जो जैसा दिखता है – वैसा होता नहीं सदैव।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ जो जैसा दिखता हैवैसा होता नहीं सदैव। ϒ

दो बंदर एक दिन घूमते-घूमते एक गांव के समीप पहुंच गये। उन्होंने वहाँ फलों से लदा पेड़ देखा। एक बंदर ने चिल्लाकर कहा – “इस पेड़ को देखो ! ये फल कितने सूंदर दिख रहे है। ये अवश्य ही स्वादिष्ट होंगे। चलो, हम दोनों पेड़ पर चढ़कर फल खाये।”

दूसरा बंदर बुद्धिमान था। उसने कुछ सोचकर कहा – “नहीं, नहीं। ज़रा ठहराे ! यह पेड़ गांव के समीप है और इसके फल इतने सुंदर और पके हुए है, लेकिन यदि ये फल अच्छे होते तो गांव वाले ही इन्हे तोड़ लेते, इन्हें ऐसे ही पेड़ पर नहीं लगे रहने देते। लेकिन इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि किसी ने भी इन फलों को हाथ तक नहीं लगाया है। हो सकता है कि ये फल खाने लायक न हो।”

उसकी ये बातें सुनकर पहले बंदर ने कहा – ” कैसी बेकार कि बातें कर रहे हो। मुझे तो इन फलों में कुछ बुरा नहीं दिख रहा। मैं तो इन्हें खाने जा रहा हूँ, तुम्हे साथ चलना है तो चलो।”

दूसरे बंदर ने फिर से उसे सावधान करते हुए कहा – “तुम्हे इस बारे में फिर से सोचकर निर्णय लेना चाहिए। मैं भोजन के लिए कुछ और ढूंढता हूँ।” पहला बंदर पेड़ पर चढ़कर फल खाने लगा, परन्तु वे फल ही उसका अंतिम भोजन बन गए; क्योकि वे फल ज़हरीले थे।

दूसरा बंदर जब लौटा तो उसने अपने साथी को मरा हुआ पाया। इसलिए कहा जाता है कि हर चमकने वाली चीज सोना नहीं हुआ करती। अर्थात: जो जैसा दिखता है – वैसा होता नहीं सदैव।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to become them selves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

 

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उसी को तू अर्पण कर दे।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ उसी को तू अर्पण कर दे। ϒ

जुलाई ब्लॉग्गिंग दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।

एक बार एक अजनबी किसी के घर गया। वह अंदर गया और मेहमान कक्ष में बैठ गया। वह खाली हाथ आया था तो उसने सोचा कि कुछ उपहार देना अच्छा रहेगा। तो उसने वहा टंगी एक पेंटिंग उतारी और जब घर का मालिक आया, उसने पेंटिंग देते हुए कहा, यह मैं आपके लिए लाया हूँ। घर का मालिक जिसे पता था कि यह मेरी चीज़ मुझे ही भेंट दे रहा है, सन्न रह गया।

अब आप ही बताये कि क्या वह भेंट पाकर, जो कि पहले से ही उसका हैं, उस आदमी काे खुश हाेना चाहिए? मेरे

ख्याल से नहीं….. लेकिन यही चीज़ हम भगवान के साथ भी करते हैं। हम उन्हे रूपया, पैसा चढ़ाते है और हर चीज़ जाे उनकी ही बनाई है, उन्हे भेंट करते हैं। लेकिन मन में भाव रखते है कि ये चीज़ मैं भगवान काे दे रहा हूँ, और सोचते है कि भगवान खुश हो जायेंगे।

मूर्ख हैं हम। हम यह नहीं समझते कि उनकाे इन सब चीज़ाे की जरुरत नहीं। अगर आप सच में उन्हे कुछ देना चाहते हैं ताे अपनी शृद्धा दीजिए, उन्हे अपने हर एक श्वास में याद कीजिये और विश्वास मानिये प्रभु जरूर खुश हाेगा।

अजब हैरान हूँ भगवान तुझे कैसे रिझाऊं मैं; कोई वस्तु नहीं ऐसी जिसे तुझ पर चढ़ाऊं मैं। भगवान ने जवाब दिया : संसार कि हर वस्तु तुझे मैंने दी है। तेरे पास अपनी चीज़ सिर्फ तेरा अहंकार है, जो मैंने नहीं दिया। उसी काे तू मेरे अर्पण कर दे। तेरा जीवन सफल हाे जायेगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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हिम्मत आपकी मदद उसकी।

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ϒ हिम्मत आपकी मदद उसकी। ϒ

एक बार एक किसान का घोड़ा बीमार हो गया। उसने उसके इलाज के लिए डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने घोड़े का अच्छे से मुआयना किया और बोला….. आपके घोड़े को काफी गंभीर बीमारी है। हम तीन दिन तक इसे दवाई देकर देखते हैं, अगर यह ठीक हो गया तो ठीक, नहीं तो हमे इसे मारना होगा। क्योंकि यह बीमारी दूसरे जानवरों में भी फैल सकती है।

यह सब बातें पास में खड़ा एक बकरा भी सुन रहा था। अगले दिन डॉक्टर आया, उसने घोड़े को दवाई दी और चला गया। उसके जाने के बाद बकरा घोड़े के पास गया और बोला – दोस्त, हिम्मत करो, नहीं तो यह तुम्हें मार देंगे। दूसरे दिन डॉक्टर फिर आया और दवाई देकर चला गया। बकरा फिर घोड़े के पास आया और बोला, दोस्त, तुम्हें उठना ही होगा। हिम्मत करो, करो नहीं तो तुम मारे जाओगे। मै तुम्हारी मदद करता हूँ।

चलो उठाे। तीसरे दिन जब डॉक्टर आया तो किसान से बोला, मुझे अफसोश है की हमे इसे मारना पड़ेगा क्योकि कोई भी सुधार नज़र नही आ रहा। जब वो वहां से गए तो – बकरा घोड़े के पास फिर आया और बोला, देखो दोस्त, “करो या मरो” वाली स्थिति बन गई है। अगर तुम आज भी नहीं उठे ताे कल तुम मर जाओगें। इसलिए हिम्मत करो। हाँ, बहुत अच्छे। थोड़ा और, तुम कर सकते हो। शाबाश , अब भाग कर देखो, तेज और तेज।

इतने में किसान वापस आया तो उसने देखा कि उसका घोड़ा भाग रहा है। वो ख़ुशी से झूम उठा और सब घर वालो को इकट्ठा करके चिल्लाने लगा, चमत्कार हो गया, मेरा घोड़ा ठीक हो गया। हमे जश्न मनाना चाहिए …। हिम्मत रखे जीने की। अगर हम हिम्मत का एक कदम आगे बढ़ाएंगे, तो हमारी जिंदगी बच जाएगी। तभी तो ऊपर वाला कहता है कि तुम हिम्मत का एक कदम आगे बढ़ाओ तो मैं हजार कदम आगे बढ़ाऊंगा। हम सिर्फ आई हुई परिस्थितियों के प्रभाव रुपी चश्मे से ही देखते हैं। देखना तो ये चाहिए कि अपनी क्षमता को पूर्ण रूप से क्रियान्वित कर रहे हैं या नहीं।

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क्या करें – क्या ना करें।

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* चांदी की छड़ी।

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In English

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कर्तव्य की उपेक्षा।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ कर्तव्य की उपेक्षा। ϒ

kmsraj51-dereliction-of-duty

एक सेठ के पास बहुत सारी गायें थी। उसने उनकी देखभाल के लिए दाे नाैकर रखे। कुछ दिनाें के बाद पता चला कि गायें बहुत दुबली हाे गई हैं और कुछ मर भी चुकी हैं। सेठ को इस पर बहुत गुस्सा आया। उसने इसके लिए दाेनाें नाैकराें काे जिम्मेदार ठहराया। जांच करने पर पता चला कि दाेनाें नाैकर अपने-अपने व्यसनाें में लगे रहे। एक काे जुआ खेलने की आदत थी। गायाें की देखभाल करने में उसका मन नहीं लगता था।

अक्सर वह जुआ खेलने बैठ जाता और गायाें की देखभाल नहीं हाे पाती थी। यही बात दुसरे के साथ भी थी। वह पूजा-पाठ का व्यसनी था। वह गायाे की तरफ ध्यान नहीं देता और पूजा-पाठ में लगा रहता था। सेठ दाेनाें काे राजा के पास ले गया। राजा काे उनके बारे में फैसला करना था। लाेगाें काे लगा कि राजा पूजा-पाठ करने वाले नाैकर काे क्षमा कर देगा। लेकिन राजा ने दाेनाें काे समान दंड दिया और कहा कर्तव्य की उपेक्षा अपराध है चाहे वह किसी भी कारण से किया जाए।

प्यारे दोस्तों – जब भी कभी काेई भी जिम्मेदारी वाला कार्य आपके ऊपर हाे, अर्थांत आपके ऊपर निर्भर हाे ताे सही समय पर कार्य काे प्रधानता देते हुए सही तरह से करें।

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क्या करें – क्या ना करें।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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इंसानी दिलों में प्यार बना रहे।

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ϒ इंसानी दिलों में प्यार बना रहे। ϒ

प्यारे दोस्तों –

एक बार एक लड़का अपने स्कूल की फीस भरने के लिए एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे तक कुछ सामान बेचा करता था। एक दिन उसका कोई सामान नहीं बिका और उसे बड़े जोर से भूख भी लग रही थी। उसने तय किया कि अब वह जिस भी दरवाजे पर जायेगा, उससे खाना मांग लेगा। दरवाजा खटखटाते ही एक लड़की ने दरवाजा खोला। जिसे देखकर वह घबरा गया और बजाय खाने के उसने पीने के लिए एक गिलास पानी माँगा।

making-love-in-the-human-heart-kmsraj51लड़की ने भांप लिया था कि वह भूखा है, इसलिए वह एक बड़ा गिलास दूध का ले आई, लड़के ने धीरे-धीरे दूध पी लिया। “कितने पैसे दूं?” लड़के ने पूछा,” “पैसे किस बात के? लड़की ने जवाव में कहा।” माँ ने मुझे सिखाया है कि जब भी किसी पर दया करो तो उसके पैसे नहीं लेने चाहिए। तो फिर मैं आपको दिल से धन्यबाद देता हूँ।

जैसे ही उस लड़के ने वह घर छोड़ा, उसे न केवल शारीरिक तौर पर शक्ति मिल चुकी थी बल्कि उसका भगवान और आदमी पर भरोसा और भी बढ़ गया था।

सालों बाद वह लड़की गंभीर रूप से बीमार पड़ गयी। लोकल डॉक्टर ने उसे शहर के बड़े अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया। विशेषज्ञ डॉक्टर होवार्ड केल्ली को मरीज देखने के लिए बुलाया गया। जैसे ही उसने लड़की के कस्वे का नाम सुना, उसकी आँखों में चमक आ गयी। वह एकदम सीट से उठा और उस लड़की के कमरे में गया। उसने उस लड़की को देखा, एकदम पहचान लिया और तय कर लिया कि वह उसकी जान बचाने के लिए जमीन-आसमान एक कर देगा।

उसकी मेहनत और लग्न रंग लायी और उस लड़की कि जान बच गयी। डॉक्टर ने अस्पताल के ऑफिस में जा कर उस लड़की के इलाज का बिल लिया। उस बिल के कौने में एक नोट लिखा और उसे उस लड़की के पास भिजवा दिया। लड़की बिल का लिफाफा देखकर घबरा गयी। उसे मालूम था कि बीमारी से तो वह बच गयी है, लेकिन बिल की रकम जरूर उसकी जान ले लेगी। फिर भी उसने धीरे से बिल खोला, रकम को देखा और फिर अचानक उसकी नज़र बिल के कौने में पेन से लिखे नोट पर गयी। जहाँ लिखा था “एक गिलास दूध द्वारा इस बिल का भुगतान किया जा चुका है।” नीचे डॉक्टर होवार्ड केल्ली के हस्ताक्षर थे।

ख़ुशी और अचम्भे से उस लड़की के गालों पर आंसू टपक पड़े उसने ऊपर कि ओर दोनों हाथ उठा कर कहा – “हे भगवान! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, आपका प्यार इंसानों के दिलों और हाथों द्वारा न जाने कहाँ-कहाँ फैल चुका है।

सीख – निस्वार्थ स्नेह व सच्चें प्यार का Return सदैव श्रेष्ठ(उत्तम) ही मिलता हैं। जब भी किसी कि मदद करें निस्वार्थ भाव से करें।

प्यारे दोस्तों – आपको यह सच्ची कहानी कैसी लगी, Comment`s कर जरूर बताये।

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सबसे बड़ा पुण्य।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ सबसे बड़ा पुण्य। ϒ

मानव सेवा ही प्रभु (GOD) सेवा हैं। “जो लोग निष्काम होकर संसार की सेवा करते हैं, जो लोग संसार के उपकार में अपना जीवन अर्पण करते हैं। जो लोग मुक्ति का लोभ भी त्यागकर प्रभु के निर्बल संतानो की सेवा-सहायता में अपना योगदान देते हैं उन त्यागी महापुरुषों का भजन स्वयं ईश्वर करता है।” प्यारे दोस्तों … मुझे एक सच्ची कहानी याद आ रही है, कहानी कुछ इस तरह से हैं। बहुत समय पहले कि बात है…..

the-biggest-virtue-kmsraj51

एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था। हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था। वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख, ऐशो – आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था। यहाँ तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवत-भजन, उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था।

एक सुबह राजा वन की तरफ भ्रमण करने के लिए जा रहा था कि उसे एक देव के दर्शन हुए। राजा ने देव को प्रणाम करते हुए उनका अभिनन्दन किया और देव के हाथों में एक लम्बी-चौड़ी पुस्तक देखकर उनसे पूछा…..

“महाराज, आपके हाथ में यह क्या है?”

देव बोले –  “राजन! यह हमारा बहीखाता है, जिसमे सभी भजन करने वालों के नाम हैं।”

राजा ने निराशायुक्त भाव से कहा – “कृपया देखिये तो इस किताब में कहीं मेरा नाम भी है या नहीं?”

देव महाराज किताब का एक-एक पृष्ठ उलटने लगे, परन्तु राजा का नाम कहीं भी नजर नहीं आया।

राजा ने देव को चिंतित देखकर कहा –  “महाराज ! आप चिंतित ना हों , आपके ढूंढने में कोई भी कमी नहीं है. वास्तव में ये मेरा दुर्भाग्य है कि मैं भजन-कीर्तन के लिए समय नहीं निकाल पाता, और इसीलिए मेरा नाम यहाँ नहीं है।”

उस दिन राजा के मन में आत्म-ग्लानि-सी उत्पन्न हुई लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इसे नजर-अंदाज कर दिया और पुनः परोपकार की भावना लिए दूसरों की सेवा करने में लग गए।

कुछ दिन बाद राजा फिर सुबह वन की तरफ टहलने के लिए निकले तो उन्हें वही देव महाराज के दर्शन हुए, इस बार भी उनके हाथ में एक पुस्तक थी। इस पुस्तक के रंग और आकार में बहुत भेद था, और यह पहली वाली से काफी छोटी भी थी।

राजा ने फिर उन्हें प्रणाम करते हुए पूछा – “महाराज! आज कौन सा बहीखाता आपने हाथों में लिया हुआ है?”

देव ने कहा –  “राजन! आज के बहीखाते में उन लोगों का नाम लिखा है जो ईश्वर को सबसे अधिक प्रिय हैं!”

राजा ने कहा –  “कितने भाग्यशाली होंगे वे लोग? निश्चित ही वे दिन रात भगवत-भजन में लीन रहते होंगे! क्या इस पुस्तक में कोई मेरे राज्य का भी नागरिक है?”

देव महाराज ने बहीखाता खोला, और ये क्या, पहले पन्ने पर पहला नाम राजा का ही था।

राजा ने आश्चर्यचकित होकर पूछा – “महाराज, मेरा नाम इसमें कैसे लिखा हुआ है, मैं तो मंदिर भी कभी-कभार ही जाता हूँ?

देव ने कहा – “राजन! इसमें आश्चर्य की क्या बात है? जो लोग निष्काम होकर संसार की सेवा करते हैं, जो लोग संसार के उपकार में अपना जीवन अर्पण करते हैं। जो लोग मुक्ति का लोभ भी त्यागकर प्रभु के निर्बल संतानो की सेवा-सहायता में अपना योगदान देते हैं उन त्यागी महापुरुषों का भजन स्वयं ईश्वर करता है। ऐ राजन! … तू मत पछता कि तू पूजा-पाठ नहीं करता, लोगों की सेवा कर तू असल में भगवान की ही पूजा करता है।

परोपकार और निःस्वार्थ लोकसेवा किसी भी उपासना से बढ़कर हैं।

देव ने वेदों का उदाहरण देते हुए कहा – “कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छनं समाः एवान्त्वाप नान्यतोअस्ति व कर्म लिप्यते नरे।”

अर्थात – “कर्म करते हुए सौ वर्ष जीने की ईच्छा करो तो कर्मबंधन में लिप्त हो जाओगे। राजन! भगवान दीनदयालु हैं। उन्हें खुशामद नहीं भाती बल्कि आचरण भाता है… सच्ची भक्ति तो यही है कि परोपकार करो। दीन-दुखियों का हित-साधन करो। अनाथ, विधवा, किसान व निर्धन आज अत्याचारियों से सताए जाते हैं इनकी यथाशक्ति सहायता और सेवा करो और यही परम भक्ति है।”

राजा को आज देव के माध्यम से बहुत बड़ा ज्ञान मिल चुका था और अब राजा भी समझ गया कि परोपकार से बड़ा कुछ भी नहीं और जो परोपकार करते हैं वही भगवान के सबसे प्रिय होते हैं।

प्यारे दोस्तों – जो व्यक्ति निःस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करने के लिए आगे आते हैं, परमात्मा हर समय उनके कल्याण के लिए यत्न करता है। हमारे पूर्वजों ने कहा भी है – “परोपकाराय पुण्याय भवति” अर्थात दूसरों के लिए जीना, दूसरों की सेवा को ही पूजा समझकर कर्म करना, परोपकार के लिए अपने जीवन को सार्थक बनाना ही सबसे बड़ा पुण्य है और जब आप भी ऐसा करेंगे तो स्वतः ही आप … ईश्वर के प्रिय भक्तों में शामिल हो जाएंगे।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

बहन का स्नेह मिलना खुशनसीबी है।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ बहन का स्नेह मिलना खुशनसीबी है। ϒ

एक छोटा-सा पहाड़ी गांव था। वहां एक किसान, उसकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी रहते थे। एक दिन बेटी की इच्छा स्कार्फ खरीदने की हुई और उसने पिताजी की जेब से 10 रुपए चुरा लिए।

पिताजी को पता चला तो उन्होंने सख्ती से दोनों बच्चों से पूछा – पैसे किसने चुराए ?
अगर तुम लोगों ने सच नहीं बताया तो सजा दोनों को मिलेगी। बेटी डर गई, बेटे को लगा कि दोनों को सजा मिलेगी तो सही नहीं होगा।

वह बोला – पिताजी, मैंने चुराए, पिताजी ने उसकी पिटाई की और आगे से चोरी न करने की हिदायत भी दी। भाई ने बहन के लिए चुपचाप मार खा ली। वक्त बीतता गया। दोनों बच्चे बड़े हो गए।

एक दिन मां ने खुश होकर कहा – दोनों बच्चों के रिजल्ट अच्छे आए हैं। पिताजी (दुखी होकर) – पर मैं तो किसी एक की पढ़ाई का ही खर्च उठा सकता हूं।

बेटे ने फौरन कहा – पिताजी, मैं आगे पढ़ना नहीं चाहता।
बेटी बोली – लड़कों को आगे जाकर घर की जिम्मेदारी उठानी होती है, इसलिए तुम पढ़ाई जारी रखो। मैं कॉलेज छोड़ दूंगी। अगले दिन सुबह जब किसान की आंख खुली तो घर में एक चिट्ठी मिली।

उसमें लिखा था – मैं घर छोड़कर जा रहा हूं। कुछ काम कर लूंगा और आपको पैसे भेजता रहूंगा। मेरी बहन की पढ़ाई जारी रहनी चाहिए। एक दिन बहन हॉस्टल के कमरे में पढ़ाई कर रही थी।

तभी गेटकीपर ने आकर कहा – आपके गांव से कोई मिलने आया है। बहन नीचे आई तो फटे-पुराने और मैले कपड़ों में भी अपने भाई को फौरन पहचान लिया और उससे लिपट गई।

बहन – तुमने बताया क्यों नहीं कि मेरे भाई हो – भाई।

मेरे – ऐसे कपड़े देखकर तुम्हारे सहेलियाें में बेइज्जती होगी। मैं तो तुम्हें बस एक नजर देखने आया हूं।
भाई चला गया – बहन देखती रही।

बहन की शादी शहर में एक पढ़े – लिखे लड़के से हो गई। बहन का पति कंपनी में डायरेक्टर बन गया। उसने भाई को मैनेजर का काम ऑफर किया, पर उसने इनकार कर दिया।

बहन ने नाराज होकर वजह पूछी तो भाई बोला – मैं कम पढ़ा-लिखा होकर भी मैनेजर बनता तो तुम्हारे पति के बारे में कैसी-कैसी बातें उड़तीं, मुझे अच्छा नहीं लगता।

भाई की शादी गांव की एक लड़की से हो गई। इस मौके पर किसी ने पूछा कि उसे सबसे ज्यादा प्यार किससे है ?

वह बोला – अपनी बहन से, क्योंकि जब हम प्राइमरी स्कूल में थे तो हमें पढ़ने दो किमी दूर पैदल जाना पड़ता था। एक बार ठंड के दिनों में मेरा एक दस्ताना खो गया।

बहन ने अपना दे दिया – जब वह घर पहुंची तो उसका हाथ सुन्न पड़ चुका था और वह ठंड से बुरी तरह कांप रही थी। यहां तक कि उसे हाथ से खाना खाने में भी दिक्कत हो रही थी। उस दिन से मैंने ठान लिया कि अब जिंदगी भर मैं इसका ध्यान रखूंगा। बहन ने हमारी हर गलती का बचाव किया था बचपन से वो हमे मां-बाप से ज्यादा स्नेह करती है।

जीवन में कुछ मिले या ना मीले पर बहन का स्नेह मिलना खुशनसीबी है।

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