पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी – “गुरु जी” – के महान विचार!!

Kmsraj51 की कलम से…..

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=> समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।  

=> निर्धनता मनुष्य के लिए बेइज्जती का कारण नहीं हो सकती। यदि उसके पास वह सम्पत्ति मौजूद हो, जिसे ‘सदाचार्’ कहते है। 

=> कर्मयोग का अर्थ है – लोकमंगल के उच्च स्तरीय प्रयोजनों में पुरुषार्थ को नियोजित किए रहना। 

=> मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है; परन्तु इनके परिणामों में चुनाव की कोई सुविधा नहीं।    

=> वही अनशन, तप, श्रेष्ठ है जिससे कि मन अमंगल न सोचे, इन्द्रियों की क्षति न हो और नित्य प्रति की योग धर्म क्रियाओं में विघ्न न आए।

=> ईश्वर पाप से बहुत कुढ़ता है और हमारी चौकीदारी के लिए अदृश्य रूप से हर घडी़ साथ रहता है। 

=> भगवान् उन्हें ही सर्वाधिक प्यार करते हैं, जो तप- साधना की आत्म- प्रवंचना में न डूबे रहकर सेवा- साधना को सर्वोपरि मानते हैं। 

=> दूसरों की सहायता वे ही लोग कर सकते हैं, जिनके पास अपना वैभव और पराक्रम हो। 

=> मनन और चिंतन के बिना न आत्म- साक्षात्कार होता है और न ईश्वर ही मिलता है। 

=> “नारी”   परिवार को श्रेष्ठता से अभिपूरित, धरती को स्वर्ग बनाती है। 

=> सच्चाई के अनुयायी एक हजार हाथियों की ताकत है.

The follower of truth has the strength of a thousand elephants.

=> शुभ काम दिखावे के लिए न करें। 

=> मनुष्य जैसा सोचता है ठीक वैसा ही बनता जाता है। 

=> सच्चे उपदेशक वाणी से नहीं, जीवन से सिखाते हैं। 

=> भाग्य बदलने की एकमात्र शर्त है- उन्नति के लिए सच्चा और निरन्तर संघर्ष। 

=> अध्यात्मवाद वह महाविज्ञान है, जिसकी जानकारी के बिना भूतल के समस्त वैभव निरर्थक हैं और जिसकेथोडा़– सा भी प्राप्त होने पर जीवन आनन्द से ओतप्रोत हो जाते है। 

 

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

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बीती ताही बिसार दे, आगे की सुधि लेय।

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बीती ताही बिसार दे, आगे की सुधि लेय।

तारीखें बदलती हैं, साल बदलते हैं, किन्तु वक्त के इस बदलाव में सपने नही बदलते, आशाएं नही बदलती। आगे बढने की चाह कभी कमजोर नही होती। यही सोच विकास को मजबूती देती है। गतिमान समय के साथ अक्सर धूप के बीच बादल रूपी परेशानियाँ या असफलताएं भी अपने होने का एहसास करा देती हैं। कई बार ऐसा देखा जाता है कि इन क्षणिंक असफलताओं से हम में से कई लोग घबङा जाते हैं, जिसका असर आने वाले पल पर भी पढता है।

सच तो ये है कि, सभी परिस्थितियाँ कुछ न कुछ सबक दे कर जाती हैं। बदलती तारीखों के साथ प्रत्येक क्षेत्र में कुछ न कुछ बदलाव भी होता रहता है। जो समाज के विकास में भी जरूरी हैं। बहुत पहले डार्विन ने एक सिद्धान्त प्रतिपादित किया था कि, जो जीव परिस्थिती के अनुरूप अपने को ढाल लिये वही सरवाइव किये। ये सिद्धान्त आज की भागदौङ और तनाव भरी जिंदगी में अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि आज वही सरवाइव कर सकता है जो नए माहौल के अनुरूप स्वंय को ढाल लेता है। जिंदगी की इस रेस में हम कई बार जीतते हैं तो कई बार हार भी जाते हैं। लेकिन यदि हम अपना दिमाग खुला रखें तो हर अनुभव हमें समृद्ध बनाता है।

आजकल एक बङी समस्या ये भी है कि, प्रेम में असफल युवा अपनी इस असफलता को जिंदगी की हार समझ लेते हैं। जबकि उनके पास अनेक ऐसी क्षमताएं होती हैं, जिससे वे नया इतिहास रच सकते हैं। उन युवकों को ये समझना चाहिए कि आधुनिक तकनिकों से लैस 21वीं सदी हीर-रांझा या लैला-मजनू का समय नही है। आज ‘टू मिनट नूडल्स’ की दुनिया में प्रेम भी शार्ट टर्म कोर्स की तरह हो गया है। फेसबुक, ट्यूटर, वाट्सअप जैसे नवीन संचार साधनो के जमाने में भावनात्मक ताने-बाने को ढूंढना किसी मूर्खता से कम नही है। आज दोस्ती, कल ब्रेकअप वाले रिश्तों की यादों में स्वंय को समेटना और जिंदगी के किमती पलों को दुश्वर बनाना किसी आत्महत्या से कम नही है।

तारीखों के बदलते ही जो यादें या डर विकास की राह में बाधा पहुँचाए उन्हे अपनी मेमोरीकार्ड से डीलिट कर देना चाहिए। अर्थात “बीती ताही बिसार दे आगे की सुधि लेय”। खाली हुए स्पेस में सकारात्मक विचारों को सेव(Save) कर लेना चाहिए। इन सकारात्मक विचारों से ही डर पे जीत हासिल होती है। मन में ये संकल्प करें कि सकारात्मक हौसले की उङान से मंजिल तय करेंगे। दोस्तों, यकीनन किसी हाई वे पर हँसती खेलती जिंदगी आप का इंतजार करती मिल जायेगी।

धन्यवाद,
अनीता शर्मा जी।

श्रीमती -अनीता शर्मा जी। (http://roshansavera.blogspot.in/)

I am grateful to Mrs. Anita Sharma Ji, for sharing inspirational thoughts in Hindi with Kmsraj51 readers.

एक अपील –

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

 

———– @ Best of Luck @ ———–

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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* चांदी की छड़ी।

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