प्रेरणात्मक Quotes.

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ प्रेरणात्मक Quotes ϒ

माैन क्रोध की सर्वाेतम चिकित्सा है।
जब जब क्रोध चढ़े तब – तब थाेडी देर के लिये,
माैन रख लेना चाहिये ताकि गलत
अल्फ़ाज़ मुँह से ना निकले।

क्याेकि एक भी गलत अल्फ़ाज़,
मीठे रिश्ताे काे ख़राब कर देता है।

∗∗

क्रोध से भ्रम पैदा होता है।

भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है।

जब बुद्धि व्यग्र होती है तब।

तर्क नष्ट हो जाता है।

जब तर्क नष्ट होता है तब।

व्यक्ति का पतन हो जाता है।

∗∗

गुस्सा आपकाे छाेटा बनाता है।
और क्षमा आपकाे महान बनाती है।

∗∗

माँ बाप का दिल दुँखा कर आजतक,
दुनिया में काेई भी सुखी नंही रहा है।

∗∗

समय, सम्पत्ति, सता और

शरीर साथ दे या ना दे।

लेकिन

स्वभाव, समझदारी, सत्संग,

और
सच्चे संंबंध हमेशा साथ देते है।

∗∗

दुनिया का अस्तित्व – शास्त्र बल पर नही।
सत्य दया और आत्मबल पर है॥

∗∗

रिश्ताे की रस्सी तब,
कमजाेर हाे जाती है।
जब इंसान ग़लतफ़हमी में पैदा,
हाेने वाले सवालाे के जवाब भी,,
खुद ही बना लेता है॥

∗∗

©- विमल गांधी 
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी Quotes साझा करने के लिए।

विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “विमल गांधी जी” की कविताआे के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

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मस्तिष्क में रिक्त जगह।

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT

ϒ मस्तिष्क में रिक्त जगह।~सुमित वत्स। ϒ

एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं …..

उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें, टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची।

उन्होंने छात्रों से पूछा – क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ …
आवाज आई …
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे – छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये धीरे – धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी, समा गये।

फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा, क्या अब बरनी भर गई है, छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ … कहा
अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले – हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया, वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई, अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे।
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा, क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ
….. अब तो पूरी भर गई है ….. सभी ने एक स्वर में कहा …..

सर ने टेबल के नीचे से …..
चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली, चाय भी रेत के बीच स्थित…
थोडी सी जगह में सोख ली गई …..

प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया।

इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो ….

टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान, परिवार, बच्चे, मित्र, स्वास्थ्य और शौक हैं।

छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी, कार, बडा़ मकान आदि हैं, और …..

रेत का मतलब और भी छोटी – छोटी बेकार सी बातें, मनमुटाव, झगडे़ है …..

अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती, या
कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते, रेत जरूर आ सकती थी।
ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है …..

यदि तुम छोटी – छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे।
और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय
नहीं रहेगा …..

मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है। अपने …..
बच्चों के साथ खेलो, बगीचे में पानी डालो, सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ।
घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको, मेडिकल चेक – अप करवाओ …..
टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो, वही महत्वपूर्ण है ….. पहले तय करो कि क्या जरूरी है।
….. बाकी सब तो रेत है …..
छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे।

अचानक एक ने पूछा, सर लेकिन आपने यह नहीं बताया
कि ” चाय के दो कप ” क्या हैं ?

प्रोफ़ेसर मुस्कुराये, बोले ….. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया …..
इसका उत्तर यह है कि, जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे, लेकिन…..
अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिये।

© सुमित वत्स।

Sumit Vats-kmsraj51

सुमित वत्स।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे।

Kmsraj51 की कलम से…..

KMSRAJ51-CYMT

ϒ बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे। ϒ

याद आते है वाे बचपन के दिन।
जब हम छाेटे थे ताे बडे हाेने के लिये॥

बहुत उत्साहित रहते थे।
बडे हाेने की बहुत चाहत थी॥

जब बडे हुये ताे पता चला कि।
बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे॥

माँ का प्यार पिता का दुलार।
ना रिश्ताे का झंझट ना कल की चिंता॥

ना आज की फ़िक्र, ना ही भविष्य का डर।
ना अधूरे सपनाे का दुँख, ना अधूरे एहसास, का॥

पीछे मुड़ कर देखा ताे दूर है सब अपने।
जिंदगी ने हमें कहा से कहा पहुँचा दिया॥

ना जाने हम क्यों बडे हाे गये।
इस से ताे बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे॥

अब ताे है टूटे सपने अधूरे एहसास।
रिश्ते नाताे का दुँख और हर पल निभाते जायाे दुनियादारी॥

∅- विमल गांधी ∇
Vimal Gandhi-kmsraj51

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गुज़रा जमाना लाैट के आता नही।

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ϒ गुज़रा जमाना लाैट के आता नही। ϒ

जीवन मे जाे समय निकल गया।
साे निकल गया॥

वाे फिर कभी नही आता।
जाे बिछड़ गया साे बिछड़ गया,
वाे वापिस नही आता॥

मिलता है ताे बहुत मुश्किल से,
वरना नही मिलता॥

जिंदगी का सफ़र है बहुत छाेटा।
गुज़रा जमाना लाैट के आता नही॥

सब कुछ समय के साथ-साथ,
चला जाता है।
लाैट के आता नही लेकिन यादे ही है,
जाे बार-बार आती है और,
दिल काे सताती है।

इनसे कभी भी छुटकारा नही।
कभी-कभी जिंदगी निकलती है।
यादाे के सहारे ही,
जीवन भर चलती रहती है साथ-साथ॥

∅- विमल गांधी ∇
Vimal Gandhi-kmsraj51

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टूटे सपने।

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KMSRAJ51-CYMT

ϒ टूटे सपने। ϒ

टूटे सपनेपद्मभूषण डॉ हरिवंशराय बच्चन

…..और छाती बज्र करके
सत्य तीखा
आज वह
स्वीकार मैंने कर लिया है।

स्वप्न मेरे
ध्वस्त सारे हो गए हैं।
किंतु इस गतिवान जीवन का
यही तो बस नहीं है।

अभी तो चलना बहुत है,
बहुत सहना, देखना है।

अगर मिट्टी से
बने ये स्वप्न होते,
टूट मिट्टी में मिले होते।

ह्रदय में शांत रखता,
मृत्तिका की सर्जना-संजीवनी में,
है बहुत विश्वास मुझको।

वह नहीं बेकार होकर बैठती है।
एक पल को,
फिर उठेगी।

अगर फूलों से
बने ये स्वप्न होते,
तो मुरझाकर
धरा पर बिखर जाते।

कवि-सहज भोलेपन पर
मुसकराता, किंतु
चित्त को शांत रखता।

हर सुमन में बीज है,
हर बीज में है बन सुमन का।

क्या हुआ जो आज सूखा,
फिर उगेगा,
फिर खिलेगा।

अगर कंचन के
बने ये स्वप्न होते,
टूटते या विकृत होते।

किसलिए पछताव होता?

स्वर्ण अपने तत्व का
इतना धनी है,
वक्त के धक्के,
समय की छेड़खानी से
नहीं कुछ भी कभी उसका बिगड़ता।

स्वयं उसको आग में
मैं झोंक देता,
फिर तपाता,
फिर गलाता,
ढालता फिर।

किंतु इसको क्या करूँ मैं,
स्वप्न मेरे काँच के थे।

एक स्वर्गिक आँच ने
उनको ढला था।
एक जादू ने सवारा था, रँगा था।

कल्पना किरणावली में,
वे जगर-मगर हुए थे।

टूटने के वास्ते थे ही नहीं वे,
किंतु टूटे
तो निगलना ही पड़ेगा
आँख को यह
क्षुर-सुतीक्ष्ण यथार्थ दारुण।

कुछ नहीं इनका बनेगा।

पाँव इन पर धार बढ़ना ही पड़ेगा।
घाव-रक्तस्त्राव सहते।

वज्र छाती पर धंसा लो,
पाँव में बांधा ना जाता।
धैर्य मानव का चलेगा,
लड़खड़ाता, लड़खड़ाता, लड़खड़ाता।

ओम शांति!!

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* चांदी की छड़ी।

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असीमित ऊर्जा आत्मिक-प्रेम में।

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KMSRAJ51-CYMT

∇ असीमित ऊर्जा आत्मिक-प्रेम में।Θ

दोस्तों,

आत्मिक-प्रेम में वह शक्ति निहित है, जिससे शत्रु भी मित्र बन जाते हैं। प्रेम ताे वैसे ढाई आखर(ढाई अक्षर) का ही हाेता हैं। लेकिन इस ढाई आखर(ढाई अक्षर) में इतनी असीमित शक्ति निहित हैं, जिससे असंभव काे भी सरलता पूर्वक संभव में परिवर्तित किया जा सके।

“प्रेम” आत्मा(Soul) के ७ माैलिक गुणाें में से एक हैं। “प्रेम” माना आत्मा और परमात्मा(ईश्वर) के बीच संबंध।

आत्मा(Soul) के ७ माैलिक गुण यह हैं…..

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand),

काेई भी मनुष्य आपके साथ कितना भी बुरा बर्ताव करें फिर भी आप “प्रेम” कि शक्ति काे ना छाेडे़, आपकी कोशिश यही हाे कि आप उसके साथ भी प्रेमपूर्ण व्यवहार हि करें। एक ना एक दिन आपका शत्रु, आपके चरणाें में हाेगा।

आत्मिक-प्रेम हमे मनुष्याें से सच्चा स्नेह करना सीखाती हैं। आत्मिक-प्रेम से मनुष्य कें अंदर शहनशीलता, दया और करुणा स्वतः ही आ जाती हैं।

आज के समय में मनुष्याें के पास पैसा(Money) ताे बहुत है, लेकिन वर्तमान समय में मनुष्याें के पास ना ताे सच्ची शांति हैं, ना हि सच्चा सुख हैं। ऐसा इसलिए क्योंकी मनुष्याें के अंदर आत्मिक-प्रेम नहीं हैं।

जब तक मनुष्याें का मनुष्याें से आत्मिक-प्रेम नहीं हाेगा तब तक सच्चा सुख और सच्ची शांति ना मिलेगी।

दोस्तों,

सभी मनुष्याें काे यह समझना हाेगा कि…..

सभी मनुष्याें काे सभी मनुष्याें से आत्मिक-प्रेम के साथ स्नेह भरा व्यवहार करना हाेगा तभी सच्चा सुख और सच्ची शांति मिलेगी।

ओम शांति!!

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

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स्वामी विवेकानंद जी की मुंशी फैज अलि के साथ हुई धार्मिक चर्चा।

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CYMT-KMSRAJ51-4

swami vivekananda - kms

Swami Vivekananda

आज देश में धर्म और जाति को लेकर अनेक विवाद विद्यमान हैं। मानवीय संवेदना धार्मिक और जातिय बंधन में इस तरह बंध गई है कि इंसानियत का अस्तित्व कहीं खोता हुआ नज़र आ रहा है। ऐसे में स्वामी विवेकानंद जी के प्रेरणादायी प्रसंग इन जातिय और धार्मिक बंधनो को खोल सकते हैं जिससे इंसानियत पुनः स्वंतत्र वातावरण में पल्लवित हो सकती है। भारत  भ्रमण के दौरान राजस्थान में स्वामी जी की मुलाकात मुंशी फैज अली  से हुई थी।  मुशी  फैज अली और स्वामी विवेकानंद जी के मध्य धर्म को लेकर जो वार्तालाप  हुई,  उसी  का एक अंश आप सबसे सांझा करने का प्रयास कर रहे हैं।

मुशीं फैज अली ने स्वामी जी से पूछा कि, स्वामी जी हमें बताया गया है कि अल्लहा एक ही है। यदि वह एक ही है, तो फिर संसार उसी ने बनाया होगा।

स्वामी जी बोले, “सत्य है।”

मुशी जी बोले ,”तो फिर इतने प्रकार के मनुष्य क्यों बनाये। जैसे कि हिन्दु, मुसलमान, सिख्ख, ईसाइ और सभी को अलग-अलग धार्मिक ग्रंथ भी दिये। एक ही जैसे इंसान बनाने में उसे यानि की अल्लाह को क्या एतराज था। सब एक होते तो न कोई लङाई और न कोई झगङा होता।”

स्वामी हँसते हुए बोले, “मुंशी जी वो सृष्टी कैसी होती जिसमें एक ही प्रकार के फूल होते। केवल गुलाब होता, कमल या रंजनिगंधा या गेंदा जैसे फूल न होते!”

फैज अली ने कहा सच कहा आपने यदि एक ही दाल होती तो खाने का स्वाद भी एक ही होता। दुनिया तो बङी फीकी सी हो जाती!

स्वामी जी ने कहा, मुंशी जी!  इसीलिये तो ऊपर वाले ने अनेक प्रकार के जीव-जंतु और इंसान बनाए ताकि हम पिंजरे का भेद भूलकर जीव की एकता को पहचाने।

मुशी जी ने पूछा, इतने मजहब क्यों ?
स्वामी जी ने कहा, ” मजहब तो मनुष्य ने बनाए हैं, प्रभु ने तो केवल धर्म बनाया है।” 
मुशी जी ने कहा कि, ” ऐसा क्यों है कि एक मजहब में कहा गया है कि गाय और सुअर खाओ और दूसरे में कहा गया है कि गाय मत खाओ, सुअर खाओ एवं तीसरे में कहा गया कि गाय खाओ सुअर न खाओ;  इतना ही नही कुछ लोग तो ये भी कहते हैं कि मना करने पर जो इसे खाये उसे अपना दुश्मन समझो।”
स्वामी जी जोर से हँसते हुए मुंशी जी से पूछे कि,  “क्या ये सब  प्रभु ने कहा है ?”
मुंशी जी बोले नही, “मजहबी लोग यही कहते हैं।”
स्वामी जी बोले,  “मित्र! किसी भी देश या प्रदेश का भोजन वहाँ की जलवायु की देन है।  सागर तट पर बसने वाला व्यक्ति वहाँ खेती नही कर सकता, वह सागर से पकङ कर मछलियां ही खायेगा।  उपजाऊ भूमि के प्रदेश में खेती हो सकती है।  वहाँ अन्न फल एवं शाक-भाजी उगाई जा सकती है। उन्हे अपनी खेती के लिए गाय और बैल बहुत उपयोगी लगे।  उन्होने गाय को अपनी माता माना, धरती को अपनी माता माना और नदी को माता माना क्योंकि ये सब उनका पालन पोषण माता के समान ही करती हैं।”

“अब जहाँ मरुभूमि है वहाँ खेती कैसे होगी? खेती नही होगी तो वे गाय और बैल का क्या करेंगे?  अन्न है नही तो खाद्य के रूप में पशु को ही खायेंगे। तिब्बत में कोई शाकाहारी कैसे हो सकता है? वही स्थिति अरब देशों में है।  जापान में भी इतनी भूमि नही है कि कृषि पर निर्भर रह सकें।”

स्वामी जी फैज अलि की तरफ मुखातिब होते हुए बोले, ” हिन्दु कहते हैं कि मंदिर में जाने से पहले या पूजा करने से पहले स्नान करो। मुसलमान नमाज पढने से पहले वाजु करते हैं। क्या अल्लहा ने कहा है कि नहाओ मत, केवल लोटे भर पानी से हांथ-मुँह धो लो?”
फैज अलि बोला, क्या पता कहा ही होगा!
स्वामी जी ने आगे कहा, नहीं, अल्लहा ने नही कहा! अरब देश में इतना पानी कहाँ है कि वहाँ पाँच समय नहाया जाए।  जहाँ पीने के लिए पानी बङी मुश्किल से मिलता हो वहाँ कोई पाँच समय कैसे नहा सकता है।  यह तो भारत में ही संभव है, जहाँ नदियां बहती हैं, झरने बहते हैं, कुएँ जल देते हैं। तिब्बत में यदि पानी हो तो वहाँ पाँच बार व्यक्ति यदि नहाता है तो ठंड के कारण ही मर जायेगा। यह सब प्रकृति ने सबको समझाने के लिये किया है।”
स्वामी विवेका नंद जी ने आगे समझाते हुए कहा कि, ” मनुष्य की मृत्यु होती है।  उसके शव का अंतिम संस्कार करना होता है। अरब देशों में वृक्ष नही होते थे, केवल रेत थी अतः वहाँ मृतिका समाधी का प्रचलन हुआ, जिसे आप दफनाना कहते हैं। भारत में वृक्ष बहुत बङी संख्या में थे, लकडी. पर्याप्त उपलब्ध थी अतः भारत में अग्निसंस्कार का प्रचलन हुआ।  जिस देश में जो सुविधा थी वहाँ उसी का प्रचलन बढा।  वहाँ जो मजहब पनपा उसने उसे अपने दर्शन से जोङ लिया।”
फैज अलि   विस्मित होते हुए   बोला!  “स्वामी जी इसका मतलब है कि हमें शव का अंतिम संस्कार  प्रदेश और देश के अनुसार करना चाहिये। मजहब के अनुसार नही।”
स्वामी जी बोले , “हाँ!  यही उचित है।” किन्तु अब लोगों ने उसके साथ धर्म को जोङ दिया। मुसलमान ये मानता है कि उसका ये शरीर कयामत के दिन उठेगा इसलिए वह शरीर को जलाकर समाप्त नही करना चाहता। हिन्दु मानता है कि  उसकी आत्मा फिर से नया शरीर धारण करेगी इसलिए उसे मृत शरीर से एक क्षंण भी मोह नही होता।”
फैज अलि ने पूछा कि, “एक मुसलमान के शव को जलाया जाए और एक हिन्दु के शव को दफनाया जाए तो क्या प्रभु नाराज नही होंगे?”
स्वामी जी ने कहा,” प्रकृति के नियम ही प्रभु का आदेश हैं।  वैसे प्रभु कभी रुष्ट नही होते वे प्रेम सागर हैं, करुणा सागर है।”
फैज अलि ने पूछा तो हमें उनसे डरना नही चाहिए?
स्वामी जी बोले, “नही!  हमें तो ईश्वर से प्रेम करना चाहिए वो तो पिता समान है, दया का सागर है फिर उससे भय कैसा। डरते तो उससे हैं हम जिससे हम प्यार नही करते।”
मुंशी जी को समझाते हुए स्वामी विवेकानंद जी की पलकें बंद थीं और अश्रु टपक रहे थे। फैज अली स्वामी जी का ये रूप देखकर स्तब्ध रह गए।  प्रेम का ये स्वरूप तो उन्होने पहली बार देखा था। वे वहीं आश्चर्य से खङे रहे और स्वामी जी के पलक खोलने का इंतजार करने लगे। स्वामी जी ये कहते हुए अपनी आँखे खोले कि, “उस परम् पिता को कठोर मानना अपराध है। “
फैज अलि ने हाँथ जोङकर स्वामी विवेकानंद जी से पूछा, “तो फिर मजहबों के कठघरों से मुक्त कैसे हुआ जा सकता है?”स्वामी जी ने फैज अलि की तरफ  देखते हुए मुस्कराकर कहा, “क्या तुम सचमुच कठघरों से मुक्त होना चाहते हो?” फैज अलि ने स्वीकार करने की स्थिति में अपना सर हिला दिया।स्वामी जी ने आगे समझाते हुए कहा, “फल की दुकान पर जाओ, तुम  देखोगे वहाँ आम, नारियल, केले, संतरे, अंगूर आदि अनेक फल बिकते हैं; किंतु वो दुकान तो फल की दुकान ही कहलाती है। वहाँ अलग-अलग नाम से फल ही रखे होते हैं। ” फैज अलि ने हाँ में सर हिला दिया। स्वामी विवेकानंद जी ने आगे कहा कि, “अंश से अंशी की ओर चलो। तुम पाओगे कि सब उसी प्रभु के रूप हैं।” 
फैज अलि अविरल आश्चर्य से स्वामी विवेकानंद जी को देखते रहे और बोले “स्वामी जी मनुष्य ये सब क्यों नही समझता?”स्वामी विवेकानंद जी ने शांत स्वर में कहा, मित्र! प्रभु की माया को कोई नही समझता। मेरा मानना तो यही है कि, “सभी धर्मों का गंतव्य स्थान एक है। जिस प्रकार विभिन्न मार्गो से बहती हुई नदियां समुंद्र में जाकर गिरती हैं, उसी प्रकार सब मत मतान्तर परमात्मा की ओर ले जाते हैं। मानव धर्म एक है, मानव जाति एक है।” मित्रों! हम सबको धर्म और जाति से परे मानवीय संवेदनाओं को यर्थात में अपनाना चाहिये क्योंकि प्रत्येक सजीव जगत में उस सर्व शक्तिमान का वास है; जिसे हम सब ईश्वर, अल्लाह, गुरुनानक या ईशा कहते हैं। ये कहना अतिश्योक्ति न होगी कि,  हमें मानव सेवा में ही ईश्वर सेवा की भावना को वास्तविक रूप में अपनाना चाहिए और यही भावांजली स्वामी विवेकानंद जी के प्रति सच्ची श्रद्धा होगी। 

जय भारत – युवा शक्ति

Post inspired by Mrs. अनिता शर्मा जी

Educational & Inspirational VIdeos (9.8 lacs+ Views):  YouTube videos Link

(http://www.youtube.com/channel/UCRh-7JPESNZWesMRfjvegcA?feature=watch)

Blog:  http://roshansavera.blogspot.in/

E-mail ID:  voiceforblind@gmail.com

अनीता जी नेत्रहीन विद्यार्थियों के सेवार्थ काम करती हैं।

एक अपील

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful article with KMSRAJ51 Readers.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

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Krishna Mohan Singh(KMS)
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कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥”

 ~KMSRAJ51

 

 

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When To Say Yes And When No

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When To Say Yes And When No

When To Say Yes And When No-kmsraj51

When To Say Yes And When No

When you are faced with different situations or opportunities, which do you say yes to and which do you say no to?

In order to decide, it is important to keep the vision of your dream and what you the soul really wants, in front of you. Be aware of what is essential for you. From this space of inner focus, we should see which of these situations/opportunities are going in the direction of your dream, what is essential and what takes you away from your dream; also be aware that sometimes situations are like mirages (illusions) that seem to offer something easy and attractive, but which distance you from the essential or the truth. They are opportunities that seem easier and, out of laziness, it would be easier to say yes. But within you, if you listen, you know that, in the long term, you will not be happy, content and peaceful given that you have avoided or are running away from the challenge, you haven’t listened to your heart. We need to refuse to allow ourselves to be carried by the current.

When you say yes to the proposal, situation or action that is close to your essence of your spirit, it is a yes in which there is not submission, where you do not lose your freedom or your self-esteem.It is a yes with the certainty that, learning from what life offers you; you and others will move forward in a positive sense.

– Message –

Fill the mind with the fortune of your happiness and you’ll never be lazy.

Expression: Throughout the day, check to what extent you are able to remain happy. Check if you are able to remain happy in spite of the negative situations. Also check if you are able to give happiness to others.

Experience: Each day think of all those things that have made you happy and you’ll find yourself increasing your treasure of happiness. This will enable you to share with others the fortune of this happiness and you’ll find that you are always enthusiastic and never lazy.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

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How Does The Mind Work?

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How Does The Mind Work?

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We can compare the mind with a screen, where thoughts, images, feelings and associations are constantly appearing. Thoughts manifest themselves in the mind in the same way as images on a film are projected onto the cinema screen.

The mind often interprets negation as affirmation. Therefore, when we tell you not to think about something, it is as if we were saying, “Think about this” and these thoughts are produced with even more force in the mind. Therefore transforming negative habits and personality traits becomes a struggle. The most effective way of fighting is to ignore these unwanted thoughts, but we should then immediately focus our mind in another direction, thinking about something positive. Thus useless or negative thoughts have no space to grow in our mind. Thinking positively is not a battle against negativity but by imbibing spiritual knowledge, we transform the negative into positive.

We can compare the mind with a naughty child who is playing with a dangerous object: if you take it away from them they will cry until they get it back again. Perhaps a more effective method would be to offer them something that would be of more interest to them and in this way, by having a new inoffensive toy in their hands, they will leave the dangerous object alone.

– Message –

Become free from the illness of the body by filling your mind with positive thoughts.

Expression: When you have any kind of trouble with your body, check whether you are able to have positive thoughts or if your mind is filled with the difficulty you are facing with the illness. When you are caught up in the bondage of the illness you will not be able to be free from it.

Experience: At the end of each day, practice filling your mind with positive thoughts, those that make you happy and you will find that you are free from the tiredness of the body. The more you practice in this way you will be free from the bondage of the body.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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मेरे सभी प्रिय पाठकों आप सबका प्यार यू हि मिलता रहें, मेरी लेखनी(कलम) यू हि चलती रहें हमेशा॥

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कृष्ण मोहन सिंह (KMSRAJ51)

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फिर शाम ढल गयी, तुम आये नही आज भी…

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दर्द जो रह गया……………………..

अब आँसुओं को आँखों में सजाना होगा…..

चिराग भुज गए हैं राहुल, खुद को जलाना होगा….

ना समझना की तुमसे दूर रहकर के खुश हूँ…

लेकिन मुझ को लोगों की खातिर मुस्कुराना होगा….

फिर शाम ढल गयी, तुम आये नही आज भी…

दिल को आज फिर उमीदों से बहलाना होगा….

ये भी मालूम है मुझे…

इन्ही उमीदों पर कट जायेगी ये जिन्दगी मेरी…

और आखिर में राहुल को खाली हाथ ही…..

तेरे बिना, तेरी यादों के साथ ही इस दुनिया से जाना होगा……..

Rahul Sir

Note:- Post share by My dear Friend Mr. Rahul  Sharma.

श्रीमान- राहुल शर्मा मेरे बहुत पुराने दोस्त और एक कवि हृदय है।

मैं हृदय से श्री- राहुल शर्मा का बहुत आभारी हूँ. दिल काे छुने वाली हिंदी कविता शेयर करने लिए।

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अंग्रेजी और हिंदी में मुरली…..

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हिंदी मुरली (21-Sep-2014)

प्रात: मुरली ओम् शान्ति ’अव्यक्त-बापदादा“ रिवाइज: 19-12-78 मधुबन

रीयल्टी ही सबसे बड़ी रॉयल्टी है

वरदान:- मनमनाभव के मन्त्र द्वारा मन के बन्धन से छूटने वाले निर्बन्धन, ट्रस्टी भव
कोई भी बंधन ापिंजड़ा है। ापिंजड़े की मैना अब निर्बन्धन उड़ता पंछी बन गयी। अगर कोई तन का बंधन भी है तो भी मन उड़ता पंछी है क्योंकि मनमनाभव होने से मन के बन्धन छूट जाते हैं। प्रवृत्ति को सम्भालने का भी बन्धन नहीं। ट्रस्टी होकर सम्भालने वाले सदा निर्बन्धन रहते हैं। गृहस्थी माना बोझ, बोझ वाला कभी उड़ नहीं सकता। लेकिन ट्रस्टी हैं तो निर्बन्धन हैं और उड़ती कला से सेकण्ड में स्वीट होम पहुंच सकते हैं।

स्लोगन:- उदासी को अपनी दासी बना दो, उसे चेहरे पर आने न दो।

English Murli (21-Sep-2014)

Reality is the Greatest Royalty.

Question: Who can maintain permanent intoxication? What are the signs of those who have permanent intoxication?
Answer: Only those who are seated on BapDada’s heart-throne can have permanent intoxication. The place for the elevated confluence-aged souls is the Father’s heart-throne. You cannot find such a throne throughout the whole cycle. You will continue to receive the throne of the kingdom of the world or the kingdom of a state, but you will not find such a throne again. This is such an unlimited throne that, whether you are walking around, eating or sleeping, you are on the throne. Those children who are seated on the throne in this way have forgotten the old bodies and the bodily world and, while seeing, do not see anything.

Question: On the basis of which dharna can you remain constantly merged in the ocean of happiness?
Answer: Be introverted. Those who are introverted are always happy. Residents of Indore means those who are introverted and are constantly happy. The Father is the Ocean of Happiness and so the children would also remain merged in love in the ocean of happiness. The children of the Bestower of Happiness would also be bestowers of happiness, the ones who distribute the treasures of happiness to all souls. Whoever comes and with whatever loving feeling they come, they should have them fulfilled through you. So, become images that are complete and perfect. Just as nothing is lacking in the Father’s treasure-store, similarly, children would also be fully satisfied souls, the same as the Father.

Achcha. Om shanti.

Blessing: May you be a trustee who is free from bondage and with the mantra of manmanabhav, become free from any bondage of the mind.
Any type of bondage is a cage. A caged bird has now become a bondage free, flying bird. Even if there is any bondage of the body, the mind is a flying bird because, by your being manmanabhav, any bondages of the mind are broken. There is no bondage even in looking after matter. Those who look after everything as trustees are free from bondage. A householder means to have a burden and those who have a burden can never fly. If you are a trustee, you are free from bondage and you can reach your sweet home with your flying stage in a second.

Slogan: Make unhappiness your servant and do not let it show on your face.

आध्यात्मिक सेवा में ब्रह्मकुमारी,

In Spiritual Service Brahmakumari,

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अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

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साहित्य का सहज अर्थ…..

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मेरे कुछ आंतरिक शाब्दिक विचार।

साहित्य का सहज अर्थ है अपनी सभ्यता-संस्कृति,अपने परिवेश को अपने शब्दों में अपने दृष्टिकोण के साथ पाठकों, श्रोताओं के मध्य प्रस्तुत करना  . पर यदि दृष्टिकोण,शब्द कृत्रिम आधुनिकता या आवेश से बाधित हो तो उसे साहित्य का दर्जा नहीं दे सकते।  साहित्य, जो सोचने पर मजबूर कर दे,उत्कंठा से भर दे।
प्राचीन ह‍िन्दी साहित्य की परंपरा काफी समृद्ध और विशाल रही है और आज भी है। ह‍िन्दी साहित्य को सुशोभित-समृद्ध करने में मुंशी प्रेमचंद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी वर्मा, पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, रामवृक्ष बेनीपुरी, डॉ. हरिवंशराय बच्चन, कबीर, रसखान, मलिक मोहम्मद जायसी, रविदास (रैदास), रमेश दिविक, रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’, आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, पं. माखनलाल चतुर्वेदी, डॉ. धर्मवीर भारती, जयशंकर प्रसाद, डॉ. शिवमंगलसिंह सुमन, अज्ञेय, अमीर खुसरो, अमृतलाल नागर, असगर वजाहत, आचार्य चतुरसेन शास्त्री, आचार्य रजनीश, अवधेश प्रधान, अमृत शर्मा, असगर वजाहत, अनिल जनविजय, अश्विनी आहूजा, देवकीनंदन खत्री, भारतेंदु हरी‍शचंद्र, भीष्म साहनी, रसखान, अवनीश सिंह चौहान आदि का कमोबेश महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
मोहम्मद इक़बाल की इन दो पंक्तियों को आज भी हम उदहारण मानते हैं –
“नहीं है नाउम्मीद इक़बाल अपनी किश्ते-वीरां से
ज़रा नम हो तो ये मिट्टी बड़ी ज़रखेज़ है साक़ी”
प्रकृति से जुड़े हैं कवि पंत के साथ –
“प्रथम रश्मि का आना रंगिणी तूने कैसे पहचाना
कहाँ-कहाँ हे बाल विहंगिणी पाया तूने यह गाना”
और रहस्यवाद से छायावाद तक की परिक्रमा करते हैं
रहस्य का अर्थ है -“ऐसा तत्त्व जिसे जानने का प्रयास करके भी अभी तक निश्चित रूप से कोई जान नहीं सका। ऐसा तत्त्व है परमात्मा। काव्य में उस परमात्म-तत्त्व को जानने की, जानकर पाने की और मिलने पर उसी में मिलकर खो जाने की प्रवृत्ति का नाम है-रहस्यवाद।”
छायावाद को आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने शैली की पद्धतिमात्र स्वीकारा है तो नंददुलारे वाजपेयी ने अभिव्यक्ति की एक लाक्षणिक प्रणाली के रूप में अपनाया है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसे रहस्यवाद के भुल-भुलैया में डाल दिया तो डॉ. नगेंद्र ने ‘स्थूल के विरुद्ध सूक्ष्म का विद्रोह’ कहा। आलोचकों ने छायावाद की किसी न किसी प्रवृत्ति के आधार पर उसे जानने-समझने का प्रयास किया। छायावाद संबंधी विद्वानों की परिभाषाएँ या तो अधूरी हैं या एकांगी। इस संदर्भ में नामवर सिंह का छायावाद (1955) संबंधी ग्रंथ विशेष अर्थ रखता है। उन्होंने एक नए एंगल से छायावाद को देखा। उनके शब्दों में – ‘छायावाद उस राष्ट्रीय जागरण की काव्यात्मक अभिव्यक्ति है जो एक ओर पुरानी रूढ़ियों से मुक्ति चाहता था और दूसरी ओर विदेशी पराधीनता से। इस जागरण में जिस तरह क्रमशः विकास होता गया, इसकी काव्यात्मक अभिव्यक्ति भी विकसित होती गई और इसके फलस्वरूप छायावाद संज्ञा का भी अर्थ विस्तार होता गया।’1
परिभाषाओं से इतर है हमारी कल्पना – जिसमें रहस्य भी है, छायावाद भी, नौ रसों का अद्भुत स्वाद भी  … किसी भी युग का एक दृष्टिकोण नहीं, न धर्म का – अर्थ वही है, जो आपकी दिशा बदल दे, आपको सोचने पर मजबूर करे  … इसी उद्देश्य में मेरे कुछ आंतरिक शाब्दिक विचार –
बातें अनगिनत होती हैं
कुछ मन को सहलाती हैं
कुछ बिंधती हैं
कुछ समझाती हैं  …
समझते समझते मन को सहलाना खुद आ जाता है
क्योंकि सहलानेवाली बातेँ खत्म हो जाती हैं – अचानक !
इसी समापन के आगे शब्द भाव जन्म लेते हैं
मन को सहलाते हुए
कब ये वृक्ष बढ़ने लगते हैं
कब ख्यालों के पंछी
अपनी अभिव्यक्ति के कलरव से
धऱती आकाश गुंजायमान करते हैं  … कुछ भी पता नहीं चलता और एक दिन ‘पहचान’ मिल जाती है !
इसी ठहराव सी पहचान के लिए मैं कहना चाहती हूँ –
रिश्ता,प्यार,दोस्ती

 सिर्फ इन्हें ही नहीं निभाना होता

अपमान भी निभाना पड़ता है !
प्यार का सम्मान ज़रूरी है
तो शांति से जीने के लिए
अपमान का सम्मान कहीं अधिक ज़रूरी है !
निःसंदेह,
अपमान ग्राह्य नहीं होता
पर जीवन का बहुत बड़ा
गहन, गंभीर अध्याय
इसे ग्राह्य बनाता है
कितने भी हाथ-पाँव मार लो विरोध के
ग्राह्य बनाना पड़ता है !
कोई जवाब देने से पहले
अपनी अंतरात्मा के घायल वजूद को देखो
और चिंतन करो
– कब
कहाँ
कितनी बार
तुमने परिस्थिति के अपमानजनक हिस्से को
अपनी मुस्कान दी है
आवभगत किया है  …
शर्मिंदगी की बात नहीं
ज़िन्दगी की शिक्षा
इन्हीं परिस्थितियों की चुभन से मिलती है  …
जब तक सूरज पूरब की ओर से
सर के ऊपर तक होता है
ज़िन्दगी का फलसफा अबोध होता है
हम – तुम
बड़ी बड़ी बातें करते हैं
पर पश्चिम तक बढ़ते
अस्ताचल तक पहुँचते मार्ग में
समझौते ही समझौते होते हैं
 अपमान का गरल पीकर
नीलकंठ बनकर
मुस्कुराना ही होता है
अतिथि देवो भवः कहकर
घातक दुश्मन को गले लगाना ही होता है
….
मुश्किलों को आसान बनाने के लिए
अपमान को निभाना ही होता है !!!
सूक्तियों के कोलाहल में मुझे पूछना है – 
अन्याय करना पाप है

तो अन्याय सहना भी  …
बिल्कुल !
लेकिन अन्याय करना अन्यायी का स्वभाव है
अन्याय सहना स्वभाव नहीं
परिस्थिति की न्यायिक माँग है !
कोर्ट में मसले वर्षों की फाइल में मर जाते हैं
पर जीता हुआ सत्य
पेट की आग
परिवार की सूक्ति
समाज की भर्तस्ना में
खामोश बुत हो जाता है !
इस बुत पर हाथ उठाओ
या घसीटते जाओ
यह मूक रहता है
हँसी भी इसकी शमशान जैसी होती है
उसकी भी आलोचना भरपूर होती है  …
‘मेरे टुकड़ों पर पलती है’ कहता पति हाथ उठाता है
निकल जाए जो स्त्री स्वाभिमान के साथ
तो – कई फिकरे !!!
स्वाभिमान का तमाशा जब होता है
तब उसके विरोध में कोई कैंडल मार्च नहीं होता
सबके अपने व्यक्तिगत कारण होते हैं
‘विरोध करके हम अपना रिश्ता क्यूँ बिगाड़ें’
‘माहौल नहीं था कहने का’  …
सही है
तो  … अन्याय सहने की स्थिति को पाप मत कहो
यह पाप करने की ताकत में
सब मिलकर अन्याय का घृत डालते हैं
यानी पाप करते हैं
इसलिए ……धर्म के मायने पूछने से पहले
अपने धर्म का खाता खोलिए
देखिये, अधर्मी की लिस्ट में आपका नाम तो नहीं !!!
निःसंदेह शिक्षा,परिवर्तन और आधुनिकता का व्यापक शोर है, पर सत्य जो है वह टिमटिमाता हुआ  … कुछ इस तरह,
वर्तमान की देहरी पर
ख़ामोशी जब भयावह हो उठती है

तब खोल देती हूँ अतीत के कब्रिस्तान का दरवाजा

दहला देनेवाली चुप सी चीखें
रेंगता साया
विस्फारित चेहरों की लकीरें  …
अतीत और वर्तमान में
बदलाव तो है
पर उसी तरह –
जिस तरह लड़कियों के जीवन में दिखाई देता है !!!
वक्तव्य ठोस – लड़का लड़की समान
लड़की लड़के से बेहतर !
लड़की कमाने लगी
पर थकान आज भी एक-दो घरों को छोड़
सिर्फ लड़कों की !
दहेज़ की माँग पूर्ववत !
गोरी,काली का भेद नहीं जाता उसकी नौकरी से
और लड़का –
घी का लड्डू टेढ़ो भलो !!!
परिवर्तन का शोर
परिवर्तन –
भाषण और सच के मध्य  बारीक लकीर जैसी …
लड़कियों का उच्चश्रृंखल अंदाज परिवर्तन नहीं
कम कपड़े परिवर्तन नहीं
परिवर्तन है –
नौकरी के लिए घर से बाहर अपनी तलाश
तलाश के आगे कई सपनों की हत्या !
परिवर्तन है –
लड़की का लड़का बन जाना
और उस वेशभूषा में सीख –
कुछ लड़की सा व्यवहार करो !
लड़की लड़का सी हो
या संकुचित सिमटी
या व्यवहारिक  …
आलोचना होती रहती है !
हादसे के बाद उसकी इज़्ज़त नहीँ होती
नहीं होता कोई न्याय
तमाम गलतियों की जिम्मेदार वही होती है
माशाअल्लाह
लड़के में कोई खामी नहीं होती !
वह खून करे
इज़्ज़त छिन ले
शराब पीकर,क्रोध में हाथ उठाये
फिर भी वह दोषी नहीं होता
परस्त्री को देखे
तो पत्नी में कमी
वह बाँधकर रखने में अक्षम है
पुरुष तो भटकेगा ही !!!
है न परिवर्तन में वही सड़ांध ?
…. हाँ लड़कियाँ पढ़-लिख गई हैं
देश-विदेशों में नौकरी करने लगी हैं
…घर से बाहर वह दौड़ रही है अपना अस्तित्व लिए
घर में कमरे के भीतर वह जूझ रही है
अपने अस्तित्व के लिए
यूँ  …. अपवाद कल भी था , आज भी हैं
उदहारण कल भी था, आज भी है
परिवर्तन एक शोर है
संसद भवन जैसा
जहाँ कोई किसी की नहीं सुनता
शहरी सियार की हुआ हुआ है
जो आज भी जंगली है !!!

Note:- “Post share by Mrs. “

संक्षेप में रश्मि प्रभा जी के बारे में-

मेरा लेखन से सम्बन्ध मेरे परिवार की अमूल्य विरासत है, जिसकी कलम मेरे पिता स्व रामचन्द्र प्रसाद ने खरीदी,मेरी अम्मा स्व सरस्वती प्रसाद ने पन्नों को मुखर बनाया । मैं उनसे निर्मित वह पौधा हूँ, जिसे मेरी अम्मा ने सींचा,काट-छाँट की, कवि पंत ने मुझे नाम दिया – मेरे पिता ने कहा -“बेटी, अपने नाम के अनुरूप बनना” … मैं नहीं जानती कि मैंने इस नाम को कितनी सार्थकता दी, पर मेरा प्रयास, मेरा लक्ष्य इस विरासत को पूर्णता देना है . कविता है कवि की आहट उसके जिंदा रहने की सुगबुगाहट उसके सपने उसके आँसू उसकी उम्मीदें उसके जीने के शाब्दिक मायने …

Blog Link :-  http://lifeteacheseverything.blogspot.in/

I am very grateful to श्रीमती – रश्मि प्रभा जी for sharing inspirational “साहित्य का सहज अर्थ है” article.

Note::-

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आप कुछ भी कर सकते हैं, स्वयं पर विश्वास करना सीखें।

You can also learn to trust themselves.

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

 

जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

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Book Quotes in Hindi !!

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मैं अपने सभी प्रिय पाठकों का आभारी हूं…..  I am grateful to all my dear readers …..

 -Book Quotes in Hindi & English-

किताबें जलाने से भी बदतर अपराध हैं. उनमे से एक है उन्हें ना पढना. Book-Red-kmsraj51

किताबों पर 58-उद्धरण –

 

Quote 1: A room without books is like a body without a soul.

In Hindi: बिना किताबों के कमरा बिना आत्मा के शरीर के समान है .

– Marcus Tullius Cicero  मार्कस  टुल्लिअस   सिसरो  

Quote 2: So many books, so little time.

In Hindi: इतनी अधिक किताबें, इतना कम समय.

– Frank Zappa फ्रैंक ज़प्पा

Quote 3: The person, be it gentleman or lady, who has not pleasure in a good novel, must be intolerably stupid.

In Hindi: कोई  व्यक्ति , चाहे पुरुष हो या महिला , जिसे एक अच्छा उपन्यास पढने में आनंद ना आये , वो निश्चित रूप से बहुत मूर्ख होगा .

– Austen जेन  ऑस्टेन 

Quote 4: Outside of a dog, a book is man’s best friend. Inside of a dog it’s too dark to read.

In Hindi: कुत्ते के बहार किताब आदमी की सबसे अच्छी मित्र है. कुत्ते के अन्दर इतना अँधेरा है कि पढ़ा नहीं जा सकता .

– Groucho Marx ग्रुशो मार्क्स 

Quote 5: Good friends, good books, and a sleepy conscience: this is the ideal life.

In Hindi: अच्छे मित्र , अच्छी किताबें , और साफ़ अंतःकरण : यही आदर्श जीवन है.

 – Mark Twain  मार्क  ट्वेन 

Quote 6: I have always imagined that Paradise will be a kind of library.

In Hindi: मैंने हमेशा कल्पना की है कि स्वर्ग एक तरह का पुस्तकालय है.

– Jorge Luis Borges  जॉर्ज  लुईस  बोर्गेज 

Quote 7: I find television very educating. Every time somebody turns on the set, I go into the other room and read a book.

In Hindi: मुझे  टेलीविज़न  बहुत शिक्षित करने वाला लगता ही . हर बार जब कोई इसे चलाता है , मैं दूसरे रूम में चला जाता हूँ और एक किताब पढता हूँ.

– Groucho Marx ग्रुशो मार्क्स 

Quote 8: Never trust anyone who has not brought a book with them.

In Hindi: कभी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा ना करें जिसने अपने साथ किताब ना लायी हो .

– Lemony Snicket लेमनी स्निकेट 

Quote 9: If one cannot enjoy reading a book over and over again, there is no use in reading it at all.

In Hindi: यदि कोई एक ही किताब बार-बार पढने का आनंद ना उठा पाए तो उसे पढने का कोई फायदा नहीं है.

– Oscar Wilde ऑस्कर  वाइल्ड 

Quote 10: It is what you read when you don’t have to that determines what you will be when you can’t help it.

In Hindi: जब पढने की मजबूरी ना हो तब आप क्या पढ़ते हैं यही निर्धारित करेगा कि आप जब आपके बस में ना हो तब आप क्या बनेंगे.

– Oscar Wilde ऑस्कर वाइल्ड 

Quote 11: You can never get a cup of tea large enough or a book long enough to suit me.

In Hindi: आप कभी भी इतना बड़ा चाय का प्याला या इतनी बड़ी किताब नहीं पा सकते जो मुझे सूट कर सके .

– C.S. Lewis सी .एस . लुईस  

Quote 12: If you only read the books that everyone else is reading, you can only think what everyone else is thinking.

In Hindi: यदि आप सिर्फ वही किताबें पढ़ते हैं जो बाकी सभी पढ़ रहे हैं तो आप वही सोच पायेंगे जो बाकी सभी सोच रहे हैं.

– Haruki Murakami हरुकी  मुराकामी 

Quote 13: Be careful about reading health books. You may die of a misprint.

In Hindi: स्वस्थ्य संबधी किताबें पढने में सावधान रहिये . आप एक मुद्रण त्रुटी से मर सकते हैं.

– Mark Twain मार्क  ट्वेन 

Quote 14: There is no friend as loyal as a book.

In Hindi: एक किताब जितना वफादार कोई दोस्त नहीं है.

– Ernest Hemingway अर्नेस्ट हेमिंग्वे

Quote 15: “Classic” – a book which people praise and don’t read.

In Hindi: “क्लासिक” – एक ऐसी किताब जिसकी लोग प्रशंशा करते हैं और पढ़ते नहीं .

– Mark Twain मार्क  ट्वेन 

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Quote 16: I declare after all there is no enjoyment like reading!

In Hindi: मैं सबके सामने घोषणा करता हूँ : पढने जैसा कोई आनंद नहीं है.

– Jane Austen जेन ऑस्टेन 

Quote 17: Books are the quietest and most constant of friends; they are the most accessible and wisest of counselors, and the most patient of teachers.

In Hindi: किताबें मित्रों में सबसे शांत और स्थिर हैं ; वे सलाहकारों में सबसे सुलभ और बुद्धिमान हैं , और शिक्षकों में सबसे धैर्यवान हैं.

– Charles William Eliot चार्ल्स विलियम एलियोट

Quote 18: A children’s story that can only be enjoyed by children is not a good children’s story in the slightest.

In Hindi: बच्चों की कहानी जिसका सिर्फ बच्चे आनंद उठा सकें वो बिलकुल भी अच्छी बच्चों की कहानी नहीं है.

– C.S. Lewis सी.एस . लुइस 

Quote 19: Do not read, as children do, to amuse yourself, or like the ambitious, for the purpose of instruction. No, read in order to live.

In Hindi: ऐसे मत पढो , जैसे बच्चे पढ़ते हैं, मजे के लिए , या जैसे महत्त्वाकांक्षी पढ़ते हैं, निर्देश के लिए . नहीं , जेने के लिए पढो.

– Gustave Flaubert गुस्ताव फ्लौबेर्ट 

Quote 20: If there’s a book that you want to read, but it hasn’t been written yet, then you must write it.

In Hindi: यदि कोई ऐसी बुक है जिसे तुम पढना चाहते हो , पर वो अभी लिखी ही नहीं गयी है , तो तुम्हे उसे ज़रूर लिखना चाहिए.

– Toni Morrison टोनी मोरीसन  

Quote 21: When I have a little money, I buy books; and if I have any left, I buy food and clothes.

In Hindi: जब मेरे पास कम पैसे होते हैं तो मैं किताबें खरीदता हूँ , और अगर कुछ बचता है तो मैं खान और कपड़े लेता हूँ.

 – Desiderius Erasmus Roterodamus डेजीडेरिअस  इरेस्मस  रोटेरोदमस  

Quote 22: I cannot live without books.

In Hindi: मैं किताबों के बगैर जिंदा नहीं रह सकता .

 – Thomas Jefferson  थॉमस  जेफ़र्सन 

Quote 23: A book without words is like love without a kiss; it’s empty.

In Hindi: बिना शब्दों की किताब बिना चुम्बन के प्रेम के सामान है; वो खाली है.

– Andrew Wolfe एंड्रू वोल्फे 

Quote 24: There are two motives for reading a book; one, that you enjoy it; the other, that you can boast about it.

In Hindi: किताबें पढने की दो वजहें हैं ; पहली , कि आप उसका लुत्फ़ उठा सकें ; दूसरा कि आप उसके बारें में डींगें हांक सकें .

– Bertrand Russell बेरट्रेंड  रसेल 

Quote 25: Some books should be tasted, some devoured, but only a few should be chewed and digested thoroughly.

In Hindi: कुछ किताबों को चखना चाहिए , कुछ को निगलना , लेकिन बस कुछ को ही अच्छे से चबाना और पचाना चाहिए .

– Cornelia Funke  कोर्नेलिया  फंकी 

Quote 26: A mind needs books as a sword needs a whetstone, if it is to keep its edge.”

In Hindi: अपना तेज बनाये रखने के लिए जिस तरह तलवार को पत्थर की ज़रुरत होती है उसी प्रकार दिमाग को किताबों की.

–  George R.R. Martin जॉर्ज आर.आर. मार्टिन 

Quote 27: One must always be careful of books,” said Tessa, “and what is inside them, for words have the power to change us.

In Hindi: किताबों से हमेशा सावधान रहना चाहिए ,” टेसा ने कहा है, ” और जो उनके अन्दर है, क्योंकि शब्दों में हमें बदलने की शक्ति होती है.

– Cassandra Clare  कैसेंड्रा क्लेयर

Quote 28: There are worse crimes than burning books. One of them is not reading them.

In Hindi: किताबें जलाने से भी बदतर अपराध हैं. उनमे से एक है उन्हें ना पढना.

– Joseph Brodsky जोसफ ब्रोड्स्की 

Quote 29: Books are the perfect entertainment: no commercials, no batteries, hours of enjoyment for each dollar spent.

In Hindi: किताबें परिपूर्ण मनोरंजन हैं: कोई विज्ञापन नहीं , कोई बैटरी नहीं , हर डॉलर के बदले घंटों का आनंद.

– Stephen King स्टीफन किंग

Quote 30: Make it a rule never to give a child a book you would not read yourself.

In Hindi: यह नियम बना लीजिये; कभी किसी बच्चे को वो किताब नहीं दीजिये जो आप खुद नहीं पढेंगे.

– George Bernard Shaw  जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

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Quote 31: Think before you speak. Read before you think.

In Hindi: बोलने से पहले सोचो. सोचने से पहले पढ़ो .

 – Fran Lebowitz फ्रैन  लेबोवित्ज़  

Quote 32: Good books don’t give up all their secrets at once.

In Hindi: अच्छी पुस्तकें अपना सार राज़ एक बार में नहीं बतातीं .

– Stephen King स्टीफेन किंग 

Quote 33: If you have a garden and a library, you have everything you need.

In Hindi: यदि आपके पास एक बागीचा और पुस्तकालय है तो आपके पास वो सब कुछ है जो आपको चाहिए.

– Marcus Tullius Cicero मार्कस टुलीयस सिसरो 

Quote 34: Books are the plane, and the train, and the road. They are the destination, and the journey. They are home.

In Hindi: पुस्तकें हवाईजाहज , ट्रेन , और सड़क हैं.  वो गंतव्य हैं और यात्रा भी . वे घर हैं.

– Anna Quindlen एना क्विनडलेन

Quote 35: After nourishment, shelter and companionship, stories are the thing we need most in the world.

In Hindi: पोषण, आश्रय और साहचर्य के बाद, कहानियां वो चीजें हैं जिनकी हमें दुनिया में सबसे ज्यादा ज़रुरत होती है.

– Philip Pullman  फिलिप पुलमैन

Quote 36: A house without books is like a room without windows.

In Hindi: किताबों के बगैर घर खिड़कियों के बिना कमरे के सामान है ,

– Horace Mann होरेस मैन

Quote 37: Books are like mirrors: if a fool looks in, you cannot expect a genius to look out.

In Hindi: किताबें दर्पण की तरह हैं: यदि एक मूर्ख अन्दर देखता है तो आप किसी प्रतिभावान के बाहर देखने की उम्मीद नहीं कर सकते.

– J.K. Rowling   जे.के. राउलिंग

Quote 38: but for my own part, if a book is well written, I always find it too short.

In Hindi: लेकिन मेरे लिए , अगर किताब अच्छे से लिखी गयी है , वो हमेशा मुझे बहुत छोटी लगती है.

– Jane Austen जेन ऑस्टेन 

Quote 39: My Best Friend is a person who will give me a book I have not read.

In Hindi: मेरे सबसे अच्छा मित्र वो व्यक्ति है जो मुझे ऐसी किताब दे जो मैंने पढ़ी ना हो.

– Abraham Lincoln अब्राहम  लिंकन

Quote 40: There are books of which the backs and covers are by far the best parts.

In Hindi: कुछ ऐसी किताबें हैं जिसका अगला और पिछला हिस्सा ही उसका सबसे अच्छा भाग होता है.

– चार्ल्स डिकेन्स Charles Dickens

Quote 41: The worst thing about new books is that they keep us from reading the old ones.

In Hindi: नई पुस्तकों के बारे में सबसे बुरी बात यह है कि वे हमें पुरानी पुस्तकें पढने से दूर रखती हैं

– Joseph Joubert जोसफ जोबेर्ट 

Quote 42: Books serve to show a man that those original thoughts of his aren’t very new after all.

In Hindi: किताबें आदमी को ये बताने के काम आती हैं कि उसके मूल विचार आखिरकार इतने नए भी नहीं हैं.

– Abraham Lincoln अब्राहम लिंकन 

Quote 43: Science and religion are not at odds. Science is simply too young to understand.

In Hindi: विज्ञान और धर्म एक दूसरे के खिलाफ नहीं हैं . बस विज्ञान अभी समझने के लिए बहुत छोटा है.

– Dan Brown डैन ब्राउन 

Quote 44: I cannot remember the books I’ve read any more than the meals I have eaten; even so, they have made me.

In Hindi: मैंने जो किताबें पढ़ीं उन्हें मैंने जो खाया है उससे अधिक नहीं याद रख सकता, बावजूद इसके कि उन्होंने ने मुझे बनाया है.

– Ralph Waldo Emerson राल्फ वाल्डो एमर्सन 

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Quote 45: Fiction reveals truth that reality obscures.

In Hindi: फिक्शन वो सच्चाई दिखा देता है जो रियलिटी छिपा जाती है .

– Jessamyn West जैस्मिन वेस्ट 

Quote 46: The world is a book and those who do not travel read only one page.

In Hindi: दुनिया एक किताब है और वो जो घूमते नहीं बस एक पेज पढ़ पाते हैं.

– Augustine औगसटीन

Quote 47: Have you really read all those books in your room?

In Hindi: क्या तुमने सचमुच अपने रूम में राखी सारी किताबें पढ़ी हैं?

 – John Green जॉन ग्रीन 

Quote 48: Sleep is good, he said, And books are better.

In Hindi: नीद अच्छी हैं , उसने कहा , और किताबें बेहतर.

– George R.R. Martin जॉर्ज आर. आर. मार्टिन 

Quote 49: Honesty is the first chapter of the book wisdom.

In Hindi: ईमानदारी ज्ञान की किताब का पहला अध्याय है.

– Thomas Jefferson थॉमस जेफ़रसन 

Quote 50: Take no heed of her…. She reads a lot of books.

In Hindi: उसपर ध्यान मत दो ….वो बहुत किताबें पढ़ती है.

– Jasper Fforde जैसपर फोर्डे

Quote 51: A book is a gift you can open again and again.

In Hindi: किताब एक ऐसा उपहार है जिसे आप बार-बार खोल सकते हैं.

– Garrison Keillor  गैरिसन किलर 

Quote 52: Reading one book is like eating one potato chip.

In Hindi: एक किताब पढ़ना एक आलू चिप खाने की तरह है.

– Diane Duane  डायने डुआन

Quote 53: The best books… are those that tell you what you know already.

In Hindi: सबसे अच्छी किताबें ….वे हैं जो आपको वो बताएं जो आप पहले से जानते हों.

– George Orwell जॉर्ज ओरवेल 

Quote 54 :My books are like water; those of the great geniuses are wine. (Fortunately) everybody drinks water.

In Hindi : मेरी किताबें पानी की तरह हैं; और उन महान प्रतिभाओं की शराब की तरह. (सौभाग्यवश) सभी लोग पानी पीते हैं.

– Mark Twain मार्क  ट्वैन

Quote 55: You cannot open a book without learning something.

In Hindi: आप बिना कुछ सीखे किताब नहीं खोल सकते .

– Confucius  कन्फ़्यूशियस 

Quote 56: Of course I loved books more than people.

In Hindi: बेशक मैं लोगों से अधिक किताबों से प्यार करता हूँ .

 – Diane Setterfield डायने सेटरफील्ड  

Quote 57: Always read stuff that will make you look good if you die in the middle of it.

In Hindi: हमेशा ऐसी चीज पढ़िए जिसे पढ़ते वक़्त यदि आप मर भी जाएं तो लोग आपको अच्छा समझें.

– P.J. O’Rourke  पी.जे. ओ ‘रुरके

Quote 58: I even love the smell of books.

In Hindi: मुझे तो किताबों कि गंध से भी प्यार है.

– Adriana Trigiani ऐड्रीऐना त्रैजियेनी 

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Note: Despite taking utmost care there could be some mistakes in Hindi Translation of Book Quotes.                                                                                                                               You may use these quotes on any write-up on ” World Book Day”

=> Post inspired by ::- http://www.achhikhabar.com/

(I am grateful to Mr. Gopal Mishra & AKC.)

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