प्राचीन घरेलू स्वास्थ्य दोहावली।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ प्राचीन घरेलू स्वास्थ्य दोहावली। ϒ

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पानी में गुड डालिए बीत जाए जब रात।
सुबह छानकर पीजिए अच्छे हाें हालात॥ (1)

धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन(आंख) में डार(डाल)।
दुखती अँखियां ठीक हाें, पल(समय) लागे दाे-चार॥ (2)

ऊर्जा मिलती है बहुत, जब पिएं गुनगुना नीर।
कब्ज खत्म हाे पेट की, मिट जाए हर पीर(दर्द)॥ (3)

प्रातःकाल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप।
बस दाे-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप॥ (4)

ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार।
करें हाजमे का सदा – ये ताे बंटाढार॥
(5)

भोजन करें धरती पर अल्थी-पल्थी मारकर।
चबा-चबा कर खाए, वैद्य न झांके द्वार॥
(6)

प्रातःकाल फल रस लाे, दोपहर लस्सी-छाछ।
सदा रात में दूध पी, सभी राेग का नाश॥
(7)

प्रात काल, दोपहर लीजिये जब नियमित आहार।
तीस मिनट की नींद लाे, राेग न आवें द्वार॥
(8)

भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार।
डाक्टर, ओझा व वैघ का लुट जाए व्यापार॥
(9)

घूंट-घूंट पानी पियाे, रहे तनाव से दूर।
एसिडिटी या मोटापा होवें चकनाचूर॥ (10)

अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास।
पानी पीजै सदैव बैठकर, कभी न आवे पास॥
(11)

रक्तचाप बढने लगे – तब मत सोचो भाई।
सौगंध राम की खाइके, तुरंत छाेड़ दाे चाय॥
(12)

सुबह खाइये कुवंर-सा, दोपहर यथा नरेश।
भाेजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश॥
(13)

♦ देर रात तक जागना, राेगाे का जंजाल।
अपच, आंख के रोग संग, तन भी रहे निढाल॥ (14)

♦ दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ।
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ॥ (15)

♦ सत्तर राेगाे काे करें-चूना हमसे दूर।
दूर करें ये बांझपन, सुस्ती अपच हुजूर॥ (16)

♦ भोजन करके जाेहिए, केवल घंटा डेढ।
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड॥ (17)

♦ अलसी, तिल, नारियल, घी, सरसों का तेल।
यही खाइए नहीं ताे, हृदय समझिए फेल॥ (18)

♦ पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान।
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान॥ (19)

♦ एल्युमीनियम के पात्र का करता है जाे उपयाेग।
आमंत्रित करता सदैव ही अड़तालीस(48) राेग॥ (20)

♦ फल या मीठा खाइके, तुरंत न पीजै नीर।
ये सब छाेटी आंत में बनते विषधर तीर॥ (21)

चोकर खाने से सदा – बढ़ती तन की शक्ति।
गेहूं माेटा पीसिये, दिल में बड़े विरक्ति॥ (22)

♦ राेज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय।
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय॥ (23)

♦ भोजन करके खाइए – सौंफ, गुड़, अजवाइन।
पत्थर भी पच जायेगा – जानै सकल जहान॥ (24)

♦ लौकी का रस पीजिए – चोकर युक्त पिसान।
तुलसी, गुड़, सेंधा नमक – हृदय राेग निदान॥ (25)

♦ चैत्र माह में नीम की पत्ती हर दिन खावे।
ज्वर, डेंगू या मलेरिया – सोलह मील भगाये॥ (26)

♦ साै वर्षों तक वह जिए – लेते नाक से सांस।
अल्पकाल ओ जिवें – जाे करें मुंह से श्वासोश्वास॥ (27)

♦ ज्यादा शीतल व गर्म पानी से कभी न करें स्नान।
घट जाता है आत्मबल, नैनन काे नुकसान॥ (28)

♦ अगर हृदय राेग से आपकाे बचना है – श्रीमान।
ताे सुरा(शराब), चाय व कोल्ड ड्रिंक का मत करिए पान॥ (29)

♦ जाे तुलसी का पत्ता करें सदैव जीवन में उपयाेग।
मिट जाते हर उम्र में – उसके तन के सारे राेग॥ (30)

प्यारे दोस्तों – ऊपर दिए गये – प्राचीन घरेलू आयुर्वेदिक चिकित्सा, अच्छे स्वास्थ्य के लिए 100% कारगर हैं। जिसका शरीर पर किसी तरह का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

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ग्रीष्म ऋतू दिनचर्या

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ग्रीष्म ऋतू दिनचर्या —

ग्रीष्म ऋतु में सुबह सूर्योदय से पहले उठकर शौच क्रिया एवं स्नान से निवृत्त हो जाने से शरीर में अतिरिक्त उष्णता नहीं बढ़ पाती। कुछ महिलाएँ रसोई घर के काम से निवृत्त होकर दोपहर को स्नान करती हैं। इससे शरीर में उष्णता बढ़ती जाती है। ग्रीष्म ऋतु में ऐसा न करके सूर्योदय से पहले ही स्नान करलें, फिर रसोई घर में काम करें।
– दिन में 1-1 गिलास करके बार-बार ठंडा पानी पीते रहना चाहिए। विशेषकर घर से बाहर निकलते समय एक गिलास ठंडा पानी, बिना प्यास के भी, पीकर ही बाहर निकलना चाहिए। इस उपाय से लू नहीं लगती। इसी तरह रात को 10 बजे के बाद जागना पड़े तो हर घण्टे 1-1 गिलास पानी तब तक पीते रहें जब तक सो न जाएँ। इस उपाय से वात और पित्त का प्रकोप नहीं होता।
– ग्रीष्म ऋतु में साठी के पुराने चावल, गेहूँ, दूध, मक्खन, गौघृत के सेवन से शरीर में शीतलता, स्फूर्ति तथा शक्ति आती है। सब्जियों में लौकी, गिल्की, परवल, नींबू, करेला, केले के फूल, चौलाई, हरी ककड़ी, हरा धनिया, पुदीना और फलों में तरबूज, खरबूजा, एक-दो-केले, नारियल, मौसमी, आम, सेब, अनार, अंगूर का सेवन लाभदायी है।

summer days

– इस ऋतु में दिन बड़े और रात्रियाँ छोटी होती हैं। अतः दोपहर के समय थोड़ा सा विश्राम करना चाहिए। इससे इस ऋतु में धूप के कारण होने वाले रोग उत्पन्न नहीं हो पाते। वात पैदा करने वाले आहार-विहार के कारण शरीर में वायु की वृद्धि होने लगती है।
– रात को देर तक जागना और सुबह देर तक सोये रहना त्याग दें। अधिक व्यायाम, अधिक परिश्रम, धूप में टहलना, अधिक उपवास, भूख-प्यास सहना ये सभी वर्जित हैं।
– इस ऋतु में मुलतानी मिट्टी से स्नान करना वरदान स्वरूप है। इससे जो लाभ होता है, साबुन से नहाने से उसका 1 प्रतिशत लाभ भी नहीं होता। जापानी लोग इसका खूब लाभ उठातेहैं। गर्मी को खींचने वाली, पित्त दोष का शमन करने वाली, रोमकूपों को खोलने वाली मुलतानी मिट्टी से स्नान करें और इस के लाभों का अनुभव करें।
– चन्दन का टिका , इसका लेप लाभकारी है.
-ग्रीष्म ऋतु में सूर्य अपनी किरणों द्वारा शरीर के द्रव तथा स्निग्ध अंश का शोषण करता है, जिससे दुर्बलता, अनुत्साह, थकान, बेचैनी आदि उपद्रव उत्पन्न होते हैं। उस समय शीघ्र बल प्राप्त करने के लिए मधुर, स्निग्ध, जलीय, शीत गुणयुक्त सुपाच्य पदार्थों की आवश्यकता होती है। इन दिनों में आहार कम लेकर बार-बार जल पीना हितकर है परंतु गर्मी से बचने के लिए बाजारू शीत पदार्थ एवं फलों के डिब्बा बंद रस हानिकारक हैं। उनसे लाभ की जगह हानि अधिक होती है। उनकी जगह नींबू का शरबत, आम का पना, जीरे की शिकंजी, ठंडाई, हरे नारियल का पानी, फलों का ताजा रस, दूध आदि शीतल, जलीय पदार्थों का सेवन करें। ग्रीष्म ऋतु में स्वाभाविक उत्पन्न होने वाली कमजोरी, बेचैनी आदि परेशानियों से बचने के लिए धनियापंचक , ठंडाई ,गुलाब शरबत , बेल शरबत आदि ले .
– धनिया पंचकः धनिया, जीरा व सौंफ सम भाग मिलाकर कूट लें। इस मिश्रण में दुगनी मात्रा में काली द्राक्ष व मिश्री मिलाकर रखें।

उपयोगःएक चम्मच मिश्रण 200 मि.ली. पानी में भिगोकर रख दें। दो घंटे बाद हाथ से मसलकर छान लें और सेवन करें। इससे आंतरिक गर्मी, हाथ-पैर के तलुवों तथा आँखों की जलन, मूत्रदाह, अम्लपित्त, पित्तजनित शिरःशूल आदि से राहत मिलती है। गुलकंद का उपयोग करने से भी आँखों की जलन, पित्त व गर्मी से रक्षा होती है।
– गुलाब शरबत- डेढ़ कि.ग्रा. चीनी में देशी गुलाब के 100 ग्राम फूल मसलकर शरबत बनाया जाय तो वह बाजारू शरबतों से पचासों गुना हितकारी है। सेक्रीन, रासायनिक रंगों और विज्ञापन से बाजारू शरबत महंगे हो जाते हैं। आप घर पर ही यह शरबत बनायें। यह आँखों व पैरो की जलन तथा गर्मी का शमन करता है। पीपल के पेड़ की डालियाँ, पत्ते, फल मिलें तो उन्हें भी काट-कूट के शरबत में उबाल लें। उनका शीतलता दायी गुण भी लाभकारी होगा।

Post inspired by:

Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj-KMSRAJ51पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

मैं श्री आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का बहुत आभारी हूँ!!

आपको दिल से शुक्रिया;

Ayurveda Product Available on;-

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जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

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कब्‍ज दूर करने के घरेलू उपचार।

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आयुर्वेद उपचार

कब्‍ज दूर करने के घरेलू उपचार।

सामान्य रूप से मल का निष्कासन ना होना तथा आंतों में मल का रूकना कब्ज कहलाता है॰

अनियमित दिनचर्या और खान-पान के कारण कब्‍ज और पेट गैस की समस्‍या आम बीमारी की तरह हो गई है। कब्‍ज रोगियों में गैस व पेट फूलने की शिकायत भी देखने को मिलती है। लोग कहीं भी और कुछ भी खा लेते हैं। खाने के बाद बैठे रहना, डिनर के बाद तुरंत सो जाना ऐसी आदतें हैं जिनके कारण कब्‍ज की शिकायत शुरू होती है। पेट में गैस बनने की बीमारी ज्‍यादातर बुजुर्गों में देखी जाती है लेकिन यह किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकती है।

आइए हम आपको कब्‍ज से बचने के घरेलू नुस्‍खे के बारे में जानकारी देते हैं;

कब्‍ज के उपचार के घरेलू उपाय –

  • सुबह उठने के बाद नींबू के रस को काला नमक मिलाकर पानी के साथ सेवन कीजिए। इससे पेट साफ होगा।
  • 20 ग्राम त्रिफला रात को एक लिटर पानी में भिगोकर रख दीजिए। सुबह उठने के बाद त्रिफला को छानकर उस पानी को पी लीजिए। इससे कुछ ही दिनों में कब्‍ज की शिकायत दूर हो जाएगी।
  • कब्‍ज के लिए शहद बहुत फायदेमंद है। रात को सोने से पहले एक चम्‍मच शहद को एक गिलास पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से पीने से कब्‍ज दूर हो जाता है।
  • हर रोज रात में हर्र को पीसकर बारीक चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को कुनकुने पानी के साथ पीजिए। कब्‍ज दूर होगा और पेट में गैस बनना बंद हो जाएगा।
  • रात को सोते वक्‍त अरंडी के तेल को हल्‍के गरम दूध में मिलाकर पीजिए। इससे पेट साफ होगा।
  • इसबगोल की भूसी कब्‍ज के लिए रामबाण दवा है। दूध या पानी के साथ रात में सोते वक्‍त इसबगोल की भूसी लेने से कब्‍ज समाप्‍त होता है।
  • पका हुआ अमरूद और पपीता कब्‍ज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। अमरूद और पपीता को किसी भी समय खाया जा सकता है।
  • किशमिश को पानी में कुछ देर तक डालकर गलाइए, इसके बाद किशमिश को पानी से निकालकर खा लीजिए। इससे कब्‍ज की शिकायत दूर होती है।
  • पालक का रस पीने से कब्‍ज की शिकायत दूर होती है, खाने में भी पालक की सब्‍जी का प्रयोग करना चाहिए।
  • अंजीर के फल को रात भर पानी में डालकर गलाइए, इसके बाद सुबह उठकर इस फल को खाने से कब्‍ज की शिकायत समाप्‍त होती है।
  • मुनक्‍का में कब्‍ज नष्‍ट करने के तत्‍व मौजूद होते हैं। 6-7 मुनक्‍का रोज रात को सोने से पहले खाने से कब्‍ज समाप्‍त होती है। 

कब्‍ज की समस्‍या से बचने के लिए नियमित रूप से व्‍यायाम और योगा करना चाहिए। गरिष्‍ठ भोजन करने से बचें।

इन नुस्‍खों को प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। अपनाने के बाद भी अगर पेट की बीमारी ठीक नही होती तो चिकित्‍सक से संपर्क अवश्‍य कीजिए।

Post Share by: Dr. Naveen Chauhan

dr-naveen

B.A.M.S, C.C.Y.P, P.G.C.R.A.V
(Kshara-sutra) Ayurveda Consultant

& Kshara-sutra surgical specialist for Proctological diseases

(Consultant Ayurveda Physician and Kshar sutra specialist)

SHRI DHANWANTARI CLINIC, GHAZIABAD

http://www.ayurvedapilescure.com/

(मैं डॉ. नवीन चौहान जी का बहुत आभारी हूँ , हिन्दी में स्वास्थ्य सुझाव Share करने के लिए.)

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100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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“हमारी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने जीवन का कुछ सेकंड, प्रतिघंटा और प्रतिदिन कैसे बिताते हैं”
-KMSRAJ51

-A Message To All-

मत करो हतोत्साहित अपने शब्दों से ……आने वाली नयी पीढ़ी को ,
वो भी करेंगे कुछ ऐसा एक दिन…. जिसे देखेगा ज़माना ….पकड़ती हुई नयी सीढ़ी को ॥

108+ देश के पाठकों द्वारा पढ़ा जाने वाला हिन्दी-अंग्रेजी वेबसाइट है,, –

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मैं अपने सभी प्रिय पाठकों का आभारी हूं…..  I am grateful to all my dear readers …..

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आयुर्वेद / घरेलू उपचार-एक स्वस्थ शरीर के लिए।

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गेहूँ का ज्वारा अर्थात गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों की हरी-हरी पत्तीयाँ॥

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गेहूँ का ज्वारा अर्थात गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों की हरी-हरी पत्ती, जिसमे है शुद्ध रक्त बनाने की अद्भुत शक्ति. तभी तो इन ज्वारो के रस को “ग्रीन ब्लड” कहा गया है. इसे ग्रीन ब्लड कहने का एक कारणयह भी है कि रासायनिक संरचना पर ध्यानाकर्षण किया जाए तो गेहूँ के ज्वारे के रस और मानव मानव रुधिर दोनों का ही पी.एच. फैक्टर 7.4 ही है जिसके कारण इसके रस का सेवन करने से इसका रक्त में अभिशोषण शीघ्र हो जाता है, जिससे रक्ताल्पता(एनीमिया) और पीलिया(जांडिस)रोगी के लिए यह ईश्वर प्रदत्त अमृत हो जाता है. गेहूँ के ज्वारे के रस का नियमित सेवन और नाड़ी शोधन प्रणायाम से मानव शारीर के समस्त नाड़ियों का शोधन होकर मनुष्य समस्त प्रकार के रक्तविकारों से मुक्त हो जाता है. गेहूँ के ज्वारे में पर्याप्त मात्रा में क्लोरोफिल पाया जाता है जो तेजी से रक्त बनता है इसीलिए तो इसे प्राकृतिक परमाणु की संज्ञा भी दी गयी है. गेहूँ के पत्तियों के रस में विटामिन बी.सी. और ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

गेहूँ घास के सेवन से कोष्ठबद्धता, एसिडिटी , गठिया, भगंदर, मधुमेह, बवासीर, खासी, दमा, नेत्ररोग,म्यूकस, उच्चरक्तचाप, वायु विकार इत्यादि में भी अप्रत्याशित लाभ होता है. इसके रस के सेवन से अपार शारीरिक शक्ति कि वृद्धि होती है तथा मूत्राशय कि पथरी के लिए तो यह रामबाण है. गेहूँ के ज्वारे से रस निकालते समय यह ध्यान रहे कि पत्तियों में से जड़ वाला सफेद हिस्सा काट कर फेंक दे. केवल हरे हिस्से का ही रस सेवन कर लेना ही विशेष लाभकारी होता है. रस निकालने के पहले ज्वारे को धो भी लेना चाहिए. यह ध्यान रहे कि जिस ज्वारे से रस निकाला जाय उसकी ऊंचाई अधिकतम पांच से छः इंच ही हो।

आप १५ छोटे छोटे गमले लेकर प्रतिदिन एक-एक गमलो में भरी गयी मिटटी में ५० ग्राम गेहू क्रमशः गेहू चिटक दे, जिस दिन आप १५ गमले में गेहू डालें उस दिन पहले दिन वाला गेहू का ज्वारा रस निकलने लायक हो जायेगा. यह ध्यान रहे की जवारे की जड़ वाला हिस्सा काटकर फेक देंगे पहले दिन वाले गमले से जो गेहू उखाड़ा उसी दिन उसमे दूसरा पुनः गेहू बो देंगे.यह क्रिया हर गमले के साथ होगी ताकि आपको नियमित ज्वारा मिलता रहे।

Post inspired by:

पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज।

Bal Krishna Ji-2 Bal Krishna Ji

I am grateful to पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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Health Tips : कुछ इस तरह से शरीर का थकान उतारें।

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Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ कुछ इस तरह से शरीर का थकान उतारें। ϒ

«♦»«♦»
अधिक परिश्रम करने से शरीर में थकान आ जाती है और शरीर सुस्त हो जाता है। फिर कुछ काम करने का मन ही नहीं करता, सिर्फ आराम की ही जरूरत महसूस होती है।

थकान उतारने के लिए आप कुछ इस तरह प्रयास करें।

अपनी दो अंगुलियों के पोरों से चेहरे की हल्की मालिश करें। इससे ब्लड सर्कूलेशन बढ़ेगा, जिससे आप महसूस करेंगे कि आपकी थकान रफूचक्कर हो गई है।

∇ नाक के दोनों ओर हल्की मालिश करते हुए धीरे-धीरे दोनों आंखों के बीच वाले भाग से लेकर आंखों के नीचे भी हल्की मालिश करें। फिर इसी तरह से भौहों तक पहुंचें।
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भौहों पर हल्का दबाव डालते हुए अंदर से बाहर की ओर मालिश करें।

अब आंखों के बाहरी किनारों पर मालिश करते हुए ललाट तक पहुंचें।

 इसके बाद आंखों के एकदम नीचे की ओर आएं। गालों के बीच हल्की मालिश करते हुए फिर ऊपर से ही मसूड़ों की भी मालिश करें। इसके बाद जबड़ों को अंगुलियों की पकड़ में लें और जबड़ों के किनारों पर हल्का दबाव डालें।

 कई बार सुगंधित तेल के प्रयोग से भी शरीर की थकावट को भगाया जा सकता है। सुगंधित तेल से प्रभावित अंग की हल्की मालिश करने से ताजगी महसूस होती है, इसके लिए सुगंधित तेल की कुछ बूंदें वनस्पति तेल(नारियल का तेल) में मिलाकर मालिश करनी चाहिए।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51