मानव जीवन विचारों का प्रतिबिम्ब।

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ϒ मानव जीवन विचारों का प्रतिबिम्ब। ϒ

संसार एक शीशा है। इस पर हमारे विचारों की जैसी छाया पड़ेगी वैसा ही प्रतिबिम्ब दिखाई देगा। विचारों के आधार पर ही संसार सुखमय अनुभव होता है। पुरोगामी उत्कृष्ट उत्तम विचार जीवन को ऊपर उठाते हैं, उन्नति, सफलता, महानता का पथ प्रशस्त करते हैं तो हीन, निम्नगामी, कुत्सित विचार जीवन को गिराते हैं।

विचारों में अपार शक्ति है। जो सदैव कर्म की प्रेरणा देती है। वह अच्छे कार्यों में लग जाय तो अच्छे और बुरे मार्ग की ओर प्रवृत्त हो जाय तो बुरे परिणाम प्राप्त होते हैं। विचारों में एक प्रकार की चेतना शक्ति होती है। किसी भी प्रकार के विचारों में एक स्थान पर केन्द्रित होते रहने पर उनकी सूक्ष्म चेतन शक्ति घनीभूत होती जाती है। प्रत्येक विचार आत्मा और बुद्धि के संसर्ग से पैदा होता है। बुद्धि उसका आकार- प्रकार निर्धारित करती है तो आत्मा उसमें चेतना फूँकती है।। इस तरह विचार अपने आप में एक सजीव किन्तु सूक्ष्म तत्त्व है। मनुष्य के विचार एक तरह की सजीव तरंगें हैं जो जीवन संसार और यहाँ के पदार्थों को प्रेरणा देती रहती है। इन सजीव विचारों का जब केन्द्रीयकरण हो जाता है तो एक प्रचण्ड शक्ति का उद्भव होता है। स्वामी विवेकानन्द ने विचारों की इस शक्ति का उल्लेख करते हुए बताया है- ‘‘कोई व्यक्ति भले ही किसी गुफा में जाकर विचार करे और विचार करते- करते ही वह मर भी जाय तो वे विचार कुछ समय उपरान्त गुफा की दीवारों का विच्छेद कर बाहर निकल पड़ेंगे और सर्वत्र फैल जायेंगे। वे विचार तब सबको प्रभावित करेंगे।’’ मनुष्य जैसे विचार करता है, उनकी सूक्ष्म तरंगें विश्वाकाश में फैल जाती हैं। सम स्वभाव के पदार्थ एक- दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं, इस नियम के अनुसार उन विचारों के अनुकूल दूसरे विचार आकर्षित होते हैं और व्यक्ति को वैसे ही प्रेरणा देते हैं। एक ही तरह के विचार घनीभूत होते रहने पर प्रचण्ड शक्ति धारण कर लेते हैं और मनुष्य के जीवन में जादू की तरह प्रकाश डालते हैं।

🍁  पं श्रीराम शर्मा आचार्य 🍁

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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इन तीन का ध्यान रखिए।

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ϒ इन तीन का ध्यान रखिए। ϒ

उत्पादन की जड़ इन तीनों को सदैव अपने अधिकार में रखिये-

अपना क्रोध, अपनी जिह्वा और अपनी वासना। ये तीनों ही भयंकर उत्पादक की जड़ हैं।

🍁  क्रोध के आवेश में मनुष्य कत्ल करने तक नहीं रुकता। ऊटपटाँग बक जाता है और बाद में हाथ मल मल कर पछताता है।

🍁  जीभ के स्वाद के लालच में भक्ष्य अभक्ष्य का विवेक नष्ट हो जाता है। अनेक व्यक्ति चटपटे मसालों, चाट पकौड़ी और मिठाइयाँ खा खाकर अपनी पाचन शक्ति सदा के लिये नष्ट कर डालते हैं।

🍁  सबसे बड़े मूर्ख वे हैं जो अनियंत्रित वासना के शिकार हैं। विषय-वासना के वश में मनुष्य का नैतिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक पतन तो होता ही है, साथ ही गृहस्थ सुख, स्वास्थ्य और वीर्य नष्ट होता है। समाज ऐसे भोग विलासी पुरुष को घृणा की दृष्टि से अवलोकता है। गुरुजन उसका तिरस्कार करते हैं। ऐसे पापी मदहोश को स्वास्थ्य लक्ष्मी और आरोग्य सदा के लिये त्याग देते हैं। इन तीनों ही शत्रुओं पर पूरा पूरा नियंत्रण रखिये।

©पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य जी।

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हमारा अच्छा व्यवहार ही जीवन का निर्माण करता है।

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balloon seller by Urmi Patel (Om drawing classes)

बैलोन-विक्रेता।

हमारा अच्छा व्यवहार ही जीवन का निर्माण करता है।

एक आदमी गुब्बारे बेच कर जीवन-यापन करता था। वह गांव के आस-पास लगने वाली हाटों में जाता और गुब्बारे बेचता। बच्चों को लुभाने के लिए वह तरह-तरह के गुब्बारे रखता। और जब कभी उसे लगता कि बिक्री कम हो रही है, वह झट से एक गुब्बारा हवा में छोड़ देता। यह देखकर बच्चे खुश हो जाते और गुब्बारे खरीदने के लिए पहुंच जाते।

एक दिन वह हाट में गुब्बारे बेच रहा था और बिक्री बढ़ाने के लिए बीच-बीच में गुब्बारे उड़ा रहा था। पास ही खड़ा एक छोटा बच्चा यह सब बड़ी जिज्ञासा से देख रहा था। इस बार जैसे ही गुब्बारे वाले ने एक सफेद गुब्बारा उड़ाया वह तुरंत उसके पास पहुंचा और मासूमियत से बोला,’अगर आप यह काला वाला गुब्बारा छोड़ेंगे तो क्या वह भी ऊपर जाएगा?’

गुब्बारा वाले ने अचरज के साथ उसे देखा और बोला, ‘बिलकुल जाएगा। गुब्बारे का ऊपर जाना इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह किस रंग का है, निर्भर इस पर करता है कि उसके अंदर क्या है।’

ठीक इसी तरह हम इंसानों पर भी यह बात लागू होती है। कोई अपने जीवन में क्या हासिल करेगा, यह उसके बाहरी रंग-रूप पर निर्भर नहीं करता। बल्कि इस पर निर्भर करता है कि उसके अंदर क्या है। हमारा व्यवहार ही हमारा जीवन निर्माण करता है।

एक बूढ़े किसान को सामान ढोने के लिए गधे की जरूरत थी। वह कुम्हार के पास गधा मांगने के लिए गया। कुम्हार गधा नहीं देना चाहता था। उसने कहा- ‘गधा चरने के लिए गया है और रात को देरी से आएगा। गधा यहां होता तो मुझे देने में खुशी होती। पड़ोसी के काम पड़ोसी नहीं तो क्या परदेसी आएगा।’ दोनों के बीच बातचीत का क्रम चल ही रहा था कि बाड़े में बंधे गधे ने एक लंबा आलाप लिया। किसान ने कहा- ‘गधा तो भीतर बंधा है, तुम बहाना बनाने की बजाय सीधे मना कर देते तो मुझे बुरा नहीं लगता।’ कुम्हार ने हंसते हुए कहा- ‘तुम भी अजीब आदमी हो। तुम्हें आदमी की जबान से गधे की जबान पर ज्यादा भरोसा है।’ किसान ने सरलता से कहा- ‘झूठ बोलने वाले आदमी से पशु ज्यादा भरोसेमंद होता है।’ किसान की बात सुनकर कुम्हार बोला- ‘तुम ठीक कहते हो। अब भविष्य में मैं दैनिक जीवन व्यवहार में झूठ बोलने की बजाय सच्ची बात कहना पसंद करूंगा।’ इस तरह की व्यवहार-कुशलता का संकल्प व्यक्ति को हर दृष्टि से बहुत ऊंचा उठा देती है। अपने परिवार के निकट अथवा दूरस्थ व्यक्तियों के साथ, पड़ोसियों के साथ, अपने कर्मचारियों के साथ, सामाजिक सम्पर्कों वाले सभी व्यक्तियों के साथ आप उचित व्यवहार का निर्वाह करते हैं तो व्यवहार कुशल माने जाएंगे। अगर व्यवहार में संवेदनशीलता है, सहयोगी दृष्टिकोण है, आत्मीयता और उदारतापूर्ण व्यवहार है तो आपका व्यक्तित्व और अधिक निखरेगा।

Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

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दूसरों के साथ अपनी तुलना करके खुद को कमतर न आंकें।

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 दूसरों के साथ अपनी तुलना करके खुद को कमतर न आंकें।

एक कुम्हार घड़ा बना रहा था। पास ही कुछ सुराहियां, दीपक, मूर्तियां और गुल्लकें बनी रखीं थीं। ये सभी आपस में बातें कर रहे थे। घड़े ने दीपकों से कहा- ‘तुम सभी कितने सुंदर हो अलग अलग आकृतियों में। एक हम हैं… सब के सब मोटे-मोटे। जरा-सा ढलक जाएं तो टूट ही जाएं।’ एक दीपक बोला-‘अरे कहां, घड़े काका। हमारा आकार तो देखो आपके आगे कितना छोटा है। किसी सामान के पीछे कब दब कर टूट जाएं, पता भी न चले। ये मूर्तियां हमसे कहीं ज्यादा सुंदर हैं। काश, हम भी मूर्ति होते।’ दीपक और घड़े की बातें सुनकर मूर्तियां भी उदास हो गईं। एक मूर्ति बोली- ‘भैया, ये आप क्या कह रहे हैं! आपको नहीं पता कि हमें इस आकार को पाने के लिए कितनी तकलीफ सहनी पड़ती है। अपने अंगों को जगह-जगह से सुडौल आकार देने की खातिर कितने कष्ट उठाने पड़ते हैं। हमें तो गुल्लक बनना पसंद था। काश, हम गुल्लक होतीं तो सब हमारे भीतर खूब सारे पैसे रखते।’ गुल्लकें काफी देर से सब की बातें सुन रहीं थीं, वे भी विचलित हो उठीं। एक गुल्लक तो बिफर ही पड़ी- ‘आप सब हमारा दर्द नहीं समझ पाएंगे। लोग हमारे भीतर अपनी सबसे प्रिय वस्तु ‘अपना पैसा’ संचित करते हैं ताकि वह इधर-उधर न पड़ा रहे और सुरक्षित रहे, लेकिन इसी पैसे की खातिर वे लोग एक दिन हमें बड़ी निर्ममता से पटक कर फोड़ देते हैं। अब आप ही बताइए, क्या आपको कोई ऐसे तोड़ता है?’

कुम्हार का चाक अपना काम करते हुए इन सभी की तकलीफें सुन रहा था। जब उसका काम पूरा हो गया तो उसने भी बातचीत शुरू कर दी। उसने घड़े को समझाया- ‘तुम बहुत ही उपयोगी हो। अपने शीतल जल से तमाम लोगों की प्यास बुझाते हो और कुछ लोग तो तुम्हारे भीतर अपना अनाज तक रख लेते हैं।’ फिर वह दीपक से बोला- ‘तुम आकार में बेशक छोटे हो, लेकिन तुमसे प्रकाश फूटता है। तुम मंदिरों में जगह पाते हो। घरों और देहरियों को जगमगाते हो।’ इसके बाद चाक ने मूर्तियों की तरफ देखा और कहा- ‘तुम्हारी शोभा इसीलिए है कि तुम इतनी तकलीफ सहती हो। इसीलिए तुम घरों, मंदिरों, ऑफिसों की शोभा बढ़ाती हो।’ आखिर में उसने गुल्लकों की और बड़े प्यार से देखते हुए कहा- ‘तुम सभी बहुत कीमती हो| तुम बच्चों की खुशी हो। तुम लोगों के बुरे वक्त में उनके काम आकर अपना जीवन सार्थक कर देती हो।’

इस तरह वह चाक उन चीजों के साथ-साथ हम इंसानों को भी ये सीख दे गया कि अपने गुणों को पहचानते हुए खुद का भी सम्मान करना चाहिए। दूसरे लोगों के साथ अपनी तुलना करके बेवजह खुद को कमतर नहीं आंकना चाहिए। अपनी-अपनी जगह पर हम सभी उपयोगी हैं। हमें अपना मोल खुद पहचानना चाहिए।

Source(स्रोत): http://navbharattimes.indiatimes.com/

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पवित्र विचार-

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Kmsraj51 – Motivational Thoughts 

अपनी साेंच काे वृहद बनाआे।

ये मत साेंचाे की कल तक तुम्हारे पास क्या था या तुम कैसे थें,

मगर तुम यह जरूर साेंचाे की आज तुम क्या कर रहें हाे, आैर अपने भविष्य के लिए क्या कर रहें हाे।

ये साेंचाे की आज तुम्हारे पास क्या हैं, अपना एक सटिक लक्ष्य बनाआेे।

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

सच्चें मन से अगर कुछ करने की ठान लाे, ताे आपकाे सभी काम में सफलता मिल जाती हैं।

जीवन में जाे भी काम कराें पुरे मन से कराें, ताे सफलता आपकाे जरूर मिलेगी।

आपका दोस्त

कृष्ण मोहन सिंह ५१

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