सर्वश्रेष्ठ प्रेरणादायक उद्धरण।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ सर्वश्रेष्ठ प्रेरणादायक उद्धरण। ϒ

  • भगवान श्री कृष्ण, अर्जुन के ही सारथि नही थे वे तो पूरे विश्व के सारथि हैं, फिर डर किसका।
  • वर्तमान की आवश्यकता भविष्य की निधि हैं।
  • किसी भी कार्य के पर्याय बन जाओ प्रसिद्धि अवश्य मिल जाएगी।
  • अपने सुख को दूसरों के दुखों में बाँट दो।
  • जीवन में लक्ष्य ज़रूर निर्धारित करो लक्ष्य मिलने पर आकार बड़ा कर दो।
  • झूठ सच पर अधिकार कर रहा हैं।
  • शरीर में जीतने छेद हैं सबसे गंदगी ही निकलती हैं इसमे मुँह का क्या दोष?
  • प्रलोभन व्यक्ति को विचलित करता हैं।
  • जोखिम उठाने वालो के लिये असफलता एक उपहार हैं।
  • फल की इच्छा रखने वाले फूल नहीं तोड़ा करते।
  • वर्तमान की दिशा भविष्य की दशा तय करती हैं।
  • तुम्हारे प्रयास फल की तरह खट्टे या मीठे को सकते हैं पर सफलता मीठी ही होती हैं।
  • निर्णय हमेशा प्रभावित करते हैं।
  • शब्द दुख और सुख में अक्षर ख को देखो हमेशा एकसा दिखता हैं फिर हम क्यों नही?
  • आलोचना मुझें प्रेरित करती हैं कुछ और अच्छा करने की।

© पीयूष गोयल गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश ®

Piyush Goel

    पीयूष गोयल।

हम दिल से आभारी हैं ‘पीयूष गोयल जी” के प्रेरणादायक हिन्दी Quotes साझा करने के लिए।

‘पीयूष गोयल जी” के लिए मेरे विचार: 

“पीयूष गोयल जी” के Quotes के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। Quotes छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन Quotes काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

KMSRAJ51 के अनमाेल वचन।

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT

ϒ KMSRAJ51 के अनमाेल वचन। ϒ

अशांत मन उचित निर्णय लेने की क्षमता काे खत्म(खाे) कर देता हैं।

 ~Kmsraj51

 सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

~Kmsraj51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।” -Kmsraj51

⇒ स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

 ~Kmsraj51

⇒ जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं।

~Kmsraj51

⇒ जीने के अंदाज काे बदलने आये हम,

काैन कहता खुशियाँ थाेडी़ हैं, ज्यादा है गम…..

⇒ एक पिता परमात्मा(Supreme Soul) से अपने सर्व संबंध बनाये।

 ध्यान(Meditation) माना आत्मा द्वारा परमात्मा(ईश्वर) काे याद किया जाना।

 ~Kmsraj51

⇒ समय न गवाये वरना पछताने के अलावा कुछ न बचेगा जीवन में।

 ~Kmsraj51

आप अपने अतीत काे नही बदल सकते, लेकिन अपने वर्तमान और भविष्य काे बदलना आपके अपने हाथ में हैं। इसलिए जाे बीत गया उसे याद कर, अपने वर्तमान और भविष्य काे समाप्त ना करें। 

 ~Kmsraj51

⇒ आज के समय में 97% मनुष्य यही साेचते है, कि मेरे किस्मत में जाे हाेगा वही मिलेगा और ऐसा साेचकर वह बैठ जाते हैं। आचार्य चाणक्य जी ने कितनी अच्छी बात कही हैं। “क्या पता किस्मत में ही लिखा हाे की काेशिश करने से ही मिलेगा। “

 ~Kmsraj51

⇒ हमेशा अपनी सोच काे अन्य लोगों(दुसराें) से अलग रखाें तभी आपकी अपनी कुछ अलग पहचान बन पायेगी।

 ~Kmsraj51

⇒ आप रहाे या ना रहाे, लेकिन ऐसा कर्म कराें जीवनभर की आपके कर्म सदैव आपकाे जिवित रखें।

~Kmsraj51

⇒ जीवन में एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात दाग पर दाग लगाना इसलिए बीती को बिन्दी लगाओ, और आगे बढ़ाे।

 ~Kmsraj51

⇒ किस्मत, नसीब़ और लक के भराेसे रहने पर किसी काे सफलता नहीं मिलती, सफलता ताे सच्चे मन से निरन्तर कार्य करने से ही मिलती हैं।

 ~Kmsraj51

⇒ केवल एक ही बुरा कर्म, किसी भी मनुष्य का शानाें, शाैंकत और इज़्ज़त यू मिनटाें में मिट्टी में मिला देता हैं। जैसे रेत से बना घर त्त्वरित गिर जाता हैं।

 ~Kmsraj51

मनु स्मृति के अनुसार इन ५ को कभी अतिथि नहीं बनाना चाहिए, न ही करें नमस्ते।

श्लोक ≈»

पाषण्डिनो विकर्मस्थान्बैडालव्रतिकांछठान्।
हैतुकान्वकवृत्तींश्च वाड्मात्रेणापि नार्चयेत्।।

अर्थात्- 1. पाखंडी, 2. दुष्ट कर्म करने वाला, 3. दूसरों को मूर्ख बनाकर उनका धन लूटने वाला, 4. दूसरों को दुख पहुंचाने वाला व 5. वेदों में श्रद्धा न रखने वाला। इन 5 लोगों को अतिथि नहीं बनाना चाहिए और इनका शिष्टाचार पूर्वक स्वागत भी नहीं करना चाहिए।

 ~Kmsraj51

⇒ बुरी बातें ना खुद सुनो, ना किसी काे सुनाओं।

 ~Kmsraj51

⇒ सच्चा ब्राह्मण वह है जो पूर्ण शुद्धि और विधि पूर्वक हर कार्य करे।

~Kmsraj51

⇒ नाजुक परिस्थितियों के पेपर में पास होना है तो अपनी नेचर को शक्तिशाली बनाओ।

 ~Kmsraj51

 ज्ञान और ध्यान का हाेना जरूरी हैं जीवन में। बिना ज्ञान और ध्यान के दिमाग शांत नहीं हाे सकता, साे जीवन में, ज्ञान और ध्यान का हाेना बहुत जरूरी हैं।

~Kmsraj51

⇒ “आत्मविश्वास किसी भी इंसान के लिए सर्वश्रेष्ठ आत्मिक शक्ति है। अगर वह स्वयं पर विश्वास रखकर कोई कर्म करता है तो कोई भी मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती”।

~Kmsraj51

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

~KMSRAJ51 

⇒ रीयल डायमण्ड बनकर अपने वायब्रेशन की चमक विश्व में फैलाओ।

~Kmsraj51

⇒ चोट लगाने वाले का काम है चोट लगाना और आपका काम है अपने को बचा लेना।

~Kmsraj51

⇒ ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता, इंसान(जीवआत्मा) आैर इंसान के कर्म बुरे हाेते हैं।

~Kmsraj51

⇒ संकल्पों को बचाओ तो समय, बोल सब स्वत: बच जायेंगे।

~Kmsraj51

⇒ समय की कद्र करो, अवसर का लाभ उठाओ और शब्दों को सोच समझ कर खर्च करो।

~Kmsraj51

⇒ दृढ़ता कड़े संस्कारों को भी मोम की तरह पिघला (खत्म कर) देती है।

~Kmsraj51

⇒ त्रिकालदर्शी बनकर हर कर्म करो तो सफलता सहज मिलती रहेगी।

~Kmsraj51

⇒ मनुष्य का सारा कैरेक्टर विकारों ने बिगाड़ा है।

~Kmsraj51

 आत्मा रूपी पुरूष को श्रेष्ठ बनाने वाले ही सच्चे पुरूषार्थी हैं।

~Kmsraj51

⇒ सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो आत्म-अभिमानी रहते हैं।

~Kmsraj51

जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

~KMSRAJ51

» » » » » » »

In-English…..

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

In-Hindi…..

पवित्रता सच शांति और खुशी का धार है.

यह पके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

~KMSRAJ51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaen solar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

 ~KMSRAJ51(“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।

 ~KMSRAJ51

जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें।

और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें।

 ~KMSRAJ51

अगर आपको लगता है, आप ऐसा कर सकते हैं, आप सही हैं।

तैयारी इतनी खामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे |

 ~KMSRAJ51

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर।

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

 ~KMSRAJ51

प्रश्न :- दोस्त क्या है?\मित्र क्या है?

उत्तर :- “एक आत्मा जाे दाे शरीराें में निवास करती है”

 समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।

 ~KMSRAJ51

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Quotes Source:- “तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से।

CYMT-KMSRAJ51

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

 

 

आगे बढ़ाे मगर-सोच समझ कर।

Kmsraj51 की कलम से…..

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काेई व्यक्ति चाहे कितना भी महान क्यों ना हाे। 

आँख मूँद कर उसके पीछे नही चलना चाहिये।

यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा हाेती ताे वह हर प्राणी काे, 

आँख, नाक, कान, मस्तिष्क और मुंह क्यों देता।

ईश्वर ने जाे हर किसी काे दिया है ताे उसका उपयाेग करना चाहिये।

साेच समझ कर सब, काम करने चाहिये।

 ~विमल गांधी जी ∇

संतुलित दिमाग़ जैसी काेई सादगी नही।
संताेष जैसा काेई सुख नही॥
लाेभ जैसी काेई बीमारी नही।
और दया जैसा काेई पुण्य नही॥

 ~विमल गांधी जी ∇

Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी Quotes साझा करने के लिए।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

 

 

असीमित ऊर्जा आत्मिक-प्रेम में।

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT

∇ असीमित ऊर्जा आत्मिक-प्रेम में।Θ

दोस्तों,

आत्मिक-प्रेम में वह शक्ति निहित है, जिससे शत्रु भी मित्र बन जाते हैं। प्रेम ताे वैसे ढाई आखर(ढाई अक्षर) का ही हाेता हैं। लेकिन इस ढाई आखर(ढाई अक्षर) में इतनी असीमित शक्ति निहित हैं, जिससे असंभव काे भी सरलता पूर्वक संभव में परिवर्तित किया जा सके।

“प्रेम” आत्मा(Soul) के ७ माैलिक गुणाें में से एक हैं। “प्रेम” माना आत्मा और परमात्मा(ईश्वर) के बीच संबंध।

आत्मा(Soul) के ७ माैलिक गुण यह हैं…..

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand),

काेई भी मनुष्य आपके साथ कितना भी बुरा बर्ताव करें फिर भी आप “प्रेम” कि शक्ति काे ना छाेडे़, आपकी कोशिश यही हाे कि आप उसके साथ भी प्रेमपूर्ण व्यवहार हि करें। एक ना एक दिन आपका शत्रु, आपके चरणाें में हाेगा।

आत्मिक-प्रेम हमे मनुष्याें से सच्चा स्नेह करना सीखाती हैं। आत्मिक-प्रेम से मनुष्य कें अंदर शहनशीलता, दया और करुणा स्वतः ही आ जाती हैं।

आज के समय में मनुष्याें के पास पैसा(Money) ताे बहुत है, लेकिन वर्तमान समय में मनुष्याें के पास ना ताे सच्ची शांति हैं, ना हि सच्चा सुख हैं। ऐसा इसलिए क्योंकी मनुष्याें के अंदर आत्मिक-प्रेम नहीं हैं।

जब तक मनुष्याें का मनुष्याें से आत्मिक-प्रेम नहीं हाेगा तब तक सच्चा सुख और सच्ची शांति ना मिलेगी।

दोस्तों,

सभी मनुष्याें काे यह समझना हाेगा कि…..

सभी मनुष्याें काे सभी मनुष्याें से आत्मिक-प्रेम के साथ स्नेह भरा व्यवहार करना हाेगा तभी सच्चा सुख और सच्ची शांति मिलेगी।

ओम शांति!!

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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जीवन में दुःखाे से निराश हाेकर बैठ ना जाना तुम।

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© जीवन में दुःखाे से निराश हाेकर बैठ ना जाना तुम। ®

बाज लगभग ७० वर्ष जीता है …..

परन्तु अपने जीवन के,
४० वें वर्ष में आते-आते उसे…..
एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है।

उस अवस्था में उसके शरीर के,
3 प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं।

पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है,
व शिकार पर पकड़ बनाने में,
असक्षम होने लगते हैं।

चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है,
और भोजन निगलने में,
व्यवधान उत्पन्न करने लगती है।

पंख भारी हो जाते हैं….
और सीने से चिपकने के कारण,
पूरे खुल नहीं पाते हैं।
उड़ानें सीमित कर देते हैं।

भोजन ढूँढ़ना, भोजन पकड़ना,
और भोजन खाना … तीनों प्रक्रियायें,
अपनी धार खोने लगती हैं।

उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं…..
या तो देह त्याग दे,
या अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह,
त्यक्त(छुटा हुआ) भोजन पर निर्वाह करे।

या फिर “स्वयं को पुनर्स्थापित करे”।
आकाश के निर्द्वन्द्व एकाधिपति के रूप में.

जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं,
वहीं तीसरा अत्यन्त पीड़ादायी और लम्बा।

बाज पीड़ा चुनता है…..
और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है।

वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है, एकान्त में अपना घोंसला बनाता है…..
और तब प्रारम्भ करता है पूरी प्रक्रिया।

सबसे पहले वह अपनी चोंच,
चट्टान पर मार-मार कर तोड़ देता है,
अपनी चोंच तोड़ने से अधिक पीड़ादायक,
कुछ भी नहीं पक्षीराज के लिये।

तब वह प्रतीक्षा करता है,
चोंच के पुनः उग आने की।

उसके बाद वह,
अपने पंजे भी उसी प्रकार तोड़ देता है,
और प्रतीक्षा करता है…..
पंजों के पुनः उग आने की।

नये चोंच और पंजे आने के बाद,
वह अपने भारी पंखों को,
एक-एक कर नोंच कर निकालता है।
और प्रतीक्षा करता है…..
पंखों के पुनः उग आने की।

१५० दिन की पीड़ा और प्रतीक्षा…..
और तब उसे मिलती है,
वही भव्य और ऊँची उड़ान पहले जैसी नयी।

इस पुनर्स्थापना के बाद,
वह ३० साल और जीता है…..
ऊर्जा, सम्मान और गरिमा के साथ।

इच्छा, सक्रियता और कल्पना,
तीनों निर्बल पड़ने लगते हैं हममें भी।

हमें भी भूतकाल में जकड़े,
अस्तित्व के भारीपन को त्याग कर,
कल्पना की उन्मुक्त उड़ाने भरनी होंगी।

१५० दिन न सही …..
तो एक माह ही बिताया जाये,
स्वयं को पुनर्स्थापित करने में।

जो शरीर और मन से चिपका हुआ है,
उसे तोड़ने और…..
नोंचने में पीड़ा तो होगी ही।

बाज तब उड़ानें भरने को तैयार होंगे…..
इस बार उड़ानें और ऊँची होंगी,
अनुभवी होंगी, अनन्तगामी होंगी।

हर दिन कुछ चिंतन किया जाए,
और आप ही वो व्यक्ति हे,
जो खुद को दुसरो से बेहतर जानते है।

सिर्फ इतना निवेदन की निष्पक्षता के साथ,
छोटी-छोटी शुरुवात कर परिवर्तन करें।

© कृष्ण मोहन सिंह(KMS) ©

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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-KMSRAJ51

 

 

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Self Responsibility

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

Self ResponsibilityPart 1 

There are certain laws which are involved in our actions and interactions. They are not human laws requiring lawyers to interpret or the police to put into action. They are natural laws which are constantly operating in every relationship. They are often called the Laws of Karma (action): briefly described by the saying – As you sow, so you shall reap, described by Isaac Newton as the Third Law of Motion i.e. for every action, there is an equal and opposite reaction. The Laws of Karma remind us that whatever quality of energy we give out, we get back. This might not be exactly tit for tat, but if we give happiness to someone, it will come back to us; if we give pain or sorrow, it will come back, perhaps not today or tomorrow, but at some time in the future.

Most of us are conditioned by the idea that we are responsible for some of our actions, but not all of them. For example, we would consider ourselves responsible for the actions which improved our company’s business but would not consider ourselves responsible for not being on good terms with our spouse. If, as parents, we worked hard in educating our children and they grew up to become well placed and successful individuals in their lives, we would consider ourselves responsible. If on the other hand they don’t make it to the top and are not so successful, we will blame our children for not putting enough effort or maybe the education system for the same. So we are selective in taking responsibility for our actions.

Through spirituality, we are reminded of the unchangeable laws of cause and effect, which awakens our awareness of our true responsibility for each and every action that we perform.

© Message ©

Faith in one’s progress brings contentment.

Expression: Even when the situation is not according to what is expected, there is contentment for the one who has faith in his own progress. Such a person will not just sit back waiting for things to change nor will he just curse his fate. Instead he’ll do his best and use all his resources in bettering the situation.

Experience: The understanding that all life’s situations are a training for me, automatically keeps me content in all situations. There is naturally an experience of constant progress and a feeling of having gained something from all situations.

Self ResponsibilityPart 2 

Because we have forgotten the principle of karmic returns (discussed yesterday), we have learned to avoid taking responsibility for many of our actions. We fail to see the impact of our actions upon others and we fail to see that the real meaning of responsibility is responding correctly. Life can be seen as a series of responses which we each create in our interactions with other people and events. As is the quality of our ability to respond (energy given), so will be the quality of the return (energy received). The Laws of Karma also serve to remind us that the situations in our life, the quality of our body, wealth, relationships etc. and the type of person we are today are the result of what we thought and did yesterday, last month, last year, perhaps in our last birth. Many people do not like this idea or find it difficult to accept because most of us have been taught that our destiny lies in someone else’s hands or in the hands of fate or luck, about which we can do nothing. The Law of Karma or the Law of Reciprocity teaches us that there is no such thing as luck and that whatever happens to us today is the result of our positive or negative actions in the past. If you spend a few moments reflecting on events in your life, without being judgmental, you will begin to see connections between actions and results, causes and effects. When you see how all effects have their causes, you will then be convinced that this universal law is at work in your life at all times.

© Message ©

The ones who are constantly happy are truly fortunate.

Expression: Whatever the kind of situations needed to be faced, whoever the people and the different kind of personalities they come into contact with, the ones who are fortunate constantly enjoy. They also continue to take benefit and bring benefit to others too. Their fortune lies in their ability to perceive the positive aspect in everything and take benefit accordingly.

Experience: When I am able to be happy under all circumstances, I am able to make the best use of whatever I have with me. I then find myself full of all resources. I don’t think of what I don’t have but I am aware of and make the best use of what I have. So I find myself to be always lucky. I constantly move forward.

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

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इन्सान की 30 गलतियां।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMY-KMSRAJ51-N

इन्सान की 30 गलतियां।

30 Human Errors

1. इस ख्याल में रहना कि जवानी और तन्दुरुस्ती हमेशा रहेगी।

2. खुद को दूसरों से बेहतर समझना।

3. अपनी अक्ल को सबसे बढ़कर समझना।

4. दुश्मन को कमजोर समझना।

5. बीमारी को मामुली समझकर शुरु में इलाज न करना।

6. अपनी राय को मानना और दूसरों के मशवरें को ठुकरा देना।

7. किसी के बारे में मालुम होना फिर भी उसकी चापलुसी में बार-बार आ जाना।

8. बेकारी में आवारा घुमना और रोज़गार की तलाश न करना।

9. अपना राज़ किसी दूसरे को बता कर उससे छुपाए रखने की ताकीद करना।

10. आमदनी से ज्यादा खर्च करना।

11. लोगों की तक़लिफों में शरीक न होना, और उनसे मदद की उम्मीद रखना।

12. एक दो मुलाक़ात में किसी के बारे में अच्छी राय कायम करना।

13. माँ-बाप की सेवा न करना और अपनी औलाद से सेवा की उम्मीद रखना।

14. किसी काम को ये सोचकर अधुरा छोड़ना कि फिर किसी दिन पुरा कर लिया जाएगा।

15. दुसरों के साथ बुरा करना और उनसे अच्छे की उम्मीद रखना।

16. आवारा लोगों के साथ उठना बैठना।

17. कोई अच्छी राय दे तो उस पर ध्यान न देना।

18. खुद हराम व हलाल का ख्याल न करना और दूसरों को भी इस राह पर लगाना।

19. झूठी कसम खाकर, झूठ बोलकर, धोखा देकर अपना माल बेचना, या व्यापार करना।

20. मुसिबतों में बेसब्र बन कर चीख़ पुकार करना।

21. भिक्षुकों, और गरीबों को अपने घर से धक्का देकर भगा देना।

22. ज़रुरत से ज्यादा बातचीत करना।

23. पड़ोसियों से अच्छा व्यवहार नहीं रखना।

24. बादशाहों और अमीरों की दोस्ती पर यकीन रखना।

25. बिना वज़ह किसी के घरेलू मामले में दखल देना।

26. बगैर सोचे समझे बात करना।

27. तीन दिन से ज्यादा किसी का मेहमान बनना।

28. अपने घर का भेद दूसरों से ज़ाहिर करना।

29. हर एक के सामने अपना दुख दर्द सुनाते रहना।

30. उपरोक्त लिखी जानकारी को नजर अंदाज करना।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

CYMT-100-10 WORDS KMS

निश्चय ही आप विजयी होंगे, यदि आप अपनी दुर्बलता (Weakness) को अपनी ताकत में तब्दील करना सीख लें।

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

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Using Creativity and Positive Thinking To Overcome Dependencies

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CYMT-KMSRAJ51-4

Using Creativity and Positive Thinking To Overcome Dependencies

The correct use of creativity and positive thinking helps us to overcome any type of dependencies or negative tendencies that we may have. Often we live under the illusion (false belief) that we can only be happy thanks to objects, people and places, but happiness is something that we experience when we put our heart into something, and our intention is of giving and not of taking. In the creative activity that we experience greatest enjoyment in, our happiness comes from within and expresses itself outwards, and not from the outside in. Creative personal development helps us to overcome laziness. On overcoming it, we recover the inner strength necessary to free ourselves of certain dependencies, such as the dependency on the creativity of others to entertain us e.g. watching a movie in which actors entertain the viewers. It is fine to enjoy entertainment, but the important thing is that you are capable of spending a good amount of time being creative yourself, overcoming laziness, boredom and the wasting away of our own inner creative capacity.

Also, let us learn to create thoughts which are positive and creative. They arise out of the spiritual knowledge of the inner self or soul. In this way, thanks to those higher quality creative thoughts, full of peace, harmony, love and happiness, the mind gets strengthened and is able to overcome old habits and negative tendencies which we hold on to or are dependent on.

– Message –

The more you are humble, the more will be your success.

Contemplation: Humility gives you the wings to fly. It gives you enthusiasm based on your inner truth and you can easily move forward. When there is no humility you will find yourself being pulled back again and again.

Application: When you do something, remind yourself of how much you are enjoying it. Let there be no desire for recognition or praise. Then you will find yourself succeeding in the task that you undertake and you will be appreciated too.

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

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Being A Good Transformation Agent

Kmsraj51 की कलम से…..

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Being A Good Transformation Agent – Part 1

Often, we feel ourselves to be victims of different factors that seem to direct the course of our life without us being able to control them. The world does not seem to dance to our music and our will, and we feel ourselves to be victims because things do not work out or are not as we want. Therefore, we give up and decide to resign ourselves to this reality; to be victims of it and observe passively (non-actively), resisting what comes, getting frustrated and bad-tempered. However, we could position ourselves in another way: beingtransformation (change) agents (the ones who are able to change the external factors like people or situations) by creating a different reality. To do so we have to change our perception. Also, it is necessary to strengthen our capacity to tolerate, accept, let go and forget. Tolerance here also refers tounderstanding, love and compassion (kindness). Not to put up with people or things, but to remain above them, to go beyond them; to co-operate with trust and motivation. It is difficult for us to tolerate because we have expectations and pre-conceived ideas of how others should act and be. Then we create negative feelings towards them because they are not like that or don’t act in the manner that we want. This makes our relationship with them difficult.

When your vision towards others is positive, you see their qualities, their efforts and their values instead of their defects and their errors. You are open to listening to them and to understanding their intentions. That way it is easier to have good feelings towards them. Basing ourselves on a positive and objective vision and on good feelings, we do not have to put up with, or even tolerate the other – the relationship becomes streamlined.

– Message –

When your heart is open and clean you will be humble.

Contemplation: Humility needs a good home to dwell in. When the mind is filled with negative feelings or biased ideas towards anyone, you cannot use your humility. So fill your mind with positive thoughts towards everyone.

Application: If you have negative thoughts towards anyone, make an attempt to remove them. Tell yourself that you don’t like one particular aspect in that person and not the person himself. In this way you will help the other person also to bring about change.

Being A Good Transformation Agent – Part 2

If you go inside yourself and observe, with sincerity, your feelings towards someone that you consider unbearable or intolerable, you will see that your perception (way of looking at them), your expectations and your bad feelings make you feel that the other is unbearable or intolerable. You have allowed the other to influence you in the creation of your bad feelings. You have lost compassion (kindness) and the capacity to accept and understand the other.
Being a good transformation (change) agent requires having full control over your inner world. If you are the victim of your rapidly moving mind, your bad feelings, your aggressive emotional states and of your not-very-healthy habits, you will easily feel yourself to be the victim of others, of circumstances, of time and of society. In relationships, the key is in living with your consciousness awake and not to do anything that your conscience does not agree with. In doing so, you don’t have to fear the opinion of others. You don’t have to feel insecure or doubt yourself. If not, we will continue to act against our own consciousness and we will feel ourselves to be victims. To avoid pain or the unhappiness that arises automatically when we act against our own consciousness, we look for guilt excuses: “Because of… I haven’t acted as I should.” We blame or we make excuses. That way we suppress the voice of our consciousness until the suffering and unhappiness is such that our conscience scolds us, which increases our unhappiness even more. A good transformation agent will always obey the voice of the inner conscience. By remaining in tune with our conscience and creating right thoughts, words and actions, it becomes easier for us to move fromvictim consciousness to transformer consciousness (one who brings about change).

– Message –

When you are humble you can bring benefit to many.

Contemplation: Like the tree laden with fruit bows down, the one who is full is the one who is humble. Such a person can bring benefit to all those around. Your humility makes you a giver in all situations, also making it easy for others to take what you have to offer.

Application: In all your interactions with others, see what you can give them, instead of expecting from them. Then, even when you have to follow others’ directions there would be no difficulty. Your humility will help you give in very easily.

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

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The Role Play Of Thoughts In Relationships

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The Role Play Of Thoughts In Relationships – Part 1

Relationships can be defined on the surface as a state in which two or more people are connected, the state of being related or interrelated or if the definition is expanded, the way in which two people, talk to, regard and behave towards each other, and deal with each other. Spirituality sees relationships from a deeper perspective – “relationships are not only what we do or say to each other, but are built on the basis of what we think about each other”. So relationships, when seen from a spiritual view point, are an exchange of energy at the level of thoughts and feelings, and then words and actions thereafter.

Relationships are one of the most important wealth of our lives and one of the most important sources of our happiness. In order to make them successful i.e. to create the wealth of positive relationships and to experience joy through them continuously, it is important to base them on the right belief systems. One major incorrect belief that we carry inside ourselves with regards to our relationships is that relationships are all about behaving and talking in the right manner, because we think people see, know and judge only what we speak and do, they do not sense what we think, and so we don’t give enough significance to our thoughts. But thoughts are more in number and being a more powerful and subtle energy, travel faster than words. When we interact with someone let us take care that along with the right action our thoughts are also right. If we have negative thoughts containing any type of impurity of hatred, greed, jealousy, resentment, selfishness, ego, etc. and we perform pure actions filled with the energy of virtues, neither will we be internally content nor will we be able to satisfy the other person. In all our relationships, it is the intention, the packets of thought energy or vibrations that we transmit, which matter more than the action. Giving significance to the inner intentions while coming into relationships is true transparency in relationships. Performing right actions packaged with thoughts which are coloured with negative emotions, will only transmit pain to the other on a subtle level, even though we did it for their happiness.

– Message –

The power of truth is such that you need never be concerned about proving it.

Expression: Truth is always revealed at the right moment and at the right place. You don’t need to be concerned about proving it. You need only to be concerned with being it and living it. Trying to prove truth reveals stubbornness.

Experience: When you find that someone is not believing what you say, ask yourself if you believe in it. if you do, then you need not be concerned of proving it to others. Where there is doubt in yourself you’ll want to prove it to everyone.

The Role Play Of Thoughts In Relationships – Part 2

Husband-wife relationships, sometimes, are like castles of sand, extremely pleasing to the eye, but based on weak foundations and susceptible to destruction when challenged by negative tides of clash of opinions, personalities or lifestyles. In such relationships, the castles look good from outside because of energies like acceptance, trust, understanding and letting go existing on the surface i.e. these energies are displayed by both partners to each other in the form of words, gestures and actions but these castles can easily collapse because the foundations of these castles i.e. thoughts and feelings carried by the partners in their minds are filled with expectations, rejection, mistrust, misunderstandings, possessiveness and suspicion at times along with the positive emotions which are displayed in actions. Also both partners feel they have made their respective positive contributions in the relationship and so the same is expected from the other side, which is not fulfilled at times, further increasing the problems in the relationship. At the same time both partners are oblivious (not aware) of the negative emotional, much more powerful forces that exist inside them, which go against the positive contribution and are silently working on the castle of the relationship from below, ready to bring it down anytime.

Another e.g. – in corporate circles, apart from the external objective of profit making and generation of revenue and jobs, an important internal objective of any good corporate organization is creating a peace, love and happiness filled as well as obstacle free atmosphere in the company, which will be conducive (helpful) to the external objective. One spiritual principle states that the leader or CEO or Managing Director of the organization is like a seed of the organization, whose every thought reaches out to and influences every person of the organization as well as the organization as a whole. A second spiritual principle states that the internal ruling and controlling power of a leader of an organization is directly proportional to the handling (of the people of the organization) power of the leader. If in the inner confines (boundaries) of the leader’s mind, obstacles of waste and negative thoughts exist i.e. the inner atmosphere of the leader’s mind is not full of peace, love and joy, then as per the first spiritual principle, this gets transmitted to the people under the leader and as per the second spiritual principle, such a leader who is lacking in mind ruling power and mind controlling power is automatically lacking in handling power of people under him. Such a leader, due to the application of both these principles, is ineffective in creating a positive environment in the organization.

– Message –

True humility comes when you are in your self-respect.

Expression: When you are full and in your self-respect, you will be able to remain humble in all situations. When there is no self-respect, any comments or criticism hurts your ego and you tend to lose your humility.

Experience: When you find yourself getting affected by criticism, check whether you are sure of what you are doing. Increase your own confidence in whatever you do and you’ll find yourself humble.

The Role Play Of Thoughts In Relationships – Part 3

Parent-child relationships are the foundation of our complete life. The earliest habits that children acquire in their lives are from their parents. Very often parents try and impose positive habits on their children. A very common trend that we see nowadays where parents will scold their child for common negative actions like getting angry, for lying to them, for watching inappropriate stuff on different mediums of technology like television and the internet or for getting involved in relationships with the opposite gender at a young age. Very commonly parents are not satisfied with the change brought about by children by following the rules that they have set for them, causing parent-child relationships to get strained. Why is it that inspite of children knowing that parents are concerned for them, do not pay heed to their instructions and continue with the negative habits? A more powerful medium than words, which reaches children on a physical level, is the personality radiation of the parents which works on children and reaches them faster than and much before the words do. Parents dictate the change but don’t be the change i.e. similar habits of lust, anger, ego, greed, etc. exist inside them which keep travelling to the children on a subtle energy level and impacting (influencing) their minds negatively much sooner than positive words in the form of instructions, leaving the words as good as ineffective.

Also considering another common relationship that children have, the one with their school teachers; many investigations confirm that teachers’ expectations, whether negative or positive, form one of the most influential factors in the academic performance of their students. If teachers expect good results from their students and have complete faith and confidence that they will succeed, their performance will be much closer to their real capacity than if they are expecting poor results. Very often in schools, the teachers’ words regarding the performance of the children are not a direct reflection of their thoughts i.e. words are full of faith and hope in the students’ success but thoughts are lacking in optimism with regards to the same.Negative thoughts of fear of probable failure of the children, in the minds of teachers, inspite of positive words of encouragement, negatively impact impressionable minds of children leading to their poor show in school exams.

– Message –

Your humility makes you a learner in every situation

Contemplation: Where there is humility there is willingness to learn. When humility is lacking, ego comes which doesn’t let you learn from all situations and people. The power of humility enables you to learn and move forward.

Application: When you face any criticism from someone, see what you can learn from it, instead of feeling bad about it. Even things that go wrong have something to teach, for the ones who are willing to learn. With your humility continue to learn.

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

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Reversing The Flow Of Love In Relationships

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Reversing The Flow Of Love In Relationships

If we ask someone who do they think has caused them the most sorrow in life, most will point out to someone they love or had loved a lot. Why is it so? It happens like that because we believe that the energy of love will come from the outside and will fill us inside. The energy of love from the other will fulfill our inner desire for the experience of love. Due to our own need, we attach ourselves and hold on to a particular person whom we love a lot, believing that they will fill us with the love that they possess inside them, which will make us stronger, fuller and more content. So we start depending on the other person for this need. When he/she is not able to fill us, which happens many times, we experience sorrow. Love is an energy, which exists inside us. It always goes from the inside out and reaches out to the other and brings benefit to the other. It does not come from the outside in.

If we try and reverse the flow of love i.e. we make the energy of love come from outside in, we start depending on the outside for love, which results in the vacuuming effect. When you vacuum to clean your living room, you absorb the good and the bad. If you have dropped something very small, but valuable and of utmost importance to you, on your carpet, the vacuum cleaner absorbs it or takes it away, together with the dust, which is negative and of no value to you and which you do not want inside your home. When you live with the vacuuming effect on an emotional level, you absorb the love, care, concern, virtues, powers, specialties, energy, etc. of the person you love but you also end up absorbing their weaknesses, their worries, their fears, etc. That way, a dependency is generated that is counter-productive and causes emotional pain. That does not mean we become cold and stop accepting love from others, but we are no longer dependent on it for our inner well-being and happiness. Also, on the other hand, we keep radiating or giving love. When we give love, we experience it ourselves first and that’s what we want – an experience of love, isn’t it?

– Message –

When you are truthful, you are loved and trusted by all.

Expression: When you are truthful your words and actions will become equal. You will do what you say and say what you do. Because of this you will continue to receive love and regard from everyone.

Experience: Just take up one thing that you have not been able to fulfill and today take up this thought that you will do it. Tell yourself that you have the power of truth within which makes your words and actions equal.

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

Swami Vivekananda-kmsraj51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

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Experiencing Spiritual Growth Through Group Interactions

Kmsraj51 की कलम से…..

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Experiencing Spiritual Growth Through Group Interactions – Part 1

Anyone who is inclined towards growing spiritually will sooner or later feel the need to taking up a particular spiritual path, which provides him/her with an assigned code of leading a spiritual life and helps him/her to incorporate it in his/her life. This also means becoming a part of a spiritual group or gathering or community and participating in spiritual study, practice like meditation or prayer and perform service along with the group. But, on the other hand, there are also many spiritually motivated people who are not very interested in groups and communities and keep a distance from them. They are of the opinion that it is easier to work it out alone by collecting information from other alternate sources by books, the internet, the television, videos, etc. and progress spiritually. But the relationship between spiritual growth and being a part of or participating in a group is clear.

For the isolated and solitary person, growth is limited, since the personality is not activated to the same extent as when it interacts with others. In relationships and in living together, the various forms of hidden ego and the different shades of the personality, positive as well as negative, are stimulated, creating the possibility of being more aware and conscious about them, bringing about greater growth and spiritual development. After all, one of the main objectives of spiritual development is achieving victory over the ego and becoming soul conscious, getting rid of the negative shades of the personality and further enhancing the positive traits and skills, so that they can be used for benefiting the self and others.

– Message –

The one who loves is the one who gives.

Expression: True love is free from expectations. When you discover the love within you, you can continue to give. Whether the other person gives or not, true love enables you to give unselfishly.

Experience: Let today be for discovering and giving others the love within you. Make sure you do at least one act that shows your love towards anyone around you. Feel the love flowing from within to the ones around you.

Experiencing Spiritual Growth Through Group Interactions – Part 2

Also, the beauty of group interactions or being a part of a spiritual community or any other group, is that in groups, various powers like the power to:

* adapt and mould oneself with people of different personality traits and as different situations in the group demand;
* tolerate;
* face negative situations in interactions;
* forgive and forget;
* become a detached observer of situations and people’s actions, not to get over involved, in order to maintain one’s stability and calmness;
* co-operate;
* communicate;
* see and absorb only specialties of each one (inspite of obvious weaknesses being visible) and spreading the specialties (not weaknesses) to the others in the group, by way of praising and not criticizing them;
* listen, understand and empathize;
* discriminate and judge different situations and people;
* go into inner silence, whenever required, amidst the actions and interactions of group activity;
* show respect to each one and remain in self-respect;
* remain content or satisfied and make the others content; etc.

are absolutely necessary to experience success in the groups, either within the relationships with others or even with the self. There is a difference between experiencing success with the self while staying alone and within a group. By bringing the above powers into practice in a group, they increase further inside us. This does not happen in isolation, or if it does, then the extent is quite limited. So basically, being a part of a group, brings about greater spiritual growth and empowerment.

– Message –

Where there is love, the hardest task becomes easy to perform.

Expression: If something is difficult, it means there is no love. Where there is love, even a task as difficult and big as a mountain becomes as easy and light as cotton. Love makes work easier and lighter.

Experience: Today is the day to love your work. Whatever you are doing, remember that you love your work. Experiment with one thing that you have been finding it difficult to do with a reminder to yourself that you love it.

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Ruling The Kingdom Of The Mind – Part 3

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Ruling The Kingdom Of The Mind – Part – 3

Rulers have ruled over different territories all across the globe since thousands of years. There was a time when rulers headed the complete world, a time when there was no trace of sorrow or hatred or injustice or disharmony in their kingdom. We know these rulers as devis and devtas or also gods and goddesses today. What was the secret of their success? They possessed, apart from the skills to rule, all the powers to succeed.So what is the secret of success for the spiritual king, which is me? I enhance my spiritual powers and make them a part of my personality trait set. How? The examples of thought suggestions which we explained in yesterday’s message – their practice. Thought suggestions coloured with the seven primary virtues – peace, love, joy, purity, bliss, power and truth. We have explained four virtue types in yesterday’s message. Our readers could give a thought to the remaining three.

These virtue coloured thoughts, when repeatedly brought into my conscious canvas everyday, seep inside me and colour my sub-conscious canvas, which then fills me, the spiritual king’s personality, with those seven virtues. Virtues in turn cause the creation and increase of spiritual powers inside me which in turn makes me mighty or strong, a king with the eight primary spiritual powers – the power to withdraw, the power to pack up, the power to tolerate, the power to accommodate, the power to face, the power to discriminate, the power to judge and the power to co-operate. Such a power-filled king is then obeyed by his ministers – the thoughts, feelings and emotions and his people – the attitudes, expressions, words and actions and all of them learn to respond to the outsiders i.e. external situations, in tune with their king’s personality i.e. in tune with the seven primary virtues and the eight primary powers. As the king, so his ministers. As the ministers, so his people – resulting in a harmony, love and joy filled atmosphere in the complete kingdom. Such an order filled kingdom is a kingdom of high self esteem, and is respected by other spiritual kings it associates with everyday because the kings who come in close connection with such a kingdom experience these virtues and powers from the kingdom and its people i.e. my complete self.

– Message –

Be seated on the seat of an observer and you’ll be able to enjoy the games of the situations that come your way.

Expression: When something goes wrong, check if you are able to discriminate and take the right decisions. The more you are caught up in the situation, the more difficult it gets to take the right decision.

Experience: Each day practice looking at and appreciating the variety that life brings. Remind yourself that life would not be so interesting without this variety. Practice looking at all the situations in this way and you’ll find yourself stable.

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

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Ruling The Kingdom Of The Mind

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Ruling The Kingdom Of The Mind – Part – 1

Have you ever looked inside the inner kingdom of your mind where your thoughts, feelings and emotions are your ministers? Is it a kingdom of law or anarchy (lawlessness)? Do you ever wonder – “Ah, I wish there would be more order and less chaos in my kingdom!” So what stops you from creating a kingdom of law and order? Is it external situations or is it your internal reactions to these situations? Just for one day, perform this little exercise, check that out of the tens of thousands of thoughts and feelings you create in a day, how many are your own creation and how many are responses to external events. If they are your own positive creation or if they are responses to events, but correct ones, then be proud that your ministers are obeying you. Do you realize that the time when these thoughts and feelings are the wrong type of reactions on your part and not your original correct creations, is the time when these ministers are wicked and disobeying you.

A kingdom where the ministers disobey the king (that is you) repeatedly, is a kingdom, the atmosphere of which is lacking in harmony, love and joy, which in our case is our mind. It is a kingdom which is not respected by its people, who work under the ministers of thoughts and feelings, the people being your attitudes, expressions, words and actions, who further disintegrate and go their incorrect way following the orders of their seniors – the thoughts, feelings and emotions. It is a kingdom where the king has to bow down in front ofthe outsiders, the neighbours, which in this case is the external situations and other spiritual kings like me, involved in these situations. Also, it is a kingdom which is lacking in stability and susceptible (vulnerable) to attacks by the neighbours repeatedly.

– Message –

You can transform yourself when you have true realisation within your heart.

Expression: When you have a problem in your relationship with someone, ask yourself if you are realising your own mistake in it. Also check if you really understand why the other person is behaving in the way he does. When you understand this you can change yourself instead of expecting the other one to change.

Experience: Each day, remind yourself that you are confident and sure of yourself and whatever the problems may be, they are just like exam papers, which come to test you. When you do this you will have no complaint but can easily transform yourself and move ahead.

Ruling The Kingdom Of The Mind – Part – 2

“Am I a weak king or a mighty (strong) one?” This is a question that each one of us needs to ask ourselves at the end of each day. Every night, call upon your ministers – the thoughts, feelings and emotions in your kingdom court and have a heart-to-heart conversation with them regarding the kingdom and its people, which are your attitudes, expressions, words and actions. A court is also held to check the daily report of the behavior of the ministers. As the ministers of a kingdom, so its people (as mentioned above). To keep the kingdom in order, an able (talented) king will train the ministers and its people to react correctly to topsy-turvy situations which the kingdom is exposed to every day, which causes instability in the kingdom. This ability is the power of the king in action.

To train the ministers to respond correctly, a powerful king will, at the start of the day and at regular intervals in the day, give thoughts of power to the mind such as – I am an ocean of success or I possess the all powerful driving force of motivation or I can destroy obstacles that try to obstruct my path coupled with thoughts of peace such as – I shall not react angrily, but maintain my calm or I shall not look at others’ actions but keep my focus on my stable stage or I shall keep a relationship of outer detachment to external situations as well as inner detachment to internal pressures coupled with thoughts of love such as – I am an overflowing source of good wishes or I will be forgetful of others’ mistakes or I shall absorb others’ virtues and fill others with virtues coupled with thoughts of joy such as I will remain light and give others the same experience or I shall spread the wings of enthusiasm and fly high or I shall gift a smile and a greeting to everyone. These types of thought suggestions will in turn positively influence the feelings and emotions, the ministers of my kingdom and my attitudes, expressions, words and actions, the people of my kingdom. How? We shall explain that in tomorrow’s message.

– Message –

You will be constantly successful when you have faith and intoxication.

Expression: At the end of each day check if you are finding yourself enjoying everything that you are doing throughout the day. Check if you are having the intoxication of being successful in spite of the seeming failures.

Experience: Each day start the day with the practice of being the successful one. Also continue to maintain this intoxication throughout the day. Then you’ll find that you are happy with yourself and others will find you successful too.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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The Filtration Process In The Soul

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The Filtration Process In The Soul

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The mind and its creation i.e. thoughts, in these times, in most people, are controlled by three main factors:

i. their habits or sanskaras
ii. their past experiences, and
iii. information which they are exposed to and which they imbibe.

The intellect is like a filter which has the function of discriminating, of judging the thoughts and deciding which ones to put into practice and which ones not to, basically filtering them.
Presently the filter of the intellect has become weakened, confused and unsure; it has become blocked by many incorrect beliefs, due to which this filtration does not take place properly – as a result many wrong thoughts get converted into actions. A lot of times during the day, thoughts become actions so fast, that the filter of the intellect does not even come into play i.e. thoughts become actions bypassing the filter.

The beliefs that we have today are related to our cultural, physical, social, religious, political identity associated with our age, gender, occupation, wealth, role etc. of our body. Beliefs connected to materialism, to having rather than being, are living based on the perception of the sense organs, and not on the intuition and the wisdom of the spirit. There are beliefs that block you, or brake you, others break you, they bring about fears in you and a limited perception of reality and of yourself. However much you try to generate positive thoughts, if you do not change these beliefs, their influence on the intellect will be so strong that it is almost impossible to maintain a positive state of mind. Even if you experience it, it will be short-lived and temporary.

– Message –

By removing the curtain of negative thoughts from your mind you can see the best that is hidden behind in every scene.

Expression: Throughout the day when thing s go wrong, check if you are able to remain unaffected. Also check how far you are able to see beyond each situation and see the positive aspect that is hidden within.

Experience: Each day take the thought that whatever happens is for the best. Even when things go wrong make the practice of seeing the good aspect in the situation and if you are unable to do so, remain with the faith that everything happens for the best.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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