जो जैसा दिखता है – वैसा होता नहीं सदैव।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ जो जैसा दिखता हैवैसा होता नहीं सदैव। ϒ

दो बंदर एक दिन घूमते-घूमते एक गांव के समीप पहुंच गये। उन्होंने वहाँ फलों से लदा पेड़ देखा। एक बंदर ने चिल्लाकर कहा – “इस पेड़ को देखो ! ये फल कितने सूंदर दिख रहे है। ये अवश्य ही स्वादिष्ट होंगे। चलो, हम दोनों पेड़ पर चढ़कर फल खाये।”

दूसरा बंदर बुद्धिमान था। उसने कुछ सोचकर कहा – “नहीं, नहीं। ज़रा ठहराे ! यह पेड़ गांव के समीप है और इसके फल इतने सुंदर और पके हुए है, लेकिन यदि ये फल अच्छे होते तो गांव वाले ही इन्हे तोड़ लेते, इन्हें ऐसे ही पेड़ पर नहीं लगे रहने देते। लेकिन इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि किसी ने भी इन फलों को हाथ तक नहीं लगाया है। हो सकता है कि ये फल खाने लायक न हो।”

उसकी ये बातें सुनकर पहले बंदर ने कहा – ” कैसी बेकार कि बातें कर रहे हो। मुझे तो इन फलों में कुछ बुरा नहीं दिख रहा। मैं तो इन्हें खाने जा रहा हूँ, तुम्हे साथ चलना है तो चलो।”

दूसरे बंदर ने फिर से उसे सावधान करते हुए कहा – “तुम्हे इस बारे में फिर से सोचकर निर्णय लेना चाहिए। मैं भोजन के लिए कुछ और ढूंढता हूँ।” पहला बंदर पेड़ पर चढ़कर फल खाने लगा, परन्तु वे फल ही उसका अंतिम भोजन बन गए; क्योकि वे फल ज़हरीले थे।

दूसरा बंदर जब लौटा तो उसने अपने साथी को मरा हुआ पाया। इसलिए कहा जाता है कि हर चमकने वाली चीज सोना नहीं हुआ करती। अर्थात: जो जैसा दिखता है – वैसा होता नहीं सदैव।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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Note:-

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to become them selves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

 

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हिम्मत आपकी मदद उसकी।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ हिम्मत आपकी मदद उसकी। ϒ

एक बार एक किसान का घोड़ा बीमार हो गया। उसने उसके इलाज के लिए डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने घोड़े का अच्छे से मुआयना किया और बोला….. आपके घोड़े को काफी गंभीर बीमारी है। हम तीन दिन तक इसे दवाई देकर देखते हैं, अगर यह ठीक हो गया तो ठीक, नहीं तो हमे इसे मारना होगा। क्योंकि यह बीमारी दूसरे जानवरों में भी फैल सकती है।

यह सब बातें पास में खड़ा एक बकरा भी सुन रहा था। अगले दिन डॉक्टर आया, उसने घोड़े को दवाई दी और चला गया। उसके जाने के बाद बकरा घोड़े के पास गया और बोला – दोस्त, हिम्मत करो, नहीं तो यह तुम्हें मार देंगे। दूसरे दिन डॉक्टर फिर आया और दवाई देकर चला गया। बकरा फिर घोड़े के पास आया और बोला, दोस्त, तुम्हें उठना ही होगा। हिम्मत करो, करो नहीं तो तुम मारे जाओगे। मै तुम्हारी मदद करता हूँ।

चलो उठाे। तीसरे दिन जब डॉक्टर आया तो किसान से बोला, मुझे अफसोश है की हमे इसे मारना पड़ेगा क्योकि कोई भी सुधार नज़र नही आ रहा। जब वो वहां से गए तो – बकरा घोड़े के पास फिर आया और बोला, देखो दोस्त, “करो या मरो” वाली स्थिति बन गई है। अगर तुम आज भी नहीं उठे ताे कल तुम मर जाओगें। इसलिए हिम्मत करो। हाँ, बहुत अच्छे। थोड़ा और, तुम कर सकते हो। शाबाश , अब भाग कर देखो, तेज और तेज।

इतने में किसान वापस आया तो उसने देखा कि उसका घोड़ा भाग रहा है। वो ख़ुशी से झूम उठा और सब घर वालो को इकट्ठा करके चिल्लाने लगा, चमत्कार हो गया, मेरा घोड़ा ठीक हो गया। हमे जश्न मनाना चाहिए …। हिम्मत रखे जीने की। अगर हम हिम्मत का एक कदम आगे बढ़ाएंगे, तो हमारी जिंदगी बच जाएगी। तभी तो ऊपर वाला कहता है कि तुम हिम्मत का एक कदम आगे बढ़ाओ तो मैं हजार कदम आगे बढ़ाऊंगा। हम सिर्फ आई हुई परिस्थितियों के प्रभाव रुपी चश्मे से ही देखते हैं। देखना तो ये चाहिए कि अपनी क्षमता को पूर्ण रूप से क्रियान्वित कर रहे हैं या नहीं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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सच्ची मानवता – संवेदनशीलता।

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ϒ सच्ची मानवता – संवेदनशीलता ϒ

kmsraj51-true-humanity

प्यारे दोस्तों – एक Postman ने घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा, “चिट्ठी ले लिजिये”। अंदर से एक बालिका की आवाज़ आई, “आ रही हूँ”। लेकिन तीन से चार मिनट तक काेई न आया ताे Postman ने फिर कहा, “अरे भाई! घर में काेई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लाे”। लड़की की फिर आवाज़ आई, “Postman साहब, दरवाजे के नीचे से चिट्ठी अंदर डाल दीजिए, मैं आ रही हूँ”। “नहीं, मैं खड़ा हूँ, रजिस्टर्ड पत्र है, पावती पर तुम्हारे signature चाहिए”।

करीबन छह से सात मिनट के बाद दरवाज़ा खुला। Postman इस देरी के लिए झल्लाया हुआ ताे था ही और उस पर चिल्लाने वाला था लेकिन, दरवाज़ा खुलते ही वह चाैंक गया। एक अपाहिज कन्या जिसके पांव नहीं थे, सामने खड़ी थी

Postman चुपचाप पत्र देकर और उसके signature लेकर चला गया। सप्ताह – दो सप्ताह में जब कभी उस लड़की के लिए डाक आती, Postman एक आवाज़ देता और जब तक वह कन्या न आती तब तक खड़ा रहता। एक दिन लड़की ने Postman काे नंगे पांव देखा।
दिपावली नज़दीक आ रही थी। उसने सोचा Postman काे क्या उपहार दूँ।

एक दिन जब Postman डाक देकर चला गया, तब उस लड़की ने जहाँ मिट्टी में Postman के पांव के निशान बने थे, उस पर काग़ज रखकर उन पांवाे का चित्र उतार लिया। अगले दिन उसने अपने यहाँ काम करने वाली बाईं से उस नाप के जूते मंगवा लिये।

दिपावली आई और उसके अगले दिन Postman ने गली के सब लाेगाें से ताे उपहार माँगा और साेचा कि अब इस बिटिया से क्या उपहार लेना? पर गली में आया हूँ ताे उससे मिल ही लूँ। उसने दरवाज़ा खटखटाया। अंदर से आवाज़ आई, “काैन ?” Postman उत्तर मिला। कन्या हाथ में एक Gift पैक लेकर आई और कहा, “अंकल, मेरी तरफ से दिपावली पर आपकाे भेंट है। “Postman ने कहा” तुम मेरे लिए बेटी के समान हाे, तुमसे मैं उपहार कैसे लूँ?” कन्या ने आग्रह किया कि मेरी इस उपहार के लिए मना न करें।

ठिक है कहते हुए Postman ने पैकेट ले लिया। कन्या न कहा, “अंकल इस पैकेट काे घर ले जाकर खाेलना। घर जाकर जब उसने पैकेट खाेला ताे विस्मित रह गया, क्योंकि उसमें एक जाेड़ी जूते थे। उसकी आँखे भर आई। अगले दिन वह Office पहुंचा और Postmaster से फरियाद की कि उसका तबादला फाैरन कर दिया जाए। Postmaster ने कारण पूछा, ताे Postman ने वे जूते टेबल पर रखते हुए सारी कहानी सुनाई और भीगी आँखाें और रूंधे कंठ से कहा, “आज के बाद मैं उस गली में नहीं जा सकूंगा। उस अपाहिज बच्ची ने मेरे नंगे पाँवाें काे ताे जूते दे दिये पर मैं उसे पाँव कैसे दे पाऊंगा ?”

सीख : संवेदनशीलता का यह श्रेष्ठ दृष्टांत है। संवेदनशीलता यानि, दूसराें के दुःख दर्द काे समझना, अनुभव करना और उसके दुःख-दर्द में भागीदारी करना, उसमें शरीक हाेना। एक ऐसा मानवीय गुण है जिसके बिना इंसान अधूरा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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दयालु लकड़हारा।

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ϒ दयालु लकड़हारा। ϒ

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प्यारे दोस्तो – बहुत समय पहले किशनपुर गाँव में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह दूसराे की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता। जीवाें के प्रति उसके मन में बहुत दया थी। एक दिन वह जंगल से लकड़ी इकट्ठी करने के बाद थक गया ताे थाेड़ी देर सुस्ताने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गया। तभी उसे सामने के पेड़ से पक्षियों के बच्चाें के ज़ाेर-ज़ाेर से चीं-चीं करने की आवाज़ सुनाई दी।

उसने सामने देखा ताे डर गया। एक सांप घाेसले में बैठे चिड़िया के बच्चाें की तरफ बढ़ रहा था। बच्चे उसी के डर से चिल्ला रहे थे। रामू उन्हें बचाने के लिए पेड़ पर चढ़ने लगा। सांप लकड़हारे के डर से नीचे उतरने लगा। उसी दाैरान चिड़िया भी लाैट आई। उसने जब रामू काे पेड़ पर देखा ताे समझा कि उसने बच्चाें काे मार दिया।

वह रामू काे चाेच मार-मारकर चिल्लाने लगी। उसकी आवाज़ से और चिड़िया भी आ गईं। सभी ने रामू पर हमला कर दिया। बेचारा रामू किसी तरह पेड़ से नीचे उतरा। चिड़िया जब घाेसले में गई ताे उसके बच्चे सुरक्षित बैठे थे। बच्चाें ने चिड़िया काे सारी बात बताई ताे उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।

वह रामू से माफी मांगना चाहती थी और उसका शुक्रिया अदा करना चाहती थी। उसे कुछ दिन पहले दाना ढूंढ़ते हुए एक कीमती हीरा मिला था। उसने हीरे काे अपने घाेसले में लाकर रख लिया था। चिड़िया ने वह हीरा रामू के आगे डाल दिया और एक डाली पर बैठकर अपनी भाषा में धन्यवाद करने लगी। रामू ने हीरा उठा लिया और चिड़िया की तरफ हाथ उठाकर उसका धन्यवाद किया और वहां से चल दिया। तभी कई चिड़िया आईं और उसके ऊपर उड़कर साथ चलने लगीं मानाे वे उसका आभार करते हुए विदा करने आई हाें।

सीख – किसी भी जीव पर किये गये उपकार का फल सदैव ही सकारात्मक नतीजे के रूप में return मिलता हैं।

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सच्ची गुरु दक्षिणा।

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ϒ सच्ची गुरु दक्षिणा। ϒ

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प्यारे दोस्तों – एक ऋषि के पास एक युवक ज्ञान प्राप्ती के लिए गया। ज्ञान प्राप्ती के बाद शिष्य ने गुरु दक्षिणा देने का आग्रह किया। इस पर गुरु जी ने युवक से कहा कि वह दक्षिणा में उन्हें वह चीज़ दे जाे बिल्कुल व्यर्थ है। शिष्य आज्ञा लेकर व्यर्थ चीज की खाेज में निकल पड़ा। रास्ते में उसे मिट्टी दिखी ताे उसे उससे ज्यादा व्यर्थ कुछ नहीं लगा। उसने मिट्टी की ओर हाथ बढ़ाया ताे मिट्टी बाेल पड़ी; “तुम मुझे व्यर्थ समझ रहे हाे! तुम्हें पता नहीं है कि इस दुनिया का सारा वैभव मेरे ही गर्भ से प्रकट हाेता है। ये विविध वनस्पतियाँ, ये रूप, रस और गंध कहाँ से आते हैं?”

शिष्य आगे बढ़ गया, थाेड़ी दूर पर उसे एक पत्थर मिला। शिष्य ने साेचा, इसे ही ले चलूँ। जैसे ही उसने उसे उठाने के लिए हाथ बढ़ाया, ताे पत्थर बाेला, तुम इतने ज्ञानी हाेकर भी मुझे बेकार मान रहे हाे! तुम अपने भवन और अट्टालिकाएं किससे बनाते हाे? तुम्हारे मंदिराें में किसे गढ़कर देव प्रतिमाएँ स्थापित की जाती हैं? मेरे इतने उपयाेग के बाद भी तुम मुझे व्यर्थ मान रहे हाे। यह सुनकर शिष्य निरूत्तर हाे गया और वहाँ से भी चल दिया। इसके बाद कई और ऐसी चीज़ें उसने गुरु जी के लिए लेनी चाही लेकिन उसे हर जगह काम की चीज़ें ही नज़र आई। उसने साेचा कि जब मिट्टी और पत्थर इतने उपयागी हैं ताे आखिर व्यर्थ क्या हाे सकता है? उसके मन से आवाज़ आई कि सृष्टि का हर पदार्थ अपने आप में उपयाेगी है।

वस्तुतः “व्यर्थ व तुच्छ वह है, जाे दूसराें काे व्यर्थ और तुच्छ समझता है। व्यक्ति के भीतर का अहंकार ही एक ऐसा तत्त्व है, जिसका कहीं काेई उपयाेग नहीं।”

वह गुरु के पास वापस लाैट आया और उनके पैराें में गिर पड़ा। वह गुरु दक्षिणा में अपना अहंकार देने आया था। गुरु जी प्रसन्न हुये कि – आज से तुम ज्ञान में संपूर्ण हुए, अब तुम लाेगाें काे ज्ञान-ध्यान व दिक्षा देने के योग्य हाे गये हाे।

याद रखें – अहंकार से ज्यादा बेकार और कुछ नहीं है, इस संसार में। अगर कुछ त्यागना ही है तो अहंकार का त्याग करें। आप कितने ही बड़े ज्ञानी क्यों न हाे, अगर अहंकार का त्याग नहीं किया ताे आपकी गिनती बुद्धिहीनाें मेें हाेगी। अहंकार काे त्याग कर ही आप सर्वश्रेष्ठ आसन पर आसिन हाे सकते है, अहंकार काे त्याग कर ही आप सभी के दिलाें काे जीत सकते हैं।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

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KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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मिलियन डॉलर की पेंटिंग।

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ϒ मिलियन डॉलर की पेंटिंग। ϒ

kmsraj51-christies-pablo-picassos-1955-painting

प्यारे दोस्तों – पिकासो स्पेन में जन्में एक बहुत मशहूर चित्रकार थे। उनकी पेंटिंग दुनिया भर में कराेड़ाें- अरबाें रुपये में बिका करती थी। एक दिन रास्ते से गुज़रते समय एक महिला की नज़र पिकासो पर पड़ी और संयाेग से उस महिला ने उन्हें पहचान लिया। वह दाैड़ी हुई उसके पास आयी और बाेली- सर मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूँ। आपकी पेंटिंग्स मुझे बहुत ज्यादा पसंद हैं। क्या आप मेरे लिए भी एक पेंटिंग बना देंगे।

पिकासो हँसते हुए बाेले- मैं यहाँ खाली हाथ हूँ, मेरे पास कुछ नहीं है, मैं फिर कभी आपके लिए पेंटिंग बना दूंगा। लेकिन उस महिला ने जिद पकड़ ली कि मुझे अभी एक पेंटिंग बना के दाे, बाद में पता नहीं आपसे मिल पाऊंगी या नहीं। पिकासो ने जेब से एक कागज़ निकाला और अपने पेन से उसपे कुछ बनाने लगे। करीब दस सेकंड के अंदर पिकासो ने पेंटिंग बनायी और कहा, ये मिलियन डॉलर की पेंटिंग है! उस महिला काे बड़ा अजीब लगा कि बस दस सेकंड में जल्दी से एक काम चलाऊ पेंटिंग बना दी और बाेल रहे हैं कि मिलियन डॉलर की पेंटिंग है। उस महिला ने वाे पेंटिंग ली और बिना कुछ बाेले अपने घर आ गयी। उसकाे लगा कि पिकासो उसकाे पागल बना रहें है, इसलिए वाे बाज़ार गयी और उस पेंटिंग की कीमत पता की। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि वास्तव में वाे पेंटिंग मिलियन डॉलर की थी।

Link : Picasso painting sells for a record $179 million

वाे दाैड़ी-दाैड़ी फिर एक बार पिकासो के पास गयी और बाेली- सर आपने बिल्कुल सही कहा था, ये ताे मिलियन डॉलर की ही पेंटिंग है। पिकासो ने हँसते हुए कहा कि मैंने ताे पहले ही कहा था। वाे महिला बाेली- सर आप मुझे अपनी स्टूडेंट बना लीजिये और मुझे भी पेंटिंग बनाना सीखा दीजिये। जैसे आपने दस सेकंड में मिलियन डॉलर की पेंटिंग बना दी वैसे मैं भी दस सेकंड में ना सही दस मिनट में ही अच्छी पेंटिंग बना सकूँ मुझे ऐसा बना दीजिये। पिकासो ने हँसते हुए कहा- ये जाे मैंने दस सेकंड में यह पेंटिंग बनायी है, इसे सीखने में मुझे करीब तीस साल का समय लगा। मैंने अपने जीवन के तीस साल सीखने में दिए। तुम भी दाे ताे ज़रूर सीख जाओगी। वाे महिला अवाक निःशब्द पिकासो काे देखती रह गयी।

याद रखें- दोस्तों, जब हम दूसराें काे सफल हाेता देखते हैं ताे हमें ये सब बड़ा आसान लगता है। हमें लगता है कि ये इंसान ताे बड़ी आसानी से सफल हाे गया। लेकिन मेरे दोस्तों, उस एक सफलता के पीछे ना जाने कितने सालाें की मेहनत छिपी हुई हाेती है, ये काेई नहीं देख पाता। सफलता ताे बड़ी आसानी से मिल जाती है, लेकिन सफलता की तैयारी में अपना जीवन कुर्बान करना हाेता है। जाे लाेग खुद काे तपाकर, संघर्ष करके अनुभव हासिल करते हैं वाे कामयाब ज़रूर हाेते हैं, लेकिन दूसराें काे देखने में लगता है कि ये कितनी आसानी से सफल हाे गया। मेरे दोस्तों, परीक्षा ताे केवल तीन घंटे की हाेती है, लेकिन उस तीन घंटे के लिए पूरे साल तैयारी करनी पड़ती है। ताे फिर आप राताें-रात सफल हाेने का सपना कैसे देख सखते हाे? सफल अनुभव और संघर्ष मांगती है और अगर आप देने काे तैयार हैं ताे आपकाे आगे जाने अर्थात सफल हाेने से काेई नहीं राेक सकता।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

समय और धैर्य।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ समय और धैर्य। ϒ

timeclock-kmsraj51

प्यारे दोस्तों – एक साधु था, वह राेज़ घाट के किनारे बैठकर चिल्लाया करता था, जाे “चाहाेगे साे पाओगे”, “चाहाेगे साे पाओगे”। बहुत से लाेग वहाँ से गुज़रते थे पर काेई भी उसकी बात पर ध्यान नहीं देता था, और सब उसे एक पागल आदमी समझते थे। एक दिन एक युवक वहाँ से गुज़रा और उसने साधु की आवाज़ सुनी, “चाहाेगे साे पाओगे”, “चाहाेगे साे पाओगे”। ये आवाज़ सुनते ही वह युवक उनके पास चला गया। उसने साधु से पूछा- “महाराज! आप बाेल रहे थे कि “चाहाेगे साे पाओगे”, ताे क्या आप मुझकाे वाे दे सकते हाे जाे मैं चाहता हूँ?

साधु उसकी बात काे सुनकर बाेले- “हा बेटा! तुम जाे कुछ भी चाहते हाे मैं उसे ज़रूर दूँगा, बस तुम्हें मेरी बात माननी हाेगी। लेकिन पहले ये ताे बताओ कि तुम्हें आखिर चाहिए क्या”? युवक बाेला – “मेरी एक ही ख्वाहिश है कि मैं हीराें का बहुत बड़ा व्यापारी बनना चाहता हूँ”। साधु बाेले – “काेई बात नहीं”, मैं तुम्हें एक हीरा और एक माेती दे देता हूँ, उससे तुम जितने भी हीरे-माेती बनाना चाहाेगे बना पाओगे! ऐसा कहते हुए साधु ने अपना हाथ उस युवक की हथेली पर रखते हुए कहा- `पुत्र! मैं तुम्हें दुनिया का सबसे अनमाेल हीरा दे रहा हूँ, लाेग इसे समय कहते हैं, इसे तेज़ी से अपनी मुट्ठी में पकड़ लाे और इसे कभी मत गंवाना, तुम इससे जितने चाहाे हीरे बना सकते हाे।

युवक अभी कुछ साेच ही रहा था कि साधु उसकी दूसरी हथेली पकड़ते हुए बाेले- “पुत्र, इसे पकड़ाे, यह दुनिया का सबसे कीमती मोती है, लाेग इसे धैर्य` कहते हैं, जब कभी समय देने के बावजूद परिणाम अच्छा न मिले ताे इस कीमती मोती काे धारण कर लेना, याद रखना जिसके पास यह मोती है वह दुनिया में कुछ भी प्राप्त कर सकता है।

युवक गहराई से साधु की बाताें पर विचार करता है और निश्चय करता है कि आज से मैं कभी भी अपना समय बर्बाद नहीं करूंगा व सदैव धैर्य से काम करूंगा। ऐसा सोचकर वह हीराें के एक बहुत बड़े व्यापारी के यहाँ काम शुरु करता है और अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल एक दिन खुद भी हीराें का बहुत बड़ा व्यापारी बनता है।

याद रखें- `समय और धैर्य` वह दाे हीरे-माेती हैं जिनके बल पर हम बड़े-से-बड़ा लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। अतः ज़रूरी है कि हम अपने कीमती समय काे बर्बाद न करें और अपनी मंज़िल तक पहुँचने के लिए धैर्य से काम लें।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

पानी का ग्लास।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ पानी का ग्लास। ϒ

प्यारे दोस्तों – एक बार किसी रेलवे प्लेटफ़ार्म पर जब गाड़ी रुकी ताे एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला। ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज़ दी, ऐ लड़के इधर आ। लड़का दौड़कर आया। उसने पानी का गिलास भरकर सेठ की ओर बढ़ाया ताे सेठ ने पूछा कितने पैसे में ?  लड़के ने कहा पच्चीस पैसे। सेठ ने उससे कहा कि पंद्रह पैसे में देगा क्या?

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यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया। उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे, जिन्हाेंने यह नज़ारा देखा था कि लड़का मुस्कराया पर माैन रहा। ज़रूर काेई रहस्य उसके मन में हाेगा। महात्मा जी नीचे उतरकर उस लड़के के पीछे-पीछे गए। बाेले, ऐ लड़के, ठहर ज़रा, यह ताे बता कि तू हँसा क्यों ? वह लड़का बाेला महाराज! मुझे हँसी इसलिए आई कि सेठ जी काे प्यास ताे लगी ही नहीं थी, वे ताे केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे।

महात्मा ने पूछा, लड़के तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठ जी काे प्यास लगी ही नहीं थी। लड़के ने जवाब दिया, महाराज! जिसे वाकई प्यास लगी हाे वह कभी रेट नहीं पूछता, वह ताे गिलास लेकर पहले पानी पीता है, फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं। पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है। वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में कुछ पाने की तमन्ना हाेती है, वे वाद विवाद में नहीं पड़ते।

सीख – जिनकी प्यास सच्ची नहीं हाेती, वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं। वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते। अगर खुदा नहीं है ताे उसका ज़िक्र क्यों ? और अगर खुदा है ताे फिर फिक्र क्यों ?

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क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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लक्ष्यहीन कौवा।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ लक्ष्यहीन कौवा। ϒ

प्यारे दोस्तो – जीवन में लक्ष्य का हाेना ताे बहुत ज़रूरी है। बिना लक्ष्य का जीवन भेड़ चाल जीवन है, कहा जा रहे है क्यों जा रहे है कुछ भी पता नहीं।

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एक बार एक नदी में हाथी की लाश बही जा रही थी। एक काैए ने लाश देखी, ताे प्रसन्न हाे उठा, तुरंत उस पर आ बैठा। यथेष्ट मांस खाया! नदी का जल पिया। उस लाश पर इधर-उधर फुदकते हुए काैए ने परम तृप्ति की डकार ली। वह सोचने लगा, अहा! यह ताे अत्यंत सुंदर यान है, यहा भाेजन और जल की भी कमी नहीं। फिर इसे छाेड़कर अन्यत्र क्यों भटकता फिरूं ?

काैवा नदी के साथ बहने वाली उस लाश के ऊपर कई दिनाें तक रमता रहा। भूख लगने पर वह लाश काे नाेचकर खा लेता, प्यास लगने पर नदी का पानी पी लेता। अगाध जलराशि, उसका तेज प्रवाह, किनारे पर दूर-दूर तक फैले प्रकृति के मनाेहर दृश्य इन्हें देख-देखकर वह विभाेर हाेता रहा।

नदी एक दिन आखिर महासागर में मिली। वह मुदित थी कि उसे अपना गंतव्य प्राप्त हुआ। सागर से मिलना ही उसका चरम लक्ष्य था, किंतु उस दिन लक्ष्यहीन कौए की ताे बड़ी दुर्गति हाे गई। चार दिन की माैज-मस्ती ने उसे ऐसी जगह ला पटका था, जहां उसके लिए न भाेजन था, न पेयजल और न ही काेई आश्रय। सब ओर सीमाहीन अनंत खारी जल-राशि तरंगायित हाे रही थी।

काैवा थका-हारा और भूखा-प्यासा कुछ दिन तक ताे चाराें दिशाओं में पंख फटकारता रहा, अपनी छिछली और टेढ़ी-मेढ़ी उड़ानाें से झूठा राैब फैलाता रहा, किंतु महासागर का ओर-छाेर उसे कहीं नजर नहीं आया। आखिरकार थककर, दुःख से कातर हाेकर वह सागर की उन्हीं गगनचुंबी लहराें में गिर गया। एक विशाल मगरमच्छ उसे निगल गया।

सीख – शारीरिक सुख में लिप्त मनुष्याें की भी गति उसी काैए की तरह हाेती है, जाे आहार और आश्रय काे ही परम गति मानते हैं और अंत में अनंत संसार रूपी सागर में समा जाते है।

जीत किसके लिए, हार किसके लिए।
ज़िदगीभर ये तकरार किसके लिए॥

जाे भी आया है वाे जायेगा एकदिन।
फिर ये इतना अहंकार किसके लिए॥

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती हैं। ϒ

एक संत अपने शिष्य के साथ किसी अजनबी नगर में पहुंचे। रात हो चुकी थी और वे दोनों सिर छुपाने के लिए किसी आसरे की तलाश में थे।

उन्होंने एक घर का दरवाजा खटखटाया, वह एक धनिक का घर था और अंदर से परिवार का मुखिया निकलकर आया। वह संकीर्ण वृत्ति का था, उसने कहा – “मैं आपको अपने घर के अंदर तो नहीं ठहरा सकता लेकिन तलघर में हमारा स्टोर बना है। आप चाहें तो वहां रात को रुक सकते हैं, लेकिन सुबह होते ही आपको जाना होगा।”

वह संत अपने शिष्य के साथ तलघर में ठहर गए। वहां के कठोर फर्श पर वे सोने की तैयारी कर रहे थे कि तभी संत को दीवार में एक दरार नजर आई। संत उस दरार के पास पहुंचे और कुछ सोचकर उसे भरने में जुट गए।

शिष्य के कारण पूछने पर संत ने कहा-“चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती हैं।” अगली रात वे दोनों एक गरीब किसान के घर आसरा मांगने पहुंचे।

किसान और उसकी पत्नी ने प्रेमपूर्वक उनका स्वागत किया। उनके पास जो कुछ रूखा-सूखा था, वह उन्होंने उन दोनों के साथ बांटकर खाया और फिर उन्हें सोने के लिए अपना बिस्तर दे दिया। किसान और उसकी पत्नी नीचे फर्श पर सो गए।

सवेरा होने पर संत व उनके शिष्य ने देखा कि किसान और उसकी पत्नी रो रहे थे क्योंकि उनका बैल खेत में मरा पड़ा था।

यह देखकर शिष्य ने संत से कहा- ‘गुरुदेव, आपके पास तो कई सिद्धियां हैं, फिर आपने यह क्यों होने दिया?
उस धनिक के पास सब कुछ था, फिर भी आपने उसके तलघर की मरम्मत करके उसकी मदद की, जबकि इस गरीब ने कुछ ना होने के बाद भी हमें इतना सम्मान दिया फिर भी आपने उसके बैल को मरने दिया।”

संत फिर बोले-“चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती हैं।”

उन्होंने आगे कहा- ‘उस धनिक के तलघर में दरार से मैंने यह देखा कि उस दीवार के पीछे स्वर्ण का भंडार था। चूंकि उस घर का मालिक बेहद लोभी और कृपण था, इसलिए मैंने उस दरार को बंद कर दिया, ताकि स्वर्ण भंडार उसके हाथ ना लगे।

इस किसान के घर में हम इसके बिस्तर पर सोए थे। रात्रि में इस किसान की पत्नी की मौत लिखी थी और जब यमदूत उसके प्राण हरने आए तो मैंने रोक दिया। चूंकि वे खाली हाथ नहीं जा सकते थे, इसलिए मैंने उनसे किसान के बैल के प्राण ले जाने के लिए कहा।

अब तुम्हीं बताओ, मैंने सही किया या गलत।

यह सुनकर शिष्य संत के समक्ष नतमस्तक हो गया।

प्रिय दोस्तों,

ठीक इसी तरह “दुनिया हमें वैसी नहीं दिखती जैसी वह हैं, बल्कि वैसे दिखती हैं जैसे हम हैं।” अगर कुछ बदलना है ताे सबसे पहले अपने सोच, कर्म व अपने आप काे बदलें।

Jaya Kishori Ji-kmsraj51

जया शर्मा किशोरी जी।

Post inspired by जया शर्मा किशोरी जी। We are grateful to “Jaya Kishori Ji” for this inspirational Hindi Story for Kmsraj51.com readers.

जया शर्मा किशोरी जी। Facebook Page: Follow Now

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 पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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प्रभु ने मेरी लाज रख ली।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ प्रभु ने मेरी लाज रख ली। ϒ

‘संत कंवर राम’ की प्रभु भक्ति….. सिंध प्रांत में ‘कंवर राम’ नामक एक प्रसिद्ध संत हो गए हैं। वे गांव-गांव जाकर भगवद्भजन के माध्यम से भक्ति का प्रचार करते और लोगों को अध्यात्म, नैतिक गुणों तथा सांप्रदायिक सद्भाव की सीख देते। एक बार उनका मुकाम डहरकी नामक एक गांव में था।

एक दिन एक गरीब विधवा का एकमात्र शिशु ईश्वर को प्यारा हो गया और वह उसके वियोग में जोर-जोर से विलाप करने लगी। उसका शोक एक वृद्ध पुरुष से देखा न गया और उसने महिला से कहा : “बेटी, वृथा शोक न कर यहां संत कंवर राम नामक एक महात्मा पधारे हैं। उनका आज रात्रि में मंदिर में भजन-कीर्तन है, तू संत से उसके चिरायु होने का आशीर्वाद मांगना। उनकी कृपा से तुम्हारा शिशु जीवित हो सकता है, मगर इसके मृतक होने की बात उनसे छिपाए रखना।”

महिला ने सुना, तो उसके मन में आशा जागी और अपने मृत बालक को चादर में लपेटकर वह रात्रि को मंदिर पहुंच गई और शिशु को कंवर राम जी के चरणों पर रखकर कहा : “भगत साहिब मैं अपने इस नन्हे शिशु के चिरजीवन की कामना लिए आपके पास आई हूं। कृपया इसे भागवत्राम का मंत्र देकर मुझ अबला को कृतार्थ करें।”

महिला की बातों पर विश्वास करके संत जी ने शिशु को भागवत्राम का श्रवण कराया। मंत्र के समाप्त होने की देर थी कि बेजान शिशु के शरीर में जान आ गई और वह हाथ-पैर हिलाने लगा। यह चमत्कार देखते ही महिला संत जी के चरणों पर गिर पड़ी और उसने सारी बात बताकर असत्य बोलने के लिए क्षमा मांगी।

किंतु कंवर रामजी को बड़ा दुख हुआ उन्होंने महिला से कहा : “आपको ऐसा नहीं करना था, हमें प्रभु की करनी को’ होनी मानकर स्वीकार कर लेना चाहिए, इसी में हमारी भलाई है। यह तो अच्छा ही हुआ कि प्रभु ने मेरी लाज रख ली और मुझे दुविधा से बचा लिया।”

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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शिक्षा का निचोड़ क्या है?

Kmsraj51 की कलम से…..
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ϒ शिक्षा का निचोड़ क्या है? ϒ

काशी में गंगा के तट पर एक संत का आश्रम था। एक दिन उनके एक शिष्य ने पूछा “गुरुवर, शिक्षा का निचोड़ क्या है?”

संत ने मुस्करा कर कहा….. “एक दिन तुम खुद-ब-खुद जान जाओगे।” बात आई गई हो गई।

कुछ समय बाद एक रात संत ने उस शिष्य से कहा….. “वत्स, इस पुस्तक को मेरे कमरे में तख्त पर रख दो।” शिष्य पुस्तक लेकर कमरे में गया लेकिन तत्काल लौट आया। वह डर से कांप रहा था।

संत ने पूछा….. क्या हुआ? इतना डरे हुए क्यों हो?

शिष्य ने कहा… “गुरुवर, कमरे में सांप है।”

संत ने कहा….. “यह तुम्हारा भ्रम होगा। कमरे में सांप कहां से आएगा। तुम फिर जाओ और किसी मंत्र का जाप करना। सांप होगा तो भाग जाएगा।”

शिष्य दोबारा कमरे में गया। उसने मंत्र का जाप भी किया लेकिन सांप उसी स्थान पर था। वह डर कर फिर बाहर आ गया और संत से बोला… “सांप वहां से जा नहीं रहा है।”

संत ने कहा….. “इस बार दीपक लेकर जाओ। सांप होगा तो दीपक के प्रकाश से भाग जाएगा।”

शिष्य इस बार दीपक लेकर गया तो देखा कि वहां सांप नहीं है। सांप की जगह एक रस्सी लटकी हुई थी। अंधकार के कारण उसे रस्सी का वह टुकड़ा सांप नजर आ रहा था।

बाहर आकर शिष्य ने कहा “गुरुवर, वहां सांप नहीं रस्सी का टुकड़ा है। अंधेरे में मैंने उसे सांप समझ लिया था।”

संत ने कहा….. “वत्स, इसी को भ्रम कहते हैं। यह संसार गहन भ्रम जाल में जकड़ा हुआ है। ज्ञान के प्रकाश से ही इस भ्रम जाल को मिटाया जा सकता है। यही शिक्षा का निचोड है।”

दोस्तों, वास्तव में अज्ञानता के कारण हम बहुत सारे भ्रमजाल पाल लेते हैं और आंतरिक दीपक के अभाव में उसे दूर नहीं कर पाते। यह आंतरिक दीपक का प्रकाश निरंतर स्वाध्याय और ज्ञानार्जन से मिलता है। जब तक आंतरिक दीपक का प्रकाश प्रज्वलित नहीं होगा, लोग भ्रमजाल से मुक्ति नहीं पा सकते।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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आज के युवा।

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ϒ आज के युवा। ϒ

बेटा अनुज सुन ताे जरा, अनुज क्या हुआ माँ?
मेरे सिर में दर्द हाे रहा है, दवा ला दें।

इतनी रात को कहाँ दवा मिलेगी माँ ? तुम बाम लगा के सो जाओ। उखड़ी आवाज़ से अनुज ने कहा और वापस अपने कमरे में आ गया। “हाँ जानू, बोलो।” वो अपना हेडफोन कानो में डालते हुए बोला।

“क्या हुआ था?” दुसरी ओर से मीठी आवाज आई।

“अरे कुछ नहीं, माँ को सरदर्द हो रहा था, दवाई लाने के लिए बोल रही थी।”
“तो ले आते न।”

“इतनी रात को कौनसी दूकान खुली होगी? और वैसे भी माँ के ये रोज का ही हैं। तुम जो…..” इतना कहा ही थी कि मोबाइल में बीप-बीप की आवाज आ गई।

“ओह नो! लगता हैं बैलेंस ख़त्म होने वाला हैं।”
“तो अब…..”
“रुको, मैं कुछ करता हूँ।” उसने फ़ोन रखा और बाहर निकल गया।
“कहाँ जा रहे हो बेटा…..?” माँ ने पूछा।
“तुम्हारे लिए दवाई लाने माँ…..” उसने जवाब दिया।

दोस्तो, मैं यह नही कहता कि, हर कोई ऐसा है लेकिन ऐसा भी नही कि अनुज जैसो कि दुनियाँ में कोई कमी भी हो।

दोस्तो, इस घटना को आपके सामने रखने का सिर्फ़ इतना ही मक़सद हैं कि माता-पिता अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग कर हमारे लिए जो कुछ उन से बन पड़ता हैं वो करते हैं, और हम उनका ये ऋण कभी नही चुका सकते लेकिन हमारा भी ये फ़र्ज बनता हैं कि हम उनकी जरूरतो कि कभी भी अनदेखी न करे।

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क्या अच्छा है क्या बुरा।

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ϒ क्या अच्छा है क्या बुरा। ϒ

Two Friends-kmsraj51

दो मित्र रेगिस्तान में से जा रहे थे।

रास्ते में दोनों में किसी बात को लेकर तू – तू, मैं – मैं हो गई। बात इतनी बढ़ गई की एक मित्र ने दूसरे को ज़ोर का थप्पड़ जमा दिया।
जिसे थप्पड़ पड़ा वह झुका और वहां बालू पर लिख दिया, “आज मेरे मित्र ने मुझे थप्पड़ मारा।”

दोनों मित्र चलते रहे, उन्हें आगे एक पानी का तालाब दिखा, उन्होंने नहाने का निर्णय लिया। जिस मित्र को झापड़ पड़ा था, वह नहाते वक्त दलदल में फँस गया, किंतु उसके मित्र ने उसे बचा लिया।

तब उसने एक पत्थर पर लिखा, “आज मेरे प्रिय मित्र ने मेरी जान बचाई।”

जिसने उसे थप्पड़ मारा और जान बचाई, उसने पूछा, “जब मैंने तुम्हें मारा तो तुमने बालू में लिखा और जब मैंने तुम्हारी जान बचाई तो तुमने पत्थर पर लिखा, ऐसा क्यों?”

मित्र ने कहा, “जब कोई हमारा दिल दुखाये, तो हमें बालू में लिखना चाहिए क्योंकि उसको भुला देना ही अच्छा है, क्षमा रुपी वायु एवं जल शीघ्र ही उसे मिटा देगा।”

“किंतु जब कोई अच्छा करे, उपकार करे तो हमे उस अनुभव को पत्थर पर लिखना चाहिए जिससे कि कोई भी उसे मिटा न सके, वो हमें हमेशा याद रहे।”

दोस्तो – जिंदगी है तो अच्छे-बुरे अनुभव तो होते ही रहेगें, महत्वपूर्ण ये हैं कि हम क्या याद रखते हैं, और क्या भूल जाते हैं।

Image : by http://azcoloring.com/

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सच्चा सुख।

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ϒ सच्चा सुख। ϒ

एक युवक जो कि एक विश्वविद्यालय का विद्यार्थी था। एक दिन शाम के समय एक प्रोफ़ेसर साहब के साथ टहलने निकला हुआ था। यह प्रोफ़ेसर साहब सभी विद्यार्थियों के चहेते थे, और विद्यार्थी भी उनकी दयालुता के कारण उनका बहुत आदर करते थे। टहलते-टहलते वह विद्यार्थी प्रोफ़ेसर साहब के साथ काफ़ी दूर तक निकल गया और तभी उन दोनों की दृष्टि एक जोड़ी फटे हुए जूतों पर पड़ी। उन दोनों को वह जूते एक गरीब किसान के लगे जो कि पास के ही किसी खेत में मजदूरी कर रहा था और बस आने ही वाला था।

वह विद्यार्थी प्रोफ़ेसर साहब की ओर मुड़ा और बोला, “आइये इन जूतों को छुपा देते हैं,” और फिर हम लोग इन झाड़ियों के पीछे छुप जाते हैं। जब वह किसान काम करके वापस आएगा और अपने जूतों को ढूंढेगा तो उसे परेशान होकर इधर-उधर ढूंढ़ता देखने पर कितना मज़ा आएगा।

इस पर प्रोफेसर साहब बोले, मेरे प्यारे दोस्त।

हमें कभी भी किसी गरीब को दुखी करके ख़ुश नहीं होने चाहिए।

तुम तो काफ़ी अमीर हो और तुम्हें अच्छा ख़ासा जेब खर्च मिलता है। तुम एक काम करो। इन दोनों जूतों में तुम बीस-बीस रुपये डाल दो, और फ़िर हम लोग देखेंगे कि जब किसान को यह पैसा मिलेगा तो तुम्हें कैसा महसूस होता है। उस विद्यार्थी ने ठीक वैसा ही किया और फ़िर दोनों पास की एक झाड़ी के पीछे छुप गए।

जल्दी ही उस गरीब किसान का काम समाप्त हो गया और वह लौट कर वहीँ आया जहाँ उसने अपने फटे पुराने जूते उतारे थे। जैसे ही उसने एक पैर जूते में डाला, उसे लगा कि पैर में कोई कागज़ सा छू रहा है। जब उसने जूते में हाथ डालकर देखा तो एक बीस रुपये का नोट पाया। उसके चेहरे पर आश्चर्य के भाव स्पष्ट रूप से दिख रहे थे। उसने बीस रुपये के नोट को उलट पलट के देखा कि कहीं वह नकली तो नहीं था। फिर उसने चारों ओर देखा कि शायद कोई दिख जाये, किन्तु कोई दिखाई न दिया। अब उसने वह नोट अपनी जेब में रख लिया, और अपना पैर दूसरे जूते में डाला, किन्तु दूसरे में भी एक और नोट पाकर उसका आश्चर्य दुगना हो गया।

अब उसका अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना अत्यंत कठिन हो गया। वह अपने घुटनों के बल बैठ गया, और उसके दोनों हाथ अकस्मात् आकाश की और उठ गए। उसने आकाश की ओर देखा और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता और धन्यवाद के शब्द मानो बरबस ही उसके मुख से फूट निकले। वह दिल खोलकर बोला अपनी अस्वस्थ और असहाय पत्नी के बारे में जिसका अब वह इलाज करा पायेगा। वह बोला अपने भूख से बिलबिलाते बच्चों के बारे में जिनको वह आज भरपेट भोजन करवा पाएगा।

झाड़ियों के पीछे वह विद्यार्थी और प्रोफ़ेसर सब कुछ सुन रहे थे और उन दोनों की आँखों में ख़ुशी के आँसू थे। प्रोफ़ेसर ने विद्यार्थी से कहा, “अब बताओ यदि तुम उस गरीब किसान के फटे जूते छुपा देते तब तुम्हें ज़्यादा ख़ुशी मिलती या अब ज़्यादा ख़ुशी मिलती ?”

इस पर वह विद्यार्थी बोला, “आज आपने मुझे एक ऐसी शिक्षा दी है जो की मैं जीवन में कभी नहीं भूल पाउँगा। और, यह मैं यह पहले कभी नहीं समझ पाया था कि, जो सुख देने में है वह लेने में नहीं।”

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