डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के महान विचार।

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ϒ डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के महान विचार। ϒ

Quote 1 : इससे पहले की सपने सच हो आपको सपने देखने होंगे।

Quote 2 : सपना वो नहीं है जो आप नींद में देखे, सपने वो है जो आपको नींद ही नहीं आने दे।

Quote 3 : इंतज़ार करने वालो को सिर्फ उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते है।

Quote 4 : एक अच्छी पुस्तक हज़ार दोस्तों के बराबर होती है, जबकि एक अच्छा दोस्त एक लाइब्रेरी (पुस्तकालय) के बराबर होता है।

Quote 5 : जीवन में कठिनाइयाँ हमे बर्बाद करने नहीं आती है, बल्कि यह हमारी छुपी हुई सामर्थ्य और शक्तियों को बाहर निकलने में हमारी मदद करती है, कठिनाइयों को यह जान लेने दो की आप उससे भी ज्यादा कठिन हो।

Quote 6 : आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत, असफलता नामक बिमारी को मारने के लिए सबसे बढ़िया दवाई है। ये आपको एक सफल     व्यक्ति बनाती है।

Quote 7 : देश का सबसे अच्छा दिमाग, क्लास रूम की आखरी बेंचो पर मिल सकता है।

Quote 8 : आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते पर आप अपनी आदते बदल सकते है और निश्चित रूप से आपकी आदते आपका फ्यूचर   बदल देगी।

Quote 9 : अपने जॉब से प्यार करो पर अपनी कम्पनी से प्यार मत करो, क्योकि आप नहीं जानते की कब आपकी कम्पनी आपको प्यार   करना बंद कर दे।

Quote 10 : अपनी पहली सफलता के बाद विश्राम मत करो, क्योकि अगर आप दूसरी बार में असफल हो गए तो बहुत से होंठ यह कहने के इंतज़ार में होंगे की आपकी पहली सफलता केवल एक तुक्का थी।

Quote 11 : किसकी को हराना बहुत आसान है लेकिन किसी को जितना बहुत मुश्किल है।

Quote 12 : यदि आप अपनी ड्यूटी को सैल्यूट करोगे तो आपको किसी भी व्यक्ति को सैल्यूट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी लेकिन यदि आप अपनी ड्यूटी को पोल्यूट करेंगे तो आपको हर किसी को सैल्यूट करना पडेगा।

Quote 13 : महान सपने देखने वालो के महान सपने हमेशा पुरे होते है।

Quote 14 : जब हमारे सिग्नेचर (हस्ताक्षर), ऑटोग्राफ में बदल जाए तो यह सफलता की निशानी है।

Quote 15 : सफलता की कहानियां मत पढ़ो उससे आपको केवल एक सन्देश मिलेगा। असफलता की कहानियां पढ़ो उससे आपको सफल होने के कुछ आइडियाज (विचार) मिलेंगे।

Quote 16 : ब्लैक कलर भावनात्मक रूप से बुरा होता है लेकिन हर ब्लैक बोर्ड विधार्थियों की जिंदगी ब्राइट बनाता है।

Quote 17 : शिखर पर पहुँचने के लिए सामर्थ्य चाहिए। फिर वो चाहे माउंट एवेरेस्ट का शिखर हो या आपके केरियर का।

Quote 18 : मैं एक हैंडसम इंसान नहीं हूँ लेकिन मैं अपना हैंड उस किसी भी व्यक्ति को दे सकता हूँ जिसको की मदद की जरूरत है। सुंदरता हृदय में होती है, चेहरे में नहीं।

Quote 19 : नकली सुख की बजाय ठोस उपलब्धियों के पीछे समर्पित रहिये।

Quote 20 : अपने मिशन में कामयाब होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा।

Quote 21 : एक मुर्ख जीनियस बन सकता है यदि वो समझता है की वो मुर्ख है लेकिन एक जीनियस मुर्ख बन सकता है यदि वो समझता है की वो जीनियस है।

Quote 22 : बारिश की दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते है लेकिन बाज़ बादलों के ऊपर उडकर बारिश को ही अवॉयड कर देते है।       समस्याए कॉमन है, लेकिन आपका एटीट्यूड इनमे डिफरेंस पैदा करता है।

Quote 23 : कभी कभी कक्षा से बंक मारकर दोस्तों के साथ मस्ती करना अच्छा होता है, क्योंकि आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ तो ये   सिर्फ हंसाता ही नहीं है, बल्कि अच्छी यादे भी देता है।

Quote 24 : प्रशन पूछना, विधार्थियों की सभी प्रमुख विशेषताओ में से एक है। इसलिए छात्रों सवाल पूछों।

Quote 25 : मेरे लिए नकारात्मक अनुभव जैसी कोई चीज़ नहीं है।

Biography of Dr. A. P. J. Abdul Kalam(डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की जीवनी।)

Quote 26 : जिंदगी और समय, विशव के दो सबसे बड़े अध्यापक है। ज़िंदगी हमे समय का सही उपयोग करना सिखाती है जबकि समय     हमे ज़िंदगी की उपयोगिता बताता है।

Quote 27 : जब हम दैनिक समस्याओ से घिरे रहते है तो हम उन अच्छी चीज़ों को भूल जाते है जो की हम में है।

Quote 28 : इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है, क्योकि सफलता का आनंद उठाने के लिए ये जरूरी है।

Quote 29 : मैं हमेशा इस बात को स्वीकार करने के लिए तैयार था कि मैं कुछ चीजें नहीं बदल सकता।

Quote 30 : जो लोग आधे अधूरे मन से कोई काम करते है उन्हें आधी अधूरी, खोकली सफलता मिलती है जो चारो और कड़वाहट भर देती है।

Quote 31 : हमे प्रयत्न करना नहीं छोड़ना चाहिए और समस्याओ से नहीं हारना चाहिए।

Quote 32 : मेरा यह सन्देश विशेष रूप से युवाओ के लिए है। उनमे अलग सोच रखने का साहस, नए रास्तो पर चलने का साहस,               आविष्कार करने का साहस होना चाहिए। उन्हें समस्याओ से लड़ना और उनसे जीतना आना चाहिए। ये सभी महान गुण है और युवाओ को इन गुणों को अपनाना चाहिए।

Quote 33 : हर सुबह पांच बाते अपने आप से बोलो –

1. मैं सबसे अच्छा हूँ।
2. मैं यह कर सकता हूँ।
3. भगवान हमेशा मेरे साथ है।
4. मैं एक विजेता हूँ।
5. आज का दिन मेरा दिन है।

Quote 34 : युवाओ के लिए सन्देश –

1. ज़िंदगी में लक्ष्य तय करना।

2. ज्ञान को प्राप्त करना।

3. कठिन मेहनत करना।

4. अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहना।

Quote 35 : थ्री एक्सीलेंट आन्सवर सफलता का रहस्य क्या है ? – सही निर्णय।

                      आप सही निर्णय कैसे लेते है ? – अनुभव से।
                      आप अनुभव कैसे प्राप्त करते है ? – गलत निर्णय से।

Quote 36 : आइये हम अपने आज का बलिदान कर दें, ताकि हमारे बच्चों का कल बेहतर हो सके।

Quote 37 : कृत्रिम सुख की बजाये ठोस उपलब्धियों के पीछे समर्पित रहिये।

Quote 38 : चूँकि हम सब भगवान के पुत्र है इसलिए हम हर उस चीज़ से बड़े है जो हममे हो सकती है।

Quote 39 : यदि हम सवतंत्र नहीं है तो कोई भी हमारा आदर नहीं करेगा।

Quote 40 : अंग्रेजी आवश्यक है क्योंकि वर्तमान में विज्ञान के मूल काम अंग्रेजी में हैं। मेरा विश्वास है कि अगले दो दशक में विज्ञान के मूल काम हमारी भाषाओँ में आने शुरू हो जायेंगे, तब हम जापानियों की तरह आगे बढ़ सकेंगे।

Quote 41 : जीवन एक कठिन खेल है। आप इस जन्मसिद्ध अधिकार को केवल एक व्यक्ति बनकर ही जीत सकते है।

Quote 42 : मुझे बताइए, यहाँ का मीडिया इतना नकारात्मक क्यों है? भारत में हम अपनी अच्छाइयों, अपनी उपलब्धियों को दर्शाने में     इतना शर्मिंदा क्यों होते हैं? हम एक माहान राष्ट्र हैं। हमारे पास ढेरों सफलता की गाथाएँ हैं, लेकिन हम उन्हें नहीं स्वीकारते। क्यों?

Quote 43 : भारत में हम बस मौत, बीमारी, आतंकवाद और अपराध के बारे में पढ़ते हैं।

Quote 44 : इसका मतलब है, जो लोग उच्च और जिम्मेदार पदों पर है, अगर वे धर्म के खिलाफ जाते है, तो धर्म ही एक विध्वंसक के रूप में तब्दील हो जाएगा।

Quote 45 : हम एक राष्ट्र के रूप में विदेशी चीज़ों से लगाव क्यों कर रहे है? क्या यह हमारे औपनिवेशिक युग की एक विरासत है। हम         विदेशी टीवी सेट खरीदना चाहते है। हम विदेशी शर्ट पहनना चाहते है। हम विदेशी प्रौधोगिकी खरीदना चाहते है, सब कुछ आयात करने का यह कैसा जुनून है ?

Quote 46 : दुनिया की आबादी के लगभग आधे लोग ग्रामीण क्षेत्रों में और ज्यादातर गरीबी की हालत में रहते है। मानव विकास में इस तरह की असमानता ही दुनिया में अशांति और हिंसा के प्राथमिक कारणों में से एक है।

Quote 47 : किसी भी धर्म में किसी धर्म को बनाए रखने और बढाने के लिए दूसरों को मारना नहीं बताया गया।

Quote 48 : जब तक भारत दुनिया में अपने कदमो पर खड़ा नहीं है, तब तक हमे कोई आदर नहीं करेगा। इस दुनिया में डर के लिए कोई जगह नहीं है। केवल ताकत ही ताकत का सम्मान करती है।

Quote 49 : भारत को अपनी ही छाया चाहिए, और हमारे पास स्वयं के विकास का प्रतिरूप होना चाहिए।

Quote 50 : हमे करोडो लोगो के देश की तरह सोचना और कार्य करना चाहिए न की लाखो लोगो के देश की तरह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

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इन तीनों काे जीवन में ग्रहण कीजिए।

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ϒ इन तीनों काे जीवन में ग्रहण कीजिए। ϒ

इन तीनों को ग्रहण कीजिए।
👇 👇 👇
होशियारी, सज्जनता और सहनशीलता।

चरित्र के उत्थान एवं आत्मिक शक्तियों के उत्थान के लिए इन तीनों सद्गुणों-होशियारी, सज्जनता और सहनशीलता-का विकास अनिवार्य है।

🌼 1यदि आप अपने दैनिक जीवन और व्यवहार में निरन्तर जागरुक, सावधान रहें, छोटी छोटी बातों का ध्यान रखें, सतर्क रहें, तो आप अपने निश्चित ध्येय की प्राप्ति में निरन्तर अग्रसर हो सकते हैं। सतर्क मनुष्य कभी गलती नहीं करता, असावधान नहीं रहता। कोई उसे दबा नहीं सकता।

🌼 2सज्जनता एक ऐसा दैवी गुण है जिसका मानव समाज में सर्वत्र आदर होता है। सज्जन पुरुष वन्दनीय है। वह जीवन पर्यंत पूजनीय होता है। उसके चरित्र की सफाई, मृदुल व्यवहार, एवं पवित्रता उसे उत्तम मार्ग पर चलाती हैं।

🌼 2सहनशीलता दैवी सम्पदा में सम्मिलित है। सहन करना कोई हँसी खेल नहीं प्रत्युत बड़े साहस और वीरता का काम है केवल महान आत्माएँ ही सहनशील होकर अपने मार्ग पर निरन्तर अग्रसर हो सकती हैं।

Δ पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य जी।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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इन तीन काे जीवन में बनाये रखें।

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ϒ इन तीन काे जीवन में बनाये रखें। ϒ

इन तीन को हासिल कीजिए।
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सत्यनिष्ठा, परिश्रम और अनवरतता।

🌼 1) सत्यनिष्ठ व्यक्ति की आत्मा विशालतर बनती है। रागद्वेष हीन श्रद्धा एवं निष्पक्ष बुद्धि उसमें सदैव जागृत रहती है। वह व्यक्ति वाणी, कर्म, एवं धारणा प्रत्येक स्थान पर परमेश्वर को दृष्टि में रख कर कार्य करता है। जो वाणी, कर्तव्य रूप होने पर हमारे ज्ञान या जानकारी को सही सही प्रकट करती है और उसमें ऐसी कमीवेशी करने का यत्न नहीं करती है कि जिससे अन्यथा अभिप्राय भासित हो, वह सत्यवाणी है। विचार में जो सत्य प्रतीत हो, उसके विवेकपूर्ण आचरण का नाम ही सत्यकर्म है।

🌼 2) परिश्रम एक ऐसी पूजा है, जिसके द्वारा कर्म पथ के सब पथिक अपने पथ को, जीवन और प्राण को ऊँचा उठा सकते हैं। कार्लाइल का कथन है कि परिश्रम द्वारा कोई भी बड़े से बड़ा कार्य, उद्देश्य या योजना सफल हो सकती है।

🌼 3) अनवरतता अर्थात् लगातार अपने उद्योग में लगे रहना मनुष्य को सफलता के द्वारा पर लाकर खड़ा कर देता है। पुनःपुनः अपने कर्तव्य एवं योजनाओं को परिवर्तित करने वाला कभी सफलता लाभ नहीं कर सकता।

Δ पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य जी।

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मानव जीवन विचारों का प्रतिबिम्ब।

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ϒ मानव जीवन विचारों का प्रतिबिम्ब। ϒ

संसार एक शीशा है। इस पर हमारे विचारों की जैसी छाया पड़ेगी वैसा ही प्रतिबिम्ब दिखाई देगा। विचारों के आधार पर ही संसार सुखमय अनुभव होता है। पुरोगामी उत्कृष्ट उत्तम विचार जीवन को ऊपर उठाते हैं, उन्नति, सफलता, महानता का पथ प्रशस्त करते हैं तो हीन, निम्नगामी, कुत्सित विचार जीवन को गिराते हैं।

विचारों में अपार शक्ति है। जो सदैव कर्म की प्रेरणा देती है। वह अच्छे कार्यों में लग जाय तो अच्छे और बुरे मार्ग की ओर प्रवृत्त हो जाय तो बुरे परिणाम प्राप्त होते हैं। विचारों में एक प्रकार की चेतना शक्ति होती है। किसी भी प्रकार के विचारों में एक स्थान पर केन्द्रित होते रहने पर उनकी सूक्ष्म चेतन शक्ति घनीभूत होती जाती है। प्रत्येक विचार आत्मा और बुद्धि के संसर्ग से पैदा होता है। बुद्धि उसका आकार- प्रकार निर्धारित करती है तो आत्मा उसमें चेतना फूँकती है।। इस तरह विचार अपने आप में एक सजीव किन्तु सूक्ष्म तत्त्व है। मनुष्य के विचार एक तरह की सजीव तरंगें हैं जो जीवन संसार और यहाँ के पदार्थों को प्रेरणा देती रहती है। इन सजीव विचारों का जब केन्द्रीयकरण हो जाता है तो एक प्रचण्ड शक्ति का उद्भव होता है। स्वामी विवेकानन्द ने विचारों की इस शक्ति का उल्लेख करते हुए बताया है- ‘‘कोई व्यक्ति भले ही किसी गुफा में जाकर विचार करे और विचार करते- करते ही वह मर भी जाय तो वे विचार कुछ समय उपरान्त गुफा की दीवारों का विच्छेद कर बाहर निकल पड़ेंगे और सर्वत्र फैल जायेंगे। वे विचार तब सबको प्रभावित करेंगे।’’ मनुष्य जैसे विचार करता है, उनकी सूक्ष्म तरंगें विश्वाकाश में फैल जाती हैं। सम स्वभाव के पदार्थ एक- दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं, इस नियम के अनुसार उन विचारों के अनुकूल दूसरे विचार आकर्षित होते हैं और व्यक्ति को वैसे ही प्रेरणा देते हैं। एक ही तरह के विचार घनीभूत होते रहने पर प्रचण्ड शक्ति धारण कर लेते हैं और मनुष्य के जीवन में जादू की तरह प्रकाश डालते हैं।

🍁  पं श्रीराम शर्मा आचार्य 🍁

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इंसानियत।

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ϒ इंसानियत। ϒ

हमारे देश में बहुत से धर्म और जातियाें के लाेग रहते है। हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई, सब की अलग-अलग भाषा औरअलग-अलग लिबास है। सब के भगवान अलग-अलग है। सब अपने-अपने भगवान की पूजा करते है। कुछ लाेग इस बात काे नज़र मे रखते हुये देश मे दंगा फ़साद करवाने की काेशिश करते है। यह बात बिलकुल गलत है। वाे यह बात भूल जाते है कि सबसे बड़ा धर्म इंसानियत का है। वाे यह बात भी भूल जाते है कि सब धर्माे के ग्रन्थाें में कितनी अच्छी-अच्छी बातें लिखी हुयी है। जैसे गीता, क़ुरान, बाइबल और गुरु ग्रंथ साहिब। किसी में भी लड़ाई-झगड़े के बारे में नही लिखा हुया है। सब ग्रंथाें में आपस में मिल जुल कर रहने की ही बातें लिखी हुयी है, और सब में एक-दूसरे के साथ इंसानियत निभाने के बारे मे ही लिखा है। सब से प्यार कराे एक-दूसरे का दुँख:-सुख: बाँटाे, किसी काे अगर मदद की ज़रूरत है ताे उसकी मदद कराे। मददगार बनाे दुश्मनी मत निभायाे। काेई भी मामला हाे उसे शान्ति से मिल-जुल कर बैठकर हल कराे। हर समस्या का हल झगड़ा ही नही है। लेकिन जाे लाेग आपस में झगड़ा करवाने की काेशिश करते है, उन्हे इस बात से कुछ लेना-देना नही है,उन्हे ताे बस आपस में झगड़ा करवा कर और उसे बढ़ावा देने में ही आनन्द आता है। ऐसे लाेगाे काे भी इस बात काे समझना चाहिये, कि जिंदगी कितनी छाेटी सी है, एक दिन सबकाे रब काे अपना मुँह दिखाना है। इसलिये इस दंगा फ़साद की जगह समाज में मेल-मिलाप प्यार-शान्ति काे बढ़ावा दे। आख़िर यहाँ बेशक बहुत से धर्म और जातियाँ है। लेकिन ऊपर बैठा भगवान ताे एक ही है। आप काेई भी रास्ते से जायाे लेकिन, मंज़िल ताे एक ही है। ऊपर जाने के रास्ते बेशक अलग-अलग है, सबका मालिक एक है। सबसे बड़ा धर्म इंसानियत का है। जाे सब धर्माे से ऊपर है। जिसने इंसानियत का धर्म अपना लिया समझाे उसने भगवान काे पा लिया। हमारे समाज मे बहुत से ऐसे लाेग भी है जिन्हें, एक समय का खाना भी नसीब नही हाेता जिनके पास रहने के लिये घर भी नही है। बेचारे भीख, मांग कर अपना गुज़ारा करते है। “इसलिये जिन लाेगाे काे भगवान ने सब कुछ दिया है उन्हे, इन सबकी मदद करनी चाहिये। सबसे प्यार करना चाहिये,चाहे काेई अमीर हाे या ग़रीब, सबसे इंसानियत निभानी चाहिये। लड़ाई-झगड़े से दूर रहना चाहिये, इंसानियत से बड़ा कुछ नही, इंसानियत ही सब से बड़ा धर्म है।”

∅- विमल गांधी ∇
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी विचारों काे साझा करने के लिए।

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असीमित ऊर्जा आत्मिक-प्रेम में।

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∇ असीमित ऊर्जा आत्मिक-प्रेम में।Θ

दोस्तों,

आत्मिक-प्रेम में वह शक्ति निहित है, जिससे शत्रु भी मित्र बन जाते हैं। प्रेम ताे वैसे ढाई आखर(ढाई अक्षर) का ही हाेता हैं। लेकिन इस ढाई आखर(ढाई अक्षर) में इतनी असीमित शक्ति निहित हैं, जिससे असंभव काे भी सरलता पूर्वक संभव में परिवर्तित किया जा सके।

“प्रेम” आत्मा(Soul) के ७ माैलिक गुणाें में से एक हैं। “प्रेम” माना आत्मा और परमात्मा(ईश्वर) के बीच संबंध।

आत्मा(Soul) के ७ माैलिक गुण यह हैं…..

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand),

काेई भी मनुष्य आपके साथ कितना भी बुरा बर्ताव करें फिर भी आप “प्रेम” कि शक्ति काे ना छाेडे़, आपकी कोशिश यही हाे कि आप उसके साथ भी प्रेमपूर्ण व्यवहार हि करें। एक ना एक दिन आपका शत्रु, आपके चरणाें में हाेगा।

आत्मिक-प्रेम हमे मनुष्याें से सच्चा स्नेह करना सीखाती हैं। आत्मिक-प्रेम से मनुष्य कें अंदर शहनशीलता, दया और करुणा स्वतः ही आ जाती हैं।

आज के समय में मनुष्याें के पास पैसा(Money) ताे बहुत है, लेकिन वर्तमान समय में मनुष्याें के पास ना ताे सच्ची शांति हैं, ना हि सच्चा सुख हैं। ऐसा इसलिए क्योंकी मनुष्याें के अंदर आत्मिक-प्रेम नहीं हैं।

जब तक मनुष्याें का मनुष्याें से आत्मिक-प्रेम नहीं हाेगा तब तक सच्चा सुख और सच्ची शांति ना मिलेगी।

दोस्तों,

सभी मनुष्याें काे यह समझना हाेगा कि…..

सभी मनुष्याें काे सभी मनुष्याें से आत्मिक-प्रेम के साथ स्नेह भरा व्यवहार करना हाेगा तभी सच्चा सुख और सच्ची शांति मिलेगी।

ओम शांति!!

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

 

 

 

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साहस और आत्मविश्वास।

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT

ϒ साहस और आत्मविश्वास। ϒ

Courage & Confidence-kmsraj51

मित्रों, जीवन में कई बार परिस्थिती हमारे अनुकूल नही होती। अक्सर कुछ कठिन परिस्थितियाँ हमारे साहस और विश्वास की परिक्षा लेती रहती हैं। कई बार तो ऐसा लगता है कि, समस्याएं समुंद्र की तरह विशाल और उसकी प्रचंड लहरें सब कुछ तहस-नहस कर देंगी। ऐसी परिस्थिती पर विजय पाने के लिए हमें साहस के साथ अपने आत्मविश्वास के बल पर इससे मुकाबला करना चाहिए क्योंकि साहस और आत्मविश्वास वो शक्ति है जिससे सभी परेशानियों को दूर किया जा सकता है। ये वो आधार हैं, जिससे दृणइच्छाशक्ति को बल मिलता है। 

चर्चित मनोवैज्ञानिक लुईस एल के अनुसार, यदि व्यक्ति को कामयाबी हासिल करनी है तो, साहस के साथ आत्मविश्वास के कवच को धारण करना ही होगा। काम कोई भी हो उसमें दिक्कतें न आएं ये तो संभव नही है किन्तु परेशानियों को आत्मविश्वास के साथ पार करना संभव है। यदि हम ह्रदय में अविश्वास और विफलता का डर लाते हैं तो कभी भी सफल नही हो सकते। इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जो ये दर्शाते हैं कि, निडरता और विश्वास से सफलता की राह आसान हो जाती है। शिवाजी और रानी लक्ष्मीबाई के विश्वास भरे साहस से मुगलों और अंग्रेजों के हौसले भी परास्त हो गये थे। विलियम पिट को जब इंग्लैंड के प्रधानमंत्री पद से हटाया गया था, तब उन्होने डेवेनशायर के ड्यूक से निडरता के साथ कहा था कि, इस देश को मैं ही बचा सकता हुँ, इस कार्य को मेरे सिवाय दुसरा कोई नही कर सकता। 11 हफ्ते तक इंग्लैंड में उनके बिना काम चला लेकिन अंत में पिट को ही योग्य मानते हुए उन्हे प्रधानमंत्री बनाया गया। कोलंबस ने अपने साहस और विश्वास के बल पर अमेरीका की खोज की। घनश्याम दास बिङला की शिक्षा सिर्फ पाँचवी तक हुई थी। लेकिन उनके मन में एक सफल उद्योग करने का जज़बा था। उन दिनो जूट का व्यपार केवल अंग्रेज करते थे। अंग्रेजों ने बिङला को कर्ज देने से भी इंकार कर दिया। उन्हे मशीने भी दुगने दाम में खरीदनी पङी, फिर भी साहस और आत्मविश्वास के धनी बिङला ने सभी मुश्किलों का डटकर सामना किया, नतिजा आज सब जानते हैं। बिङला ग्रुप आज प्रतिष्ठित और संपत्तिशाली उद्योग घराना है। 

मित्रों, खुद पर अटूट विश्वास और आगे बढने का साहस ही हमें सफलता का एहसास कराता है। व्यक्ति जब स्वंय पर विश्वास करता है तो उसका आत्मबल प्रकट होता है। शक्तियाँ और क्षमताएं तो हर किसी में मौजूद होती हैं, सिर्फ उसे पहचानने की जरूरत है। अपनी क्षमताओं को जानकर ही हम बेहतर विश्व का निर्माण कर सकते हैं और ये तभी संभव है जब हम अपने विश्वास को साहस के साथ व्यवहार में लायेंगे। आत्मविश्वास भी तभी मजबूत होता है जब हम निडरता के साथ सभी बाधाओं को फेस करते हैं। दुनिया भी उसे ही याद रखती है जो साहस और आत्मविश्वास के साथ अपना रास्ता खुद बनाता है। जीवन की अनेक बाधाओं के बावजूद साहस,  दृणता और  विश्वास  के साथ लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

किसी ने सच ही कहा है, मुश्किलों से डर के भाग जाना आसान होता है। हर पहलु जिंदगी का इम्तहान होता है। डरने वालों को मिलता नही जिंदगी में कुछ, साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे बढने वालों के कदमों में जहान होता है।

Post inspired by Mrs. अनिता शर्मा जी

Educational & Inspirational VIdeos (9.8 lacs+ Views): YouTube videos Link

Blog:  http://roshansavera.blogspot.in/

E-mail ID:  voiceforblind@gmail.com

अनीता जी नेत्रहीन विद्यार्थियों के सेवार्थ काम करती हैं।

ϒ एक अपील ϒ

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful article with KMSRAJ51 Readers.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

 

 

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अपने आप को प्रेरित(Motivate) करें।

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CYMY-KMSRAJ51-N

अपने आप को प्रेरित(Motivate) करें।

प्यारे दोस्तों,

अपने आप को प्रेरित कर, जीवन कि हर एक समस्याें काे सरलता पूर्वक पार करें।

अपने आप पर पूर्ण विश्वास करें।

सर्व-प्रथम स्वयं पर विश्वास करना सीखें, जिस इंसान काे स्वयं(अपने आप) पर विश्वास नहीं हाेता, अगर पुरी दुनिया के लाेग भी मिलकर उसकी मदद(Help) करें, ताे भी वह जीवन में कभी सफल नहीं, हाे सकता। यह दुनिया आदि(Start) से लेकर अब तक विश्वास पर ही चल रहीं हैं। जब आपकाे अपने आप पर पूर्ण विश्वास हाेगा, ताे आपके प्रत्येक सोच-विचार, वाणी और कार्य में सकारात्मकता आ जायेगी। जिससे आप जीवन में सफलताआें काे सरलता पूर्वक प्राप्त कर सकते हैं।

खाली मन शैतान का घर।

“खाली मन शैतान का घर” हाेता हैं, यह कहावत बिल्कुल सही हैं। जब मन खाली(Free) हाेता है, तभी मन में शैतानी विचार आते हैं। अपने मन काे व्यस्त रखना सीखें।

“जब मन हाे व्यस्त सकारात्मक सोच में, हरदम सफलता हाे आपकी जेब में।”

मन काे हमेशा व्यस्त रखना चाहिये अच्छें सोच में। क्योंकि सकारात्मक सोच ही निर्णय मे कनवर्ट हाेकर शरीर की कर्मइंद्रियाें काे निर्देश देता हैं और कर्मइंद्रिया इन्ही निर्देशाे के अनुसार कर्म करती हैं। यही कर्म “अकर्म, सुकर्म और विकर्म,” के रूप में आंतरिक आत्मा में  Store हाेता हैं, जाे “संस्कार” कहलाता हैं।

अपने असली(Real) स्वरूप काे जाने।

सबसे बड़ा प्रश्न, “मैं कौन हूँ?”(Who am i?)। केवल इसी एक ही सवाल का सही जवाब(उत्तर) जानकर, काेई भी इंसान शांतिमय जीवन जिये। यह ताे हम-सब जानते है कि हमारे शरीर काे एक शक्ति चला रही है, जिसे हम सब आत्मा(Soul) कहते हैं। लेकिन कितनी देर तक हमे यह याद रहता है कि हम एक आत्मा हैं। जब देखाें तब यहि कहते फिरते है मैं फलाने पोस्ट पर हूँ, मुझे नही जानते मैं किसका लडका या लडकी हूँ, मैं काैन हूँ तुम नही जानते आदि-आदि।

हम अपने असली स्वरूप काे भुल गये है, जिस कारण हमे अपने निजी गुण और संस्कार भी याद नही हैं। यह भुल ही सभी दुःखाे का कारण हैं।आत्मा की तीन मुख्य शक्तिया हाेती हैं।

“प्रथम-मन, द्वितीय-बुद्धि और तृतीय-संस्कार।”

आत्मा के सात माैलिक गुण हाेते हैं।

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand),

मन कि शक्ति काे सही समय पर उपयोग करें।

मन में वह असिमित शक्ति भरी हैं, जिसका सही उपयोग कर, हर असंभव कार्य काे सरलता पूर्वक संभव में बदला जा सकता हैं। मन कि शक्तियाे काे सही समय पर और सही दिशा में उपयोग करना सीखें।

“जहा १० शब्दाें से काेई बात बन जाये, वहा पर १०० शब्द बाेलकर।
अपनी आंतरिक मानसिक और वाणी की ऊर्जा काे यू ही नष्ट ना करें॥”

जहा सहना हाे वहा सहे, जहा सामना करना हाे वहा सामना करें, जीवन के कर्मक्षेत्र पर। यह सृष्टि एक रंगमंच हैं, हम सभी इंसान पार्टधारी है, हम सभी अपना-अपना पार्ट बजा रहे हैं। एक का भी पार्ट ना मिले दुसरे से।

मन कि शक्तियाे काे संचित करना सीखें, और संचित मन कि शक्तियाे काे सकारात्मक तरीके से जीवन में उपयोग करें।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र-स्वयं से वार्तालाप(बातचीत)”

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMY-KMSRAJ51-N

In-English…..

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

In-Hindi…..

पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है.

यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

~KMSRAJ51

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In English

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥

 ~KMSRAJ51

जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।

 ~KMSRAJ51

जीवन में सदैव शांत मन से साेंच समझ़ कर हीं काेई निर्णय लें।

और जाे निर्णय एकबार लें उसका जीवन में दृढ़ता से पालन करें।

 ~KMSRAJ51

जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

 ~KMSRAJ51

मनुष्य का सारा कैरेक्टर विकारों ने बिगाड़ा है।

आत्मा रूपी पुरूष को श्रेष्ठ बनाने वाले ही सच्चे पुरूषार्थी हैं।

सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो आत्म-अभिमानी रहते हैं।

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे”

 ~KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं,

ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

~KMSRAJ51

“पहचान बनानी है तो कुछ अलग कीजिए। जब तक दूसरों से डिफरेंट और अच्छा नहीं करेंगे, तब तक आगे बढ़ना मुश्किल। डिफरेंट करने से रिस्क तो होता है पर कंपीटिशन भी तो कम रहता है।”

~KMSRAJ51

“सफलता हासिल करनी है तो शुरू से ही लक्ष्य निर्धारित कीजिए। सपना जरूर देखिए, क्योंकि इनके बिना हमें मालूम कैसे होगा कि हमारी मंजिल क्या है।”

~KMSRAJ51

“अपने कीमती समय से थोड़ा समय अपने परिवार के लिये भी निकालिये, क्योंकि शायद जब आपके पास समय होगा तब, आपके पास ये खूबसूरत सा परिवार नहीं होगा।”

~KMSRAJ51

निश्चय ही आप विजयी होंगे, यदि आप अपनी दुर्बलता (Weakness) को अपनी ताकत में तब्दील करना सीख लें।

~KMSRAJ51

 Krishna Mohan Singh(KMSRAJ51)

(तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

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कुछ अनमोल वचन हिंदी में।

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CYMT-KMSRAJ51-4

कुछ अनमोल वचन हिंदी में।

1. नजर रखो अपने ‘विचार’ पर
क्योंकि वे ”शब्द” बनते हैँ. . .

2. नज़र रखो अपने ‘शब्द’ पर
क्योंकि वे ”कार्य” बनते हैँ. . .

3. नज़र रखो अपने ‘कार्य’ पर
क्योंकि वे ”स्वभाव” बनते हैँ. . .

4. नज़र रखो अपने ‘स्वभाव’ पर
क्योंकि वे ”आदत” बनते हैँ. . .

5. नज़र रखो अपने ‘आदत’ पर
क्योंकि वे ”चरित्र” बनते हैँ. . .

6. नज़र रखो अपने ‘चरित्र’ पर
क्योंकि
इससे ”जीवन आदर्श” बनते हैँ. . .!!

cymt-kmsraj51

1. बोल सको तो मीठा बोलो,
कटु बोलना मत सीखो।

2. जला सको तो दिये जलाओ,
दिलो को जलाना मत सीखो।

3. मिटा सको तो क्रोध मिटाओ,
प्रेम मिटाना मत सीखो।

4. बिछा सको तो ‪‎फुल‬ बिछाओ,
सुल बिछाना मत सीखो।

5. लगा सको तो बाग लगाओ,
आग लगाना मत सीखो।

6. कर सको तो काम करों,
नाम करना मत सीखों।

7. कर सको दान‬ करो,
जान लेना मत सीखों।

8. सीखों तो कुछ ऐसा सीखों,
लाखों में तुम एक दिखों।

9. क्या मार सकेंगी मौत उसे,
औरों के लिये जो जीतें है।

10. मिलता हैं दुनिया का प्यार उसे
औरों के जो आंसू‬ पाेछतें हाे।

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

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KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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Swami Vivekananda-kmsraj51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

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किसी भी इंसान को बर्बाद कर सकते हैं ये तीन काम।

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CYMT-KMSRAJ51-4

श्री राम चरित मानस-KMSRAJ51

श्री राम चरित मानस।

सभी लोगों में अलग-अलग गुण-दोष होते हैं। गुण व्यक्ति को सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं, जबकि दोष (बुराइयां या गलत काम) व्यक्ति को दुख और परेशानियों का सामना करवाते हैं। श्रीरामचरित मानस में तीन ऐसे काम बताए गए हैं जो किसी भी पुरुष को बर्बाद कर सकते हैं। यहां जानिए ये तीन काम कौन-कौन से हैं और किस प्रकार पनपते हैं… इनसे किस प्रकार बचा जा सकता है…

श्रीरामचरित मानस के अयोध्या काण्ड में श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि-

तात तीनि अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ।
मुनि बिग्यान धाम मन करहिं निमिष महुँ छोभ।।
इस दोहे में श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि काम, क्रोध और लोभ- ये तीन किसी भी इंसान के लिए प्रबल शत्रु हैं। ये ही सबसे बड़ी बुराइयां हैं जो श्रेष्ठ और ज्ञान-विज्ञान के जानकार मुनियों को भी पलभर में ही बर्बाद कर सकती हैं। श्रीराम कहते हैं कि किसी भी श्रेष्ठ पुरुष के मन में काम भावना स्त्रियों को देखते ही पनप सकती है। कामदेव को सिर्फ स्त्रियों का ही बल प्राप्त है।
जानिए कैसे पनपती हैं ये तीन बुराइयां
श्रीराम लक्षण से कहते हैं कि-
लोभ कें इच्छा दंभ बल काम कें केवल नारि।
क्रोध कें परुष बचन बल मुनिबर कहहिं बिचारि।।
इस दोहे में श्रीराम ने बताया है कि लोभ यानी लालच, इच्छाओं और घमंड के कारण पनपता है। किसी भी पुरुष के मन में जब तक असीमित इच्छाएं रहती हैं, जब तक अलग-अलग सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए मन सोचता रहता है, तब तक लोभ से मुक्ति नहीं मिल सकती है। अपनी धन-संपत्ति के कारण ही व्यक्ति के मन में घमंड समा जाता है। इसी घमंड को बनाए रखने के लिए पुरुष लोभ वश और अधिक धन प्राप्त करने के लिए प्रयास करते रहता है। लोभ वश होकर व्यक्ति सही और गलत काम का भेद भी भूल जाता है। अत: इस बुराई से कोई भी पुरुष बर्बाद हो जाता है।
काम को है केवल स्त्री का बल
श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि काम वासना भी बहुत बड़ी बुराई है। इस बुराई में फंसकर बड़े-बड़े ज्ञानी-विद्वान भी नष्ट हो गए हैं। कामदेव के लिए सिर्फ स्त्री ही सबसे शक्तिशाली शस्त्र है। इसी शस्त्र से कामदेव ने कई बार ऋषि-मुनियों की तपस्या को भी खंडित किया है। इससे बुराई से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है और वह है भगवान की भक्ति में मन लगाना। जो लोग भगवान की भक्ति में मन लगा लेते हैं, वे काम वासना पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
आज के समय में इस बुराई के कारण काफी लोग परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई लोगों का जीवन बर्बाद हो चुका है। अत: किसी भी पुरुष के लिए काम भावना पर नियंत्रण रखना ही सबसे श्रेष्ठ और कल्याणकारी उपाय है।
क्रोध को कठोर वाणी का बल प्राप्त है
क्रोध को इंसान का सबसे बड़ा शत्रु माना जाता है। क्रोध के आवेश में व्यक्ति अपनी वाणी पर नियंत्रण नहीं रख पाता है और कठोर शब्दों का प्रयोग कर बैठता है। इन शब्दों से सामने वाले व्यक्ति के मन को ठेस भी पहुंचती हैं और जब क्रोध शांत होता है तो व्यक्ति स्वयं भी पछताता है। अत: क्रोध को नियंत्रित करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है वाणी से सीधे मन पर चोट लगती है और इसी कारण आपसी रिश्तों में भी तनाव उत्पन्न हो जाता है। मित्र, शत्रु बन जाते हैं।
इन बुराइयों के संबंध में शंकर जी पार्वती जी से कहते हैं कि-
क्रोध मनोज लोभ मद माया। छूटहिं सकल राम की दाया।।
सो नर इंद्रजाल नहिं भूला। जा पर होइ सो नट अनुकूला।।
शंकर जी कहते हैं कि क्रोध, काम, लोभ, मद और माया- ये सभी दोष श्रीरामजी की कृपा से दूर हो सकते हैं। श्रीराम जिन लोगों पर प्रसन्न हो जाते हैं, वे इंद्रजाल यानी माया से प्रभावित नहीं होते हैं। अत: इन बुराइयों से बचने के लिए व्यक्ति को श्रीरामजी की भक्ति में ही मन लगाए रखना चाहिए। श्रीराम की भक्ति भी सभी सुखों को देने वाली है और कल्याण करने वाली है।

लेख- श्री राम चरित मानस से

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सदा खुश रहना और खुशी बांटना-यही सबसे बड़ा शान है।

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शास्त्रों से प्रेरक प्रसंग।

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एक साधु महाराज अपने सतसंग मे श्रोताओ को शराब से दूर रहने का उपदेश देते थे।

एक दिन एक नास्तिक व्यक्ति साधू के पास गया और उनसे बोला:- ‘महोदय, एक बात बताइए।’

साधू ने प्रश्न किया:- क्या?’

नास्तिक ने पूछा:- ‘यदि मैं खजूर खाऊं, तो क्या मुझे पाप लगेगा?’

साधू ने जवाब दिया:- ‘बिल्कुल नहीं।’

नास्तिक ने अगला प्रश्न किया:-‘और यदि मैं उस खजूर के साथ थोड़ा पानी मिला लूं और तब खाऊं, तो क्या मुझे पाप लगेगा?’

साधू ने कहा:- ‘इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा।’

उस नास्तिक ने पुन: प्रश्न किया:- ‘और महोदय, यदि मैं उस खजूर में पानी के साथ-साथ थोड़ा खमीर मिलाकर खाऊं, तो क्या उससे कोई धार्मिक अवज्ञा होगी?’

साधू सारी बात समझ गए थे, किंतु फिर भी बड़े शांत स्वर में उन्होंने उत्तर दिया:-‘नहीं, बिल्कुल नहीं।’

अब नास्तिक तर्क करता हुआ बोला:-‘तो फिर
धार्मिक ग्रंथों में शराब पीना पाप क्यों बतलाया गया है, जबकि वह इन तीनों के मिलाने से ही बनती है?’

साधू ने नास्तिक के सवाल का जवाब न देते हुए उलटे उससे ही प्रश्न कर दिया:- ‘अच्छा, एक बात बताओ।
यदि मैं तुम पर मुट्ठी भर धूल फेंकूं, तो क्या तुम्हें चोट लगेगी?’

नास्तिक का जवाब था:- ‘नहीं’

साधू ने पूछा:- ‘और, यदि मैं उस धूल में थोड़ा पानी मिला लूं और तब तुम पर फेंकूं, तो क्या कोई फर्क पड़ेगा?’

प्रसन्नता से नास्तिक बोला:- ‘तो भी मुझे कोई चोट नहीं पहुंचेगी।’

साधू ने अगला प्रश्न किया:- ‘और मित्र, यदि मैं उस मिट्टी और पानी में कुछ पत्थर मिला कर तुम्हारे ऊपर फेंकूं, तो क्या अंतर होगा?’

घबराकर नास्तिक बोला:- ‘तब तो मेरा सिर ही फूट जाएगा’,

अब साधू ने शांति से कहा:- ‘मुझे विश्वास है कि अब तुम्हें अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा।’

अब नास्तिक वास्तविकता से परिचित हो चुका था।

सत्संग में तथा शास्त्रों मे हमे जो समझाया जाता है और जिन चीजो का परित्याग करने को कहा जाता है उसमे जीवात्मा का ही फायदा है।

~जया शर्मा किशोरी जी।

We are grateful to Pujya Jaya sharma Kishori Ji.

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जया शर्मा किशोरी जी।

 

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हमारा अच्छा व्यवहार ही जीवन का निर्माण करता है।

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बैलोन-विक्रेता।

हमारा अच्छा व्यवहार ही जीवन का निर्माण करता है।

एक आदमी गुब्बारे बेच कर जीवन-यापन करता था। वह गांव के आस-पास लगने वाली हाटों में जाता और गुब्बारे बेचता। बच्चों को लुभाने के लिए वह तरह-तरह के गुब्बारे रखता। और जब कभी उसे लगता कि बिक्री कम हो रही है, वह झट से एक गुब्बारा हवा में छोड़ देता। यह देखकर बच्चे खुश हो जाते और गुब्बारे खरीदने के लिए पहुंच जाते।

एक दिन वह हाट में गुब्बारे बेच रहा था और बिक्री बढ़ाने के लिए बीच-बीच में गुब्बारे उड़ा रहा था। पास ही खड़ा एक छोटा बच्चा यह सब बड़ी जिज्ञासा से देख रहा था। इस बार जैसे ही गुब्बारे वाले ने एक सफेद गुब्बारा उड़ाया वह तुरंत उसके पास पहुंचा और मासूमियत से बोला,’अगर आप यह काला वाला गुब्बारा छोड़ेंगे तो क्या वह भी ऊपर जाएगा?’

गुब्बारा वाले ने अचरज के साथ उसे देखा और बोला, ‘बिलकुल जाएगा। गुब्बारे का ऊपर जाना इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह किस रंग का है, निर्भर इस पर करता है कि उसके अंदर क्या है।’

ठीक इसी तरह हम इंसानों पर भी यह बात लागू होती है। कोई अपने जीवन में क्या हासिल करेगा, यह उसके बाहरी रंग-रूप पर निर्भर नहीं करता। बल्कि इस पर निर्भर करता है कि उसके अंदर क्या है। हमारा व्यवहार ही हमारा जीवन निर्माण करता है।

एक बूढ़े किसान को सामान ढोने के लिए गधे की जरूरत थी। वह कुम्हार के पास गधा मांगने के लिए गया। कुम्हार गधा नहीं देना चाहता था। उसने कहा- ‘गधा चरने के लिए गया है और रात को देरी से आएगा। गधा यहां होता तो मुझे देने में खुशी होती। पड़ोसी के काम पड़ोसी नहीं तो क्या परदेसी आएगा।’ दोनों के बीच बातचीत का क्रम चल ही रहा था कि बाड़े में बंधे गधे ने एक लंबा आलाप लिया। किसान ने कहा- ‘गधा तो भीतर बंधा है, तुम बहाना बनाने की बजाय सीधे मना कर देते तो मुझे बुरा नहीं लगता।’ कुम्हार ने हंसते हुए कहा- ‘तुम भी अजीब आदमी हो। तुम्हें आदमी की जबान से गधे की जबान पर ज्यादा भरोसा है।’ किसान ने सरलता से कहा- ‘झूठ बोलने वाले आदमी से पशु ज्यादा भरोसेमंद होता है।’ किसान की बात सुनकर कुम्हार बोला- ‘तुम ठीक कहते हो। अब भविष्य में मैं दैनिक जीवन व्यवहार में झूठ बोलने की बजाय सच्ची बात कहना पसंद करूंगा।’ इस तरह की व्यवहार-कुशलता का संकल्प व्यक्ति को हर दृष्टि से बहुत ऊंचा उठा देती है। अपने परिवार के निकट अथवा दूरस्थ व्यक्तियों के साथ, पड़ोसियों के साथ, अपने कर्मचारियों के साथ, सामाजिक सम्पर्कों वाले सभी व्यक्तियों के साथ आप उचित व्यवहार का निर्वाह करते हैं तो व्यवहार कुशल माने जाएंगे। अगर व्यवहार में संवेदनशीलता है, सहयोगी दृष्टिकोण है, आत्मीयता और उदारतापूर्ण व्यवहार है तो आपका व्यक्तित्व और अधिक निखरेगा।

Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/

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दूसरों के साथ अपनी तुलना करके खुद को कमतर न आंकें।

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 दूसरों के साथ अपनी तुलना करके खुद को कमतर न आंकें।

एक कुम्हार घड़ा बना रहा था। पास ही कुछ सुराहियां, दीपक, मूर्तियां और गुल्लकें बनी रखीं थीं। ये सभी आपस में बातें कर रहे थे। घड़े ने दीपकों से कहा- ‘तुम सभी कितने सुंदर हो अलग अलग आकृतियों में। एक हम हैं… सब के सब मोटे-मोटे। जरा-सा ढलक जाएं तो टूट ही जाएं।’ एक दीपक बोला-‘अरे कहां, घड़े काका। हमारा आकार तो देखो आपके आगे कितना छोटा है। किसी सामान के पीछे कब दब कर टूट जाएं, पता भी न चले। ये मूर्तियां हमसे कहीं ज्यादा सुंदर हैं। काश, हम भी मूर्ति होते।’ दीपक और घड़े की बातें सुनकर मूर्तियां भी उदास हो गईं। एक मूर्ति बोली- ‘भैया, ये आप क्या कह रहे हैं! आपको नहीं पता कि हमें इस आकार को पाने के लिए कितनी तकलीफ सहनी पड़ती है। अपने अंगों को जगह-जगह से सुडौल आकार देने की खातिर कितने कष्ट उठाने पड़ते हैं। हमें तो गुल्लक बनना पसंद था। काश, हम गुल्लक होतीं तो सब हमारे भीतर खूब सारे पैसे रखते।’ गुल्लकें काफी देर से सब की बातें सुन रहीं थीं, वे भी विचलित हो उठीं। एक गुल्लक तो बिफर ही पड़ी- ‘आप सब हमारा दर्द नहीं समझ पाएंगे। लोग हमारे भीतर अपनी सबसे प्रिय वस्तु ‘अपना पैसा’ संचित करते हैं ताकि वह इधर-उधर न पड़ा रहे और सुरक्षित रहे, लेकिन इसी पैसे की खातिर वे लोग एक दिन हमें बड़ी निर्ममता से पटक कर फोड़ देते हैं। अब आप ही बताइए, क्या आपको कोई ऐसे तोड़ता है?’

कुम्हार का चाक अपना काम करते हुए इन सभी की तकलीफें सुन रहा था। जब उसका काम पूरा हो गया तो उसने भी बातचीत शुरू कर दी। उसने घड़े को समझाया- ‘तुम बहुत ही उपयोगी हो। अपने शीतल जल से तमाम लोगों की प्यास बुझाते हो और कुछ लोग तो तुम्हारे भीतर अपना अनाज तक रख लेते हैं।’ फिर वह दीपक से बोला- ‘तुम आकार में बेशक छोटे हो, लेकिन तुमसे प्रकाश फूटता है। तुम मंदिरों में जगह पाते हो। घरों और देहरियों को जगमगाते हो।’ इसके बाद चाक ने मूर्तियों की तरफ देखा और कहा- ‘तुम्हारी शोभा इसीलिए है कि तुम इतनी तकलीफ सहती हो। इसीलिए तुम घरों, मंदिरों, ऑफिसों की शोभा बढ़ाती हो।’ आखिर में उसने गुल्लकों की और बड़े प्यार से देखते हुए कहा- ‘तुम सभी बहुत कीमती हो| तुम बच्चों की खुशी हो। तुम लोगों के बुरे वक्त में उनके काम आकर अपना जीवन सार्थक कर देती हो।’

इस तरह वह चाक उन चीजों के साथ-साथ हम इंसानों को भी ये सीख दे गया कि अपने गुणों को पहचानते हुए खुद का भी सम्मान करना चाहिए। दूसरे लोगों के साथ अपनी तुलना करके बेवजह खुद को कमतर नहीं आंकना चाहिए। अपनी-अपनी जगह पर हम सभी उपयोगी हैं। हमें अपना मोल खुद पहचानना चाहिए।

Source(स्रोत): http://navbharattimes.indiatimes.com/

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समाज के सहयोग के बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते।

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समाज के सहयोग के बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते।

अक्सर कुछ लोग शिकायत करते हैं कि हमें अपने मां-बाप से विरासत में कुछ नहीं मिला। वे खुद को सेल्फ मेड कहते और मानते हैं। यह भ्रम ही नहीं, अहंकार भी है। प्रश्न उठता है कि क्या मात्र धन-दौलत या पैसा ही वास्तविक विरासत है? कुछ लोगों को तो मां-बाप से ही नहीं, पूरे समाज से शिकायत होती है। उनका कहना है कि दुनिया ने उनके लिए कुछ नहीं किया। उनके लिए सबकी जिम्मेदारी होती है लेकिन वे खुद किसी के लिए जिम्मेदार नहीं होते। वे कभी ये सोचने की जहमत नहीं उठाते कि उन्होंने समाज के लिए क्या किया है।

यह सही है कि आपने खुद अपना विकास किया। आपने अपने समय का सदुपयोग किया, खूब मेहनत करके पढ़ाई की, लेकिन एक विद्यार्थी को भी पढ़ने-लिखने और आगे बढ़ने के लिए कापी-किताब और कलम-दवात आदि न जाने कितनी चीजों की जरूरत पड़ती है। उनके लिए वह दूसरों पर निर्भर होता है। यह ठीक है कि आपने पुरुषार्थ किया और एक अच्छी सी नौकरी पा गए या अपना एक अच्छा-सा व्यवसाय स्थापित कर लिया। यदि पुरुषार्थ नहीं करते तो आपका ही अहित होता। पुरुषार्थ करके आपने अपने लिए अच्छा किया, लेकिन क्या प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से अनेक व्यक्तियों और समाज ने आपको आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध नहीं कराए?

बड़ी-बड़ी चीजों की बात छोड़िए, छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी हम दूसरों पर निर्भर होते हैं। एक मामूली सी लगने वाली कमीज जो हमने पहन रखी है, उसे हमारे तन पर सुशोभित करने में सैकड़ों लोगों का योगदान है। खेत में बीज बोने से लेकर पौधे उगने और उनसे कपास मिलने फिर कपास से कपड़ा और कमीज बनने के बीच असंख्य हाथों का परिश्रम है। कपड़े से कमीज बनाने के लिए एक सिलाई मशीन की जरूरत पड़ती है। वह लोहे और कई दूसरे पदार्थों से बनती है। खनिकों द्वारा लोहा और अन्य खनिज पदार्थ खानों से निकाले जाते हैं। बड़े-बड़े करखानों में मजदूरों द्वारा लोहा साफ किया जाता है। फिर दूसरे बड़े-बड़े करखानों में लोहे से बड़ी-बड़ी मशीनों द्वारा छोटी मशीनें बनती हैं। उन्हीं में से एक मशीन पर कारीगर कपड़े से एक कमीज सिलकर आपको पहनाता है।

यदि कमीज में बटन न लगे हों तो कैसा लगे। एक बटन जैसी अल्प मूल्य की वस्तु भी ऐसे ही नहीं बन जाती। उसके लिए भी न जाने कितने हाथों के सहारे की जरूरत पड़ती है। एक बटन टांकने के लिए सबसे जरूरी यंत्र सुई है। इस छोटी सी चीज को भी हम स्वयं नहीं बना सकते। सच तो ये है कि हम सब एक दूसरे के सहयोग के बिना अधूरे हैं। हमारे विकास में हमारा पुरुषार्थ ही नहीं, अन्य सभी का सहयोग भी अपेक्षित है। माता-पिता, भाई-बंधु, समाज, विरोधी-प्रतिद्वंद्वी और प्रकृति के मिले जुले प्रयासों से हमारा जीवन गति पाता है।

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