भटकता इंसान।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ भटकता इंसान। ϒ

Wandering-humen-kmsraj51

भटकता इंसान।

एक किसान के घर एक दिन उसका कोई परिचित मिलने आया। उस समय वह घर पर नहीं था। उसकी पत्नी ने कहा-‘वह खेत पर गए हैं। मैं बच्चे को बुलाने के लिए भेजती हूं। तब तक आप इंतजार करें।’ कुछ ही देर में किसान खेत से अपने घर आ पहुंचा। उसके साथ-साथ उसका पालतू कुत्ता भी आया। कुत्ता जोरों से हांफ रहा था। उसकी यह हालत देख, मिलने आए व्यक्ति ने किसान से पूछा-‘क्या तुम्हारा खेत बहुत दूर है?’ किसान ने कहा-‘नहीं, पास ही है। लेकिन आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं?’ उस व्यक्ति ने कहा-‘मुझे यह देखकर आश्चर्य हो रहा है कि तुम और तुम्हारा कुत्ता दोनों साथ-साथ आए, लेकिन तुम्हारे चेहरे पर रंच मात्र थकान नहीं जबकि कुत्ता बुरी तरह से हांफ रहा है।’ किसान ने कहा-‘मैं और कुत्ता एक ही रास्ते से घर आए हैं। मेरा खेत भी कोई खास दूर नहीं है। मैं थका नहीं हूं। मेरा कुत्ता थक गया है। इसका कारण यह है कि मैं सीधे रास्ते से चलकर घर आया हूं, मगर कुत्ता अपनी आदत से मजबूर है। वह आसपास दूसरे कुत्ते देखकर उनको भगाने के लिए उसके पीछे दौड़ता था और भौंकता हुआ वापस मेरे पास आ जाता था।

फिर जैसे ही उसे और कोई कुत्ता नजर आता, वह उसके पीछे दौड़ने लगता। अपनी आदत के अनुसार उसका यह क्रम रास्ते भर जारी रहा।
इसलिए वह थक गया है।’ देखा जाए तो यही स्थिति आज के इंसान की भी है। जीवन के लक्ष्य तक पहुंचना यूं तो कठिन नहीं है, लेकिन लोभ, मोह अहंकार और ईर्ष्या जीव को उसके जीवन की सीधी और सरल राह से भटका रही है। अपनी क्षमता के अनुसार जिसके पास जितना है, उससे वह संतुष्ट नहीं। आज लखपति, कल करोड़पति, फिर अरबपति बनने की चाह में उलझकर इंसान दौड़ रहा है। अनेक लोग ऐसे हैं जिनके पास सब कुछ है।


भरा-पूरा परिवार, कोठी, बंगला, एक से एक बढ़िया कारें, क्या कुछ नहीं है। फिर भी उनमें बहुत से दुखी रहते हैं। बड़ा आदमी बनना, धनवान
बनना बुरी बात नहीं, बनना चाहिए। यह हसरत सबकी रहती है। उसके लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी तो थकान नहीं होगी। लेकिन दूसरों के सामने खुद को बड़ा दिखाने की चाह के चलते आदमी राह से भटक रहा है और यह भटकाव ही इंसान को थका रहा है।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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सकारात्मक सोच + निरंतर कार्य = सफलता।

स्वयं पर और स्व-कर्माे पर विश्वास माना सफलता का आधार(नींव) मज़बूत।

 ~KMSRAJ51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

 ~KMSRAJ51

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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खुद के गिरहबान में झांक कर ताे देख लाे।

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ϒ खुद के गिरहबान में झांक कर ताे देख लाे। ϒ

एक गाँव में एक किसान रहता था। जो दूध से दही और मक्खन बनाकर बेचने का काम करता था। एक दिन उसकी बीवी ने उसे मक्खन तैयार करके दिया। वो उसे बेचने के लिए अपने गाँव से शहर की तरफ रवाना हुवा।

वो मक्खन गोल पेढ़ो की शकल में बना हुवा था और हर पेढ़े का वज़न एक Kg था। शहर मे किसान ने उस मक्खन को हमेशा की तरह एक दुकानदार को बेच दिया, और दुकानदार से चायपत्ती, चीनी, तेल और साबुन वगैरह खरीदकर वापस अपने गाँव को रवाना हो गया।

किसान के जाने के बाद। दुकानदार ने मक्खन को फ्रिज़र मे रखना शुरू किया। उसे खयाल आया के क्यूँ ना एक पेढ़े का वज़न किया जाए, वज़न करने पर पेढ़ा सिर्फ 900 gm. का निकला।

हैरत और निराशा से उसने सारे पेढ़े तोल डाले मगर किसान के लाए हुए सभी पेढ़े 900-900 gm. के ही निकले।

अगले हफ्ते फिर किसान हमेशा की तरह मक्खन लेकर जैसे ही दुकानदार की दहलीज़ पर चढ़ा, दुकानदार ने किसान से चिल्लाते हुए कहा, के वो दफा हो जाए, किसी बे-ईमान और धोखेबाज़ मनुष्य से कारोबार करना उसे गवारा नही।

900 gm. मक्खन को पूरा एक Kg. कहकर बेचने वाले शख्स की वो शक्ल भी देखना गवारा नही करता। किसान ने बड़ी ही आजिज़ी (विनम्रता) से दुकानदार से कहा “मेरे भाई मुझसे बद-ज़न ना हो हम तो गरीब और बेचारे लोग है, हमारी माल तोलने के लिए बाट (वज़न) खरीदने की हैसियत कहाँ” आपसे जो एक किलो चीनी लेकर जाता हूँ उसी को तराज़ू के एक पलड़े मे रखकर दूसरे पलड़े मे उतने ही वज़न का मक्खन तोलकर ले आता हूँ।

दोस्तों,

इस कहानी को पढ़ने के बाद आप क्या महसूस करते हैं, किसी पर उंगली उठाने से पहले क्या हमें अपने गिरहबान में झांक कर देखने की ज़रूरत नही……? कहीं ये खराबी हमारे अंदर ही तो मौजूद नही…..?

 अपने भीतर की कमजोरी की जाँच करें।

⇒ किसी पर उंगली उठाने से पहले स्वयं कि कमजोरी को देखे।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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हम चिल्लाते क्यों हैं गुस्से में?

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हम चिल्लाते क्यों हैं गुस्से में?

एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। अचानक उन्होंने सभी शिष्यों से एक सवाल पूछा; “बताओ जब दो लोग एक दूसरे पर गुस्सा करते हैं तो जोर-जोर से चिल्लाते क्यों हैं?”

शिष्यों ने कुछ देर सोचा और एक ने उत्तर दिया : “हमअपनी शांति खो चुके होते हैं इसलिए चिल्लाने लगते हैं।”

संत ने मुस्कुराते हुए कहा : दोनों लोग एक दूसरे के काफी करीब होते हैं तो फिर धीरे-धीरे भी तो बात कर सकते हैं। आखिर वह चिल्लाते क्यों हैं?” कुछ और शिष्यों ने भी जवाब दिया लेकिन संत संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने खुद उत्तर देना शुरू किया।

वह बोले : “जब दो लोग एक दूसरे से नाराज होते हैं तो उनके दिलों में दूरियां बहुत बढ़ जाती हैं। जब दूरियां बढ़ जाएं तो आवाज को पहुंचाने के लिए उसका तेज होना जरूरी है। दूरियां जितनी ज्यादा होंगी उतनी तेज चिल्लाना पड़ेगा। दिलों की यह दूरियां ही दो गुस्साए लोगों को चिल्लाने पर मजबूर कर देती हैं।

जब दो लोगों में प्रेम होता है तो वह एक दूसरे से बड़े आराम से और धीरे-धीरे बात करते हैं। प्रेम दिलों को करीब लाता है और करीब तक आवाज पहुंचाने के लिए चिल्लाने की जरूरत नहीं।

जब दो लोगों में प्रेम और भी प्रगाढ़ हो जाता है तो वह खुसफुसा कर भी एक दूसरे तक अपनी बात पहुंचा लेते हैं। इसके बाद प्रेम की एक अवस्था यह भी आती है कि खुसफुसाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।

एक दूसरे की आंख में देख कर ही समझ आ जाता है कि क्या कहा जा रहा है।

शिष्यों की तरफ देखते हुए संत बोले : “अब जब भी कभी बहस करें तो दिलों की दूरियों को न बढ़ने दें। शांत चित्त और धीमी आवाज में बात करें। ध्यान रखें कि कहीं दूरियां इतनी न बढ़े जाएं कि वापस आना ही मुमकिन न हो।”

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

CYMT-100-10 WORDS KMS

निश्चय ही आप विजयी होंगे, यदि आप अपनी दुर्बलता (Weakness) को अपनी ताकत में तब्दील करना सीख लें।

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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सही अवसर(समय) काे पहचाने।

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सही अवसर(समय) काे पहचाने।

एक नौजवान आदमी, एक किसान की बेटी से
शादी की इच्छा लेकर किसान के पास गया।

किसान ने उसकी ओर देखा और कहा, “युवक” खेत में जाओ, मैं
एक-एक करके तीन बैल छोड़ने वाला हूँ। अगर तुम तीनों बैलों में
से किसी भी एक की पूँछ पकड़ लो तो मैं अपनी बेटी की शादी तुमसे कर दूंगा।

नौजवान खेत में बैल की पूँछ पकड़ने
की मुद्रा लेकर खडा हो गया।

किसान ने खेत में स्थित घर का दरवाजा खोला और एक बहुत ही बड़ा और खतरनाक
बैल उसमे से निकला। नौजवान ने ऐसा बैल पहले कभी नहीं देखा था।

उससे डर कर नौजवान ने निर्णय लिया कि वह अगले बैल का इंतज़ार करेगा और वह एक तरफ
हो गया जिससे बैल उसके पास से होकर निकल गया।

दरवाजा फिर खुला। आश्चर्यजनक रूप से इस बार पहले से भी बड़ा और भयंकर बैल निकला।

नौजवान ने सोचा कि इससे तो पहला वाला बैल ठीक था। फिर उसने एक ओर होकर
बैल को निकल जाने दिया।

दरवाजा तीसरी बार खुला। नौजवान के चहरे पर मुस्कान आ गई।

इस बार एक छोटा और मरियल बैल निकला। जैसे ही बैल नौजवान के पास आने लगा, नौजवान ने उसकी पूँछ
पकड़ने के लिए मुद्रा बना ली ताकि उसकी पूँछ सही समय पर पकड़ ले। पर उस बैल की पूँछ थी ही नहीं।

कहानी से सीख….. हर एक इंसान कि जिन्दगी अवसरों से भरी हुई है। कुछ सरल हैं और कुछ कठिन। पर अगर एक बार अवसर गवां दिया तो फिर वह अवसर दुबारा नहीं मिलेगा। अतः हमेशा प्रथम अवसर को हासिल करने का प्रयास करना चाहिए।

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

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रिश्ताे में प्यार।

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CYMT-KMSRAJ51-4

रिश्ताे में प्यार। 

दोस्तों कहते हैं रिश्ताे में प्यार हाेना चाहिए। तभी रिश्ते बरकरार (बने) रहते हैं। अच्छी बाते हमे याद रखना चाहिए, और बुरे विचार मन में नहीं आने देना चाहिए। रिश्ताे में प्यार हाेना बहुत जरूरी हैं। बिना प्यार के रिश्ताे में दरार (मनमुटाव) ही आती हैं।

 रिश्ताे में कैसा हाेना चाहिए प्यार। एक छोटी कहानी के माध्यम से समझते हैं।

दो भाई समुद्र के किनारे टहल रहे थे,
दोनों के
बीच किसी बात को लेकर बहस
हो गई…!!

बड़े भाई
ने छोटे भाई को थप्पड़ मार दिया…!!

छोटे भाई ने
कुछ नहीं कहा…!!
सिर्फ रेत पे
लिखा-
“आज मेरे बड़े भाई ने मुझे मारा”

अगले दिन दोनों फिर
समुद्र किनारे घूमने के लिए
निकले छोटा भाई
समुद्र में नहाने लगा…!!

अचानक
वो डूबने लगा बड़े
भाई ने उसे बचाया…!!
छोटे भाई ने पत्थर पे
लिखा-
” आज मेरे भाई ने मुझे बचाया “

बड़े भाई
ने पूछा जब मैने तुम्हे मारा तब
तुमने रेत पे लिखा और
जब तुमको बचाया तो पत्थर पे
लिखा ऐसा क्यों…??

विवेकशील छोटे
भाई ने जवाब
दिया –
”जब हमे कोई दुःख दे तो रेत पे लिखना चाहिए”
ताकि
वे जल्दी मिट जाये…!!

परन्तु
जब कोई हमारे लिए अच्छा करता है
तो
हमें पत्थर पर
लिखना चाहिए…??
जहा मिट ना पाएं…!!’

भाव ये हैं की हमे अपने साथ हुई बुरी घटना को भूल जाना चाहिए…!!
जबकि अच्छी घटना को सदैव याद रखना चाहिए…!!

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

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भारत अपडेट हो गया।

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Kmsraj51-CYMT08

भारत अपडेट हो गया।

भारत अपडेट हो गया।

पिछले सप्ताह काफी वर्षों बाद मैं अपने मित्र से मिलने भारत आया। एयरपोर्ट पर मित्र ने कार भेज दी थी, जिससे उसके घर की ओर निकल चला। रास्ते में शहर की तरक्की देखकर खुशी भी हुई एवं आश्चर्य भी हुआ, खैर जैसे ही मित्र के घर पहुँचा उसके नौकर ने अभिवादन करते हुए कहा कि आप चाय नाश्ता लेकर आराम किजीये साहब थोडी देर से आयेंगे। तभी मित्र का विडियो कॉल आया और कहने लगा Sorry यार थोडी देर हो जायेगी तु आराम कर। मैं जब तक कुछ बोलता फोन कट हो गया।
मै पुरानी यादों  में चला गया, सोचने लगा कि पहले तो मुझे लेने एक घंटे पहले एयरपोर्ट पहुँच जाता था।  अब इतना व्यस्त है की कार भेज दी, खैर मेने सोचा कम से कम फोन तो किया भले ही मुझसे यात्रा के बारे में कुछ नही पूछा। रात के खाने पर मित्र से मुलाकात हुई, जनरल बातों के बाद मैने मित्र से कहा कि यहाँ बहुत कुछ बदल गया है, लोग छतों पर नही दिखते।
मित्र बोला छत अब हैं कहाँ ऊंची-ऊंची इमारतों ने छत की संस्कृति को दूर कर दिया है। मेरे भाई; आज बमुश्किल लोगों को सर पर छत नसीब हो रही है और तुम हो की खुली छत की बात कर रहे हो। मैने कहा मैं पूरे दिन यहाँ रहा, पहले जैसे तुम्हारे पढोसी मिलने नही आए! मित्र बोला क्या बात करते हो! किस दुनिया में हो, फेसबुक के जमाने में फेस टू फेस बात करने का टाइम किसके पास है।
मैने कहा जब मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था तो 8 बजे  मेरा मन हुआ कि बाहर बगीचे में चलें वहाँ जरूर कोई मिलेगा परंतु बाहर बगीचे में भी कोई नही मिला, वो सामाजिकता, मिलना जुलना सब कहीं खो गया है। मित्र बोला सामाजिकता तो अभी भी है, कुछ लोग निशा के कजिन  से मिलने गये होंगे तो कुछ लोग महादेव  के दर्शन कर रहे होंगे।  देश-दुनिया की चिंता करने वाले लोग राजनैतिक बहस  में शामिल होने गये होंगे। मैने कहा परंतु बाहर तो कहीं भी कोई आता-जाता नही दिखा।
मित्र हँसते हुए बोला, कैसे नजर आयेंगे। कोई ड्राइंग रूम में तो कोई लिविंग रूम में 24 या 32 इंच के एल सी डी के सामने बैठकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को निभा रहा होगा। मैने बीच में ही टोकते हुए कहा, अरे यार मैं तुझे एक बात बताना तो भूल ही गया शाम को जब बाहर टहल रहा था तो अपना अजय दिखा, देखते ही कहने लगा कब आये? जब तक मैं कुछ बोलता पूछने लगा वाट्सअप पर हो, नम्बर क्या है? जैसे ही मैने नम्बर बताया, पता नही कितनी जल्दी में था मुस्कराते हुए bye करके चला गया। मित्र मुस्कराते हुए बोला भारत अपडेट हो गया, हम मंगल पर पहुँच गये हैं और तुम अभी पुराने भारत को ही ढूंढ रहे हो।
मैने आश्चर्य से कहा, लेकिन तुम्हारे प्रधानमंत्री तो अभी भी रेडियो पर मन की बात करते हैं, दिपावली पर कश्मीर जाते हैं तथा अमेरीका जाकर वहाँ के लोगों को आमंत्रित करके  भारतीय संस्कृति को निभा रहे हैं।  गाँधी जी के सपनो को साकार करने हरिजन बस्ती में भी जा रहे हैं और साफ-सफाई के महत्व को पूरे भारत में पहुँचाने के लिये स्वंय झाडु़ उठाने में भी संकोच नही कर रहे,  माँ गंगा के महत्व को  जन-जन की आवाज बना रहे हैं तो कहीं गॉव का विकास कर रहे हैं और  तुम कह रहे हो कि  भारत अपडेट हो गया।
मित्र बोला, हाँ मैं सच ही तो कह रहा हूँ, भारत अपडेट हो गया हमारे प्रधानमंत्री को मालूम है कि यदि भारत के प्रत्येक व्यक्ति तक अपना वर्चस्व स्थापित करना है तो रेडियो को अपनी आवाज बनानी होगी, टीवी वाले तो स्वंय ही पीछे आ जायेंगे। तुम्हे तो पता ही होगा कि कोकाकोला कंपनी ने भारत की ऐसी-ऐसी जगह पर कोकाकोला बेचा जहाँ बिजली भी नही आती इसी लिये तो दो बार दिवालिया घोषित होने पर भी आज बङी कंपनी में गिनी जाती है और अच्छा कारोबार कर रही है। तुम अभी हमारे प्रधानमंत्री को जानते नही वो बाजू में IIM लेकर घूमते हैं और तो और हमारे प्रधानमंत्री  अपनी कंपनी यानि की पार्टी के CEO भी तो हैं। कश्मीर की बात करते हो, क्या तुमने देखा नही महाराष्ट्र और हरियाणां में पहली बार भाजपा आगई; आशा करते हैं दूरदर्शिता तुम्हे समझ में आगई होगी।
मैने कहा ये तो अच्छी बात है, अपनी पार्टी का कर्ज तो अदा कर रहे हैं वरना कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होने वसियत में मिली पार्टी को ही निगल लिया। मित्र बोला, कौन किसका कर्ज अदा कर रहा है मैं ये तो नही जानता लेकिन एक बात ये जरूर जानता हुँ कि पेट्रोल डीजल के दाम कम होने से हम जनता को जरूर राहत महसूस हो रही है।
मेरे और मित्र के बीच बात करते हुए कब सुबह हो गई पता ही नही चला। ये सुबह मेरे लिये नई जरूर थी किन्तु अपनी भारतीय संस्कृति की खुशबु के साथ थी। आज हमारी सामाजिक संरचना पहले से अपडेट हो गई है, पहले से कहीं अधिक संख्या में दामिनी के साथ खङी होती है तो कहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ एक साथ विरोध करती दिखती है। पलभर में फेसबुक,ट्युटर और वाट्सअप के जरिये फेस टू फेस नजर आती है। परिवर्तन तो जीवन का चक्र है और विकास का सूचक भी, यदि इस विकास में हम अपनी वसुधैव कुटुंबकम  की संस्कृति से भी जुङे हुए हैं तो ये अपडेट सोने में सुहागा है। इन्ही अच्छी यादों के साथ मैंने अपने कार्यक्षेत्र की ओर वापसी की…….
धन्यवाद,
अनीता शर्मा जी।

श्रीमती -अनीता शर्मा जी। (http://roshansavera.blogspot.in/)

I am grateful to Mrs. Anita Sharma Ji, for sharing inspirational real story in Hindi with Kmsraj51 readers.

एक अपील –

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

आपका सबका प्रिय दोस्त,

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

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वाणी का व्यवहार

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Kmsraj51-CYMT08

वाणी का व्यवहार

एक राजा थे। बन-विहार को निकले। रास्ते में प्यास लगी। नजर दौड़ाई एक अन्धे की झोपड़ी दिखी। उसमें जल भरा घड़ा दूर से ही दीख रहा था।
राजा ने सिपाही को भेजा और एक लोटा जल माँग लाने के लिए कहा।

सिपाही वहाँ पहुँचा और बोला- ऐ अन्धे एक लोटा पानी दे दे।
अन्धा अकड़ू था।
उसने तुरन्त कहा- चल-चल तेरे जैसे सिपाहियों से मैं नहीं डरता। पानी तुझे नहीं दूँगा। सिपाही निराश लौट पड़ा।

इसके बाद सेनापति को पानी लाने के लिए भेजा गया। सेनापति ने समीप जाकर कहा अन्धे। पैसा मिलेगा पानी दे।

अन्धा फिर अकड़ पड़ा। उसने कहा, पहले वाले का यह सरदार मालूम पड़ता है। फिर भी चुपड़ी बातें बना कर दबाव डालता है, जा-जा यहाँ से पानी नहीं मिलेगा।

सेनापति को भी खाली हाथ लौटता देखकर राजा स्वयं चल पड़े।

समीप पहुँचकर वृद्ध जन को सर्वप्रथम नमस्कार किया और कहा- ‘प्यास से गला सूख रहा है।

एक लोटा जल दे सकें तो बड़ी कृपा होगी।’
अंधे ने सत्कारपूर्वक उन्हें पास बिठाया और कहा- ‘आप जैसे श्रेष्ठ जनों का राजा जैसा आदर है।

जल तो क्या मेरा शरीर भी स्वागत में हाजिर है। कोई और भी सेवा हो तो बतायें।

राजा ने शीतल जल से अपनी प्यास बुझाई फिर नम्र वाणी में पूछा-
‘आपको तो दिखाई पड़ नहीं रहा है, फिर जल माँगने वालों को सिपाही, सरदार और राजा के रूप में कैसे पहचान पाये?’

अन्धे ने कहा- “वाणी के व्यवहार से हर व्यक्ति के वास्तविक स्तर का पता चल जाता है।”

दोस्तो वाणी उस तीर की तरह हाेती हैं, जाे एक बार कमान(धनुष) से निकलने के बाद वापस नहीं आती। इस लिए जब भी कुछ बाेलाे बहुँत सोच-समझ कर बाेलाे, आपकी वाणी में ऐसा मिठास हाें की सुनने वाला गदगद़(खुश) हाे जायें। ऐसी वाणी कभी ना बाेलाे, जिससे किसी काे दुःख पहुँचे।

आपका दोस्त – कृष्ण मोहन सिंह।

Note::-

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