आलू के आयुर्वेदिक स्वास्थ्य लाभ – आलू की पोषण संबंधी लाभ

kmsraj51 की कलम से…..

Soulword_kmsraj51 - Change Y M Tआलू

भारत और विश्व में आलू विख्यात है और अधिक उपजाया जाता है| आलू को हमेशा छिलके समेत पकाना चाहिए क्योंकि आलू का सबसे अधिक पौष्टिक भाग छिलके के एकदम नीचे होता है, जो प्रोटीन और खनिज से भरपूर होता है। आलू में स्टॉर्च, पोटाश और विटामिन ए व डी होता है।

potato

यह अन्य सब्जियों के मुकाबले सस्ता मिलता है लेकिन है गुणों से भरपूर | आलू से मोटापा नहीं बढ़ता| आलू को तलकर तीखे मसाले, घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई मोटापा बढ़ाती है| आलू को उबालकर अथवा गर्म रेत या राख में भूनकर खाना लाभदायक और निरापद है|
आलू में विटामिन बहुत होता है| आलू को छिलके सहित गरम राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी है|

-भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है| आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है|
-चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर नित्य खाएं। इससे गठिया ठीक हो जाता है|
हरा भाग खतरनाक
आलू के हरे भाग में सोलेनाइन विषैला पदार्थ होता है, जो शरीर के लिए नुकसानदायक होता है। आलू के अंकुरित हिस्से का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए।

आलुओं में प्रोटीन होता है, सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है| आलू का प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी दूर करने वाला होता है|
आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन-बी तथा फास्फोरस बहुतायत में होता है| आलू खाते रहने से रक्त वाहिनियां बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं तथा कठोर नहीं होने पातीं|
इसको छिलके सहित पानी में उबालें और गल जाने पर खाएं।
यदि दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोड़े से दही के साथ खा लिए जाएं तो ये एक संपूर्ण आहार का काम करते हैं|
आलू के छिलके ज्यादातर फेंक दिए जाते हैं, जबकि अच्छी तरफ साफ़ किये छिलके सहित आलू खाने से ज्यादा शक्ति मिलती है|
– कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है। नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएँ|
– शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है।|
-गुर्दे की पथरी में केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है|पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियाँ और रेत आसानी से निकल जाती हैं|
-उच्च रक्तचाप के रोगी भी आलू खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है|
-आलू को पीसकर त्वचा पर मलें। रंग गोरा हो जाएगा|

Post inspired by: Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj

मैं पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का आभारी हूं.

Bal Krishna Ji-2 Bal Krishna Jihttp://patanjaliayurved.org/

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love-rose-kmsraj51Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

Book-Red-kmsraj51

100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

“सफल लोग अपने मस्तिष्क को इस तरह का बना लेते हैं कि उन्हें हर चीज सकारात्मक व खूबसूरत लगती है।”
-KMSRAJ51

“हमारी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने जीवन का कुछ सेकंड, प्रतिघंटा और प्रतिदिन कैसे बिताते हैं”
-KMSRAJ51

-A Message To All-

मत करो हतोत्साहित अपने शब्दों से ……आने वाली नयी पीढ़ी को ,
वो भी करेंगे कुछ ऐसा एक दिन…. जिसे देखेगा ज़माना ….पकड़ती हुई नयी सीढ़ी को ॥

कुछ भी आप के लिए संभव है ॥

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

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Diabetics – मधुमेह [डायबिटीज ] !!

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Dibeteas

=> मधुमेह [डायबिटीज ] ——-

– आजकल टीवी में तरह तरह के विज्ञापन आते रहते है की इन दवाइयों का उपयोग करने से आप मधुमेह से छुटकारा पा सकेंगे. इसमें कई आयुर्वेदिक है कई एलोपेथी के .

– मधुमेह से परेशान व्यक्ति सब तरह की दवाइयां आजमाता है पर मधुमेह से छुटकारा नहीं पा पाता क्योंकि यह एक बहुत बड़ा मिथक है की मधुमेह एक रोग है.

– मधुमेह एक स्थिति है जिसमे शरीर के एक महत्वपूर्ण अंग ने बगावत कर दी है . आसपास बहुत शकर है , ऊर्जा है पर शरीर उसे इस्तेमाल नहीं कर पाता.

– वह क्या कारण है जो हमारे शरीर का ही एक अंग हमारा साथ नहीं देता . वह है हमारी आत्मा जो हमारे विचार निरंतर झेलती है. कुछ नकारात्मक विचार जो हम लगातार करते रहते है हमारे किसी ना किसी नाज़ुक ग्रंथी को या तो सुस्त या अधिक कार्यरत कर देते है.

– जीवनी शक्ति उन अंगों तक पहुँच नहीं पाती. इस लिए ध्यान अत्यावश्यक है. मधुमेह के मरीज़ रोज़ भोजन से पहले शांत चित्त हो कर विचार करे की प्रभु की दिव्य शक्ति लीवर को प्राप्त हो रही है जिससे हमारे रक्त में जो शर्करा है वह कम हो रही है.

– ध्यान करते हुए हमें स्वयं को परेशान करने वाले विचारों को फेंक देना है. जो पुराने और भुला दिए गए नकारात्मक विचार है उन्हें भी हटाना है.

Diabetics

– ये नकारात्मक विचार किसी के लिए गुस्सा , नफरत , किसी का दिया आघात , कोई कमी का अनुभव आदि हो सकते है.

– कभी बिना भूख के खाना और कभी भूख लगने पर भी ना खाना दोनों ही गलत है.

– कई दिनों के उपवास जिसमे चाय कॉफ़ी पी जाए , साबूदाना , वनस्पति घी , रबड़ी , पेड़े , सफ़ेद शकर , तले हुए कंद आदि लिए जाए गलत है.

– उपवास जिसमे एसिडिटी हो गलत है.

– पॉलिश वाले चावल , सफ़ेद शकर, मैदा, आदि पदार्थों का अधिक सेवन कभी ना करे.

– भोजन प्रेशर कूक ना करे. हो सके तो मिटटी के बर्तन में उबला अन्न ले. एल्युमिनियम में तो बिलकुल ना पकाए.

– वात प्रवृत्ति पर नियंत्रण पाने के लिए अनुलोम विलोम और कपालभाती प्राणायाम अत्यावश्यक है. मंडूकासन करने से भी लाभ होता है |

– पेट और कमर के आसपास कभी चर्बी जमा ना होने दे. यह मधुमेह को जन्म देती है.

– सभी प्रकार के रस वाले और हर प्रकार से खाए जाने वाले अन्न ले.

– ज़मीन पर बैठ कर हाथों से भोजन ले. भोजन के पहले प्रार्थना अवश्य करे.

– गौसेवा करे और पंचगव्य का सेवन करे.

Post Inspired by : Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj

Bal Krishna Ji

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Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj

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“गृहस्थी का आधार सिर्फ धन या वासना ना रहे”

kmsraj51 की कलम से …..

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“गृहस्थी का आधार सिर्फ धन या वासना ना रहे”


SOLUTION

समाज या देश कोई भी हो, अक्सर लोगों का वैवाहिक जीवन दो ही चीजों पर टिक जाता है अर्थ और काम। या तो रिश्ते को अर्थ की भूख ढंक लेती है या पति-पत्नी वासना की चादर ओढ़ लेते हैं। दोनों ही परिस्थितियों में गृहस्थी केवल एक समझौता हो जाती है। दाम्पत्य एक दिव्य संबंध होता है, जो सीधे परमात्मा से जोड़ता है। अपनी गृहस्थी को मंदिर बनाइए। इसमें जैसे ही परमात्मा का प्रवेश होगा, ये सांसारिकता से ऊपर उठ जाएगी।
विवाह केवल शारीरिक आवश्यकता या वंश वृद्धि के लिए नहीं होता। भागवत के प्रसंग में चलिए। जहां सृष्टि का निर्माण हुआ। पहले पुरुष मनु और पहली स्त्री शतरूपा का जन्म हुआ। उन पर ही मानव वंश की वृद्धि का भार भी था लेकिन उन्होंने कभी अपने रिश्ते का आधार वासना को नहीं बनाया। उन्होंने संतान उत्पत्ति को भी परमात्मा को समर्पित किया। घोर तपस्या की। ब्रह्मा को प्रसन्न किया। वरदान मांगा देव तुल्य संतानों की उत्पत्ति का।
मनु और शतरूपा ने ही सारे मानव और देव वंश को आगे बढ़ाया लेकिन उनके संबंध में न तो अर्थ था और ना ही कभी काम आया। दोनों ही भाव उनसे दूर रहे। दोनों ने अपने दाम्पत्य में कुछ कड़े नियम तय किए। जैसे संभोग सिर्फ संतान उत्पत्ति का साधन रहे, ना कि वो पूरे रिश्ते का आधार बने। देव पूजा नियमित हो, जो भी संतान उत्पन्न हो उसमें उच्च संस्कारों का संचार किया जाए। इसलिए मनु को आदि पुरुष माना गया है। जिन्होंने समाज को पूरी व्यवस्था दी।

हम भी गृहस्थी में रहें तो पति-पत्नी दोनों अपने लिए कुछ नियम तय करें। जिसमें परिवार, संतान, समाज और परमात्मा सभी के लिए कुछ सकारात्मक और रचनात्मक हो। तभी दाम्पत्य सफल भी होगा।

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10 Good Habits of Healthy Living

Kmsraj51 की कलम से…..

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स्वस्थ रहने की 10 अच्छी आदतें ♣

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कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें।

ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें।

बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं।

खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल-अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में ‘वैरायटी ऑफ फूड’ शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।

खाना पकाने के लिए अनसैचुरेटेड वेजिटेबल ऑइल (जैसे सोयाबीन, सनफ्लॉवर, मक्का या ऑलिव ऑइल) के प्रयोग को प्राथमिकता दें। खाने में शकर तथा नमक दोनों की मात्रा का प्रयोग कम से कम करें। जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक तथा आर्टिफिशियल शकर से बने ज्यूस आदि का उपयोग न करें। कोशिश करें कि रात का खाना आठ बजे तक हो और यह भोजन हल्का-फुल्का हो।

अपने विश्राम करने या सोने के कमरे को साफ-सुथरा, हवादार और खुला-खुला रखें। चादरें, तकियों के गिलाफ तथा पर्दों को बदलती रहें तथा मैट्रेस या गद्दों को भी समय-समय पर धूप दिखाकर झटकारें।

मेडिटेशन, योगा या ध्यान का प्रयोग एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव से दूर रहने के लिए करें।

कोई भी एक व्यायाम रोज जरूर करें। इसके लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा दें और व्यायाम के तरीके बदलते रहें, जैसे कभी एयरोबिक्स करें तो कभी सिर्फ तेज चलें। अगर किसी भी चीज के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे तो दफ्तर या घर की सीढ़ियां चढ़ने और तेज चलने का लक्ष्य रखें। कोशिश करें कि दफ्तर में भी आपको बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठा रहना पड़े।

45 की उम्र के बाद अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें और यदि डॉक्टर आपको कोई औषधि देता है तो उसे नियमित लें। प्रकृति के करीब रहने का समय जरूर निकालें। बच्चों के साथ खेलें, अपने पालतू जानवर के साथ दौड़ें और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन का भी समय निकालें।

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आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

———– @ Best of Luck @ ———–

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cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

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6 आसान घरेलू नुस्खों से झटपट दूर होगी बदहजमी !!

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आजकल की दिनचर्या और डाइट के कारण अधिकतर लोगों को बदहजमी और गैस की शिकायत होती है। इससे बचने के लिए खानपान में कुछ बदलाव करना काफी कारगर हो सकता है।

कई बार हम आवश्यकता से अधिक खा लेते हैं। तब बदहजमी या अपच की शिकायत हो जाती है। हां, कभी-कभी पेट भर कर तो नहीं खाते, लेकिन बेमेल खाद्य पदार्थ खाना बदहजमी का कारण बनते हैं।

बदहजमी की वजहें:

ओवरइटिंग, खाने को सही तरीके से नहीं चबाना…

खाना सही तरह से पका न होना…

एक्सरसाइज न करना…

नींद पूरी न होना…

इंडियन सोसायटी ऑफ गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के रिसर्च के मुताबिक 30.4 फीसदी भारतीयों को इंडाइजेशन (बदहजमी) की परेशानी जीवनभर बनी रहती है।

=> अदरक
क्या फायदा : अत्यधिक गैस होने की स्थिति में अदरक के छोटे टुकड़े को धीरेधीरे चबाकर उसका रस चूसें। 15 मिनट में आपको गैस की परेशानी से 40 फीसदी तक राहत मिल जाएगी।
इसमें ऐसा क्या है : जिंजरॉल, जिंगरॉन, शोगाओल्स।

=> मेथी
क्या फायदा : ज्यादा खाने के कारण होने वाली गैस की दिक्कत को तुरंत दूर करने के लिए खाने के बाद मेथी में काला नमक मिलाकर खाएं। गैस की परेशानी तुरंत दूर हो जाएगी।
इसमें ऐसा क्या है : एपिनिन, फैनचोने, लिमोनेन।

अनानास
=> क्या फायदा : अनानास में पाया जाने वाला फाइबर पाचन को बेहतर करने में कारगर होता है। रोजाना एक-दो फांक खाने से पाचन ठीक करने के साथ ही कब्ज भी दूर होगा।
इसमें ऐसा क्या है : बीटा कैरोटीन, फ्रुकटोस, विटामिन सी।

=> अलसी
क्या फायदा : गैस की परेशानी के साथ ही कब्ज की दिक्कत को भी दूर किया जा सकता है। रोजाना एक चम्मच अलसी का पाउडर खाने से कब्ज की परेशानी दूर होगी।
इसमें ऐसा क्या है : ओमेगा-3, सॉल्यूबल फाइबर, लिगनेंस।

=> पुदीना
क्या फायदा : अगर खाना खाने के बाद अचानक पेट भारी हो और अपच की परेशानी होने लगे तो पुदीने के ताजा पत्तों से बनी चाय पीने से आराम मिलता है।
इसमें ऐसा क्या है : टेरपेनॉइड्स, एरियोस्रिटीन, हैसपेरिडिन।

=> ग्रीन जूस
क्या फायदा : हरी सब्जियों के रस का सेवन करने से पेट के रोगों से मुक्ति मिलती है। हर दिन एक गिलास रस पीने से कब्ज, गैस और बदहजमी दूर होती है।
इसमें ऐसा क्या है : मैग्नीशियम, डायटरी फाइबर, प्रोटीन।


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ठंडे मौसम की गर्म सावधानियां ~ Hot cold weather precautions !!


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** ~ ठंडे मौसम की गर्म सावधानियां ~ **


sapana


=> ठंडे मौसम की गर्म सावधानियां

मौसम अपने तेवर पल-पल बदल रहा है। कभी कड़ी धूप होती है और कभी ठंडी हवा सरसराने लगती है। जब ठंडी हवा चल रही हो तो सबसे पहले यही चिंता सताती है कि कहीं आपकी त्वचा तो खराब नहीं होगी?


यूं तो हर मौसम में चेहरे की देखभाल की जरूरत पड़ती है लेकिन सर्दी के मौसम में खासकर आरंभिक सर्दी में यह मेहनत थोड़ी बढ़ जाती है। केवल प्रोडक्ट इस्तेमाल कर लेने से पूरी देखभाल नहीं होती बल्कि इसके लिए थोड़ी-बहुत सावधानी भी रखनी पड़ती है!!

तो आइए जानते हैं क्या हैं वह सावधानियां और उपाय-


=> इस मौसम में जब भी घर से बाहर निकलें अपनी त्वचा को ठंडी हवाओं के संपर्क में न आने दें। चेहरे और हाथ-पैरों को गर्म कपड़ों से ढंककर रखें।


=> इस मौसम में चेहरे की नमी बनाए रखने के लिए अच्छी कंपनी के मॉइश्चराइजर इस्तेमाल करें। अगर आपकी त्वचा ज्यादा सूखी है तो दिन में दो बार आप इसे लगा सकती हैं। हां, इस बात का ध्यान रखें कि ये मॉइश्चराइजर चेहरे को क्लीनजिंग क्रीम से साफ करने के बाद ही लगाएं।


=> अगर आपकी त्वचा ज्यादा रूखी है तो आपको अतिरिक्त देखभाल करने की जरूरत है। इसके लिए हफ्ते में चार से पांच बार पूरे शरीर का मसाज बादाम के तेल से करें।


=> रोजाना नहाने से पहले पूरे शरीर का मसाज बादाम के तेल या जैतून के तेल से करें इससे नहाने के बाद आपकी त्वचा रूखी नहीं होगी।


=> इस मौसम में पैरों की ऐड़ियां भी फटने लगती हैं ऐसे में सोने से पहले पैरों को गुनगुने पानी में थोड़ी देर डुबोकर रखें। पानी से पैर निकालने के बाद उसे अच्छी तरह पोंछकर लोशन लगाएं।

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स्वस्थ रहने की 10 अच्छी आदतें ~ 10 Good Habits of Healthy Living !!

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* ~ स्वस्थ रहने की 10 अच्छी आदतें ~ *


facts-about-healthy-food1

* कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

* घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें।

* ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें।

* बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं।

* खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल-अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में ‘वैरायटी ऑफ फूड’ शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।

* खाना पकाने के लिए अनसैचुरेटेड वेजिटेबल ऑइल (जैसे सोयाबीन, सनफ्लॉवर, मक्का या ऑलिव ऑइल) के प्रयोग को प्राथमिकता दें। खाने में शकर तथा नमक दोनों की मात्रा का प्रयोग कम से कम करें। जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक तथा आर्टिफिशियल शकर से बने ज्यूस आदि का उपयोग न करें। कोशिश करें कि रात का खाना आठ बजे तक हो और यह भोजन हल्का-फुल्का हो।

* अपने विश्राम करने या सोने के कमरे को साफ-सुथरा, हवादार और खुला-खुला रखें। चादरें, तकियों के गिलाफ तथा पर्दों को बदलती रहें तथा मैट्रेस या गद्दों को भी समय-समय पर धूप दिखाकर झटकारें।

* मेडिटेशन, योगा या ध्यान का प्रयोग एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव से दूर रहने के लिए करें।

* कोई भी एक व्यायाम रोज जरूर करें। इसके लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा दें और व्यायाम के तरीके बदलते रहें, जैसे कभी एयरोबिक्स करें तो कभी सिर्फ तेज चलें। अगर किसी भी चीज के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे तो दफ्तर या घर की सीढ़ियां चढ़ने और तेज चलने का लक्ष्य रखें। कोशिश करें कि दफ्तर में भी आपको बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठा रहना पड़े।

* 45 की उम्र के बाद अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें और यदि डॉक्टर आपको कोई औषधि देता है तो उसे नियमित लें। प्रकृति के करीब रहने का समय जरूर निकालें। बच्चों के साथ खेलें, अपने पालतू जानवर के साथ दौड़ें और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन का भी समय निकालें।


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