साहस और आत्मविश्वास।

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ϒ साहस और आत्मविश्वास। ϒ

Courage & Confidence-kmsraj51

मित्रों, जीवन में कई बार परिस्थिती हमारे अनुकूल नही होती। अक्सर कुछ कठिन परिस्थितियाँ हमारे साहस और विश्वास की परिक्षा लेती रहती हैं। कई बार तो ऐसा लगता है कि, समस्याएं समुंद्र की तरह विशाल और उसकी प्रचंड लहरें सब कुछ तहस-नहस कर देंगी। ऐसी परिस्थिती पर विजय पाने के लिए हमें साहस के साथ अपने आत्मविश्वास के बल पर इससे मुकाबला करना चाहिए क्योंकि साहस और आत्मविश्वास वो शक्ति है जिससे सभी परेशानियों को दूर किया जा सकता है। ये वो आधार हैं, जिससे दृणइच्छाशक्ति को बल मिलता है। 

चर्चित मनोवैज्ञानिक लुईस एल के अनुसार, यदि व्यक्ति को कामयाबी हासिल करनी है तो, साहस के साथ आत्मविश्वास के कवच को धारण करना ही होगा। काम कोई भी हो उसमें दिक्कतें न आएं ये तो संभव नही है किन्तु परेशानियों को आत्मविश्वास के साथ पार करना संभव है। यदि हम ह्रदय में अविश्वास और विफलता का डर लाते हैं तो कभी भी सफल नही हो सकते। इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जो ये दर्शाते हैं कि, निडरता और विश्वास से सफलता की राह आसान हो जाती है। शिवाजी और रानी लक्ष्मीबाई के विश्वास भरे साहस से मुगलों और अंग्रेजों के हौसले भी परास्त हो गये थे। विलियम पिट को जब इंग्लैंड के प्रधानमंत्री पद से हटाया गया था, तब उन्होने डेवेनशायर के ड्यूक से निडरता के साथ कहा था कि, इस देश को मैं ही बचा सकता हुँ, इस कार्य को मेरे सिवाय दुसरा कोई नही कर सकता। 11 हफ्ते तक इंग्लैंड में उनके बिना काम चला लेकिन अंत में पिट को ही योग्य मानते हुए उन्हे प्रधानमंत्री बनाया गया। कोलंबस ने अपने साहस और विश्वास के बल पर अमेरीका की खोज की। घनश्याम दास बिङला की शिक्षा सिर्फ पाँचवी तक हुई थी। लेकिन उनके मन में एक सफल उद्योग करने का जज़बा था। उन दिनो जूट का व्यपार केवल अंग्रेज करते थे। अंग्रेजों ने बिङला को कर्ज देने से भी इंकार कर दिया। उन्हे मशीने भी दुगने दाम में खरीदनी पङी, फिर भी साहस और आत्मविश्वास के धनी बिङला ने सभी मुश्किलों का डटकर सामना किया, नतिजा आज सब जानते हैं। बिङला ग्रुप आज प्रतिष्ठित और संपत्तिशाली उद्योग घराना है। 

मित्रों, खुद पर अटूट विश्वास और आगे बढने का साहस ही हमें सफलता का एहसास कराता है। व्यक्ति जब स्वंय पर विश्वास करता है तो उसका आत्मबल प्रकट होता है। शक्तियाँ और क्षमताएं तो हर किसी में मौजूद होती हैं, सिर्फ उसे पहचानने की जरूरत है। अपनी क्षमताओं को जानकर ही हम बेहतर विश्व का निर्माण कर सकते हैं और ये तभी संभव है जब हम अपने विश्वास को साहस के साथ व्यवहार में लायेंगे। आत्मविश्वास भी तभी मजबूत होता है जब हम निडरता के साथ सभी बाधाओं को फेस करते हैं। दुनिया भी उसे ही याद रखती है जो साहस और आत्मविश्वास के साथ अपना रास्ता खुद बनाता है। जीवन की अनेक बाधाओं के बावजूद साहस,  दृणता और  विश्वास  के साथ लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

किसी ने सच ही कहा है, मुश्किलों से डर के भाग जाना आसान होता है। हर पहलु जिंदगी का इम्तहान होता है। डरने वालों को मिलता नही जिंदगी में कुछ, साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे बढने वालों के कदमों में जहान होता है।

Post inspired by Mrs. अनिता शर्मा जी

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अनीता जी नेत्रहीन विद्यार्थियों के सेवार्थ काम करती हैं।

ϒ एक अपील ϒ

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful article with KMSRAJ51 Readers.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

 

 

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2015 में इन 6 तरीकों से दिल और दिमाग को देंं नया जीवन।

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 2015 में इन 6 तरीकों से दिल और दिमाग को देंं नया जीवन।

हमारे अंदर ढेर सारी गलत आदतें होती हैं, जिन्हें हम छोड़ने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन छोड़ नहीं पाते। दरअसल, गलत आदतों के पीछे कुछ कारण होते हैं, जैसे हमारा अकेलापन, नेगेटिव विचार, धोखा मिलना। लाइफ में कोई भी तकलीफ या परेशानी होने पर हम उन्हें दूर करने के चक्कर में गलत आदतों को अपना लेते हैं। आज हम आपको साल के पहले दिन एक नए तरीके से लाइफ की शुरुआत करने के लिए कुछ सलाह दे रहे हैं। इन तरीकों से आप अपनी परेशानी से दूर कर सकते हैं और दर्द से निकल सकते हैं।

1-इमोशनल दर्द को कम करें
शारीरिक दर्द से कहीं ज़्यादा दिल को लगी चोट का दर्द होता है। अगर कोई बात आपके दिल को चुभ रही है, तो जितना जल्दी हो सके, उससे निकलने की कोशिश करें। आपको कहीं से रिजेक्ट कर दिया गया हो, आप एग्जामिनेशन या किसी टेस्ट में फेल हो गए हों, या किसी वज़ह से आपका मूड खराब है, तो इससे हल्के में न लें। जितना जल्दी हो सके, इसके लिए सही रास्ता निकालें। दर्द कैसा भी हो, ज्यादा दिन रहने से घाव ही बनाता है। इसलिए अपने को लेकर हमेशा सतर्क रहें और दर्द से राहत दिलाने में किसी की मदद लें।
ज़्यादा दिन खुद को अकेले रखने से भी दिल और शरीर को दर्द का एहसास होता है। रिसर्च के अनुसार, अकेले रहने से जल्दी मरने की संभावना 14 फीसदी बढ़ जाती है। अकेलेपन को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है कि फैमिली के साथ रहें। अपने करीबी लोगों की एक लिस्ट बनाएं और उनके साथ फोन या सोशल साइट के जरिए जुड़े रहें। बिजी लाइफ में से कुछ समय निकाल कर दोस्तों और फैमिली के साथ समय बिताएं। कभी-कभी दोस्तों के साथ मिलने की भी प्लानिंग करें। इससे आपकी आउटिंग हो जाएगी और आपको बिजी लाइफ में थोड़ा ब्रेक मिल जाएगा।
2-अकेलेपन के निकलने के लिए कोई रास्ता खोजें
दिल में हुआ घाव ज़्यादा दर्द देता है। इसलिए जितना जल्दी हो सके इस दर्द को दूर करने की कोशिश करें। एक बार किसी भी काम में नाकामयाबी मिलने पर हम खुद को बेकार और नाकारा महसूस करने लगते हैं और आगे भी लाइफ में फेल होने का डर लगा रहता है। लाइफ में कभी भी ऐसी नकारात्मक स्थिति होने पर कोशिश करें कि जल्दी से जल्द इस दिक्कत से बाहर हो जाएं। दरअसल, जैसा हम सोचते हैं, हमारा दिमाग वैसे ही काम करने लगता है। इसलिए जिन बातों या चीज़ों से आपको डर रहता है, उन्हें दिमाग से दूर रखें। लाइफ में आगे बढ़ने के लिए प्लानिंग करना शुरू करें, खुद को बिजी रखें।
3-इमोशनल फीलिंग को कम करें
आपका आत्मसम्मान एक तरह से इमोशनल इम्यून सिस्टन की तरह है, जो आपके लचीलेपन को बढ़ाता है और स्ट्रेस और चिंता से बचाता है। आप अपने दिमाग में जिस भी तरह के विचार रखेंगे, उसी तरह से आप इमोशनली स्ट्रॉन्ग होंगे। इसलिए अच्छे विचारों को दिल में जगह दें। नेगेटिव विचारों से दूरी बनाए रखें और कोशिश करें कि दिल और दिमाग पर गलत विचार हावी न हों।
4-आत्मसम्मान को बचा कर रखें
किसी भी तरह के रिजेक्शन के बाद खुद को फिर से पॉजिटिव बनाए रखना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन यह ज़रूरी है। एक बार असफलता मिलने के बाद हम खुद को बेकार और किसी काम के लायक नहीं समझते, लेकिन ऐसा नहीं है। लाइफ में ऊपर उठने के लिए रिजेक्शन भी ज़रूरी है। इसलिए आपको जहां से भी, जैसे भी रिजेक्शन मिला है, उसे सही और पॉजिटिव तरीके से लें। इससे लाइफ में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इन सबके अलावा, रिजेक्शन से निकलने के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप खुद को एक अच्छे दोस्त की तरह ट्रीट करें। दिल की आवाज सुनें, खुद को समझें और खुद का ही सपोर्ट करें।
5-रिजेक्शन के बाद भी हार न मानें
कभी-कभी गलत विचार या बिना किसी बात के दिमाग में नेगेटिव विचार आने से मूड खराब हो जाता है। ज्यादा दिन मूड ऑफ रहने से दिमाग में नेगेटिव विचार अपनी जगह बनाने लगते हैं। इस तरह की दिक्कत से उभरने के लिए दूसरी बातों पर ध्यान देना शुरू करें, जैसे फोन से बात करें या सोशल साइट पर मैसेज-चैट करें, किसी फैमिली मेंबर से बात करें। गलत विचार दिमाग तक न जाएं, इससे पहले उन्हें वहीं खत्म कर दें। खुद को स्ट्रॉन्ग रखने के लिए नेगेटिव विचारों से दूरी बनाए रखना ज़रूरी है।
6-नेगेटिव विचारों से लड़ें
सबसे पहले आपको अपने बारे में पता होना चाहिए कि आप किस तरह की बातों से इमोशनली हर्ट फील करते हैं, साथ ही उससे निकलने का सही तरीका भी पता होना चाहिए। रिजेक्शन, अकेलापन, शर्मिंदा महसूस होने पर या दूसरे इमोशनल घाव से उभरने के लिए कारगर तरीकों को अपनाएं। कुछ लोग स्ट्रेस और टेंशन को दूर करने के लिए शॉपिंग करते हैं, क्योंकि उनको पता है कि इस तरह से स्ट्रेस कम होगा। उसी तरह से आपको अपने बारे में पता होना चाहिए कि आपको किस बात से किस तरह से राहत मिलती है।  लाइफ में अगर आपको दर्द से निकलने के तरीकों के बारे में पता चल जाए, तो आप कभी भी किसी परेशानी से घिर नहीं सकते हैं।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

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हमारा अच्छा व्यवहार ही जीवन का निर्माण करता है।

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balloon seller by Urmi Patel (Om drawing classes)

बैलोन-विक्रेता।

हमारा अच्छा व्यवहार ही जीवन का निर्माण करता है।

एक आदमी गुब्बारे बेच कर जीवन-यापन करता था। वह गांव के आस-पास लगने वाली हाटों में जाता और गुब्बारे बेचता। बच्चों को लुभाने के लिए वह तरह-तरह के गुब्बारे रखता। और जब कभी उसे लगता कि बिक्री कम हो रही है, वह झट से एक गुब्बारा हवा में छोड़ देता। यह देखकर बच्चे खुश हो जाते और गुब्बारे खरीदने के लिए पहुंच जाते।

एक दिन वह हाट में गुब्बारे बेच रहा था और बिक्री बढ़ाने के लिए बीच-बीच में गुब्बारे उड़ा रहा था। पास ही खड़ा एक छोटा बच्चा यह सब बड़ी जिज्ञासा से देख रहा था। इस बार जैसे ही गुब्बारे वाले ने एक सफेद गुब्बारा उड़ाया वह तुरंत उसके पास पहुंचा और मासूमियत से बोला,’अगर आप यह काला वाला गुब्बारा छोड़ेंगे तो क्या वह भी ऊपर जाएगा?’

गुब्बारा वाले ने अचरज के साथ उसे देखा और बोला, ‘बिलकुल जाएगा। गुब्बारे का ऊपर जाना इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह किस रंग का है, निर्भर इस पर करता है कि उसके अंदर क्या है।’

ठीक इसी तरह हम इंसानों पर भी यह बात लागू होती है। कोई अपने जीवन में क्या हासिल करेगा, यह उसके बाहरी रंग-रूप पर निर्भर नहीं करता। बल्कि इस पर निर्भर करता है कि उसके अंदर क्या है। हमारा व्यवहार ही हमारा जीवन निर्माण करता है।

एक बूढ़े किसान को सामान ढोने के लिए गधे की जरूरत थी। वह कुम्हार के पास गधा मांगने के लिए गया। कुम्हार गधा नहीं देना चाहता था। उसने कहा- ‘गधा चरने के लिए गया है और रात को देरी से आएगा। गधा यहां होता तो मुझे देने में खुशी होती। पड़ोसी के काम पड़ोसी नहीं तो क्या परदेसी आएगा।’ दोनों के बीच बातचीत का क्रम चल ही रहा था कि बाड़े में बंधे गधे ने एक लंबा आलाप लिया। किसान ने कहा- ‘गधा तो भीतर बंधा है, तुम बहाना बनाने की बजाय सीधे मना कर देते तो मुझे बुरा नहीं लगता।’ कुम्हार ने हंसते हुए कहा- ‘तुम भी अजीब आदमी हो। तुम्हें आदमी की जबान से गधे की जबान पर ज्यादा भरोसा है।’ किसान ने सरलता से कहा- ‘झूठ बोलने वाले आदमी से पशु ज्यादा भरोसेमंद होता है।’ किसान की बात सुनकर कुम्हार बोला- ‘तुम ठीक कहते हो। अब भविष्य में मैं दैनिक जीवन व्यवहार में झूठ बोलने की बजाय सच्ची बात कहना पसंद करूंगा।’ इस तरह की व्यवहार-कुशलता का संकल्प व्यक्ति को हर दृष्टि से बहुत ऊंचा उठा देती है। अपने परिवार के निकट अथवा दूरस्थ व्यक्तियों के साथ, पड़ोसियों के साथ, अपने कर्मचारियों के साथ, सामाजिक सम्पर्कों वाले सभी व्यक्तियों के साथ आप उचित व्यवहार का निर्वाह करते हैं तो व्यवहार कुशल माने जाएंगे। अगर व्यवहार में संवेदनशीलता है, सहयोगी दृष्टिकोण है, आत्मीयता और उदारतापूर्ण व्यवहार है तो आपका व्यक्तित्व और अधिक निखरेगा।

Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/

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हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए।

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हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए।

हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए। जैसे रोजाना के जीवन में खाने-पीने काम करने, दौड़ भाग करने, खेलने-कूदने, मनोरंजन आदि सबकी सीमा निर्धारित हो, तो समय का सही नियोजन और उपयोग होगा। समय ही जीवन है। एक-एक क्षण मिलकर जीवन बनता है। जीवन थोक नहीं है, चिल्हरों से बनता है जैसे एक-एक पैसे से रुपया फिर रुपये से सौ, हजार, लाख, करोड़ बनते हैं तो सब इकाई से शुरू होता है इसी तरह जीवन है एक-एक सोच मतलब रखती है।

सोच का संग्रह ही लेखन है, उद्बोधन है, कार्य है चाहे जिस क्षेत्र में हो सब एक सोच से प्रारंभ होता है। अब इसमें आता है, सही दिशा में सही सोच जिसे सकारात्मक सोच कहते हैं। गलत दिशा में सोचा गया तो उसे नकारात्मक सोच कहते हैं। पर हम समय प्रबंधन, व्यवसाय या नौकरी प्रबंधन, स्वास्थ्य प्रबंधन और अन्य कई प्रबंधन जो जीवन में होते हैं या हम करते हैं, वे सब सोच से प्रारंभ होते हैं। हमें सोच की सीमा तय करना आना चाहिए। कोई सदस्य घर का बीमार है, हमें सोचना है उसके इलाज के बारे में, डॉक्टर दवा के बारे में उसे सांत्वना देता है कि कोई बात नहीं, जल्दी ठीक हो जाओगे यदि हम सोचते ही रहे कुछ नहीं किया तो सोच चिंता में बदल जायेगा एक चिन्ता घुसी मन में तो वह अपने पूरे रिश्तेदारों को बुला लेती है भय, मोह, आसक्ति, हड़बड़ी आदि।

मैंने एक डॉक्टर को अपनी विवाहिता पुत्री के डिलवरी पेन दर्द के समय इतना चिंतित भयभीत और हड़बड़ी करते देखा कि मुझे आश्चर्य हुआ कि ये कैसे डॉक्टर हैं जो घर के एक सदस्य के प्रसूति दर्द से इतने परेशान हो गये तो मरीज या उसके सदस्यों का क्या हाल हुआ होगा। मैं मानता हूं कि डॉक्टर भी आखिर इंसान होता है पर उसे इतनी जल्दी घबराना नहीं चाहिए। वह अपने मरीजों को कैसे दिलासा देगा। हर चीज की सीमा तय होनी चाहिए। सीमा से बाहर उसका प्रभाव ऋणात्मक हो सकता है। ऋणात्मकता बहुत नुकसान दायक है, आपके पूरे वजूद को हिला देती है। हम पर हमारा मन ही शासन करता है उसे सुधार लें सकारात्मकता से भर लें तो सब ठीक हो जायेगा।

श्रीमत-भागवत गीता अनुसार-

चिन्ता मत करें चिन्तन करें और व्यथा को स्थान न दें व्यवस्था करें।

छोटे-छोटे से शब्द हैं पर जीवन को नया मतलब देते हैं। यही तो है जीवन प्रबंधन जिस पर महान चिन्तक विजय शंकरजी मेहता हमेशा बोलते लिखते रहते हैं। उनकी किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। सब कुछ उपलब्ध है दुनिया में अच्छे विचार, अच्छी किताबें, अच्छे लोग, अच्छे कैसेट, रेडियो, टी.व्ही. के कुछ चैनल आस्था और संस्कार अच्छी चीजें परोस रहे हैं। आपको शांत रहकर पढ़ना-सुनना, सोचना करना, चलना है तो ही आप मंजिल पर पहुंचेंगे। बस कोशिश करिये। सोचिये और सोच की सीमा तय करिये। अच्छी सोच बढ़ाइए, घटिया सोच को घटा कर शून्य कर दीजिए, बस यही मेरा संदेश है।

In English

Everything should be set limit.

Everything must be kisimanirdharit. Such as daily life to race to work, food, play-jump, entertainments etc all the time limit sahiniyojnaauraupyoghoga. Samyahi life. A-together life is a moment. Life is not, wholesale chilharon is made from a money like rupee then bucks hundred, thousand, million, million are made then all unit begins with a similar life thinking holds meaning.
Thinking is only a collection of writings, is whether the served area, exhortations seemed all starts with a thought. Now it comes in the right direction are correct thinking jiseskaratmak sochkahte. Are the usenkaratmak sochkahte been thought in the wrong direction. We at time management, business or job management, health management and other management who are in life or we do they start sabsochse. We must come to frame of thinking. No member of the House is sick we have to think about her treatment, doctors give him consolation about the drug that’ll be no problem, quick fix if we think there are only a few will turn into concern didn’t think exactness in mind so he takes his entire relatives calling haibhay, infatuation, attachment, hadbadiadi.
I married a daughter of dilvari your pen do so fearful and worried about the pain of time rush saw that surprised me was how doctor who is a member of the House have become so upset the patient obstetrics pain or what its members have occurred. I recognize that even doctors finally is on the person so quickly should not go haywire. How will the console my patients. Everything should be fixed limits. Out of bounds is the effect may be negative. Rinatmakta is your whole existence to dayak much damage is nodding. We rule our mind itself is so filled with bike repair positivity will be all right.

According to Shrimat-Bhagwat Gita-

“Do not worry, do not put in place to meditate and soreness.”

Small little words mean to give new life. That is the great life management thinkers speak vijyashankarji Mehta always keep writing. His books have also been published. Everything is available in the world, good ideas, good books, good people, good cassette, radio, TV … Whee. Some are serving faith & values channel, good stuff. Do you think staying calm walk, listen to read-only if you will on the floor. Just try some.Imagine some of the thinking and frame. Boost good thinking, let the poor thinking minus zero, that is my message.

Priyank Dubey

Roorkee-Uttarakhand

We are grateful to Priyank Dubey Ji for sharing this inspirational Hindi story with KMSRAJ51 readers.

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सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।

यह गिफ्ट में या धनी परिवार में पैदा होने से नहीं मिलती है।

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सन् 1600 बनाम सन् 2014 – 40।

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सन् 1600 बनाम सन् 2014-40 ….. 

वर्तमान दौर चाहे वह राजनीति का हो या आर्थिक या फिर इस देश के चिर-संस्कारों से निर्मित नैतिक मूल्यों का ये सभी एक बहुत ही भयावह दौर से गुजर रहे हैं शायद कुछ लोग जो विद्वता के धनी है इसे संक्रमण काल के नाम से भी जानते हैं तो कुछ लोग इसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोगवाद कह रहे हैं लेकिन यह समय मात्र और मात्र एक सच्चे भारतीय जो इसकी अखंडता एवं गौरवमयी इतिहास से थोड़ा भी सरोकार रखता है, के लिए बहुत ही विषम एवं चिंताजनक है स्पष्ट रुप में कहें तो बहुत ही भयावह है।


इतिहास गवाह है कि इस देश की मिट्टी इतनी उपजाऊ है कि इसने एक से एक संस्कारी महापुरुष तथा देशभक्त पैदा किए हैं लेकिन यह इस मिट्टी का दुर्भाग्य है कि विनाशकारी खरपतवार के रुप में यहां जयचंदों ने भी जन्म लिया है तथा इस पावन धरा को कलंकित किया है। आज का भारत भी इसी दौर से गुजर रहा है जहां ख्ररपतवार इतना बढ़ गया है कि अब पोषक फसलें नज़र ही नहीं आती और यह स्थिती केवल राजनीति ही नहीं कमोबेश हर क्षेत्र की हैं। इसका मात्र और एक मात्र कारण हमारे चिर-संस्कारों एवं मूल्यों का ह्रास होना है। मूल्यों एवं आदर्शों का प्रवाह सदैव शीर्ष से होता है और कहा भी है कि यथा राजा-तथा प्रजा लेकिन आज अपने क्षुद्र स्वार्थों की पूर्ति के लिए हमारे देश के कर्णधार नेतृत्व कर्ताओं ने इस उक्ति को ही बदल दिया और बयान दिया कि जैसी जनता है वैसे ही नेतृत्व कर्ता बनेंगे अर्थात ये लोग जनता के इच्छानुसार ही अपने हित साधन के लिए सारे अपराध एवं भ्रष्ट तंत्र को बढ़ावा दे रहे हैं। आखिर वो कौन सी प्रजा या जनता है जिसने राजा को भ्रष्ट एवं डकैत बनने के लिए जनादेश दिया? शायद इसका उत्तर यह है कि इस देश में जनता या नागरिक नाम की कोई व्यवस्था अब अस्तित्व में ही नहीं है यहां केवल उपभोक्तावादी संस्कृति के पोषक मतदाता रहते हैं जिन्हें कोई भी खरीद सकता है तथा ये तथाकथित मतदाता भोली चिड़ियाओं की भांति किसी भी बहेलिए के जाल में फंसने को आतुर है। फिर चाहे वह बहेलिए देशी हो या विदेशी इससे इनको कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि लालच ने संवेदनाओं को मृत प्राय: कर दिया है। इन चिड़ियाओं को स्वतंत्र आसमान से बेहतर सुख-सुविधा युक्त वो स्वप्निल सोने का पिंजड़ा अधिक रास आने लगा है जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं और जो मात्र और मात्र एक छलावा भर है।

आज इस देश की जनता को देश के प्रोफाईल से अधिक अपना हाई प्रोफाईल प्रिय है कमोबेश आज हमारा देश गुलामी से पहले के उसी दौर से गुजर रहा हैं। जनता विभिन्न मुद्दों पर आपस में बंटी हुई है चाहे वो आरक्षण का मुद्दा हो या राज्यवाद या फिर धर्म या जातिवाद का चारों और विघटनकारी शक्तियों का बोलबाला हैं हर आदमी ने अपने चारों और अपने स्वार्थों का एक घेरा बना रखा है तथा इस घेरे या उसके क्षुद्र स्वार्थों को नुकसान पहुंचाने वाला हर आदमी उसका शत्रु है। इस देश में अपनी जातिगत गौरव गाथा गाने वाले इतने जातिगत व धार्मिक सामाजिक संगठन है जिनको शायद गिनना भी संभव नहीं होगा लेकिन दुर्भाग्य है कि वे महापुरुष जो राष्ट्र के लिए एक होकर लड़े उनको भी इन कम्बख्तों ने अपने स्वार्थ के अनुरुप बांट दिया । आज कहीं भी अखिल भारतीय समाज नाम की कोई संस्था नही है क्योंकि सभी ने अपने आपको कई सांचों में बांट लिया है तथा सभी के अपने अपने हित हैं जिनके लिए वे लड़ रहे है उनकी तरफ से देश भले गर्त में जाए कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन उन्हें यह पता नही कि जब तक यह देश अखंड एवं सुरक्षित है तभी तक उनका या उनके समाज का अस्तित्व है: आज की युवा पीढ़ी को एक अदद नौकरी और सुख सुविधा युक्त घर से अधिक सोचने की जरूरत महसूस नहीं होती देश के विषय में या अपनी सभ्यता संस्कृति के बारे में मनन करने का कोई औचित्य नहीं हैं अपने घर की बनी रोटी भी यदि विदेशी पेकिंग में दी जाती है तो खुशी होती है। आज कमोबेश हर दूसरा आदमी मानसिक गुलामी के दौर से गुजर रहा है राष्ट्र छद्म अराजकता के वातावरण से गुजर रहा है। क्या यही स्वतंत्रता है? विकास के नाम पर अपने स्वाभिमान, राष्ट्रीय संस्कृति को भूलाना तथा भौतिकता के चकाचौंध में प्राकृतिक संसाधनों का बंदरबांट कर देश को रसातल की और ले जाना, क्या आजादी का यही मतलब है?

आज के दौर की तुलना भारत के राजपूतकालीन समय से की जा सकती है जब भारत कई छोटी- छोटी रियासतों में बंटा हुआ था तथा ये रियासतें छुद्र स्वार्थों की पूर्ती हेतु आपस में लड़ती रहती थीं। विलासिता एवं अकर्मण्यता की पर्याय बन चुकी ये रियासतें अंदर से जर्जर हो चुकी थी।परिणामस्वरूप ये रियासतें कमजोर होती गईं विदेशी आक्रांताओं ने अपनी हवस एवं बेलगाम क्षुधा की पूर्ति हेतु इसा पावन धरा को कलुषित किया ताकत का एक बड़ा भाग भारतीय समाज कई बुराईयों जैसे छुआछुत, उच्श्रंखल जातिवाद , संप्रदायवाद इत्यादि में जकड़ा हुआ था तो क्या आज कमोबेश हमारे सामने वही परिदृश्य नहीं दिखाई दे रहा है। किसी ने क्या खूब कहा है कि इतिहास अपनी पुनरावृत्ति करता है पर क्या इतने कम अंतराल पर और क्या हम इससे सीख लेने के बजाय इसकी पुनरावृति होने देंगें। आज ये छोटे-छोटे राज्य जो कि नदी के पानी, भाषा, खनिजों के आधिपत्य के लिए न्यायालय में हाजिरी दे रहे हैं और सैकड़ों पार्टियां जो क्षुद्र स्वार्थों के लिए जनता को सब्ज बाग दिखा कर उनका वोटा हासिल कर रही हैं तत्पश्चात उसी जनता का शोषण तो क्या ये आजादी और उससे भी पूर्व अंग्रेजों के आगमन के समय का परिदृश्य प्रस्तुत नहीं कर रही है तथा जनता लाचार कई मतभेदों में उलझी हुई निरिह बनी सब कुछ सहने को विवश है।अगर इसी का नाम आजादी है तो वह दिन दूर नहीं जब इस देश के गद्दार इस देश की अमूल संपदा के साथ-साथ यहां के कथित मतदाताओं के भविष्य का भी किसी विदेशी के हाथों सौदा कर दें तथा बाद में कहें कि जीडीपी बढ़ाने के लिए यह जरूरी था।
जिस देश के पड़ोसी ताकतवर, कूटनीतिक एवं साम्राज्यवादी हों उस देश का राजनैतिक व नैतिक पतन की ओर अग्रसर होना उसके दुश्मनों के मार्ग को और सुगम बना देता है तथा वह देश बिना किसी युद्ध के ही गुलाम बनाया जा सकता है क्योंकि किसी देश का नेतृत्व ही उस देश की समृद्धि और ताकत का आईना होता है जिसमें उस देश की बाकी आवाम की झलक देखी जा सकती है।

संजय मिश्र “सदांश”

नोट: यह रचना किसी विशेष वर्ग, समुदाय या व्यक्ति विशेष पर आधारित नहीं है, न ही हमारा उद्देश्य किसी के दिल को ठेस पहुंचाना है । यह लेख पूर्ण रुप से मां भारती को समर्पित है। यदि कोई तथ्य किसी से मिलता है तो यह संयोग मात्र होगा।


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एक परिवर्तन की चाह जैसे डालियां अधिक प्रौढ़ हो गयी हों

वह धीरे से सर झुकाता फिर उठा लेता था

जैसे अभी बहुत अधिक भार ले सकता है

वह एक नयी दिशा तलाशने लगा था

जहां रुचिकर काम और अच्छी तनख्वाह हो,

इतने अधिक सुदृढ़ आधार वाला काम

कि कम से कम पांच वर्षों तक दूसरी ओर झांकना न पड़े

अपने लिए अत्यधिक चिंता कर रहा था वो

कल बच्चे होंगे और परिवार बूढ़ा हो चला होगा

अभी एक शक्ति है कि किसी भी काम को वो सीख ले

नये काम को भी पुराने की तरह कर सकता है वो

इस बार जो काम मिलेगा उसे

उसी पर भविष्य का आधार होगा

पुरानी जगह बस समय कटता रहा

सिर्फ लोभ था अत्यधिक अनुभव पाने का

अब लोभ है अपना भविष्य संवारने का।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

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