खुशीयाँ यूं ही नही मिलती किसी काे।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ खुशीयाँ यूं ही नही मिलती किसी काे। ϒ

खुशीयाँ यूं ही नही मिलती किसी काे।
जब तक ना जीवन में कड़ी मेहनत हाे॥

खुशीयाें से भरा हर पल हाेता है।
जिंदगी में सुनहरा हर कल हाेता है॥

मिलती है कामयाबी उन लाेगाे काे।
जिनमें मेहनत करने का जज़्बा हाेता है॥

जिंदगी भी उनके आगे सर झुकाती है।
जिनकी मेहनत में दम हाेता है॥

डरते नही वाे मुश्किलों से ना ही,
राह की अडचनाे से॥

मुसकरा कर आगे बढ़ते है।
सामना करते है हर मुशकिलाे का, अडचनाे का॥

भविष्य खुद ही सुनहरा बनाते है।
बिना किसी की मदद के बिना॥

©- विमल गांधी ∇
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

 ~KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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क्या ढूँढ रहा रे बन्दें।

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Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ क्या ढूँढ रहा रे बन्दें। ϒ

क्या ढूँढ रहा रे बन्दें।
सब कुछ तेरे पास है॥

चाराे तरफ़ से घिरा है तूँ।
रिश्ते नाताे के झंजाल में॥

पैसा गाड़ी बंगला सब है तेरे पास।
फिर क्याे तूं रहे उदास॥

फिर क्या नही जिसके लिये तू।
इतना परेशान है॥

ढूँढता रहता है तूँ उसे हर जगह।
पर मिल ना पाता वाे तुझे कही भी॥

हर पल तलाश रहती है।
साेच अपने मन से कभी॥

कि क्या तुझे चाहिये क्या नही।
साेचने से तुझे मिलेगा ज़रूर,

एक रास्ता मिलेगी ज़रूर मंज़िल॥

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ये रंग बदलती दुनिया है, यहाँ।

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ϒ ये रंग बदलती दुनिया है, यहाँ। ϒ

ये रंग बदलती दुनिया है, यहाँ।
कभी काेई असंभव काम, संभव हाे जाता है॥

कभी संभव काम असंभव, हाे जाता है।
कभी काेई ज़रूरी काम टल जाता है॥

गरीबाे काे यहाँ भटकते देखते है और,
पैसे से ईमान बदलते है यहाँ॥

कभी अपने पराये बन जाते है ताे कभी।
पराये अपना पन दिखाते है॥

रिश्ते नाताे में प्यार भी है और तक़रार भी है।
हर पल लाेग अलग – अलग रंग बदलते है॥

अलग – अलग रंग दिखाते है।
टूटते जज़्बात है और संवरते अरमान भी है॥

लाेगाे काे देख – देख हम खुद भी बदल से गये है।
यह रंग बदलती दुनिया है॥

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फूलों के साथ – साथ रहते है काँटे।

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ϒ फूलों के साथ – साथ रहते है काँटे। ϒ

फूलों के साथ – साथ रहते है काँटे।
जीवन में हमारे साथ – साथ,

रहते है रिश्ते – नाते।
कुछ रिश्ते है फूलाे जैसे और,

कुछ है कांटाे जैसे।
कुछ साथ रह कर जीवन में॥

ख़ुशबू फैलाते है ताे कुछ।
कांटाे के जैसे हर पल चुभते जाते है॥

दाेनाे हमारे जीवन में रहते है साथ – साथ
….. और चलते है, साथ – साथ॥

दाेनाे तरह के रिश्ते निभाने ताे,
हम काे ही पड़ते है. राेकर निभाओ या हँस कर निभाओ॥

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किसी की बात दिल में लगाना ना।

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ϒ किसी की बात दिल में लगाना ना। ϒ

किसी की बात दिल में लगाना ना।
किसी के लिये यूँ ही आँसू बहाना ना॥

यह दुनिया है सतरंगी, चलती रहेगी।
मगर यह आँसू है बहुत अनमाेल॥

यह है माेतियाे की बुंदे।
जाे आँखाे से छलकती है॥

इसे रखना हमेशा संभाल कर।
इसे यूँ ही गँवाना ना कभी, किसी पे॥

काेई समझेगा ना आपके दिल की बात।
ना ही काेई क़दर करेगा इन आँसुओ की॥

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सूरज चाँद सितारे सब आसमान पर।

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ϒ सूरज चाँद सितारे सब आसमान पर। ϒ

सूरज चाँद सितारे सब आसमान पर।
घूम – घूम कर करते निस्वार्थ,
अपना – अपना काम॥

सूरज करता उजाला चहुँ-ओर।
शक्ति देता हर किसी काे जीवन मे॥

चाँद देता शीतलता हर प्राणी काे ताकि।
मिले हर किसी काे सूकुन और आराम॥

बरखा बादल, पेड – पाैधे, नदियाँ पहाड़।
सब कर रहे है अपना-अपना काम॥

ये देते हमें भी एक सुंदर सा पैग़ाम।
कि जब सब अपना – अपना काम करते है ताे॥

हम क्यों बैठे है खाली और उदास
हमें भी जीवन मे निस्वार्थ॥

कुछ ना कुछ करना चाहिये।
अपने चाराे ओर भला हर,

किसी का करना चाहिये।
हर किसी के बीच प्यार काे,
बढ़ाना चाहिये, ज़मीं पर॥

अटूट प्रेम का संसार बनाना चाहिये।
जीवन सफल बनाना चाहिये॥

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यह दुनिया है मुसाफ़िर खाना।

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CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ यह दुनिया है मुसाफ़िर खाना। ϒ

यह दुनिया है मुसाफ़िर खाना।
अलग – अलग मुसाफ़िर यहाँ॥

अलग – अलग बाेली यहाँ।
अलग – अलग पहनावा है यहाँ॥

इक दिन सब उड़ जायेंगे।
बाेल के अपनी – अपनी बाेली॥

याद वही आयेंगे जिन की।
हाेगी मीठी – मीठी बाेली॥

जाे करेंगे भला इस संसार में नाम।
आयेगा उनका इतिहास में॥

याद करेगी दुनिया उन्हे।
बडे इज़्ज़त और सम्मान से॥

©- विमल गांधी ∇
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ना ताेडाे किसी का घर।

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CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ ना ताेडाे किसी का घर। ϒ

ना ताेडाे किसी का घर।
ना छिनाे किसी से राेटी॥

पक्षियाें काे उड़ने दाे।
खुले आसमान में॥

मछलियाे काे तैरने दाे पानी में।
नदी के बहाव काे ना राेकाे, कभी॥

जीने दाे सबकाे अपनी खुशी से।
जिंदगी है सबकी अपनी-अपनी॥

लगाओ ना काेई राेक-टाेक।
ना लगाओ काेई बंधन॥

खुद खुश रहाे और सबकाे,
खुश रहने दाे इस संसार में॥

जिंदगी है बहुत छाेटी फिर।
ना मिलेगी दुबारा कभी॥

©- विमल गांधी ∇
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जीवन में जाे गुज़र गया साे गुज़र गया।

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KMSRAJ51-CYMT

ϒ जीवन में जाे गुज़र गया साे गुज़र गया। ϒ

जीवन में जाे गुज़र गया साे गुज़र गया।
मलाल उसके लिये भला क्या करना॥

उसे याद कर के दिल क्या दुंखाना।
जाे बीत गया साे बीत गया॥

फूलाे में एक गुलाब था, वाे एक सुंदर ख्वाब था
लेकिन जाे गुज़र गया साे गुज़र गया॥

उसके लिये आँसू क्या बहाना।
दिल काे क्याें जलाना॥

अब ताे सुरज भी पहाड़ीयों के पीछे छीप गया।
ना क़सूर मेरा ना तेरा फिर भी॥

ना किया गिला ना शिकवा किसी से।
फिर भी राह अपनी – अपनी चल दिये॥

ना बेवफ़ाई तुम ने की ना बेवफ़ाई हम ने की।
फिर भी दूर हाे गये॥

उसे याद कर – कर के दिल अपना क्या दुँखाना।
जाे गुज़र गया साे गुज़र गया, मलाल उसके लिये क्या करना॥

क्या करना उसे याद कर – कर के जीवन।
अपना ख़राब करना, और हमेशा दुँखी रहना॥

©- विमल गांधी ∇
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खुद काे मत कमजाेर समझ कभी।

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ϒ खुद काे मत कमजाेर समझ कभी। ϒ

खुद काे मत कमजाेर समझ कभी।

पहचान अपनी शक्ति काे कभी॥

तुझ में भी है शक्तिया बहुत।

चाहे ताे खुद काे आजमा ले कभी॥

मुश्किलें ताे आती है हर किसी के जीवन में।

उस से ना डर कर बैठ कभी॥

विश्वास रख खुद पर हर घड़ी।

विश्वास अगर रखेगा ताे जीत पायेगा॥

हर मुश्किल काे, कभी।

हार – जीत ताे लगी रहती है॥

इससे कभी निराश ना हाे।

काेशिश कर – कर के ही जीत मिलती है॥

निराश हाे कर बैठने से नही।

चाहे आये आँधी तूफ़ान डर के ना॥

रूक जा रास्ते में कही।

हंस कर पी ले घुट गम के सभी,

इक दिन जीत जायेगा तु, मुश्किलों को सभी॥

©- विमल गांधी ∇
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नाम के रिश्ते रह गये है।

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ϒ नाम के रिश्ते रह गये है। ϒ

कुछ घराे में,

रिश्ते बनावटी से हाे गये है।

नाम के रिश्ते रह गये है॥

बाहर ताे दिखावा करते है हमदर्दी का।

असल मे भूल बैठे है पाठ हमदर्दी का॥

जिन माँ बाप ने पाला बच्चाे काे,प्यार से।

उन्हें नही काेई देता आज घर मे सम्मान॥

वाे बच्चे अनजाने से हाे गये है।

अपने हाे कर भी पराये से हाे गये है॥

खुद पर ख़र्चा करते है बहुत।

माँ बाप पर ख़र्चा करते डरते है॥

जिस घर मे कभी जलते थे चिराग़।

पिता की मेहनत की कमाई से॥

वाे घर मे पडे है पुराने सामान से।

चुप करके घर के एक काेने मे पड़े रहते है॥

मगर शिकायत किसी से ना करते है।

लेकिन असलियत छुपती नही कभी, किसी से॥

उसे देख हैरानी सी हाेती है कि।

जाे है आज सम्मान के है हक़दार॥

आज घर मे वाे बैठे है एक दम लाचार।

उन्हें हर हाल में सम्मान मिलना चाहिये॥

बच्चे अगर ना देगे सम्मान माँ बाप काे, ताे।

कल नही देगे उनके बच्चे कभी भी उन्हें सम्मान॥

∅- विमल गांधी ∇
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आज माँ हाेती ताे दुँख मेरा जान लेती।

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ϒ आज माँ हाेती ताे दुँख मेरा जान लेती। ϒ

आज माँ हाेती ताे दुँख मेरा जान लेती।
बिन बाेले ही वाे मेरे चेहरे से पहचान लेती॥

देती थी दिलासा वाे मुझे दूर रह कर भी।
शक्ति मिलती थी मुझे उसकी बाताे से, कभी,
कैसे चलना है इस संसार में बताती थी वाे॥

मुझे मेरे जीने का रास्ता दिखाती थी वाे।
सीधे-साधे रास्ते पर चलना तू हमेशा॥

दूसराे काे देख के बदलना ना अपना रास्ता।
इस संसार में जाे आया है वाे जायेगा इक दिन॥

मिलेंगे रास्ते मे बहुत से मुसाफ़िर।
काेई कुछ बाेले ताे काेई कुछ और॥

जाे तुझे अच्छा लगे तू करना यहाँ।
दूसराे की बाताे पे चलना ना यहाँ॥

करना भला सबका यहाँ काेई करे लाख बुरा तेरा यहाँ।
अपना रास्ता कभी बदलना नही॥

सीधा चलना राह पर हमेशा यहाँ।
बहुत सी रूकावटे आयेगी यहाँ॥

पर कर्म अपना ख़राब करना ना कभी।
माँ की सीख पर चलती हूँ मैं,
हर मुसीबत से उभरती हूँ मैं॥

काेई कितना भी चाहे बुरा मेरा।
लेकिन मैं बुरा किसी का ना करती यहाँ॥

पर ज़माने का रवैया है कुछ इस तरह कि।
अच्छा कराे कितना भी पर याद रहता किसी काे भी नही॥

पर दिल मे दुंख सा रहता है जाे आँखाे से कभी छलकता है।
अच्छाई के आगे बुराई मिलती है॥

काश आज माँ हाेती ताे वाे ही मुझे जानती, पहचानती।
दूर करती मेरा दुखं दर्द, जाे काेई और ना कर सकता यहाँ॥

∅- विमल गांधी ∇
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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क्या लडकियां ही करती है, सिर्फ़ मनमानी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT04

ϒ क्या लडकियां ही करती है, सिर्फ़ मनमानी। ϒ

क्या लडकियां ही करती है, सिर्फ़ मनमानी।
जो बन जाती है, वो देश की दामिनी॥

हक है तुम्हारा ऐ हर एक हिन्दुस्तानी।
जियो तुम अपनी तरह से अपनी ये जिंदयानी॥

दर्द है, सिसक है, एक खामोशी-सी उनकी कहानी।
क्यों शर्मसार कर शापित कर रहे हो,
हमसे हमारी जवानी॥

तुम्हें क्यों दिक्कत होती है जब होते है हम सयानी।
ऐ अनपढ़ अफसोस है आज हर उस मां को,
जो कह न सकती है, मैं हूं उस हैवान की जननी॥

हम तो है एक ऐसी धानी,
जिसकी चोट वो दरारें लाती है।

जो अगर खत्म न हुआ तो फट जायेगी ये धानी,
और…………
खत्म हो जायेगी सृष्टि से,
हैवानियत की ये कहानी………!!

-संदीप वर्मा – बीकानेर (राज.)

Sandeep Verma-kmsraj51

संदीप वर्मा।

Post share by Mr. Sandeep Verma, from Bikaner (Raj.).

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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नारी की इच्छा।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

नारी की इच्छा। ∗

असंभव के विरुद्ध:- “नारी की इच्छा” हम समझ क्यों नहीं पाते?

“तुम तो नदी की धारा के साथ दौड़ रहे हो।
उस सुख को कैसे समझोगे, जो हमें नदी को देखकर मिलता है।”

– रामधारी सिंह ‘दिनकर’

मैं जब बच्ची थी।
पेड़ पर चढ़ने को मचलती, मां डांटती
कहती ये लड़कों जैसी गलत मस्तियां हैं।

उछलना, कूदना, दौड़ना, चढ़ना, गिरना,
उड़ना।

पिता हंसते, शाम को कंधे पर बिठाकर ले जाते।
अमरूद के पेड़ पर चढ़ना सिखाते, समझाते – शरीर
सब कुछ कर सकता है।
अगर “तुम्हारी इच्छा हो”

मैं जब कुछ बड़ी हुई।
दादी को जैसे बस एक ही काम था।
काम सीख लो, कल ससुराल में बदनामी होगी।

दादा न जाने क्या-क्या खिलाते,
मेरे खेलने- खाने के दिन होने का विश्वास दिलाते।
बस करो। कोशिश करो। देखो। सुनो। करो।
नहीं आया तो फिर करो।

सब होगा – अगर “तुम्हारी इच्छा हो”

एक नाज़ुक समय आया।
हर बात पर रोकना, हर काम पर पूछना, हर साथ
पर संदेह।

जीवन लगने लगा बोझ, अपने लगने लगे फांस घुटन।

छटपटाहट। घबराहट।

कहां गए वो खेलने-खाने के दिन?
पिता का लाड़, लगने लगा लताड़। भाई की
शरारत, देने लगी हरारत।

“मेरी इच्छा”? क्यों नहीं चलती?
मैं कहां जाती हूं, कब लौटती हूं, क्या पहनकर
जाती हूं,
किसके साथ बैठती हूं, किससे हंसती-बोलती
हूं।

इस पर घरवाले पहरा बिठा देना चाहते हैं?
आखिर क्यों?
“मेरी इच्छा”का क्या? और वे होते कौन हैं?
और समझते क्यों नहीं
कि मैं बड़ी हो चुकी हूं। पढ़ी-लिखी हूं।

अपना अच्छा-बुरा समझती हूं।
बेटा, जमाना ठीक नहीं है। आजकल किसी
का भरोसा नहीं।

कॉलेज के बाद सीधे घर आना। दिल्ली का पता है न?
क्यों? “मेरी इच्छा”का क्या?
लड़की हूं न, इसलिए इतनी रोक।
यह उम्र ही ऐसी होती है। बंधन तोड़ने की उग्र इच्छा होती है।
बंधन।

पढ़ाई करो। और पढ़ो। शादी के बाद,
आत्मनिर्भर रहना चाहिए।
अपने पैरों पर खड़े होना, संसार की सबसे बड़ी
चुनौती, सबसे अच्छा उपाय।

“मेरी इच्छा”क्या है?
उनके इस प्रश्न ने मानो मुझे नींद से जगाया
आपको, किसी को “मेरी इच्छा”का क्या?
उन्होंने लाड़ से हाथ फेरा। बच्ची है। बड़ी कब होगी।
कल शादी होगी। कितनी जिम्मेदारियां निभानी हैं।
अरे…। मैं तो खुश हुई थी कि आज “मेरी इच्छा” जानी जाएगी।
ये तो फिर।

और एक पल में मैं बच्ची हूं। दूसरे ही पल में मेरी शादी।
मां, कभी तो मुझे मेरी इच्छा से कुछ करने दो…
सबको तुम पर नाज़ है बच्चा।
तो इतने बंधन क्यों है?
तू नहीं समझेगी। ये प्यार होता है!
फिर नैराश्य भरी बातें।

अब शादी के बाद बंधन टूटने चाहिए
या कि अपने पैरों पर खड़े रहने वाली नई बेड़ियों की चिंता करें?
मैं तो ढेर सारी मस्ती करना चाहती हूं। ढेर सारे दोस्त बनाना चाहती हूं,आज़ाद होना चाहती हूं।
ये हैं कि फिर फंसाना चाहते हैं। होते कौन हैं,ये?
“मेरी इच्छा”।

रात को मां से मुलाकात हुई, कई दिनों बाद, उन्हें ध्यान से देखा
पापा की तबीयत को लेकर, भारी चिंता में थी वह
भाई की नौकरी का किस्सा, कई तरह की घर की समस्याएं
लेकिन मुझे न जाने क्या-क्या सिखाने की कोशिश करती रहीं
मैं अपनी ज़िंदगी जीना चाहती हूं। मैं शादी करना ही न चाहूं …
पागल हो गई हो क्या – ऐसे गन्दे शब्द …

हम तो, संगीत में क्या होगा, जोड़ा कैसा होगा और फेरे कहां करवाएंगे
यह सोच भी चुके हैं।

ये क्या कह रहे हैं।
आंखों में आंसू, गालों पर गढ्ढे और ओठों पर
थरथराहट
घर पर हुआ निर्णय।
लेकिन मैं शादी नहीं करूंगी।
फिर बना दृश्य विचित्र
झड़प। समझ। सलाह। तड़प।
तय हुआ जो वे चाहते थे।
“मेरी इच्छा”का क्या?

पढ़ाई का चक्र चलता ही रहता है।
मैंने वहां पूरी की। एक दूर की बहन थी उसने यहां,
चिंता का चक्र भी निरन्तर है,
बड़ी होती लड़कियों पर चलता ही रहता है।

मैं इतना पढ़ ली कि लड़का मिलना मुश्किल।
वो बहन पढ़ी। लेकिन लड़के वालों ने कहा और पढ़ी होती तो कमाती।
नानी के बगल वाले घर में थी एक लड़की। पढ़ न सकी।

सबको है डर। कौन होगा इसका वर।
पिता कहते, होगा सब अच्छा । हुआ ।
चाचा जानते थे मिलेगा समझदार। मिला ।
पढ़ न सकने का अर्थ नहीं है अनपढ़। उसके दूल्हे ने
कहा।

घरवालों का सपना हुआ साकार। था उनका
आधार :
बुद्धि चलानी है। विद्या चलेगी पीछे-पीछे।
दक्षता। क्षमता। योग्यता। लड़कियों में गुण
होते ही हैं, बहुत अच्छा चलेगा
अगर “तुम्हारी इच्छा”हो।

और लोग? समाज? पुरुष? वो क्या समझते हैं मुझे?
कि वो मेरे साथ दुर्व्यवहार करेंगे? अत्याचार
करेंगे?

नहीं मैं उनसे भयभीत, नहीं मैं उनसे निराश
नहीं मेरा किसी पुरुष में विश्वास।
शिक्षा ली है मैंने घटनाओं से। सीखा है मैंने
दुर्घटनाओं से।

रहा होगा सफल दादी, नानी, मां, दीदी
का जीवन
मैं उसे कहूंगी विफल, क्योंकि संभवत: वे परम्परा
ही निभा रही थीं
निश्चित ही वे जिम्मेदारियां ढो रही थीं
वे “स्वयं’ कुछ, क्या थीं?
पिता, भाई, श्वसुर, पति और परिवार इन्हीं से
उनके विचारों का आकार
सहानुभूति पर जीती रहीं वे, प्रेम बांटती,
करती रहीं वे।

पुरुष तो पुरुष, बच्चों से भी डरती रहीं वे।
मैं अपनी इच्छा से जीऊंगी, क्योंकि मैं “अलग’
हूं, क्योंकि मुझे चुनना आता है
क्योंकि मैं ब्रह्मांड हूं,
मैं यूनिवर्स हूं।

मेरा शरीर। मेरा दिमाग। मेरी इच्छा। माय चॉइस।
“मेरी इच्छा सब समझेंगे, असंभव है। किन्तु समझनी ही होगी।”

 क्योंकि संसार की जननी, जब एक मुट्ठी
भर पापियों से त्रस्त होकर, रुष्ट होकर,
कुंठित होकर, क्रुद्ध होकर परिवार की
जगह “मैं’ को चुनने की घोषणा करने पर
विवश हो जाए, तो हमारे पालन-पोषण
और संस्कार देने में भारी कमी हो गई है।

वह जीवन के सबसे सुंदर भाव “प्रेम” को भी
ठुकरा रही है। यह सबसे बड़ी चिंता है।
क्योंकि नारी ने ही हमें प्रेम सिखाया है।

©- (लेखक – कल्पेश याग्निक) दैनिक भास्कर के ग्रुप एडिटर हैं।

-संदीप वर्मा – बीकानेर (राज.)

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संदीप वर्मा।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

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आस्था और आशा

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♥ “आस्था और आशा” 

एक साधु थे। बाल्यावस्था से ही उन्होनें  घर छोड़  दिया था और ईश्वर से लौ लगा ली थी। दिन-रात भर प्रभु का भजन करते। जब भूख लगती तो आस-पास के घरों के सामने खड़े हो जाते और भजन गाने लगते। उनका कंठ अत्यंत मधुर था, इसलिए लोग उन्हें तन्मयता से सुनते और जो बन करता दे देते।

साधु को वैसे भी दो रोटी से ज्यादा की दरकार होती ही नहीं थी। एक दिन साधु भजन गाते-गाते जरा दूर निकल गये। जब दिन चढ़ आया तो खाने की सुध आई। निकट ही एक हवेली नजर आई। साधु वहीं खड़े होकर मग्न हो गए भजन गाने में।

हवेली थी एक धनिक व्यापारी की। रसोई के भीतर व्यापारी की पत्नी खाना बना रही थी। उसने साधु का भजन सुना तो मुग्ध हो गई । साधु को देने के लिए हाथ में भोजन भी ले लिया, लेकिन वो बाहर नहीं गई।

भीतर से ही कहा – रूको बाबा ! आ रही हूँ। साधु भी मस्त भाव से भजन गाते रहे। व्यापारी ने जब ये दृश्य देखा तो बोला – तुम भोजन हाथ में लिए खड़ी हो बाबा को दे नहीं रही, क्या वजह है?

व्यापारी की पत्नी भजन सुनते हुए फिर बोली – ठहरो, बाबा ! अभी आई। फिर पति को उत्तर दिया – भोजन साधु को दूंगी तो वह चले जायेंगें। मुझे उनका भजन बहुत प्रिय लग रहा है। उसे थोड़ा सुन लूं, फिर भोजन दूंगी।

इस प्रतीकात्मक का निहितार्थ यह है कि जब लंबे समय तक कोई मनोकामना पूर्ण न हो, तो निराश न हों, बल्कि यह मानना कि व्यापारी की पत्नी की भांति ईश्वर को आपकी प्रार्थना अच्छी लग रही है। वस्तुतः ईश्वर में विश्वास और स्वयं पर भरोसा रखते हुए आशावादी बने रहें तो अभिलक्षित लक्ष्य अवश्य पूर्ण होता है। ईश्वर की भक्ति में डूबे व्यक्ति को हर वस्तु में ईश्वर ही नजर आते हैं। जब ऐसी हालत हो जाती है, इतनी तड़प पैदा होती है तब जाकर ईश्वर की प्राप्ति संभव होती है।

                       -संदीप वर्मा – बीकानेर (राज.)

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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