अर्श रोग (बवासीर)-Piles – का आयुर्वेदिक उपचार

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अर्श रोग (बवासीर)-Piles 

Piles -अर्श रोग - बवासीर

अर्श रोग (बवासीर)-Piles

बवासीर गुदा मार्ग की बीमारी है । यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है — खूनी बवासीर और बादी बवासीर। इस रोग के होने का मुख्य कारण ” कोष्ठबद्धता ” या ”कब्ज़ ” है। कब्ज़ के कारण मल अधिक शुष्क व कठोर हो जाता है और मल निस्तारण हेतु अधिक जोर लगाने के कारण बवासीर रोग हो जाता है। यदि मल के साथ बूंद -बूंद कर खून आए तो उसे खूनी तथा यदि मलद्वार पर अथवा मलद्वार में सूजन मटर या अंगूर के दाने के समान हो और मल के साथ खून न आए तो उसे बादी बवासीर कहते हैं। अर्श रोग में मस्सों में सूजन तथा जलन होने पर रोगी को अधिक पीड़ा होती है।

बवासीर का विभिन्न औषधियों द्वारा उपचार —

१- जीरा – एक ग्राम तथा पिप्पली का चूर्ण आधा ग्राम को सेंधा नमक मिलाकर छाछ के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से बवासीर ठीक होती है।

२- जामुन की गुठली और आम की गुठली के अंदर का भाग सुखाकर इसको मिलाकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में हल्के गर्म पानी या छाछ के साथ सेवन से खूनी बवासीर में लाभ होता है। 

३- पके अमरुद खाने से पेट की कब्ज़ दूर होती है और बवासीर रोग ठीक होता है।

४- बेल की गिरी के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर , ४ ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ मिलता है।

५- खूनी बवासीर में देसी गुलाब के तीन ताज़ा फूलों को मिश्री मिलाकर सेवन करने से आराम आता है।

६ – जीरा और मिश्री मिलकर पीस लें। इसे पानी के साथ खाने से बवासीर (अर्श ) के दर्द में आराम रहता है।

७- चौथाई चम्मच दालचीनी चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन एक बार लेना चाहिए। इससे बवासीर नष्ट हो जाती है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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पिपरमिंट (Peppermint)

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पिपरमिंट (Peppermint) –

पिपरमिंट (Peppermint) -

पिपरमिंट (Peppermint)

यह विश्व में यूरोप,एशिया,उत्तरी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। समस्त भारत में यह बाग़-बगीचों में विशेषतः उत्तर भारत तथा कश्मीर में लगाया जाता है। यह अत्यंत सुगन्धित क्षुप होता है। इसके तेल,सत तथा स्वरस आदि का चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। इसके पुष्प बैंगनी,श्वेत अथवा गुलाबी वर्ण के तथा पुष्पदण्ड के अग्र भाग पर लगे होते हैं। इसके फल चिकने अथवा खुरदुरे तथा बीज छोटे होते हैं। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल सितम्बर से अप्रैल तक होता है।

पिपरमिंट का औषधीय प्रयोग –

१- पिपरमिंट के क्रिस्टल को दांतों के बीच में रखकर दबाने से दांत दर्द में लाभ होता है ।

२- पिपरमिंट को छाती पर लगाने से श्वसन संस्थान गत सूजन में लाभ होता है ।

३- पिपरमिंट क्रिस्टल का सेवन करने से उलटी,अतिसार,आध्मान तथा अजीर्ण में लाभ होता है ।

४- २५ ग्राम पिपरमिंट सत में शक्कर मिलाकर सेवन करने से पेटदर्द तथा पेट के विकार ठीक होते हैं ।

५- पिपरमिंट के पत्तों को पीसकर लगाने से चींटी आदि कीटों के काटने से होने वाली वेदना का शमन होता है ।

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Benefits of Ammonium chloride-(नौसादर)

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नौसादर-

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१- नौसादर- ४ ग्राम,सुहागा-४ ग्राम और सौंफ-२ ग्राम को अच्छी तरह बारीक पीसकर उसमें ४ ग्राम मीठा सोडा मिलाकर रख लें| इसमें से आधे से दो ग्राम की मात्रा में सुबह,दोपहर और शाम को रोगी को देने से पेट की बीमारियों में आराम होता है |

२- फिटकरी,सेंधानमक तथा नौसादर बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें | इसे प्रतिदिन सुबह-शाम मसूड़ों व दाँतों के सभी रोग ठीक हो जाते हैं |

३- नौसादर को पानी में घोलकर ,उसमें एक साफ़ कपड़ा भिगोकर गांठ के ऊपर रखने से लाभ होता है |

४- एक कप पानी में एक चुटकी नौसादर डालकर दिन में तीन बार पीने से खांसी ठीक हो जाती है |

५- नौसादर और कुटकी को जल में मिलाकर माथे पर लेप की तरह लगाने से आधासीसी के दर्द में लाभ होता है |

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स्वस्थ शरीर के लिए – आयुर्वेद का उपयोग करें।

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Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब) …..

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” Kmsraj51 

 

 

 

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अनेक रोगों की एक दवा फिटकरी

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फिटकरी –

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फिटकरी आमतौर पर सब घरों में प्रयोग होती है | यह लाल व सफ़ेद दो प्रकार की होती है | अधिकतर सफ़ेद फिटकरी का प्रयोग ही किया जाता है | यह संकोचक अर्थात सिकुड़न पैदा करने वाली होती है | फिटकरी में और भी बहुत गुण होते हैं |

आज हम आपको फिटकरी के कुछ गुणों के विषय में बताएंगे –

१- यदि चोट या खरोंच लगकर घाव हो गया हो और उससे रक्तस्त्राव हो रहा हो तो घाव को फिटकरी के पानी से धोएं तथा घाव पर फिटकरी का चूर्ण बनाकर बुरकने से खून बहना बंद हो जाता है |

२- आधा ग्राम पिसी हुई फिटकरी को शहद में मिलाकर चाटने से दमा और खांसी में बहुत लाभ मिलता है |

३- भुनी हुई फिटकरी १-१ ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ लेने से खून की उलटी बंद हो जाती है |

४- प्रतिदिन दोनों समय फिटकरी को गर्म पानी में घोलकर कुल्ला करें ,इससे दांतों के कीड़े तथामुँहकी बदबू ख़त्म हो जाती है |

५- एक लीटर पानी में १० ग्राम फिटकरी का चूर्ण घोल लें | इस घोल से प्रतिदिन सिर धोने से जुएं मर जाती हैं |

६- दस ग्राम फिटकरी के चूर्ण में पांच ग्राम सेंधा नमक मिलाकर मंजन बना लें | इस मंजन के प्रतिदिन प्रयोग से दाँतो के दर्द में आराम मिलता है |

 

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

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मन काे कैसे नियंत्रण में करें।

मन के विचारों काे कैसे नियंत्रित करें॥

विचारों के प्रकार-एक खुशी जीवन के लिए।

अपनी सोच काे हमेशा सकारात्मक कैसे रखें॥

“मन के बहुत सारे सवालाें का जवाब-आैर मन काे कैसे नियंत्रित कर उसे सहीं तरिके से संचालित कर शांतिमय जीवन जियें”

“तू ना हो निराश कभी मन से”

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गर्मी से बचने के घरेलू उपाय।

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ϒ गर्मी से बचने के घरेलू उपाय। ϒ

Summer-Sun-kmsraj51आया मौसम गर्मी, लू का……

दोस्तों,
मई का महीना आ गया है और सूरज अपनी प्रखर किरणों की तीव्रता से संसार के जलियांश (स्नेह ) को सुखा कर वायु में रूखापन और ताप बढ़ा कर मनुष्यों के शरीर के ताप की भी वृद्धि कर रहा है।

गर्मी में होने वाले आम रोग – गर्मी में लापरवाही के कारण सरीर में निर्जलीकरण (dehydration), लू लगना, चक्कर आना, घबराहट होना , नकसीर आना, उलटी-दस्त, Sun-burn, घमोरिया जैसी कई diseases हो जाती हैं।

  • इन बीमारियों के होने में प्रमुख कारण – गर्मी के मौसम में खुले शरीर, नंगे सर, नंगे पाँव धुप में चलना, तेज गर्मी में घर से खाली पेट या प्यासा बाहर जाना, कूलर या AC से निकल कर तुरंत धुप में जाना, बाहर धुप से आकर तुरंत ठंडा पानी पीना, सीधे कूलर या AC में बेठना, तेज मिर्च-मसाले, बहुत गर्म खाना, चाय, शराब इत्यादि का सेवन ज्यादा करना, सूती और ढीले कपड़ो की जगह सिंथेटिक और कसे हुए कपडे पहनना इत्यादि कारण गर्मी से होने वाले रोगों को पैदा कर सकते हैं।

हम कुछ छोटी-छोटी किन्तु महत्त्वपूर्ण बातो का ध्यान रख कर ,इन सबसे बचे रह कर, गर्मी का आनंद ले सकते हैं।

उपचार से बचाव बेहतर होता है,है ना?

  • तो चलिए हम कुछ बचाव के तरीके जानते हैं –
  • गर्मी में सूरज अपनी प्रखर किरणों से जगत के स्नेह को पीता रहता है, इसलिए गर्मी में मधुर(मीठा), शीतल(ठंडा), द्रव (liquid) तथा इस्निग्धा खान-पान हितकर होता है।
  • गर्मी में जब भी घर से निकले, कुछ खा कर और पानी पी कर ही निकले, खाली पेट नहीं।
  • गर्मी में ज्यादा भारी (garistha), बासी भोजन नहीं करे, क्योंकि गर्मी में शरीर की जठराग्नि मंद रहती है। इसलिए वह भारी खाना पूरी तरह पचा नहीं पाती और जरुरत से ज्यादा खाने या भारी खाना खाने से उलटी-दस्त की शिकायत हो सकती है।
  • गर्मी में सूती और हलके रंग के कपडे पहनने चाहिये।
  • चेहरा और सर रुमाल या साफी से ढक कर निकलना चाहिये।
  • प्याज का सेवन तथा जेब में प्याज रखना चाहिये।
  • बाजारू ठंडी चीजे नहीं बल्कि घर की बनी ठंडी चीजो का सेवन करना चाहिये।
  • ठंडा मतलब आम(केरी) का पना, खस, चन्दन गुलाब फालसा संतरा का सरबत, ठंडाई सत्तू, दही की लस्सी, मट्ठा, गुलकंद का सेवन करना चाहिये। इनके अलावा लोकी, ककड़ी, खीरा, तोरे, पालक, पुदीना, नीबू , तरबूज आदि का सेवन अधिक करना चाहिये। शीतल पानी का सेवन , 2 से 3 लीटर रोजाना।
  • अगर आप योग के जानकार हैं, तो सीत्कारी, शीतली तथा चन्द्र भेदन प्राणायाम एवं शवासन का अभ्यास कीजिए ये शरीर में शीतलता का संचार करते हैं।

तो दोस्तों इन कुछ छोटी-छोटी बातो का ध्यान रख कर गर्मी की गर्मी से हम स्वयं को बचा सकते हैं।

Ayurvedic-Tips-in-Hindi-kmsraj51

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* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

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वजन घटाने के उपाय।

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वजन घटाने के उपाय।

Neem

वजन घटाने के उपाय।

मोटापा वैसे तो किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन महिलाओं में यह ज्‍यादा देखने को मिलता है। जानकारी के अनुसार मोटापा, न केवल गलत खान-पान की आदत से होता है, बल्कि मासिक धर्म की अनियमितता से भी होता है। आज हम इसी बात पर चर्चा करेगें कि महिलाओं में मोटापा बढ़ने का क्‍या कारण है और इसको किस विधि से कम किया जा सकता है। अगर आप भी महिला हैं, और बढ़ते वजन से परेशान हैं।

किस-किस जगह आता है मोटापा।

जांघे- थाई का स्‍थान सबसे पहले बढ़ता है, क्‍योंकि जो मासिक धर्म में अवरोध होता है खुल कर नहीं आ पाता है, तो जांघे मोटी होने लगती हैं और इतनी मोटी हो जाती हैं कि चलने फिरने में भी परेशानी आने लगती है।

पेट- पेट का बढ़ना आमतौर पर शौच और पीरियड पर ही निर्भर करता है और दर्द भी रहने लगता है। इससे भूख कम हो जाती है और गैस बनने लगती है। साथ ही पेट भारी रहने लगता है।

कमर- लंबे समय तक मोटापा कमर पर ही दिखाई देता है। फिर कमरे जैसा शरीर होने लगता है और बढ़े हुए वजन की वजह से घुटनों पर असर पड़ता है और वह दर्द होने लगता है।

छाती और पीठ- छाती और पीठ पर टाइट कपड़े पहनने से यह बढ़ता है।

मोटापा मिटाने का मूल मंत्र ।

इनपुट कम आउटपुट ज्‍यादा- इनपुट कम करें, आउटपुट बढ़ाएं यानी खाने में ऐसे पदार्थों का इस्‍मेमाल करें, जो आउटपुट बढ़ाते हैं। फल निष्‍कासन को तेज करते हैं जैसे नींबू पानी, गर्म पानी, छाछ, गुनगुना आंवला रस या कोई फल जैसे पपीता, अंगूर, अनार, संतरा, मौसमी आम या सब्‍जियां लौकी, पत्‍तागोभी, फूलगोभी और बैगन का प्रयोग करें।

योग- मोटापे को कम करने के लिए जितना मददगार योग होता है, उतना मददगार घूमना नहीं होता। योग में चक्‍की संचालन, साइकलिंग, धनुरासन और अश्‍वासन मुख्‍य है।

मसाज- मसाज पूरे शरीर के खून को सर्कुलेट करने में मदद करती है। इसके साथ ही मसाज मोटापे को कम करने का भी काम आसान करती है।

सूर्य स्‍नान- इससे जमा हुआ फैट बाहर निकलता है, कैल्शियम डी-1, डी-2, डी-3 की पूर्ती करता है। इसलिए 30 से 50 मिनट सूर्य स्‍नाना करना चाहिये। यह मोटापा कम करता है।

मोटापा बढ़ाने वाला तत्‍व- केला, अरबी, भिंडी, मैदा, मिठाइयां, सॉस, लंबे समय तक बैठना, दिन में सोना और बार बार खाना अधिक मोटापा बढ़ाता है। गरिष्‍ट और भारी भोजन शरीर में लंबे समय तक रुकता है।

क्‍या करें-

1. दिनभर गर्म पानी पीने की उपेक्षा सूर्य की रोशनी में रखा हुआ पानी पीना फायदेमंद है।

2. नीबू को बार-बार गर्म पानी में डाल कर न पिंए, सादे पानी से लें। गर्म पानी से कभी कभी ले सकते हैं पर इससे कमजोरी आने लगती है।

3. चाय के साथ नमकीन, ब्रेड और बिस्‍कुट नहीं लेना चाहिये। सिंपल चाय पिंए और चाय पीने के 10 मिनट बाद पानी पींए, मोटापा कम होगा।

4. पेट में जमने वाली वस्‍तु जैसे चॉक्‍लेट, टॉफी, ब्रेड, बिस्‍कुट आदी से परहेज करें। इन्‍हें बार-बार नहीं खाएं।

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Weight loss tips in Hindi !!

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वजन घटाने के उपाय।

Neem

वजन घटाने के उपाय।

मोटापा वैसे तो किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन महिलाओं में यह ज्‍यादा देखने को मिलता है। जानकारी के अनुसार मोटापा, न केवल गलत खान-पान की आदत से होता है, बल्कि मासिक धर्म की अनियमितता से भी होता है। आज हम इसी बात पर चर्चा करेगें कि महिलाओं में मोटापा बढ़ने का क्‍या कारण है और इसको किस विधि से कम किया जा सकता है। अगर आप भी महिला हैं, और बढ़ते वजन से परेशान हैं।

किस-किस जगह आता है मोटापा।

जांघे- थाई का स्‍थान सबसे पहले बढ़ता है, क्‍योंकि जो मासिक धर्म में अवरोध होता है खुल कर नहीं आ पाता है, तो जांघे मोटी होने लगती हैं और इतनी मोटी हो जाती हैं कि चलने फिरने में भी परेशानी आने लगती है।

पेट- पेट का बढ़ना आमतौर पर शौच और पीरियड पर ही निर्भर करता है और दर्द भी रहने लगता है। इससे भूख कम हो जाती है और गैस बनने लगती है। साथ ही पेट भारी रहने लगता है।

कमर- लंबे समय तक मोटापा कमर पर ही दिखाई देता है। फिर कमरे जैसा शरीर होने लगता है और बढ़े हुए वजन की वजह से घुटनों पर असर पड़ता है और वह दर्द होने लगता है।

छाती और पीठ- छाती और पीठ पर टाइट कपड़े पहनने से यह बढ़ता है।

मोटापा मिटाने का मूल मंत्र ।

इनपुट कम आउटपुट ज्‍यादा- इनपुट कम करें, आउटपुट बढ़ाएं यानी खाने में ऐसे पदार्थों का इस्‍मेमाल करें, जो आउटपुट बढ़ाते हैं। फल निष्‍कासन को तेज करते हैं जैसे नींबू पानी, गर्म पानी, छाछ, गुनगुना आंवला रस या कोई फल जैसे पपीता, अंगूर, अनार, संतरा, मौसमी आम या सब्‍जियां लौकी, पत्‍तागोभी, फूलगोभी और बैगन का प्रयोग करें।

योग- मोटापे को कम करने के लिए जितना मददगार योग होता है, उतना मददगार घूमना नहीं होता। योग में चक्‍की संचालन, साइकलिंग, धनुरासन और अश्‍वासन मुख्‍य है।

मसाज- मसाज पूरे शरीर के खून को सर्कुलेट करने में मदद करती है। इसके साथ ही मसाज मोटापे को कम करने का भी काम आसान करती है।

सूर्य स्‍नान- इससे जमा हुआ फैट बाहर निकलता है, कैल्शियम डी-1, डी-2, डी-3 की पूर्ती करता है। इसलिए 30 से 50 मिनट सूर्य स्‍नाना करना चाहिये। यह मोटापा कम करता है।

मोटापा बढ़ाने वाला तत्‍व- केला, अरबी, भिंडी, मैदा, मिठाइयां, सॉस, लंबे समय तक बैठना, दिन में सोना और बार बार खाना अधिक मोटापा बढ़ाता है। गरिष्‍ट और भारी भोजन शरीर में लंबे समय तक रुकता है।

क्‍या करें-

1. दिनभर गर्म पानी पीने की उपेक्षा सूर्य की रोशनी में रखा हुआ पानी पीना फायदेमंद है।

2. नीबू को बार-बार गर्म पानी में डाल कर न पिंए, सादे पानी से लें। गर्म पानी से कभी कभी ले सकते हैं पर इससे कमजोरी आने लगती है।

3. चाय के साथ नमकीन, ब्रेड और बिस्‍कुट नहीं लेना चाहिये। सिंपल चाय पिंए और चाय पीने के 10 मिनट बाद पानी पींए, मोटापा कम होगा।

4. पेट में जमने वाली वस्‍तु जैसे चॉक्‍लेट, टॉफी, ब्रेड, बिस्‍कुट आदी से परहेज करें। इन्‍हें बार-बार नहीं खाएं।

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शीर्ष 8 स्वास्थ्य युक्तियाँ हिन्दी में।

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Top 8 Health Tips in Hindi

स्वास्थ्य संबधी युक्तियाँ हिन्दी में ।

१. पीलिया : पीलिया में गन्ना रामबाण है. गन्ना चूसें, उसका रस पिएँ. भुनी हुई जौ का सतू भी साथ में लें. इसे गुड या शक्कर के रस में घोल लें. बताशे का शरबत भी ले सकते हैं !!

२. पथरी: २५ ग्राम पालक का रस रोगी को दिन में तीन चार बार पिलाएं !!

३. गठिया: मूली में क्लोरिन होता है. रोगी को धुप में बैठकर मूली अदरक और पत्ता गोभी का रस कप भर कर पिलाएं. मूली के बीज पीसें और तिली के तेल में भुनें. अंगों पर लेपें और पट्टी बंधें. जल्दी ही गठिया से छुटकारा मिल जाएगा !!

४. गुर्दे का दर्द: गाजर के रस में दो-ढाई रत्ती फिटकरी भस्म मिलाकर पिएँ. बहुत आराम मिलेगा !!

५. मधुमेह: गाजर और करेले का रस मिलाकर पीने से मधुमेह में लाभ मिलता है !!

६. लकवा: आक के पत्तों में तेल पकाएं, और उसे लकवाग्रस्त अंग पर मल दें. फिर एक पत्ते पर वही तेल लेप कर बाँध लें. एक सप्ताह में ही लाभ मिल जाएगा !!

७. एक्ज़ीमा: सोयाबीन का दूध एक्ज़ीमा को ठीक करने में रामबाण का काम करता है !!

८. कुष्ठ (कोढ़) : आंवला, खैर का छिलका और बड़ी इलायची लौंग और पीला संखिया बराबर मात्रा में लेकर खरल करें. साथ में नींबू रस भी मिलाते रहें. जहाँ सफ़ेद दाग हों उनपर इसे मलें !!

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पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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अमरूद में छिपे हैं कई गुण, सर्दियों में करें सेवन।

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अमरूद में छिपे हैं कई गुण, सर्दियों में करें सेवन।

 (Many properties of guava are hidden, the intake in winter)

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किसी भी फल के सेवन से सेहत को फायदा ही पहुंचता है, पर इसमें से एक है अमरूद। विशेषज्ञों के अनुसार, इस फल में कई खास गुण छिपे हैं जो शरीर और सेहत के लिए काफी लाभकारी हैं।अमरूद को तमाम गुणों का खजाना माना जाता है। इसमें फोलेट की अच्छी मात्रा है, जिससे यह महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाता है। मां बनने की चाहत रखने वाली महिलाओं को अमरूद का सेवन जरूर करना चाहिए। वहीं, डायबिटीज के मरीजों के लिए भी यह काफी फायदेमंद है। अमरूद के सेवन से खून में सुगर का स्तर कम होता है। इसमें फाइबर अधिक मात्रा में होते हैं जो शुगर के अवशोषण और इन्सुलिन बढ़ाने में मदद करते हैं।

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Guava Tree

इसके अलावा, अमरूद में आयोडीन अच्छी मात्रा में पाई जाती है, जिससे थायरॉइड की समस्या में आराम होता है। इससे शरीर का हार्मोनल संतुलन बना रहता है। अमरूद में संतरे के मुकाबले चार गुना अधिक विटामिन सी होता है। विटामिन सी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाते हैं और कैंसर से लड़ने में शरीर की मदद करते हैं। वाकई यह फल शरीर के लिए काफी लाभकारी है।

अमरूद में मौजूद पोटैशियम शरीर में सोडियम के प्रभाव को कम करता है जिससे ब्लड प्रेशर का संतुलन बना रहता है। इसके अलावा, यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। दांत दर्द में इसके पत्ते चबाने से भी काफी आराम मिलता है। इससे कब्ज भी दूर होती है।विशेषज्ञ विशेषकर सर्दियों के मौसम में अमरूद के सेवन की नसीहत देते हैं। अमरूद कई मायनों में सेहतमंद है। यह कई पौष्टिक तत्वों से भरपूर है बल्कि सेहत से जुड़े कई रोगों से दूर रखने में भी मददगार है। अमरूद को जामफल के नाम से भी जाना जाता है। इसका उपयोग कई रूपों में किया जाता है। अमरूद से जैम, जेली आदि चीजें भी बनती हैं, जो बाजार में सहज ही उपलब्‍ध होता है।

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

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गहरी नींद नहीं आती तो इन्हें अपनाये।

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गहरी नींद नहीं आती तो इन्हें अपनाये।

(Deep sleep if not adopted them)

भागती-दौड़ती जिंदगी में इंसान जब रात में थक कर सोने की कोशिश करता है तो सकून भरी नींद भी उसे नसीब नहीं होती है। जिसके कारण उसकी रात केवल करवटें बदलते ही बीतती है। इस कारण इंसान हाईब्लडप्रेशर और चिड़चिड़ेपन का शिकार हो जाता है। यही नहीं उसे सिरदर्द और मोटापे का भी दंश झेलना पड़ता है। इस कारण वो झल्लाकर डॉक्टरों के पास पहुंच जाता है और भारी-भरकम पैसा अपनी दवाईयों पर खर्च करता है,लेकिन उसके बावजूद भी वो अपनी समस्याओं से पूरी तरह निजात नहीं पाता है।

लेकिन अगर वही इंसान अपनी बिजी लाईफस्टाइल में थोड़ा सा परिवर्तन कर ले, तो यकीन मानिए उसे डॉक्टर के पास समय और ना ही दवाइयों पर पैसे खर्च करने पड़ेंगे। यहां हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं, जिन पर अगर आप अमल करेंगे तो आप पायेंगे बहुत अच्छी नींद और सेहतमंद जिंदगी।

1. सोने के लिए आप हमेशा ढीले-ढाले कपड़ों का प्रयोग कीजिये।

2. सोने के लिए कमरे का तापमान सामान्य होना चाहिए।

3. सोने से करीब दो घंटे पहले रात का भोजन करना चाहिए। कभी भी खाना खाकर तुरंत नहीं सोना चाहिए और ना ही भारी-भरकम भोजन करना चाहिए, हमेशा रात का खाना हल्का होना चाहिए।

4. रात को सोने से पहले गुनगुने दूध या फिर हलके गर्म दूध का सेवन करना अच्छा होता है।

5. आप अपनी दिनचर्या में शारीरिक व्यायाम को शामिल करें क्योंकि अक्सर आप ऑफिस में कुर्सियों पर लगातार बैठकर काम करते हैं,जिससे आपका दिमाग तो लगातार थकता है,लेकिन शरीर का निचला हिस्सा सुस्‍त अवस्‍था में पड़ जाता है इसलिए सोते समय आपको पीठ दर्द या कमर दर्द का एहसास होता है, जो आपकी नींद को दूर भगा देता है। व्यायाम करने से यह समस्या दूर हो जायेगी।

6. कमरे में सोते समय हल्की रोशनी होनी चाहिए।

7. सोने वाला कमरा साफ सुथरा होना चाहिए।

8. कभी भी सोने से पहले शराब और सिगरेट का सेवन नहीं करना चाहिए।

9. कभी भी मुंह ढककर नहीं सोना चाहिए।

10. हो सके तो खाना खाने के बाद आप 10-15 मिनट टहलें, इससे भोजन को पचने में मदद मिलेगी और आपको नींद अच्छी आयेगी।

11. हो सके तो सोने से पहले आप अपनी कोई मनपसंद किताब पढ़ें, इससे भी नींद अच्छी आती है।

12. और अंत में सबसे महत्वपूर्ण बात..वो यह कि सोने से पहले आप अपनी सारी चिंताओं के छोड़ दें और बिल्कुल शांत मन से बिस्तर पर जायें।

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Special diets according to age !!

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** आयु अनुसार विशेष आहार – Special diets according to age !! **

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शरीर को स्वस्थ व मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन्स, विटामिन्स व खनिज (minerals) युक्त पोषक पदार्थो की आवश्यकता जीवनभर होती है | विभिन्न आयुवर्गो हेतु विभिन्न पोषक तत्त्व जरुर्री होते है, किस उम्र में कौन-सा तत्त्व सर्वाधिक आवश्यक है यह दिया जा रहा है :

१) जन्म से लेकर ५ वर्ष की आयु तक : इस उम्र में बच्चों के स्वस्थ शरीर तथा मजबूत हड्डियों के लिए विटामिन ‘डी’ जो कैल्शियम ग्रहण करने में मदद करता है व लोह तत्त्व अत्यावश्यक होता है | विटामिन ‘डी’ की पूर्ति में दूध, घी, मक्खन, गेंहूँ, मक्का जैसे पोषक पदार्थ तथा प्रात:कालीन सूर्य की किरणें दोनों अत्यंत मददरूप होते है | किसी एक की भी कमी होने से बच्चों को हड्डियाँ कमजोर व पतली रह जाती है, वे सुखा रोग से ग्रस्त हो जाते है, अत: स्तनपान छुड़ाने के बाद बच्चों के आहार में लोह व विटामिन ‘डी’ युक्त पदार्थ जरुर शामिल करने चाहिए |

२) ६ से १९ वर्ष की आयु तक : ६ से १२ वर्ष की आयु बाल्यावस्था और १३ से १९ वर्ष की आयु किशोरवस्था है | इस आयु में शरीर तथा हड्डियों का तेजी से विकास होता है इसलिए कैल्शियम की परम आवश्यकता होती है | बड़ी उम्र में हड्डियों की मजबूती इस आयु में लिए गये कैल्शियम की मात्रा पर निर्भर रहती है | दूध, दही, छाछ, मक्खन, तिल, मूंगफली, अरहर, मुंग, पत्तागोभी, गाजर, गन्ना. संतरा, शलजम, सूखे मेवों व अश्वगंधा में कैल्शियम खूब होता है | आहार – विशेषज्ञों के अनुसार इस आयुवर्ग को कैल्शियम की आपूर्ति के लिए प्रतिदिन एक गिलास दूध अवश्य पीना चाहिए |

इस उम्र में लौह की कमी से बौद्धिक व शारीरिक विकास में रुकावट आती है | राजगिरा, पालक,मेथी, पुदीना, चौलाई, आदि हरी सब्जियों एवं खजूर, किशमिश, मनुक्का, अंजीर, काजू, खुरमानी आदि सूखे मेवों तथा करेले, गाजर, टमाटर, नारियल, अंगूर, अनार, अरहर, चना, उड़द, सोयाबीन आदि पदार्थो के उपयोग से लौह तत्त्व की आपूर्ति सहजता से की जा सकती है |
किशोरावस्था में प्रजनन क्षमता के विकास हेतु जस्ता (zinc) एक महत्त्वपूर्ण खनिज है | सभी अनाजों में यह पाया जाता है | इस आयु में खनिज की कमी से बालकों का स्वभाव हिंसक व क्रोधी हो जाता है तथा बालिकाओं में भूख की कमी एवं मानसिक तनाव पैदा होता है | अनाज, दालों, सब्जियों व कन्दमुलों (गाजर, शकरकंद, मुली, चुकंदर आदि) में खनिज विपुल माता में होते है |

३) २० से ३० वर्ष की आयु तक : इस युवावस्था में सर्वाधिक आवश्यकता होती है लौह तत्त्व, एंटी-ऑक्सीडेटस, फ़ॉलिक एसिड तथा विटामिन ‘ई’ व ‘सी’ की |

(क) लौह तत्त्व : मासिक धर्म के कारण पुरुषो की अपेक्षा स्त्रियों को लौह तत्त्व की दोगुनी जरूरत होती है |

(ख) एंटी-ऑक्सीडेटस : कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाने हेतु तथा स्त्री-पुरुषों के प्रजनन-संस्थान को स्वस्थ बनाये रखने के लिए एंटी-ऑक्सीडेटस आवश्यक होते है | आँवला, मुनक्का, अंगूर, अनार, सेवफल, जामुन, बेर, नारंगी, आलूबुखारा, स्ट्रोबेरी, रसभरी, पालक, टमाटर में एंटी-ऑक्सीडेटस अधिक मात्रा में पाये जाते है | फलों के छिलके व बिना पकाये पदार्थ जैसे सलाद, चटनी आदि में भी ये विपुल मात्रा में होते है | अन्न को अधिक पकाने से वे घट जाते है |

(ग) फ़ॉलिक एसिड : महिलाओं में युवावस्था व प्रारम्भिक गर्भावस्था में फ़ॉलिक एसिड की भी आवश्यकता होती है | यह फूलगोभी, केला, संतरा, सेम, पत्तेदार हरी सब्जियों, खट्टे-रसदार फलों, आडू, मटर, पालक, फलियों व शतावरी आदि में पाया जाता है |

(घ) विटामिन ‘ई’ : पुरुषों में पुंसत्वशक्ति व स्त्रियों में गर्भधारण क्षमता बनाये रखने के लिए इसकी आवश्यकता होती है | यह ह्रदय व रक्तवाहिनियों को स्वस्थ रखकर रक्तदाब नियंत्रित रखता है | इससे गम्भीर ह्रदयरोगों में रक्षा होती है | अंकुरित अनाज, वनस्पतिजन्य तेल (तिल, मूंगफली, सोयाबीन, नारियल तेल आदि) व सुकहे मेवे विटामिन ‘ई’ के अच्छे स्त्रोत है | एक चुटकी तुलसी के बीज रात का भिगोकर सुबह सेवन करने से भी विटामिन ‘ई’ प्राप्त होता है |

(ड) विटामिन ‘सी’ : रक्त को शुद्ध व रक्तवाहिनियों को लचीला बनाये रखने तथा हड्डियों की मजबूती के लिए यह आवश्यक है | संतरा, आँवला, नींबू, अनन्नास आदि खट्टे व रसदार फल, टमाटर, मुली, पपीता, केला, अमरुद, चुकंदर आदि में यह अच्छी मात्रा में पाया जाता है |


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(४) ३१ से ५० वर्ष की आयु तक : इस प्रोढ़ावस्था के दौरान कैल्शियम, विटामिन ‘ई’ और फ़ॉलिक एसिड की आवश्यकता अधिक होती है | फ़ॉलिक एसिड व विटामिन ‘ई’ ह्रदयरोगों की संभावनाओं को कम करते है |
महिलाओ में रजोनिवृत्ति के बाद इस्ट्रोजन हार्मोन स्त्रावित होना बंद हो जाता है, जिसके आभाव में कैल्शियम का अवशोषण मंद पड जाता है, अत: रजोनिवृत्ति के बाद हड्डियों को कमजोर होने से बचाने के लिए कैल्शियमयुक्त पदार्थों की जरूरत अधिक होती है |

(५) ५१ से ७० वर्ष या इससे ऊपर की आयु : इस उम्र के दौरान कोशिकाओं में होनेवाले वार्धक्यजन्य परिवर्तनों को रोकने के लिए एंटी-ऑक्सीडेटस सहायक तत्त्व है | इनके अभाव में लकबा, ह्रदयरोग तथा ज्ञानतंतु व ज्ञानेंद्रियों की दुर्बलता (neurodegenerative changes) एवं कैंसर होने की सम्भावना अधिक होती है | वृद्धावस्था में रक्तचाप को सामान्य रखने में पोटेशियमयुक्त पदार्थ लाभदायी हैं | फलों और सब्जियों, खुरमानी, आलूबुखारा, आडू, मुनक्का, खजूर, सूखे नारियल आदि में पोटेशियम समुचित मात्रा में मौजूद होता है | इस आयु में दूध, फल और सब्जियों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए |
इस प्रकार आयु अनुसार आहार लेने से व्यक्ति स्वस्थ व रोगमुक्त रहता है |

~ IN-ENGLISH ~

Nutritional requirements by life Stage Group
Nutritious diet rich in proteins, vitamins & minerals is essential to keep the body strong and healthy all throughout the life. Nutrient needs vary throughout the life cycle. Various age groups need different nutrients. The requirement of nutrients during different life stage groups is given below:

1) Life stage group: 1 through 5 years : Children of this age group need, particularly vitamin D which helps in mineralization of bones for development of bones, and iron for optimum growth of the body, Adequate exposure to ultraviolet light of morning sun and foods like milk, ghee, butter, wheat, maize are very helpful in providing vitamin D. deficiency of vitamin D can result in insufficient mineralization of the growing bones and they tend to develop rickets in children characterized by imperfect calcification, softening and distortion of the bones. Deficiency of iron may have an effect on mental development and may result in cognitive and behavioral problems. So after weaning the baby must be given substances rich in vitamin D and iron in their diet.

2) Life stage group: 6 through 19 years: The life-stage between 6-12 years is called childhood; and between 13-19 years is called adolescence. During this stage of life, the body and bones develop rapidly. Hence they need abundant quantity of calcium. The strength of bones during old age depends upon the intake of calcium taken during this stage of life Milk, buttermilk, curds, butter, sesame-seed, moong (green gram), cabbage, carrot, sugarcane, orange, turnip, dry fruits and ashwagandha (Withania somnifera) are rich dietary sources of calcium. According to dieticians the people of this age group must take a glass of milk everyday as a calcium supplement.
Deficiency of iron in the body during this stage of life retards physical and mental development. If we take these rich sources of iron in our diet we can easily get the needed amount of iron. They are : green leafy vegetables such as Rajgira (amaranthus paniculatus), spinach, fenugreek, mint, chaulai (amaranthus polygrmus), dry fruits like dates, currants, raisins, figs, cashew nut, apricots, etc. and certain other sources as bitter gourd, carrot, tomato, coconut, grapes, pomegranate, pigeon-pea (Cajanus Indicus), grams, urad (black gram) soya beans etc.
Zinc is an important mineral required for sexual maturation during adolescence which is easily obtained from all grains. Deficiency of zinc can cause aggressive and violent behavior in adolescent boys, and poor appetite and stress in adolescent girls. Food grains, pulses, vegetables and tuber roots (carrot, sugar potato, radish, beet root etc.) are rich sources of minerals.


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3) Life stage group: 20 through 30 years : Iron, anti-oxidants, folic acid, vitamin E and vitamin C are required in abundant amounts during youth. (a)Iron: On account of excessive losses of iron from menstruation, women need double the amount of iron than men. (b) Anti-Oxidants: Anti-oxidants are required to prevent cell damage and maintain the male and female reproductive systems in perfect health. Amla (the emblic myrobalan), currants, pomegranate, black plums, berries, oranges, plums, strawberry, raspberry, spinach and tomatoes are rich sources of anti-oxidants. The skins of fruits & uncooked foods such as salads, chutneys etc. Are also rich in anti-oxidants. They are lost significantly when the food is overcooked. (c) Folic Acid : Women need folic acid during youth and in the early stages of pregnancy. Important sources of folic acid are cauliflower, banana, orange, beans, dark green leafy vegetables, citrus fruits, peach, peas, spinach, pods, asparagus etc. (d) Vitamin ‘E’ : It is required for virility in men and fertility in women. It also reduces the risk of cardiovascular diseases. Sprouted grains, vegetable oils (sesame, groundnut, soya bean, coconut oils etc.) and dry fruits are rich sources of vitamin E. Soak a pinch of tulsi seeds at night. Take it in the morning to get vitamin ‘E’. (e) Vitamin ‘C’ : It purifies blood, keeps blood vessels resilient, and strengthens the bones. Orange, amla, lemon, pineapple, citrus fruits, tomato, radish, papaya, banana, guava, beet-root etc. are good sources of vitamin ‘C’.

(4) Life stage group: 31 through 50 years: During this mature stage of life calcium, vitamin E and folic acid are much required. Folic acid & vitamin E reduce the risk of developing heart diseases. After menopause there is less secretion of estrogen in females. It reduces the absorption of calcium. So they need foods rich in calcium to prevent osteoporosis.

(5) Life stage group: 51 through 70 years and above: Anti oxidants are much needed to prevent degenerative changes in the cells of the body associated with senility. Their deficiency can increase the chances of developing paralysis, heart disease, neuro-degenerative changes and cancer. In order to maintain the blood-pressure of the body, a diet rich in potassium is quite beneficial in old age. Fruits and vegetables, apricot, plums, peach, currents, dates, dry coconut are rich sources of potassium. During this age one should specifically take milk, vegetable & fruits.
Diet plan according to the life-stage group helps in maintaining the body hale & hearty and also in prevention of many diseases.

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Health Tips : कुछ इस तरह से शरीर का थकान उतारें।

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Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ कुछ इस तरह से शरीर का थकान उतारें। ϒ

«♦»«♦»
अधिक परिश्रम करने से शरीर में थकान आ जाती है और शरीर सुस्त हो जाता है। फिर कुछ काम करने का मन ही नहीं करता, सिर्फ आराम की ही जरूरत महसूस होती है।

थकान उतारने के लिए आप कुछ इस तरह प्रयास करें।

अपनी दो अंगुलियों के पोरों से चेहरे की हल्की मालिश करें। इससे ब्लड सर्कूलेशन बढ़ेगा, जिससे आप महसूस करेंगे कि आपकी थकान रफूचक्कर हो गई है।

∇ नाक के दोनों ओर हल्की मालिश करते हुए धीरे-धीरे दोनों आंखों के बीच वाले भाग से लेकर आंखों के नीचे भी हल्की मालिश करें। फिर इसी तरह से भौहों तक पहुंचें।
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भौहों पर हल्का दबाव डालते हुए अंदर से बाहर की ओर मालिश करें।

अब आंखों के बाहरी किनारों पर मालिश करते हुए ललाट तक पहुंचें।

 इसके बाद आंखों के एकदम नीचे की ओर आएं। गालों के बीच हल्की मालिश करते हुए फिर ऊपर से ही मसूड़ों की भी मालिश करें। इसके बाद जबड़ों को अंगुलियों की पकड़ में लें और जबड़ों के किनारों पर हल्का दबाव डालें।

 कई बार सुगंधित तेल के प्रयोग से भी शरीर की थकावट को भगाया जा सकता है। सुगंधित तेल से प्रभावित अंग की हल्की मालिश करने से ताजगी महसूस होती है, इसके लिए सुगंधित तेल की कुछ बूंदें वनस्पति तेल(नारियल का तेल) में मिलाकर मालिश करनी चाहिए।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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