इंसान स्वयं ही भस्मासुर।

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ϒ इंसान स्वयं ही भस्मासुर। ϒ

प्रिय दोस्ताें, 

आज का इंसान खुद ही भस्मासुर बन गया हैं। अाज का इंसान स्वयं ही अपने आप काे यू ही नष्ट कर रहा हैं। इस बात पर मुझे हाल ही में हुए एक Research  की याद आती है। ताे दोस्ताें Research कुछ इस तरह से हैं:-

अमेरिका में जब एक कैदी काे फाँसी की सजा सुनाई गई ताे वहां के कुछ वैज्ञानिकाें ने साेचा कि क्याें न इस कैदी पर कुछ प्रयाेग किया जाये! तब कैदी काे बताया गया कि हम तुम्हें फाँसी देकर नहीं, परन्तु ज़हरीला काेबरा साँप डसाकर मारेंगे।

उसके सामने बड़ा सा ज़हरीला काेबरा साँप ले आने के बाद कैदी की आंखें बंद करके कुर्सी से बांधा गया और उसकाे साँप नहीं बल्कि दाे सेफ्टी पिन चुभाई गई! और क्या हुआ कि कैदी की कुछ सेकंड में ही माैत हाे गई। पोस्टमार्टम के बाद पाया गया कि कैदी के शरीर में साँप के ज़हर के समान ही ज़हर है। अब साेचने वाली बात यह है कि ये ज़हर कहां से आया जिसने उस कैदी की जान ले ली….. वाे ज़हर उसके खुद के शरीर ने ही सदमे में उत्पन्न किया था।

हमारे हर संकल्प से Positive एवंम Negative Energy उत्पन्न हाेती है, और आे हमारे शरीर में उसी अनुसार हार्मोन्स उत्पन्न करती है। 75% to 83% बीमारियाें का मूल कारण नकारात्मक सोच(Negative thinkingसे उत्पन्न Energy ही हैं। आज का इंसान ही अपनी गलत साेच के कारण भस्मासुर बन खुद का विनाश कर रहा है।

अपनी साेच काे सदैव सकारात्मक (Positive) रखें और खुश रहें। 

२५ साल की उम्र तक हमें परवाह नहीं हाेती कि “लोग क्या सोचेंगे!”

५० साल की उम्र तक इसी डर में जीते है कि “लोग क्या सोचेंगे!!”

५० साल के बाद पता चलता है कि “हमारे बारे में काेई सोच ही नहीं रहा था!!!”

प्रिय दोस्ताें, एक बात सदैव याद रखें, जिस कार्य काे करने से आपकाे कभी भी बाेरीयत नहीं लगती, उसी कार्य काे अपने आजीविका का साधन बना लें। क्योंकी जिस कार्य काे करने से आप बाेर नहीं हाेते! उसी कार्य काे ही आप लंबे समय तक आंनद पूर्वक कर सकते हैं। हमेशा सकारात्मक ही साेचे, सकारात्मक ही पढ़ें, सकारात्मक ही देखें, सकारात्मक ही करें।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

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मस्तिष्क में रिक्त जगह।

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ϒ मस्तिष्क में रिक्त जगह।~सुमित वत्स। ϒ

एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं …..

उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें, टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची।

उन्होंने छात्रों से पूछा – क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ …
आवाज आई …
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे – छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये धीरे – धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी, समा गये।

फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा, क्या अब बरनी भर गई है, छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ … कहा
अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले – हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया, वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई, अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे।
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा, क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ
….. अब तो पूरी भर गई है ….. सभी ने एक स्वर में कहा …..

सर ने टेबल के नीचे से …..
चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली, चाय भी रेत के बीच स्थित…
थोडी सी जगह में सोख ली गई …..

प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया।

इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो ….

टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान, परिवार, बच्चे, मित्र, स्वास्थ्य और शौक हैं।

छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी, कार, बडा़ मकान आदि हैं, और …..

रेत का मतलब और भी छोटी – छोटी बेकार सी बातें, मनमुटाव, झगडे़ है …..

अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती, या
कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते, रेत जरूर आ सकती थी।
ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है …..

यदि तुम छोटी – छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे।
और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय
नहीं रहेगा …..

मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है। अपने …..
बच्चों के साथ खेलो, बगीचे में पानी डालो, सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ।
घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको, मेडिकल चेक – अप करवाओ …..
टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो, वही महत्वपूर्ण है ….. पहले तय करो कि क्या जरूरी है।
….. बाकी सब तो रेत है …..
छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे।

अचानक एक ने पूछा, सर लेकिन आपने यह नहीं बताया
कि ” चाय के दो कप ” क्या हैं ?

प्रोफ़ेसर मुस्कुराये, बोले ….. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया …..
इसका उत्तर यह है कि, जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे, लेकिन…..
अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिये।

© सुमित वत्स।

Sumit Vats-kmsraj51

सुमित वत्स।

हम दिल से आभारी हैं सुमित वत्स जी के प्रेरणादायक हिन्दी कहानी साझा करने के लिए।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

 ~KMSRAJ51