Benefits of Ammonium chloride-(नौसादर)

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नौसादर-

SALLAMONIAC -(नौसादर)-kmsraj51

१- नौसादर- ४ ग्राम,सुहागा-४ ग्राम और सौंफ-२ ग्राम को अच्छी तरह बारीक पीसकर उसमें ४ ग्राम मीठा सोडा मिलाकर रख लें| इसमें से आधे से दो ग्राम की मात्रा में सुबह,दोपहर और शाम को रोगी को देने से पेट की बीमारियों में आराम होता है |

२- फिटकरी,सेंधानमक तथा नौसादर बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें | इसे प्रतिदिन सुबह-शाम मसूड़ों व दाँतों के सभी रोग ठीक हो जाते हैं |

३- नौसादर को पानी में घोलकर ,उसमें एक साफ़ कपड़ा भिगोकर गांठ के ऊपर रखने से लाभ होता है |

४- एक कप पानी में एक चुटकी नौसादर डालकर दिन में तीन बार पीने से खांसी ठीक हो जाती है |

५- नौसादर और कुटकी को जल में मिलाकर माथे पर लेप की तरह लगाने से आधासीसी के दर्द में लाभ होता है |

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स्वस्थ शरीर के लिए – आयुर्वेद का उपयोग करें।

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पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” Kmsraj51 

 

 

 

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आयुर्वेदिक वनस्पति-करेला !

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आयुर्वेदिक वनस्पति-करेला-

karela

करेला के गुणों से सब परिचित हैं |
मधुमेह के रोगी विशेषतःइसके रस और सब्जी का सेवन करते हैं | समस्त भारत में इसकी खेती की जाती है | इसके पुष्प चमकीले पीले रंग के होते हैं | इसके फल ५-२५ सेमी लम्बे,५ सेमी व्यास के, हरे रंग के,बीच में मोटे, सिरों पर नुकीले, कच्ची अवस्था में हरे तथा पक्वा वस्था में पीले वर्ण के होते हैं | इसके बीज ८-१३ मिमी लम्बे, चपटे तथा दोनों पृष्ठों पर खुरदुरे होते हैं जो पकने पर लाल हो जाते हैं| इसका पुष्प काल एवं फल काल जून से अक्टूबर तक होता है |

आज हम आपको करेले के कुछ औषधीय प्रयोगों से अवगत कराएंगे –

१- करेले के ताजे फलों अथवा पत्तों को कूटकर रस निकाल कर गुनगुना करके १-२ बूँद कान में डालने से कान-दर्द में लाभ होता है |

२- करेले के रस में सुहागा की खील मिलाकर लगाने से मुँह के छाले मिटते हैं |

३-सूखे करेले को सिरके में पीसकर गर्म करके लेप करने से कंठ की सूजन मिटती है।

४- १०-१२ मिली करेला पत्र स्वरस पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं |

५- करेला के फलों को छाया शुष्क कर महीन चूर्ण बनाकर रखें | ३-६ ग्राम की मात्रा में जल या शहद के साथ सेवन करना चाहिए | मधुमेह में यह उत्तम कार्य करता है | यह अग्नाशय को उत्तेजित कर इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाता है |

६- १०-१५ मिली करेला फल स्वरस या पत्र स्वरस में राई और नमक बुरक कर पिलाने से गठिया में लाभ होता है |

७- करेला पत्र स्वरस को दाद पर लगाने से लाभ होता है | इसे पैरों के तलवों पर लेप करने से दाह का शमन होता है|

८- करेले के १०-१५ मिली रस में जीरे का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पिलाने से शीत-ज्वर में लाभ होता है |

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

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मन काे कैसे नियंत्रण में करें।

मन के विचारों काे कैसे नियंत्रित करें॥

विचारों के प्रकार-एक खुशी जीवन के लिए।

अपनी सोच काे हमेशा सकारात्मक कैसे रखें॥

“मन के बहुत सारे सवालाें का जवाब-आैर मन काे कैसे नियंत्रित कर उसे सहीं तरिके से संचालित कर शांतिमय जीवन जियें”

“तू ना हो निराश कभी मन से”

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आयुर्वेद-अशोक वृक्ष के लाभ।

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ϒ आयुर्वेद – अशोक वृक्ष के लाभ। ϒ

ashok tree

यह भारतीय वनौषधियों में एक दिव्य रत्न है। भारत वर्ष में इसकी कीर्ति का गान बहुत प्राचीन काल से हो रहा है। प्राचीन काल में शोक को दूर करने और प्रसन्नता के लिए अशोक वाटिकाओं एवं उद्यानों का प्रयोग होता था, और इसी आश्रय से इसके नाम शोकनाश, विशोक, अपशोक आदि रखे गए हैं। सनातनी वैदिक लोग तो इस पेड़ को पवित्र एवं आदरणीय मानते ही हैं, किन्तु बौद्ध भी इसे विशेष आदर की दॄष्टि से देखते हैं क्यूंकि कहा जाता है की भगवान बुद्ध का जन्म अशोक वृक्ष के नीचे हुआ था। अशोक के  वृक्ष भारत वर्ष में सर्वत्र बाग़ बगीचों में तथा सड़कों के किनारे सुंदरता के लिए लगाए जाते हैं। भारत के हिमालयी क्षेत्रों तथा पश्चिमी प्रायद्वीप में ७५० मीटर की ऊंचाई पर मुख्यतः पूर्वीबंगाल, बिहार, उत्तराखंड, कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में साधारणतया नहरों के किनारे व सदाहरित वनों में पाया जाता है। मुख्यतया अशोक की दो प्रजातियां होती हैं, जिनका प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है।

आज हम आपको अशोक के कुछ औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे –

१- श्वास – ६५ मिलीग्राम अशोक बीज चूर्ण को पान के बीड़े में रखकर खिलाने से श्वासरोग में लाभ होता है।

२- रक्तातिसार – अशोक के तीन-चार ग्राम फूलों को जल में पीसकर पिलाने से रक्तातिसार (खूनीदस्त ) में लाभ होता है।

३- रक्तार्श ( बवासीर ) – अशोक की छाल और इसके फूलों को बराबर की मात्रा में लेकर दस ग्राम मात्रा को रात्रि में एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें , सुबह पानी छानकर पीलें इसी प्रकार सुबह का भिगोया हुआ शाम को पीलें, इससे खूनी बवासीर में शीघ्र लाभ मिलता है।

४- अशोक के १-२ ग्राम बीज को पानी में पीसकर दो चम्मच की मात्रा में पीसकर पीने से पथरी के दर्द में आराम मिलता है।

५- प्रदर – अशोक छालचूर्ण और मिश्री को संभाग खरलकर, तीन ग्राम की मात्रा में लेकर गो-दुग्ध प्रातः -सायं सेवन करने से श्वेत -प्रदर में लाभ होता है।

=> अशोक के २-३ ग्राम फूलों को जल में पीसकर पिलाने से रक्त प्रदर में लाभ होता है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

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अरुचि-(भूख न लगना)

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अरुचि – (भूख न लगना)

Food-Aruchii - kmsraj51

इस रोग में रोगी को भूख नहीं लगती | यदि जबरदस्ती भोजन किया भी जाय तो वह अरुचिकर लगता है |

रोगी 1 या 2 ग्रास ज्यादा नहीं खा पाता और उसे बिना कुछ खाये -पिये खट्टी डकारें आने लगती हैं |

इस तरह भूक न लगने अरुचि कहते हैं | आमाशय या पाचनतंत्र में कमी होने के कारण भूख लगनी कम हो जाती है |

ऐसे में यदि कुछ दिनों तक इस बात पर ध्यान न दिया जाये तो भूख लगनी बिलकुल ही बंद हो जाती है |

अधिक चिंता, क्रोध , भय और घबराहट के कारण भी यकृत की ख़राबी के कारण भी भूख नहीं लगती |

विभिन्न औषधियों द्वारा अरुचि का उपचार ——–

१-गेंहू के चोकर में सेंधा नमक और अजवायन मिलाकर रोटी बनाकर खाने से भूख तेज़ होती है |

२-एक सेब या सेब के रस के प्रतिदिन सेवन से खून साफ़ होता है और भूख भी लगती है |

३-एक गिलास पानी में 3 ग्राम जीरा , हींग , पुदीना , कालीमिर्च और नमक डालकर पीने से अरुचि दूर होती है |

४-अजवायन में स्वाद के अनुसार कालानमक मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से अरुचि दूर होती है |

५-प्रतिदिन मेथी में छौंकी गई दाल या सब्ज़ी के सेवन से भूख बढ़ती है |

६-नींबू को काटकर इसमें सेंधा नमक डालकर भोजन से पहले चूसने से कब्ज़ दूर होकर पाचनक्रिया तेज़ हो जाती है | 

 

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मोगरा फूलों के आयुर्वेदिक लाभ।

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ϒ मोगरा फूलों के आयुर्वेदिक लाभ। ϒ

 

मोगरा –

सूरज की धूप प्रखर होते ही सूखे से मोगरे के पौधे में नई कोंपले आने लगती है और आने लगती है मोती सी शुभ्र कलियाँ, फिर वे खिल कर अपनी सुन्दर खुशबु बिखर देते है। जैसे-जैसे गर्मी बढती है और हमें परेशान करने लगती है इसकी खुशबू हमें तरोताजा कर देती है। अपनी सुन्दरता के साथ-साथ मोगरा बहुत गुणकारी भी है।

  • इसका इत्र कान के दर्द में प्रयोग किया जाता है।
  • मोगरा कोढ़, मुंह और आँख के रोगों में लाभ देता है।
  • मोगरे का उपयोग एरोमा थेरेपी में किया जाता है। इसकी खुशबू शान्ति देती है और उत्साह से भरती है।
  • मोगरे की चाय बुखार, इन्फेक्शंस और मूत्र रोगों में लाभकारी होती है।
  • मोगरे वाली चाय रोज़ पीने से केंसर से बचाव होता है। इसमें मोगरे के फूलों और कलियों का उपयोग होता है।
  • मोगरे की ४ पत्तियों को पीसकर एक कप पानी में मिला दे। इसमें मिश्री मिला कर दिन में ४ बार पिने से दस्त में लाभ होता है।
  • मोगरे के पत्तों को पीसकर जहां भी दाद, खुजली और फोड़े – फुंसियां हो वहां लगाने से लाभ होता है।
  • बच्चों के लीवर बढ़ने में मोगरे की पत्तियों का ४-५ बूँद रस शहद के साथ देने से लाभ होता है।
  • कोई घाव ठीक ना हो रहा हो तो बेल वाले मोगरे के पत्तों को पीस कर लगाने से ठीक हो जाता है।
  • इसकी जड़ का काढा पीने से अनियमित मासिक ठीक होता है।
  • इसके दो पत्तों का काला नमक लगा कर सेवन करने से पेट की गैस दूर होती है।
  • इसके फूलों के उपयोग से से पेट के कीड़ों, पीलिया, त्वचा रोग, कंजक्टिवाईटिस, आदि में लाभ होता है।

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