“मातृ दिवस की शुभकामना।”

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ मातृ दिवस की शुभकामना। ϒ

मां, यह वह शब्द है जो किसी भी व्यक्ति के जीवन में सबसे ज्यादा अहमियत रखता है। ईश्वर सभी जगह उपस्थित नहीं रह सकता। इसीलिए उसने धरती पर मां का स्वरूप विकसित किया।

जो हर परेशानी और हर मुश्किल घड़ी में अपने बच्चों का साथ देती है। उन्हें दुनियां के हर गम से बचाती है। बच्चा जब जन्म लेता है तो सबसे पहले वह मां बोलना ही सीखता है।

मां ही उसकी सबसे पहली दोस्त बनती है, जो उसके साथ खेलती भी है और उसे सही-गलत जैसी बातों से भी अवगत करवाती है। मां के रूप में बच्चे को निःस्वार्थ प्रेम और त्याग की प्राप्ति होती है तो वहीं मां बनना किसी भी महिला को पूर्णता प्रदान करता है।

सब मित्रों को माँ/मातृ दिवस की शुभकामनाएँ।

मेरे सभी प्यारे पाठकों और दोस्तों आप सभी काे “मातृ दिवस की शुभकामना।”
इस पृथ्वी पर माँ की जगह काेई भी नहीं ले सकता/सकती॥

©- विमल गांधी 
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी “मातृ दिवस की शुभकामना।” Article साझा करने के लिए।

विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार: 

“विमल गांधी जी की कविताआे/Article के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं/Article छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं/Article काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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Head Editor, Founder & CEO
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

बहुत याद आती है तेरे आँचल की छाँव।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ बहुत याद आती है तेरे आँचल की छाँव। ϒ

माँ तुझे सलाम।
माँ जब तक तुम थी।

सारी दुनिया सुहानी लगती थी।
चारो और ख़ुशहाली लगती थी।

सारी दुनिया अपनी सी लगती थी।
अब तो दिल से मुस्कुराने का मन नही करता।

हँसने – हसाँने का मन नही करता।
जो सपने देखे थे दिन रात।

अब सपने सजाने का मन नही करता।
बहुत याद आती है तेरे आँचल की छाँव।

जो बचाती थी मुझ को वो हर घड़ी।
आज यह आलम है कि कोई अपना नही लगता।

चल रही है जिंदगी तनहा – तनहा।
किसी से भी दिल लगाने का मन नही करता।

हर दम लगता है कि कोई नही अपना।
फिर भी जीवन चल रहा है तुझ बिन तनहा-तनहा।

अब तो बस यही है तमन्ना की पा लू तुझे।
फिर अगले जन्म और चाहू तुझे हर जन्म॥

©- विमल गांधी 
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विमल गांधी जी।

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विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “विमल गांधी जी” की कविताआे के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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आँखे ढूँढती है सिर्फ माँ को।

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CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ आँखे ढूँढती है सिर्फ माँ को। ϒ

हर घर मे… यही होता है कि…..
घर पहुँचने पर सबसे पहले आँखे…
ढूँढती है सिर्फ माँ को।

माँ किधर है कहा है सबसे पहले…
सवाल दिल में यही आता है।

काम चाहे कुछ ना हो फिर भी उसे देख…
सुकून दिल को आता है।

और ठंडक दिल को मिलती है।
माँ की शक्ल देख कर ही, बच्चे…

कुछ काम कर पाते है, वरना…
बैचेन हो जाते है॥

मेरे सभी प्यारे पाठकों और दोस्तों आप सभी काे “मातृ दिवस की शुभकामना।”
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©- विमल गांधी 
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विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए।

विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “विमल गांधी जी” की कविताआे के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

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हमारा अच्छा व्यवहार ही जीवन का निर्माण करता है।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

balloon seller by Urmi Patel (Om drawing classes)

बैलोन-विक्रेता।

हमारा अच्छा व्यवहार ही जीवन का निर्माण करता है।

एक आदमी गुब्बारे बेच कर जीवन-यापन करता था। वह गांव के आस-पास लगने वाली हाटों में जाता और गुब्बारे बेचता। बच्चों को लुभाने के लिए वह तरह-तरह के गुब्बारे रखता। और जब कभी उसे लगता कि बिक्री कम हो रही है, वह झट से एक गुब्बारा हवा में छोड़ देता। यह देखकर बच्चे खुश हो जाते और गुब्बारे खरीदने के लिए पहुंच जाते।

एक दिन वह हाट में गुब्बारे बेच रहा था और बिक्री बढ़ाने के लिए बीच-बीच में गुब्बारे उड़ा रहा था। पास ही खड़ा एक छोटा बच्चा यह सब बड़ी जिज्ञासा से देख रहा था। इस बार जैसे ही गुब्बारे वाले ने एक सफेद गुब्बारा उड़ाया वह तुरंत उसके पास पहुंचा और मासूमियत से बोला,’अगर आप यह काला वाला गुब्बारा छोड़ेंगे तो क्या वह भी ऊपर जाएगा?’

गुब्बारा वाले ने अचरज के साथ उसे देखा और बोला, ‘बिलकुल जाएगा। गुब्बारे का ऊपर जाना इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह किस रंग का है, निर्भर इस पर करता है कि उसके अंदर क्या है।’

ठीक इसी तरह हम इंसानों पर भी यह बात लागू होती है। कोई अपने जीवन में क्या हासिल करेगा, यह उसके बाहरी रंग-रूप पर निर्भर नहीं करता। बल्कि इस पर निर्भर करता है कि उसके अंदर क्या है। हमारा व्यवहार ही हमारा जीवन निर्माण करता है।

एक बूढ़े किसान को सामान ढोने के लिए गधे की जरूरत थी। वह कुम्हार के पास गधा मांगने के लिए गया। कुम्हार गधा नहीं देना चाहता था। उसने कहा- ‘गधा चरने के लिए गया है और रात को देरी से आएगा। गधा यहां होता तो मुझे देने में खुशी होती। पड़ोसी के काम पड़ोसी नहीं तो क्या परदेसी आएगा।’ दोनों के बीच बातचीत का क्रम चल ही रहा था कि बाड़े में बंधे गधे ने एक लंबा आलाप लिया। किसान ने कहा- ‘गधा तो भीतर बंधा है, तुम बहाना बनाने की बजाय सीधे मना कर देते तो मुझे बुरा नहीं लगता।’ कुम्हार ने हंसते हुए कहा- ‘तुम भी अजीब आदमी हो। तुम्हें आदमी की जबान से गधे की जबान पर ज्यादा भरोसा है।’ किसान ने सरलता से कहा- ‘झूठ बोलने वाले आदमी से पशु ज्यादा भरोसेमंद होता है।’ किसान की बात सुनकर कुम्हार बोला- ‘तुम ठीक कहते हो। अब भविष्य में मैं दैनिक जीवन व्यवहार में झूठ बोलने की बजाय सच्ची बात कहना पसंद करूंगा।’ इस तरह की व्यवहार-कुशलता का संकल्प व्यक्ति को हर दृष्टि से बहुत ऊंचा उठा देती है। अपने परिवार के निकट अथवा दूरस्थ व्यक्तियों के साथ, पड़ोसियों के साथ, अपने कर्मचारियों के साथ, सामाजिक सम्पर्कों वाले सभी व्यक्तियों के साथ आप उचित व्यवहार का निर्वाह करते हैं तो व्यवहार कुशल माने जाएंगे। अगर व्यवहार में संवेदनशीलता है, सहयोगी दृष्टिकोण है, आत्मीयता और उदारतापूर्ण व्यवहार है तो आपका व्यक्तित्व और अधिक निखरेगा।

Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/

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संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सफलता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सफलता।

संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सक्सेस शेक्सपियर ने लिखा था, “हमारे संदेह गद्दार हैं। हम जो सफलता प्राप्त कर सकते हैं, वह नहीं कर पाते, क्यूंकि संदेह में पड़कर प्रयत्न ही नहीं करते।” इंसान का स्वाभाव ही ऐसा होता है कि कोई काम शुरू करता है और थोडा सा भी संदेह होने पर काम को रोक देता है और उत्साह पर पानी फिर जाता है। संदेह कि बजाय इंसान को विश्वास को ज्यादा तरजीह देनी चाहिए।
जीवन में आगे बढ़ने के लिए इंसान प्रयत्न करता है और इस प्रयत्न पर संदेह के कारण पानी फिर जाता है। संदेह व्यक्ति के उत्साह को कम कर देता है। संदेह के कारण इंसान सही समय का इंतजार करता रह जाता है। उसे लगता है कि उचित अवसर आने पर काम करूंगा। जो लोग अपनी योग्यता पर शक करते हैं, वे हमेशा दुविधा में रहते हैं कि काम को शुरू भी किया जाए या नहीं। वे हमेशा काम को टालते रहते हैं। उन्हें हमेशा यही महसूस होता है कि अभी सही समय नहीं आया है। वे अपनी दिशा तय नहीं कर पाते और इधर-उधर भटकते रहते हैं। संदेह से पीछा छुड़ाने के लिए मन में विश्वास पैदा करना होगा कि जो काम शुरू किया है, उसमें सफलता जरूर मिलेगी।

“अगर सच्चे-मन से जीवन में कुछ करने की ठान लाे, ताे सफलता आपकाे जरुर मिलेगी।”-Kmsraj51

अगर व्यक्ति अपने मन में विश्वास रखे कि वह एक बड़े पुरस्कार के लिए काम कर रहा है और जीत उसी की होगी, तो सफलता निश्चित है। विश्वास एक टॉनिक है, जो इंसान की सारी शक्तियों को सक्रिय कर देता है। संदेह होने पर इंसान कोशिश करना बंद कर देता है और विश्वास के कारण वह मुश्किलों में भी आगे बढ़ता रहता है। अब यह आप पर है कि आप किसे चुनते हैं। मन में बैठे संदेहों को दूर करने के लिए सफलता की मनोकामना भी जरूरी है। जब तक आप खुद संदेह को मौका नहीं देते, तब तक वह आप पर हावी नहीं हो सकता। एक कहावत है, “निश्चय कर लो कि तुम सही हो और फिर आगे बढ़ते जाओ, पर सारा दिन निश्चय करने में व्यतीत मत कर दो।”

मेरा यही मानना है कि, किसी चीज या परिस्थिति पर शक करने की बजाय आपको तुरंत फैसले लेने होंगे, तभी तेजी से तरक्की कर पाएंगे। आपको अपने मन को समझना होगा और तय करना होगा कि आपको कहां जाना है। संदेह के कारण आप बैठे रहेंगे और दुनिया आगे बढ़ती जाएगी। अपने मन में छुपे डरों को दूर करके विश्वास की ताकत को समझिए। ज्यादातर लोग संदेह इसलिए करते हैं, क्योंकि उनके मन में नकारात्मकता होती है।

उन्हें लगता है कि वे सफलता के काबिल नहीं है। अगर उन्हें थोड़ी सी विफलता मिलती है तो वे हार मान लेते हैं। इसकी बजाय विफलता मिलने पर ज्यादा ताकत के साथ आगे बढ़ना चाहिए। संदेह को दूर भगाएं। मन में विश्वास जगाएं कि आप आगे बढ़ सकते हैं, आप काबिल हैं और आप भी सफल हो सकते हैं।

– In English –

Will not doubt would success Shakespeare wrote, “our suspicions are a traitor. We can achieve success, which he cannot do because not only suspected padkar endeavours.”There is no such human according to work and a little bit too doubt stops the work and enthusiasm are defeated on. Doubt that instead should be more inclined to trust. Striving to move forward in human life and endeavour goes awry due to doubts. Reduces the enthusiasm of individual suspicion. Due to the suspicion is the right person waits of time. It will work on that reasonable opportunity. Those who doubt their abilities, they always live in a dilemma whether to even start that work. They always keep to avoid work. They always feel that there is just the right time. They may not be able to determine your direction and around languish. Rigid suspiciously must instill confidence in mind for what is success will of course began to work. If the person believes in his mind that he is working for a big prize and win would be the same, then success is sure. Faith is a tonic, which gives all powers of the active person. Doubt stops the person try and believe in odds because he moves forward. Now it’s up to you to whom you choose. To overcome the doubts in the minds of her desire is also required. As long as you do not suspect himself, he could not prevail upon you. Get a saying, “surely you’re right and then moving on to decide to go, don’t spend all day on the two.” I only believe that, instead of doubting a thing or situation you will immediately the fast decisions may be able to elevate. You have to understand his mind and decide whether you where to go. Doubt you will be seated and the world will grow further. By removing hidden in your mind and persisted in faith know the power of. Most people suspect so, because his mind is negativity. They think they don’t deserve the success. If they lose the slightest failure if they assume. Instead when a failure should move forward with more force. The suspicion bhagaen. Jagaen believe in mind that you can proceed, you deserve it and you too can be successful. 

Priyank Dubey

Roorkee-Uttarakhand

We are grateful to Priyank Dubey Ji for sharing this inspirational Hindi story with KMSRAJ51 readers.

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सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।

यह गिफ्ट में या धनी परिवार में पैदा होने से नहीं मिलती है।

-Kmsraj51

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बस यही बताना था

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

बस यही बताना था(अनुराधा त्रिवेदी सिंह)

आज अपने बेटे को झूठ भी सिखाना है

चाँद जैसे माथे पर

असत का काला टीका, कैसे भी सजाना है

आज मुझे बेटे को झूठ भी सिखाना है ।

आज तक बताया था कुछ गलत नहीं करना

चाहे जो भी हो जाये सच से तुम नहीं डरना

सत की राह पर चलते दण्ड के भागी बनना

पर कभी तुम्हें न सिर ग्लानि से झुकाना है ।

आज मैं बताऊँगी कि कभी-कभी दुनिया

सच से रूठ जाती है, मान झूठ जाती है

आज मैं बताऊँगी कैसे कुछ सगे रिश्ते

सच से टूट जाते हैं,फिर नहीं जुड़ पाते हैं।

और ये कि जीवन में सब सही नहीं होता

एक रंग सिलेटी भी कैनवास पे होता है

हर कहीं सफ़ेदी या स्याह रंग नहीं होता।

आज वो ये जानेगा, नज़रें फेर लेने में,

भी बड़ी दिलेरी है, सबने नज़रें फेरीं हैं।

आम आदमी हैं हम, हर कथा के नायक हैं

पर हरेक मौक़े पर मूक ही रहे हैं हम

ये नहीं कि कायर थे, वक़्त का तक़ाज़ा था ।

साथ ही बताऊँगी, जब भी तुम बड़े होगे

सच का साथ ही देना

बस यही बताना था इस अनोखी दुनिया में

सबके सच अलहदा हैं, सबकी कसौटी अपनी ।

आज साँझ की बेला शीशे जैसी आँखों में

एक बाल रखना है

आज साँझ की बेला नन्ही भोली आँखों से

एक सच परखना है ।

—————————————————

We are grateful to Anuradha Trivedi Singh Ji for sharing this inspirational Hindi poetry with http://kmsraj51.com/ readers.

Blog by Anuradha Trivedi Singh ji  http://anuradhadei.blogspot.in/

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cymt-kmsraj51

अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥

-Kmsraj51

 

 

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कहीं आप monkey business में तो नहीं लगे हैं?

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT09

Beware-of-Monkey-Business

Beware of Monkey Business

कहीं आप Monkey Business में तो नहीं लगे हैं? 

एक  समय  की  बात  है , एक  गाँव  में  एक  आदमी  आया  और  उसने  गाँव  वालों  से  कहा कि  वो  बन्दर  खरीदने  आया  है , और  वो  एक  बन्दर  के  10 रुपये  देगा . चूँकि  गाँव  में  बहुत  सारे  बन्दर  थे  इसलिए  गाँव  वाले  तुरंत  ही  इस  काम  में  लग  गए .

उस  आदमी  ने  10 रूपये  की  rate से  1000 बन्दर  खरीद  लिए  अब  बंदरों  की  supply काफी  घट  गयी  और  धीरे  धीरे  गाँव  वालों  ने  बन्दर  पकड़ने  का  प्रयास  बंद  कर  दिया . ऐसा  होने पर  उस  आदमी  ने  फिर  घोषणा  की  कि  अब  वो  20 रूपये  में  एक  बन्दर  खरीदेगा . ऐसा  सुनते  ही गाँव  वाले  फिर  से  बंदरों  को  पकड़ने  में  लग  गए .

बहुत  जल्द  बंदरों  की  संख्या  इतनी  घाट  गयी  की  लोग  ये  काम  छोड़  अपने  खेती -बारी  में  लगने  लगे . अब  एक  बन्दर  के  लिए  25 रुपये  दिए  जाने  लगे , पर  उनकी  तादाद  इतनी  कम  हो  चुकी  थी  की  पकड़ना  तो  दूर  उन्हें  देखने  के  लिए  भी  बहुत  मेहनत  करनी  पड़ती  थी .

तब  उस  आदमी  ने  घोषणा  की  कि  वो  एक  बन्दर  के  50 रूपये  देगा . पर  इस  बार  उसकी  जगह  बन्दर  खरीदने  का  काम  उसका  assistant करेगा  क्योंकि  उसे  किसी  ज़रूरी  काम  से  कुछ  दिनों  के  लिए  शहर  जाना  पद  रहा  है . उस  आदमी  की  गैरमौजूदगी   में  assistant ने  गाँव  वालों  से  कहा  कि  वो  पिंजड़े  में  बंद  बंदरों  को  35 रुपये  में  उससे  खरीद  लें  और  जब  उसका  मालिक  वापस  आये  तो  उसे  50 रुपये  में  बेंच  दें .

फिर  क्या  था  गाँव  वाले  ने  अपनी  जमा  पूँजी   बदारों  को   खरीदने  में  लगा  दी . और  उसके  बाद  ना  कभी  वो  आदमी  दिखा  ना  ही  उसका  assistant, बस  चारो  तरफ  बन्दर  ही  बन्दर  थे .

दोस्तों  कुछ  ऐसा  ही  होता  है  जब  Speak Asia जैसी  company अपना  business  फैलाती  है . बिना  ज्यादा  मेहनत  के  जब  पैसा  आता  दीखता  है तो  अच्छे-अच्छे  लोगों  की  आँखें  चौंधिया  जाती  हैं  और  वो  अपने  तर्क  सांगत  दिमाग  की  ना  सुनकर  लालच  में  फँस  जाते  हैं .

जब  Speak Aisa आई  थी  तो  मुझे  भी  कई  लोगों  ने  इस  join करने  के  लिए  कहा  था , पर  मैंने  join नहीं  किया  क्योंकि  मैं  उनके  business model से  संतुष्ट  नहीं  हो  पाया . और  यकीन  जानिये  ज्यादातर  लोग  संतुष्ट  नहीं  हो  पाते  , जब  बहुत  आसानी  से  पैसा  आता  दीखता  है  तो  कहीं  ना  कहीं  आपके  अन्दर  से  आवाज़  आती  है  कि  कहीं  कुछ  गड़बड़  है , पर  हम  ये  सोच  के  पैसे  लगा  देते  हैं  की  अगर  company 6 महीने  और  नहीं  भागी   तो  भी  मेरा  पैसा  निकल  जायेगा .

कई  लोगों  का  पैसा  निकल  भी  जाता  है , पर  जहाँ  एक  आदमी  को  फायदा  होता  है  वहीँ  10 लोगों  का  नुकसान  भी  होता  है  यानि  यदि  आप  अपने  लाभ  के  लिए  किसी  ऐसी  company से  जुड़ते  हैं  तो  आप  कई  लोगों  का  नुकसान  भी  कराते हैं . और  अधिकतर  नुकसान  उठाने  वाले  लोग  आपके  करीबी  होते  हैं . इसलिए  कभी  भी  ऐसे  लुभावने  वादों  में  मत  आइये ; आप  पैसे  तो  गवाएंगे  ही  साथ  में  रिश्तों  में  भी  दरार  पड़  जायेगी .

तो  अब  जब  कभी  कोई  आपसे  बिना  मेहनत  के  पैसा  कमाने   की  बात  करे  आप  उसे  इस  Monkey Business की कहानी सुना  दीजिये  और  अपना  पल्ला  झाड  लीजिये :)

*Monkey Business means mischievous, suspect, dishonest, or meddlesome behaviour or acts

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जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते”।

-पूज्य आचार्य श्री बाल कृष्ण जी महाराज

 

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क्या बनेंगे ये ?

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Kya Banenge Ye क्या बनेंगे ये

क्या बनेंगे ये ?

यूनिवर्सिटी के एक प्रोफ़ेसर ने अपने विद्यार्थियों को एक एसाइनमेंट दिया।  विषय था मुंबई की धारावी झोपड़पट्टी में रहते 10 से 13 साल की उम्र के लड़कों के बारे में अध्यन करना और उनके घर की तथा सामाजिक परिस्थितियों की समीक्षा करके भविष्य में वे क्या बनेंगे, इसका अनुमान निकालना।

कॉलेज विद्यार्थी काम में लग गए।  झोपड़पट्टी के 200 बच्चो के घर की पृष्ठभूमिका, मा-बाप की परिस्थिति, वहाँ के लोगों की जीवनशैली और शैक्षणिक स्तर, शराब तथा नशीले पदार्थो के सेवन , ऐसे कई सारे पॉइंट्स पर विचार किया गया ।  तदुपरांत हर एक  लडके के विचार भी गंभीरतापूर्वक सुने तथा ‘नोट’ किये गए।

करीब करीब 1 साल लगा एसाइनमेंट पूरा होने में।  इसका निष्कर्ष ये  निकला कि उन लड़कों में से 95% बच्चे गुनाह के रास्ते पर चले जायेंगे और 90% बच्चे बड़े होकर किसी न किसी कारण से जेल जायेंगे।  केवल 5% बच्चे ही अच्छा जीवन जी पाएंगे।

बस, उस समय यह एसाइनमेंट तो पूरा हो गया , और बाद में यह बात का विस्मरण हो गया। 25 साल के बाद एक दुसरे प्रोफ़ेसर की नज़र इस अध्यन पर पड़ी , उसने अनुमान कितना सही निकला यह जानने के लिए 3-3 विद्यार्थियो की 5 टीम बनाई और उन्हें धारावी भेज दिया ।  200 में से कुछ का तो देहांत हो चुका था तो कुछ  दूसरी जगह चले गए थे।  फिर भी 180 लोगों से मिलना हुवा।  कॉलेज विद्यार्थियो ने जब 180 लोगों की जिंदगी की सही-सही जानकारी प्राप्त की तब वे आश्चर्यचकित हो गए।   पहले की गयी स्टडी के  विपरीत ही परिणाम दिखे।

उन में से केवल 4-5 ही सामान्य मारामारी में थोड़े समय के लिए जेल गए थे ! और बाकी सभी इज़्ज़त के साथ एक सामान्य ज़िन्दगी जी रहे थे। कुछ तो आर्थिक दृष्टि से बहुत अच्छी स्थिति में थे।

अध्यन कर रहे विद्यार्थियो तथा उनके प्रोफ़ेसर साहब को बहुत अचरज हुआ कि जहाँ का माहौल गुनाह की और ले जाने के लिए उपयुक्त था वहां लोग महेनत तथा ईमानदारी की जिंदगी पसंद करे, ऐसा कैसे संभव हुवा ?

सोच-विचार कर के विद्यार्थी पुनः उन 180 लोगों से मिले और उनसे ही ये जानें की कोशिश की।  तब उन लोगों में से हर एक ने कहा कि “शायद हम भी ग़लत रास्ते पर चले जाते, परन्तु हमारी एक टीचर के कारण हम सही रास्ते पर जीने लगे।  यदि बचपन में उन्होंने हमें सही-गलत का ज्ञान नहीं दिया होता तो शायद आज हम भी अपराध में लिप्त होते…. !”

विद्यार्थियो ने उस टीचर से मिलना तय किया।  वे स्कूल गए तो मालूम हुवा कि वे  तो सेवानिवृत हो चुकी हैं ।  फिर तलाश करते-करते वे उनके घर पहुंचे ।  उनसे सब बातें बताई और फिर पूछा कि “आपने उन लड़कों पर ऐसा कौन सा चमत्कार किया कि वे एक सभ्य नागरिक बन गए ?”

शिक्षिकाबहन ने सरलता और स्वाभाविक रीति से कहा : “चमत्कार ? अरे ! मुझे कोई चमत्कार-वमत्कार तो आता नहीं।  मैंने तो मेरे विद्यार्थियो को मेरी संतानों जैसा ही प्रेम किया।  बस ! इतना ही !” और वह ठहाका देकर जोर से हँस पड़ी।

मित्रों , प्रेम व स्नेह से पशु भी वश हो जाते है।  मधुर संगीत सुनाने से गौ भी अधिक दूध देने लगती है।  मधुर वाणी-व्यवहार से पराये भी अपने हो जाते है।  जो भी काम हम करे थोड़ा स्नेह-प्रेम और मधुरता की मात्रा उसमे मिला के करने लगे तो हमारी दुनिया जरुर सुन्दर होगी।  आपका दिन मंगलमय हो, ऐसी शुभभावना।  

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

प्रश्न :- दोस्त क्या है?\मित्र क्या है?

उत्तर :- “एक आत्मा जाे दाे शरीराें में निवास करती है”

सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।”

 

 

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फिर शाम ढल गयी, तुम आये नही आज भी…

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दर्द जो रह गया……………………..

अब आँसुओं को आँखों में सजाना होगा…..

चिराग भुज गए हैं राहुल, खुद को जलाना होगा….

ना समझना की तुमसे दूर रहकर के खुश हूँ…

लेकिन मुझ को लोगों की खातिर मुस्कुराना होगा….

फिर शाम ढल गयी, तुम आये नही आज भी…

दिल को आज फिर उमीदों से बहलाना होगा….

ये भी मालूम है मुझे…

इन्ही उमीदों पर कट जायेगी ये जिन्दगी मेरी…

और आखिर में राहुल को खाली हाथ ही…..

तेरे बिना, तेरी यादों के साथ ही इस दुनिया से जाना होगा……..

Rahul Sir

Note:- Post share by My dear Friend Mr. Rahul  Sharma.

श्रीमान- राहुल शर्मा मेरे बहुत पुराने दोस्त और एक कवि हृदय है।

मैं हृदय से श्री- राहुल शर्मा का बहुत आभारी हूँ. दिल काे छुने वाली हिंदी कविता शेयर करने लिए।

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– मुरली –

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हिंदी मुरली (22-Sep-2014)

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – बेहद की स्कॉलरशिप लेनी है तो अभ्यास करो-एक बाप के सिवाए और कोई भी याद न आये”

प्रश्न:- बाप का बनने के बाद भी यदि खुशी नहीं रहती है तो उसका कारण क्या है?
उत्तर:- 1- बुद्धि में पूरा ज्ञान नहीं रहता। 2- बाप को यथार्थ रीति याद नहीं करते। याद न करने के कारण माया धोखा देती है इसलिए खुशी नहीं रहती। तुम बच्चों की बुद्धि में नशा रहे-बाप हमें विश्व का मालिक बनाते हैं, तो सदा हुल्लास और खुशी रहे। बाप का जो वर्सा है-पवित्रता, सुख और शान्ति, इसमें फुल बनो तो खुशी रहेगी।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) जैसे शिवबाबा का कोई भभका नहीं, सर्वेन्ट बन बच्चों को पढ़ाने के लिए आये हैं, ऐसे बाप समान अथॉरिटी होते हुए भी निरहंकारी रहना है। पावन बनकर पावन बनाने की सेवा करनी है।
2) विनाश काल के समय ईश्वरीय लॉटरी लेने के लिए प्रीत बुद्धि बन याद में रहने वा दैवीगुणों को धारण करने की रेस करनी है।

वरदान:- एक बल एक भरोसे के आधार पर माया को सरेन्डर कराने वाले शक्तिशाली आत्मा भव
एक बल एक भरोसा अर्थात् सदा शक्तिशाली। जहाँ एक बल एक भरोसा है वहाँ कोई हिला नहीं सकता। उनके आगे माया मूर्छित हो जाती है, सरेन्डर हो जाती है। माया सरेन्डर हो गई तो सदा विजयी हैं ही। तो यही नशा रहे कि विजय हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। यह अधिकार कोई छीन नहीं सकता। दिल में यह स्मृति इमर्ज रहे कि हम ही कल्प-कल्प की शक्तियां और पाण्डव विजयी बने थे, हैं और फिर बनेंगे।

स्लोगन:- नई दुनिया की स्मृति से सर्व गुणों का आह्वान करो और तीव्रगति से आगे बढ़ो।

English Murli (22-Sep-2014)

Essence: Sweet children, in order to claim an unlimited scholarship, practise remembering only the one Father and no one else.

Question: What are the reasons for not experiencing happiness even after belonging to the Father?
Answer: 1. The full knowledge doesn’t remain in the intellect.
2. You do not remember the Father accurately. Because you don’t remember Baba, Maya deceives you. This is why there isn’t happiness. You children should have intoxication in your intellects that the Father is making you into the masters of the world, and you will then always have enthusiasm and happiness. Become full of the Father’s inheritance of purity, happiness and peace and you will remain happy.

Essence for dharna:
1. Just as Shiv Baba doesn’t have any pomp and He has come as the Servant to teach you children, so, you are an authority like the Father and you too remain egoless. Become pure and do the service of making others become pure.
2. In order to claim a Godly lottery at the time of destruction, be one with a loving intellect and race to stay in remembrance and imbibe divine virtues.

Blessing: May you be a powerful soul and make Maya surrender on the basis of your having one strength and one support.
One strength and one support means to be constantly powerful. Where there is one strength and one support, no one can shake you. Maya wilts in front of such souls and surrenders herself. When Maya surrenders herself, you are constantly victorious. So, always have the intoxication that victory is your birthright. No one can snatch this right away from you. Let the awareness emerge in your hearts that you are the Shaktis and Pandavas who have been victorious every cycle, are victorious and so will be once again.

Slogan: Invoke all the virtues by having the awareness of the new world and move forward at an intense speed.

आध्यात्मिक सेवा में ब्रह्मकुमारी,

In Spiritual Service Brahmakumari,

Note::-

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साहित्य का सहज अर्थ…..

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literature-2

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मेरे कुछ आंतरिक शाब्दिक विचार।

साहित्य का सहज अर्थ है अपनी सभ्यता-संस्कृति,अपने परिवेश को अपने शब्दों में अपने दृष्टिकोण के साथ पाठकों, श्रोताओं के मध्य प्रस्तुत करना  . पर यदि दृष्टिकोण,शब्द कृत्रिम आधुनिकता या आवेश से बाधित हो तो उसे साहित्य का दर्जा नहीं दे सकते।  साहित्य, जो सोचने पर मजबूर कर दे,उत्कंठा से भर दे।
प्राचीन ह‍िन्दी साहित्य की परंपरा काफी समृद्ध और विशाल रही है और आज भी है। ह‍िन्दी साहित्य को सुशोभित-समृद्ध करने में मुंशी प्रेमचंद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी वर्मा, पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, रामवृक्ष बेनीपुरी, डॉ. हरिवंशराय बच्चन, कबीर, रसखान, मलिक मोहम्मद जायसी, रविदास (रैदास), रमेश दिविक, रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’, आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, पं. माखनलाल चतुर्वेदी, डॉ. धर्मवीर भारती, जयशंकर प्रसाद, डॉ. शिवमंगलसिंह सुमन, अज्ञेय, अमीर खुसरो, अमृतलाल नागर, असगर वजाहत, आचार्य चतुरसेन शास्त्री, आचार्य रजनीश, अवधेश प्रधान, अमृत शर्मा, असगर वजाहत, अनिल जनविजय, अश्विनी आहूजा, देवकीनंदन खत्री, भारतेंदु हरी‍शचंद्र, भीष्म साहनी, रसखान, अवनीश सिंह चौहान आदि का कमोबेश महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
मोहम्मद इक़बाल की इन दो पंक्तियों को आज भी हम उदहारण मानते हैं –
“नहीं है नाउम्मीद इक़बाल अपनी किश्ते-वीरां से
ज़रा नम हो तो ये मिट्टी बड़ी ज़रखेज़ है साक़ी”
प्रकृति से जुड़े हैं कवि पंत के साथ –
“प्रथम रश्मि का आना रंगिणी तूने कैसे पहचाना
कहाँ-कहाँ हे बाल विहंगिणी पाया तूने यह गाना”
और रहस्यवाद से छायावाद तक की परिक्रमा करते हैं
रहस्य का अर्थ है -“ऐसा तत्त्व जिसे जानने का प्रयास करके भी अभी तक निश्चित रूप से कोई जान नहीं सका। ऐसा तत्त्व है परमात्मा। काव्य में उस परमात्म-तत्त्व को जानने की, जानकर पाने की और मिलने पर उसी में मिलकर खो जाने की प्रवृत्ति का नाम है-रहस्यवाद।”
छायावाद को आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने शैली की पद्धतिमात्र स्वीकारा है तो नंददुलारे वाजपेयी ने अभिव्यक्ति की एक लाक्षणिक प्रणाली के रूप में अपनाया है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसे रहस्यवाद के भुल-भुलैया में डाल दिया तो डॉ. नगेंद्र ने ‘स्थूल के विरुद्ध सूक्ष्म का विद्रोह’ कहा। आलोचकों ने छायावाद की किसी न किसी प्रवृत्ति के आधार पर उसे जानने-समझने का प्रयास किया। छायावाद संबंधी विद्वानों की परिभाषाएँ या तो अधूरी हैं या एकांगी। इस संदर्भ में नामवर सिंह का छायावाद (1955) संबंधी ग्रंथ विशेष अर्थ रखता है। उन्होंने एक नए एंगल से छायावाद को देखा। उनके शब्दों में – ‘छायावाद उस राष्ट्रीय जागरण की काव्यात्मक अभिव्यक्ति है जो एक ओर पुरानी रूढ़ियों से मुक्ति चाहता था और दूसरी ओर विदेशी पराधीनता से। इस जागरण में जिस तरह क्रमशः विकास होता गया, इसकी काव्यात्मक अभिव्यक्ति भी विकसित होती गई और इसके फलस्वरूप छायावाद संज्ञा का भी अर्थ विस्तार होता गया।’1
परिभाषाओं से इतर है हमारी कल्पना – जिसमें रहस्य भी है, छायावाद भी, नौ रसों का अद्भुत स्वाद भी  … किसी भी युग का एक दृष्टिकोण नहीं, न धर्म का – अर्थ वही है, जो आपकी दिशा बदल दे, आपको सोचने पर मजबूर करे  … इसी उद्देश्य में मेरे कुछ आंतरिक शाब्दिक विचार –
बातें अनगिनत होती हैं
कुछ मन को सहलाती हैं
कुछ बिंधती हैं
कुछ समझाती हैं  …
समझते समझते मन को सहलाना खुद आ जाता है
क्योंकि सहलानेवाली बातेँ खत्म हो जाती हैं – अचानक !
इसी समापन के आगे शब्द भाव जन्म लेते हैं
मन को सहलाते हुए
कब ये वृक्ष बढ़ने लगते हैं
कब ख्यालों के पंछी
अपनी अभिव्यक्ति के कलरव से
धऱती आकाश गुंजायमान करते हैं  … कुछ भी पता नहीं चलता और एक दिन ‘पहचान’ मिल जाती है !
इसी ठहराव सी पहचान के लिए मैं कहना चाहती हूँ –
रिश्ता,प्यार,दोस्ती

 सिर्फ इन्हें ही नहीं निभाना होता

अपमान भी निभाना पड़ता है !
प्यार का सम्मान ज़रूरी है
तो शांति से जीने के लिए
अपमान का सम्मान कहीं अधिक ज़रूरी है !
निःसंदेह,
अपमान ग्राह्य नहीं होता
पर जीवन का बहुत बड़ा
गहन, गंभीर अध्याय
इसे ग्राह्य बनाता है
कितने भी हाथ-पाँव मार लो विरोध के
ग्राह्य बनाना पड़ता है !
कोई जवाब देने से पहले
अपनी अंतरात्मा के घायल वजूद को देखो
और चिंतन करो
– कब
कहाँ
कितनी बार
तुमने परिस्थिति के अपमानजनक हिस्से को
अपनी मुस्कान दी है
आवभगत किया है  …
शर्मिंदगी की बात नहीं
ज़िन्दगी की शिक्षा
इन्हीं परिस्थितियों की चुभन से मिलती है  …
जब तक सूरज पूरब की ओर से
सर के ऊपर तक होता है
ज़िन्दगी का फलसफा अबोध होता है
हम – तुम
बड़ी बड़ी बातें करते हैं
पर पश्चिम तक बढ़ते
अस्ताचल तक पहुँचते मार्ग में
समझौते ही समझौते होते हैं
 अपमान का गरल पीकर
नीलकंठ बनकर
मुस्कुराना ही होता है
अतिथि देवो भवः कहकर
घातक दुश्मन को गले लगाना ही होता है
….
मुश्किलों को आसान बनाने के लिए
अपमान को निभाना ही होता है !!!
सूक्तियों के कोलाहल में मुझे पूछना है – 
अन्याय करना पाप है

तो अन्याय सहना भी  …
बिल्कुल !
लेकिन अन्याय करना अन्यायी का स्वभाव है
अन्याय सहना स्वभाव नहीं
परिस्थिति की न्यायिक माँग है !
कोर्ट में मसले वर्षों की फाइल में मर जाते हैं
पर जीता हुआ सत्य
पेट की आग
परिवार की सूक्ति
समाज की भर्तस्ना में
खामोश बुत हो जाता है !
इस बुत पर हाथ उठाओ
या घसीटते जाओ
यह मूक रहता है
हँसी भी इसकी शमशान जैसी होती है
उसकी भी आलोचना भरपूर होती है  …
‘मेरे टुकड़ों पर पलती है’ कहता पति हाथ उठाता है
निकल जाए जो स्त्री स्वाभिमान के साथ
तो – कई फिकरे !!!
स्वाभिमान का तमाशा जब होता है
तब उसके विरोध में कोई कैंडल मार्च नहीं होता
सबके अपने व्यक्तिगत कारण होते हैं
‘विरोध करके हम अपना रिश्ता क्यूँ बिगाड़ें’
‘माहौल नहीं था कहने का’  …
सही है
तो  … अन्याय सहने की स्थिति को पाप मत कहो
यह पाप करने की ताकत में
सब मिलकर अन्याय का घृत डालते हैं
यानी पाप करते हैं
इसलिए ……धर्म के मायने पूछने से पहले
अपने धर्म का खाता खोलिए
देखिये, अधर्मी की लिस्ट में आपका नाम तो नहीं !!!
निःसंदेह शिक्षा,परिवर्तन और आधुनिकता का व्यापक शोर है, पर सत्य जो है वह टिमटिमाता हुआ  … कुछ इस तरह,
वर्तमान की देहरी पर
ख़ामोशी जब भयावह हो उठती है

तब खोल देती हूँ अतीत के कब्रिस्तान का दरवाजा

दहला देनेवाली चुप सी चीखें
रेंगता साया
विस्फारित चेहरों की लकीरें  …
अतीत और वर्तमान में
बदलाव तो है
पर उसी तरह –
जिस तरह लड़कियों के जीवन में दिखाई देता है !!!
वक्तव्य ठोस – लड़का लड़की समान
लड़की लड़के से बेहतर !
लड़की कमाने लगी
पर थकान आज भी एक-दो घरों को छोड़
सिर्फ लड़कों की !
दहेज़ की माँग पूर्ववत !
गोरी,काली का भेद नहीं जाता उसकी नौकरी से
और लड़का –
घी का लड्डू टेढ़ो भलो !!!
परिवर्तन का शोर
परिवर्तन –
भाषण और सच के मध्य  बारीक लकीर जैसी …
लड़कियों का उच्चश्रृंखल अंदाज परिवर्तन नहीं
कम कपड़े परिवर्तन नहीं
परिवर्तन है –
नौकरी के लिए घर से बाहर अपनी तलाश
तलाश के आगे कई सपनों की हत्या !
परिवर्तन है –
लड़की का लड़का बन जाना
और उस वेशभूषा में सीख –
कुछ लड़की सा व्यवहार करो !
लड़की लड़का सी हो
या संकुचित सिमटी
या व्यवहारिक  …
आलोचना होती रहती है !
हादसे के बाद उसकी इज़्ज़त नहीँ होती
नहीं होता कोई न्याय
तमाम गलतियों की जिम्मेदार वही होती है
माशाअल्लाह
लड़के में कोई खामी नहीं होती !
वह खून करे
इज़्ज़त छिन ले
शराब पीकर,क्रोध में हाथ उठाये
फिर भी वह दोषी नहीं होता
परस्त्री को देखे
तो पत्नी में कमी
वह बाँधकर रखने में अक्षम है
पुरुष तो भटकेगा ही !!!
है न परिवर्तन में वही सड़ांध ?
…. हाँ लड़कियाँ पढ़-लिख गई हैं
देश-विदेशों में नौकरी करने लगी हैं
…घर से बाहर वह दौड़ रही है अपना अस्तित्व लिए
घर में कमरे के भीतर वह जूझ रही है
अपने अस्तित्व के लिए
यूँ  …. अपवाद कल भी था , आज भी हैं
उदहारण कल भी था, आज भी है
परिवर्तन एक शोर है
संसद भवन जैसा
जहाँ कोई किसी की नहीं सुनता
शहरी सियार की हुआ हुआ है
जो आज भी जंगली है !!!

Note:- “Post share by Mrs. “

संक्षेप में रश्मि प्रभा जी के बारे में-

मेरा लेखन से सम्बन्ध मेरे परिवार की अमूल्य विरासत है, जिसकी कलम मेरे पिता स्व रामचन्द्र प्रसाद ने खरीदी,मेरी अम्मा स्व सरस्वती प्रसाद ने पन्नों को मुखर बनाया । मैं उनसे निर्मित वह पौधा हूँ, जिसे मेरी अम्मा ने सींचा,काट-छाँट की, कवि पंत ने मुझे नाम दिया – मेरे पिता ने कहा -“बेटी, अपने नाम के अनुरूप बनना” … मैं नहीं जानती कि मैंने इस नाम को कितनी सार्थकता दी, पर मेरा प्रयास, मेरा लक्ष्य इस विरासत को पूर्णता देना है . कविता है कवि की आहट उसके जिंदा रहने की सुगबुगाहट उसके सपने उसके आँसू उसकी उम्मीदें उसके जीने के शाब्दिक मायने …

Blog Link :-  http://lifeteacheseverything.blogspot.in/

I am very grateful to श्रीमती – रश्मि प्रभा जी for sharing inspirational “साहित्य का सहज अर्थ है” article.

Note::-

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आप कुछ भी कर सकते हैं, स्वयं पर विश्वास करना सीखें।

You can also learn to trust themselves.

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

 

जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

~KMSRAJ51

 

 

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प्रभु जरुर खुश होंगे।

Kmsraj51 की कलम से…..

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एक बार एक अजनबी किसी के घर गया। वह अंदर गया और मेहमान कक्ष मे बैठ गया। वह खाली हाथ आया था तो उसने सोचा कि कुछ उपहार देना अच्छा रहेगा। तो उसने वहा टंगी एक पेन्टिंग उतारी और जब घर का मालिक आया,उसने पेन्टिंग देते हुए कहा, यह मै आपके लिए लाया हुँ। घर का मालिक, जिसे पता था कि यह मेरी चीज मुझे ही भेंट दे रहा है, सन्न रह गया। अब आप ही बताएं कि क्या वह भेंट पा कर, जो कि पहले से ही उसका है, उस आदमी को खुश होना चाहिए ? मेरे ख्याल से नहीं। लेकिन यही चीज हम भगवान के साथ भी करते है। हम उन्हें फूल, फल और हर चीज जो उनकी ही बनाई है, उन्हे भेंट करते हैं और सोचते हैं कि ईश्वर खुश हो जाएगें। हम यह नहीं समझते कि उनको इन सब चीजो कि जरुरत नही। अगर आप सच मे उन्हे कुछ देना चाहते हैं तो अपना प्यार दीजिए उन्हे अपने हर एक श्वास मे याद करके और विश्वास मानिए प्रभु जरुर खुश होंगे ।

English-

Once an alien has the inside someone’s House and guests sat in the room came up empty handed so she thought that would be nice to give some gifts so he find the owner of the House and launched a tangi came when painting, he said, were painting it I brought for you at work. the master of the House, which knew it is only offering me my stuffTell you now, shocking live. whether it can find, which is already offering his, that man should be happy? My guess is no, but the same thing we do with God we have them flowers, fruits and everything that has made his own, called them and think that God will be happy we don’t understand that they don’t need all these things with that. If you really want to give them something in your love remember every single breathing them in your hand and believe will be happy the Lord manie notice.

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Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

-KMSRAJ51 

 

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“तुने प्यार किया है जिससे…… अब वो तेरे साथ नही……”

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रात राहुल के साथ तू जागा करता था……….

ए चाँद ! बता की तू मेरा कौन लगता था………….

पिछले पहर की रात थी………..

तन्हाइयां और उसकी याद थी………..

चाँद ने मुझसे कहा—“कौन है…?”

मैंने कहा—- कोई ख़ास नही………!

वो बोला मुझसे ——“ज़िन्दगी कैसी है…..?”

मैंने कहा——कोई साथ नही…..

बोला फिर——क्या चाहते हो राहुल …?

मैंने कहा—-अब कोई आस नही……

बोला तुमने प्यार किया है…..?

मैंने कहा—-कुछ याद नही…..

बोला तुम्हारे साथ भी धोका हुआ …….?

मैंने हँसकर कहा—–ऐसी कोई बात नही…

बोला फिर —-एक बात कहूँ तुमसे….?

मैंने कहा–कोई ऐतराज नही……

बोला फिर वो राहुल से—

“तुने प्यार किया है जिससे….

अब वो तेरे साथ नही………………..”

Rahul Sir

Note:- Post share by My dear Friend Mr. Rahul  Sharma.

श्रीमान- राहुल शर्मा मेरे बहुत पुराने दोस्त और एक कवि हृदय है।

मैं हृदय से श्री- राहुल शर्मा का बहुत आभारी हूँ. –दिल काे छुने वाली हिंदी कविता शेयर करने के लिए।

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

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आप कुछ भी कर सकते हैं, स्वयं पर विश्वास करना सीखें।

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

 

सच्चें मन से अगर कुछ करने की ठान लाे, ताे आपकाे सभी काम में सफलता मिल जाती हैं।

जीवन में जाे भी काम कराें पुरे मन से कराें, ताे सफलता आपकाे जरूर मिलेगी।

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लिए समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

 

 

 

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अर्श रोग (बवासीर)-Piles – का आयुर्वेदिक उपचार

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अर्श रोग (बवासीर)-Piles 

Piles -अर्श रोग - बवासीर

अर्श रोग (बवासीर)-Piles

बवासीर गुदा मार्ग की बीमारी है । यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है — खूनी बवासीर और बादी बवासीर। इस रोग के होने का मुख्य कारण ” कोष्ठबद्धता ” या ”कब्ज़ ” है। कब्ज़ के कारण मल अधिक शुष्क व कठोर हो जाता है और मल निस्तारण हेतु अधिक जोर लगाने के कारण बवासीर रोग हो जाता है। यदि मल के साथ बूंद -बूंद कर खून आए तो उसे खूनी तथा यदि मलद्वार पर अथवा मलद्वार में सूजन मटर या अंगूर के दाने के समान हो और मल के साथ खून न आए तो उसे बादी बवासीर कहते हैं। अर्श रोग में मस्सों में सूजन तथा जलन होने पर रोगी को अधिक पीड़ा होती है।

बवासीर का विभिन्न औषधियों द्वारा उपचार —

१- जीरा – एक ग्राम तथा पिप्पली का चूर्ण आधा ग्राम को सेंधा नमक मिलाकर छाछ के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से बवासीर ठीक होती है।

२- जामुन की गुठली और आम की गुठली के अंदर का भाग सुखाकर इसको मिलाकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में हल्के गर्म पानी या छाछ के साथ सेवन से खूनी बवासीर में लाभ होता है। 

३- पके अमरुद खाने से पेट की कब्ज़ दूर होती है और बवासीर रोग ठीक होता है।

४- बेल की गिरी के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर , ४ ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ मिलता है।

५- खूनी बवासीर में देसी गुलाब के तीन ताज़ा फूलों को मिश्री मिलाकर सेवन करने से आराम आता है।

६ – जीरा और मिश्री मिलकर पीस लें। इसे पानी के साथ खाने से बवासीर (अर्श ) के दर्द में आराम रहता है।

७- चौथाई चम्मच दालचीनी चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन एक बार लेना चाहिए। इससे बवासीर नष्ट हो जाती है।

Post inspired by:

Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj-KMSRAJ51

पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

मैं श्री आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का बहुत आभारी हूँ!!

आपको दिल से शुक्रिया;

Ayurveda Product Available on;-

http://patanjaliayurved.org/

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

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पिपरमिंट (Peppermint)

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पिपरमिंट (Peppermint) –

पिपरमिंट (Peppermint) -

पिपरमिंट (Peppermint)

यह विश्व में यूरोप,एशिया,उत्तरी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। समस्त भारत में यह बाग़-बगीचों में विशेषतः उत्तर भारत तथा कश्मीर में लगाया जाता है। यह अत्यंत सुगन्धित क्षुप होता है। इसके तेल,सत तथा स्वरस आदि का चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। इसके पुष्प बैंगनी,श्वेत अथवा गुलाबी वर्ण के तथा पुष्पदण्ड के अग्र भाग पर लगे होते हैं। इसके फल चिकने अथवा खुरदुरे तथा बीज छोटे होते हैं। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल सितम्बर से अप्रैल तक होता है।

पिपरमिंट का औषधीय प्रयोग –

१- पिपरमिंट के क्रिस्टल को दांतों के बीच में रखकर दबाने से दांत दर्द में लाभ होता है ।

२- पिपरमिंट को छाती पर लगाने से श्वसन संस्थान गत सूजन में लाभ होता है ।

३- पिपरमिंट क्रिस्टल का सेवन करने से उलटी,अतिसार,आध्मान तथा अजीर्ण में लाभ होता है ।

४- २५ ग्राम पिपरमिंट सत में शक्कर मिलाकर सेवन करने से पेटदर्द तथा पेट के विकार ठीक होते हैं ।

५- पिपरमिंट के पत्तों को पीसकर लगाने से चींटी आदि कीटों के काटने से होने वाली वेदना का शमन होता है ।

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