21 ऐसे महावाक्य जो आपके जिंदगी को बदल दे।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ 21 ऐसे महावाक्य जो आपके जिंदगी को बदल दे। ϒ

प्यारे दोस्तों – ज़िंदगी बहुत छोटी है इसलिए समय बर्बाद मत करो। समय के महत्व काे समझे व समय के साथ-२ चलने का अभ्यास करें। अपने Mind काे कुछ इस तरह से खुराक दें।

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  • जीवन में जब भी समस्याये आती है, हमारी साेई हुई मानसिक शक्तियों काे जगाकर जाती हैं।〈1〉
  • कहते है सत्य काे चाहे जितना भी छिपाने कि कोशिश करलाे, पर एक ना एक दिन सत्य प्रत्यक्ष हाे ही जाता हैं। इसलिए सत्य को कभी भी छिपाने की कोशिश ना करें।〈2〉
  • करुणा व शील किसी भी इंसान काे सत्य की गहराई तक ले जाता हैं।〈3〉
  • अपने स्‍वप्‍नाें काे अपने Mind में सदैव स्मरण(याद) करते रहाे और उसी अनुसार तीव्र गति से आगे बढ़ते रहाे।〈4〉
  • यह शरीर (हम मनुष्यों का शरीर) पांच तत्वों (Five Elements) से मिलकर बना है, शरीर सदैव ही इन्हीं पांच तत्वों(पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु व आकाश) की माँग करता है, इस शरीर काे इन पांच तत्वों के अलावा और कुछ भी नहीं चाहिए।〈5〉
  • आत्मा इस शरीर रूपी कार का चालक(Driver) है, जब तक शरीर रूपी कार सही है- तब तक आत्मा इसे चलाती रहती हैं।〈6〉
  • हर एक इंसान(मनुष्य) कि यहीं सोच हाे, की उसकी वजह से कभी भी किसी काे कोई दुःख ना पहुँचे।〈7〉
  • हर इंसान(मनुष्य) के अंदर असीमित शक्तिया निहित(भरी) है। अपनी आंतरिक शक्तियों काे समय प्रमाण Use करना सीखें।〈8〉
  • आपकाे अपने और अपने कार्य के ऊपर पूर्ण विश्वास हैं ताे आपकाे अपने लक्ष्य तक पहुंचने से काेई भी(इंसान या शक्ति) राेक नहीं सकता।〈9〉
  • इस पृथ्वी पर सबसे ज्यादा अगर काेई पूज्यनीय है ताे वह है माता-पिता।〈10〉
  • अपने संकल्प और कर्म में दृढ़ता लाये, कोई भी निर्णय सोच-समझ कर ही लें।〈11〉
  • शरीर यदि बीमार है ताे आप मन से बीमार न हाे जाये, जाे मन से बीमार नहीं हाेता, उसके शरीर की बीमारी भी अतिशीघ्र ही दुर हाे जाती हैं।〈12〉
  • चिंता करने से मन और बुद्धि क्षीण हो जाती है। जिसके परिणाम स्वरूप ना ही सही सोच पाते हैं, ना ही सही निर्णय ले पाते हैं।〈13〉
  • जीवन में कभी भी सीखना(learn)बंद ना करें। हर एक क्षेत्र (Sector) का ज्ञान रखना अपने आप काे Present time में Secure रखने जैसा हैं।〈14〉
  • जीवन में हर एक चीज का बैलेंस बनाकर चलें।〈15〉
  • खान-पान और संग का असर मन पर बहुत ज्यादा पड़ता है। खान-पान में शुद्धि हाे और संग अच्छाें का हाे ताे ही अच्छा हैं।〈16〉
  • अच्छे व सच्चे इंसान काे आज के समय में सब नहीं पहचान पाते। अंतरज्ञानी आत्मा ही सच्चे इंसान काे पहचान पाती हैं।〈17〉
  • जीवन में जब भी बाेलाे सत्य ही बाेलाे, अन्यथा बाेलाे ही ना ताे ही अच्छा।〈18〉
  • चाहे काेई कितना भी बड़ा विकर्मी क्यो न हाे उसके अंदर भी कोई ना कोई गुण और विशेषताएं अवश्य हाेगी। गुणाे काे ग्रहण करना सीखें, चाहे परिस्थिति व स्थान कैसा भी हाे।〈19〉
  • अपनी सोच पर “विचार सागर मंथन” करना सीखें।〈20〉
  • अगर जीवन में कुछ करने की ठान लें, तो पीछे ना हटे।〈21〉

अपने आप को आप स्वयं रोकते है।~सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

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जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51 ϒ

51 LCQof KMSRAJ51

Δ मानव मस्तिष्क असीमित शक्तियों से भरा हैं, लेकिन ये शक्तियां सुषुप्त अवस्था में है, बस ज़रूरत है इन सुषुप्त शक्तियों काे जगाने की। {1}

Δ आत्मा कि मुख्यतः तीन शक्तिया है, प्रथम – मन, द्वितीय – बुद्धि(विवेक) और तृतीय संस्कार। मन सोचने का कार्य करती है, बुद्धि(विवेक) निर्णय(Judgment) करने का कार्य करती है तथा बुद्धि के निर्णय अनुसार मानव शरीर की कर्मइंद्रियाे द्वारा जाे कर्म हाेता है वही  संस्कार के रूप में आत्मा के अंदर रिकॉर्ड हाेता रहता हैं, और संस्कार अनुसार ही काेई भी आत्मा नया शरीर(पुनर्जन्म) लेती हैं। {2}

Δ “सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।” {3}

Δ मनुष्य सदैव मनुष्य के ही रूप में जन्म लेता हैं, हा बस फ़र्क इतना ही पड़ता है कि हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर – नारी शरीर के रूप में जन्म लेती है और नारी शरीर हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर के रूप में जन्म लेती है। यह परिवर्तन चक्र हर तीन जन्म पर हाेता रहता हैं। {4}

Δ “अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”। {5}

Δ “अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।” {6}

Δ जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।
स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥ {7}

Δ अगर कुछ बदलना है ताे सबसे पहले अपने सोच, कर्म व अपने आप काे बदलें। {8}

Δ काेई भी ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता – हा इंसान बुरे हाे सकते हैं। {9}

Δ सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता। {10}

Δ आत्मबल और मन को शक्तिशाली बनाने के लिए – आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और सकारात्मक विचार रूपी शक्ति का भोजन दो। {11}

Δ स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत। {12}

Δ जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। {13}

Δ हमेशा अच्छे कार्य के लिए समर्थन व सहयाेग करें। चाहे उस अच्छे कार्य की अगुआई आपके दुश्मन(Eनेम्य्) के द्वारा ही हाे रही हाे। {14}

Δ मूर्खाें कि एक खासियत हाेती हैं, ओ किसी एक बात काे लेकर लंबे समय तक बैठे रहते है, और मूर्खाें काे बात-बात पर बिना किसी मतलब के भी हंसी खुब आती हैं। {15}

Δ समय न गवाये वरना पछताने के अलावा कुछ न बचेगा जीवन में। {16}

Δ आप अपने अतीत काे नही बदल सकते, लेकिन अपने वर्तमान और भविष्य काे बदलना आपके अपने हाथ में हैं। इसलिए जाे बीत गया उसे याद कर, अपने वर्तमान और भविष्य काे समाप्त ना करें। {17}

Δ आज के समय में ९७% मनुष्य यही साेचते है, कि मेरे किस्मत में जाे हाेगा वही मिलेगा और ऐसा साेचकर वह बैठ जाते हैं। आचार्य चाणक्य जी ने कितनी अच्छी बात कही हैं। “क्या पता किस्मत में ही लिखा हाे की काेशिश करने से ही मिलेगा।” {18}

Δ हमेशा अपनी सोच काे अन्य लोगों(दुसराें) से अलग रखाें तभी आपकी अपनी कुछ अलग पहचान बन पायेगी। {19}

Δ आप रहाे या ना रहाे, लेकिन ऐसा कर्म कराें जीवनभर की आपके कर्म सदैव आपकाे जिवित रखें। {20}

Δ जीवन में एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात दाग पर दाग लगाना इसलिए बीती को बिन्दी लगाओ(Full Stop), और आगे बढ़ाे। {21}

Δ किस्मत, नसीब़ और लक के भराेसे रहने पर किसी काे सफलता नहीं मिलती, सफलता ताे सच्चे मन से निरन्तर कार्य करने से ही मिलती हैं। इसलिए जीवन में निरन्तर कार्य करते हुए आगे बढ़ते चलाे। {22}

Δ केवल एक ही बुरा कर्म, किसी भी मनुष्य का शानाें, शाैंकत और इज़्ज़त यू मिनटाें में मिट्टी में मिला देता हैं। जैसे रेत से बना घर त्त्वरित गिर जाता हैं। {23}

Δ बुरी बातें ना खुद सुनो, ना ही किसी काे सुनाओं। {24}

Δ सच्चा ब्राह्मण वह है जो पूर्ण शुद्धि और विधि पूर्वक हर कार्य करे। {25}

Δ ज्ञान और ध्यान का हाेना जरूरी हैं जीवन में। बिना ज्ञान और ध्यान के दिमाग शांत नहीं हाे सकता, साे जीवन में, ज्ञान और ध्यान का हाेना बहुत जरूरी हैं। {26}

Δ “आत्मविश्वास किसी भी इंसान के लिए सर्वश्रेष्ठ आत्मिक शक्ति है। अगर वह स्वयं पर विश्वास रखकर कोई कर्म करता है तो कोई भी मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती”। {27}

Δ चोट लगाने वाले का काम है चोट लगाना और आपका काम है अपने को सदैव बचा लेना। {28}

Δ ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता, इंसान(जीवआत्मा) आैर इंसान के कर्म बुरे हाे सकते हैं। {29}

Δ किसी भी मनुष्य का परम धर्म है, सात्त्विक आहार, सात्त्विक विचार और सात्त्विक जीवन। जिससे निराेगी काया(तन-Body), दिघा॔यु जीवन और स्वस्थ मन काे प्राप्त हाे। {30}

Δ “अगर अपनी अलग पहचान बनानी है तो कुछ अलग कीजिए। जब तक दूसरों से डिफरेंट और अच्छा नहीं करेंगे, तब तक आगे बढ़ना मुश्किल है। अलग करने से रिस्क तो होता है पर कंपीटिशन भी तो कम ही रहता है।” {31}

Δ मन को प्रभू की अमानत समझकर उसे सदा श्रेष्ठ कार्य में लगाओ। {32}

Δ सदैव याद रखें जीवन का सबसे बड़ा शान है सदा खुश रहना और खुशी बांटना-यही सबसे बड़ा शान है। {33}

Δ संकल्पों की शक्ति-संकल्पों को बचाओ तो समय, बोल सब स्वत: ही बच जायेंगे। {34}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना चाहते हैं ताे अवसर का लाभ उठाओ, समय की कद्र करो, और शब्दों को सोच समझ कर खर्च करो। {35}

Δ आत्मा रूपी पुरूष को श्रेष्ठ बनाने वाले ही सच्चे पुरूषार्थी हैं। सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो सदैव आत्म-अभिमानी रहते हैं। {36}

Δ जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।
उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥ {37}

Δ सदैव याद रखें किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है। जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता। {38}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे। {39}

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

Δ जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है। {40}

Δ जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें, और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें। {41}

Δ याद रखें प्रत्यक्ष प्रमाण वह है जिसका हर कर्म सर्व को प्रेरणा देने वाला हाे। {42}

Δ पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है।
यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है।
यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है॥ {43}

Δ मास्टर(मालिक) का अर्थ है कि जिस शक्ति का जिस समय आह्वान करो वो शक्ति उसी समय प्रैक्टिकल स्वरूप में अनुभव हो। आर्डर किया और हाजिर। ऐसे नहीं कि आर्डर करो सहनशक्ति को और आये सामना करने की शक्ति, तो उसको मास्टर नहीं कहेंगे। तो ट्रायल करो कि जिस समय जो शक्ति आवश्यक है उस समय वही शक्ति कार्य में आती है? एक सेकण्ड का भी फर्क पड़ा तो जीत के बजाए हार हो जायेगी। {44}

Δ काेई भी इंसान जितना अध्ययन करता हैं, उतना ही उसे अपने अज्ञान का आभास होता जाता है। {45}

Δ सदैव याद रखें जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते” या “तुम्हारे बस की बात नहीं”। {46}

Δ मनुष्य के विचार बहते हुए पानी की तरह है, यदि हम उसमें गदंगी मिलाएँगे ताे वह नाला बन जाएगा आैर यदि ज्ञान व ध्यान रूपी सुगंध मिला देंगे ताे वही पवित्र बन जाएगा। {47}

Δ हम अपने असली स्वरूप काे भुल गये है, जिस कारण हमे अपने निजी गुण और संस्कार भी याद नही हैं। यह भुल ही सभी दुःखाे का कारण हैं।आत्मा की तीन मुख्य शक्तिया हाेती हैं। {48}

“प्रथम-मन, द्वितीय-बुद्धि और तृतीय-संस्कार।”

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,
१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥ {49}

Δ मन कि शक्ति काे सही समय पर उपयोग करें।

मन में वह असिमित शक्ति भरी हैं, जिसका सही उपयोग कर, हर असंभव कार्य काे सरलता पूर्वक संभव में बदला जा सकता हैं। मन कि शक्तियाे काे सही समय पर और सही दिशा में उपयोग करना सीखें। {50}

Δ आत्मा के सात माैलिक गुण हाेते हैं।

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand), {51}

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

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Is God Really Present Everywhere?

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Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

 Is God Really Present Everywhere Part 1 ?

Is it really true that the Supreme Soul (God) is present everywhere, in each atom in the entire universe? The sun is in one place yet its influence can be felt throughout the solar system to different degrees in different places, providing a source of heat and light, needs absolutely essential for our physical life. The closer one is to the sun, the greater the effect. In the same way God, the one who is the ocean of perfect characteristics, the source of all spiritual needs, does not have to be omnipresent (present everywhere) in order to be with us wherever we are. He can be in one location and we can still experience his closeness.

If God were literally omnipresent and thus in every atom, where is this love, peace, joy and wisdom? Are they present in every atom in this human world? If God is present inside me, how could ignorance have come to me in the first place? Can ignorance come to God? If God is omnipresent to where or to whom do I turn my thoughts? Just as a radio transmitter emanates waves throughout the world and a receiver, if tuned in, will pick them up, so too if the mind is tuned totally to the material world and physical activities, then I am unable to experience God practically in my daily life. Even though He always radiates His qualities, I can only pick up those transmissions if I am soul-conscious and if I turn my thoughts in His direction to His location. If God were omnipresent, there would be no meaning to the tradition throughout all cultures to have special places set aside (e.g. temples and churches) for worship. In those special places, is God more omnipresent than in other non-sacred places? If God were omnipresent, are the ones who are so-called God-realised beings more God than the ones who have not realised?

ð Message ð

A powerful stage is like a switch which finishes darkness of negativity in a second.

Expression: Darkness is dispelled when a light is switched on. Similarly, a powerful stage is also a light switch. When this switch is on, one can put an end to all wasteful darkness and no longer have to labour to stop any wasteful thoughts. By becoming powerful, one can naturally become a donor, as there is nothing waste within.

Experience: When I am aware of my positive qualities and what I can contribute to others, I am able to be powerful. This naturally enables me to be light and spread the inner light to others. I am never influenced negatively with any kind of waste or negative, but am always able to maintain my own positivity and that of others too.

 Is God Really Present Everywhere Part 2 ?

If the Supreme Soul (God) were omnipresent there would be no need for knowledge and no need to search for peace. The One who is the ocean of peace and the ocean of knowledge would be everywhere. Perhaps the strongest point against the idea of literal omnipresence is the point of relationship. In the heart of every soul – there is a distinct memory – I am the child, God is my Father. If God is omnipresent, does that mean that the Father is present inside the child?

God is also the supreme teacher, guide, liberator, friend and purifier of human souls. That is why everyone turns their thoughts to Him in their hours of sorrow. The idea that God is omnipresent is indeed the ultimate excuse and greatest escape from responsibility of the mistakes that human souls have made and continue to make. After all, if God were omnipresent (present in everyone) He would be responsible for good as well as evil karmas that humans commit. An omnipresent God implies that we have nothing to complete in ourselves for we are already God. Am I really God? One could not seriously admit to such a claim. It is only through deep and concentrated meditation that one can enter the spiritual dimension where His presence is truly felt.

ð Message ð

You will be truly successful when you are loving and detached with the ones you come into contact with.

Expression: With all the people that you come into contact with throughout the day, check if you are able to have a balance between being loving and detached. Detachment doesn’t mean to stay away from people, but to be with them and yet be detached.

Experience: Make the practice of seeing only specialities, your own and that of others. This will enable you to maintain your self-respect and you will be able to find yourself both loving and detached.

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जीतने की प्रबल इच्छा।

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ϒ जीतने की प्रबल इच्छा। ϒ

Strong desire to win-Kmsraj51

यह बात बहुत समय पहले कि है, एक महान शुरवीर योद्धा अपने दुश्मन राज्य से जब युद्ध करने जा रहा था, ताे उसने देखा की उसके सैनिकों में दुश्मनाें से युद्ध करने काे लेकर भय हैं। भय का मुख्य कारण था, दुश्मन राज्य के सैनिकों की संख्या बहुत अधिक थी।

युद्ध करने के लिए सागर के पार जाना था। वह महान शुरवीर योद्धा अपने सभी सैनिकों के साथ बड़े समुद्री जहाजाें व बड़े नावाें से सागर के किनारे पहुँचने पर सारे जहाजाें और नावाें काे जला दिया।

फिर उस महान शुरवीर योद्धा ने अपने सैनिकों का उत्साह बढ़ाते हुए बाेला अगर आप सभी काे वापस घर जाना है, ताे हर हाल में हम सभी काे दुश्मनाें से जीतना ही हाेगा, क्योंकी वापस जाने के लिए नाव व जहाज अब नहीं रहे । अगर हम सभी दुश्मनाें से युद्ध ना जीत पाए ताे यही मारे जायेगे। इसलिए हर हाल में हम सभी काे दुश्मनाें से युद्ध जीतना ही हैं।

साेचियें मित्रों क्या हुआँ हाेगा।

वह महान शुरवीर योद्धा, युद्ध जीत गया था। सभी सैनिकों काे आंतरिक प्रबल इच्छा शक्ति का एहसास हाे गया था।

सीख: अगर किसी भी कार्य काे करने की प्रबल आंतरिक दृढ़ इच्छा हाे, ताे सफलता जरूर मिलेगीं।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

 ~KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

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What Is The Soul World?

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

 What Is The Soul World? 

The Soul World, which is the sixth element, is filled with golden-red, divine light (experienced during meditation). Over there, the conscient (living entities), the souls, have neither bodies of matter nor bodies of light. There exists neither thought, word nor action; just complete stillness, silence and peace. Just as this world occupies a tiny part of this physical universe, so too the souls occupy just a tiny portion of this infinite world. This is the highest region, the original home of souls and the Supreme Soul, God. This is the region which human beings, irrespective of culture or religion, have tried to reach in thoughts, prayers, etc. It is caIled by various names in various religions – Heaven, Nirvana, Shantidham, Paramdham, Brahmand, etc. Before I came to this earth, I was there with all other souls, brothers. The experience of complete and utter peace, purity and silence is there in my sweet home. There the soul is untouched by matter. Souls reside there as star-like points of light. They remain dormant, with their roles in the physical world latent (hidden) within them. The roles emerge when they the souls appear on earth, the world stage.

The souls stay in the soul world in well-defined groups. They descend onto this earth in a certain chronological order, according to the quality of sanskaras. At the apex of this configuration of souls is the Supreme Soul, whom the other souls call God, Allah, Jehovah, etc. Beneath him the souls are positioned number wise according to their degree of similarity to the Supreme. Depending on the quality and the part the soul has to play, it emerges in the human world, taking the body of a developing baby in a mother’s womb. It then continues through the cycle of birth and rebirth according to the role that it has. When the parts are over, souls again return to this world of light, peace, liberation and complete purity. The deep rest the soul has had in the home has such an effect on it that even though it forgets the details about that world, there is always a desire to search for that peace and silence when it becomes lost and confused in the world of matter. In that supreme region only, souls remain in their completely original, natural state, which can be experienced through Rajyoga meditation.

Θ Message Θ

All problems can be overcome when you make a determined promise to yourself.

Checking: When a problem comes up and you are working on it, check what kind of thoughts you are having. Check if your thought to overcome the problem is filled with determination?

Practice: Each day reinforce the thought in your mind to overcome the problem that you are facing. Stamp the thought with determination and you will become victorious in overcoming your problem.

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Transforming (Changing) My Thought Patterns

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Transforming (Changing) My Thought Patterns 

Why is it that we can’t change the pattern of our thoughts so easily? Imagine a bird being so comfortable in its nest that, though perhaps sometimes it stands on the branch of the tree to inflate its chest and adjust its feathers, it never wants to fly and does not even realize it could fly. It never knows the blissful freedom of flight, never feels the wind through its wings. It thinks the other birds that are flying around are unwise or foolish. In much the same way, we never really leave our nests of old thought patterns. Our habitual thoughts become our comfort zone and each repetitive thought pattern is like a twig in the nest, which makes the nest stronger and our stay in the nest seemingly comfortable and permanent. We never experience our true spiritual freedom or flight or feel the breeze of our inner beautiful nature. Even the thought, I am a soul has to be realized eventually, so that we can actually experience its deepest truth.

In the world of spirituality, thoughts are like the map, but they are not the territory nor the reality of the experience. Thinking I am a peaceful soul or I am a loveful soul or I am a powerful soul is not being soul-conscious, it is only theory or knowledge, but it is definitely an essential start. Maps are important and necessary, until we know the way home to experience. Reaching this final destination of experience makes it easier for us and empowers us to transform or change our old thought patterns.

Θ Message Θ

An elevated consciousness brings speciality to the task being done.

Expression: As is the consciousness, so is the feeling behind the task, and therefore its quality. Just to perform action and finish the tasks at hand does not bring speciality and accuracy as much as it should. When the consciousness is special, that means before a task is performed there is a thought given both to the task and to the self, there is speciality revealed in the task.

Experience: When I am able to start each task with a special consciousness, like “I am victorious”, or “I am powerful” or “this task is for the benefit of all”, I am able to experience the speciality of doing the task. I am also able to increase my state of self-respect, whatever the task or however simple it maybe.

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पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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