एक अनुभव – श्रीमत भागवत गीता से।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

 

Jaya Kishori Ji-kmsraj51

जया शर्मा किशोरी जी।

जया शर्मा किशोरी जी के शब्दाें में।

जब हम हाई स्कूल में थे उस समय गीता का अभ्यास पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था।

गीता पढ़ाने के लिए जो एक शास्त्रीजी नियुक्त किये गये थे, जो बड़े विद्वान व मिलनसार स्वभाव के थे।
वो हमें गीता के एक-दो अध्यायों का पठन कराते।
गीता के अलावा धर्म व अध्यात्म की बातें भी सिखाते।

उनका गीता पढाने का तरीका सुंदर था लेकिन ज्यादातर छात्र उनमें दिलचस्पी नहीं लेते थे।

कई छात्रों को तो धर्म के नाम से ही अरुचि थी।
वो मानते की गीता जैसे ग्रंथो का अध्ययन करने वाले लोग संसार में आम आदमी की तरह नहीं रह सकते और संसार के लिए निकम्मे हो जाते है।

ऐसे उटपटांग विचारों के प्रभाव से बचे हुए हम कुछ चुंनीदा छात्र ही गीता के अभ्यास में रुचि लेते थे।

अधिकांश छात्रो को तो ये भी मालूम नहीं था की गीता में क्या है फिर भी शास्त्रीजी के प्रयास के कारण, परीक्षा में पास होने के लिए आवश्यक विषय समझकर, वो उसका पठन करने लगे।

ऐसे माहौल में भगवद् गीता ग्रंथ मेरे हाथ में आया।
मैंने सुना था की गीता केवल भारत का ही नहीं, विश्व का प्रमुख धर्मग्रंथ माना जाता है।
इसी वजह से गीता का पठन करना मुझे आवश्यक लगा।

उस वक्त मेरा संस्कृत का ज्ञान बिल्कुल साधारण था।
संस्कृत सिखना मैंने अपनी चौथी कक्षा से शुरू किया था, अतः गीता के श्लोकों को सही मायने में समझने का काम मेरे बस का नहीं था, फिर भी मैंने प्रयत्न ज़ारी रखे।

कुछ ही समय में गीता के श्लोकों को समझना मेरे लिए उतना कठिन नहीं रहा जितना पहले हुआ करता था।

शुरु में मैंने अपना ध्यान संस्कृत श्लोकों को समझने के बजाय उसके अर्थ पर दिया।
उसका नतीजा यह निकला की मुझे उसके अर्थ समझमें आने लगे।

यूँ तो गीता के अध्याय समझने कठिन है, किन्तु बारवाँ, पंद्रहवाँ, सोलहवाँ व दूसरा अध्याय बहुत सरल है।

गीता के दूसरे अध्याय को तो मैं कई बार पठन करती क्योंकि दूसरा अध्याय मुझे विशेष रुप से आकर्षित करता था।
मानो मेरे लिए वो प्रेरणा के स्त्रोत जैसे थे।

गीता के श्लोक व अनुवाद मैं बडे ध्यान से पढ़ती, विशेषतः हर रोज रात के समय सोने से पहले।
कुछ अरसे बाद वो मुझे स्मृतिबद्ध हो गये।

जीवन में ये बात समझ में आयी की महान बनने के लिए सदगुणी बनना कीतना आवश्यक है।
उसके लिए कड़े प्रयासों की आवश्यकता थी, मैंने अपने प्रयास बलवत्तर कर दिये।

गीता ने मानो एक माँ की भाँति मुझे मार्गदर्शन दिया, जीवन को कीस तरह से मोड़ना चाहिए उसकी समझ दी और जीवन की शुद्धि के लिए आवश्यक प्रेरणा भी प्रदान की।

मैंने बड़ी सावधानी से अपने जीवन को सदगुणों की प्रतिकृति बनाना प्रारंभ किया।

हर रोज रात को सोते वक्त अपने आपको पूरी तरह टटोलती, सोचती की आज क्या सही किया और क्या गलत।
नतीजा यह निकला की मेरी जागृति बढ़ी और जाग्रत रहकर प्रत्येक कार्य को जाँचने लगी।

अगर कुछ गलत करने का सोचती तो तुरंत वो आगे आके मुझे बचा लेता।

संजोग से अगर साधारण सी गलती भी होती तो उसके लिए मन में बहुत पश्चाताप होता और उसे भविष्य में न दोहराने का दृढ संकल्प करती।

भगवद् गीता के प्रति मेरा प्यार व पूज्यभाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही गया।
उसमें कभी कोई बाधा या रुकावट नहीं आयी।

गीता ने मुझे जो दिया, अनमोल साबित हुआ।
उसकी प्रेरणा से मेरे विचारों की दरिद्रता दूर हुई, मानो मैं आध्यात्मिक रुप से धनी हो गयी।

गीता को यथाशक्ति समझने की कोशिस मैंने अपनी आगे की जिंदगी में जारी रखी।

आज मैं निर्भयता से यह कह सकती हूँ की गीतापठन ने मेरी भावि जिंदगी के रुख को बदल दिया।

जय श्री कृष्णा।

~जया शर्मा किशोरी जी।

We are grateful to Pujya Jaya sharma Kishori Ji.

Jaya Kishori Ji-kmsraj51

जया शर्मा किशोरी जी।

 

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

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Positive Consciousness While Performing Actions

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Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

Positive Consciousness While Performing Actions

1. The seeds, the inspirations, planted in sitting meditation should be carried into action. Powerful thoughts carried straight away into action always yield powerful results.

2. The remembrance should be that the soul is the child and student of the Supreme Being (Supreme Soul) and should reflect the father and teacher through its actions.

3. The remembrance of the Supreme Soul as a constant companion sustains an internal relationship with Him whilst performing actions.

4. Churn (think deeply) over points of spiritual knowledge by relating them to your immediate karmas (actions).

5. Practice going beyond sound in one second. At different times during the day, stop, pack up all worldly thoughts and spend a few minutes in meditation. This is a really powerful way to strengthen the intellect. After a few minutes, return to the world of sound with the reinforced awareness of being an actor.

6. Practice seeing all those who come into contact with you as souls, tiny points of conscient (living energy) light situated at the centre of the forehead. In this way we will not be pulled into body consciousness, and will avoid negative interactions with others.

– Message –

Determination is the best companion.

Expression: When things go wrong, the first reaction is of fear. Because of this, I can’t put in any effort to better the situation. I start looking for a companion, a support who can provide me help. But I rarely get help from outside.

Experience: When I have to look for something to rely on, the only support I get is from my own determined thought. I need to make it my companion, not letting go of it till I succeed. This will help me overcome my fear and move towards success.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।

 ~KMSRAJ51

 

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मन से कभी भी जीवन में निराश ना हाेना।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

“कभी भी मन से निराश हाेकर जीवन में बैठ ना जाना,
माना कि समस्यायें ताे जीवन में बहुत आयेगी,
लेकिन काेई भी समस्या लंबे समय तक, टिक नहीं सकती।”

-KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं,

ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

हर एक शब्द दो-अर्थी (Positive “or” Negative) हाेता हैं,
यह ताे साेंचने वाले पर निर्भर करता है।
की वह क्या (Positive “or” Negative) साेंच रहा हैं॥

-KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”

-Kmsraj51 

अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 –KMSRAJ51

जिस बात काे आप (स्वयं) अपने आप तक सिमित नहीं रख सकते,
भला काेई आैर कैसे, उस बात काे अपने आप तक सिमित रख सकता हैं।

 –KMSRAJ51

“अपने मन काे इतना संयमित करले कि जिस समय जाे भी कार्य करें,
उस कार्य काे करने में इस कदर खाे जायें कि, उस कार्य के अलावा,
उस समय आपकाे आैर कुछ भी ना सुझे॥”

 –KMSRAJ51

जीवन का लक्ष्य पता करें, उसे पाने की इच्छा पैदा करें।

ऐसा नहीं करेंगे तो आप एक काम छोड़कर दूसरा और फिर तीसरा करते रहेंगे और खुद को नाकाम मानने लगेंगे। 

-KMSRAJ51

काम या लक्ष्य पर दृढ़ न रहना मानसिक थकावट को बताता है।

महत्वपूर्ण मौके पर पीछे हट गए। जबकि यह सफलता के सबसे करीब पहुंचने की स्थिति होती है। 

-KMSRAJ51

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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* चांदी की छड़ी।

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दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-5

KMSRAJ51-Problem Solve

दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

अक्सर कई छात्र मेल के द्वारा या फोन के माध्यम से हमसे पूछते हैं कि हम प्रवेश परिक्षाओं में कैसे सफलता पायें या किस तरह तैयारी करें कि हमें कामयाबी मिले?  सच तो ये है कि, कामयाबी की चाह लिये हम सब अपने-अपने क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं। परन्तु अपने कार्य सम्पादन के दौरान अक्सर एक दुविधा में भी रहते हैं कि हमारे द्वारा किया गया कार्य सफल होगा या नही, ये हम कर पायेंगे या नही  इत्यादि इत्यादी. मित्रों, इस तरह की आशंकायें हमारी ऊर्जा को छींण करने का प्रयास करती हैं और स्वंय के विश्वास पर एक प्रश्न चिन्ह लगा देती हैं।  यही दुविधा सफलता की सबसे बङी बाधा है। किसी भी कार्य को करने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करना कार्य की रणनीति होती है परंतु जब नकारात्मक पहलु योजना पर हावी होता है तो यही संशय सफलता की सबसे बङी अङचन होती है। जिसके कारण हम एक कदम भी आगे नही रख पाते। जबकि जिवन का सबसे बङा सच है कि हमेशा परिस्थिति एक जैसी नही रहती, लक्ष्य की सफलता में कई रोङे आते हैं। जो इन रुकावटों को आत्मविश्वास के साथ पार करता है वो लक्ष्य हासिल करने में सफल होता है। लेकिन दूसरी ओर जो दुविधा के जंजाल में फंस जाता है, वो कभी भी आशाजनक सफलता नही अर्जित कर पाता है। ज्यादातर लोग ज्ञान और प्रतिभा की कमी से नही हारते बल्की इसलिये हार जाते हैं कि दुविधा में पङकर जीत से पहले ही मैदान छोङ देते हैं।

दुविधा तो एक द्वंद की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति निर्णय नही ले पाता और न ही स्वतंत्र ढंग से सोच पाता है। इतिहास गवाह है कि प्रत्येक सफल व्यक्तियों के रास्ते में अनेक मुश्किलें आईं किन्तु उन्होने उसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया समझा और आगे के कार्य हेतु कोशिश करते रहे। कई बार हम लोग किसी कार्य को करने से पहले इतना ज्यादा सोचते हैं कि समय पर काम नही हो पाता या हम अवसर को दुविधा के भंवर में कहीं खो देते हैं। यदि हम विद्यार्थी की बात करें तो कई बार ऐसा होता है कि कुछ छात्र विषय को लेकर इतने ज्यादा संशय में रहते हैं कि वो फार्म भरने में लेट हो जाते हैं या आशंकाओं के चक्कर में गलत विषय का चयन कर लेते हैं। जबकि सच तो ये है कि सभी विषय में मेहनत करनी होती है तभी अच्छे अंक मिलते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि एक बुद्धिमान व्यक्ति भी लंबे समय तक दुविधाग्रस्त रहता है तो उसका भी मानसिक क्षरण हो जाता है। जिसके कारण सक्षम व्यक्ति भी उन्नति नही कर पाता। दुविधा सफलता की राह में सबसे बङी अङचन है। अत्यधिक संशय आत्मविश्वास को भी कमजोर बना देता है। यदि हम एक परशेंट असफल भी होते हैं, तो भी हमारे अनुभव में इजाफा ही होता है और अनुभव से आत्मविश्वास बढता है। मन में ये विश्वास रखना भी जरूरी है कि सब कुछ संभव है।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि,  संभव की सीमा जानने का सबसे अच्छा तरीका है, असंभव से भी आगे निकल जाना।

जो लोग सफलता की इबारत लिखे हैं उन्हे भी दुविधाओं के कोहरे से गुजरना पढा है परन्तु ऐसे में उन लोगों ने परिस्थिति को इस तरह ढाला कि वे अपनी योजनाएं  स्वयं निर्धारित कर सके। सफलता के लिये ये भी आवश्यक है कि हम हर परिस्थिति में स्वंय को तैयार रखें। किसी भी सफलता के लिये ये जरूरी है कि हम निर्णय लेने की भूमिका में आगे बढें; क्योंकि एक कदम भी आगे बढाने के लिये निर्णय तो लेना ही पङता है, तद्पश्चात जिंदगी हमें धीरे-धीरे खुद ही निर्णय लेना सीखा देती है। अतः सबसे पहले हम दुविधापूर्ण मनः स्थिति के शिकार न होते हुए स्वंय को संतुलित रखते हुए दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें, जिससे आशंकाओं और दुविधाओं का तिमिर नष्ट हो तथा सफलता की और हमसब का कदम अग्रसर हो।

डॉ.ए.पी.जे. कलाम के अनुसार,  Confidence & hard work is the best medicine to kill the disease called failure. It will make you a successful person. 

Post inspired by Mrs. अनिता शर्मा जी

Educational & Inspirational VIdeos (9.8 lacs+ Views):  YouTube videos Link

(http://www.youtube.com/channel/UCRh-7JPESNZWesMRfjvegcA?feature=watch)

Blog:  http://roshansavera.blogspot.in/

E-mail ID:  voiceforblind@gmail.com

अनीता जी नेत्रहीन विद्यार्थियों के सेवार्थ काम करती हैं।

एक अपील

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful article with KMSRAJ51 Readers.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

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“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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* चांदी की छड़ी।

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