असीमित ऊर्जा आत्मिक-प्रेम में।

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT

∇ असीमित ऊर्जा आत्मिक-प्रेम में।Θ

दोस्तों,

आत्मिक-प्रेम में वह शक्ति निहित है, जिससे शत्रु भी मित्र बन जाते हैं। प्रेम ताे वैसे ढाई आखर(ढाई अक्षर) का ही हाेता हैं। लेकिन इस ढाई आखर(ढाई अक्षर) में इतनी असीमित शक्ति निहित हैं, जिससे असंभव काे भी सरलता पूर्वक संभव में परिवर्तित किया जा सके।

“प्रेम” आत्मा(Soul) के ७ माैलिक गुणाें में से एक हैं। “प्रेम” माना आत्मा और परमात्मा(ईश्वर) के बीच संबंध।

आत्मा(Soul) के ७ माैलिक गुण यह हैं…..

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand),

काेई भी मनुष्य आपके साथ कितना भी बुरा बर्ताव करें फिर भी आप “प्रेम” कि शक्ति काे ना छाेडे़, आपकी कोशिश यही हाे कि आप उसके साथ भी प्रेमपूर्ण व्यवहार हि करें। एक ना एक दिन आपका शत्रु, आपके चरणाें में हाेगा।

आत्मिक-प्रेम हमे मनुष्याें से सच्चा स्नेह करना सीखाती हैं। आत्मिक-प्रेम से मनुष्य कें अंदर शहनशीलता, दया और करुणा स्वतः ही आ जाती हैं।

आज के समय में मनुष्याें के पास पैसा(Money) ताे बहुत है, लेकिन वर्तमान समय में मनुष्याें के पास ना ताे सच्ची शांति हैं, ना हि सच्चा सुख हैं। ऐसा इसलिए क्योंकी मनुष्याें के अंदर आत्मिक-प्रेम नहीं हैं।

जब तक मनुष्याें का मनुष्याें से आत्मिक-प्रेम नहीं हाेगा तब तक सच्चा सुख और सच्ची शांति ना मिलेगी।

दोस्तों,

सभी मनुष्याें काे यह समझना हाेगा कि…..

सभी मनुष्याें काे सभी मनुष्याें से आत्मिक-प्रेम के साथ स्नेह भरा व्यवहार करना हाेगा तभी सच्चा सुख और सच्ची शांति मिलेगी।

ओम शांति!!

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Head Editor, Founder & CEO
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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

 

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बहाने Vs सफलता।

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CYMY-KMSRAJ51-N

बहाने Vs सफलता।

1. मुझे उचित शिक्षा लेने का
अवसर नही मिला…
उचित शिक्षा का अवसर
फोर्ड मोटर्स के मालिक
हेनरी फोर्ड को भी नही मिला ।

2. मै इतनी बार हार चूका ,
अब हिम्मत नही…
अब्राहम लिंकन 15 बार
चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने।

3. मै अत्यंत गरीब घर से हूँ …
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी
गरीब घर से थे।

4. बचपन से ही अस्वस्थ था…
आँस्कर विजेता अभिनेत्री
मरली मेटलिन भी बचपन से
बहरी व अस्वस्थ थी।

5. मैने साइकिल पर घूमकर
आधी ज़िंदगी गुजारी है…
निरमा के करसन भाई पटेल ने भी
साइकिल पर निरमा बेचकर
आधी ज़िंदगी गुजारी।

6. एक दुर्घटना मे
अपाहिज होने के बाद
मेरी हिम्मत चली गयी…
प्रख्यात नृत्यांगना
सुधा चन्द्रन के पैर नकली है ।

7. मुझे बचपन से मंद बुद्धि
कहा जाता है…
थामस अल्वा एडीसन को भी
बचपन से मंदबुद्धि कहा जता था।

8. बचपन मे ही मेरे पिता का
देहाँत हो गया था…
प्रख्यात संगीतकार
ए.आर.रहमान के पिता का भी
देहांत बचपन मे हो गया था।

9. मुझे बचपन से परिवार की
जिम्मेदारी उठानी पङी…
लता मंगेशकर को भी
बचपन से परिवार की जिम्मेदारी
उठानी पङी थी।

10. मेरी लंबाई बहुत कम है…
सचिन तेंदुलकर की भी
लंबाई कम है।

आज आप जहाँ भी है,
या कल जहाँ भी होगे।
इसके लिए आप किसी और को
जिम्मेदार नही ठहरा सकते।
इसलिए आज चुनाव करिये,
सफलता और सपने चाहिए
या खोखले बहाने।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

CYMT-100-10 WORDS KMS

भावुकता और सतर्कता में संतुलन की आवश्यकता है और यह संतुलन ध्यान से आता है।

A balance between sensitivity and sensibility is required and this balance comes from meditation.

~Sri Sri Ravi Shankar Ji

निश्चय ही आप विजयी होंगे, यदि आप अपनी दुर्बलता (Weakness) को अपनी ताकत में तब्दील करना सीख लें।

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51

 

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”

(“The biggest source of success”)

मेरे प्यारे दोस्तों आज मैं (कृष्ण मोहन सिंह) आप सबके साथ जीवन में सफल हाेने का सबसे मूल्यवान (Valuable) सूत्र Share कर रहा हूँ। यह सूत्र मेरे जीवन (राजयाेग जीवन) के अनुभव का अनमाेल निचाेड़ हैं। यह सूत्र मेरे ३ वर्ष से लेकर २४ वर्ष तक के जीवन का अनमाेल अनुसंधान का परिणाम हैं। जिस किसी ने भी मेरे इस सूत्र काे गहराई से समझकर अपने जीवन में धारण़(पालन) किया, आज (Present Time) वह सभी अपने-अपने क्षेत्र में निश-दिन सफलता की नई ऊचाईया चढ़ रहें हैं।

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

“Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaen solar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.”

 ~KMSRAJ51(“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

~KMSRAJ51

जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

~KMSRAJ51

 

In-English…..

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

 

In-Hindi…..

पवित्रता सच शांति और खुशी का धार है.

यह पके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

~KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें।

और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें।

 ~KMSRAJ51

जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।

 ~KMSRAJ51

– गहराई से सोचना प्रत्येक शब्द –

मेरे (kms) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

हमेशा मन को शांत रखना …..

दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की पहली आवाज) आवाज सुनो …..

हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

Kmsraj51 की कलम से …..

Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

—–

मन काे कैसे नियंत्रण में करें।

मन के विचारों काे कैसे नियंत्रित करें॥

विचारों के प्रकारएक खुशी जीवन के लिए।

अपनी सोच काे हमेशा सकारात्मक कैसे रखें॥

“मन के बहुत सारे सवालाें का जवाब-आैर मन काे कैसे नियंत्रित कर उसे सहीं तरिके से संचालित कर शांतिमय जीवन जियें”

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

 

प्रश्न :- दोस्त क्या है?\मित्र क्या है?

उत्तर :- “एक आत्मा जाे दाे शरीराें में निवास करती है”

 

“तू ना हो निराश कभी मन से”

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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* चांदी की छड़ी।

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मेरे सभी प्रिय पाठकों आप सबका प्यार यू हि मिलता रहें, मेरी लेखनी(कलम) यू हि चलती रहें हमेशा॥

आप सबका दोस्त,

कृष्ण मोहन सिंह (KMSRAJ51)

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

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अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

भगवान ने भाग्य कि रेखा खिंचने वाली पेंसिल हम सबके हाथाें में दे दिया है। जैसा भी चाहाे भाग्य कि रेखा खिंच लाे।

~Kmsraj51

सफलता का सबसे सरल तरिका है, अपने आंतरिक मन के कमजोर बिंदुआे काे अपने आपसे दुर करें।

~Kmsraj51

जिस कार्य काे करने से आपकाे आंतरिक मन की खुशी मिले उसी कार्य काे करें।

~Kmsraj51

अगर आप अपने कार्य से खुश है, ताे फिर अन्य क्या कहते है, उसकी परवाह ना करें।

~Kmsraj51

:- गहराई से सोचना प्रत्येक शब्द 

मेरे(kmsraj51) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

हमेशा मन को शांत रखना …..

दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

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खुद को साबित करने के लिए मौका मिलने के आप हकदार हैं। सफलता की नींव आप खुद हैं। 

दूसरे क्या सोच रहे हैं, इस बारे में अनुमान लगाते रहना नकारात्मक सोच की निशानी है।

-Kmsraj51

 

 

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विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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विचारों की शक्ति

विचारों की शक्ति – एक ऐसी शक्ति जिसे खुद(स्वयं) अनुभव ना कराें जब तक, तब तक विश्वास ही नहीं हाेता। अपने मन से निगेटिव विचारों काे हटाने का आसान तरिका है, कि नकारात्मक ना हि देखें, ना हीं सुने, ना हि पढ़ें। हमेशा सकारात्मक हि देखें, सकारात्मक हीं सुने, सकारात्मक हि पढ़ें आैर सकारात्मक हि करे। अपने विचारों की शक्ति काे आप तभी समझ सकते हैं, जब आपका मन शांत हाेगा, आैर मन शांत तब हाेगा जब मन के अंदर विचारों की संख्या कम हाेगी। मन के अंदर विचारों की संख्या कम करने का आसान तरिका है, कि अपनी मानसिक शक्तियाें काे याद करें, अथा॔त ध्यान(Meditation) कि मदद से अपने अच्छे(सही) आैर बुरे(गलत) विचारों काे समझना सीखें। मन के अंदर विचारों की संख्या कम आैर सकारात्मक (Positive) विचारों के हाेने से किसी भी मानव की निर्णय शक्ति अपने आप अच्छी हाे जाती हैं। निर्णय शक्ति अच्छी हाेने से मानव सही फैसला(निर्णय) लेने लगता है, जिससे सब काम(कार्य) सरलता पूर्वक पूर्ण हाेने लगते हैं। मानव स्वतः सुखीं और आनंदपूर्ण जीवन जीने लगता हैं।

विचारों की शक्ति से कुछ भी करना संभव है। मन जब शांत हाेगा, कुछ भी स्मरण रखना भी आसान हाेगा। मन शांत रहने से स्मरण शक्ति अतितीव्र हाे जाती हैं।

  1. मन के विचारों की शक्ति,
  2. कैसे मन के विचारों काे नियंत्रण में करें,
  3. मन के अंदर चलने वाले विचारों काे कैसे पढ़ें,

अब बहुत जल्द प्रकाशित हाेने वाला है…..

कृष्ण मोहन सिंह(Krishna Mohan Singh) द्वारा लिखित किताब,, 

“तू ना हो निराश कभी मन से” 

“मन के विचारों और शक्तियाें” पर लिखी गई एक अनमाेल ग्रंथ,, 

मन काे कैसे नियंत्रण में करें।

मन के विचारों काे कैसे नियंत्रित करें॥

विचारों के प्रकार-एक खुशी जीवन के लिए।

अपनी सोच काे हमेशा सकारात्मक कैसे रखें॥

“मन के बहुत सारे सवालाें का जवाब-आैर मन काे कैसे नियंत्रित कर उसे सहीं तरिके से संचालित कर शांतिमय जीवन जियें”

Thoughts: “तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से,,

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

खुद को साबित करने के लिए मौका मिलने के आप हकदार हैं। सफलता की नींव आप खुद हैं। 

दूसरे क्या सोच रहे हैं, इस बारे में अनुमान लगाते रहना नकारात्मक सोच की निशानी है।

 

 

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Purity is the foundation of true peace & happiness…..

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पवित्रता

पवित्रता सच शांति और खुशी का धार है.

In-English…..

 

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

 

In-Hindi…..

 

पवित्रता सच शांति और खुशी का धार है.

यह पके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

 

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

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Communication

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

Communication – *Part 1*

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A great deal of our communication is non-verbal and we rarely realize the effect that it has on others. Our tone of voice, our body language (particularly our eyes and face), our attitudes and our feelings, are constantly in communication with others, expressing anger, fear, love, trust, rejection – in fact, all our feelings and emotions. We cannot hide what we mean; we may do so for a while, but finally the truth emerges.

Communication is not just with others, but also with the self, with the Supreme Being and even nature. Being still, focused and open enables us to tune in to others so that we can respond in an appropriate and meaningful way, not simply in a mechanical way.

Here are some common reasons for blocks to communication:

* Too many thoughts, and an overload of words and actions, results in us being unable to think clearly. We lose the essence of what is trying to be conveyed (transmitted) by the other.

* Being lost in our own feelings or ideas. In such a state we do not listen attentively to others.

* Remembering the past in a negative way. This does not allow us to tune in properly to our present and future. When we do not communicate properly with the needs of the present time, we loose opportunities.


 

Communication – *Part 2*

Here are some more common reasons for blocks to communication:

* Lack of sincerity. When our thoughts and feelings are honest and respectful, then the hearts of others will open to us. A positive highway of trust is built and communication flows positively.

* Creating negative perceptions (understandings) and emotions about others i.e. how we visualize or label them. Such emotions, no matter how well hidden, are finally always communicated to others on a subtle (non-physical), non-verbal level, and create an atmosphere of tension and unease.

* Not letting go of negative perceptions (understandings) and emotions. The only method to revive our relationship with others is to let go of negativity on a daily basis, to prevent it from building up. Far too often, the build-up happens without us even noticing it and, we wonder why positive feedback is not coming from the other side.

* Lack of silence. To go deep into the self and put our thoughts and feelings into silence enables them to become positive. The silent relaxation defuses (reduces) anger and the blame and complaints that often go with it.

*Message*

To have equality in thought, word and action is to be successful. 

Projection: With regards to what I want to achieve, my thoughts are usually high. I then speak about my high plans to others too. But to bring my plans into action it takes a long time and by then I find that they have lost their intensity.

Solution: I need to remind myself that if I don’t implement my thoughts immediately, I will never do it. I also need to check if the thoughts that I have are practical. I need to then plan and speak about it according to my checking. Then I find that my thoughts and plans are not wasted away, but become practical.

The art of right decision making lies in thinking less. 

Projection: When I am faced with a difficult situation, I naturally begin to think a lot. I tend to feel that the more I think, the more choices I have and the better the decision I will be able to take. But such thinking only creates more and more waste thoughts.

Solution: I need to make the effort of thinking less about the problem. Even a few moments of internal silence helps me develop my intuition and the right decision is made from within; because silence brings solutions.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

soulpower-kmsraj51

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

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मन काे कैसे नियंत्रण में करें।

मन के विचारों काे कैसे नियंत्रित करें॥

विचारों के प्रकार-एक खुशी जीवन के लिए।

अपनी सोच काे हमेशा सकारात्मक कैसे रखें॥

“मन के बहुत सारे सवालाें का जवाब-आैर मन काे कैसे नियंत्रित कर उसे सहीं तरिके से संचालित कर शांतिमय जीवन जियें”

“तू ना हो निराश कभी मन से”

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

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Injustices And Suffering In The World – Applying The Law of Karma

kmsraj51 की कलम से…..

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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Injustices And Suffering In The World – Applying The Law of Karma (Part 1) 

We are presently living in a closely connected world where everyone knows what everyone else is doing, as they are doing it. Each day brings scenes and images, through the media, in front of us, of many apparent injustices and suffering of individuals or groups of individuals. Whether it’s in the office, or in the market or on the television news, we hear and see reports of people suffering tremendous pain and sorrow at the hands of others. At these moments, our sense of injustice is stimulated and it becomes easy to rise in outrage against the sinners. In the process we ourselves suffer from our own self-created anger and perhaps hate. This process then becomes a habit and an inner pattern we begin to repeat, not only when we encounter scenes of global peacelessness, but the moment someone in the family or at office does something similar. A panic button is pressed and we react with the same pattern.

What we forget in both global and local contexts, is the history and geography of karma. Every scene and situation has a variety of related causes in both time (history) and space (geography) e.g. emotions of hatred and revenge amongst various countries and religions (in different parts of the world) and the actions connected with these emotions has underlying hidden causes, related to the Law of Karma (Law of Cause and Effect) which go back sometimes to hundreds of years – X is doing something with Y because Y had done something similar with X sometime in the past, but in different physical costumes, sometimes quite some time back in history – this is the reason, we often fail to take these causes into consideration when viewing these negative scenes and situations, because we see the situations with a limited perspective of present physical costumes and circumstances.

Injustices And Suffering In The World – Applying The Law of Karma (Part 2) 

An understanding of the laws of action reminds us that whatever we give we get, and whatever we get is the result of what we have given. When we apply this understanding into our awareness while we watch apparent injustices in the world, it reduces our outrage, lessening our pain. It’s not that we sit passively and allow people to bring about suffering upon others, but it helps us to see that the greatest or highest contribution that we can make, to both the victim and the sinner, is to help them remember who they are and help them rise above their anger and fear towards each other. Only in this way can we help them to liberate themselves from an exchange of energy that has perhaps been going on for centuries.

But before we can effectively do this for others, it is necessary to try and do it for ourselves. Instead of taking the law into our own hands (the desire for revenge and justice), we can benefit everyone around us by first understanding and living ourselves according to the invisible laws of cause and effect which define all human relationships. Sometimes this is referred to as ‘practice what you preach’, and it often requires moments of reflection before action in order to judge the consequences of any path of action. This capacity to stop, reflect and consider, in a state of mental calm and with clear intellect, is an essential characteristic of all effective leaders. It is also what makes us all potential leaders in life, every day, who can bring about world transformation through self transformation.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

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The Invisible Impressions That Shape Me

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The Invisible Impressions That Shape Me 

While the mind and intellect are two faculties of the soul which play their role on the surface of our consciousness; at a deeper level, hidden beneath these two faculties, there lies a third faculty commonly called the sanskarasThe sanskaras is not only a store house of personality traits, as we commonly know it to be, but a store house of millions and millions of impressions or imprints. Such a large number of impressions are created by millions of experiences that I go through my sense organs not only in this life but in all my lifetimes. Everything that I hear, see, touch, taste, etc. I process or analyze or summarize in my own unique way; basically I give the experiences a unique form depending on my personality, before this form gets stored in the form of impressions inside me. I even process my subtle experiences, which are in the form of thoughts and feelings.

This process of experiencing and processing takes place during each and every second of my life including the time I sleep, when my mind may not be experiencing a lot but it is busy processing the physical and subtle experiences of the day that has gone by and storing the processed information in the form of impressions. From this, one can get an idea of the magnitude of the database of impressions stored within me, the being. These imprints which are unique to me, make up my sanskaras, and shape up my unique personality in a cyclic process. My personality shapes what type of impressions are created out of my experiences and the impressions in turn shape my personality, my thoughts, words and actions e.g. if I constantly keep the company of people who gossip, a large number of respective impressions based on the experience of gossiping keep getting stored inside me, which in turn influence my personality, the personality characteristic gets stronger and over a period of time I do not find anything wrong with it and indulge in it more and more. As a result more such impressions get stored. Thus it is a cyclic process.

 

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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The Original Ingredients Of The Soul

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

The Original Ingredients Of The Soul 

Our original resources are very simply – peace, love, purity, knowledge and happiness. In Raja Yoga meditation these are called the five original qualities of the soul. When we return our consciousness to these five qualities and remember them, then the following feelings arise in us, which finally get reflected in our actions: 

• Love: I care and I share. 
• Peace: I harmonize and reconcile (adjust). 
• Purity: I respect and I honour. 
• Knowledge: I am and I exist. 
• Happiness: I express and I enjoy. 

To understand and remember these qualities, we need to recognize the heavy deep shadows or personality traits (sanskars) which have blotted them out, or polluted them. Sometimes we don’t recognize the pollutants because they have ingrained themselves so deeply into the personality that we say ‘I am this’. True, complete spiritual knowledge, makes us aware of these pollutants and the practice of meditation empowers us to dilute them and get them out of our consciousness.

In Spiritual Service Brahma Kumaris

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KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

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Kmsraj51-CYMT08

कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ~ सकारात्मक विचारों का समूह …..

:- गहराई से सोचना प्रत्येक शब्द 

मेरे(kmsraj51) कुछ व्यक्तिगत सकारात्मक विचारों का समूह …..

अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना …..

हमेशा मन को शांत रखना …..

दिमाग को हमेशा अनुसंधान में लगाये रखना …..

हमेशा (सदैव) अन्य लोगों से अपनी सोच को अलग रखना …..

हमेशा अपनी मन की कमजोरी को दूर रखना …..

हमेशा आंतरिक आत्मा की (आत्मा के अंदर की आवाज) आवाज सुनो …..

हमेशा ईस सूत्र का उपयोग करें …..

….. कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश + कोशिश = सफलता

आपके जीवन में हमेशा खुशी मिलेगी …..

आपका कृष्ण मोहन सिंह 51 या (kmsraj51) ….. मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ!! …..

** ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ ओम शांति!! ~ ओम साईराम!! ~ओम शांति!! ~ ओम साईराम!!

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

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आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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cymt-kmsraj51

कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

APT-KMSRAJ51-CYMT

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥”

 ~KMSRAJ51

 

 

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एक सफल जीवन के लिए-आत्मा का दैनिक भोजन-08-May-2014

kmsraj51 की कलम से…..

Soulword_kmsraj51 - Change Y M TFor a successful life the daily food of the soul-08-May-2014

English Murli

Essence: Sweet children, the Father has come to change thorns into flowers. The biggest thorn is body consciousness. It is through this that all other vices come. Therefore, become soul conscious.

Question: Due to not understanding which of the Father’s tasks have devotees considered Him to be omnipresent?
Answer: The Father is the One with many forms and, wherever there is a need, He enters any child in a second and benefits the soul in front of that one. He grants visions to devotees. He is not omnipresent but is a very fast rocket. It doesn’t take the Father long to come and go. Due to not understanding this, devotees say that He is omnipresent.

Essence for dharna:
1. In order to become worthy and sensible, become pure. Do service with the Father in order to change the whole world from hell into heaven. Become a helper of God.
2. Renounce the systems of the iron-aged world, the opinion of society and the code of conduct of the family and observe the true code of conduct. Become full of divine virtues and establish the deity community.

Blessing: May you be truthful and, with the foundation of truth, give the experience of divinity through your face and your activity.
In the world, many souls are called truthful or consider themselves to be truthful, but complete truthfulness is based on purity. Where there is no purity, there cannot be truth. The foundation of truth is purity and the practical proof of truth is the divinity on your face and in your activity. On the basis of purity, there is naturally and easily the form of truth. When both the soul and body become pure, you would then be said to be truthful, that is, you would be a deity who is filled with divinity.

Slogan: Remain busy in unlimited service and there will automatically be unlimited disinterest.


 

Hindi Murli-हिन्दी मुरली

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – बाप आये हैं कांटों को फूल बनाने, सबसे बड़ा कांटा है देह-अभिमान, इससे ही सब विकार आते हैं, इसलिए देहीअभिमानी बनो”

प्रश्न:- भक्तों ने बाप के किस कर्त्तव्य को न समझने के कारण सर्वव्यापी कह दिया है?
उत्तर:- बाप बहुरूपी है, जहाँ आवश्यकता होती सेकण्ड में किसी भी बच्चे में प्रवेश कर सामने वाली आत्मा का कल्याण कर देते हैं। भक्तों को साक्षात्कार करा देते हैं। वह सर्वव्यापी नहीं लेकिन बहुत तीखा राकेट है। बाप को आने-जाने में देरी नहीं लगती। इस बात को न समझने के कारण भक्त लोग सर्वव्यापी कह देते हैं।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) लायक और समझदार बनने के लिए पवित्र बनना है। सारी दुनिया को हेल से हेविन बनाने के लिए बाप के साथ सर्विस करनी है। खुदाई खिदमतगार बनना है।
2) कलियुगी दुनिया की रस्म-रिवाज, लोक-लाज, कुल की मर्यादा छोड़ सत्य मर्यादाओं का पालन करना है। दैवीगुण सम्पन्न बन दैवी सम्प्रदाय की स्थापना करनी है।

वरदान:- सत्यता के फाउण्डेशन द्वारा चलन और चेहरे से दिव्यता की अनुभूति कराने वाले सत्यवादी भव
दुनिया में अनेक आत्मायें अपने को सत्यवादी कहती वा समझती हैं लेकिन सम्पूर्ण सत्यता पवित्रता के आधार पर होती है। पवित्रता नहीं तो सदा सत्यता नहीं रह सकती। सत्यता का फाउण्डेशन पवित्रता है और सत्यता का प्रैक्टिकल प्रमाण चेहरे और चलन में दिव्यता होगी। पवित्रता के आधार पर सत्यता का स्वरूप स्वत: और सहज होता है। जब आत्मा और शरीर दोनों पावन होंगे तब कहेंगे सम्पूर्ण सत्यवादी अर्थात् दिव्यता सम्पन्न देवता।

स्लोगन:- बेहद की सेवा में बिजी रहो तो बेहद का वैराग्य स्वत: आयेगा।


 

Hinglish Murli

Murli Saar : – Meethe Bacche – Baap Aaye Hai Kaanton Ko Phul Banane, Sabse Bada Kaanta Hai Deh – Abhiman, Isse Hi Sab Vikaar Aate Hai, Isliye Dehi – Ahimani Banno”

Prashna : – Bhakto Ne Baap Ke Kis Kartavya Ko Na Samajhne Ke Karan Sarvavyapi Kah Dia Hai ?

Uttar : – Baap Bahurupi Hai, Jaha Aavasyak Hoti Second Mei Kisi Bhi Bacche Mei Pravesh Kar Samne Vaali Atma Ka Kalyan Kar Dete Hai. Bhakto Ko Sakshatkar Kara Dete Hai. Vah Sarvavyapi Nahi Lekin Bahut Teekha Rocket Hai. Baap Ko Aane – Jane Mei Dairi Nahi Lagti. Is Baat Ko Na Samajhne Ke Karan Bhakt Log Sarvavyapi Kah Dete Hai.

Dharan Ke Liye Mukhya Saar : –

1 ) Layak Aur Samajdar Banne Ke Liye Pavitra Bannna Hai. Saari Dunia Ko Hell Se Heaven Banane Ke Liye Baap Ke Saath Service Karni Hai. Khudayi Khidmadgar Bannna Hai.

2 ) Kaliyugi Dunia Ki Rasm – Rivaz, Lok – Laaz, Kul Ki Maryada Chod Satya Maryadaon Ka Palan Karna Hai. Daivigun Sampann Ban Daivi Sampradaye Ki Stapna Karni Hai.

Vardan : – Satyata Ke Foundation Dwara Chalan Aur Chehre Se Divyata Ki Anubhuti Karane Wale Satyavadi Bhav

Dunia Mei Anek Atmae Apne Ko Satyavadi Kehti Va Samajti Hai Lekin Sampurn Satyata Pavitrata Ke Aadhar Par Hoti Hai. Pavitrata Nahi Toh Sada Satyata Nahi Rah Sakti. Satyata Ka Foundation Pavitrata Hai Aur Satyata Ka Practical Praman Chehre Aur Chalan Mei Divyata Hogi. Pavitrata Ke Aadhar Par Satyata Ka Swarup Swatah : Aur Sahaj Hota Hai. Jab Atma Aur Sharir Dono Paavan Honge Tab Kahenge Sampurn Satyavadi Arthat Divyata Sampann Devta.

Slogan : – Behad Ki Seva Mei Busy Raho Toh Behad Ka Vairagya Swatah : Aayega.

 

आध्यात्मिक सेवा में, 
ब्रह्माकुमारी

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love-rose-kmsraj51Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

Book-Red-kmsraj51

100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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“सफल लोग अपने मस्तिष्क को इस तरह का बना लेते हैं कि उन्हें हर चीज सकारात्मक व खूबसूरत लगती है।”
-KMSRAJ51

“हमारी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने जीवन का कुछ सेकंड, प्रतिघंटा और प्रतिदिन कैसे बिताते हैं”
-KMSRAJ51

-A Message To All-

मत करो हतोत्साहित अपने शब्दों से ……आने वाली नयी पीढ़ी को ,
वो भी करेंगे कुछ ऐसा एक दिन…. जिसे देखेगा ज़माना ….पकड़ती हुई नयी सीढ़ी को ॥

कुछ भी आप के लिए संभव है ॥

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

~kmsraj51

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“तू न हो निराश कभी मन से” book

~Change your mind thoughts~

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Performing A Spiritual Audit At The End Of The Day !!

 

KMSRAJ51की कलम से…..

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Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

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Soul Sustenance 24-04-2014
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Performing A Spiritual Audit At The End Of The Day – Part 2 

Yesterday we had explained how self evaluation at the end of the day is extremely vital to one’s progress and development. A useful exercise in this regard is keeping a daily chart for about 3 personality traits or pointsand filling it up every night (lesser than 3 is also fine, but not more , because then you might feel lazy in keeping the chart after a few days and also you might lose focus and the personality traits may not transform as much as you want). You could either evaluate yourself with a yes or no or perform a percentage wise evaluation like 50% or 90% for e.g. We have mentioned below, some of the common traits from which you could select the traits to keep a daily chart for. You could incorporate some other specific traits (not mentioned in this list), which you want to change or develop, depending on your personality: 

In the entire day, today; not only in my words and actions, but also in my thoughts: 
* Did I see everyone’s specialties and keep good wishes for each one, in spite of obvious weaknesses being visible? 
* Did I remain free from all forms of anger, like irritation, frustration, grudge, revenge, etc.? 
* Did I ensure that I neither give nor take sorrow, hurt, pain from anyone? 
* Did I remain free from waste and negative? 
* Did I remain ego less? 
* Did I remain untouched by name, fame, praise, insult? 
* Did I remain stable? 
* Did I remain free from judgments, criticism, jealousy, comparison, hatred, etc.? 
* Did I keep a conscious of serving each one whom I met? 
* Did I bring the 8 main powers into practice and experience being powerful? 
* Did I remain in self-respect and give respect to everyone? 
* Did I practice being soul-conscious in actions and interactions? 
* Did I take a one minute break every hour to reflect, meditate and control the traffic of thoughts in the mind?

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Message for the day 24-04-2014
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Humility is to respect everything that comes our way. 

Expression: To love simple things is humility. It teaches to respect all that life brings. That means there is an ability to appreciate and value everything appropriately. So one is able to use everything that comes one way to the fullest extent for the benefit of the self and that of others. 

Experience: When I am humble I am able to remain focused on my inner peace and not lose my sense of personal well-being. I am able to simply learn from everything that happens to my life and add on to this sense of well-being. No situation is difficult or impossible to work on, but I am able to overcome all challenges with ease. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

brahmakumaris-kmsraj51

 

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Soul Sustenance 23-04-2014
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Performing A Spiritual Audit At The End Of The Day – Part 1 

Our normal day at the office or/and at home is filled with lots of actions and interactions. On a normal day, without realizing consciously, we create almost 30,000-40,000 thoughts. So, not only are we active physically but extremely active on a subtle or non-physical level also. Imagine sleeping with all this burden of thoughts, words and actions which have been created throughout the day, many of which have been waste and negative in nature. What would be the resulting quality of my sleep? So it is extremely important to perform a spiritual/emotional audit or evaluation at the end of each day. 

In a lot of professional sectors of life today, people recognize the need for reflection and audit, not only of financial records but also a general evaluation of the respective sector, to maintain and improve both the service to customers and the job satisfaction of people working in the sector. Checking my own behavior, as a daily exercise; not just checking, but also bringing about respective changes for the next day, enables me to continue to develop and grow, as a human being and in the quality of my work and personal and professional relationships. Have gone through the self-evaluation, it is also advised to become completely light by submitting the mistakes made and heaviness accumulated in the day to the Supreme Being. Doing this helps me put a full-stop to the same and settle all my spiritual accounts at the end of the day. I need to put an end to all commas (when looking at scenes that caused me to slow down and reduced the speed of my progress), question marks (when looking at scenes which caused a why, what, how, when, etc…. in my consciousness) and exclamation marks (when looking at negative or waste scenes, which were unexpected and surprising) which were created in the day’s activities. Along with remembering what all good happened during the day, what did I achieve and what good actions did I perform, there is lots to forget at the end of the day, which should not be carried into my sleep at any cost. Disturbed, thought-filled, unsound sleep, will result in a not so fresh body and mind the next morning, which will cause my mood to be disturbed, adversely affecting the following day. 


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Message for the day 23-04-2014
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To be clean at heart is to give happiness to others. 

Expression: The one who has a clean heart is the one who always tries to do the best for those with whom he comes in contact. Thus, the person develops the ability to accept others as they are and ignore anything wrong done by them. Instead, he is able to do the right action without losing the balance. So such a person brings happiness for himself and for others through every action he performs. 

Experience: When I have a clean heart I am able to have an experience of my inner qualities. I am able to enjoy the beauty of the different relationships, each relationship and each person being unique. Thus others are able to get in touch with their inner beauty too. So there is happiness experienced by all. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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Happy Anniversary!!

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Happy Anniversary!!
09-March-2013 to 09-March-2014
Completed ONE (1) Year Successfully Journey
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Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!!

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जीवन में सबसे कठिन दौर यह नहीं है जब कोई तुम्हें समझता नहीं है, बल्कि यह तब होता है जब तुम अपने आप को नहीं समझ पाते.

All of my dear reader`s & friend`s lots of thanks’
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Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!!

Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!!

तुम्हारे न रहने पर
थोड़ा-थोड़ा करके
सचमुच हमने पूरा खो दिया तुम्हें
पछतावा है हमें
तुम्हें खोते देखकर भी
कुछ भी नहीं कर पाये हम,
अब हमारी ऑंखें सूनी हैं,
जिन्हें नहीं भर सकतीं
असंख्य तारों की रोशनी भी
और न ही है कोई हवा
मौजूद इस दुनिया में
जो महसूस करा सके
उपस्‍थिति तुम्हारी,
एक भार जो दबाये रखता था
हर पल हमारे प्रेम के अंग
उठ गया है, तुम्हारे न रहने से
अब कितने हल्के हो गये हैं हम
तिनके की तरह पानी में बहते हुए ।

Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!!

Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!! —– Happy Anniversary!!

anniversary-1x

Thank`s & Regard`s

anniversary-1x

Krishna Mohan Singh51(कृष्ण मोहन सिंह51)
Spiritual Author Cum Spiritual Guru
Always Positive Thinker Cum Motivator
Sr.Administrator (IT-Software, Hardware & Networking)
ID: kmsraj51@yahoo.in
Founder & CEO

Of: https://kmsraj51.wordpress.com/

9-3-14 kmsraj51

5-kms0005

ladali

 

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