं थे कि उनके मन में अचानक विचार दौड़ा कि मैं तो इस लड़के को यहां उठा लाया हूँ पर यहां तो खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है, ऐसे में इस निर्जन टापु पर तो यह भूखा ही मर जाएगा और वहां सारी बारात मजे से छप्पन भोग का आनन्द लेंगी, यह कतई उचित नहीं है।
इसका पाप अवश्य ही मुझे लगेगा।
मुझे इसके लिए भी खाने का कुछ इंतजाम तो करना ही चाहिए।

यदि विधि का विधान देखना है तो थोड़ा परिश्रम तो मुझे करना ही पड़ेगा।

और ऐसा विचार कर वे वापस उसी स्थान पर फिर से आ गए।

इधर कन्या के घर पर स्थिति यह थी कि वर के लापता हो जाने से कन्या की माता को बड़ी निराशा हो रही थी।
परन्तु अब भी वह अपने हठ पर अडिग थी।
अतः कन्या को एक भारी टोकरी में बैठाकर ऊपर से फल-फूल, मेवा-मिष्ठान्न आदि सजा कर रख दिया, जिसमें कि भोजन-सामग्री ले जाने के निमित्त वर पक्ष
से लोग आए थे।

माता द्वारा उसी टोकरी में कन्या को छिपाकर भेजने के पीछे उसकी ये मंशा थी कि वर पक्ष के लोग कन्या को अपने घर ले जाकर वर को खोजकर उन दोनों का ब्याह करा देंगे।
माता ने अपना यह भाव किसी तरह होने वाले समधि को सूचित भी कर दिया।

अब संयोग की बात देखिये, आंगन में रखी उसी टोकरी को जिसमे कन्या की माता ने विविध फल-मेवा, मिष्ठान्नादि से भर कर कन्या को छिपाया था, गरुड़जी ने उसे भरा देखकर उठाया और ले उड़े।

उस टोकरी को ले जाकर गरुड़जी ने उसी निर्जन टापू पर जहां पहले से ही वर को उठा ले जाकर उन्होंने रखा था, वर के सामने रख दिया।

इधर भूख के मारे व्याकुल हो रहे वर ने ज्यों ही अपने सामने भोज्य सामग्रियों से भरी टोकरी को देखा तो बाज की तरह उस पर झपटा।
उसने टोकरी से जैसे ही खाने के लिए फल आदि निकालना शुरू किया तो देखा कि उसमें सोलहों श्रृंगार किए वह युवती बैठी है जिससे कि उसका विवाह होना था।

गरुड़जी यह सब देख कर दंग रह गए।

उन्हें निश्चय हो गया कि :–‘हरि इच्छा बलवान।’

‘राम कीन्ह चाहैं सोई होई।
करै अन्यथा आस नहिं कोई।’

फिर तो शुभ मुहुर्त विचारकर स्वयं गरुड़जी ने ही पुरोहिताई का कर्तव्य निभाया।
वेदमंत्रों से विधिपूर्वक विवाह कार्य सम्पन्न कराकर वर-वधु को आशीर्वाद दिया और उन्हें पुनः उनके घर पहुंचाया।

तत्पश्चात प्रभु के पास आकर सारा वृत्तांत निवादन किए और प्रभु पर अधिकार समझ झुंझलाकर बोले- प्रभो! आपने अच्छी लीला करी, सारा ब्याह कार्य हमीं से करवा लिया।

भगवान गरुड़जी की बातों को सुनकर मन्द-मन्द मुस्कुरा रहे थे।

जया शर्मा किशोरी।

We are grateful to जया शर्मा किशोरी जी for sharing this inspirational श्री हरि कथा in Hindi for Kmsraj51 readers.

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

———– @ Best of Luck @ ———–

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

_______Copyright © 2014 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

प्रेरणा का स्रोत!!

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

Source-of-Inspiration-150x150

प्रेरणा का स्रोत

प्रेरणा का स्रोत

दोस्तों ,जिंदगी है तो संघर्ष हैं,तनाव है,काम का pressure है, ख़ुशी है,डर है !लेकिन अच्छी बात यह है कि ये सभी स्थायी नहीं हैं!समय रूपी नदी के प्रवाह में से सब प्रवाहमान हैं!कोई भी परिस्थिति चाहे ख़ुशी की हो या ग़म की, कभी स्थाई नहीं होती ,समय के अविरल प्रवाह में विलीन हो जाती है!

ऐसा अधिकतर होता है की जीवन की यात्रा के दौरान हम अपने आप को कई बार दुःख ,तनाव,चिंता,डर,हताशा,निराशा,भय,रोग इत्यादि के मकडजाल में फंसा हुआ पाते हैं  हम तत्कालिक परिस्थितियों के इतने वशीभूत हो जाते हैं  कि दूर-दूर तक देखने पर भी हमें कोई प्रकाश की किरण मात्र भी दिखाई नहीं देती , दूर से चींटी की तरह महसूस होने वाली परेशानी हमारे नजदीक आते-आते हाथी के जैसा रूप धारण कर लेती है  और हम उसकी विशालता और भयावहता के आगे समर्पण कर परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी हो जाने देते हैं,वो परिस्थिति हमारे पूरे वजूद को हिला डालती है ,हमें हताशा,निराशा के भंवर में उलझा जाती है…एक-एक क्षण पहाड़ सा प्रतीत होता है और हममे से ज्यादातर लोग आशा की कोई  किरण ना देख पाने के कारण  हताश होकर परिस्थिति के आगे हथियार डाल देते हैं!

अगर आप किसी अनजान,निर्जन रेगिस्तान मे फँस जाएँ तो उससे निकलने का एक ही उपाए है ,बस -चलते रहें!   अगर आप नदी के बीच जाकर हाथ पैर नहीं चलाएँगे तो निश्चित ही डूब जाएंगे !  जीवन मे कभी ऐसा क्षण भी आता है, जब लगता है की बस अब कुछ भी बाकी नहीं है ,ऐसी परिस्थिति मे अपने  आत्मविश्वास और साहस के साथ सिर्फ डटे रहें क्योंकि-

“हर चीज का हल होता है,आज नहीं तो कल होता है|”

एक बार एक राजा की सेवा से प्रसन्न होकर एक साधू नें उसे एक ताबीज दिया और कहा की राजन  इसे अपने गले मे डाल लो और जिंदगी में कभी ऐसी परिस्थिति आये की जब तुम्हे लगे की बस अब तो सब ख़तम होने वाला है ,परेशानी के भंवर मे अपने को फंसा पाओ ,कोई प्रकाश की किरण नजर ना आ रही हो ,हर तरफ निराशा और हताशा हो तब तुम इस ताबीज को खोल कर इसमें रखे कागज़ को पढ़ना ,उससे पहले नहीं!

राजा ने वह ताबीज अपने गले मे पहन लिया !एक बार राजा अपने सैनिकों के साथ शिकार करने घने जंगल मे गया!  एक शेर का पीछा करते करते राजा अपने सैनिकों से अलग हो गया और दुश्मन राजा की सीमा मे प्रवेश कर गया,घना जंगल और सांझ का समय ,  तभी कुछ दुश्मन सैनिकों के घोड़ों की टापों की आवाज राजा को आई और उसने भी अपने घोड़े को एड लगाई,  राजा आगे आगे दुश्मन सैनिक पीछे पीछे!   बहुत दूर तक भागने पर भी राजा उन सैनिकों से पीछा नहीं छुडा पाया !  भूख  प्यास से बेहाल राजा को तभी घने पेड़ों के बीच मे एक गुफा सी दिखी ,उसने तुरंत स्वयं और घोड़े को उस गुफा की आड़ मे छुपा लिया !  और सांस रोक कर बैठ गया , दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज धीरे धीरे पास आने लगी !  दुश्मनों से घिरे हुए अकेले राजा को अपना अंत नजर आने लगा ,उसे लगा की बस कुछ ही क्षणों में दुश्मन उसे पकड़ कर मौत के घाट उतार देंगे !  वो जिंदगी से निराश हो ही गया था , की उसका हाथ अपने ताबीज पर गया और उसे साधू की बात याद आ गई !उसने तुरंत ताबीज को खोल कर कागज को बाहर निकाला और पढ़ा !   उस पर्ची पर लिखा था —“यह भी कट जाएगा “

राजा को अचानक  ही जैसे घोर अन्धकार मे एक  ज्योति की किरण दिखी , डूबते को जैसे कोई सहारा मिला !  उसे अचानक अपनी आत्मा मे एक अकथनीय शान्ति का अनुभव हुआ !  उसे लगा की सचमुच यह भयावह समय भी कट ही जाएगा ,फिर मे क्यों चिंतित होऊं !  अपने प्रभु और अपने पर विश्वासरख उसने स्वयं से कहा की हाँ ,यह भी कट जाएगा !

और हुआ भी यही ,दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज पास आते आते दूर जाने लगी ,कुछ समय बाद वहां शांति छा गई !  राजा रात मे गुफा से निकला और किसी तरह अपने राज्य मे वापस आ गया !

दोस्तों,यह सिर्फ किसी राजा की कहानी नहीं है यह हम सब की कहानी है !हम सभी परिस्थिति,काम ,तनाव के दवाव में इतने जकड जाते हैं की हमे कुछ सूझता नहीं है ,हमारा डर हम पर हावी होने लगता है ,कोई रास्ता ,समाधान दूर दूर तक नजर नहीं आता ,लगने लगता है की बस, अब सब ख़तम ,है ना?

जब ऐसा हो तो २ मिनट शांति से बेठिये ,थोड़ी गहरी गहरी साँसे लीजिये !  अपने आराध्य को याद कीजिये और स्वयं से जोर से कहिये –यह भी कट जाएगा !   आप देखिएगा एकदम से जादू सा महसूस होगा , और आप उस परिस्थिति से उबरने की शक्ति अपने अन्दर महसूस करेंगे !  आजमाया हुआ है ! बहुत कारगर है !

आशा है जैसे यह सूत्र मेरे जीवन मे मुझे प्रेरणा देता है ,आपके जीवन मे भी प्रेरणादायक सिद्ध होगा !!

नोट:- Post inspired by AKC (http://www.achhikhabar.com/). We are grateful to My dear friend Mr. Gopal Mishra & AKC for sharing this inspirational story in Hindi for http://kmsraj51.com/ readers.

For more Hindi Story Visit at :- http://www.achhikhabar.com/

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

 

तैयारी इतनी खामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे |

 ~KMSRAJ51

 

_______Copyright © 2014 kmsraj51.com All Rights Reserved.________