सर्वश्रेष्ठ प्रेरणादायक उद्धरण।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ सर्वश्रेष्ठ प्रेरणादायक उद्धरण। ϒ

  • भगवान श्री कृष्ण, अर्जुन के ही सारथि नही थे वे तो पूरे विश्व के सारथि हैं, फिर डर किसका।
  • वर्तमान की आवश्यकता भविष्य की निधि हैं।
  • किसी भी कार्य के पर्याय बन जाओ प्रसिद्धि अवश्य मिल जाएगी।
  • अपने सुख को दूसरों के दुखों में बाँट दो।
  • जीवन में लक्ष्य ज़रूर निर्धारित करो लक्ष्य मिलने पर आकार बड़ा कर दो।
  • झूठ सच पर अधिकार कर रहा हैं।
  • शरीर में जीतने छेद हैं सबसे गंदगी ही निकलती हैं इसमे मुँह का क्या दोष?
  • प्रलोभन व्यक्ति को विचलित करता हैं।
  • जोखिम उठाने वालो के लिये असफलता एक उपहार हैं।
  • फल की इच्छा रखने वाले फूल नहीं तोड़ा करते।
  • वर्तमान की दिशा भविष्य की दशा तय करती हैं।
  • तुम्हारे प्रयास फल की तरह खट्टे या मीठे को सकते हैं पर सफलता मीठी ही होती हैं।
  • निर्णय हमेशा प्रभावित करते हैं।
  • शब्द दुख और सुख में अक्षर ख को देखो हमेशा एकसा दिखता हैं फिर हम क्यों नही?
  • आलोचना मुझें प्रेरित करती हैं कुछ और अच्छा करने की।

© पीयूष गोयल गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश ®

Piyush Goel

    पीयूष गोयल।

हम दिल से आभारी हैं ‘पीयूष गोयल जी” के प्रेरणादायक हिन्दी Quotes साझा करने के लिए।

‘पीयूष गोयल जी” के लिए मेरे विचार: 

“पीयूष गोयल जी” के Quotes के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। Quotes छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन Quotes काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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Head Editor, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

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KMSRAJ51 के अनमाेल वचन।

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT

ϒ KMSRAJ51 के अनमाेल वचन। ϒ

अशांत मन उचित निर्णय लेने की क्षमता काे खत्म(खाे) कर देता हैं।

 ~Kmsraj51

 सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

~Kmsraj51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।” -Kmsraj51

⇒ स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

 ~Kmsraj51

⇒ जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं।

~Kmsraj51

⇒ जीने के अंदाज काे बदलने आये हम,

काैन कहता खुशियाँ थाेडी़ हैं, ज्यादा है गम…..

⇒ एक पिता परमात्मा(Supreme Soul) से अपने सर्व संबंध बनाये।

 ध्यान(Meditation) माना आत्मा द्वारा परमात्मा(ईश्वर) काे याद किया जाना।

 ~Kmsraj51

⇒ समय न गवाये वरना पछताने के अलावा कुछ न बचेगा जीवन में।

 ~Kmsraj51

आप अपने अतीत काे नही बदल सकते, लेकिन अपने वर्तमान और भविष्य काे बदलना आपके अपने हाथ में हैं। इसलिए जाे बीत गया उसे याद कर, अपने वर्तमान और भविष्य काे समाप्त ना करें। 

 ~Kmsraj51

⇒ आज के समय में 97% मनुष्य यही साेचते है, कि मेरे किस्मत में जाे हाेगा वही मिलेगा और ऐसा साेचकर वह बैठ जाते हैं। आचार्य चाणक्य जी ने कितनी अच्छी बात कही हैं। “क्या पता किस्मत में ही लिखा हाे की काेशिश करने से ही मिलेगा। “

 ~Kmsraj51

⇒ हमेशा अपनी सोच काे अन्य लोगों(दुसराें) से अलग रखाें तभी आपकी अपनी कुछ अलग पहचान बन पायेगी।

 ~Kmsraj51

⇒ आप रहाे या ना रहाे, लेकिन ऐसा कर्म कराें जीवनभर की आपके कर्म सदैव आपकाे जिवित रखें।

~Kmsraj51

⇒ जीवन में एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात दाग पर दाग लगाना इसलिए बीती को बिन्दी लगाओ, और आगे बढ़ाे।

 ~Kmsraj51

⇒ किस्मत, नसीब़ और लक के भराेसे रहने पर किसी काे सफलता नहीं मिलती, सफलता ताे सच्चे मन से निरन्तर कार्य करने से ही मिलती हैं।

 ~Kmsraj51

⇒ केवल एक ही बुरा कर्म, किसी भी मनुष्य का शानाें, शाैंकत और इज़्ज़त यू मिनटाें में मिट्टी में मिला देता हैं। जैसे रेत से बना घर त्त्वरित गिर जाता हैं।

 ~Kmsraj51

मनु स्मृति के अनुसार इन ५ को कभी अतिथि नहीं बनाना चाहिए, न ही करें नमस्ते।

श्लोक ≈»

पाषण्डिनो विकर्मस्थान्बैडालव्रतिकांछठान्।
हैतुकान्वकवृत्तींश्च वाड्मात्रेणापि नार्चयेत्।।

अर्थात्- 1. पाखंडी, 2. दुष्ट कर्म करने वाला, 3. दूसरों को मूर्ख बनाकर उनका धन लूटने वाला, 4. दूसरों को दुख पहुंचाने वाला व 5. वेदों में श्रद्धा न रखने वाला। इन 5 लोगों को अतिथि नहीं बनाना चाहिए और इनका शिष्टाचार पूर्वक स्वागत भी नहीं करना चाहिए।

 ~Kmsraj51

⇒ बुरी बातें ना खुद सुनो, ना किसी काे सुनाओं।

 ~Kmsraj51

⇒ सच्चा ब्राह्मण वह है जो पूर्ण शुद्धि और विधि पूर्वक हर कार्य करे।

~Kmsraj51

⇒ नाजुक परिस्थितियों के पेपर में पास होना है तो अपनी नेचर को शक्तिशाली बनाओ।

 ~Kmsraj51

 ज्ञान और ध्यान का हाेना जरूरी हैं जीवन में। बिना ज्ञान और ध्यान के दिमाग शांत नहीं हाे सकता, साे जीवन में, ज्ञान और ध्यान का हाेना बहुत जरूरी हैं।

~Kmsraj51

⇒ “आत्मविश्वास किसी भी इंसान के लिए सर्वश्रेष्ठ आत्मिक शक्ति है। अगर वह स्वयं पर विश्वास रखकर कोई कर्म करता है तो कोई भी मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती”।

~Kmsraj51

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

~KMSRAJ51 

⇒ रीयल डायमण्ड बनकर अपने वायब्रेशन की चमक विश्व में फैलाओ।

~Kmsraj51

⇒ चोट लगाने वाले का काम है चोट लगाना और आपका काम है अपने को बचा लेना।

~Kmsraj51

⇒ ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता, इंसान(जीवआत्मा) आैर इंसान के कर्म बुरे हाेते हैं।

~Kmsraj51

⇒ संकल्पों को बचाओ तो समय, बोल सब स्वत: बच जायेंगे।

~Kmsraj51

⇒ समय की कद्र करो, अवसर का लाभ उठाओ और शब्दों को सोच समझ कर खर्च करो।

~Kmsraj51

⇒ दृढ़ता कड़े संस्कारों को भी मोम की तरह पिघला (खत्म कर) देती है।

~Kmsraj51

⇒ त्रिकालदर्शी बनकर हर कर्म करो तो सफलता सहज मिलती रहेगी।

~Kmsraj51

⇒ मनुष्य का सारा कैरेक्टर विकारों ने बिगाड़ा है।

~Kmsraj51

 आत्मा रूपी पुरूष को श्रेष्ठ बनाने वाले ही सच्चे पुरूषार्थी हैं।

~Kmsraj51

⇒ सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो आत्म-अभिमानी रहते हैं।

~Kmsraj51

जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

~KMSRAJ51

» » » » » » »

In-English…..

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

In-Hindi…..

पवित्रता सच शांति और खुशी का धार है.

यह पके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

~KMSRAJ51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaen solar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

 ~KMSRAJ51(“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।

 ~KMSRAJ51

जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें।

और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें।

 ~KMSRAJ51

अगर आपको लगता है, आप ऐसा कर सकते हैं, आप सही हैं।

तैयारी इतनी खामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे |

 ~KMSRAJ51

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर।

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

 ~KMSRAJ51

प्रश्न :- दोस्त क्या है?\मित्र क्या है?

उत्तर :- “एक आत्मा जाे दाे शरीराें में निवास करती है”

 समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।

 ~KMSRAJ51

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Quotes Source:- “तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से।

CYMT-KMSRAJ51

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

 

 

आगे बढ़ाे मगर-सोच समझ कर।

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT

काेई व्यक्ति चाहे कितना भी महान क्यों ना हाे। 

आँख मूँद कर उसके पीछे नही चलना चाहिये।

यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा हाेती ताे वह हर प्राणी काे, 

आँख, नाक, कान, मस्तिष्क और मुंह क्यों देता।

ईश्वर ने जाे हर किसी काे दिया है ताे उसका उपयाेग करना चाहिये।

साेच समझ कर सब, काम करने चाहिये।

 ~विमल गांधी जी ∇

संतुलित दिमाग़ जैसी काेई सादगी नही।
संताेष जैसा काेई सुख नही॥
लाेभ जैसी काेई बीमारी नही।
और दया जैसा काेई पुण्य नही॥

 ~विमल गांधी जी ∇

Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी Quotes साझा करने के लिए।

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 ~KMSRAJ51

 

 

असीमित ऊर्जा आत्मिक-प्रेम में।

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT

∇ असीमित ऊर्जा आत्मिक-प्रेम में।Θ

दोस्तों,

आत्मिक-प्रेम में वह शक्ति निहित है, जिससे शत्रु भी मित्र बन जाते हैं। प्रेम ताे वैसे ढाई आखर(ढाई अक्षर) का ही हाेता हैं। लेकिन इस ढाई आखर(ढाई अक्षर) में इतनी असीमित शक्ति निहित हैं, जिससे असंभव काे भी सरलता पूर्वक संभव में परिवर्तित किया जा सके।

“प्रेम” आत्मा(Soul) के ७ माैलिक गुणाें में से एक हैं। “प्रेम” माना आत्मा और परमात्मा(ईश्वर) के बीच संबंध।

आत्मा(Soul) के ७ माैलिक गुण यह हैं…..

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand),

काेई भी मनुष्य आपके साथ कितना भी बुरा बर्ताव करें फिर भी आप “प्रेम” कि शक्ति काे ना छाेडे़, आपकी कोशिश यही हाे कि आप उसके साथ भी प्रेमपूर्ण व्यवहार हि करें। एक ना एक दिन आपका शत्रु, आपके चरणाें में हाेगा।

आत्मिक-प्रेम हमे मनुष्याें से सच्चा स्नेह करना सीखाती हैं। आत्मिक-प्रेम से मनुष्य कें अंदर शहनशीलता, दया और करुणा स्वतः ही आ जाती हैं।

आज के समय में मनुष्याें के पास पैसा(Money) ताे बहुत है, लेकिन वर्तमान समय में मनुष्याें के पास ना ताे सच्ची शांति हैं, ना हि सच्चा सुख हैं। ऐसा इसलिए क्योंकी मनुष्याें के अंदर आत्मिक-प्रेम नहीं हैं।

जब तक मनुष्याें का मनुष्याें से आत्मिक-प्रेम नहीं हाेगा तब तक सच्चा सुख और सच्ची शांति ना मिलेगी।

दोस्तों,

सभी मनुष्याें काे यह समझना हाेगा कि…..

सभी मनुष्याें काे सभी मनुष्याें से आत्मिक-प्रेम के साथ स्नेह भरा व्यवहार करना हाेगा तभी सच्चा सुख और सच्ची शांति मिलेगी।

ओम शांति!!

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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जीवन में दुःखाे से निराश हाेकर बैठ ना जाना तुम।

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© जीवन में दुःखाे से निराश हाेकर बैठ ना जाना तुम। ®

बाज लगभग ७० वर्ष जीता है …..

परन्तु अपने जीवन के,
४० वें वर्ष में आते-आते उसे…..
एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है।

उस अवस्था में उसके शरीर के,
3 प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं।

पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है,
व शिकार पर पकड़ बनाने में,
असक्षम होने लगते हैं।

चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है,
और भोजन निगलने में,
व्यवधान उत्पन्न करने लगती है।

पंख भारी हो जाते हैं….
और सीने से चिपकने के कारण,
पूरे खुल नहीं पाते हैं।
उड़ानें सीमित कर देते हैं।

भोजन ढूँढ़ना, भोजन पकड़ना,
और भोजन खाना … तीनों प्रक्रियायें,
अपनी धार खोने लगती हैं।

उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं…..
या तो देह त्याग दे,
या अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह,
त्यक्त(छुटा हुआ) भोजन पर निर्वाह करे।

या फिर “स्वयं को पुनर्स्थापित करे”।
आकाश के निर्द्वन्द्व एकाधिपति के रूप में.

जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं,
वहीं तीसरा अत्यन्त पीड़ादायी और लम्बा।

बाज पीड़ा चुनता है…..
और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है।

वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है, एकान्त में अपना घोंसला बनाता है…..
और तब प्रारम्भ करता है पूरी प्रक्रिया।

सबसे पहले वह अपनी चोंच,
चट्टान पर मार-मार कर तोड़ देता है,
अपनी चोंच तोड़ने से अधिक पीड़ादायक,
कुछ भी नहीं पक्षीराज के लिये।

तब वह प्रतीक्षा करता है,
चोंच के पुनः उग आने की।

उसके बाद वह,
अपने पंजे भी उसी प्रकार तोड़ देता है,
और प्रतीक्षा करता है…..
पंजों के पुनः उग आने की।

नये चोंच और पंजे आने के बाद,
वह अपने भारी पंखों को,
एक-एक कर नोंच कर निकालता है।
और प्रतीक्षा करता है…..
पंखों के पुनः उग आने की।

१५० दिन की पीड़ा और प्रतीक्षा…..
और तब उसे मिलती है,
वही भव्य और ऊँची उड़ान पहले जैसी नयी।

इस पुनर्स्थापना के बाद,
वह ३० साल और जीता है…..
ऊर्जा, सम्मान और गरिमा के साथ।

इच्छा, सक्रियता और कल्पना,
तीनों निर्बल पड़ने लगते हैं हममें भी।

हमें भी भूतकाल में जकड़े,
अस्तित्व के भारीपन को त्याग कर,
कल्पना की उन्मुक्त उड़ाने भरनी होंगी।

१५० दिन न सही …..
तो एक माह ही बिताया जाये,
स्वयं को पुनर्स्थापित करने में।

जो शरीर और मन से चिपका हुआ है,
उसे तोड़ने और…..
नोंचने में पीड़ा तो होगी ही।

बाज तब उड़ानें भरने को तैयार होंगे…..
इस बार उड़ानें और ऊँची होंगी,
अनुभवी होंगी, अनन्तगामी होंगी।

हर दिन कुछ चिंतन किया जाए,
और आप ही वो व्यक्ति हे,
जो खुद को दुसरो से बेहतर जानते है।

सिर्फ इतना निवेदन की निष्पक्षता के साथ,
छोटी-छोटी शुरुवात कर परिवर्तन करें।

© कृष्ण मोहन सिंह(KMS) ©

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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-KMSRAJ51

 

 

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Self Responsibility

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

Self ResponsibilityPart 1 

There are certain laws which are involved in our actions and interactions. They are not human laws requiring lawyers to interpret or the police to put into action. They are natural laws which are constantly operating in every relationship. They are often called the Laws of Karma (action): briefly described by the saying – As you sow, so you shall reap, described by Isaac Newton as the Third Law of Motion i.e. for every action, there is an equal and opposite reaction. The Laws of Karma remind us that whatever quality of energy we give out, we get back. This might not be exactly tit for tat, but if we give happiness to someone, it will come back to us; if we give pain or sorrow, it will come back, perhaps not today or tomorrow, but at some time in the future.

Most of us are conditioned by the idea that we are responsible for some of our actions, but not all of them. For example, we would consider ourselves responsible for the actions which improved our company’s business but would not consider ourselves responsible for not being on good terms with our spouse. If, as parents, we worked hard in educating our children and they grew up to become well placed and successful individuals in their lives, we would consider ourselves responsible. If on the other hand they don’t make it to the top and are not so successful, we will blame our children for not putting enough effort or maybe the education system for the same. So we are selective in taking responsibility for our actions.

Through spirituality, we are reminded of the unchangeable laws of cause and effect, which awakens our awareness of our true responsibility for each and every action that we perform.

© Message ©

Faith in one’s progress brings contentment.

Expression: Even when the situation is not according to what is expected, there is contentment for the one who has faith in his own progress. Such a person will not just sit back waiting for things to change nor will he just curse his fate. Instead he’ll do his best and use all his resources in bettering the situation.

Experience: The understanding that all life’s situations are a training for me, automatically keeps me content in all situations. There is naturally an experience of constant progress and a feeling of having gained something from all situations.

Self ResponsibilityPart 2 

Because we have forgotten the principle of karmic returns (discussed yesterday), we have learned to avoid taking responsibility for many of our actions. We fail to see the impact of our actions upon others and we fail to see that the real meaning of responsibility is responding correctly. Life can be seen as a series of responses which we each create in our interactions with other people and events. As is the quality of our ability to respond (energy given), so will be the quality of the return (energy received). The Laws of Karma also serve to remind us that the situations in our life, the quality of our body, wealth, relationships etc. and the type of person we are today are the result of what we thought and did yesterday, last month, last year, perhaps in our last birth. Many people do not like this idea or find it difficult to accept because most of us have been taught that our destiny lies in someone else’s hands or in the hands of fate or luck, about which we can do nothing. The Law of Karma or the Law of Reciprocity teaches us that there is no such thing as luck and that whatever happens to us today is the result of our positive or negative actions in the past. If you spend a few moments reflecting on events in your life, without being judgmental, you will begin to see connections between actions and results, causes and effects. When you see how all effects have their causes, you will then be convinced that this universal law is at work in your life at all times.

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The ones who are constantly happy are truly fortunate.

Expression: Whatever the kind of situations needed to be faced, whoever the people and the different kind of personalities they come into contact with, the ones who are fortunate constantly enjoy. They also continue to take benefit and bring benefit to others too. Their fortune lies in their ability to perceive the positive aspect in everything and take benefit accordingly.

Experience: When I am able to be happy under all circumstances, I am able to make the best use of whatever I have with me. I then find myself full of all resources. I don’t think of what I don’t have but I am aware of and make the best use of what I have. So I find myself to be always lucky. I constantly move forward.

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

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इन्सान की 30 गलतियां।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMY-KMSRAJ51-N

इन्सान की 30 गलतियां।

30 Human Errors

1. इस ख्याल में रहना कि जवानी और तन्दुरुस्ती हमेशा रहेगी।

2. खुद को दूसरों से बेहतर समझना।

3. अपनी अक्ल को सबसे बढ़कर समझना।

4. दुश्मन को कमजोर समझना।

5. बीमारी को मामुली समझकर शुरु में इलाज न करना।

6. अपनी राय को मानना और दूसरों के मशवरें को ठुकरा देना।

7. किसी के बारे में मालुम होना फिर भी उसकी चापलुसी में बार-बार आ जाना।

8. बेकारी में आवारा घुमना और रोज़गार की तलाश न करना।

9. अपना राज़ किसी दूसरे को बता कर उससे छुपाए रखने की ताकीद करना।

10. आमदनी से ज्यादा खर्च करना।

11. लोगों की तक़लिफों में शरीक न होना, और उनसे मदद की उम्मीद रखना।

12. एक दो मुलाक़ात में किसी के बारे में अच्छी राय कायम करना।

13. माँ-बाप की सेवा न करना और अपनी औलाद से सेवा की उम्मीद रखना।

14. किसी काम को ये सोचकर अधुरा छोड़ना कि फिर किसी दिन पुरा कर लिया जाएगा।

15. दुसरों के साथ बुरा करना और उनसे अच्छे की उम्मीद रखना।

16. आवारा लोगों के साथ उठना बैठना।

17. कोई अच्छी राय दे तो उस पर ध्यान न देना।

18. खुद हराम व हलाल का ख्याल न करना और दूसरों को भी इस राह पर लगाना।

19. झूठी कसम खाकर, झूठ बोलकर, धोखा देकर अपना माल बेचना, या व्यापार करना।

20. मुसिबतों में बेसब्र बन कर चीख़ पुकार करना।

21. भिक्षुकों, और गरीबों को अपने घर से धक्का देकर भगा देना।

22. ज़रुरत से ज्यादा बातचीत करना।

23. पड़ोसियों से अच्छा व्यवहार नहीं रखना।

24. बादशाहों और अमीरों की दोस्ती पर यकीन रखना।

25. बिना वज़ह किसी के घरेलू मामले में दखल देना।

26. बगैर सोचे समझे बात करना।

27. तीन दिन से ज्यादा किसी का मेहमान बनना।

28. अपने घर का भेद दूसरों से ज़ाहिर करना।

29. हर एक के सामने अपना दुख दर्द सुनाते रहना।

30. उपरोक्त लिखी जानकारी को नजर अंदाज करना।

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CYMT-100-10 WORDS KMS

निश्चय ही आप विजयी होंगे, यदि आप अपनी दुर्बलता (Weakness) को अपनी ताकत में तब्दील करना सीख लें।

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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