Q. A. W. – KMSRAJ51 – Ep.- 4th / 23-April-2017

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ Q. A. W. ~ KMSRAJ51 ϒ

ओम गंग गणपतये नमः 

श्री गणेश मंत्र ~

ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभं।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

रविवार, 23 अप्रैल – विश्व पुस्तक दिवस 2017

Sunday, 23 April – World Book Day 2017

मेरे प्यारे दोस्तों और पाठकों –
आज – विश्व पुस्तक दिवस है – “इस संसार में सिर्फ किताबें ही किसी भी इंसान के सच्चे मित्र(दोस्त) हैं, जाे सदैव ही निस्वार्थ भाव से सिर्फ लाभ ही पहुचाती है, बिना किसी भेदभाव के” ….. KMSRAJ51

Q. 1 .⇒  क्या करें, जब कोई हमारे सपनों (dreams) काे तोड़ता हैं ?
                                                                  या
            अपने Mind को कैसे Control करें, जब अपने ही हमारे सपनों (Dreams) को ताेड़ते हैं ?

  या      अपने सपनों (Dreams) के जुनून (आग) को कैसे बरकरार रखें ?
                                                                                                         -मनीषा अग्निहोत्री, गोवा

                                                                                                         -प्रियंका पांडे, हाथरस (उत्तर प्रदेश)

A. 1 .⇒ एक बात सदैव ही – याद रखें ….. 

“”ये समाज कभी न छोड़े आपको।”

“The society will never leave you.

यह बिल्कुल सत्य है कि हमारे सपनों (Dreams) को सबसे ज्यादा अपने ही ताेड़ते हैं ? जान-पहचान के लाेग व रिश्तेदार ताे ताेड़ते की कोशिश (प्रयत्न) करते ही है, लेकिन सबसे ज्यादा – हमारे अपने ही हमारे सपनों (Dreams) को ताेड़ते हैं ?

  • जब भी कभी आपके सपनों को तोड़ने वाली बातें कोई भी कहे आपसे उसे (उस बात काे) अपने Mind के अंदर प्रवेश
    न करने दे, अर्थात – सुनते हुए भी अनसुना कर दें।
  • अपने सपनों (Dreams) की आग को अपने अंदर सदैव ही जलाये रखें। इस आग को कभी भी बुझने न दें।
  • अपने सपनों (Dreams) काे प्राप्त करने के लिए संपूर्ण रूप से, सच्चे मन से आपकाे – तन, मन व धन, से लग जाने पर ही प्राप्त हाेगा, आपका अपना Dreams.
  • किसी के सपनों को तोड़ना महापाप है। अगर आप किसी को प्रोत्साहित नहीं कर सकते तो – कम से कम उनके सपनों को तो न तोड़े।
  • अगर आपको अपने व अपने कार्य के ऊपर संपूर्ण विश्वास हैं ताे – आपके सारे सपनें अवश्य पुरें हाेगें। बस लगातार सच्चे तन, मन व धन, से लगे रहें अपने कार्य काे करने में।

काैन कहता है – कि आपके सपनें सच नहीं हाे सकते।
सच्चे मन से अपने सपनों को पाने के लिए आगे ताे बढ़ाें॥

आगे रास्ते ख़ुद-ब-ख़ुद बनते चले जायेगे – अर्थांत प्रकृति भी आपकी मदद(Help) करने लगती है। प्रकृति आपकाे आपके लक्ष्य तक पहुंचाने में सदैव ही मदद करती हैं।

अपने अवचेतन मन व चेतन मन दाेनाे काे बहुत ही ज्यादा शांत रखने की कोशिश करें। जब आपका मन पूर्ण शांत हाेगा – तभी आपकी आंतरिक(अंदरूनी) ऊर्जा बाहर निकलेगी और आप अपने सपनों(Dreams) काे सरलता पूर्वक प्राप्त कर लेगें।

चाहे अपने हाे या काेई बाहर का व्यक्ति जब भी आपके सपनों काे ताेड़ने वाली बातें आपसे करें, उनकी बातों पर जरा भी ध्यान न दें। याद रखें कि – उनकी बातें सिर्फ कचरा हैं, कचरे को अपने Mind में प्रवेश न करने दें, नहीं ताे सब कचरा-कचरा हाे जायेगा।

“कभी मैदान न छोड़े” – समस्याएं जीवन का हिस्सा है। जब तक हमें इस धरती पर रहने का सौभाग्य मिला है, हमें उन बाधाओं और चुनौतियों के साथ लगातार जूझने की कीमत चुकाना हाेगा।

जो जिंदगी हमारे सामने पेश करती है। बहरहाल अगर हम सिर्फ लगन से काम करे तो हम जित सकते है। “कभी हार न माने!”

अक्सर लक्ष्य उससे अधिक करीब होता है जो अशक्त और लड़खड़ाते आदमी को नज़र आता है। अक्सर संघर्ष करने वाला व्यक्ति हार मान लेता है, जब वह विजेता का कप जित सकता था, और उसे यह बहुत देर बाद पता चलता है, कि वह सोने के ताज के कितने करीब था।

सफलता विफलता का ही उल्टा रूप है, शंका के बदलो की सुनहरी किनारी है और आप कभी नही बता सकते की आप कितने करीब है। जब यह दूर दिखती है तो यह पास भी हो सकती है।

इसलिए जब आपको सबसे ज्यादा चोट पहुंचे तो जूझते रहे, जब चीजे ख़राब दिख रही हो – तो कभी भी मैदान न छोड़े।

एक पुरानी कहावत है कि “विजेता कभी मैदान नही छोड़ते और मैदान छोड़ने वाले कभी नही जीतते।” महान बनने के लिए आपको लगनशील बनना होगा और अपने सपनों को साकार करने की राह में कभी हार नहीं मानना।

याद रखे – जब आप हारते है, तो जीवन ख़त्म नहीं होता। जीवन तब ख़त्म होता है, जब आप मैदान छोड़ देते हैं।

याद रखे – अगर आप किसी काम का सपना देख सकते है तो आप उसे कर सकते हैं। आपको एक बेहतरीन दिन मुबारक हों।

मैंने पाया है कि महानता की सच्ची परिभाषा हैं : जब साधारण लोग असाधारण काम करें, लगातार जुटे रहे और हार मानने से इंकार कर दें। लगन हर कमी और सीमा की भरपाई कर देती हैं, जो आम तौर पर लोगो को अपने सपनों का पीछा करने से रोकती हैं। लगन वो पूंजी है – कर्म का वह कदम हैं, जो आपके सपनों को हकीकत में बदलता हैं। संकल्प एक नजरिया है, परन्तु लगन एक कर्म हैं। “कभी हार न मानने का कर्म।”

Q. 2 .⇒  अपने संकीर्ण सोच को विस्तार कैसे दें ?  या
                                         अपनी छोटी सोच को हम कैसे बड़ी करें ?  या
अपनी सकारात्मक सोच को कर्म में कैसे बदले ?  या
                                       अपने बड़े सोच को कर्म में कैसे लागू करें ?

                                                 रवि रंजन शुक्ला, सूरत (गुजरात) भूमिका गांगुली, कोलकाता (पश्चिम बंगाल),
                                                     ♦ नवनीत गुप्ता, पटना (बिहार),  निकिता शर्मा, नोएडा (उत्तर प्रदेश)

A. 2 .⇒  इस

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

 

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भाई दूज के पावन पर्व की शुभकामनाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ भाई दूज के पावन पर्व की शुभकामनाएं। ϒ

KMSRAJ51.COM की तरफ से…..

bhai-dooj-kmsraj51

भाई दूज के पावन पर्व पर सभी भाई-बहनाें काे ढेर सारी शुभकामनाएं।

∇ ये त्यौहार काफी-कुछ रक्षाबंधन से मेल खाता है और इसमें राखी की तरह टीका का काफी महत्व है।

 नरकासुर का वध करने के बाद श्री कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने पहुंचे थे, सुभद्रा जी ने श्री कृष्ण जी का स्वागत मिठाई और तिलक लगाकर किया।

 उत्तर भारत में इसे भाई दूज, बंगाल में भाई फाेटा और गुजराती-मराठी समाज में भाऊबीज तथा नेपाल में भाई अीका के रूप में मनाया जाता हैं।

∇ हरियाणा व महाराष्ट्र में ऐसा रिवाज़ है कि जिन लड़कियों-महिलाओं के भाई नहीं हाेते, वाे इस राेज़ चंद्रमा की पूजा करती हैं।

∇ नेपाल में इस दिन बहनें यमराज से अपने भाई की लंबी उम्र मांगती है और “सात रंगाें से” टीका करती हैं।

कथाओं में लिखा है कि यमराज इतने व्यस्त रहते थे, कि कभी अपनी बहन यमुना के घर नहीं जा पाते थे। इस पर यमुना को बहुत दुःख होता था। कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीय को यमराज अचानक यमुना के घर पहुंचे, तो यमुना बहुत प्रसन्न हुईं और यमराज की खूब आवभगत की। यमराज ने प्रसन्न हो कर वर दिया कि आज के दिन बहन के घर भोजन करने वाले को यम का भय न होगा। इस परंपरा के माध्यम से हर भाई-बहन के बीच स्नेह बढे, इस प्रार्थना के साथ आप सबको भाई दूज या भातृ-द्वितीया की अनंत शुभकामनाएँ। साथ ही चित्रगुप्त पूजनोत्सव की मंगलकामना।

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते व प्यार का त्योहार, आप सभी को भैयादूज के अवसर पर ढेरों बधाईयाँ।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51 ϒ

51 LCQof KMSRAJ51

Δ मानव मस्तिष्क असीमित शक्तियों से भरा हैं, लेकिन ये शक्तियां सुषुप्त अवस्था में है, बस ज़रूरत है इन सुषुप्त शक्तियों काे जगाने की। {1}

Δ आत्मा कि मुख्यतः तीन शक्तिया है, प्रथम – मन, द्वितीय – बुद्धि(विवेक) और तृतीय संस्कार। मन सोचने का कार्य करती है, बुद्धि(विवेक) निर्णय(Judgment) करने का कार्य करती है तथा बुद्धि के निर्णय अनुसार मानव शरीर की कर्मइंद्रियाे द्वारा जाे कर्म हाेता है वही  संस्कार के रूप में आत्मा के अंदर रिकॉर्ड हाेता रहता हैं, और संस्कार अनुसार ही काेई भी आत्मा नया शरीर(पुनर्जन्म) लेती हैं। {2}

Δ “सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।” {3}

Δ मनुष्य सदैव मनुष्य के ही रूप में जन्म लेता हैं, हा बस फ़र्क इतना ही पड़ता है कि हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर – नारी शरीर के रूप में जन्म लेती है और नारी शरीर हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर के रूप में जन्म लेती है। यह परिवर्तन चक्र हर तीन जन्म पर हाेता रहता हैं। {4}

Δ “अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”। {5}

Δ “अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।” {6}

Δ जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।
स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥ {7}

Δ अगर कुछ बदलना है ताे सबसे पहले अपने सोच, कर्म व अपने आप काे बदलें। {8}

Δ काेई भी ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता – हा इंसान बुरे हाे सकते हैं। {9}

Δ सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता। {10}

Δ आत्मबल और मन को शक्तिशाली बनाने के लिए – आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और सकारात्मक विचार रूपी शक्ति का भोजन दो। {11}

Δ स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत। {12}

Δ जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। {13}

Δ हमेशा अच्छे कार्य के लिए समर्थन व सहयाेग करें। चाहे उस अच्छे कार्य की अगुआई आपके दुश्मन(Eनेम्य्) के द्वारा ही हाे रही हाे। {14}

Δ मूर्खाें कि एक खासियत हाेती हैं, ओ किसी एक बात काे लेकर लंबे समय तक बैठे रहते है, और मूर्खाें काे बात-बात पर बिना किसी मतलब के भी हंसी खुब आती हैं। {15}

Δ समय न गवाये वरना पछताने के अलावा कुछ न बचेगा जीवन में। {16}

Δ आप अपने अतीत काे नही बदल सकते, लेकिन अपने वर्तमान और भविष्य काे बदलना आपके अपने हाथ में हैं। इसलिए जाे बीत गया उसे याद कर, अपने वर्तमान और भविष्य काे समाप्त ना करें। {17}

Δ आज के समय में ९७% मनुष्य यही साेचते है, कि मेरे किस्मत में जाे हाेगा वही मिलेगा और ऐसा साेचकर वह बैठ जाते हैं। आचार्य चाणक्य जी ने कितनी अच्छी बात कही हैं। “क्या पता किस्मत में ही लिखा हाे की काेशिश करने से ही मिलेगा।” {18}

Δ हमेशा अपनी सोच काे अन्य लोगों(दुसराें) से अलग रखाें तभी आपकी अपनी कुछ अलग पहचान बन पायेगी। {19}

Δ आप रहाे या ना रहाे, लेकिन ऐसा कर्म कराें जीवनभर की आपके कर्म सदैव आपकाे जिवित रखें। {20}

Δ जीवन में एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात दाग पर दाग लगाना इसलिए बीती को बिन्दी लगाओ(Full Stop), और आगे बढ़ाे। {21}

Δ किस्मत, नसीब़ और लक के भराेसे रहने पर किसी काे सफलता नहीं मिलती, सफलता ताे सच्चे मन से निरन्तर कार्य करने से ही मिलती हैं। इसलिए जीवन में निरन्तर कार्य करते हुए आगे बढ़ते चलाे। {22}

Δ केवल एक ही बुरा कर्म, किसी भी मनुष्य का शानाें, शाैंकत और इज़्ज़त यू मिनटाें में मिट्टी में मिला देता हैं। जैसे रेत से बना घर त्त्वरित गिर जाता हैं। {23}

Δ बुरी बातें ना खुद सुनो, ना ही किसी काे सुनाओं। {24}

Δ सच्चा ब्राह्मण वह है जो पूर्ण शुद्धि और विधि पूर्वक हर कार्य करे। {25}

Δ ज्ञान और ध्यान का हाेना जरूरी हैं जीवन में। बिना ज्ञान और ध्यान के दिमाग शांत नहीं हाे सकता, साे जीवन में, ज्ञान और ध्यान का हाेना बहुत जरूरी हैं। {26}

Δ “आत्मविश्वास किसी भी इंसान के लिए सर्वश्रेष्ठ आत्मिक शक्ति है। अगर वह स्वयं पर विश्वास रखकर कोई कर्म करता है तो कोई भी मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती”। {27}

Δ चोट लगाने वाले का काम है चोट लगाना और आपका काम है अपने को सदैव बचा लेना। {28}

Δ ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता, इंसान(जीवआत्मा) आैर इंसान के कर्म बुरे हाे सकते हैं। {29}

Δ किसी भी मनुष्य का परम धर्म है, सात्त्विक आहार, सात्त्विक विचार और सात्त्विक जीवन। जिससे निराेगी काया(तन-Body), दिघा॔यु जीवन और स्वस्थ मन काे प्राप्त हाे। {30}

Δ “अगर अपनी अलग पहचान बनानी है तो कुछ अलग कीजिए। जब तक दूसरों से डिफरेंट और अच्छा नहीं करेंगे, तब तक आगे बढ़ना मुश्किल है। अलग करने से रिस्क तो होता है पर कंपीटिशन भी तो कम ही रहता है।” {31}

Δ मन को प्रभू की अमानत समझकर उसे सदा श्रेष्ठ कार्य में लगाओ। {32}

Δ सदैव याद रखें जीवन का सबसे बड़ा शान है सदा खुश रहना और खुशी बांटना-यही सबसे बड़ा शान है। {33}

Δ संकल्पों की शक्ति-संकल्पों को बचाओ तो समय, बोल सब स्वत: ही बच जायेंगे। {34}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना चाहते हैं ताे अवसर का लाभ उठाओ, समय की कद्र करो, और शब्दों को सोच समझ कर खर्च करो। {35}

Δ आत्मा रूपी पुरूष को श्रेष्ठ बनाने वाले ही सच्चे पुरूषार्थी हैं। सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो सदैव आत्म-अभिमानी रहते हैं। {36}

Δ जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।
उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥ {37}

Δ सदैव याद रखें किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है। जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता। {38}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे। {39}

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

Δ जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है। {40}

Δ जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें, और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें। {41}

Δ याद रखें प्रत्यक्ष प्रमाण वह है जिसका हर कर्म सर्व को प्रेरणा देने वाला हाे। {42}

Δ पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है।
यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है।
यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है॥ {43}

Δ मास्टर(मालिक) का अर्थ है कि जिस शक्ति का जिस समय आह्वान करो वो शक्ति उसी समय प्रैक्टिकल स्वरूप में अनुभव हो। आर्डर किया और हाजिर। ऐसे नहीं कि आर्डर करो सहनशक्ति को और आये सामना करने की शक्ति, तो उसको मास्टर नहीं कहेंगे। तो ट्रायल करो कि जिस समय जो शक्ति आवश्यक है उस समय वही शक्ति कार्य में आती है? एक सेकण्ड का भी फर्क पड़ा तो जीत के बजाए हार हो जायेगी। {44}

Δ काेई भी इंसान जितना अध्ययन करता हैं, उतना ही उसे अपने अज्ञान का आभास होता जाता है। {45}

Δ सदैव याद रखें जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते” या “तुम्हारे बस की बात नहीं”। {46}

Δ मनुष्य के विचार बहते हुए पानी की तरह है, यदि हम उसमें गदंगी मिलाएँगे ताे वह नाला बन जाएगा आैर यदि ज्ञान व ध्यान रूपी सुगंध मिला देंगे ताे वही पवित्र बन जाएगा। {47}

Δ हम अपने असली स्वरूप काे भुल गये है, जिस कारण हमे अपने निजी गुण और संस्कार भी याद नही हैं। यह भुल ही सभी दुःखाे का कारण हैं।आत्मा की तीन मुख्य शक्तिया हाेती हैं। {48}

“प्रथम-मन, द्वितीय-बुद्धि और तृतीय-संस्कार।”

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,
१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥ {49}

Δ मन कि शक्ति काे सही समय पर उपयोग करें।

मन में वह असिमित शक्ति भरी हैं, जिसका सही उपयोग कर, हर असंभव कार्य काे सरलता पूर्वक संभव में बदला जा सकता हैं। मन कि शक्तियाे काे सही समय पर और सही दिशा में उपयोग करना सीखें। {50}

Δ आत्मा के सात माैलिक गुण हाेते हैं।

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand), {51}

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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आपके प्रश्न और मेरे उत्तर।

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT

ϒ आपके प्रश्न और मेरे उत्तर। ϒ

प्रिय मित्रों,
किसी ने मुझसे पूछा “कृष्ण मोहन सिंह जी” आप लगभग ऑलराउंडर ज्ञान के धनी हैं? लेकिन एक बात समझ में नहीं आती कि आप अपने दिमाग में इतना सारा ज्ञान कैसे रख पाते हैं?

मैंने यह भी सुना हैं आप नियमित और संयमित जीवन व्यतीत करते है, आप एक सच्चे राजयाेगी हैं?

प्रिय मित्रों,
मेरे उत्तर ….. कुछ इस तरह…..
≈> मेरा मानना है, हर एक मनुष्य काे वर्तमान समय में लगभग हर एक क्षेत्र के ज्ञान से वाकिफ हाेना चाहिए, जिससे जीवन में आने वाली हरेक समस्याओं का सरलता पूर्वक सामना कर सके।

≈> दिमाग “या” मन आत्मा कि ही एक शक्ति हैं। हरेक आत्मा के अंदर असीमित शक्तियाें का भंडार है, जिस किसी ने भी इन शक्तियाें(आंतरिक आत्मा की शक्तियाें) काे जगाकर, इन शक्तियाें का समयानुसार उचित प्रयोग करना सीख लिया, उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं, इस दुनिया में।

≈> जहाँ तक मेरा मानना है कि वर्तमान समय में हरेक मनुष्य काे नियमित और संयमित जीवन व्यतीत करना चाहिए, एेसा करने से उसे स्वस्थ शरीर और मन के साथ-साथ सच्ची गहरी शांति की अनुभूती हाेगी।

हाँ मैं एक राजयाेगी हूँ॥

अपने जीवन में हरेक मनुष्य सफल हाेना चाहता है। अगर आपके भी मन में मानसिक युद्ध चल रहा हाे ताे मन और मन की शांति से संबंधित काेई भी प्रश्न पूछ सकते हैं।

आप सभी के प्रश्नाें का उत्तर हम पोस्ट रूप में- इसी वेबसाइट (http://kmsraj51.com/) पर देगें।
आप सभी अपने प्रश्न हमें ईमेल करें, हमारी ईमेल आईडी हैं…..

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

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