आयुर्वेद-घरेलू औषधालय।

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आयुर्वेद-घरेलू औषधालय। 

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ये 5 PICS देखेंगे तो कर पाएंगे बहुत आसानी से इन 10 रोगों का इलाज।

भारतीय आयुर्वेद के अनुसार भारत के हर घर का किचन एक तरह का घरेलू औषधालय है। किचन में रखी कई चीजें जैसे मसाले, खाद्यान्न, फल-सब्जी, शहद, घी-तेल आदि औषधि का काम भी करते हैं। अत: रसोई घर को औषधि का भंडार कहना गलत नहीं होगा। आइए, जानते हैं ऐसे कुछ अनुभूत नुस्खाें के बारे मे जो वक्त पड़ने पर बेहद कारगर सिद्ध हो सकते हैं।

1⇒ एक चम्मच सरसों के तेल में एक चुटकी हल्दी और नमक मिलाकर दांतों पर लगाने या हल्के-हल्के मालिश करने से दांत का दर्द दस से पंद्रह मिनट में ठीक हो जाता है।

2⇒ अगर त्वचा पर अनचाहे बाल उग आये हों, तो इन बालों को हटाने के लिए हल्दी पाउडर को गुनगुने नारियल तेल में मिला कर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को हाथ-पैरों पर लगाएं। ऐसा करने से शरीर के अनचाहे बालों से निजात मिलती है।

3⇒ दही में भूरे जीरे का चूर्ण मिलाकर खाने से डायरिया मिटता है।

4⇒ सिरके के साथ जीरा देने से हिचकी बंद हो जाती है।

5⇒ खाना खाने को मन नहीं करता। भरपेट नहीं खा सकते। पचता भी नहीं तो धनिया, छोटी इलायची, कालीमिर्च तीनों एक जैसी मात्रा में लें। इन्हें पीस कर छान लें और शीशी में रखें। चौथाई चम्मच घी तथा आधा चम्मच चीनी में आधा चम्मच इस चूर्ण को डालकर खाएं।

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6⇒ कमजोरी में रात को पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा धनिया भिगो दें। प्रात: छानकर पी लें। कुछ दिन नियमित करें। कमजोरी दूर होगी।

7⇒ भोजन के बाद रोजाना 30 मिनट बाद सौंफ लेने से कॉलेस्ट्रोल काबू में रहता है।

8⇒ 5-6 ग्राम सौंफ लेने से लीवर और आंखों की ज्योति ठीक रहती है। गुड़ के साथ सौंफ खाने से मासिक धर्म नियमित होता है।

9⇒ अजवाइन, सौंफ और थोड़ा-सा काला नमक मिलाकर चूर्ण बनाकर खाएं। आराम मिलेगा। पेटदर्द गायब हो जाएगा।

10⇒ अजवाइन को गर्म करके पतले कपड़े में पोटली बांधकर सूंघने से जुकाम और सर्दी में लाभ होता है।

© संयोगिता सिंह। (सहारनपुर -उत्तर प्रदेश)

Post share by संयोगिता सिंह जी। I am grateful to Sanyogita Singh Ji, for sharing Ayurveda Tips in Hindi.

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विटामिन का भरपुर स्रोत अंगूर हैं।

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अंगूर फल के लाभ। 

गर्मियों में अंगूर खाने सभी को अच्छे लगते हैं। इससे अंदर ठंडक लगती है और प्यास भी बुझती है। इसके अलावा यह शरीर को हेल्दी रखने के साथ ही कब्ज, अपचन, थकान, गुर्दे की बीमारियों और आंखों में होने वाले मोतियाबिंद जैसे रोगों से भी दूर रखता है। अंगूर में विटामिन ए, सी, बी6, फोलेट के अलावा कई प्रकार के मिनरल्स जैसे पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और सेलेनियम भी पाए जाते हैं। 100 ग्राम अंगूर में सिर्फ 69 कैलोरी, प्रोटीन/वसा की मात्रा 0.3 ग्राम, मिनरल्स 0.6 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 16.5 ग्राम और फाइबर की मात्रा 2.9 ग्राम होती है। काले या हरे अंगूर में 15 से 25 प्रतिशत ग्लूकोज की मात्रा भी पाई जाती है, जो रक्त में घुलनशील होकर काफी कम समय में शरीर को भरपूर ऊर्जा देती है।
अंगूर में पाए जाने वाले फ्लैवोनॉयड्स, जो एंटी-ऑक्सीडेंट्स के रूप में काम करते हैंस ये चेहरे को झुर्रियां कम करते हैं और आपको त्वचा को बनाते हैं जवां। अंगूर में सबसे ज्यादा मात्रा में पाया जाने वाला पोषक तत्व एक स्वस्थ और हेल्दी लाइफ को बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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अंगूर से होने वाले फायदे।

♦ अंगूर से होने वाले फायदे। 

1. अस्थमा⇒

अंगूर कई प्रकार के रोगों में उपचार के तौर पर भी इस्तेमाल होता है। अस्थमा (दमा) रोगियों के लिए भी ये बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद पानी की मात्रा से फेफड़ों में भी पानी की कमी पूरी होती है, जो अस्थमा की संभावना को काफी कम कर देती है।

2. हड्डियों के लिए⇒

अंगूर कॉपर, आयरन और मैंगनीज़ का बहुत अच्छा स्रोत होता है, जो हड्डियों के निर्माण और उन्हें मजबूत बनाने में बहुत जरूरी होता है। इसका रोजाना सेवन करने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है। मैंगनीज़ भी हमारे शरीर के लिए बहुत ज़रूरी तत्व है जो नर्वस सिस्टम को सही रखता है।


3. दिल की बीमारी⇒

अंगूर खून में नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर को नियंत्रित करता है जिससे ब्लड क्लॉटिंग नहीं होती। इससे हार्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स एलडीएल कोलेस्ट्रॉल से बचाव करता है। फ्लेवोनॉइड्स की ज़्यादा मात्रा भी अच्छे एंटी-ऑक्सीडेंट का काम करती है। इससे ब्रेस्ट कैंसर नहीं फैलता। अंगूर में रेसवेराट्रॉल और क्यूरसेटिन दो प्रकार के तत्व शरीर को रेडिकल्स से बचाकर आर्टरीज़ को भी सुरक्षित रखने का काम करते हैं। ये ब्लड में प्लेटलेट्स की कमी नहीं होने देते।

Other Benefits: माइग्रेन, कब्ज, थकान और डायबिटीज से छुटकारा, दांतों के लिए फायदेमंद, अल्जाइमर बीमारी से दूर रखता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, मोतियाबिंद में कारगर, किडनी के लिए लाभकारी, त्वचा के लिए फायदेमंद, गठिया रोग से मुक्ति, मुंह के छाले खत्म करता है, त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है, असमय बुढ़ापे को रोकता है, त्वचा को कोमल बनाता है, जवां रखता है, दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाता है, बालों के विकास में मददगार, रुसी की समस्या खत्म करता है, बालों को झड़ने से रोकता है, अरोमाथेरेपी में इस्तेमाल किया जाता है।


4. माइग्रेन⇒

पके हुए अंगूर के रस के सेवन से माइग्रेन जैसी समस्या में आराम मिलता है। सुबह-सुबह बिना पानी मिलाए एक गिलास अंगूर का रस पीना बहुत फायदेमंद होता है। रेड वाइन को माइग्रेन की एक वजह मानी जाती है, लेकिन अंगूर का जूस और इसके बीज से इस समस्या को दूर किया जा सकता है। वैसे तो कम सोना, मौसम में बदलाव, पाचन समस्या में परेशानी आदि कई माइग्रेन बीमारी का कारण हो सकते हैं, लेकिन एल्कोहल के सेवन को इसकी खास वजह माना जाता है। अंगूर का जूस पीकर इसके खतरे का काफी कम किया जा सकता है।


 

5. कब्ज⇒

अंगूर कब्ज जैसी समस्या से भी राहत दिलाता है, क्योंकि इसमें मौजूद ऑर्गेनिक एसिड, शुगर और सेल्यूलोज की मात्रा पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है। इसमें भोजन को आसानी से पचाने वाले रेशे पाए जाते हैं जो न सिर्फ आंतों को साफ रखते हैं, बल्कि पेट की भी अच्छी तरह से सफाई करते हैं। अच्छे परिणाम के लिए रोजाना कम-से-कम 350 ग्राम अंगूर का सेवन करना चाहिए। यह दस्त बीमारी से भी छुटकारा दिलाता है।


 

6. थकान⇒

रोजाना अंगूर का जूस पीने से शरीर में आयरन और मिनरल्स की मात्रा बराबर बनी रहती है, जो थकान जैसी समस्या से भी कोसों दूर रखती है। वैसे तो एनीमिया आम समस्या है, लेकिन महिलाओं में ये सबसे ज्यादा पाई जाती है। ऐसे में अगर एनीमिया से छुटकारा पाना है, तो अंगूर का भरपूर मात्रा में जूस पिएं। इससे आयरन की मात्रा आपके शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखेगी जो थकान और आलसपन से भी दूर रखती है। जिंक, सेलेलियम, कार्बोहाइड्रेट और पॉलिफिनोल्स की मात्रा ब्रेन को एक्टिव रखती है। अंगूर के जूस में 2 चम्मच शहद मिलाकर पीने से खून की कमी पूरी हो जाती है।


 

7. अल्जाइमर बीमारी⇒

रेसवेराट्रॉल अंगूर में पाए जाने वाला एक बहुत ही फायदेमंद पॉलीफेनोल है जो अल्जाइमर के मरीजों में एमीलॉइडल बेटा पेपटाइड्स के स्तर को कम करता है। कई रिसर्च में ये पाया गया है कि अंगूर खाने से दिमाग हेल्दी रहता है। ब्रिटेन के साइंटिस्ट्स के अनुसार काले अंगूर में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉइड्स का सीधा संबंध नर्व सेल्स से होता है जो याददाश्त सुधारने में मदद करते हैं।


 

8. डायबिटीज⇒

डायबिटीज के रोगियों के लिए अंगूर का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। यह शुगर की मात्रा को कम करता है। खून में मौजूद शुगर को नियंत्रित करने में अंगूर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


 

9. दांतों के लिए⇒

हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार अंगूर के बीज और रेड वाइन के सेवन से कैविटी और मसूड़ों की समस्या कई प्रतिशत तक कम हो जाती है। ये मुंह की बीमारियों से भी बचाती है।


 

10. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है⇒

विटामिन ए, सी और के का खजाना समेटे अंगूर शरीर को हेल्दी बनाए रखता है। यह खासतौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इससे सर्दी, खांसी, जुकाम जैसे संक्रामक बीमारियां शरीर को जल्दी प्रभावित नहीं करतीं।


 

11. मोतियाबिंद⇒

फ्लेवोनॉइड्स में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स सिर्फ त्वचा के लिए ही नहीं, आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद होते है। ये मोतियाबिंद जैसी बीमारी से बचाते हैं।


 

12. किडनी के लिए लाभकारी⇒

अंगूर के रस में पानी और पोटैशियम की प्रचुर मात्रा होती है और एलब्यूमिन और सोडियम क्लोराइड की मात्रा काफी कम होती है जो किडनी से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर उसे स्वस्थ बनाती है।


 

13. गठिया रोग⇒

अंगूर खाने या इसका जूस पीकर गठिया रोग की संभावना को काफी कम किया जा सकता है, क्योंकि ये शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है जो गठिया रोग का मूल कारण होता है।


 

14. त्वचा के लिए⇒

अंगूर में विटामिन ए पाया जाता है, जो त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है। रोजाना सेवन से त्वचा में निखार आता है। साथ ही झुर्रियां भी कम होती हैं। आंखों के नीचे काले घेरो पर अंगूर लगाकर उसे कुछ दिनों में ही दूर भी किया जा सकता है।


 

15. मुंह के छाले⇒

अंगूर मुंह के छालों से भी राहत दिलाता है। इसके रस से कुल्ला करने से मुंह में होने वाले छाले दूर होते हैं।



 

त्वचा के लिए फायदेमंद ♥

त्वचा को हेल्दी रखने में भी अंगूर बहुत गुणकारी होता है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इनफ्लेमेटरी तत्व त्वचा के लिए जरूरी तत्वों की पूर्ति करते हैं। साथ ही किसी भी प्रकार के फलों की तरह इसमें भी मौजूद विटामिन सी त्वचा को हेल्दी रखता है।

16. सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है

अंगूर के बीजों और गूदों में मौजूद प्रोएंथोसाइनिडिंस और रेसवेराट्रॉल बहुत ही प्रभावकारी एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं। ये सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से त्वचा की रक्षा करते हैं। साथ ही त्वचा पर पड़ने वाले लाल निशान, और त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले सेल्स का खात्मा करते हैं। ज्यादातर सनस्क्रीन लोशन में अंगूर का उपयोग किया जाता है।


17. असमय बुढ़ापे को रोकता है⇒

फ्री रेडिकल्स की समस्या चेहरे पर झुर्रियों बनाती है, जो असमय बुढ़ापे का मुख्य कारण होती है। लेकिन अंगूर में मौजूद विटामिन सी, इन समस्याओं से लड़ता है और इससे होने वाले त्वचा के नुकसान को रोकता है। रोजाना केवल 20 मिनट अंगूर के गूदे से चेहरे पर मसाज करके इस समस्या को रोका जा सकता है।


18. त्वचा को कोमल बनाता है⇒

अंगूर के बीजों में विटामिन ई त्वचा में नमी की मात्रा बनाए रखते हैं। त्वचा की डेड सेल्स को हटाने के लिए अंगूर का गूदा एक अचूक उपाय है। जिससे कोमल त्वचा पाई जा सकती है। अंगूर के बीजों का तेल भी त्वचा को कोमल बनाए रखने में काफी मददगार होता है।


19. त्वचा को जवां रखता है⇒

अंगूर में मौजूद ऑर्गेनिक एसिड की मात्रा से त्वचा को जवां बनाया जा सकता है। विटामिन सी कोलेजन के निर्माण में सहायक होता है, जो जरुरी सेल्स के विकास के साथ ही रक्त के प्रवाह को भी बनाए रखता है। ये कई प्रकार की बीमारियों से लड़ता है। यहां तक कि मौसम की मार से भी बचाता है।


20. दाग-धब्बों से छुटकारा⇒

हरे अंगूर की सहायता से चेहरे के दाग-धब्बों के साथ ही पिंपल्स की समस्या को भी खत्म किया जा सकता है। विटामिन सी त्वचा के निशानों को खत्म करने में काफी कारगर होता है। अंगूर को नमक के साथ बांधकर उसे आधे घंटे के लिए पकाया जाए। फिर इसे चेहरे पर 15 मिनट लगाकर हल्के गुनगुने पानी से धो लें।


बालों के लिए फायदेमंद 

घने, चमकदार और लंबे बालों का ध्यान रखना भी एक बहुत बड़ा टास्क होता है। खाने-पीने की अनदेखी और जरूरी पोषक तत्वों की कमी से आजकल डैंड्रफ, दोमुंहे बाल, सफेद बाल और बालों के गिरने की समस्या बहुत आम बात है। लेकिन अंगूर खाकर या इसका जूस पीकर, इस समस्या से तुरंत निजात पाई जा सकती है।

21. लंबे बालों के लिए⇒

अंगूर में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स सिर के रक्त प्रवाह को सही रखते हैं। इससे बाल हेल्दी रहते हैं।इसमें कोई दोराय नहीं कि तेल बालों के विकास में मदद करता है। अंगूर के बीजों का तेल बालों में होने वाले पसीने, उसकी दुर्गंध को दूर करने के साथ ही उसे चमकदार, घना, मुलायम और लंबा बनाने में मदद करता है।


22. रूसी की समस्या खत्म करता है⇒

अंगूर के बीजों के तेल से डैंड्रफ, सिर में खुजली की समस्या दूर होती है। इसमें मौजूद पानी की मात्रा सिर में ज़रूरी नमी की पूर्ति करती है जिससे ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है।


23. बाल गिरने की समस्या से निजात⇒

अंगूर असमय बालों के झड़ने की समस्या को रोकता है। इसके बीजों में मौजूद विटामिन ई और लिनोलिक एसिड बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है। साथ ही दोमुंहे बाल, जो बालों की झड़ने की खास वजह है, उन्हें भी खत्म करता है।


24. अरोमाथेरेपी⇒

हर तरह की त्वचा के लिए फायदेमंद अंगूर के बीज को अरोमाथेरेपी के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।


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अजीर्ण (अपच)-

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पाचन तंत्र में किसी गड़बड़ी के कारण भोजन न पचने को अजीर्ण या अपच कहते हैं | कई बार समय-असमय भोजन करने से,कभी-भी,कहीं-भी,कुछ-भी खाने-पीने तथा बार-बार खाते रहने से पहले खाया हुआ भोजन ठीक से पच नहीं पाता है और दूसरा भोजन पेट में पहुँच जाता है | ऐसे में पाचनतंत्र भोजन को पूर्ण रूप से नहीः पचा पाता जो अजीर्ण का मुख्य कारण है | अधिक तला-भुना या मिर्च मसाले युक्त भोजन के सेवन से भी अजीर्ण या अपच हो जाता है |
इस रोग में रोगी को भूख नहीं लगती,खट्टी डकारें आती हैं,छाती में तेज़ जलन होती है,पेट में भारीपन महसूस होता है तथा बैचैनी सी होती रहती है | रोगी को पसीना अधिक आता है , नींद भी नहीं आती और कभी-कभी अतिसार [दस्त ] भी होता है | 

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अजीर्ण का विभिन्न औषधियों द्वारा उपचार —

१-अजवायन तथा सौंठ पीसकर चूर्ण बना लें | यह चूर्ण दिन में दो बार शहद के साथ चाटने से अपच में आराम मिलता है |
२-छाछ गरिष्ठ वस्तुओं को पचाने में बहुत लाभकारी होता है | छाछ में सेंधा नमक , भुना जीरा तथा कालीमिर्च मिलाकर सेवन करने से अजीर्ण रोग दूर होता है |
३-अजवायन -200 ग्राम , हींग -4 ग्राम और कालानमक -20 ग्राम को एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें | यह चूर्ण 2 -2 ग्राम की मात्रा में सुबह -शाम गुनगुने पानी से खाने से लाभ होता है |
४-मेथी को पीस कर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को दिन में तीन बार 1-1 चम्मच गर्म पानी से खाने से अपच , पेटदर्द व भूख न लगना आदि दूर होता है |
५-प्रतिदिन पके हुए बेल का शर्बत पीने से अजीर्ण रोग ठीक होता है |
६-ताज़े पानी में आधे नींबू का रस , एक चम्मच अदरक का रस और चुटकी भर नमक मिलाकर पीने से अपच दूर होता है |
७-हरड़ , पिप्पली व सौंठ बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें | यह चूर्ण 3 -3 ग्राम दिन में दो बार , पानी के साथ सेवन करने से अजीर्ण में लाभ होता है |

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पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

मैं श्री आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का बहुत आभारी हूँ!!

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” Kmsraj51 

 

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होठों के फटने या कालेपन से परेशान हैं ?

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

जीवन में कभी भी हार मानकर बैंठ ना जाना तुम।

माना कि तुफां ताे बहुत आयेगें जीवन में, पर काेई,

भी तुफां लंबे समय तक रह नहीं सकता जीवन में॥ -Kmsraj51

(Quotes: Kmsraj51 द्वारा लिखित book “तू ना हो निराश कभी मन से”  book से )

होठों के फटने या कालेपन से परेशान हैं ? तो ये आज़माएँ

अगर आप अपने होठों के फटने या कालेपन से परेशान हैं तो टेंशन न लें, नीचे दिए जा रहे कुछ आसान घरेलू नुस्खों से आप अपने होठों की सुन्दरता को चार चांद लगा सकते हैं….

Lips care - kmsraj51

 

1- होठों को रूखेपन और फटने से बचाने के लिए थोड़ी सी मलाई में चुटकी भर हल्दी मिलाकर धीरे-धीरे होठो पर मालिश करें।
2- होठों को फटने से बचाने के लिए रात में सोते समय और दिन में नहाने के बाद सरसों के तेल को गुनगुनाकर अपनी नाभि पर लगाएं। यह आयुर्वेदिक प्रयोग बेहद चमत्कारी है, इसका असर मात्र 12 घंटों में नजर आने लगता है। आप तेल को हथेली पर लेकर उसे दोनो हथेलियो से मसले इससे तेल हल्का पीला सफ़ेद हो जाएगा आप उसे लगाए ज्यादा लाभ मिलेगा।
3- होठों पर पपड़ी जमने पर- अगर आपके होठों पर पपड़ी जम जाती है तो बादाम का तेल रात को सोते समय होंठो पर लगाएं।
4- होंठो के कालेपन को दूर करने के लिए गुलाब की पंखुडिय़ों को पीसकर उसमें थोड़ी सी ग्लिसरीन मिलाकर इस लेप को रोजाना अपने होंठों पर लगाएं होंठों का कालापन जल्दी ही दूर होने लगेगा और लिपस्टिक लगाना बन्द कर दें।

5- होंठों को हमेशा गुलाबी रखने के लिए- दही के मक्खन में केसर मिला कर होठों पर मलने से आपके होंठ हमेशा गुलाबी रहेंगे।

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कड़ी पत्ता या मीठी नीम

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कड़ी पत्ता या मीठी नीम

अक्सर हम भोजन में से कढ़ी पत्ता निकालकर अलग कर देते है . इससे हमें उसकी खुशबु तो मिलती है पर उसके गुणों का लाभ नहीं मिल पाता . कढ़ी पत्ते को धोकर छाया में सुखाकर उसका पावडर इस्तेमाल करने से बच्चे और बड़े भी भी इसे आसानी से खा लेते है . इस पावडर को हम छाछ और निम्बू पानी में भी मिला सकते है . इसे हम मसालों में , भेल में भी डाल सकते है . इसकी छाल भी औषधि है . हमें अपने घरों में इसका पौधा लगाना चाहिए |

meetha neem-kmsraj51– पाचन के लिए अच्छा, डायरिया , डिसेंट्री, पाइल्स, मन्दाग्नि में लाभकारी . मृदुरेचक .
– बालों के लिए बहुत उत्तम टॉनिक – सफ़ेद होने से और झड़ने से रोकता है .
– इसके पत्तों का पेस्ट बालों में लगाने से जुओं से छुटकारा मिलता है .
– पेन्क्री आज़ के बीटा सेल्स को एक्टिवेट कर मधुमेह को नियंत्रित करता है .
– हरे पत्ते होने से आयरन, जिंक, कॉपर , केल्शियम, विटामिन ए और बी, अमीनो एसिड, फोलिक एसिड आदि तो इसमें होता ही है .
– इसमें एंटीओक्सीडेंट होते है जो बुढापे को दूर रखते है और केंसर कोशिकाओं को बढ़ने नहीं देते .
– जले और कटे स्थान पर लगाने से लाभ होता है .
– जहरीले कीड़े काटने पर इसके फलों के रस को निम्बू के रस के साथ मिलाकर लगाने से लाभ होता है .
– किडनी के लिए लाभकारी है .
– आँखों की बीमारियों में लाभकारी . इसमें मौजूद एंटीओक्सीडेंट के टरेक्ट को शुरू होने से रोकते है . यह नेत्रज्योति को बढाता है .
– यह कोलेस्ट्रोल कम करता है .
– यह इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करता है .
– वजन कम करने के लिए रोजाना कुछ मीठी नीम की पत्तियाँ चबाये |

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मैं श्री आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का बहुत आभारी हूँ!!

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जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 

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Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

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मुंह के छालों से बचने के घरेलू उपचार

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प्रिय पाठकों,

मुंह में अगर छाले हो जाएं तो जीना मुहाल हो जाता है। खाना तो दूर पानी पीना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन, इसका इलाज आपके आसपास ही मौजूद है। मुंह के छाले गालों के अंदर और जीभ पर होते हैं।

संतुलित आहार, पेट में दिक्कत, पान- मसालों का सेवन छाले का प्रमुख कारण है। छाले होने पर बहुत तेज दर्द होता है। आइए हम आपको मुंह के छालों से बचने के लिए घरेलू उपचार बताते हैं।

मुंह के छालों से बचने के घरेलू उपचार –

शहद में मुलहठी का चूर्ण मिलाकर इसका लेप मुंह के छालों पर करें और लार को मुंह से बाहर टपकने दें।

मुंह में छाले होने पर अडूसा के 2-3 पत्तों को चबाकर उनका रस चूसना चाहिए।

छाले होने पर कत्था और मुलहठी का चूर्ण और शहद मिलाकर मुंह के छालों पर लगाने चाहिए।

अमलतास की फली मज्जा को धनिये के साथ पीसकर थोड़ा कत्था मिलाकर मुंह में रखिए। या केवल अमलतास के गूदे को मुंह में रखने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।

अमरूद के मुलायम पत्तों में कत्था मिलाकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले से राहत मिलती है और छाले ठीक हो जाते हैं।

सूखे पान के पत्ते का चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को शहद में मिलाकर चाटिए, इससे मुंह के छाले समाप्त हो जाएंगे।

पान के पत्तों का रस निकालकर, देशी घी में मिलाकर छालों पर लगाने से फायदा मिलता है और छाले समाप्त हो जाते हैं।

नींबू के रस में शहद मिलाकर इसके कुल्ले करने से मुंह के छाले दूर होते हैं।

ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी का सेवन कीजिए, इससे पेट साफ होगा और मुंह के छाले नहीं होंगे।

मशरूम को सुखाकर बारीक चूर्ण तैयार कर लीजिए, इस चूर्ण को छालों पर लगा दीजिए। मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे।

मुंह के छाले होने पर चमेली के पत्तों को चबाइए। इससे छाले समाप्त हो जाते हैं।

छाछ से दिन में तीन से चार बार कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।

खाना खाने के बाद गुड चूसने से छालों में राहत होती है।

मेंहदी और फिटकरी का चूर्ण बनाकर छालों पर लगाएं, इससे मुंह के छाले समाप्त होते हैं।

 

Note:~

अगर आपको बार-बार मुंह के छाले हो रहे हैं तो अपने मुंह की सफाई पर विशेष ध्यान दीजिए। ज्यादा मसालेदार और गरिष्ठ भोजन करने से बचें। अगर फिर भी छाले ठीक न हो रहे हों तो चिकित्सक से सलाह अवश्य कर लीजिए |

Mouth Ulcer -kmsraj51

:=> Post inspired by-Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj

Bal Krishna Ji-2 Bal Krishna Ji

 

“पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज”

http://patanjaliayurved.org/, 

Note::-

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Success Life_kmsraj51

Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

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100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

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95+ देश के पाठकों द्वारा पढ़ा जाने वाला हिन्दी वेबसाइट है,, –

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मुँहासे का इलाज करने के लिए सरल घरेलू उपचार !!

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पिंपल्स एक बहुत ही कॉमन बीमारी है, जो अधिकतर टीनएजर्स में देखने को मिलती है। युवावस्था में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इन बदलावों के कारण चेहरे की तैलीय ग्रंथियां एक्टिव हो जाती हैं। इसी कारण तैलीय ग्रंथियों पर बैक्टीरिया अटैक कर देते हैं और चेहरे पर पिंपल्स हो जाते हैं।

पिंपल्स के कारण-

1. सामान्यत: पिंपल्स टीनएज में होते हैं, क्योंकि इस अवस्था में शरीर में सेक्स हार्मोन्स की वृद्धि होती है।

2. बहुत अधिक मात्रा में जंक फूड के सेवन से पिंपल्स हो जाते हैं।

3. अनुवांशिकता और धूल से इन्फेक्शन भी इसके कारण हो सकते हैं।

4. कॉस्मेटिक्स प्रोडक्ट्स का बहुत ज्यादा उपयोग भी इसका एक कारण है।

5. डेड स्किन भी पिंपल्स का कारण बन सकती है।

उपचार-

हल्दी- हल्दी एंटीसेप्टिक का काम करती है। इसीलिए इसमें बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता पाई जाती है।

=> एक चम्मच हल्दी पाउडर में थोड़ा सा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें।

=> इस पेस्ट को पिंपल्स पर लगाएं। कुछ मिनट के लिए लगा रहने दें। फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। ऐसा एक हफ्ते तक करें। पिंपल्स खत्म हो जाएंगे।

पुदीना- पुदीना शरीर को ठंडक पहुंचाता है। साथ ही, इसमें एंटीसेप्टिक गुण भी पाए जाते हैं।

=> पुदीने की कुछ पत्तियों को मिक्सर में पीस लें।
=> इसका पेस्ट बनाकर उसे चेहरे पर रात को सोने से पहले लगा लें या इसे छानकर जूस निकालकर भी चेहरे पर लगा सकते हैं। इसे रातभर चेहरे पर लगा रहने दें।
=> सुबह चेहरा धो लें। ऐसा हफ्ते में एक बार जरूर करें। धीरे-धीरे पिंपल्स खत्म हो जाएंगी।

नींबू- पिंपल्स में नींबू बहुत फायदेमंद होता है। नींबू में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है।

=> दो मध्यम आकार के नींबू लेकर उनका जूस निकाल लें।
=> नींबू के रस को कॉटन में भिगोकर चेहरे पर लगा लें। सूख जाए तो ठंडे पानी से धो लें।
=> दिन में दो बार इसे तीन-चार दिनों तक लगाएं। पिंपल्स दूर हो जाएंगे।

लहसुन- लहसुन में एंटीफंगल तत्व पाए जाते हैं। इसीलिए यह पिंपल्स को बहुत जल्दी दूर कर देता है।

=> लहसुन की दो कलियां और एक लौंग पीस लें।
=> इस पेस्ट को सिर्फ पिंपल्स पर लगाएं। कुछ देर लगा रहने दें। फिर चेहरा धो लें। ऐसा करने से पिंपल्स खत्म हो जाएंगे।

टूथपेस्ट- टूथपेस्ट का उपयोग दांतों को सफेद बनाने के लिए तो सभी करते हैं, लेकिन इसका उपयोग पिंपल्स को ठीक करने के लिए भी किया जा सकता है।

=> रात को सोने से पहले पिंपल्स पर टूथपेस्ट लगाएं।
=> सुबह ठंडे पानी से चेहरा धो लें। पिंपल्स पर इसका असर साफ दिखाई देगा।
=> पिंपल्स पर सिर्फ सफेद टूथपेस्ट लगाना चाहिए।

भाप- भाप पिंपल्स का एक बढ़िया इलाज है। चेहरे पर भाप लेने से रोम छिद्र खुल जाते हैं। चेहरे की गंदगी दूर हो जाती है।

=> जब भी पिंपल्स की समस्या हो, चार-पांच दिनों तक दिन में दो बार चेहरे पर भाप लें।
=> पिंपल्स खत्म हो जाएंगे और चेहरा ग्लो करने लगेगा।

बर्फ- पिंपल्स को खत्म करने के लिए बर्फ का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

=> बर्फ के टुकड़े को कॉटन में लपेटकर चेहरे पर हल्के से मसाज करेंं।
=> तीन-चार दिन तक दिन में दो बार बर्फ से मसाज करने से पिंपल्स की ठीक हो जाएंगे।

Face Beauti

दालचीनी- दालचीनी को पीसकर पाउडर बना लें। इस पाउडर को एक चम्मच या दो चम्मच मात्रा में लेकर चेहरे पर लगाएं।

=> ऐसा दिन में कम से कम दो बार करें। पिंपल्स दूर हो जाएंगी।

संतरे के छिलके- संतरे के छिलकों को चेहरे के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है। संतरे के छिलकों को छांव में सुखाकर पाउडर बना लें।

=> इस पाउडर को एक से दो चम्मच पानी में मिलाकर चेहरे पर लगाएं।
=> आधे घंटे के बाद चेहरा धो लें। ऐसा दिन में दो से तीन बार करें।

शहद- शहद एक नेचुरल एंटीसेप्टिक है। पिंपल्स की समस्या में यह रामबाण है।

=> कॉटन बॉल को शहद में डुबोकर चेहरे पर लगाएं।
=> सूखने पर चेहरा धो लें। पिंपल्स खत्म हो जाएंगे।

पपीता- पपीता में बहुत अधिक मात्रा में एंटीआक्सीडेंट पाए जाते हैं। यह पिंपल्स को बहुत जल्दी खत्म करने की क्षमता रखता है।

=> एक पपीता को छिलकर मिक्सर में पीस लें और चेहरे पर लगाएं। पपीते का जूस भी चेहरे पर लगाया जा सकता है।
=> पंद्रह से बीस मिनट चेहरे पर लगा रहने दें। फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें।

खीरे का जूस- खीरा कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है। गर्मियों में यह स्किन के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है।

=> खीरे के छिलके उतारकर उसे टुकड़े करके मिक्सर में पीस लें।
=> इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। दिन में कम से कम दो बार ये पेस्ट लगाने से पिंपल्स दूर हो जाते हैं।
=> खीरे के पेस्ट में थोड़ा नींबू का रस व शहद मिला कर लगाएंगे तो स्किन ग्लो करने लगेगी।

एप्पल साइडर विनेगर- एप्पल साइडर विनेगर को स्किन के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है।

=> एप्पल साइडर विनेगर में कॉटन बॉल डुबोकर उसे चेहरे पर लगाएं।
=> सूखने पर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। ऐसा दिन में दो बार करें। पिंपल्स गायब हो जाएंगे।

टमाटर – टमाटर एंटीआक्सीडेंट से भरपूर होता है। इसीलिए इसे स्किन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

=> टमाटर को पीसकर उसका जूस बना लें। इस जूस को छानकर चेहरे पर लगाएं। सूखने पर चेहरा धो लें।
=> दिन में कम से कम दो बार ऐसा करें। पिंपल्स पर असर दिखाई देने लगेगा।

नीम- नीम की पत्तियों को आयुर्वेद में त्वचा की बीमारियों की अचूक दवा माना गया है।

=> नीम की पत्तियों को धोकर उसका पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। आधे घंटे बाद चेहरा धो लें।

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आयुर्वेद के सहज उपचार सूत्र !!

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कैसी भी हो पथरी बिना ऑपरेशन ही टूट कर बाहर हो जाएगी

=> किडनी, मूत्राशय, मूत्र नलिका आदि में पथरी का होना या बनना कोई नया या अनजाना रोग नहीं है। विभिन्न रसायनों से बने छोटे-छोटे कणों (क्रिस्टल्स) का जमाव पथरी का निर्माण करते हैं। पथरी मुख्यत: कैल्शियम फॅास्फेट, कैल्शियम ऑक्सोलेट, यूरिक एसिड और अमोनियम फॅास्फेट जैसे रसायनों के क्रिस्टल्स जमने के कारण होती हैं।

=> ज्यादातर कठोर पानी और ज्यादा मिनरल्स से बने खाद्य पदार्थों के सेवन से पथरी होती है। पीठ के पिछले हिस्से से पेट तक तेजी से दर्द होना, जी मिचलना या उल्टियां होना, पेशाब में खून का जाना, जिसे हिमेटूरिया कहा जाता है। पेशाब में संक्रमण, पेशाब करते वक्त जलन होना, बार-बार पेशाब होना आदि पथरी के प्रमुख लक्षण हैं।

=> एक रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ भारत में 70 लाख लोग इस समस्या से ग्रसित हैं। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात को स्टोन बेल्ट के नाम से जाना जाता है। आधुनिक मशीनों और महंगी दवाओं से पथरी के इलाज का दावा जरूर किया जाता है, लेकिन महंगे खर्च के बावजूद इसका सटीक इलाज नहीं हो पाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

=> आदिवासियों के सैकड़ों साल पुराने परंपरागत जड़ी बूटियों के ज्ञान के आधार पर दवाओं को निश्चित ही तैयार किया जा सकता है। कुछ इसी तरह के प्रयासों के चलते इन्ही सब अजूबी जड़ी-बूटियों को लेकर ज्स्टोनोफज् जैसे प्रोड्क्ट्स का बाजार में आना एक अच्छा संकेत है। चलिए आज जानते हैं कुछ देसी नुस्खों के बारे में जिनका इस्तेमाल कर पथरी की समस्या पर काबू पाया जा सकता है।

=> अंगूर, पुनर्नवा (पूरा पौधा) और अमलतास की फलियों के गूदे की समान मात्रा (6 ग्राम प्रत्येक) लेकर पीस लें। इस मिश्रण को 250 मिली पानी में 30 मिनिट तक उबालें। इसे छानकर रोगी को कम से कम दिन में दो बार पिलाएं। पथरी के दर्द में इससे बहुत जल्दी आराम मिलता है।

=> पेशाब में यदि जलन महसूस हो तो गिलोय के तने का चूर्ण (10 ग्र्राम) और आंवला का चूर्ण (10 ग्र्राम) लें। इसमें सौंठ चूर्ण (5 ग्र्राम), गोखरु के बीजों का चूर्ण (3 ग्र्राम) और अश्वगंधा की जड़ों का चूर्ण (5 ग्र्राम) मिलाएं। इस मिश्रण को 100 मिली लीटर पानी में उबाल लें। इस काढ़े को रोगी को दिन में एक बार रोजाना एक माह तक दें। लाभ होगा।

=> दूब घास की जड़ें, पाठा की जड़ें, दारू हल्दी का कंद और मालकांगनी की पत्तियों की समान मात्रा लें। इन्हें पीसकर रस तैयार कर लें। इस मिश्रण का तीन ग्राम रस शहद के साथ लेना पथरी के लिए कारगर होता है।

=> अश्वगंधा की जड़ों का रस पीने से पथरी का दर्द कम होता है। इस रस को पीने से पहले गर्म कर लें तो बेहतर परिणाम मिलेंगे।

=> अश्वगंधा की जड़ों का रस और आंवला के रस को समान मात्रा में (आधा-आधा कप) मिलाकर लें। मूत्राशय और मूत्र मार्ग में पेशाब करते समय जलन की शिकायत खत्म हो जाती है। यह पथरी को गलाकर बाहर भी निकाल देता है।

=> सौंफ की चाय को पथरी के इलाज में-
एक कारगर उपाय है। सौंफ की चाय बनाने के लिए आधा चम्मच सौंफ पीस लें। दो कप पानी में पांच मिनिट तक उबाल लें। जब यह गुनगुना रह जाए तो इसे पी लें। ऐसा रोज दो से तीन बार लें तो पेट दर्द और किडनी दर्द में राहत मिलती है।

=> पेशाब करते समय जलन या कम पेशाब होने की शिकायत हो तो आंवले से बेहतर उपचार कोई और नहीं है। आंवले का रस, शक्कर और घी का मिश्रण इस समस्या में कारगर होता है।

=> आंवले के रस में इलायची के दानों को पीसकर मिलाएं। इसे हल्का गर्म करके पिएं। उल्टियां, चक्कर या पेट दर्द जैसी समस्याओं में यह राहत देता है। साथ ही, पथरी को भी निकाल फेंकने में सक्षम होता है।

=> तुलसी की पत्तियों का चूर्ण और हरड़ का चूर्ण मिलाकर खाने से दर्द में काफी आराम मिलता है। इस चूर्ण में नींबू का रस और शहद मिलाकर लेने से पथरी खत्म हो जाती है।

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“दूध से करें रोगों का इलाज”

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कहते हैं शरीर को हमेशा स्वस्थ बनाए रखना हो तो रोजाना आधा लीटर दूध जरूर पीना चाहिए, क्योंकि दूध एक संपूर्ण आहार है। दूध में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें विटामिन ए, डी, के और ई सहित फॉस्फोरस, आयोडीन व कई मिनरल और फैट पाए जाते हैं।

=> दूध पीने से बॉडी को कई एंजाइम और लिविंग ब्लड सेल्स भी मिलते हैं। ये तो हुए दूध पीने के साधारण लाभ। इसके अलावा दूध कई रोगों में दवा की तरह भी काम करता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं दूध के कुछ ऐसे नुस्खे जिन्हें अपनाने पर आपको कई हेल्थ प्रॉब्लम्स से राहत मिलेगी।

=> पेट की प्रॉब्लम्स-
कब्ज व एसिडिटी की समस्या में दूध रामबाण की तरह काम करता है। ठंडे दूध मे मिश्री मिलाकर पीने से एसिडिटी में राहत मिलती है। रात को गुनगुना दूध पीकर सोने से कब्ज की समस्या खत्म हो जाती है। यदि कब्ज बहुत पुराना व हो तो दूध में एक चम्मच बादाम का तेल डालकर पिएं।

=> तेज दिमाग के लिए-
यदि आपकी याददाश्त कमजोर हैं। आप हर बात थोड़ी देर में भूल जाते हैं तो एक गिलास दूध पीने का ये खास तरीका आपकी समस्या दूर कर सकता है। रोजाना एक गिलास दूध में थोड़ा इलायची पाउडर डालकर उबालकर ठंडा कर पिएं। एक ताजा के अनुसार दूध न सिर्फ पोषक तत्वों से भरपूर है, बल्कि इससे ब्रेन पॉवर पर सकारात्मक असर भी पड़ता है।

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=> अस्थमा की प्रॉब्लम हो तो-
अस्थमा के रोगियों के लिए आधा लीटर दूध में आधा लीटर पानी डालकर उबाल लें, जब दूध आधा रह जाए तो उसमें दस ग्राम बादाम तेल व दस ग्राम मिश्री के साथ ही थोड़ी सा काली मिर्च पाउडर डालकर दूध रोगी को पीने को दें, ऐसा करने से अस्थमा में बहुत जल्दी राहत मिलती है।

=> सुंदर और बेदाग स्किन के लिए-
दूध में थोड़ा सा नमक मिलाकर चेहरे पर सुबह-शाम लगाएं। इससे मुंहासे दूर होते हैं। कच्चे दूध में गुलाबजल मिलाकर लगाने से स्किन हेल्दी रहती है। होंठों पर कच्चा दूध लगाने से होंठ गुलाबी हो जाते हैं।

Face Beauti

=> मुंह में छाले होने पर-
कब्ज या शरीर में गर्मी बढ़ जाने पर मुंह में छालों की समस्या परेशान करने लगती है। आपको भी अगर मुंह के छाले की समस्या परेशान कर रही हो तो दिन में कम से कम तीन बार कच्चे दूध से अच्छी तरह से गरारे करें, छाले मिट जाएंगे।

=> आंखों के लिए-
कम उम्र में चश्मा लगना या आंखों में पानी या जाले आना आजकल एक आम समस्या हो गई है। आंखों को इन प्रॉब्लम्स से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। आंखों की सही से देखभाल करें व आंखों को सुबह-शाम पानी से धोएं। इसके अलावा कच्चे दूध से क्रीम निकालकर, उस दूध की कुछ बूंदें आंखों में डालें। आंखे हमेशा स्वस्थ रहेंगी।

kms-7

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कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत ?

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत ? ϒ
morning yoga

Early to bed and early to rise makes a man healthy wealthy and wise

Hi friends,

हममें से ज्यादातर लोगों ने कभी ना कभी ये कोशिश ज़रूर की होगी कि रोज़ सुबह जल्दी उठा जाये. हो सकता है कि आपमें से कुछ लोग कामयाब भी हुए हों, पर अगर majority की बात की जाये तो वो ऐसी आदत डालने में सफल नहीं हो पाते. लेकिन आज जो article मैं आपसे share कर रहा हूँ इस पढने के बाद आपकी सफलता की probability निश्चित रूप से बढ़ जाएगी. यह article इस विषय पर दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक का Hindi Translation है. इसे Mr. Steve Pavlina ने लिखा है . इसका title है “How to become an early riser.“. ये बताना चाहूँगा कि इन्ही के द्वारा लिखे गए लेख ”20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य ” का Hindi version इस ब्लॉग पर सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले लेखों में से एक है.

तो आइये जानें कि हम कैसे डाल सकते हैं सुबह जल्दी उठने की आदत.

कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत?

It is well to be up before daybreak, for such habits contribute to health, wealth, and wisdom.
-Aristotle

सूर्योदय होने से पहले उठाना अच्छा होता है , ऐसी आदत आपको स्वस्थ , समृद्ध और बुद्धिमान बनती है .

-अरस्तु

सुबह उठने वाले लोग पैदाईशी ऐसे होते हैं या ऐसा बना जा सकता है ? मेरे case में तो निश्चित रूप से मैं ऐसा बना हूँ . जब मैं बीस एक साल का था तब शायद ही कभी midnight से पहले बिस्तर पे जाता था . और मैं लगभग हमेशा ही देर से सोता था. और अक्सर मेरी गतिविधियाँ दोपहर से शुरू होती थीं .

पर कुछ समय बाद मैं सुबह उठने और successful होने के बीच के गहरे सम्बन्ध को ignore नहीं कर पाया , अपनी life में भी . उन गिने – चुने अवसरों पर जब भी मैं जल्दी उठा हूँ तो मैंने पाया है कि मेरी productivity लगभग हमेशा ही ज्यादा रही है , सिर्फ सुबह के वक़्त ही नहीं बल्कि पूरे दिन . और मुझे खुद अच्छा होने का एहसास भी हुआ है . तो एक proactive goal-achiever होने के नाते मैंने सुबह उठने की आदत डालने का फैसला किया . मैंने अपनी alarm clock 5 am पर सेट कर दी …

— और अगली सुबह मैं दोपहर से just पहले उठा .

ह्म्म्म…………

मैंने फिर कई बार कोशिश की , पर कुछ फायदा नहीं हुआ .मुझे लगा कि शायद मैं सुबह उठने वाली gene के बिना ही पैदा हुआ हूँ . जब भी मेरा alarm बजता तो मेरे मन में पहला ख्याल यह आता कि मैं उस शोर को बंद करूँ और सोने चला जून . कई सालों तक मैं ऐसा ही करता रहा , पर एक दिन मेरे हाथ एक sleep research लगी जिससे मैंने जाना कि मैं इस problem को गलत तरीके से solve कर रहा था . और जब मैंने ये ideas apply कीं तो मैं निरंतर सुबह उठने में कामयाब होने लगा .

गलत strategy के साथ सुबह उठने की आदत डालना मुश्किल है पर सही strategy के साथ ऐसा करना अपेक्षाकृत आसान है .

सबसे common गलत strategy है कि आप यह सोचते हैं कि यदि सुबह जल्दी उठाना है तो बिस्तर पर जल्दी जाना सही रहेगा . तो आप देखते हैं कि आप कितने घंटे की नीद लेते हैं , और फिर सभी चीजों को कुछ गहनते पहले खिसका देते हैं . यदि आप अभी midnight से सुबह 8 बजे तक सोते हैं तो अब आप decide करते हैं कि 10pm पर सोने जायेंगे और 6am पर उठेंगे . सुनने में तर्कसंगत लगता है पर ज्यदातर ये तरीका काम नहीं करता .

ऐसा लगता है कि sleep patterns को ले के दो विचारधाराएं हैं . एक है कि आप हर रोज़ एक ही वक़्त पर सोइए और उठिए . ये ऐसा है जैसे कि दोनों तरफ alarm clock लगी हो —आप हर रात उतने ही घंटे सोने का प्रयास करते हैं . आधुनिक समाज में जीने के लिए यह व्यवहारिक लगता है . हमें अपनी योजना का सही अनुमान होना चाहिए . और हमें पर्याप्त आराम भी चाहिए .

दूसरी विचारधारा कहती है कि आप अपने शरीर की ज़रुरत को सुनिए और जब आप थक जायें तो सोने चले जाइये और तब उठिए जब naturally आपकी नीद टूटे . इस approach की जड़ biology में है . हमारे शरीर को पता होना चाहिए कि हमें कितना rest चाहिए , इसलिए हमें उसे सुनना चाहिए .

Trial and error से मुझे पता चला कि दोनों ही तरीके पूरी तरह से उचित sleep patterns नहीं देते . अगर आप productivity की चिंता करते हैं तो दोनों ही तरीके गलत हैं . ये हैं उसके कारण :

यदि आप निश्चित समय पे सोते हैं तो कभी -कभी आप तब सोने चले जायेंगे जब आपको बहुत नीद ना आ रही हो . यदि आपको सोने में 5 मिनट से ज्यादा लग रहे हों तो इसका मतलब है कि आपको अभी ठीक से नीद नहीं आ रही है . आप बिस्तर पर लेटे -लेटे अपना समय बर्वाद कर रहे हैं ; सो नहीं रहे हैं . एक और problem ये है कि आप सोचते हैं कि आपको हर रोज़ उठने ही घंटे की नीद चाहिए , जो कि गलत है . आपको हर दिन एक बराबर नीद की ज़रुरत नहीं होती .

यदि आप उतना सोते हैं जितना की आपकी body आपसे कहती है तो शायद आपको जितना सोना चाहिए उससे ज्यादा सोएंगे —कई cases में कहीं ज्यादा , हर हफ्ते 10-15 घंटे ज्यदा ( एक पूरे waking-day के बराबर ) ज्यादातर लोग जो ऐसे सोते हैं वो हर दिन 8+ hrs सोते हैं , जो आमतौर पर बहुत ज्यादा है . और यदि आप रोज़ अलग -अलग समय पर उठ रहे हैं तो आप सुबह की planning सही से नहीं कर पाएंगे . और चूँकि कभी -कभार हमारी natural rhythm घडी से मैच नहीं करती तो आप पायंगे कि आपका सोने का समय आगे बढ़ता जा रहा है .

मेरे लिए दोनों approaches को combine करना कारगर साबित हुआ . ये बहुत आसान है , और बहुत से लोग जो सुबह जल्दी उठते हैं , वो बिना जाने ही ऐसा करते हैं , पर मेरे लिए तो यह एक mental-breakthrough था . Solution ये था की बिस्तर पर तब जाओ जब नीद आ रही हो ( तभी जब नीद आ रही हो ) और एक निश्चित समय पर उठो ( हफ्ते के सातों दिन ). इसलिए मैं हर रोज़ एक ही समय पर उठता हूँ ( in my case 5 am) पर मैं हर रोज़ अलग -अलग समय पर सोने जाता हूँ .

मैं बिस्तर पर तब जाता हूँ जब मुझे बहुत तेज नीद आ रही हो . मेरा sleepiness test ये है कि यदि मैं कोई किताब बिना ऊँघे एक -दो पन्ने नहीं पढ़ पाता हूँ तो इसका मतलब है कि मै बिस्तर पर जाने के लिए तैयार हूँ .ज्यादातर मैं बिस्तर पे जाने के 3 मिनट के अन्दर सो जाता हूँ . मैं आराम से लेटता हूँ और मुझे तुरंत ही नीद आ जाति है . कभी कभार मैं 9:30 पे सोने चला जाता हूँ और कई बार midnight तक जगा रहता हूँ . अधिकतर मैं 10 – 11 pm के बीच सोने चला जाता हूँ .अगर मुझे नीद नहीं आ रही होती तो मैं तब तक जगा रहता हूँ जब तक मेरी आँखें बंद ना होने लगे . इस वक़्त पढना एक बहुत ही अच्छी activity है , क्योंकि यह जानना आसान होता है कि अभी और पढना चाहिए या अब सो जाना चाहिए .

जब हर दिन मेरा alarm बजता है तो पहले मैं उसे बंद करता हूँ , कुछ सेकंड्स तक stretch करता हूँ , और उठ कर बैठ जाता हूँ . मैं इसके बारे में सोचता नहीं . मैंने ये सीखा है कि मैं उठने में जितनी देर लगाऊंगा ,उतना अधिक chance है कि मैं फिर से सोने की कोशिश करूँगा .इसलिए एक बार alarm बंद हो जाने के बाद मैं अपने दिमाग में ये वार्तालाप नहीं होने देता कि और देर तक सोने के क्या फायदे हैं . यदि मैं सोना भी चाहता हूँ , तो भी मैं तुरंत उठ जाता हूँ .

इस approach को कुछ दिन तक use करने के बाद मैंने पाया कि मेरे sleep patterns एक natural rhythm में सेट हो गए हैं . अगर किसी रात मुझे बहुत कम नीद मिलती तो अगली रात अपने आप ही मुझे जल्दी नीद आ जाती और मैं ज्यदा सोता . और जब मुझमे खूब energy होती और मैं थका नहीं होता तो कम सोता . मेरी बॉडी ने ये समझ लिया कि कब मुझे सोने के लिए भेजना है क्योंकि उसे पता है कि मैं हमेशा उसी वक़्त पे उठूँगा और उसमे कोई समझौता नहीं किया जा सकता .

इसका एक असर ये हुआ कि मैं अब हर रात लगभग 90 मिनट कम सोता ,पर मुझे feel होता कि मैंने पहले से ज्यादा रेस्ट लिया है . मैं अब जितनी देर तक बिस्तर पर होता करीब उतने देर तक सो रहा होता .

मैंने पढ़ा है कि ज्यादातर अनिद्रा रोगी वो लोग होते हैं जो नीद आने से पहले ही बिस्तर पर चले जाते हैं . यदि आपको नीद ना आ रही हो और ऐसा लगता हो कि आपको जल्द ही नीद नहीं आ जाएगी , तो उठ जाइये और कुछ देर तक जगे रहिये . नीद को तब तक रोकिये जब तक आपकी body ऐसे hormones ना छोड़ने लगे जिससे आपको नीद ना आ जाये.अगर आप तभी bed पे जाएँ जब आपको नीद आ रही हो और एक निश्चित समय उठें तो आप insomnia का इलाज कर पाएंगे .पहली रात आप देर तक जागेंगे , पर बिस्तर पर जाते ही आपको नीद आ जाएगी . .पहले दिन आप थके हुए हो सकते हैं क्योंकि आप देर से सोये और बहुत जल्दी उठ गए , पर आप पूरे दिन काम करते रहेंगे और दूसरी रात जल्दी सोने चले जायेंगे .कुछ दिनों बाद आप एक ऐसे pattern में settle हो जायेंगे जिसमे आप लगभग एक ही समय बिस्तर पर जायंगे और तुरंत सो जायंगे .

इसलिए यदि आप जल्दी उठाना चाहते हों तो ( या अपने sleep pattern को control करना चाहते हों ), तो इस try करिए : सोने तभी जाइये जब आपको सच -मुच बहुत नीद आ रही हो और हर दिन एक निश्चित समय पर उठिए .

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

कब तक करते रहेंगे हेल्थ को अनदेखा ?


kmsraj51 की कलम से …..
PEN KMSRAJ51-PEN


Helalth-is-Wealth-150x150Do you really believe health is wealth?


Friends कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिसे हम जानते हैं कि हमें करना चाहिए पर फिर भी हम नहीं करते . उन्ही में से एक है . “अपनी सेहत पर ध्यान देना .”

हम कहते हैं “Health comes first” , पर हकीकत में हम इसे last preference देते हैं .
हम कहते हैं “Health is wealth”, पर जीते ऐसे हैं मानो “Wealth is health”

हममें से 95% लोग ऐसा ही करते हैं ; और मैं भी उन्ही 95% लोगों में हूँ या कह सकते हैं कि तीन दिन पहले तक था ..जो अपनी health पर ध्यान नहीं देते …. पर अब मैं 5% ध्यान देने वालों के group में jump करना चाहता हूँ . शुरुआत तीन दिन पहले की है , पिछले तीन दिनों से मैं सुबह उठ कर exercise कर रहा हूँ … इसे जारी रख पाऊँ ऐसी उम्मीद करता हूँ , और आज publicly इस बारे में बता कर शायद मैं इस दिशा में और भी मजबूती से बढ़ पाउँगा … let’s see!!!

और ऐसा नहीं है कि ये पहली बार शुरू किया है … पहले भी कई शुरुआत कर चुके हैं पर कुछ दिनों बाद आप जानते ही हैं क्या होता है …. और कैसे नहीं जानेंगे आपके साथ भी तो यही होता आया है … 🙂

पर मैं इस बार पीछे नहीं हटने वाला , अपनी daily routine में मैं exercise को ज़रूर include करूँगा और तब तक करूँगा जब तक ये brush करने या रोज नहाने जितना आम ना हो जाये …मेरी habit में ना आ जाये …

तो इसके लिए मैं क्या करने वाला हूँ ; इस बारे में बताता हूँ पर उससे पहले आइये समझने की कोशिश करते हैं कि हम अपनी health को ignore क्यों करते रहते हैं :

क्योंकि हमें प्यास लगने पे कुआँ खोदने की आदत है :

अधिकतर लोग बिजली बिल / टेलीफोन बिल कब जमा करते हैं ….last day पर … जब तक काम सर पर नही आ जाता हम उसे टालते रहते हैं … और यही health के साथ भी होता है ….. चूँकि अभी हमारी health normal है , इसलिए हमे इस और ध्यान देने की कोई urgency नहीं लगती , लगता है सब ठीक ही तो है , फिर अभी walk पे जाने की , jogging करने की क्या जल्दी है कुछ दिन बाद शुरू कर सकते हैं … but as we all know ऐसा हम कई सालों से सोचते आ रहे हैं, पर करते कभी नहीं .

हम सोचते हैं बुरी चीजें दूसरों के साथ ही हो सकती हैं :

Health के case में हम अपना बुरा कभी नहीं सोचते …. हाँ और चीजों में खूब बुरा सोच लेते हैं पर सेहत के मामले में हम अलग हैं …य़े जानते हुए भी की करोड़ों Indian diabetic हैं हम कभी नहीं सोचते की हमारी lazy lifestyle की वजह से हमें भी diabetes हो सकता है … हम इस ओर गलती से भी ध्यान नहीं देते कि अगर लाखों लोगों को young age में ही दिल की बीमारी हो रही है तो कल को हमें भी हो सकती है …मानो हम man नहीं superman हों !!!

हम सोचते हैं कि बाद में भी ध्यान दे दिया तो काम चल जायेगा :

पर ऐसा नहीं है , पहले तो ये “बाद ” जल्दी आता नहीं है , और दूसरा जिस वक़्त हम health को postpone करते जाते हैं उसी वक़्त हम bad health या बीमारी को advance करते जाते हैं . यानि हम खुद को समझा तो लेते हैं कि बाद में cover कर लेंगे पर जिस तरह school में शुरू से पढाई से जी चुराने वाला student कभी अंत में पढ़ कर 100% score नहीं कर पाटा , उसी तरह कोई इंसान सालों तक ignore करने के बाद अंत में ध्यान देने पर 100% health नहीं पा सकता , इसलिए हमे आज से ही इस direction में ध्यान देना चाहिए .

क्योंकि हमारा environment ऐसा है :

अगर आप सुबह walk पर जाएं तो आपको ज्यादातर old age people, या मोटापे से परेशान लोग ही दिखेंगे …ये वो हैं जिन्हे प्यास लग चुकी है , उनकी life में health issues आ चुके हैं …पर जो young हैं …अभी healthy हैं वो नदारद हैं … हमारा कोई दोस्त jogging पे नहीं जाता , gym के दर्शन नहीं करता इसलिए अगर हम नहीं करते तो क्या बुरा करते हैं ….friends, health पर ध्यान न देना दरअसल एक बीमारी है पर चूँकि 95% लोग बीमार हैं इसलिए इसे ही normal life मान लिया गया है …. पर as you know सच्चाई कुछ और ही है !

Well, अब मैं अपना plan बताता हूँ :

बड़ा simple है ; मैंने decide किया है कि मैं सुबह fresh होने के बाद का 30 minute exercise को दूंगा .

फिर चाहे मैं 6 बजे उठूँ या 9 बजे …ज़ब भी उठूंगा 30 minute health को दूंगा …. हम ब्रश के साथ भी तो यही करते हैं , isn’t it? क्या कोई ऐसा भी है जो देर से उठने पर brush नहीं करता …. सभी करते हैं … जब उठते हैं तब करते हैं … और वही मैं exercise के साथ करूँगा ….

इसमें क्या challenges आ सकते हैं ?

इससे मैं office के लिए late हो सकता हूँ …. मेरी आज plan की गयी blog post कल के लिए postpone हो सकती है …अखबार पढ़ने में gap हो सकता है …but let it be… हम हमेशा कहते हैं सेहत से बढ़कर कुछ नहीं , सेहत है तो दौलत है , and all that gyan … पर दिक्कत ये है कि सिर्फ कहते हैं practically कभी apply नहीं करते , इस बार मैं करने जा रहा हूँ …. मैं अपने आसपास मौजूद बीमार लोगों को देख रहा हूँ और मैंने इस बार अंदर से महसूस किया है कि “healthy” रहने से बड़ा और कोई asset हो ही नहीं सकता …

एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ …

एक सेठ था ,वो दिन- रात business बढ़ाने में लगा रहता था , उसका goal था कि उसे शहर का सबसे अमीर आदमी बनना है . धीरे -धीरे उसने ये goal पूरा भी कर लिया , इस कामयाबी की ख़ुशी में उसने एक शानदार घर बनवाया। गृह प्रवेश के दिन उसने एक बहुत बड़ी पार्टी दी और जब सारे मेहमान चले गए तो वो अपने कमरे में सोने के लिए गया .

वो जैसे ही बिस्तर पर लेटा एक आवाज़ उसके कानो में पड़ी ,

” मैं तुम्हारी आत्मा हूँ … और अब मैं तुम्हारा शरीर छोड़ कर जा रही हूँ !!”

सेठ सकते में आ गया और बोला , ” अरे तुम ऐस नहीं कर सकती, तुम चली जाओगी तो मैं तो मर जाऊँगा …देखो मैंने कितनी बड़ी कामयाबी हांसिल की है… तुम्हारे लिए करोड़ों रूपये का घर भी बनवाया है … इतनी सुख -सुविधाएं तुम्हे कहीं नहीं मिलेंगी … यहाँ से मत जाओ …”

आत्मा बोली , ” मेरा घर तो तुम्हारा शरीर था …. पर करोड़ों का घर बनवाने के चक्कर में तुमने इस अमूल्य शरीर का ही नाश कर डाला ,…तुम ठीक से चल नहीं पाते …ऱात को तुम्हे नींद नहीं आती … तुम्हारा दिल भी कमजोर हो चुका है …. तनाव की वजह से ना जाने और कितनी बीमारियों का घर बन चुका है तुम्हारा शरीर …… तुम ही बताओ क्या तुम ऐसे किसी घर में रहना चाहोगे जहाँ चारो तरफ गंदगी हो … जिसकी छत टपक रही हो …. जिसके खिड़की -दरवाजे टूटे हों …., नहीं चाहोगे ना !!! …. इसलिए मैं भी ऐसी जगह नहीं रह सकती ….”

और ऐसा कहते हुए आत्मा सेठ के शरीर से निकल गयी …और सेठ की मृत्यु हो गयी .

Friends, ये कहानी बहुत से लोगों की हकीकत है … मैं ये नहीं कहता की आप अपने goals pursue मत करिये , पर मैं ये ज़रूर कहूंगा कि जो भी करिये Health को सबसे ऊपर रखिये …. नहीं तो सेठ की तरह goal achieve कर लेने के बाद भी अपनी success को enjoy नहीं कर पाएंगे .

अंत में Swami Vivekananda के एक quote से अपनी बात ख़तम करना चाहूंगा …

“You will be nearer to heaven through football than through the study of the Gita.
तुम गीता का अध्ययन करने के बजाये फ़ुटबाल के जरिये स्वर्ग के ज्यादा निकट होगे .”

… गीता पढ़िए …. पर फ़ुटबाल खेलना मत भूलिए …. अपने goal के पीछे दौड़िये पर अपनी health को पीछे मत छोड़िये ….

All the best! 🙂

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कुछ सरल आयुर्वेद स्वास्थ्य सुझाव हिंदी में।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ कुछ सरल आयुर्वेद स्वास्थ्य सुझाव हिंदी में। ϒ

सर दर्द, रुसी और बदहजमी दूर करने के घरेलु आयुर्वेदिक उपाय 

Ayurvedic-Tips-in-Hindi-kmsraj51

=> सर दर्द से राहत के लिए 

१. तेज़ पत्ती की काली चाय में निम्बू का रस निचोड़ कर पीने से सर दर्द में अत्यधिक लाभ होता है।

२. नारियल पानी में या चावल धुले पानी में सौंठ पावडर का लेप बनाकर उसे सर पर लेप करने भी सर दर्द में आराम पहुंचेगा।

३. सफ़ेद चन्दन पावडर को चावल धुले पानी में घिसकर उसका लेप लगाने से भी फायेदा होगा।

४. सफ़ेद सूती का कपडा पानी में भिगोकर माथे पर रखने से भी आराम मिलता है।

५. लहसुन पानी में पीसकर उसका लेप भी सर दर्द में आरामदायक होता है।

६. लाल तुलसी के पत्तों को कुचल कर उसका रस दिन में माथे पर २ , ३ बार लगाने से भी दर्द में राहत देगा।

७. चावल धुले पानी में जायेफल घिसकर उसका लेप लगाने से भी सर दर्द में आराम देगा।

८. हरा धनिया कुचलकर उसका लेप लगाने से भी बहुत आराम मिलेगा।

९. सफ़ेद सूती कपडे को सिरके में भिगोकर माथे पर रखने से भी दर्द में राहत मिलेगी।

=> बालों की रूसी दूर करने के लिए ∇

१. नारियल के तेल में निम्बू का रस पकाकर रोजाना सर की मालिश करें।

२. पानी में भीगी मूंग को पीसकर नहाते समय शेम्पू की जगह प्रयोग करें।

३. मूंग पावडर में दही मिक्स करके सर पर एक घंटा लगाकर धो दें।

४. रीठा पानी में मसलकर उससे सर धोएं।

५. मछली, मीट अर्थात non veg त्यागकर केवल पूर्ण शाकाहारी भोजन का प्रयोग भी आपकी सर की रूसी दूर करने में सहायक होगा।

=> गैस व् बदहजमी दूर करने के लिए 

१. भोजन हमेशा समय पर करें।

२. प्रतिदिन सुबह देसी शहद में निम्बू रस मिलाकर चाट लें।

३. हींग, लहसुन, चद गुप्पा ये तीनो बूटियाँ पीसकर गोली बनाकर छाँव में सुखा लें, व् प्रतिदिन एक गोली खाएं।

४. भोजन के समय सादे पानी के बजाये अजवायन का उबला पानी प्रयोग करें।

५. लहसुन, जीरा १० ग्राम घी में भुनकर भोजन से पहले खाएं।

६. सौंठ पावडर शहद ये गर्म पानी से खाएं।

७. लौंग का उबला पानी रोजाना पियें।

८. जीरा, सौंफ, अजवायन इनको सुखाकर पावडर बना लें, शहद के साथ भोजन से पहले प्रयोग करें।

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पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

10 Good Habits of Healthy Living

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

स्वस्थ रहने की 10 अच्छी आदतें ♣

facts-about-healthy-food1

कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें।

ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें।

बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं।

खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल-अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में ‘वैरायटी ऑफ फूड’ शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।

खाना पकाने के लिए अनसैचुरेटेड वेजिटेबल ऑइल (जैसे सोयाबीन, सनफ्लॉवर, मक्का या ऑलिव ऑइल) के प्रयोग को प्राथमिकता दें। खाने में शकर तथा नमक दोनों की मात्रा का प्रयोग कम से कम करें। जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक तथा आर्टिफिशियल शकर से बने ज्यूस आदि का उपयोग न करें। कोशिश करें कि रात का खाना आठ बजे तक हो और यह भोजन हल्का-फुल्का हो।

अपने विश्राम करने या सोने के कमरे को साफ-सुथरा, हवादार और खुला-खुला रखें। चादरें, तकियों के गिलाफ तथा पर्दों को बदलती रहें तथा मैट्रेस या गद्दों को भी समय-समय पर धूप दिखाकर झटकारें।

मेडिटेशन, योगा या ध्यान का प्रयोग एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव से दूर रहने के लिए करें।

कोई भी एक व्यायाम रोज जरूर करें। इसके लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा दें और व्यायाम के तरीके बदलते रहें, जैसे कभी एयरोबिक्स करें तो कभी सिर्फ तेज चलें। अगर किसी भी चीज के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे तो दफ्तर या घर की सीढ़ियां चढ़ने और तेज चलने का लक्ष्य रखें। कोशिश करें कि दफ्तर में भी आपको बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठा रहना पड़े।

45 की उम्र के बाद अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें और यदि डॉक्टर आपको कोई औषधि देता है तो उसे नियमित लें। प्रकृति के करीब रहने का समय जरूर निकालें। बच्चों के साथ खेलें, अपने पालतू जानवर के साथ दौड़ें और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन का भी समय निकालें।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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स्वस्थ रहने की 10 अच्छी आदतें ~ 10 Good Habits of Healthy Living !!

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* ~ स्वस्थ रहने की 10 अच्छी आदतें ~ *


facts-about-healthy-food1

* कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

* घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें।

* ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें।

* बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं।

* खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल-अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में ‘वैरायटी ऑफ फूड’ शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।

* खाना पकाने के लिए अनसैचुरेटेड वेजिटेबल ऑइल (जैसे सोयाबीन, सनफ्लॉवर, मक्का या ऑलिव ऑइल) के प्रयोग को प्राथमिकता दें। खाने में शकर तथा नमक दोनों की मात्रा का प्रयोग कम से कम करें। जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक तथा आर्टिफिशियल शकर से बने ज्यूस आदि का उपयोग न करें। कोशिश करें कि रात का खाना आठ बजे तक हो और यह भोजन हल्का-फुल्का हो।

* अपने विश्राम करने या सोने के कमरे को साफ-सुथरा, हवादार और खुला-खुला रखें। चादरें, तकियों के गिलाफ तथा पर्दों को बदलती रहें तथा मैट्रेस या गद्दों को भी समय-समय पर धूप दिखाकर झटकारें।

* मेडिटेशन, योगा या ध्यान का प्रयोग एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव से दूर रहने के लिए करें।

* कोई भी एक व्यायाम रोज जरूर करें। इसके लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा दें और व्यायाम के तरीके बदलते रहें, जैसे कभी एयरोबिक्स करें तो कभी सिर्फ तेज चलें। अगर किसी भी चीज के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे तो दफ्तर या घर की सीढ़ियां चढ़ने और तेज चलने का लक्ष्य रखें। कोशिश करें कि दफ्तर में भी आपको बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठा रहना पड़े।

* 45 की उम्र के बाद अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें और यदि डॉक्टर आपको कोई औषधि देता है तो उसे नियमित लें। प्रकृति के करीब रहने का समय जरूर निकालें। बच्चों के साथ खेलें, अपने पालतू जानवर के साथ दौड़ें और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन का भी समय निकालें।


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शीर्ष 8 स्वास्थ्य युक्तियाँ हिन्दी में।

Kmsraj51 की कलम से…..

health tips caring our health

Top 8 Health Tips in Hindi

स्वास्थ्य संबधी युक्तियाँ हिन्दी में ।

१. पीलिया : पीलिया में गन्ना रामबाण है. गन्ना चूसें, उसका रस पिएँ. भुनी हुई जौ का सतू भी साथ में लें. इसे गुड या शक्कर के रस में घोल लें. बताशे का शरबत भी ले सकते हैं !!

२. पथरी: २५ ग्राम पालक का रस रोगी को दिन में तीन चार बार पिलाएं !!

३. गठिया: मूली में क्लोरिन होता है. रोगी को धुप में बैठकर मूली अदरक और पत्ता गोभी का रस कप भर कर पिलाएं. मूली के बीज पीसें और तिली के तेल में भुनें. अंगों पर लेपें और पट्टी बंधें. जल्दी ही गठिया से छुटकारा मिल जाएगा !!

४. गुर्दे का दर्द: गाजर के रस में दो-ढाई रत्ती फिटकरी भस्म मिलाकर पिएँ. बहुत आराम मिलेगा !!

५. मधुमेह: गाजर और करेले का रस मिलाकर पीने से मधुमेह में लाभ मिलता है !!

६. लकवा: आक के पत्तों में तेल पकाएं, और उसे लकवाग्रस्त अंग पर मल दें. फिर एक पत्ते पर वही तेल लेप कर बाँध लें. एक सप्ताह में ही लाभ मिल जाएगा !!

७. एक्ज़ीमा: सोयाबीन का दूध एक्ज़ीमा को ठीक करने में रामबाण का काम करता है !!

८. कुष्ठ (कोढ़) : आंवला, खैर का छिलका और बड़ी इलायची लौंग और पीला संखिया बराबर मात्रा में लेकर खरल करें. साथ में नींबू रस भी मिलाते रहें. जहाँ सफ़ेद दाग हों उनपर इसे मलें !!

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In English

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