आयुर्वेद-घरेलू औषधालय।

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आयुर्वेद-घरेलू औषधालय। 

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ये 5 PICS देखेंगे तो कर पाएंगे बहुत आसानी से इन 10 रोगों का इलाज।

भारतीय आयुर्वेद के अनुसार भारत के हर घर का किचन एक तरह का घरेलू औषधालय है। किचन में रखी कई चीजें जैसे मसाले, खाद्यान्न, फल-सब्जी, शहद, घी-तेल आदि औषधि का काम भी करते हैं। अत: रसोई घर को औषधि का भंडार कहना गलत नहीं होगा। आइए, जानते हैं ऐसे कुछ अनुभूत नुस्खाें के बारे मे जो वक्त पड़ने पर बेहद कारगर सिद्ध हो सकते हैं।

1⇒ एक चम्मच सरसों के तेल में एक चुटकी हल्दी और नमक मिलाकर दांतों पर लगाने या हल्के-हल्के मालिश करने से दांत का दर्द दस से पंद्रह मिनट में ठीक हो जाता है।

2⇒ अगर त्वचा पर अनचाहे बाल उग आये हों, तो इन बालों को हटाने के लिए हल्दी पाउडर को गुनगुने नारियल तेल में मिला कर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को हाथ-पैरों पर लगाएं। ऐसा करने से शरीर के अनचाहे बालों से निजात मिलती है।

3⇒ दही में भूरे जीरे का चूर्ण मिलाकर खाने से डायरिया मिटता है।

4⇒ सिरके के साथ जीरा देने से हिचकी बंद हो जाती है।

5⇒ खाना खाने को मन नहीं करता। भरपेट नहीं खा सकते। पचता भी नहीं तो धनिया, छोटी इलायची, कालीमिर्च तीनों एक जैसी मात्रा में लें। इन्हें पीस कर छान लें और शीशी में रखें। चौथाई चम्मच घी तथा आधा चम्मच चीनी में आधा चम्मच इस चूर्ण को डालकर खाएं।

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6⇒ कमजोरी में रात को पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा धनिया भिगो दें। प्रात: छानकर पी लें। कुछ दिन नियमित करें। कमजोरी दूर होगी।

7⇒ भोजन के बाद रोजाना 30 मिनट बाद सौंफ लेने से कॉलेस्ट्रोल काबू में रहता है।

8⇒ 5-6 ग्राम सौंफ लेने से लीवर और आंखों की ज्योति ठीक रहती है। गुड़ के साथ सौंफ खाने से मासिक धर्म नियमित होता है।

9⇒ अजवाइन, सौंफ और थोड़ा-सा काला नमक मिलाकर चूर्ण बनाकर खाएं। आराम मिलेगा। पेटदर्द गायब हो जाएगा।

10⇒ अजवाइन को गर्म करके पतले कपड़े में पोटली बांधकर सूंघने से जुकाम और सर्दी में लाभ होता है।

© संयोगिता सिंह। (सहारनपुर -उत्तर प्रदेश)

Post share by संयोगिता सिंह जी। I am grateful to Sanyogita Singh Ji, for sharing Ayurveda Tips in Hindi.

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विटामिन का भरपुर स्रोत अंगूर हैं।

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अंगूर फल के लाभ। 

गर्मियों में अंगूर खाने सभी को अच्छे लगते हैं। इससे अंदर ठंडक लगती है और प्यास भी बुझती है। इसके अलावा यह शरीर को हेल्दी रखने के साथ ही कब्ज, अपचन, थकान, गुर्दे की बीमारियों और आंखों में होने वाले मोतियाबिंद जैसे रोगों से भी दूर रखता है। अंगूर में विटामिन ए, सी, बी6, फोलेट के अलावा कई प्रकार के मिनरल्स जैसे पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और सेलेनियम भी पाए जाते हैं। 100 ग्राम अंगूर में सिर्फ 69 कैलोरी, प्रोटीन/वसा की मात्रा 0.3 ग्राम, मिनरल्स 0.6 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 16.5 ग्राम और फाइबर की मात्रा 2.9 ग्राम होती है। काले या हरे अंगूर में 15 से 25 प्रतिशत ग्लूकोज की मात्रा भी पाई जाती है, जो रक्त में घुलनशील होकर काफी कम समय में शरीर को भरपूर ऊर्जा देती है।
अंगूर में पाए जाने वाले फ्लैवोनॉयड्स, जो एंटी-ऑक्सीडेंट्स के रूप में काम करते हैंस ये चेहरे को झुर्रियां कम करते हैं और आपको त्वचा को बनाते हैं जवां। अंगूर में सबसे ज्यादा मात्रा में पाया जाने वाला पोषक तत्व एक स्वस्थ और हेल्दी लाइफ को बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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अंगूर से होने वाले फायदे।

♦ अंगूर से होने वाले फायदे। 

1. अस्थमा⇒

अंगूर कई प्रकार के रोगों में उपचार के तौर पर भी इस्तेमाल होता है। अस्थमा (दमा) रोगियों के लिए भी ये बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद पानी की मात्रा से फेफड़ों में भी पानी की कमी पूरी होती है, जो अस्थमा की संभावना को काफी कम कर देती है।

2. हड्डियों के लिए⇒

अंगूर कॉपर, आयरन और मैंगनीज़ का बहुत अच्छा स्रोत होता है, जो हड्डियों के निर्माण और उन्हें मजबूत बनाने में बहुत जरूरी होता है। इसका रोजाना सेवन करने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है। मैंगनीज़ भी हमारे शरीर के लिए बहुत ज़रूरी तत्व है जो नर्वस सिस्टम को सही रखता है।


3. दिल की बीमारी⇒

अंगूर खून में नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर को नियंत्रित करता है जिससे ब्लड क्लॉटिंग नहीं होती। इससे हार्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स एलडीएल कोलेस्ट्रॉल से बचाव करता है। फ्लेवोनॉइड्स की ज़्यादा मात्रा भी अच्छे एंटी-ऑक्सीडेंट का काम करती है। इससे ब्रेस्ट कैंसर नहीं फैलता। अंगूर में रेसवेराट्रॉल और क्यूरसेटिन दो प्रकार के तत्व शरीर को रेडिकल्स से बचाकर आर्टरीज़ को भी सुरक्षित रखने का काम करते हैं। ये ब्लड में प्लेटलेट्स की कमी नहीं होने देते।

Other Benefits: माइग्रेन, कब्ज, थकान और डायबिटीज से छुटकारा, दांतों के लिए फायदेमंद, अल्जाइमर बीमारी से दूर रखता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, मोतियाबिंद में कारगर, किडनी के लिए लाभकारी, त्वचा के लिए फायदेमंद, गठिया रोग से मुक्ति, मुंह के छाले खत्म करता है, त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है, असमय बुढ़ापे को रोकता है, त्वचा को कोमल बनाता है, जवां रखता है, दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाता है, बालों के विकास में मददगार, रुसी की समस्या खत्म करता है, बालों को झड़ने से रोकता है, अरोमाथेरेपी में इस्तेमाल किया जाता है।


4. माइग्रेन⇒

पके हुए अंगूर के रस के सेवन से माइग्रेन जैसी समस्या में आराम मिलता है। सुबह-सुबह बिना पानी मिलाए एक गिलास अंगूर का रस पीना बहुत फायदेमंद होता है। रेड वाइन को माइग्रेन की एक वजह मानी जाती है, लेकिन अंगूर का जूस और इसके बीज से इस समस्या को दूर किया जा सकता है। वैसे तो कम सोना, मौसम में बदलाव, पाचन समस्या में परेशानी आदि कई माइग्रेन बीमारी का कारण हो सकते हैं, लेकिन एल्कोहल के सेवन को इसकी खास वजह माना जाता है। अंगूर का जूस पीकर इसके खतरे का काफी कम किया जा सकता है।


 

5. कब्ज⇒

अंगूर कब्ज जैसी समस्या से भी राहत दिलाता है, क्योंकि इसमें मौजूद ऑर्गेनिक एसिड, शुगर और सेल्यूलोज की मात्रा पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है। इसमें भोजन को आसानी से पचाने वाले रेशे पाए जाते हैं जो न सिर्फ आंतों को साफ रखते हैं, बल्कि पेट की भी अच्छी तरह से सफाई करते हैं। अच्छे परिणाम के लिए रोजाना कम-से-कम 350 ग्राम अंगूर का सेवन करना चाहिए। यह दस्त बीमारी से भी छुटकारा दिलाता है।


 

6. थकान⇒

रोजाना अंगूर का जूस पीने से शरीर में आयरन और मिनरल्स की मात्रा बराबर बनी रहती है, जो थकान जैसी समस्या से भी कोसों दूर रखती है। वैसे तो एनीमिया आम समस्या है, लेकिन महिलाओं में ये सबसे ज्यादा पाई जाती है। ऐसे में अगर एनीमिया से छुटकारा पाना है, तो अंगूर का भरपूर मात्रा में जूस पिएं। इससे आयरन की मात्रा आपके शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखेगी जो थकान और आलसपन से भी दूर रखती है। जिंक, सेलेलियम, कार्बोहाइड्रेट और पॉलिफिनोल्स की मात्रा ब्रेन को एक्टिव रखती है। अंगूर के जूस में 2 चम्मच शहद मिलाकर पीने से खून की कमी पूरी हो जाती है।


 

7. अल्जाइमर बीमारी⇒

रेसवेराट्रॉल अंगूर में पाए जाने वाला एक बहुत ही फायदेमंद पॉलीफेनोल है जो अल्जाइमर के मरीजों में एमीलॉइडल बेटा पेपटाइड्स के स्तर को कम करता है। कई रिसर्च में ये पाया गया है कि अंगूर खाने से दिमाग हेल्दी रहता है। ब्रिटेन के साइंटिस्ट्स के अनुसार काले अंगूर में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉइड्स का सीधा संबंध नर्व सेल्स से होता है जो याददाश्त सुधारने में मदद करते हैं।


 

8. डायबिटीज⇒

डायबिटीज के रोगियों के लिए अंगूर का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। यह शुगर की मात्रा को कम करता है। खून में मौजूद शुगर को नियंत्रित करने में अंगूर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


 

9. दांतों के लिए⇒

हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार अंगूर के बीज और रेड वाइन के सेवन से कैविटी और मसूड़ों की समस्या कई प्रतिशत तक कम हो जाती है। ये मुंह की बीमारियों से भी बचाती है।


 

10. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है⇒

विटामिन ए, सी और के का खजाना समेटे अंगूर शरीर को हेल्दी बनाए रखता है। यह खासतौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इससे सर्दी, खांसी, जुकाम जैसे संक्रामक बीमारियां शरीर को जल्दी प्रभावित नहीं करतीं।


 

11. मोतियाबिंद⇒

फ्लेवोनॉइड्स में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स सिर्फ त्वचा के लिए ही नहीं, आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद होते है। ये मोतियाबिंद जैसी बीमारी से बचाते हैं।


 

12. किडनी के लिए लाभकारी⇒

अंगूर के रस में पानी और पोटैशियम की प्रचुर मात्रा होती है और एलब्यूमिन और सोडियम क्लोराइड की मात्रा काफी कम होती है जो किडनी से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर उसे स्वस्थ बनाती है।


 

13. गठिया रोग⇒

अंगूर खाने या इसका जूस पीकर गठिया रोग की संभावना को काफी कम किया जा सकता है, क्योंकि ये शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है जो गठिया रोग का मूल कारण होता है।


 

14. त्वचा के लिए⇒

अंगूर में विटामिन ए पाया जाता है, जो त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है। रोजाना सेवन से त्वचा में निखार आता है। साथ ही झुर्रियां भी कम होती हैं। आंखों के नीचे काले घेरो पर अंगूर लगाकर उसे कुछ दिनों में ही दूर भी किया जा सकता है।


 

15. मुंह के छाले⇒

अंगूर मुंह के छालों से भी राहत दिलाता है। इसके रस से कुल्ला करने से मुंह में होने वाले छाले दूर होते हैं।



 

त्वचा के लिए फायदेमंद ♥

त्वचा को हेल्दी रखने में भी अंगूर बहुत गुणकारी होता है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इनफ्लेमेटरी तत्व त्वचा के लिए जरूरी तत्वों की पूर्ति करते हैं। साथ ही किसी भी प्रकार के फलों की तरह इसमें भी मौजूद विटामिन सी त्वचा को हेल्दी रखता है।

16. सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है

अंगूर के बीजों और गूदों में मौजूद प्रोएंथोसाइनिडिंस और रेसवेराट्रॉल बहुत ही प्रभावकारी एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं। ये सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से त्वचा की रक्षा करते हैं। साथ ही त्वचा पर पड़ने वाले लाल निशान, और त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले सेल्स का खात्मा करते हैं। ज्यादातर सनस्क्रीन लोशन में अंगूर का उपयोग किया जाता है।


17. असमय बुढ़ापे को रोकता है⇒

फ्री रेडिकल्स की समस्या चेहरे पर झुर्रियों बनाती है, जो असमय बुढ़ापे का मुख्य कारण होती है। लेकिन अंगूर में मौजूद विटामिन सी, इन समस्याओं से लड़ता है और इससे होने वाले त्वचा के नुकसान को रोकता है। रोजाना केवल 20 मिनट अंगूर के गूदे से चेहरे पर मसाज करके इस समस्या को रोका जा सकता है।


18. त्वचा को कोमल बनाता है⇒

अंगूर के बीजों में विटामिन ई त्वचा में नमी की मात्रा बनाए रखते हैं। त्वचा की डेड सेल्स को हटाने के लिए अंगूर का गूदा एक अचूक उपाय है। जिससे कोमल त्वचा पाई जा सकती है। अंगूर के बीजों का तेल भी त्वचा को कोमल बनाए रखने में काफी मददगार होता है।


19. त्वचा को जवां रखता है⇒

अंगूर में मौजूद ऑर्गेनिक एसिड की मात्रा से त्वचा को जवां बनाया जा सकता है। विटामिन सी कोलेजन के निर्माण में सहायक होता है, जो जरुरी सेल्स के विकास के साथ ही रक्त के प्रवाह को भी बनाए रखता है। ये कई प्रकार की बीमारियों से लड़ता है। यहां तक कि मौसम की मार से भी बचाता है।


20. दाग-धब्बों से छुटकारा⇒

हरे अंगूर की सहायता से चेहरे के दाग-धब्बों के साथ ही पिंपल्स की समस्या को भी खत्म किया जा सकता है। विटामिन सी त्वचा के निशानों को खत्म करने में काफी कारगर होता है। अंगूर को नमक के साथ बांधकर उसे आधे घंटे के लिए पकाया जाए। फिर इसे चेहरे पर 15 मिनट लगाकर हल्के गुनगुने पानी से धो लें।


बालों के लिए फायदेमंद 

घने, चमकदार और लंबे बालों का ध्यान रखना भी एक बहुत बड़ा टास्क होता है। खाने-पीने की अनदेखी और जरूरी पोषक तत्वों की कमी से आजकल डैंड्रफ, दोमुंहे बाल, सफेद बाल और बालों के गिरने की समस्या बहुत आम बात है। लेकिन अंगूर खाकर या इसका जूस पीकर, इस समस्या से तुरंत निजात पाई जा सकती है।

21. लंबे बालों के लिए⇒

अंगूर में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स सिर के रक्त प्रवाह को सही रखते हैं। इससे बाल हेल्दी रहते हैं।इसमें कोई दोराय नहीं कि तेल बालों के विकास में मदद करता है। अंगूर के बीजों का तेल बालों में होने वाले पसीने, उसकी दुर्गंध को दूर करने के साथ ही उसे चमकदार, घना, मुलायम और लंबा बनाने में मदद करता है।


22. रूसी की समस्या खत्म करता है⇒

अंगूर के बीजों के तेल से डैंड्रफ, सिर में खुजली की समस्या दूर होती है। इसमें मौजूद पानी की मात्रा सिर में ज़रूरी नमी की पूर्ति करती है जिससे ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है।


23. बाल गिरने की समस्या से निजात⇒

अंगूर असमय बालों के झड़ने की समस्या को रोकता है। इसके बीजों में मौजूद विटामिन ई और लिनोलिक एसिड बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है। साथ ही दोमुंहे बाल, जो बालों की झड़ने की खास वजह है, उन्हें भी खत्म करता है।


24. अरोमाथेरेपी⇒

हर तरह की त्वचा के लिए फायदेमंद अंगूर के बीज को अरोमाथेरेपी के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।


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अर्श रोग (बवासीर)-Piles – का आयुर्वेदिक उपचार

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अर्श रोग (बवासीर)-Piles 

Piles -अर्श रोग - बवासीर

अर्श रोग (बवासीर)-Piles

बवासीर गुदा मार्ग की बीमारी है । यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है — खूनी बवासीर और बादी बवासीर। इस रोग के होने का मुख्य कारण ” कोष्ठबद्धता ” या ”कब्ज़ ” है। कब्ज़ के कारण मल अधिक शुष्क व कठोर हो जाता है और मल निस्तारण हेतु अधिक जोर लगाने के कारण बवासीर रोग हो जाता है। यदि मल के साथ बूंद -बूंद कर खून आए तो उसे खूनी तथा यदि मलद्वार पर अथवा मलद्वार में सूजन मटर या अंगूर के दाने के समान हो और मल के साथ खून न आए तो उसे बादी बवासीर कहते हैं। अर्श रोग में मस्सों में सूजन तथा जलन होने पर रोगी को अधिक पीड़ा होती है।

बवासीर का विभिन्न औषधियों द्वारा उपचार —

१- जीरा – एक ग्राम तथा पिप्पली का चूर्ण आधा ग्राम को सेंधा नमक मिलाकर छाछ के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से बवासीर ठीक होती है।

२- जामुन की गुठली और आम की गुठली के अंदर का भाग सुखाकर इसको मिलाकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में हल्के गर्म पानी या छाछ के साथ सेवन से खूनी बवासीर में लाभ होता है। 

३- पके अमरुद खाने से पेट की कब्ज़ दूर होती है और बवासीर रोग ठीक होता है।

४- बेल की गिरी के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर , ४ ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ मिलता है।

५- खूनी बवासीर में देसी गुलाब के तीन ताज़ा फूलों को मिश्री मिलाकर सेवन करने से आराम आता है।

६ – जीरा और मिश्री मिलकर पीस लें। इसे पानी के साथ खाने से बवासीर (अर्श ) के दर्द में आराम रहता है।

७- चौथाई चम्मच दालचीनी चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन एक बार लेना चाहिए। इससे बवासीर नष्ट हो जाती है।

Post inspired by:

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पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

मैं श्री आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का बहुत आभारी हूँ!!

आपको दिल से शुक्रिया;

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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दमा (श्वास रोग ) Asthma – आयुर्वेदिक उपचार

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दमा (श्वास रोग) अस्थमा-

दमा (श्वास रोग ) Asthma

दमा (श्वास रोग) अस्थमा

आज के समय में दमा तेज़ी से स्त्री – पुरुष व बच्चों को अपना शिकार बना रहा है । साँस लेने में दिक्कत या कठिनाई महसूस होने को श्वास रोग कहते हैं । फेफड़ों की नलियों की छोटी-छोटी पेशियों में जब अकड़न युक्त संकुचन उत्पन्न होता है तो फेफड़ा, साँस को पूरी तरह अंदर अवशोषित नहीं कर पाता है जिससे रोगी पूरा श्वास खींचे बिना ही श्वास छोड़ने को विवश हो जाता है । इसी स्थिति को दमा या श्वास रोग कहते हैं ।

दमा को पूर्ण रूप से ठीक करने हेतु प्राणायाम का अभ्यास सर्वोत्तम है ।

विभिन्न औषधियों से दमे का उपचार :-

१- अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटने से श्वास , खांसी व जुक़ाम में लाभ होता है ।

२- प्याज़ का रस , अदरक का रस , तुलसी के पत्तों का रस व शहद ३-३ ग्राम की मात्रा में लेकर सुबह-शाम सेवन करने से अस्थमा रोग नष्ट होता है ।

३- काली मिर्च – २० ग्राम , बादाम की गिरी – १०० ग्राम और खाण्ड – ५० ग्राम लें | तीनों को अलग – अलग बारीक़ पीस कर चूर्ण बना लें , फिर तीनों को अच्छी तरह से मिला लें | इस मिश्रण की एक चम्मच लें और रात को सोते समय गर्म दूध से लें , लाभ होगा ।

विशेष :- जिनको मधुमेह हो वे खाण्ड का प्रयोग न करें तथा जिनको अम्लपित्त [acidity ] हो वे काली मिर्च १० ग्राम की मात्रा में प्रयोग करें।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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मेंहदी (Henna) – आयुर्वेद टिप्स

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मेंहदी (Henna)

mehandi

मेंहदी (Henna)

मेंहदी की पत्तियों का प्रयोग रंजक द्रव्य के रूप में किया जाता है तथा इसकी सदाबहार झाड़ियाँ बाड़ के रूप में लगाई जाती हैं | यह समस्त भारत में मुख्यतः पंजाब,गुजरात,मध्य प्रदेश तथा राजस्थान के शुष्क पर्णपाती वनों में पायी जाती है | स्त्रिओं के श्रृंगार प्रसाधनों में विशिष्ट स्थान प्राप्त होने के कारण,मेंहदी बहुत लोकप्रिय है | मेंहदी की पत्तियों को सुखाकर बनाया हुआ महीन पाउडर बाजारों में पंसारियों के यहां तथा अन्य विक्रेताओं के यहाँ आकर्षक पैक में बिकता है | इसके पत्ते मलने से चिकने तथा लुआबदार हो जाते हैं | इसके कोमल पत्तों को सुखाकर,पीस्सकर मेंहदी के नाम से बेचा जा सकता है | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जुलाई से दिसंबर तक होता है |

मेंहदी का विभिन्न रोगों में उपयोग –

१- लगभग ४.५ ग्राम मेंहदी के फूलों को पानी में पीसकर कपड़े से छान लें,इसमें ७ ग्राम शहद मिलाकर कुछ दिन पीने से गर्मी से उत्पन्न सिरदर्द शीघ्र ही ठीक हो जाता है |

२- मेंहदी में दही और आंवला चूर्ण मिलाकर २- ३ घंटे बालों में लगाने से बल घने,मुलायम,काले और लम्बे होते हैं |

३- दस ग्राम मेंहदी के पत्तों को २०० मिली पानी में भिगोकर रख दें,थोड़ी देर बाद छानकर इस पानी से गरारे करने से मुँह के छाले शीघ्र शांत हो जाते हैं |

४- मेंहदी के बीजों को बारीक पीसकर,घी मिलाकर ५०० मिग्रा की गोलियां बना लें | इन गोलियों को सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से खुनी दस्तों में लाभ होता है |

५- लगभग ५ ग्राम मेंहदी के पत्ते लेकर रात को मिटटी के बर्तन में भिगो दें और प्रातःकाल इन पत्तियों को मसलकर तथा छानकर रोगी को पिला दें | एक सप्ताह के सेवन से पुराने पीलिया रोग में अत्यंत लाभ होता है |

६- मेंहदी और एरंड के पत्तों को समभाग पीसकर थोड़ा गर्म करे घुटनों पर लेप करने से घुटनों की पीड़ा में लाभ होता है |

७- अग्नि से जले हुए स्थान पर मेंहदी की छाल या पत्तों को पीसकर गाढ़ा लेप करने से लाभ होता है |

Post inspired by:

Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj-KMSRAJ51

पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

मैं श्री आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का बहुत आभारी हूँ!!

आपको दिल से शुक्रिया;

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पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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सेहतमंद शहद !!

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honey

शरीर को स्वस्थ, निरोग और उर्जावान बनाए रखने के लिये शहद को आयुर्वेद में अमृत भी कहा गया है।

शहद फ्रक्टोज, ग्लूकोज, सुक्रोज, माल्टोज आदि शर्कराओं का मिश्रण है। इसमें 75 प्रतिशत शर्करा होती है। इसके अलावा शहद में प्रोटीन, एलब्यूमिन, वसा, एन्जाइम, अमीनो एसिड, कार्बोहाइड्रेट्स, पराग, केसर, आयोडीन, लोहा, तांबा, मैंगनीज, सोडियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, क्लोरीन जैसे उपयोगी खनिज-लवणों के साथ ही, बहुमूल्य विटामिन – राइबोफ्लेविन, विटामिन ए, बी-1, बी-2, बी-3, बी-5, बी-6, बी-12 तथा विटामिन सी, विटामिन एच भी पाया जाता है। वैसे तो आपने शहद के बारे में काफी कुछ सुना होगा, लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं शहद के कुछ ऐसे उपयोग जो आपने कभी सोचे भी नहीं होंगे।

=> एक चम्मच शहद में एक-चौथाई चम्मच पानी मिलाकर इस मिश्रण को अच्छे से मिक्स कर शैम्पू करने से पहले बालों में लगाएं। कुछ देर रखने के बाद बालों को धो लें। बाल बहुत सिल्की और शाइनी लगने लगेंगे।

=> शहद विनेगर और पानी तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर पौधों पर इस्तेमाल करें। यह एक नेचुरल कीटनाशक के रूप में काम करता है।

=> अगर कहीं पार्टी में जाना हो और पिंपल्स निकल आए हों तो थोड़ा-सा शहद लेकर पिंपल्स पर लगाएं। आधे घंटे के लिए लगा रहने दें, फिर धो लें। पिंपल बैठ जाएगा।

=> यदि कफ की समस्या हो तो एक चम्मच शहद में नींबू का रस या थोड़ा-सा कोकोनट ऑयल मिलाकर लेने से बहुत लाभ होता है।

=> शुगर फ्री की जगह डायबिटीक लोगों को खाने में शहद उपयोग करना चाहिए, क्योंकि शहद ब्लड शुगर लेवल को कम कर देता है।

=> यदि आप रोजाना रात को 2 से 4 बजे तक जागते रहते हैं, यानी नींद न आने की प्रॉब्लम हो तो एक चम्मच शहद में थोड़ा नमक मिलाकर सेवन करें।
गहरी नींद आएगी।

=> किसी जगह कट लगने या घाव हो जाने पर एंटीबॉयोटिक क्रीम की तरह शहद का उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि शहद एक नेचुरल एंटीबॉयोटिक भी है। रोजाना घाव पर इसे लगाने से घाव जल्दी भर जाता है।

=> अगर कहीं जल जाए तो जले हुए स्थान पर शहद लगाएं। जले हुए का निशान नहीं रहेगा।

=> वजन कम करने के लिए भी शहद एक अचूक नुस्खा है। जहां भी आप शुगर यूज करते हैं, वहां शहद का उपयोग करें। बढ़ता वजन बहुत जल्दी नियंत्रण में आ जाएगा।

=> आप अपने पूरे शरीर की त्वचा को एकदम साफ करना चाहते हैं तो तीन चम्मच शहद में दो चम्मच ऑलिव ऑयल मिलाकर नहाने के पानी में मिलाएं। ये आपकी स्किन को नेचुरली मॉइश्चराइज कर देगा। स्किन ग्लो करने लगेगी।

=> जब बहुत तनाव महसूस करें तो चाय में एक बूंद शहद डालकर पिएं। रिलैक्स महसूस करेंगे।

=> हैंगओवर हो जाए तो ब्रेकफास्ट में शहद लगे टोस्ट लें और चाय में भी शहद डालकर पिएं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है,
जिसके कारण एल्कोहल का प्रभाव खत्म हो जाता है।

=> दो बूंद शहद हथेली में लेकर उसमें उतना ही गुनगुना पानी मिलाएं। इसे दोनों हाथों से अच्छे से मिलाएं और चेहरे पर क्लॉकवाइज मसाज करें।
कुछ देर उसे लगा रहने दें, फिर चेहरा साफ पानी से धो लें। इस नेचुरल फेस वॉश को यूज करें। चेहरा चमकने लगेगा।

=> जब कभी कमजोरी महसूस हो, एक चम्मच शहद खा लें। कुछ ही देर में एनर्जी से भरपूर महसूस करेंगे।

=> बादाम का तेल, बेस वैक्स और शहद, तीनों को मिलाकर आप घर पर ही लिप बॉम तैयार कर सकते हैं।

KMSRAJ51-GREAT THOUGHTS-7

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रफ – बालों को सिल्की और शाइनी बनाने के 5 आसान तरीके !!

kmsraj51 की कलम से …..

Ayurvedic-Tips-in-Hindi-kmsraj51

बाल यदि खूबसूरत हो तो व्यक्तित्व ज्यादा आकर्षक लगता है। चाहे पुरुष हो या महिलाएं सभी अपने बालों को शाइनी और सिल्की बनाने के लिए तरह-तरह के प्रोडक्ट्स यूज करते हैं, लेकिन इन प्रोड्क्टस से बालों को नुकसान होने का डर भी बना रहता है। इसीलिए घरेलू कंडिशनर ही बालों के लिए ज्यादा अच्छे होते हैं। यदि आप भी अपने रफ बालों से परेशान हैं तो आगे बताए गए घरेलू कंडिशनर अपनाएं। बाल सिल्की और शाइनी बन जाएंगे।

=> एक कप बीयर को किसी बर्तन में गर्म करें, तब तक गर्म करें, जब तक वह आधा कप न रह जाए। गर्म करने से बीयर में से अल्कोहल भाप बनकर उड़ जाता है। अब इसे ठंडा होने दें, फिर उसमें एक कप अपना पसंदीदा शैम्पू मिला लें, याद रखें शैम्पू जो भी यूज करें, एक ही ब्रांड का हो। इस घोल को किसी बोतल में भरकर रख लें। जब भी बाल धोना हों इससे बाल धोएं, बेजान बाल भी चमकदार और खूबसूरत बन जाएंगे।

=> केला बालों के लिए बहुत अच्छा माना गया है। केले को पीस लें और उसमें कुछ बूंदे शहद की डालें। इस पेस्ट को अपने सिर पर लगाएं और 30 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर ठंडे पानी से बाल धो लें।

=> अपने बालों को शैंपू से धोने के बाद बीयर की कुछ बूंदे पानी में डालें और फिर उससे बालों को एक बार धोएं। बीयर से आपके बालों में चमक आएगी और वे प्राकृतिक रूप से मजबूत भी होगें।

=> बालों को शाइनी बनाने के लिए शैंपू करने से पहले बालों में दही लगाएं। अगर सिर में रुसी है तो दही में थोड़ा नींबू का रस मिलाकर लगाएं। बाल स्मूथ हो जाएंगे।

=> नारियल के तेल में नीम, तुलसी, शिकाकाई, मेथी, आंवले की पत्तियां डालकर उबाल लें व छानकर रख लें। इस तेल से पूरे सिर की मालिश करें और
चमत्कार देखें।

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