जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

Kmsraj51 की कलम से…..
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ϒ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51 ϒ

51 LCQof KMSRAJ51

Δ मानव मस्तिष्क असीमित शक्तियों से भरा हैं, लेकिन ये शक्तियां सुषुप्त अवस्था में है, बस ज़रूरत है इन सुषुप्त शक्तियों काे जगाने की। {1}

Δ आत्मा कि मुख्यतः तीन शक्तिया है, प्रथम – मन, द्वितीय – बुद्धि(विवेक) और तृतीय संस्कार। मन सोचने का कार्य करती है, बुद्धि(विवेक) निर्णय(Judgment) करने का कार्य करती है तथा बुद्धि के निर्णय अनुसार मानव शरीर की कर्मइंद्रियाे द्वारा जाे कर्म हाेता है वही  संस्कार के रूप में आत्मा के अंदर रिकॉर्ड हाेता रहता हैं, और संस्कार अनुसार ही काेई भी आत्मा नया शरीर(पुनर्जन्म) लेती हैं। {2}

Δ “सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।” {3}

Δ मनुष्य सदैव मनुष्य के ही रूप में जन्म लेता हैं, हा बस फ़र्क इतना ही पड़ता है कि हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर – नारी शरीर के रूप में जन्म लेती है और नारी शरीर हर तीन जन्म के बाद पुरुष शरीर के रूप में जन्म लेती है। यह परिवर्तन चक्र हर तीन जन्म पर हाेता रहता हैं। {4}

Δ “अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”। {5}

Δ “अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।” {6}

Δ जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।
स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥ {7}

Δ अगर कुछ बदलना है ताे सबसे पहले अपने सोच, कर्म व अपने आप काे बदलें। {8}

Δ काेई भी ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता – हा इंसान बुरे हाे सकते हैं। {9}

Δ सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता। {10}

Δ आत्मबल और मन को शक्तिशाली बनाने के लिए – आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और सकारात्मक विचार रूपी शक्ति का भोजन दो। {11}

Δ स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत। {12}

Δ जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। {13}

Δ हमेशा अच्छे कार्य के लिए समर्थन व सहयाेग करें। चाहे उस अच्छे कार्य की अगुआई आपके दुश्मन(Eनेम्य्) के द्वारा ही हाे रही हाे। {14}

Δ मूर्खाें कि एक खासियत हाेती हैं, ओ किसी एक बात काे लेकर लंबे समय तक बैठे रहते है, और मूर्खाें काे बात-बात पर बिना किसी मतलब के भी हंसी खुब आती हैं। {15}

Δ समय न गवाये वरना पछताने के अलावा कुछ न बचेगा जीवन में। {16}

Δ आप अपने अतीत काे नही बदल सकते, लेकिन अपने वर्तमान और भविष्य काे बदलना आपके अपने हाथ में हैं। इसलिए जाे बीत गया उसे याद कर, अपने वर्तमान और भविष्य काे समाप्त ना करें। {17}

Δ आज के समय में ९७% मनुष्य यही साेचते है, कि मेरे किस्मत में जाे हाेगा वही मिलेगा और ऐसा साेचकर वह बैठ जाते हैं। आचार्य चाणक्य जी ने कितनी अच्छी बात कही हैं। “क्या पता किस्मत में ही लिखा हाे की काेशिश करने से ही मिलेगा।” {18}

Δ हमेशा अपनी सोच काे अन्य लोगों(दुसराें) से अलग रखाें तभी आपकी अपनी कुछ अलग पहचान बन पायेगी। {19}

Δ आप रहाे या ना रहाे, लेकिन ऐसा कर्म कराें जीवनभर की आपके कर्म सदैव आपकाे जिवित रखें। {20}

Δ जीवन में एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात दाग पर दाग लगाना इसलिए बीती को बिन्दी लगाओ(Full Stop), और आगे बढ़ाे। {21}

Δ किस्मत, नसीब़ और लक के भराेसे रहने पर किसी काे सफलता नहीं मिलती, सफलता ताे सच्चे मन से निरन्तर कार्य करने से ही मिलती हैं। इसलिए जीवन में निरन्तर कार्य करते हुए आगे बढ़ते चलाे। {22}

Δ केवल एक ही बुरा कर्म, किसी भी मनुष्य का शानाें, शाैंकत और इज़्ज़त यू मिनटाें में मिट्टी में मिला देता हैं। जैसे रेत से बना घर त्त्वरित गिर जाता हैं। {23}

Δ बुरी बातें ना खुद सुनो, ना ही किसी काे सुनाओं। {24}

Δ सच्चा ब्राह्मण वह है जो पूर्ण शुद्धि और विधि पूर्वक हर कार्य करे। {25}

Δ ज्ञान और ध्यान का हाेना जरूरी हैं जीवन में। बिना ज्ञान और ध्यान के दिमाग शांत नहीं हाे सकता, साे जीवन में, ज्ञान और ध्यान का हाेना बहुत जरूरी हैं। {26}

Δ “आत्मविश्वास किसी भी इंसान के लिए सर्वश्रेष्ठ आत्मिक शक्ति है। अगर वह स्वयं पर विश्वास रखकर कोई कर्म करता है तो कोई भी मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती”। {27}

Δ चोट लगाने वाले का काम है चोट लगाना और आपका काम है अपने को सदैव बचा लेना। {28}

Δ ज्ञान कभी बुरा नहीं हाेता, इंसान(जीवआत्मा) आैर इंसान के कर्म बुरे हाे सकते हैं। {29}

Δ किसी भी मनुष्य का परम धर्म है, सात्त्विक आहार, सात्त्विक विचार और सात्त्विक जीवन। जिससे निराेगी काया(तन-Body), दिघा॔यु जीवन और स्वस्थ मन काे प्राप्त हाे। {30}

Δ “अगर अपनी अलग पहचान बनानी है तो कुछ अलग कीजिए। जब तक दूसरों से डिफरेंट और अच्छा नहीं करेंगे, तब तक आगे बढ़ना मुश्किल है। अलग करने से रिस्क तो होता है पर कंपीटिशन भी तो कम ही रहता है।” {31}

Δ मन को प्रभू की अमानत समझकर उसे सदा श्रेष्ठ कार्य में लगाओ। {32}

Δ सदैव याद रखें जीवन का सबसे बड़ा शान है सदा खुश रहना और खुशी बांटना-यही सबसे बड़ा शान है। {33}

Δ संकल्पों की शक्ति-संकल्पों को बचाओ तो समय, बोल सब स्वत: ही बच जायेंगे। {34}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना चाहते हैं ताे अवसर का लाभ उठाओ, समय की कद्र करो, और शब्दों को सोच समझ कर खर्च करो। {35}

Δ आत्मा रूपी पुरूष को श्रेष्ठ बनाने वाले ही सच्चे पुरूषार्थी हैं। सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो सदैव आत्म-अभिमानी रहते हैं। {36}

Δ जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।
उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥ {37}

Δ सदैव याद रखें किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है। जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता। {38}

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे। {39}

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

Δ जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है। {40}

Δ जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें, और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें। {41}

Δ याद रखें प्रत्यक्ष प्रमाण वह है जिसका हर कर्म सर्व को प्रेरणा देने वाला हाे। {42}

Δ पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है।
यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है।
यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है॥ {43}

Δ मास्टर(मालिक) का अर्थ है कि जिस शक्ति का जिस समय आह्वान करो वो शक्ति उसी समय प्रैक्टिकल स्वरूप में अनुभव हो। आर्डर किया और हाजिर। ऐसे नहीं कि आर्डर करो सहनशक्ति को और आये सामना करने की शक्ति, तो उसको मास्टर नहीं कहेंगे। तो ट्रायल करो कि जिस समय जो शक्ति आवश्यक है उस समय वही शक्ति कार्य में आती है? एक सेकण्ड का भी फर्क पड़ा तो जीत के बजाए हार हो जायेगी। {44}

Δ काेई भी इंसान जितना अध्ययन करता हैं, उतना ही उसे अपने अज्ञान का आभास होता जाता है। {45}

Δ सदैव याद रखें जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते” या “तुम्हारे बस की बात नहीं”। {46}

Δ मनुष्य के विचार बहते हुए पानी की तरह है, यदि हम उसमें गदंगी मिलाएँगे ताे वह नाला बन जाएगा आैर यदि ज्ञान व ध्यान रूपी सुगंध मिला देंगे ताे वही पवित्र बन जाएगा। {47}

Δ हम अपने असली स्वरूप काे भुल गये है, जिस कारण हमे अपने निजी गुण और संस्कार भी याद नही हैं। यह भुल ही सभी दुःखाे का कारण हैं।आत्मा की तीन मुख्य शक्तिया हाेती हैं। {48}

“प्रथम-मन, द्वितीय-बुद्धि और तृतीय-संस्कार।”

Δ अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,
१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥ {49}

Δ मन कि शक्ति काे सही समय पर उपयोग करें।

मन में वह असिमित शक्ति भरी हैं, जिसका सही उपयोग कर, हर असंभव कार्य काे सरलता पूर्वक संभव में बदला जा सकता हैं। मन कि शक्तियाे काे सही समय पर और सही दिशा में उपयोग करना सीखें। {50}

Δ आत्मा के सात माैलिक गुण हाेते हैं।

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand), {51}

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

जीतने की प्रबल इच्छा।

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ϒ जीतने की प्रबल इच्छा। ϒ

Strong desire to win-Kmsraj51

यह बात बहुत समय पहले कि है, एक महान शुरवीर योद्धा अपने दुश्मन राज्य से जब युद्ध करने जा रहा था, ताे उसने देखा की उसके सैनिकों में दुश्मनाें से युद्ध करने काे लेकर भय हैं। भय का मुख्य कारण था, दुश्मन राज्य के सैनिकों की संख्या बहुत अधिक थी।

युद्ध करने के लिए सागर के पार जाना था। वह महान शुरवीर योद्धा अपने सभी सैनिकों के साथ बड़े समुद्री जहाजाें व बड़े नावाें से सागर के किनारे पहुँचने पर सारे जहाजाें और नावाें काे जला दिया।

फिर उस महान शुरवीर योद्धा ने अपने सैनिकों का उत्साह बढ़ाते हुए बाेला अगर आप सभी काे वापस घर जाना है, ताे हर हाल में हम सभी काे दुश्मनाें से जीतना ही हाेगा, क्योंकी वापस जाने के लिए नाव व जहाज अब नहीं रहे । अगर हम सभी दुश्मनाें से युद्ध ना जीत पाए ताे यही मारे जायेगे। इसलिए हर हाल में हम सभी काे दुश्मनाें से युद्ध जीतना ही हैं।

साेचियें मित्रों क्या हुआँ हाेगा।

वह महान शुरवीर योद्धा, युद्ध जीत गया था। सभी सैनिकों काे आंतरिक प्रबल इच्छा शक्ति का एहसास हाे गया था।

सीख: अगर किसी भी कार्य काे करने की प्रबल आंतरिक दृढ़ इच्छा हाे, ताे सफलता जरूर मिलेगीं।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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खुशीयाँ यूं ही नही मिलती किसी काे।

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ϒ खुशीयाँ यूं ही नही मिलती किसी काे। ϒ

खुशीयाँ यूं ही नही मिलती किसी काे।
जब तक ना जीवन में कड़ी मेहनत हाे॥

खुशीयाें से भरा हर पल हाेता है।
जिंदगी में सुनहरा हर कल हाेता है॥

मिलती है कामयाबी उन लाेगाे काे।
जिनमें मेहनत करने का जज़्बा हाेता है॥

जिंदगी भी उनके आगे सर झुकाती है।
जिनकी मेहनत में दम हाेता है॥

डरते नही वाे मुश्किलों से ना ही,
राह की अडचनाे से॥

मुसकरा कर आगे बढ़ते है।
सामना करते है हर मुशकिलाे का, अडचनाे का॥

भविष्य खुद ही सुनहरा बनाते है।
बिना किसी की मदद के बिना॥

©- विमल गांधी ∇
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विमल गांधी जी।

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क्या ढूँढ रहा रे बन्दें।

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ϒ क्या ढूँढ रहा रे बन्दें। ϒ

क्या ढूँढ रहा रे बन्दें।
सब कुछ तेरे पास है॥

चाराे तरफ़ से घिरा है तूँ।
रिश्ते नाताे के झंजाल में॥

पैसा गाड़ी बंगला सब है तेरे पास।
फिर क्याे तूं रहे उदास॥

फिर क्या नही जिसके लिये तू।
इतना परेशान है॥

ढूँढता रहता है तूँ उसे हर जगह।
पर मिल ना पाता वाे तुझे कही भी॥

हर पल तलाश रहती है।
साेच अपने मन से कभी॥

कि क्या तुझे चाहिये क्या नही।
साेचने से तुझे मिलेगा ज़रूर,

एक रास्ता मिलेगी ज़रूर मंज़िल॥

©- विमल गांधी ∇
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ये रंग बदलती दुनिया है, यहाँ।

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ϒ ये रंग बदलती दुनिया है, यहाँ। ϒ

ये रंग बदलती दुनिया है, यहाँ।
कभी काेई असंभव काम, संभव हाे जाता है॥

कभी संभव काम असंभव, हाे जाता है।
कभी काेई ज़रूरी काम टल जाता है॥

गरीबाे काे यहाँ भटकते देखते है और,
पैसे से ईमान बदलते है यहाँ॥

कभी अपने पराये बन जाते है ताे कभी।
पराये अपना पन दिखाते है॥

रिश्ते नाताे में प्यार भी है और तक़रार भी है।
हर पल लाेग अलग – अलग रंग बदलते है॥

अलग – अलग रंग दिखाते है।
टूटते जज़्बात है और संवरते अरमान भी है॥

लाेगाे काे देख – देख हम खुद भी बदल से गये है।
यह रंग बदलती दुनिया है॥

©- विमल गांधी ∇
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फूलों के साथ – साथ रहते है काँटे।

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ϒ फूलों के साथ – साथ रहते है काँटे। ϒ

फूलों के साथ – साथ रहते है काँटे।
जीवन में हमारे साथ – साथ,

रहते है रिश्ते – नाते।
कुछ रिश्ते है फूलाे जैसे और,

कुछ है कांटाे जैसे।
कुछ साथ रह कर जीवन में॥

ख़ुशबू फैलाते है ताे कुछ।
कांटाे के जैसे हर पल चुभते जाते है॥

दाेनाे हमारे जीवन में रहते है साथ – साथ
….. और चलते है, साथ – साथ॥

दाेनाे तरह के रिश्ते निभाने ताे,
हम काे ही पड़ते है. राेकर निभाओ या हँस कर निभाओ॥

©- विमल गांधी ∇
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किसी की बात दिल में लगाना ना।

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ϒ किसी की बात दिल में लगाना ना। ϒ

किसी की बात दिल में लगाना ना।
किसी के लिये यूँ ही आँसू बहाना ना॥

यह दुनिया है सतरंगी, चलती रहेगी।
मगर यह आँसू है बहुत अनमाेल॥

यह है माेतियाे की बुंदे।
जाे आँखाे से छलकती है॥

इसे रखना हमेशा संभाल कर।
इसे यूँ ही गँवाना ना कभी, किसी पे॥

काेई समझेगा ना आपके दिल की बात।
ना ही काेई क़दर करेगा इन आँसुओ की॥

©- विमल गांधी ∇
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 ~KMSRAJ51

 

 

 

 

सूरज चाँद सितारे सब आसमान पर।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ सूरज चाँद सितारे सब आसमान पर। ϒ

सूरज चाँद सितारे सब आसमान पर।
घूम – घूम कर करते निस्वार्थ,
अपना – अपना काम॥

सूरज करता उजाला चहुँ-ओर।
शक्ति देता हर किसी काे जीवन मे॥

चाँद देता शीतलता हर प्राणी काे ताकि।
मिले हर किसी काे सूकुन और आराम॥

बरखा बादल, पेड – पाैधे, नदियाँ पहाड़।
सब कर रहे है अपना-अपना काम॥

ये देते हमें भी एक सुंदर सा पैग़ाम।
कि जब सब अपना – अपना काम करते है ताे॥

हम क्यों बैठे है खाली और उदास
हमें भी जीवन मे निस्वार्थ॥

कुछ ना कुछ करना चाहिये।
अपने चाराे ओर भला हर,

किसी का करना चाहिये।
हर किसी के बीच प्यार काे,
बढ़ाना चाहिये, ज़मीं पर॥

अटूट प्रेम का संसार बनाना चाहिये।
जीवन सफल बनाना चाहिये॥

©- विमल गांधी ∇
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

 ~KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

 

 

 

यह दुनिया है मुसाफ़िर खाना।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ यह दुनिया है मुसाफ़िर खाना। ϒ

यह दुनिया है मुसाफ़िर खाना।
अलग – अलग मुसाफ़िर यहाँ॥

अलग – अलग बाेली यहाँ।
अलग – अलग पहनावा है यहाँ॥

इक दिन सब उड़ जायेंगे।
बाेल के अपनी – अपनी बाेली॥

याद वही आयेंगे जिन की।
हाेगी मीठी – मीठी बाेली॥

जाे करेंगे भला इस संसार में नाम।
आयेगा उनका इतिहास में॥

याद करेगी दुनिया उन्हे।
बडे इज़्ज़त और सम्मान से॥

©- विमल गांधी ∇
Vimal Gandhi-kmsraj51

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ना ताेडाे किसी का घर।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ ना ताेडाे किसी का घर। ϒ

ना ताेडाे किसी का घर।
ना छिनाे किसी से राेटी॥

पक्षियाें काे उड़ने दाे।
खुले आसमान में॥

मछलियाे काे तैरने दाे पानी में।
नदी के बहाव काे ना राेकाे, कभी॥

जीने दाे सबकाे अपनी खुशी से।
जिंदगी है सबकी अपनी-अपनी॥

लगाओ ना काेई राेक-टाेक।
ना लगाओ काेई बंधन॥

खुद खुश रहाे और सबकाे,
खुश रहने दाे इस संसार में॥

जिंदगी है बहुत छाेटी फिर।
ना मिलेगी दुबारा कभी॥

©- विमल गांधी ∇
Vimal Gandhi-kmsraj51

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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The Energy Of Give And Take In Relationships

Kmsraj51 की कलम से…..

cymt-kmsraj51-1

The Energy Of Give And Take In Relationships

Love, more than any other virtue, is an extremely positive energy; it is an invisible prime mover and foundation of each one of our lives, a source of motivation and inspiration. People lacking love in their lives are normally lesser motivated and happier than those who have positive and healthy relationships full of love and an immense amount of love in their lives. But when the same energy of love, possessing immense positive potential, is negatively focused and is not used correctly, it leads to many dependencies which are negative in nature. How?

When you love someone, that could be your parents, your spouse, your children, your siblings, your friends, any relationship for that matter; there is a invisible and positive emotional and mental attraction between you and that person which keeps you connected to him/her, but the moment the love turns into attachment and becomes a dependency, that person starts dominating and controlling your inner world of thoughts, feelings and emotions and your mental and emotional freedom is lost. It is as if your inner world succumbs to the influence of the other person and you are no longer yourself. Everything that goes on inside you and that comes out of you has an impression of the other. This kind of love is not empowering, energizing and healing, because in this kind of love, over a period of time, desires, wants and expectations from the other start emerging. All these emotions place you in a mental mode of taking instead of giving. Also in such a kind of love, where love is mixed with a desire to possess, over a period of time you start wanting to control the other. From this control, you start exercising a power to influence the other. At first you are under their influence. As more attachment builds up, this is followed shortly by your desire to bring them under your submission and influence them. That way, you feel that you have them and that they belong to you. This is love that wants to take and not give. In this kind of relationship of love, there is suffering and sorrow. Even if joy exists, it is extremely short lived. Unconditional love or love that only wants to give and not take or expect, strengthens and is healing, it never hurts or inflicts pain on the other.

Θ Message Θ

To be free from worry means to have the power to change negative into positive.

Thought to ponder: The ones who are free from worry change that which is bad into something good, because the state of mind is calm. The one with a calm state of mind is able to think creatively and see very clearly even beyond the situation. So there is the ability to transform the seemingly negative situation into something very positive. So there is clear decision-making and quick action. There is also no time wasted.

Point to practice: When I am free from worry, I constantly remain satisfied for having seen the positive and finding the solutions immediately instead of looking at the problem and worrying over it. This internal silence gives the feeling of power, which naturally enables transformation in a second and only the goodness is absorbed.

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

 

 

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Cleaning Up The Cupboards Of Your Mind

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

ϒ Cleaning Up The Cupboards Of Your Mind ϒ

When you are capable of relaxing, controlling your thought patterns and concentrating, you can reach deeper and more subtle states of meditation from which you connect with your inner potential for peace and purest love (the positive) and on the other hand, you clean out unnecessary memories (the negative). You reach the spiritual power that allows you to transform habits that are not very healthy and the beliefs that sustain them. Out of love and peace you can purify and clear the turbulent (rough) waters that there are at times in the subconscious. When you meditate, you review whether there is something that has influenced you and you clean it out, so that only the highest, the most positive, the most beautiful, remains inside you and comes out of you. Meditation and reflection help you to clean out the register that, from the subconscious, brings about inadequate thoughts and uncontrolled emotions. Cleansing (cleaning up) in depth requires a clear purpose, being prepared to let go of the past; cleansing the wounds and pain accumulated in the store of your inner being; facing the present with dignity, with wisdom and visualizing, with confidence and trust, a future full of positivity.

The first thing that meditation teaches us is to cleanse (clean up) the mind of the useless thoughts that it creates in the present moment. While your mind identifies with these kinds of thoughts and sees them as absolutely normal, it will not be able to concentrate. And if it cannot concentrate, it will not be able to cleanse in depth. Meditation helps you to live through that inner process without pain. From a space of love, experienced in meditation, you feel secure in order to open up the cupboards of your subconscious mind. Do not open them before commencing (beginning) the practice of meditation, because the accumulated pain can be overwhelming and the loneliness experienced, when you see what you find inside, can terrify you. Because you are alone, with yourself, with your past and with your present and you are alone here, with your inner cupboards and your files. In the silence of contemplative meditation you feel a divine energy accompanying you which helps you overcome this fear of loneliness. You feel embraced by the energy and the presence of unconditional love, which it showers on you – it accepts you as you are, which makes the cleaning up process easier.

Message 

The method to finish waste thoughts is to deal with the mind with love.

Expression: When there are waste thoughts in the mind which one tries to stop, it becomes difficult to do that. There is discomfort and difficulty experienced. On the other hand, when the mind is taught to take the right direction with love, there is a quick and dramatic change.

Experience: When I learn the art of speaking to my mind with love, I am able to free myself from waste thoughts without any feelings of suppression. Concentration too becomes easy and all thoughts are directed towards the right direction.

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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Receiving The Gifts Of God

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT

© Receiving The Gifts Of God – Part 1 ®

Have you ever wondered what it would be like to come face-to-face with the highest authority in the universe, to have a meeting of a few seconds or a few minutes or a few hours with God, the ocean of knowledge, the ocean of love, the ocean of power and the ocean of bliss? In this message series, we would like to present in front of you, with a humble heart, an attitude of obedient service and a sweet, pure intention of sharing, our collective experiences of such meetings in our daily lives.

Have you ever imagined that you can tie God with the strings of love to your heart i.e. you were to come so close to him whereby he would be just like any other person in your life, someone with whom you can discuss just about anything that you wished, someone whom you could confide in, someone whom you can give your heart to, someone from whom you can receive helpful friendly responses when you are faced with difficulties, someone whom you can call out to with the voice of your heart and receive the gift of his company in less than a second, someone whom you can receive sustenance from just like physical parents give to their children, someone from whom you can receive secrets of living life the right way and be free from confusion, someone whom you can dance in joy with when he showers your life with success, someone who fills your intellect and nature with thousands of virtues and powers, someone whose angelic hands you experience on your head while performing the most routine actions of the day, someone who offers you the fortune to help him in his task of world transformation? This is the beautiful blessing to the present moments in the history of humanity, also called the most auspicious and most valuable Confluence Age (or Sangamyuga), between the Iron Age (or Kaliyuga) and the future Golden Age (or Satyuga), when God is distributing the gifts of his beautiful company and offering the canopy of his love to all his children, the lucky soul-stars of the Earth.

 Message 

When you are full with the treasure of good things that you have imbibed you begin to donate to others too.

Expression: Check if you are expecting either from others or from situations or you are yourself a donor. Where there is any kind of emptiness within there is expectation and you will not be able to give others.

Experience: Practice looking at your own specialities and see what you can contribute to others from this treasure. When you make the practice of sharing the good things you have, you’ll stop expecting from others.

© Receiving The Gifts Of God – Part 2 ®

From our experience, the most beautiful gift of the present time, is the start of our daily routine, which begins in the lap of love of the Supreme Father (whom we all have experienced to be a subtle being of light, full of spiritual love) either as a point source of magnetic spiritual light, someone whose aura is so supremely charged that it envelopes the being of light or soul or the inner me completely or in the angelic form, through which we experience the multifarious (different types of) human relationships which we play on the physical world stage, but in their most perfect and pristine (pure) form. We normally rise up very early at around 3.30 a.m., which is also called Amritvela or the sweet nectar time, when a rising song is played and after freshening up; perform the meeting with this Supreme Light in both the forms (explained above) from 4 a.m. to 4.45 a.m. The meeting is a visualization process, because the meeting is not visible to the physical eyes. The posture of the meeting is a simple one, just sitting cross-legged or on a chair comfortably, with the eyes open and soft red light illuminating the room, where the relaxation exercise is performed. Gentle flute like music or of a similar type is normally played in the background and a soothing song is normally played at the start and just before the end of the beautiful meeting of hearts of the soul and its father, its mother, its beloved, its best friend, its teacher and its guru all submerged into a single entity – the Supreme Ocean of Love, the Father of Fathers, commonly called God.

Love for both forms of remembrance of God – the point form and the angelic form is an integral part of the life at the Brahma Kumaris. Even during the day, five times, a short song is played amidst actions where we transfer our consciousness from action and connect through both these mediums (also calledmind traffic control), thereby maintaining the love filled connection constantly. The point form is a powerful connection which strengthens the inner being or soul, purifies it immensely and fills it with the seven primary virtues whereas the angelic meeting is a loveful soft union with the Supreme, where the soul not only gets cleansed but can eat, sleep and play with the Supreme; hold his hands, relax with and sit in his lap and also experience his warm touch and absorb his spiritual energy through his angelic vision or drishti and be face-to-face with him, just like making a meeting similar to one we make in the physical world.

 Message 

Become the ones who make efforts continuously and experience constant self-progress.

Expression: Check if there is any doubt within you whether you’ll succeed or not. If there is any such doubt it means that your effort is not continuous. Where there is constant effort you experience constant progress.

Experience: Each day remind yourself of at least one thing that you have achieved for the day. When you make a habit in this way, you will be able to notice and experience the fruit of the effort that you put in.

© Receiving The Gifts Of God – Part 3 ®

A very significant aspect of life with the Brahma Kumaris, whether surrendered in the organization or staying at home and performing a homemaker’s or/and professional role and following all the principles of the Brahma Kumaris is listening to a four page spiritual lesson at any of the Brahma Kumaris official centres everyday. The lesson is a common one i.e. the same on a particular day at all centres all over the world in around 110 countries, which is read by an experienced teacher of the meditation and spiritual wisdom as shared by the Brahma Kumaris. It is called murli or the flute of knowledge by us. It is conducted in the mornings at around 7 a.m. at the centres, and is held after early morning meditation and following the morning duties dedicated to the physical body and some light house work. All members of the organization have experienced drastic transformation in their personality and also an immense increase in their happiness levels and a capacity to remain empowered amidst difficult worldly situations by receiving this morning gift for even a few months from God.

To end on a note dedicated to our love for the Supreme, we would like to share our warm feelings with you by reminding you that our hearts have longed for a life in the canopy of God over thousands of years and it is our personal wish that when God is offering the treasures of his divine company to his soul-children, we do not miss the amazing opportunity of filling our hands full with these treasures and distributing the same to each and every human being whom we meet and bringing smiles back on their faces in demanding times of busy schedules and tight deadlines combined with difficulties in all spheres of our lifestyles including inner pressures due to various reasons. So let us awaken and come together under one umbrella of God’s spiritual love and a common bond between all of us – one of spiritual brotherhood and join hands together and make the most benefit of the present moments. There will come a time in the near future when these precious moments will no longer be available and easy to savour (enjoy) as the cycle of time turns further and time enters a phase of unexpectedness with the world atmosphere deteriorating and sorrow in human hearts increasing and God becoming difficult to remember and even God taking up a stance of detachment, due to the same and not offering his love in the same way.

 Message 

You can remain stable when you learn to apply a full-stop.

Expression: In any difficult situation, check if you are having thoughts like, “why do things happen with me like this or why is this person behaving in this way” etc. you can never remain stable when you have such questions.

Experience: Tell yourself that it is much easier to put a full-stop(.) than putting a question mark(?). understand the difference between worrying and finding solutions and worrying. If there is a solution, find it, if there isn’t let things take care of themselves and put a full-stop.

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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Self Responsibility

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

Self ResponsibilityPart 1 

There are certain laws which are involved in our actions and interactions. They are not human laws requiring lawyers to interpret or the police to put into action. They are natural laws which are constantly operating in every relationship. They are often called the Laws of Karma (action): briefly described by the saying – As you sow, so you shall reap, described by Isaac Newton as the Third Law of Motion i.e. for every action, there is an equal and opposite reaction. The Laws of Karma remind us that whatever quality of energy we give out, we get back. This might not be exactly tit for tat, but if we give happiness to someone, it will come back to us; if we give pain or sorrow, it will come back, perhaps not today or tomorrow, but at some time in the future.

Most of us are conditioned by the idea that we are responsible for some of our actions, but not all of them. For example, we would consider ourselves responsible for the actions which improved our company’s business but would not consider ourselves responsible for not being on good terms with our spouse. If, as parents, we worked hard in educating our children and they grew up to become well placed and successful individuals in their lives, we would consider ourselves responsible. If on the other hand they don’t make it to the top and are not so successful, we will blame our children for not putting enough effort or maybe the education system for the same. So we are selective in taking responsibility for our actions.

Through spirituality, we are reminded of the unchangeable laws of cause and effect, which awakens our awareness of our true responsibility for each and every action that we perform.

© Message ©

Faith in one’s progress brings contentment.

Expression: Even when the situation is not according to what is expected, there is contentment for the one who has faith in his own progress. Such a person will not just sit back waiting for things to change nor will he just curse his fate. Instead he’ll do his best and use all his resources in bettering the situation.

Experience: The understanding that all life’s situations are a training for me, automatically keeps me content in all situations. There is naturally an experience of constant progress and a feeling of having gained something from all situations.

Self ResponsibilityPart 2 

Because we have forgotten the principle of karmic returns (discussed yesterday), we have learned to avoid taking responsibility for many of our actions. We fail to see the impact of our actions upon others and we fail to see that the real meaning of responsibility is responding correctly. Life can be seen as a series of responses which we each create in our interactions with other people and events. As is the quality of our ability to respond (energy given), so will be the quality of the return (energy received). The Laws of Karma also serve to remind us that the situations in our life, the quality of our body, wealth, relationships etc. and the type of person we are today are the result of what we thought and did yesterday, last month, last year, perhaps in our last birth. Many people do not like this idea or find it difficult to accept because most of us have been taught that our destiny lies in someone else’s hands or in the hands of fate or luck, about which we can do nothing. The Law of Karma or the Law of Reciprocity teaches us that there is no such thing as luck and that whatever happens to us today is the result of our positive or negative actions in the past. If you spend a few moments reflecting on events in your life, without being judgmental, you will begin to see connections between actions and results, causes and effects. When you see how all effects have their causes, you will then be convinced that this universal law is at work in your life at all times.

© Message ©

The ones who are constantly happy are truly fortunate.

Expression: Whatever the kind of situations needed to be faced, whoever the people and the different kind of personalities they come into contact with, the ones who are fortunate constantly enjoy. They also continue to take benefit and bring benefit to others too. Their fortune lies in their ability to perceive the positive aspect in everything and take benefit accordingly.

Experience: When I am able to be happy under all circumstances, I am able to make the best use of whatever I have with me. I then find myself full of all resources. I don’t think of what I don’t have but I am aware of and make the best use of what I have. So I find myself to be always lucky. I constantly move forward.

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

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The Faculties (Energies) Of The Soul

Kmsraj51 की कलम से…..

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The Faculties (Energies) Of The Soul

When the soul is in the body it functions through three faculties (non-physical entities). Although each faculty (entity) can be given a different name, it is actually the same energy, the soul, functioning on three different levels simultaneously. These are the mind, the intellect and the sanskaras.

Mind is the thinking energy of the soul. It is the mind that imagines, thinks and forms ideas. The thought process is the basis of all emotions, desires and sensations. It is through this faculty that, in an instant, thoughts can be projected to a far off place (one can travel to a far off place on the thought level); past experiences and emotions can be relived or even the future anticipated in less than a second. It is the mind that experiences the variations of moods. The mind is an energy of the non-physical soul, not to be confused with the heart or even the brain.

The intellect is used to assess thoughts. This is the faculty (energy) of the soul used for understanding and decision-making which stands out as the most crucial faculty of the three. With the deepening and broadening of the intellect, clear understanding and realization of knowledge becomes natural, and the power to decide and reason becomes clear. It is the intellect which remembers, discriminates, judges and exercises its power in the form of will-power.

Sanskaras is a Hindi word which best describes what we could call impressions. They are the record of all the soul’s past experiences and actions. Sanskaras can take the forms of habits, talents, nature, personality traits, beliefs, values or instincts. Every action performed by a soul either creates a sanskar (this is how a habit begins) or reinforces an old one. Whatever impression is etched in the soul remains within the soul, forming a complete collection of all the experiences that the soul has had. When we speak of defects, specialties or virtues we are referring to the sanskaras. The sanskaras are the basis of the soul’s individuality.

– Message –

The one who is full of love is the one who is always happy.

Expression: When you are constantly having love for everyone, you’ll have no negativity. Your unselfish love will make you have only positive thoughts and you’ll find yourself in constant happiness.

Experience: Start your day with thinking of all the people you come into contact with. Then take a thought in your mind that you have love for all of them. This thought will help you throughout the day. You’ll find yourself accepting others as they are and having good wishes for them.

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

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