सकारात्मक सोच का जादू।

Kmsraj51 की कलम से…..

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सकारात्मक सोच का जादू 

सकारात्मक सोच का जादू

सकारात्मक सोच का जादू

एक ऋषि के दो शिष्य थे। जिनमें से एक शिष्य सकारात्मक सोच वाला था वह हमेशा दूसरों की भलाई का सोचता था और दूसरा बहुत नकारात्मक सोच रखता था और स्वभाव से बहुत क्रोधी भी था। एक दिन महात्मा जी अपने दोनों शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए उनको जंगल में ले गये।
जंगल में एक आम का पेड़ था जिस पर बहुत सारे खट्टे और मीठे आम लटके हुए थे। ऋषि ने पेड़ की ओर देखा और शिष्यों से कहा की इस पेड़ को ध्यान से देखो।फिर उन्होंने पहले शिष्य से पूछा की तुम्हें क्या दिखाई देता है।

शिष्य ने कहा कि ये पेड़ बहुत ही विनम्र है लोग इसको पत्थर मारते हैं फिर भी ये बिना कुछ कहे फल देता है। इसी तरह इंसान को भी होना चाहिए, कितनी भी परेशानी हो विनम्रता और त्याग की भावना नहीं छोड़नी चाहिए। फिर दूसरे शिष्या से पूछा कि तुम क्या देखते हो, उसने क्रोधित होते हुए कहा की ये पेड़ बहुत धूर्त है बिना पत्थर मारे ये कभी फल नहीं देता इससे फल लेने के लिए इसे मारना ही पड़ेगा।

इसी तरह मनुष्य को भी अपने मतलब की चीज़ें दूसरों से छीन लेनी चाहिए। गुरु जी हँसते हुए पहले शिष्य की बढ़ाई की और दूसरे शिष्य से भी उससे सीख लेने के लिए कहा। सकारात्मक सोच हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर डालती है। नकारात्मक सोच के व्यक्ति अच्छी चीज़ों मे भी बुराई ही ढूंढते हैं।

उदाहरण के लिए:- गुलाब के फूल को काँटों से घिरा देखकर नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति सोचता है की “इस फूल की इतनी खूबसूरती का क्या फ़ायदा इतना सुंदर होने पर भी ये काँटों से घिरा है ” जबकि उसी फूल को देखकर सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति बोलता है की “वाह! प्रकर्ती का कितना सुंदर कार्य है की इतने काँटों के बीच भी इतना सुंदर फूल खिला दिया” बात एक ही है लेकिन फ़र्क है केवल सोच का।

तो मित्रों, अपनी सोच को सकारात्मक और बड़ा बनाइए तभी हम अपने जीवन में कुछ कर सकते हैं।

Note::-

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विश्वास / भरोसे पर उद्धरण हिन्दी में।

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Belief / faith quotes in Hindi

faith

विश्वास पर हिन्दी में उद्धरण

विश्वास / भरोसे पर उद्धरण

Quote 1: One should never trust a woman who tells one her real age. A woman who would tell one that would tell one anything.

In Hindi: किसी को उस औरत पर कभी भी भरोसा नहीं करना चाहिए जो अपनी सही उम्र बता दे। जो औरत ये बता सकती है वो कुछ भी बता सकती है।
Oscar Wilde ऑस्कर वाइल्ड

Quote 2: Love all, trust a few, do wrong to none.

In Hindi: सभी से प्रेम करो , कुछ पर भरोसा करो, किसी के साथ गलत मत करो।
William Shakespeare विलियम शेक्सपियर

Quote 3: I’m not upset that you lied to me, I’m upset that from now on I can’t believe you.

In Hindi: मैं इसलिए परेशान नहीं हूँ कि तुमने मुझसे झूठ कहा , मैं परेशान हूँ कि मैं अब से तुम पर भरोसा नहीं कर सकूंगा।
Friedrich Nietzsche फ्रीडरिच नैतज़स्चे

Quote 4: I do not trust people who don’t love themselves and yet tell me, ‘I love you.’ There is an African saying which is: Be careful when a naked person offers you a shirt.

In Hindi: मैं उन लोगों पर भरोसा नहीं करती जो खुद से प्यार नहीं करते और फिर भी मुझसे कहते हैं , “मैं तुमसे प्यार करता हूँ। ” एक अफ़्रीकी कहावत है : जब कोई नंगा आदमी अपनी शर्ट दे तो उससे सावधान रहिये। “
Maya Angelou माया एंगेलो

Quote 5: Have enough courage to trust love one more time and always one more time.

In Hindi: क्या आपने इतना साहस है कि प्यार पर एक और बार भरोसा करें और हमेशा एक और बार भरोसा करें।
Maya Angelou माया एंगेलो

Quote 6: None of us knows what might happen even the next minute, yet still we go forward. Because we trust. Because we have Faith.

In Hindi: हममें से कोई नहीं जानता कि अगले क्षण क्या होगा , फिर भी हम आगे बढ़ते हैं। क्योंकि हम भरोसा करते हैं। क्योंकि हमारे अंदर आस्था है।
Paulo Coelho पाउलो कोएलो

Quote 7: We are all mistaken sometimes; sometimes we do wrong things, things that have bad consequences. But it does not mean we are evil, or that we cannot be trusted ever afterward.

In Hindi: हम सभी से कभी न कभी गलतियां होती हैं ; कभी कभी हम गलत चीजें करते हैं , ऐसी चीजें जिनके परिणाम बुरे होते हैं. पर इसका ये मतलब नहीं है कि हम बुरे हैं , या इसके बाद हम पर कभी भी विश्वास नहीं किया जा सकता।
Alison Croggon एलिसन क्रोगन

Quote 8: For every good reason there is to lie, there is a better reason to tell the truth.

In Hindi: झूठ बोलने के हर एक अच्छे कारण के बदले में सच कहने का उससे भी अच्छा कारण होता है।
Bo Bennett बो बेनेट

Quote 9: The trust of the innocent is the liar’s most useful tool.

In Hindi: सीधे व्यक्ति का विश्वास ही झूठे व्यक्ति का सबसे उपयोगी साधन है।
Stephen King स्टीफेन किंग

Quote 10: For there to be betrayal, there would have to have been trust first.

In Hindi: विश्वासघात होने से पहले , विश्वास को होना होगा।
Suzanne Collins सुज़ैन कोलिन्स

Quote 11: To be trusted is a greater compliment than being loved.

In Hindi: विश्वास किया जाना प्रेम किये जाने से बेहतर प्रशंशा है।
George MacDonald जॉर्ज मैकडोनाल्ड

Quote 12: Learning to trust is one of life’s most difficult tasks.

In Hindi: भरोसा करना सीखना जीवन के सबसे कठिन कार्यों में से एक है।
Isaac Watts आइजैक वाट्स

Quote 13: Quit questioning God and start trusting Him!

In Hindi: ईश्वर पर प्रश्न उठाना छोड़ो और उस पर भरोसा करना शुरू करो।
Joel Osteen जोएल ऑस्टीन

Quote 14: A lie can travel half way around the world while the truth is putting on its shoes.

In Hindi: जब तक सच जूते पहन रहा हो तब तक एक झूठ आधे दुनिया की सैर कर सकता है।
Charles Spurgeon चर्ल्स स्परजन

Quote 15: Never trust anyone who wants what you’ve got. Friend or no, envy is an overwhelming emotion.

In Hindi: कभी ऐसे व्यक्ति पर विश्वास मत करिये जिसे वो चाहिए जो आपके पास है। दोस्त हो या नहीं , जलन एक सशक्त भावना है।
Eubie Blake यूबी ब्लेक

Quote 16: The most important lesson that I have learned is to trust God in every circumstance.

In Hindi: सबसे जरूरी चीज जो मैंने सीखी है वो है हर परिस्थिति में ईश्वर पर भरोसा करना।
Allyson Felix ऐलिसन फेलिक्स

Quote 17: Trust is to human relationships what faith is to gospel living. It is the beginning place, the foundation upon which more can be built. Where trust is, love can flourish.

In Hindi: जो श्रद्धा धर्म के लिए है वही विश्वास मानवीय सम्बन्धों के लिए है। ये शुरूआती बिंदु है, ऐसी नीव जिस पर और अधिक निर्माण किया जा सकता है। जहाँ विश्वास है , वहाँ प्रेम फल-फूल सकता है।
Barbara Smith बारबरा स्मिथ

Quote 18: Trust your hunches. They’re usually based on facts filed away just below the conscious level.

In Hindi: अपनी इंट्यूशन पर भरोसा करो। आम तौर पर वे उन तथ्यों पर आधारित होती हैं जो जागरूकता के स्तर से नीचे मौजूद होती हैं।
Joyce Brothers जोयस ब्रदर्स

Quote 19: Trust yourself, then you will know how to live.

In Hindi: खुद पर भरोसा करो ,तब तुम जान पाओगे कि कैसे जिया जाए।
Johann Wolfgang von Goethe जॉन वोल्फगैंग वोन गोएथे

Quote 20: Trust yourself, you know more than you think you do.

In Hindi: यकीन रखो , तुम जितना सोचते हो उससे अधिक जानते हो।
Benjamin Spock बेंजामिन स्पोक

Quote 21: A man who trusts nobody is apt to be the kind of man nobody trusts.

In Hindi: जो आदमी किसी पर भरोसा नहीं करता वो किसी के द्वारा भरोसा ना किये जाने के उपयुक्त है।
Harold MacMillan हैरोल्ड मैकमिलन

Quote 22: You can’t trust water: Even a straight stick turns crooked in it.

In Hindi: आप पानी पर भरोसा नहीं कर सकते: यहाँ तक कि एक सीधी छड़ी भी इसमें तिरछी नज़र आती है।
W. C. Fields डब्ल्यू सी फ़ील्ड्स

Quote 23: When I get logical, and I don’t trust my instincts – that’s when I get in trouble.

In Hindi: जब मैं तार्किक होती हूँ , और अपने सहज ज्ञान पर भरोसा नहीं करती तभी मैं मुसीबत में पड़ जाती हूँ।
Angelina Jolie एंजेलिना जोली

Quote 24: Trust in what you love, continue to do it, and it will take you where you need to go.

In Hindi: जिस काम को चाहते हो उसमे अपना विश्वास रखो , उसे करना जारी रखो , और वो तुम्हे वहाँ ले जाएगा जहाँ तुम्हे जाने कि जरूरत है ।
Natalie Goldberg नताली गोल्ड़बर्ग

Quote 25: The chief lesson I have learned in a long life is that the only way you can make a man trustworthy is to trust him; and the surest way to make him untrustworthy is to distrust him.

In Hindi: सबसे ज़रूरी बात जो मैंने इस लम्बे जीवन में सीखी है वो ये कि किसी व्यक्ति को विश्वसनीय बनाने का एक ही तरीका है उसपर विश्वास करना ; और किसी को अविश्वसनीय बनाने का पक्का तरीका है उस पर विश्वास ना करना।
Henry L. Stimson हेनरी एल स्टिम्सन

Quote 26: Never trust a husband too far, nor a bachelor too near.

In Hindi: बहुत दूर रह रहे पति पर कभी भरोसा मत करो, और ना ही बहुत करीब रह रहे कुंवारे पर।
Helen Rowland हेलेन रोलैंड

Quote 27: Trust not too much to appearances.

In Hindi: दिखावे पर बहुत अधिक भरोसा मत करो।
Virgil वरजिल

Quote 28: It’s a delight to trust somebody so completely.

In Hindi: किसी पर पूरी तरह से भरोसा करना आनंदित करने वाला है।
Jeff Goldblum जेफ़ गोडब्लम

Quote 29: Do not trust your memory; it is a net full of holes; the most beautiful prizes slip through it.

In Hindi: अपनी याददाश्त पर भरोसा मत करो ; ये छिद्रों से भरा जाल है; सबसे खूबसूरत उपहार इससे निकल जाते हैं।
Georges Duhamel जॉर्ज डुहामेल

Quote 30: Would you want to do business with a person who was 99% honest?

In Hindi: क्या तुम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ व्यापार करना चाहोगे जो ९९ % ईमानदार हो।
Sydney Madwed सिडनी मैडवेड

Quote 31: So you have to trust that the dots will somehow connect in your future. You have to trust in something – your gut, destiny, life, karma.

In Hindi: आपको किसी न किसी चीज में विश्ववास करना ही होगा —अपने गट्स में, अपनी डेस्टिनी में, अपनी जिंदगी या फिर अपने कर्म में…
Steve Jobs स्टीव जाब्स

Quote 32: The best proof of love is trust.

In Hindi: प्रेम का सबसे अच्छा प्रमाण विश्वास है।
Joyce Brothers जोयस ब्रदर्स

Quote 33: The best way to find out if you can trust somebody is to trust them.

In Hindi: किसी पर भरोसा किया जा सकता है कि नहीं ये जानने का सबसे अच्छा तरीका है उसपर भरोसा करना है।
Ernest Hemingway अर्नेस्ट हेमिंगवे

Quote 34: Trust, but verify.

In Hindi: विश्वास करो , लेकिन जांच कर लो।
Ronald Reagan रोनाल्ड रीगन

Quote 35: He who does not trust enough, Will not be trusted.

In Hindi: वो जो अधिक भरोसा नहीं करता , उस पर भरोसा नहीं किया जायेगा।
Lao Tzu लाओ ज़ु

Quote 36: You may be deceived if you trust too much, but you will live in torment if you don’t trust enough.

In Hindi: बहुत अधिक भरोसा करने पर हो सकता है आप धोखा खा जाएं , लेकिन यदि आप पर्याप्त भरोसा नहीं करेंगे तो आप पीड़ा में जियेंगे।
Frank Crane फ्रैंक क्रेन

Quote 37: Me, I’m dishonest, and you can always trust a dishonest man to be dishonest. Honestly, it’s the honest ones you have to watch out for.

In Hindi: मैं, मैं बेईमान हूँ , और आप एक बेईमान का हमेशा बेईमान होने पर भरोसा कर सकते हैं। ईमानदारी से कहूं तो ये ईमानदार लोग होते हैं जिनको देखना पड़ता है।
Johnny Depp जॉनी डेप्प

Quote 38: Age appears to be best in four things; old wood best to burn, old wine to drink, old friends to trust, and old authors to read.

In Hindi: उम्र चार चीजों में सबसे अच्छी प्रतीत होती है ; जलाने के लिए पुरानी लकड़ी , पीने के लिए पुरानी शराब, भरोसा करने के लिए पुराने दोस्त , और पढ़ने के लिए पुराने लेखक .
Francis Bacon फ्रांसिस बेकन

Quote 39: When a train goes through a tunnel and it gets dark, you don’t throw away the ticket and jump off. You sit still and trust the engineer.

In Hindi: जब ट्रैन किसी सुरंग से निकलती है और अँधेरा हो जाता है , तब आप अपना टिकट फेंक कर ट्रैन से कूद नहीं जाते। आप बैठे रहते हैं और इंजीनियर पर भरोसा रखते हैं।
Corrie Ten Boom कौरी टेन बूम

Quote 40: A wedding anniversary is the celebration of love, trust, partnership, tolerance and tenacity. The order varies for any given year.

In Hindi: एक शादी की सालगिरह प्यार, विश्वास, साझेदारी, सहिष्णुता और तप का उत्सव है. हर साल के लिए बस क्रम भिन्न होता है.
Paul Sweeney पॉल स्वीनी

Quote 41: The only white man you can trust is a dead white man.

In Hindi: केवल एक गोरा व्यक्ति जिसपर आप यकीन कर सकते हैं वो है मरा हुआ गोरा व्यक्ति।
Robert Mugabe रोबर्ट मुगाबे

Quote 42: The senses deceive from time to time, and it is prudent never to trust wholly those who have deceived us even once.

In Hindi: बुद्धि समय समय पर धोखा देती है ; और ये समझदारी है कि जिसने तुम्हे एक बार भी धोखा दिया हो उसपर एक कभी पूरी तरह से भरोसा मत करो।
Rene Descartes रीन डेसकार्टेस

Quote 43: Trust is the glue of life. It’s the most essential ingredient in effective communication. It’s the foundational principle that holds all relationships.

In Hindi: विश्वास जीवन का गोंद है. यह प्रभावी संचार का सबसे अनिवार्य अंग है. यह सभी रिश्तों को जोड़ने वाला मूलभूत सिद्धांत है.
Stephen Covey स्टीफेन कोवी

Quote 44: I trust no one, not even myself.

In Hindi: मैं किसी पर भरोसा नहीं करता , खुद पर भी नहीं।
Joseph Stalin जोसफ स्टालिन

Quote 45: It’s good to trust others but, not to do so is much better.

In Hindi: दूसरों पर भरोसा करना अच्छा है , लेकिन ऐसा ना करना कहीं ज्यादा अच्छा है।
Benito Mussolini बेनिटो मुसोलिनी

Quote 46: Trust has to be earned, and should come only after the passage of time.

In Hindi: विश्वास अर्जित करना होता है, और ये केवल समय बीतने के साथ आना चाहिए.
Arthur Ashe आर्थर ऐश

Quote 47: Beware of anyone who says they know. Trust me, they don’t, or they wouldn’t have to say they did.

In Hindi: जो कोई भी कहता है कि उसे पता है उनसे सावधान रहिये। मुझपर भरोसा करिये ; उन्हें नहीं पता ; नहीं तो उन्हें कहना नहीं पड़ता कि उन्हें पता है।
Harvey Fierstein हार्वे फैरस्टीन

Quote 48: A garden is a grand teacher. It teaches patience and careful watchfulness; it teaches industry and thrift; above all it teaches entire trust.

In Hindi: एक बगीचा बहुत बड़ा शिक्षक होता है। वो हमें धैर्य और सावधानी पूर्वक देखना सीखाता है ; वो हमें मेहनत और किफ़ायत सीखाता है; और सबसे बढ़कर वो हमें विश्वास करना सीखाता है।
Gertrude Jekyll गरट्रूड जेकिल

Quote 49: People come into your life and people leave it… you just have to trust that life has a road mapped out for you.

In Hindi: लोग आपकी ज़िन्दगी में आते हैं और चले जाते हैं.. बस आपको भरोसा करना होता है कि ज़िन्दगी ने आपके लिए एक रोड बना राखी है.
Orlando Bloom ऑर्लैंडो ब्लूम

Quote 50: You must trust and believe in people or life becomes impossible.

In Hindi: आपको लोगों पर विश्वास और भरोसा करना पड़ता है नहीं तो ज़िन्दगी असम्भव हो जाती है।
Anton Chekhov ऐंटन चेखोव

Quote 51: Trust that little voice in your head that says ‘Wouldn’t it be interesting if…’; And then do it.

In Hindi: अपनी अंदर की उस हल्की सी आवाज़ जो कहती है ‘ क्या ये रोचक नहीं होता अगर…’, पर भरोसा करिये और फिर उसे कर डालिये।
Duane Michals डुआने मिचलस

Quote 52: Trust dies but mistrust blossoms.

In Hindi: विश्वास मर जाता है लेकिन अविश्वास फलता-फूलता रहता है।
Sophocles सोफोकल्स

Quote 53: Only trust thyself, and another shall not betray thee.

In Hindi: केवल खुद पर भरोसा करो और कोई तुम्हे धोखा नहीं दे पायेगा।
William Penn विलियम पेन्न

Quote 54: Trust is built with consistency.

In Hindi: विश्वास स्थिरता के साथ बनता है।
Lincoln Chafee लिंकन चेफी

Quote 55: Where large sums of money are concerned, it is advisable to trust nobody.

In Hindi: जहाँ बहुत बड़ी रकम की बात हो , वहाँ किसी पर भरोसा ना करना उचित है।
Agatha Christie अगाथा क्रिस्टी

Quote 56: Put not your trust in money, but put your money in trust.

In Hindi: अपना ट्रस्ट मनी में मत रखो , बल्कि अपनी मनी ट्रस्ट में रखो।
Oliver Wendell Holmes ओलिवर वेंडेल होम्स

Quote 57: Life is a gift, given in trust – like a child.

In Hindi: जीवन एक उपहार है ,बस भरोसा करो- एक बच्चे की तरह।
Anne Morrow Lindbergh ऐनी मोरो लिंडबर्ग

Quote 58: Whatever happens in life is fine – just trust in that.

In Hindi: जीवन में जो कुछ भी होता है अच्छा है – बस उसमे विश्वास रखो।
Orlando Bloom ऑर्लैंडो ब्लूम

Quote 59: In every tyrant’s heart there springs in the end this poison, that he cannot trust a friend.

In Hindi: हर एक तानाशाह के ह्रदय में अंत में एक ज़हर रह जाता है , कि वो किसी दोस्त पर भरोसा नहीं कर सकता।
Aeschylus ऐस्किलस

Quote 60: If you don’t trust the pilot, don’t go.

In Hindi: अगर तुम्हे पायलट पर भरोसा नहीं है तो मत जाओ।
Denzel Washington डेंजेल वाशिंगटन

Quote 61: Trust is not the same as faith. A friend is someone you trust. Putting faith in anyone is a mistake.

In Hindi: यकीन आस्था के जैसा नहीं है। एक दोस्त कोई ऐसा होता है जिसपर आप भरोसा कर सकते हैं। किसी में आस्था रखना एक गलती है।
Christopher Hitchens क्रिस्टोफर हिचेन्स

Quote 62: Never trust the advice of a man in difficulties.

In Hindi: कभी मुसीबत में पड़े व्यक्ति की सलाह पर यकीन मत करो।
Aesop एसोप

Quote 63: Responsibilities are given to him on whom trust rests. Responsibility is always a sign of trust.

In Hindi: जिम्मेदारी उसे दी जाती हैं जिसपर भरोसा होता है। जिम्मेदारी हमेशा भरोसे का संकेत होती है।
James Cash Penney जेम्स कैश पेन्नी

Quote 64: Trusting is hard. Knowing who to trust, even harder.

In Hindi: भरोसा करना मुश्किल है. ये जानना कि किस पर भरोसा किया जाये , और भी मुश्किल है।
Maria V. Snyder मारिया वी सिन्डर

Quote 65: Trust starts with truth and ends with truth.

In Hindi: भरोसा सच के साथ शुरू होता है औए सच के साथ ख़त्म ।
Santosh Kalwar संतोष कलवार

Quote 66: Peace and trust take years to build and seconds to shatter.

In Hindi: शांति और विश्वास बनने में सालों लगते हैं और टूटने में कुछ पल।
Mahogany SilverRain महोगनी सिल्वरराइन

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I am grateful to Mr. Gopal Mishra & AKC. For more inspirational quotes & story visit at http://www.achhikhabar.com/,,

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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Soul Sustenance & Message for the day 17-12-2013 !!

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** Soul Sustenance & Message for the day 17-12-2013 **

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Soul Sustenance 17-12-2013
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Living Life On The Surface

In an ideal situation, the thoughts that run in my mind, should be exactly those that I would like and I want. We do exert this control, that we possess, over our thoughts, but it is not complete and it is only sometimes. The more we become completely engrossed in our daily routine, the more our thoughts tend to become reactions to what goes on outside us. That’s when they go out of control and our lives move in an unfocused way. As a result things don’t work out as we might have desired. Then we develop a habit of blaming other people and circumstances, or we justify our pain by telling ourselves we are not very worthy or powerful enough. Often, these two inner strategies go together. The trouble is, both are cover ups, preventing us from going for a long-term solution.

In this way, we tend to live our lives on a very superficial level, without taking the time to find the solution to what is going on wrong inside. Deeper difficulties remain hidden inside. I move from one scene of life to another – eating, watching television, studying in college, getting married, changing jobs, buying a new car or house, etc. without ever stopping. All these are part of living, but if I make them my whole and sole, my foundation, it’s as if I skate across the surface of life without being in touch with the core. As time progresses, an inner shallowness develops. Then the feeling keeps growing inside that ‘there must be more to life than this’. I then, find that my relationships are not working out as I would have hoped and they are lacking in depth.

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Message for the day 17-12-2013
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Easy nature makes tasks easy.

Expression: The ones with an easy nature constantly think of solutions instead of problems. So such individuals are free from the burden of problems and are constantly contributing to make things easy for themselves and others too. The right environment to bring out the best result is naturally created by them.

Experience: When I have an easy nature, I am able to put a full stop in a second with great ease. I am not caught with the waste questions and exclamations. So I am able to enjoy everything that comes my way and move forward constantly with lightness.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris
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मेरे पिता ~ My Father (Hindi-Story) !!

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** मेरे पिता ~ My Father **

drinker


किसी शहर में दो भाई रहते थे . उनमे से एक शहर का सबसे बड़ा बिजनेसमैन था तो दूसरा एक ड्रग -एडिक्ट था जो अक्सर नशे की हालत में लोगों से मार -पीट किया करता था . जब लोग इनके बारे में जानते तो बहुत आश्चर्य करते कि आखिर दोनों में इतना अंतर क्यों है जबकि दोनों एक ही माता-पिता की संताने हैं , एक जैसी शिक्षा प्राप्त हैं और बिलकुल एक जैसे माहौल में पले -बढे हैं . कुछ लोगों ने इस बात का पता लगाने का निश्चय किया और शाम को भाइयों के घर पहुंचे .

अन्दर घुसते ही उन्हें नशे में धुत एक व्यक्ति दिखा , वे उसके पास गए और पूछा , “ भाई तुम ऐसे क्यों हो ??..तुम बेवजह लोगों से लड़ाई -झगडा करते हो , नशे में धुत अपने बीवी -बच्चों को पीटते हो …आखिर ये सब करने की वजह क्या है ?”

“मेरे पिता ” , भाई ने उत्तर दिया .

“पिता !! ….वो कैसे ?” , लोगों ने पूछा

भाई बोल , “ मेरे पिता शराबी थे , वे अक्सर मेरी माँ और हम दोनों भाइयों को पीटा करते थे …भला तुम लोग मुझसे और क्या उम्मीद कर सकते हो …मैं भी वैसा ही हूँ ..”

फिर वे लोग दूसरे भाई के पास गए , वो अपने काम में व्यस्त था और थोड़ी देर बाद उनसे मिलने आया ,

“माफ़ कीजियेगा , मुझे आने में थोड़ी देर हो गयी .” भाई बोल , “ बताइए मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ ? ”

लोगों ने इस भाई से भी वही प्रश्न किया , “ आप इतने सम्मानित बिजनेसमैन हैं , आपकी हर जगह पूछ है , सभी आपकी प्रशंसा करते हैं , आखिर आपकी इन उपलब्धियों की वजह क्या है ?”

“ मेरे पिता “, उत्तर आया .

लोगों ने आश्चर्य से पूछा , “ भला वो कैसे ?”

“मेरे पिता शराबी थे , नशे में वो हमें मारा- पीटा करते थे मैं ये सब चुप -चाप देखा करता था , और तभी मैंने निश्चय कर लिया था की मैं ऐसा बिलकुल नहीं बनना चाहता मुझे तो एक सभ्य , सम्मानित और बड़ा आदमी बनना है , और मैं वही बना .” भाई ने अपनी बात पूरी की .

Friends, हमारे साथ जो कुछ भी घटता है उसके positive और negative aspects हो सकते हैं . ज़रुरत इस बात की है की हम positive aspect पर concentrate करें और वहीँ से अपनी inspiration draw करें .


::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
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अवसर की पहचान ~ Identifying opportunities !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

kmsraj51 की कलम से …..
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** अवसर की पहचान ~ Identifying opportunities !! **

opportunities
Don’t miss an opportunity.


एक बार एक ग्राहक चित्रो की दुकान पर गया । उसने वहाँ पर अजीब से चित्र देखे । पहले चित्र मे चेहरा पूरी तरह बालो से ढँका हुआ था और पैरोँ मे पंख थे ।एक दूसरे चित्र मे सिर पीछे से गंजा था।

ग्राहक ने पूछा – यह चित्र किसका है?

दुकानदार ने कहा – अवसर का ।

ग्राहक ने पूछा – इसका चेहरा बालो से ढका क्यो है?

दुकानदार ने कहा -क्योंकि अक्सर जब अवसर आता है तो मनुष्य उसे पहचानता नही है ।

ग्राहक ने पूछा – और इसके पैरो मे पंख क्यो है?

दुकानदार ने कहा – वह इसलिये कि यह तुरंत वापस भाग जाता है, यदि इसका उपयोग न हो तो यह तुरंत उड़ जाता है ।

ग्राहक ने पूछा – और यह दूसरे चित्र मे पीछे से गंजा सिर किसका है?

दुकानदार ने कहा – यह भी अवसर का है । यदि अवसर को सामने से ही बालो से पकड़ लेँगे तो वह आपका है ।अगर आपने उसे थोड़ी देरी से पकड़ने की कोशिश की तो पीछे का गंजा सिर हाथ आयेगा और वो फिसलकर निकल जायेगा । वह ग्राहक इन चित्रो का रहस्य जानकर हैरान था पर अब वह बात समझ चुका था ।

दोस्तो,

आपने कई बार दूसरो को ये कहते हुए सुना होगा या खुद भी कहा होगा कि ’हमे अवसर ही नही मिला’ लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है । Real मे भगवान ने हमे ढेरो अवसरो के बीच जन्म दिया है । अवसर हमेशा हमारे सामने से आते जाते रहते है पर हम उसे पहचान नही पाते या पहचानने मे देर कर देते है । और कई बार हम सिर्फ इसलिये चूक जाते है क्योकि हम बड़े अवसर के ताक मे रहते हैं । पर अवसर बड़ा या छोटा नही होता है । हमे हर अवसर का भरपूर उपयोग करना चाहिये ।

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
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50 Great Quotations In Hindi !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

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kmsraj51 की कलम से …..
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** 50 अनमोल वचन हिंदी में | 50 Great Quotations In Hindi **

1. जिसने ज्न्यान को आचरण में उतार लिया , उसने ईश्वर को मूर्तिमान कर लिया – विनोबा भावे

2. अकर्मण्यता का दूसरा नाम मर्त्यु है – मुसोलिनी

3. पालने से लेकर कब्र तक ज्ञान प्राप्त करते रहो – पवित्र कुरान

4. इच्छा ही सब दूखो का मूल है – गौतम बुद्ध

5. मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अज्न्यान है – चाणक्य

6. आपका आज का पुरुषार्थ आपका कल का भाग्य है – पालशिरू

7. क्रोध एक किस्म का क्षणिक पागलपन है – महात्मा गांधी

8. ठोकर लगती है और दर्द होता है तभी मनुष्य सीख पाटा है – महात्मा गांधी

9. अप्रिय शब्द पशुओ को भी नहीं सुहाते है – गौतम बुद्ध

10. नरम शब्दों से सख्त दिलो को जीता जा सकता है – सुकरात

11. गहरी नदी का जल प्रवाह शांत व गंभीर होता है – शेक्सपीयर

12. समय और समुद्र की लहरे किसी का इंतज़ार नहीं करती – अज्ञात

13. जिस तरह जौहरी ही असली हीरे की पहचान कर सकता है , उसी तरह गुनी ही गुणवान की पहचान कर सकता है – कबीर

14. जो आपको कल कर देना चाहिए था , वही संसार का सबसे का थीं कार्य है – कन्फ्यूशियस

15. ज्ञानी पुरुषो का क्रोध भीतर ही , शान्ति से निवास करता है , बाहर नहीं – खलील जिब्रान

16. कुबेर भी यदि आय से अधिक व्यय करे तो निर्धन हो जाता है – चाणक्य

17. डूब की तरह छोटे बनाकर रहो . जब घास -पात जल जाते है तब भी डूब जस की तस बनी रहती है – गुरु नानक देव

18. ईश्वर के हाथ देने के लिए खुले है . लेने के लिए तुम्हे प्रयत्न करना होगा – गुरु नानक देव

19. जो दूसरो से घृणा करता है वह स्वय पतित होता है – स्वामी विवेकानंद

20. जो जैसा शुभ व अशुभ कार्य करता है , वो वैसा ही फल भोगता है – वेदव्यास

21. मनुष्य की इच्छाओ का पेट आज तक कोइ नहीं भर सका है – वेदव्यास

22. नम्रता और मीठे वचन ही मनुष्य के सच्चे आभूषण होते है – तिरूवल्लुवर

23. खुदा एक दरवाजा बंद करने से पहले दूसरा खोल देता है , उसे प्रयत्न कर देखो – शेख सादी

24. बुरे आदमी के साथ भी भलाई करनी चाहिए – कुत्ते को रोटी का एक टुकड़ा डालकर उसका मुंह बंद करना ही अच्छा है – शेख सादी

25. अपमानपूर्वक अमरत पीने से तो अच्छा है सम्मानपूर्वक विषपान – रहीम

26. थोड़े से धन से दुष्ट जन उन्मत्त हो जाते है – जैसे छोटी , बरसाती नदी में थोड़ी सी वर्षा से बाढ़ आ जाती है – गोस्वामी तुलसीदास

27. ईश प्राप्ति (शान्ति ) के लिए अंत: कारन शुद्ध होना चाहिए – रविदास

28. जब मई स्वय पर हँसता हूँ तो मेरे मन का बोज़ हल्का हो जाता है – टैगोर

29. जन्म के बाद मर्त्यु , उत्थान के बाद पतन , संयोग के बाद वियोग , संचय के बाद क्षय निश्चित है . ज्ञानी इन बातो का ज्न्यान कर हर्ष और शोक के वशीभूत नहीं होते – महाभारत

30. जननी जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढाकर है – अज्ञात

31. भरे बादल और फले वर्कश नीचे ज़ुकारे है , सज्जन ज्न्यान और धन पाकर विनम्र बनाते है – अज्ञात

32. सोचना, कहना व करना सदा सम्मान हो – अज्ञात

33. न कल की न काल की फिकर करो , सदा हर्षित मुख रहो – अज्ञात

34. स्व परिवर्तन से दूसरो का परिवर्तन करो – अज्ञात

35. ते ते पाँव पसारियो जेती चादर होय – अज्ञात

36. महान पुरुष की पहली पहचान उसकी विनम्रता है – अज्ञात

37. बिना अनुभव कोरा शाब्दिक ज्न्यान अँधा है – अज्ञात

38. क्रोध सदैव मूर्खता से प्रारम्भ होता है और पश्चाताप पर समाप्त – अज्ञात

39. नारी की उन्नति पर ही राष्ट्र की उन्नति निर्धारित है – अज्ञात

40. धरती पर है स्वर्ग कहा – छोटा है परिवार जहा – अज्ञात

41. दूसरो का जो आचरण तुम्हे पसंद नहीं , वैसा आचरण दूसरो के प्रति न करो – अज्ञात

42. नम्रता सारे गुणों का दर्द स्तम्भ है – अज्ञात

43. बुद्धिमान किसी का उपहास नहीं करते है – अज्ञात

44. हर अच्छा काम पहले असंभव नजर आता है – अज्ञात

45. पुस्तक प्रेमी सबसे धनवान व सुखी होता है – अज्ञात

46. सबसे उत्तम बदला क्षमा करना है – अज्ञात

47. आराम हराम है – अज्ञात

48. दो बच्चो से खिलाता उपवन , हंसते -हंसते कटता जीवन – अज्ञात

49. अगर चाहते सुख समर्द्धि , रोको जनसंख्या वर्द्धि – अज्ञात

50. कार्य मनोरथ से नहीं , उद्यम से सिद्ध होते है . जैसे सोते हुए सिंह के मुंह में मुर्गे अपने आप नहीं चले जाते – विष्णु शर्मा!

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स्वामी विवेकानंद के बहुमूल्य विचार हिन्दी में।

Kmsraj51 की कलम से…..

स्वामी विवेकानंद के बहुमूल्य विचार हिन्दी में।

स्वामी विवेकानन्द जी

 उठो, जागो और तब तक रुको नही जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये ।

 जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो–उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो। दुर्बलता को कभी प्रश्रय मत दो। सत्य की ज्योति ‘बुद्धिमान’ मनुष्यों के लिए यदि अत्यधिक मात्रा में प्रखर प्रतीत होती है, और उन्हें बहा ले जाती है, तो ले जाने दो–वे जितना शीघ्र बह जाएँ उतना अच्छा ही है।

 तुम अपनी अंत:स्थ आत्मा को छोड़ किसी और के सामने सिर मत झुकाओ। जब तक तुम यह अनुभव नहीं करते कि तुम स्वयं देवों के देव हो, तब तक तुम मुक्त नहीं हो सकते।

 ईश्वर ही ईश्वर की उपलब्थि कर सकता है। सभी जीवंत ईश्वर हैं–इस भाव से सब को देखो। मनुष्य का अध्ययन करो, मनुष्य ही जीवन्त काव्य है। जगत में जितने ईसा या बुद्ध हुए हैं, सभी हमारी ज्योति से ज्योतिष्मान हैं। इस ज्योति को छोड़ देने पर ये सब हमारे लिए और अधिक जीवित नहीं रह सकेंगे, मर जाएंगे। तुम अपनी आत्मा के ऊपर स्थिर रहो।

 ज्ञान स्वयमेव वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है।

 मानव-देह ही सर्वश्रेष्ठ देह है, एवं मनुष्य ही सर्वोच्च प्राणी है, क्योंकि इस मानव-देह तथा इस जन्म में ही हम इस सापेक्षिक जगत् से संपूर्णतया बाहर हो सकते हैं–निश्चय ही मुक्ति की अवस्था प्राप्त कर सकते हैं, और यह मुक्ति ही हमारा चरम लक्ष्य है।

 जो मनुष्य इसी जन्म में मुक्ति प्राप्त करना चाहता है, उसे एक ही जन्म में हजारों वर्ष का काम करना पड़ेगा। वह जिस युग में जन्मा है, उससे उसे बहुत आगे जाना पड़ेगा, किन्तु साधारण लोग किसी तरह रेंगते-रेंगते ही आगे बढ़ सकते हैं।

 जो महापुरुष प्रचार-कार्य के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं, वे उन महापुरुषों की तुलना में अपेक्षाकृत अपूर्ण हैं, जो मौन रहकर पवित्र जीवनयापन करते हैं और श्रेष्ठ विचारों का चिन्तन करते हुए जगत् की सहायता करते हैं। इन सभी महापुरुषों में एक के बाद दूसरे का आविर्भाव होता है–अंत में उनकी शक्ति का चरम फलस्वरूप ऐसा कोई शक्तिसम्पन्न पुरुष आविर्भूत होता है, जो जगत् को शिक्षा प्रदान करता है।

 आध्यात्मिक दृष्टि से विकसित हो चुकने पर धर्मसंघ में बना रहना अवांछनीय है। उससे बाहर निकलकर स्वाधीनता की मुक्त वायु में जीवन व्यतीत करो।

 मुक्ति-लाभ के अतिरिक्त और कौन सी उच्चावस्था का लाभ किया जा सकता है? देवदूत कभी कोई बुरे कार्य नहीं करते, इसलिए उन्हें कभी दंड भी प्राप्त नहीं होता, अतएव वे मुक्त भी नहीं हो सकते। सांसारिक धक्का ही हमें जगा देता है, वही इस जगत्स्वप्न को भंग करने में सहायता पहुँचाता है। इस प्रकार के लगातार आघात ही इस संसार से छुटकारा पाने की अर्थात् मुक्ति-लाभ करने की हमारी आकांक्षा को जाग्रत करते हैं।

 हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है, उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है, और उतनी ही हमारी इच्छा शक्ति अधिक बलवती होती है।

 मन का विकास करो और उसका संयम करो, उसके बाद जहाँ इच्छा हो, वहाँ इसका प्रयोग करो–उससे अति शीघ्र फल प्राप्ति होगी। यह है यथार्थ आत्मोन्नति का उपाय। एकाग्रता सीखो, और जिस ओर इच्छा हो, उसका प्रयोग करो। ऐसा करने पर तुम्हें कुछ खोना नहीं पड़ेगा। जो समस्त को प्राप्त करता है, वह अंश को भी प्राप्त कर सकता है।

 पहले स्वयं संपूर्ण मुक्तावस्था प्राप्त कर लो, उसके बाद इच्छा करने पर फिर अपने को सीमाबद्ध कर सकते हो। प्रत्येक कार्य में अपनी समस्त शक्ति का प्रयोग करो।
 सभी मरेंगे- साधु या असाधु, धनी या दरिद्र- सभी मरेंगे। चिर काल तक किसी का शरीर नहीं रहेगा। अतएव उठो, जागो और संपूर्ण रूप से निष्कपट हो जाओ। भारत में घोर कपट समा गया है। चाहिए चरित्र, चाहिए इस तरह की दृढ़ता और चरित्र का बल, जिससे मनुष्य आजीवन दृढ़व्रत बन सके।

 संन्यास का अर्थ है, मृत्यु के प्रति प्रेम। सांसारिक लोग जीवन से प्रेम करते हैं, परन्तु संन्यासी के लिए प्रेम करने को मृत्यु है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम आत्महत्या कर लें। आत्महत्या करने वालों को तो कभी मृत्यु प्यारी नहीं होती है। संन्यासी का धर्म है समस्त संसार के हित के लिए निरंतर आत्मत्याग करते हुए धीरे-धीरे मृत्यु को प्राप्त हो जाना।

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 हे सखे, तुम क्योँ रो रहे हो ? सब शक्ति तो तुम्हीं में हैं। हे भगवन्, अपना ऐश्वर्यमय स्वरूप को विकसित करो। ये तीनों लोक तुम्हारे पैरों के नीचे हैं। जड की कोई शक्ति नहीं प्रबल शक्ति आत्मा की हैं। हे विद्वन! डरो मत्; तुम्हारा नाश नहीं हैं, संसार-सागर से पार उतरने का उपाय हैं। जिस पथ के अवलम्बन से यती लोग संसार-सागर के पार उतरे हैं, वही श्रेष्ठ पथ मै तुम्हे दिखाता हूँ! (वि.स. ६/८)

 बडे-बडे दिग्गज बह जायेंगे। छोटे-मोटे की तो बात ही क्या है! तुम लोग कमर कसकर कार्य में जुट जाओ, हुंकार मात्र से हम दुनिया को पलट देंगे। अभी तो केवल मात्र प्रारम्भ ही है। किसी के साथ विवाद न कर हिल-मिलकर अग्रसर हो — यह दुनिया भयानक है, किसी पर विश्वास नहीं है। डरने का कोई कारण नहीं है, माँ मेरे साथ हैं — इस बार ऐसे कार्य होंगे कि तुम चकित हो जाओगे। भय किस बात का? किसका भय? वज्र जैसा हृदय बनाकर कार्य में जुट जाओ।
(विवेकानन्द साहित्य खण्ड-४पन्ना-३१५) (४/३१५)

 तुमने बहुत बहादुरी की है। शाबाश! हिचकने वाले पीछे रह जायेंगे और तुम कुद कर सबके आगे पहुँच जाओगे। जो अपना उध्दार में लगे हुए हैं, वे न तो अपना उद्धार ही कर सकेंगे और न दूसरों का। ऐसा शोर – गुल मचाओ की उसकी आवाज़ दुनिया के कोने कोने में फैल जाय। कुछ लोग ऐसे हैं, जो कि दूसरों की त्रुटियों को देखने के लिए तैयार बैठे हैं, किन्तु कार्य करने के समय उनका पता नही चलता है। जुट जाओ, अपनी शक्ति के अनुसार आगे बढो।इसके बाद मैं भारत पहुँच कर सारे देश में उत्तेजना फूँक दूंगा। डर किस बात का है? नहीं है, नहीं है, कहने से साँप का विष भी नहीं रहता है। नहीं नहीं कहने से तो ‘नहीं’ हो जाना पडेगा। खूब शाबाश! छान डालो – सारी दूनिया को छान डालो! अफसोस इस बात का है कि यदि मुझ जैसे दो – चार व्यक्ति भी तुम्हारे साथी होते –
 तमाम संसा हिल उठता। क्या करूँ धीरे – धीरे अग्रसर होना पड रहा है। तूफ़ान मचा दो तूफ़ान! (वि.स. ४/३८७)

 किसी बात से तुम उत्साहहीन न होओ; जब तक ईश्वर की कृपा हमारे ऊपर है, कौन इस पृथ्वी पर हमारी उपेक्षा कर सकता है? यदि तुम अपनी अन्तिम साँस भी ले रहे हो तो भी न डरना। सिंह की शूरता और पुष्प की कोमलता के साथ काम करते रहो। (वि.स.४/३२०)

 लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्मी तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहान्त आज हो या एक युग मे, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो। (वि.स.६/८८)

 श्रेयांसि बहुविघ्नानि अच्छे कर्मों में कितने ही विघ्न आते हैं। — प्रलय मचाना ही होगा, इससे कम में किसी तरह नहीं चल सकता। कुछ परवाह नहीं। दुनीया भर में प्रलय मच जायेगा, वाह! गुरु की फतह! अरे भाई श्रेयांसि बहुविघ्नानि, उन्ही विघ्नों की रेल पेल में आदमी तैयार होता है। मिशनरी फिशनरी का काम थोडे ही है जो यह धक्का सम्हाले! ….बडे – बडे बह गये, अब गडरिये का काम है जो थाह ले? यह सब नहीं चलने का भैया, कोई चिन्ता न करना। सभी कामों में एक दल शत्रुता ठानता है; अपना काम करते जाओ किसी की बात का जवाब देने से क्या काम? सत्यमेव जयते नानृतं, सत्येनैव पन्था विततो देवयानः (सत्य की ही विजय होती है, मिथ्या की नहीं; सत्य के ही बल से देवयानमार्ग की गति मिलती है।) …धीरे – धीरे सब होगा।

 वीरता से आगे बढो। एक दिन या एक साल में सिध्दि की आशा न रखो। उच्चतम आदर्श पर दृढ रहो। स्थिर रहो। स्वार्थपरता और ईर्ष्या से बचो। आज्ञा-पालन करो। सत्य, मनुष्य — जाति और अपने देश के पक्ष पर सदा के लिए अटल रहो, और तुम संसार को हिला दोगे। याद रखो — व्यक्ति और उसका जीवन ही शक्ति का स्रोत है, इसके सिवाय अन्य कुछ भी नहीं। (वि.स. ४/३९५)

 इस तरह का दिन क्या कभी होगा कि परोपकार के लिए जान जायेगी? दुनिया बच्चों का खिलवाड नहीं है — बडे आदमी वो हैं जो अपने हृदय-रुधिर से दूसरों का रास्ता तैयार करते हैं- यही सदा से होता आया है — एक आदमी अपना शरीर-पात करके सेतु निर्माण करता है, और हज़ारों आदमी उसके ऊपर से नदी पार करते हैं। एवमस्तु एवमस्तु, शिवोsहम् शिवोsहम् (ऐसा ही हो, ऐसा ही हो- मैं ही शिव हूँ, मैं ही शिव हूँ। )

 मैं चाहता हूँ कि मेरे सब बच्चे, मैं जितना उन्नत बन सकता था, उससे सौगुना उन्न्त बनें। तुम लोगों में से प्रत्येक को महान शक्तिशाली बनना होगा- मैं कहता हूँ, अवश्य बनना होगा। आज्ञा-पालन, ध्येय के प्रति अनुराग तथा ध्येय को कार्यरूप में परिणत करने के लिए सदा प्रस्तुत रहना — इन तीनों के रहने पर कोई भी तुम्हे अपने मार्ग से विचलित नहीं कर सकता। (वि.स.६/३५२)

 मन और मुँह को एक करके भावों को जीवन में कार्यान्वित करना होगा। इसीको श्री रामकृष्ण कहा करते थे, “भाव के घर में किसी प्रकार की चोरी न होने पाये।” सब विषओं में व्यवहारिक बनना होगा। लोगों या समाज की बातों पर ध्यान न देकर वे एकाग्र मन से अपना कार्य करते रहेंगे क्या तुने नहीं सुना, कबीरदास के दोहे में है- “हाथी चले बाजार में, कुत्ता भोंके हजार साधुन को दुर्भाव नहिं, जो निन्दे संसार” ऐसे ही चलना है। दुनिया के लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देना होगा। उनकी भली बुरी बातों को सुनने से जीवन भर कोई किसी प्रकार का महत् कार्य नहीं कर सकता। (वि.स.३/३८१)

 अन्त में प्रेम की ही विजय होती है। हैरान होने से काम नहीं चलेगा- ठहरो- धैर्य धारण करने पर सफलता अवश्यम्भावी है- तुमसे कहता हूँ देखना- कोई बाहरी अनुष्ठानपध्दति आवश्यक न हो- बहुत्व में एकत्व सार्वजनिन भाव में किसी तरह की बाधा न हो। यदि आवश्यक हो तो “सार्वजनीनता” के भाव की रक्षा के लिए सब कुछ छोडना होगा। मैं मरूँ चाहे बचूँ, देश जाऊँ या न जाऊँ, तुम लोग अच्छी तरह याद रखना कि, सार्वजनीनता- हम लोग केवल इसी भाव का प्रचार नहीं करते कि, “दुसरों के धर्म का द्वेष न करना”; नहीं, हम सब लोग सब धर्मों को सत्य समझते हैं और उन्का ग्रहण भी पूर्ण रूप से करते हैं हम इसका प्रचार भी करते हैं और इसे कार्य में परिणत कर दिखाते हैं सावधान रहना, दूसरे के अत्यन्त छोटे अधिकार में भी हस्तक्षेप न करना – इसी भँवर में बडे-बडे जहाज डूब जाते हैं पुरी भक्ति, परन्तु कट्टरता छोडकर, दिखानी होगी, याद रखना उन्की कृपा से सब ठीक हो जायेगा।

 जिस तरह हो, इसके लिए हमें चाहे जितना कष्ट उठाना पडे- चाहे कितना ही त्याग करना पडे यह भाव (भयानक ईर्ष्या) हमारे भीतर न घुसने पाये- हम दस ही क्यों न हों- दो क्यों न रहें- परवाह नहीं परन्तु जितने हों सम्पूर्ण शुध्दचरित्र हों।

 नीतिपरायण तथा साहसी बनो, अन्त: करण पूर्णतया शुध्द रहना चाहिए। पूर्ण नीतिपरायण तथा साहसी बनो — प्रणों के लिए भी कभी न डरो। कायर लोग ही पापाचरण करते हैं, वीर पुरूष कभी भी पापानुष्ठान नहीं करते — यहाँ तक कि कभी वे मन में भी पाप का विचार नहीं लाते। प्राणिमात्र से प्रेम करने का प्रयास करो। बच्चो, तुम्हारे लिए नीतिपरायणता तथा साहस को छोडकर और कोई दूसरा धर्म नहीं। इसके सिवाय और कोई धार्मिक मत-मतान्तर तुम्हारे लिए नहीं है। कायरता, पाप्, असदाचरण तथा दुर्बलता तुममें एकदम नहीं रहनी चाहिए, बाक़ी आवश्यकीय वस्तुएँ अपने आप आकर उपस्थित होंगी।(वि.स.१/३५०)

 शक्तिमान, उठो तथा सामर्थ्यशाली बनो। कर्म, निरन्तर कर्म; संघर्ष , निरन्तर संघर्ष! अलमिति। पवित्र और निःस्वार्थी बनने की कोशिश करो — सारा धर्म इसी में है। (वि.स.१/३७९)

 क्या संस्कृत पढ रहे हो? कितनी प्रगति होई है? आशा है कि प्रथम भाग तो अवश्य ही समाप्त कर चुके होगे। विशेष परिश्रम के साथ संस्कृत सीखो। (वि.स.१/३७९-८०)

 शत्रु को पराजित करने के लिए ढाल तथा तलवार की आवश्यकता होती है। इसलिए अंग्रेज़ी और संस्कृत का अध्ययन मन लगाकर करो। (वि.स.४/३१९)

 बच्चों, धर्म का रहस्य आचरण से जाना जा सकता है, व्यर्थ के मतवादों से नहीं। सच्चा बनना तथा सच्चा बर्ताव करना, इसमें ही समग्र धर्म निहित है। जो केवल प्रभु-प्रभु की रट लगाता है, वह नहीं, किन्तु जो उस परम पिता के इच्छानुसार कार्य करता है वही धार्मिक है। यदि कभी कभी तुमको संसार का थोडा-बहुत धक्का भी खाना पडे, तो उससे विचलित न होना, मुहूर्त भर में वह दूर हो जायगा तथा सारी स्थिति पुनः ठीक हो जायगी। (वि.स.१/३८०)

 बालकों, दृढ बने रहो, मेरी सन्तानों में से कोई भी कायर न बने। तुम लोगों में जो सबसे अधिक साहसी है – सदा उसीका साथ करो। बिना विघ्न – बाधाओं के क्या कभी कोई महान कार्य हो सकता है? समय, धैर्य तथा अदम्य इच्छा-शक्ति से ही कार्य हुआ करता है। मैं तुम लोगों को ऐसी बहुत सी बातें बतलाता, जिससे तुम्हारे हृदय उछल पडते, किन्तु मैं ऐसा नहीं करूँगा। मैं तो लोहे के सदृश दृढ इच्छा-शक्ति सम्पन्न हृदय चाहता हूँ, जो कभी कम्पित न हो। दृढता के साथ लगे रहो, प्रभु तुम्हें आशीर्वाद दे। सदा शुभकामनाओं के साथ तुम्हारा विवेकानन्द। (वि.स.४/३४०)

 जब तक जीना, तब तक सीखना’ — अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है। (वि.स.१/३८६)

 जीस प्रकार स्वर्ग में, उसी प्रकार इस नश्वर जगत में भी तुम्हारी इच्छा पूर्ण हो, क्योंकि अनन्त काल के लिए जगत में तुम्हारी ही महिमा घोषित हो रही है एवं सब कुछ तुम्हारा ही राज्य है। (वि.स.१/३८७)

 पवित्रता, दृढता तथा उद्यम- ये तीनों गुण मैं एक साथ चाहता हूँ। (वि.स.४/३४७)

 भाग्य बहादुर और कर्मठ व्यक्ति का ही साथ देता है। पीछे मुडकर मत देखो आगे, अपार शक्ति, अपरिमित उत्साह, अमित साहस और निस्सीम धैर्य की आवश्यकता है- और तभी महत कार्य निष्पन्न किये जा सकते हैं। हमें पूरे विश्व को उद्दीप्त करना है। (वि.स.४/३५१)

 पवित्रता, धैर्य तथा प्रयत्न के द्वारा सारी बाधाएँ दूर हो जाती हैं। इसमें कोई सन्देह नहीं कि महान कार्य सभी धीरे धीरे होते हैं। (वि.स.४/३५१)

 साहसी होकर काम करो। धीरज और स्थिरता से काम करना — यही एक मार्ग है। आगे बढो और याद रखो धीरज, साहस, पवित्रता और अनवरत कर्म। जब तक तुम पवित्र होकर अपने उद्देश्य पर डटे रहोगे, तब तक तुम कभी निष्फल नहीं होओगे — माँ तुम्हें कभी न छोडेगी और पूर्ण आशीर्वाद के तुम पात्र हो जाओगे। (वि.स.४/३५६)

 बच्चों, जब तक तुम लोगों को भगवान तथा गुरू में, भक्ति तथा सत्य में विश्वास रहेगा, तब तक कोई भी तुम्हें नुक़सान नहीं पहुँचा सकता। किन्तु इनमें से एक के भी नष्ट हो जाने पर परिणाम विपत्तिजनक है। (वि.स.४/३३९)

 महाशक्ति का तुममें संचार होगा — कदापि भयभीत मत होना। पवित्र होओ, विश्वासी होओ, और आज्ञापालक होओ। (वि.स.४/३६१)

 बिना पाखण्डी और कायर बने सबको प्रसन्न रखो। पवित्रता और शक्ति के साथ अपने आदर्श पर दृढ रहो और फिर तुम्हारे सामने कैसी भी बाधाएँ क्यों न हों, कुछ समय बाद संसार तुमको मानेगा ही। (वि.स.४/३६२)

 धीरज रखो और मृत्युपर्यन्त विश्वासपात्र रहो। आपस में न लडो! रुपये – पैसे के व्यवहार में शुध्द भाव रखो। हम अभी महान कार्य करेंगे। जब तक तुममें ईमानदारी, भक्ति और विश्वास है, तब तक प्रत्येक कार्य में तुम्हे सफलता मिलेगी। (वि.स.४/३६८)

 जो पवित्र तथा साहसी है, वही जगत् में सब कुछ कर सकता है। माया-मोह से प्रभु सदा तुम्हारी रक्षा करें। मैं तुम्हारे साथ काम करने के लिए सदैव प्रस्तुत हूँ एवं हम लोग यदि स्वयं अपने मित्र रहें तो प्रभु भी हमारे लिए सैकडों मित्र भेजेंगे, आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुः। (वि.स.४/२७६)

 ईर्ष्या तथा अंहकार को दूर कर दो — संगठित होकर दूसरों के लिए कार्य करना सीखो। (वि.स.४/२८०)

 पूर्णतः निःस्वार्थ रहो, स्थिर रहो, और काम करो। एक बात और है। सबके सेवक बनो और दूसरों पर शासन करने का तनिक भी यत्न न करो, क्योंकि इससे ईर्ष्या उत्पन्न होगी और इससे हर चीज़ बर्बाद हो जायेगी। आगे बढो तुमने बहुत अच्छा काम किया है। हम अपने भीतर से ही सहायता लेंगे अन्य सहायता के लिए हम प्रतीक्षा नहीं करते। मेरे बच्चे, आत्मविशवास रखो, सच्चे और सहनशील बनो।(वि.स.४/२८४)

 यदि तुम स्वयं ही नेता के रूप में खडे हो जाओगे, तो तुम्हे सहायता देने के लिए कोई भी आगे न बढेगा। यदि सफल होना चाहते हो, तो पहले ‘अहं’ ही नाश कर डालो। (वि.स.४/२८५)

 पक्षपात ही सब अनर्थों का मूल है, यह न भूलना। अर्थात् यदि तुम किसी के प्रति अन्य की अपेक्षा अधिक प्रीति-प्रदर्शन करते हो, तो याद रखो उसीसे भविष्य में कलह का बिजारोपण होगा। (वि.स.४/३१२)

 यदि कोई तुम्हारे समीप अन्य किसी साथी की निन्दा करना चाहे, तो तुम उस ओर बिल्कुल ध्यान न दो। इन बातों को सुनना भी महान् पाप है, उससे भविष्य में विवाद का सूत्रपात होगा। (वि.स.४/३१३)

 गम्भीरता के साथ शिशु सरलता को मिलाओ। सबके साथ मेल से रहो। अहंकार के सब भाव छोड दो और साम्प्रदायिक विचारों को मन में न लाओ। व्यर्थ विवाद महापाप है। (वि.स.४/३१८)

 बच्चे, जब तक तुम्हारे हृदय में उत्साह एवं गुरू तथा ईश्वर में विश्वास- ये तीनों वस्तुएँ रहेंगी — तब तक तुम्हें कोई भी दबा नहीं सकता। मैं दिनोदिन अपने हृदय में शक्ति के विकास का अनुभव कर रहा हूँ। हे साहसी बालकों, कार्य करते रहो। (वि.स.४/३३२)

 किसी को उसकी योजनाओं में हतोत्साह नहीं करना चाहिए। आलोचना की प्रवृत्ति का पूर्णतः परित्याग कर दो। जब तक वे सही मार्ग पर अग्रेसर हो रहे हैं; तब तक उन्के कार्य में सहायता करो; और जब कभी तुमको उनके कार्य में कोई ग़लती नज़र आये, तो नम्रतापूर्वक ग़लती के प्रति उनको सजग कर दो। एक दूसरे की आलोचना ही सब दोषों की जड है। किसी भी संगठन को विनष्ट करने में इसका बहुत बडा हाथ है। (वि.स.४/३१५)

 किसी बात से तुम उत्साहहीन न होओ; जब तक ईश्वर की कृपा हमारे ऊपर है, कौन इस पृथ्वी पर हमारी उपेक्षा कर सकता है? यदि तुम अपनी अन्तिम साँस भी ले रहे हो तो भी न डरना। सिंह की शूरता और पुष्प की कोमलता के साथ काम करते रहो। (वि.स. ४/३२०)

 क्या तुम नहीं अनुभव करते कि दूसरों के ऊपर निर्भर रहना बुध्दिमानी नहीं है। बुध्दिमान व्यक्ति को अपने ही पैरों पर दृढता पूर्वक खडा होकर कार्य करना चहिए। धीरे धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा। (वि.स. ४/३२८)

 बच्चे, जब तक हृदय में उत्साह एवं गुरू तथा ईश्वर में विश्वास – ये तीनों वस्तुएम रहेंगी – तब तक तुम्हें कोई भी दबा नहीं सकता। मैं दिनोदिन अपने हृदय में शक्ति के विकास का अनुभव कर रहा हूँ। हे साहसी बालकों, कार्य करते रहो। (वि.स. ४/३३२)

 आओ हम नाम, यश और दूसरों पर शासन करने की इच्छा से रहित होकर काम करें। काम, क्रोध एंव लोभ — इस त्रिविध बन्धन से हम मुक्त हो जायें और फिर सत्य हमारे साथ रहेगा। (वि.स. ४/३३८)

 न टालो, न ढूँढों — भगवान अपनी इच्छानुसार जो कुछ भेहे, उसके लिए प्रतिक्षा करते रहो, यही मेरा मूलमंत्र है। (वि.स. ४/३४८)

 शक्ति और विशवास के साथ लगे रहो। सत्यनिष्ठा, पवित्र और निर्मल रहो, तथा आपस में न लडो। हमारी जाति का रोग ईर्ष्या ही है। (वि.स. ४/३६९)

 एक ही आदमी मेरा अनुसरण करे, किन्तु उसे मृत्युपर्यन्त सत्य और विश्वासी होना होगा। मैं सफलता और असफलता की चिन्ता नहीं करता। मैं अपने आन्दोलन को पवित्र रखूँगा, भले ही मेरे साथ कोई न हो। कपटी कार्यों से सामना पडने पर मेरा धैर्य समाप्त हो जाता है। यही संसार है कि जिन्हें तुम सबसे अधिक प्यार और सहायता करो, वे ही तुम्हे धोखा देंगे। (वि.स. ४/३७७)
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 मेरा आदर्श अवश्य ही थोडे से शब्दों में कहा जा सकता है – मनुष्य जाति को उसके दिव्य स्वरूप का उपदेश देना, तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उसे अभिव्यक्त करने का उपाय बताना। (वि.स. ४/४०७)

 जब कभी मैं किसी व्यक्ति को उस उपदेशवाणी (श्री रामकृष्ण के वाणी) के बीच पूर्ण रूप से निमग्न पाता हूँ, जो भविष्य में संसार में शान्ति की वर्षा करने वाली है, तो मेरा हृदय आनन्द से उछलने लगता है। ऐसे समय मैं पागल नहीं हो जाता हूँ, यही आश्चर्य की बात है।
(वि.स. १/३३४, ६ फरवरी, १८८९)

 ‘बसन्त की तरह लोग का हित करते हुए’ – यहि मेरा धर्म है। “मुझे मुक्ति और भक्ति की चाह नहीं। लाखों नरकों में जाना मुझे स्वीकार है, बसन्तवल्लोकहितं चरन्तः- यही मेरा धर्म है।” (वि.स.४/३२८)

 हर काम को तीन अवस्थाओं में से गुज़रना होता है — उपहास, विरोध और स्वीकृति। जो मनुष्य अपने समय से आगे विचार करता है, लोग उसे निश्चय ही ग़लत समझते है। इसलिए विरोध और अत्याचार हम सहर्ष स्वीकार करते हैं; परन्तु मुझे दृढ और पवित्र होना चाहिए और भगवान् में अपरिमित विश्वास रखना चाहिए, तब ये सब लुप्त हो जायेंगे। (वि.स.४/३३०)

 यदि कोई भंगी हमारे पास भंगी के रूप में आता है, तो छुतही बिमारी की तरह हम उसके स्पर्श से दूर भागते हैं। परन्तु जब उसके सीर पर एक कटोरा पानी डालकर कोई पादरी प्रार्थना के रूप में कुछ गुनगुना देता है और जब उसे पहनने को एक कोट मिल जाता है– वह कितना ही फटा-पुराना क्यों न हो– तब चाहे वह किसी कट्टर से कट्टर हिन्दू के कमरे के भीतर पहुँच जाय, उसके लिए कहीं रोक-टोक नहीं, ऐसा कोई नहीं, जो उससे सप्रेम हाथ मिलाकर बैठने के लिए उसे कुर्सी न दे! इससे अधिक विड्म्बना की बात क्या हो सकता है? आइए, देखिए तो सही, दक्षिण भारत में पादरी लोग क्या गज़ब कर रहें हैं। ये लोग नीच जाति के लोगों को लाखों की संख्या मे ईसाई बना रहे हैं। …वहाँ लगभग चौथाई जनसंख्या ईसाई हो गयी है! मैं उन बेचारों को क्यों दोष दूँ? हें भगवान, कब एक मनुष्य दूसरे से भाईचारे का बर्ताव करना सीखेगा। (वि.स.१/३८५)

 प्रायः देखने में आता है कि अच्छे से अच्छे लोगों पर कष्ट और कठिनाइयाँ आ पडती हैं। इसका समाधान न भी हो सके, फिर भी मुझे जीवन में ऐसा अनुभव हुआ है कि जगत में कोई ऐसी वस्तु नहीं, जो मूल रूप में भली न हो। ऊपरी लहरें चाहे जैसी हों, परन्तु वस्तु मात्र के अन्तरकाल में प्रेम एवं कल्याण का अनन्त भण्डार है। जब तक हम उस अन्तराल तक नहीं पहुँचते, तभी तक हमें कष्ट मिलता है। एक बार उस शान्ति-मण्डल में प्रवेश करने पर फिर चाहे आँधी और तूफान के जितने तुमुल झकोरे आयें, वह मकान, जो सदियों की पुरानि चट्टान पर बना है, हिल नहीं सकता। (वि.स.१/३८९)

 यही दुनिया है! यदि तुम किसी का उपकार करो, तो लोग उसे कोई महत्व नहीं देंगे, किन्तु ज्यों ही तुम उस कार्य को वन्द कर दो, वे तुरन्त (ईश्वर न करे) तुम्हे बदमाश प्रमाणित करने में नहीं हिचकिचायेंगे। मेरे जैसे भावुक व्यक्ति अपने सगे – स्नेहियों द्वरा सदा ठगे जाते हैं।
(वि.स)

 मेरी केवल यह इच्छा है कि प्रतिवर्ष यथेष्ठ संख्या में हमारे नवयुवकों को चीन जापान में आना चाहिए। जापानी लोगों के लिए आज भारतवर्ष उच्च और श्रेष्ठ वस्तुओं का स्वप्नराज्य है। और तुम लोग क्या कर रहे हो? … जीवन भर केवल बेकार बातें किया करते हो, व्यर्थ बकवाद करने वालो, तुम लोग क्या हो? आओ, इन लोगों को देखो और उसके बाद जाकर लज्जा से मुँह छिपा लो। सठियाई बुध्दिवालो, तुम्हारी तो देश से बाहर निकलते ही जाति चली जायगी! अपनी खोपडी में वर्षों के अन्धविश्वास का निरन्तर वृध्दिगत कूडा-कर्कट भरे बैठे, सैकडों वर्षों से केवल आहार की छुआछूत के विवाद में ही अपनी सारी शक्ति नष्ट करनेवाले, युगों के सामाजिक अत्याचार से अपनी सारी मानवता का गला घोटने वाले, भला बताओ तो सही, तुम कौन हो? और तुम इस समय कर ही क्या रहे हो? …किताबें हाथ में लिए तुम केवल समुद्र के किनारे फिर रहे हो। तीस रुपये की मुंशी – गीरी के लिए अथवा बहुत हुआ, तो एक वकील बनने के लिए जी – जान से तडप रहे हो — यही तो भारतवर्ष के नवयुवकों की सबसे बडी महत्वाकांक्षा है। तिस पर इन विद्यार्थियों के भी झुण्ड के झुण्द बच्चे पैदा हो जाते हैं, जो भूख से तडपते हुए उन्हें घेरकर ‘ रोटी दो, रोटी दो ‘ चिल्लाते रहते हैं। क्या समुद्र में इतना पानी भी न रहा कि तुम उसमें विश्वविद्यालय के डिप्लोमा, गाउन और पुस्तकों के समेत डूब मरो ? आओ, मनुष्य बनो! उन पाखण्डी पुरोहितों को, जो सदैव उन्नत्ति के मार्ग में बाधक होते हैं, ठोकरें मारकर निकाल दो, क्योंकि उनका सुधार कभी न होगा, उन्के हृदय कभी विशाल न होंगे। उनकी उत्पत्ति तो सैकडों वर्षों के अन्धविश्वासों और अत्याचारों के फलस्वरूप हुई है। पहले पुरोहिती पाखंड को ज़ड – मूल से निकाल फेंको। आओ, मनुष्य बनो। कूपमंडूकता छोडो और बाहर दृष्टि डालो। देखो, अन्य देश किस तरह आगे बढ रहे हैं। क्या तुम्हे मनुष्य से प्रेम है? यदि ‘हाँ’ तो आओ, हम लोग उच्चता और उन्नति के मार्ग में प्रयत्नशील हों। पीछे मुडकर मत देखो; अत्यन्त निकट और प्रिय सम्बन्धी रोते हों, तो रोने दो, पिछे देखो ही मत। केवल आगे बढते जाओ। भारतमाता कम से कम एक हज़ार युवकों का बलिदान चाहती है — मस्तिष्क – वाले युवकों का, पशुओं का नहीं। परमात्मा ने तुम्हारी इस निश्चेष्ट सभ्यता को तोडने के लिए ही अंग्रेज़ी राज्य को भारत में भेजा है… ( वि.स.१/३९८-९९)

 न संख्या-शक्ति, न धन, न पाण्डित्य, न वाक चातुर्य, कुछ भी नहीं, बल्कि पवित्रता, शुध्द जीवन, एक शब्द में अनुभूति, आत्म-साक्षात्कार को विजय मिलेगी! प्रत्येक देश में सिंह जैसी शक्तिमान दस-बारह आत्माएँ होने दो, जिन्होने अपने बन्धन तोड डाले हैं, जिन्होने अनन्त का स्पर्श कर लिया है, जिन्का चित्र ब्रह्मनुसन्धान में लीन है, जो न धन की चिन्ता करते हैं, न बल की, न नाम की और ये व्यक्ति ही संसार को हिला डालने के लिए पर्याप्त होंगे। (वि.स.४/३३६)

 यही रहस्य है। योग प्रवर्तक पंतजलि कहते हैं, ” जब मनुष्य समस्त अलौकेक दैवी शक्तियों के लोभ का त्याग करता है, तभी उसे धर्म मेघ नामक समाधि प्राप्त होती है। वह प्रमात्मा का दर्शन करता है, वह परमात्मा बन जाता है और दूसरों को तदरूप बनने में सहायता करता है। मुझे इसीका प्रचार करना है। जगत् में अनेक मतवादों का प्रचार हो चुका है। लाखों पुस्तकें हैं, परन्तु हाय! कोई भी किंचित् अंश में प्रत्य्क्ष आचरण नहीं करता। (वि.स.४/३३७)

 एक महान रहस्य का मैंने पता लगा लिया है — वह यह कि केवल धर्म की बातें करने वालों से मुझे कुछ भय नहीं है। और जो सत्यद्र्ष्ट महात्मा हैं, वे कभी किसी से बैर नहीं करते। वाचालों को वाचाल होने दो! वे इससे अधिक और कुछ नहीं जानते! उन्हे नाम, यश, धन, स्त्री से सन्तोष प्राप्त करने दो। और हम धर्मोपलब्धि, ब्रह्मलाभ एवं ब्रह्म होने के लिए ही दृढव्रत होंगे। हम आमरण एवं जन्म-जन्मान्त में सत्य का ही अनुसरण करेंगें। दूसरों के कहने पर हम तनिक भी ध्यान न दें और यदि आजन्म यत्न के बाद एक, देवल एक ही आत्मा संसार के बन्धनों को तोडकर मुक्त हो सके तो हमने अपना काम कर लिया। (वि.स. ४/३३७)

 जो सबका दास होता है, वही उन्का सच्चा स्वामी होता है। जिसके प्रेम में ऊँच – नीच का विचार होता है, वह कभी नेता नहीं बन सकता। जिसके प्रेम का कोई अन्त नहीं है, जो ऊँच – नीच सोचने के लिए कभी नहीं रुकता, उसके चरणों में सारा संसार लोट जाता है। (वि.स. ४/४०३)

 वत्स, धीरज रखो, काम तुम्हारी आशा से बहुत ज्यादा बढ जाएगा। हर एक काम में सफलता प्राप्त करने से पहले सैंकडो कठिनाइयों का सामना करना पडता है। जो उद्यम करते रहेंगे, वे आज या कल सफलता को देखेंगे। परिश्रम करना है वत्स, कठिन परिश्रम्! काम कांचन के इस चक्कर में अपने आप को स्थिर रखना, और अपने आदर्शों पर जमे रहना, जब तक कि आत्मज्ञान और पूर्ण त्याग के साँचे में शिष्य न ढल जाय निश्चय ही कठिन काम है। जो प्रतिक्षा करता है, उसे सब चीज़े मिलती हैं। अनन्त काल तक तुम भाग्यवान बने रहो। (वि.स. ४/३८७)

 अकेले रहो, अकेले रहो। जो अकेला रहता है, उसका किसीसे विरोध नहीं होता, वह किसीकी शान्ति भंग नहीं करता, न दूसरा कोई उसकी शान्ति भंग करता है। (वि.स. ४/३८१)

 मेरी दृढ धारणा है कि तुममें अन्धविश्वास नहीं है। तुममें वह शक्ति विद्यमान है, जो संसार को हिला सकती है, धीरे – धीरे और भी अन्य लोग आयेंगे। ‘साहसी’ शब्द और उससे अधिक ‘साहसी’ कर्मों की हमें आवश्यकता है। उठो! उठो! संसार दुःख से जल रहा है। क्या तुम सो सकते हो? हम बार – बार पुकारें, जब तक सोते हुए देवता न जाग उठें, जब तक अन्तर्यामी देव उस पुकार का उत्तर न दें। जीवन में और क्या है? इससे महान कर्म क्या है? (वि.स. ४/४०८

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