ये समाज कभी ना छोड़े आपको।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ ये समाज कभी ना छोड़े आपको। ϒ

प्रिय पाठक मित्रों,

लोग सोचते है कि ये समाज के लोग क्या सोचेंगे?
जाे कार्य (कर्म) हम कर रहें हैं, अगर हम स्वयं उस कार्य से संतुष्ट नहीं हैं, ताे क्या सिर्फ समाज व दुनिया के लोगाे काे दिखावें के लिए काेई कार्य करना उचित हैं।

आजकल समाज के लोग एक-दूसरे का टांग(पैर) खिंचाई बहुत चतुराई के साथ करते हैं। स्वयं कार्य (कर्म) करके आगे बढ़ने कि नहीं साेचते, बल्कि यह साेचते है कि अगला(फ़लाना) Life में “मेरे से आगे कैसे बढ़ गया?” अब ताे इसकाे राेकना ही हाेगा, अर्थात इसकी टांग(पैर) खिंचाई कर नीचे गिराकर अपने बराबर लाना हैं।

प्रिय मित्रों,, आज मैं आप सभी से एक कहानी Share कर रहा हुँः  “ये समाज कभी ना छोड़े आपको।”

कहानी कुछ इस तरह से हैं …..    एक बार एक किसान अपने बेटे(पुत्र) के साथ बाहर किसी गाँव-देहात से आ रहा था और साथ में एक गधा (donkey) भी था। पिता और पुत्र दोनों अपनी मस्ती में धुन गीत गाते-गुनगुनाते चलें आ रहें थे। तभी रास्ते में एक तिराहे पर कुछ लाेग खड़े हुऐ मिलते है, जब पिता और पुत्र गधे के साथ उनके सामने से गुजरते है तब वहाँ खड़े लाेग आपस में बात करने लगते है कि “दोनों कितने बड़े मूर्ख है साथ में गधा है फिर भी पैदल जा रहें हैं।”

उनकी बातें सुनकर, पिता और पुत्र दोनों गधे के ऊपर बैठकर जाने लगें। अभी कुछ ही दुर आगे बढ़े थे कि एक जगह फिर से कुछ लाेग खड़े दिखाई दिये – जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब आपस में सब एक-दुसरे से बात करने लगते है कि “देखाें दोनों कितने बड़े निर्दयी है एक गधे पर दोनों सवार है।” 

उनकी बातें सुनकर, पिता गधे से उतर कर पैदल ही चलने लगता है। कुछ और दुर आगे बढ़ने पर फिर से एक जगह पर कुछ लाेग खड़े दिखाई देते हैं, जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब आपस में सब एक-दुसरे से बात करने लगते है कि देखाें क्या ज़माना आ गया है “बेटा कितना निर्दयी है खुद ताे गधे पर बैठा हैं और अपने पिता काे पैदल चलवा रहा हैं।”

उनकी बातें सुनकर, अब पुत्र गधे से उतर कर अपने पिता काे गधे के ऊपर बैठा कर, खुद पैदल ही चलने लगता है। थाेड़ा और दुर आगे बढ़ने पर फिर से एक जगह पर कुछ लाेग खड़े दिखाई देते हैं, जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब सभी आपस में एक-दुसरे से बात करने लगते है कि देखाें “पिता कितना निर्दयी है खुद ताे गधे पर बैठा हैं और अपने पुत्र काे पैदल चलवा रहा हैं।”

उनकी बातें सुनकर, अब पिता भी गधे से उतर कर पैदल ही चलने लगा। अर्थात अब पिता और पुत्र दोनों ही गधे काे साथ में लिए पैदल ही चलने लगे।

थाेड़ा और दुर आगे बढ़ने पर फिर से एक जगह पर कुछ लाेग खड़े दिखाई देते हैं, जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब सभी आपस में एक-दुसरे से बात करने लगते है कि देखाें: …..

“दोनों कितने बड़े मूर्ख है साथ में गधा है फिर भी दोनों पैदल जा रहें हैं।”

प्रिय मित्रों, अब ताे आप सभी काे समझ आ ही गया हाेगा कि “क्या करना उचित हैं।” और “क्या अनुचित करना हैं।” 

सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग। 

हमेशा याद रखें ¤ आपके शरीर काे चलाने वाली आत्मा कि तीन मुख्य शक्तियां हैं, “मन, बुद्धि और संस्कार।” बुद्धि निर्णय करने का कार्य करती हैं। अर्थात – बुद्धि अपने आप में बहुत बड़ी जज हैं, “बुद्धि रूपी जज काे सदैव समय प्रमाण निर्णय करने में उपयोग करें।”

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

Please Share your comment`s.

© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

सच्चा उपहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT04

सच्चा उपहार।

सोनू और मिंटू में गहरी मित्रता थी। सोनू साधारण परिवार से सम्बन्ध रखता था जबकि मिंटू बहुत अमीर परिवार से सम्बंधित था। मिंटू को अपने अमीर होने पर घमंड था। सभी उसे समझाते कि घमंड करना अच्छी बात नहीं है पर मिंटू के सामने सभी व्यर्थ थीं।

उस दिन मिंटू का जन्मदिन था। उसके सभी मित्र बड़े बड़े उपहार लेकर आये थे । सोनू भी दावत में उपस्थित हुआ परन्तु एक छोटे से उपहार के साथ । सोनू बड़े प्रेम से अपने मित्र को जन्मदिन की बधाई देता हुआ अपना उपहार जिसमे एक रुमाल था मिंटू को भेंट  देता है। उपहार में रुमाल को देख कर मिंटू  ने गुस्से में कहा-” मुझे यह रुमाल नहीं चाहिए,देखो मेरे पास कितने बड़े बड़े और सुन्दर उपहार हैं । राजेश मेरे लिए साइकिल लाया है। अभय मेरे लिए गिटार लाया है…।”

      इसी तरह मिंटू ने सबके नाम गिनवाने शुरू कर दिए।

यह देख कर मिंटू के दादा जी को बहुत बुरा लगा। उन्हें एक तरकीब सूझी। उन्होंने कहा-“आह ! मेरी आँख में कुछ चला गया है – क्या करूँ? अरे मिंटू ज़रा ,अपनी साइकिल तो लेकर आना। मुझे अपनी आँख पर लगानी है।”

                 “लेकिन वो तो साइकिल है दादाजी ,आपको तो रुमाल की ज़रूरत है।” मिंटू ने कहा।

दादा जी ने तुरंत कहा – “लेकिन रुमाल तो बहुत छोटा है ।”

मिंटू को समझते देर न लगी और तुरंत अपने मित्र सोनू के  पास दौड़ा। वह कुछ बोल नहीं पा रहा था परन्तु उसकी आँखों में पश्चाताप के आंसू थे। उसे अहसास हो रहा था कि यही सच्चा उपहार  है जिसमें सोनू की सुन्दर भावना छिपी है। सोनू ने मिंटू को गले से लगा लिया।

सभी ओर आनंद का वातावरण बन गया था। दादाजी उनके पीछे खड़े होकर मुस्कुरा रहे थे।

℘ नंदिता भारद्वाज (नोएडा, उत्तर प्रदेश)

© हम “नंदिता भारद्वाज जी” के आभारी हैं, “सच्चा उपहार।” कहानी हिंदी में साझा करने के लिए। हम सभी आपके (Team of Kmsraj51.com) उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

Please Share your comment`s.

© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

———– @ Best of Luck @ ———–

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

 

 

_______Copyright © 2015 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

अलग-अलग दृष्टिकोण।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

अलग-अलग दृष्टिकोण।

मास्टर जी क्लास में पढ़ा रहे थे, तभी पीछे से दो बच्चों के आपस में झगड़ा करने की आवाज़ आने लगी। “क्या हुआ तुम लोग इस तरह झगड़ क्यों रहे हो ? ” मास्टर जी ने पूछा।

राहुल : सर, अमित अपनी बात को लेकर अड़ा है और मेरी सुनने को तैयार ही नहीं है।

अमित : नहीं सर, राहुल जो कह रहा है वो बिलकुल गलत है इसलिए उसकी बात सुनने से कोई फायदा नही।

और ऐसा कह कर वे फिर तू-तू मैं-मैं करने लगे।

मास्टर जी ने उन्हें बीच में रोकते हुए कहा, एक मिनट तुम दोनों यहाँ मेरे पास आ जाओ।

राहुल तुम डेस्क की बाईं और अमित तुम दाईं तरफ खड़े हो जाओ।

इसके बाद मास्टर जी ने कवर्ड से एक बड़ी सी गेंद निकाली और डेस्क के बीचो-बीच रख दी।

मास्टर जी : राहुल तुम बताओ, ये गेंद किस रंग की है।

राहुल : जी ये सफ़ेद रंग की है।

मास्टर जी : अमित तुम बताओ ये गेंद किस रंग की है ?

अमित : जी ये बिलकुल काली है। दोनों ही अपने जवाब को लेकर पूरी तरह कॉंफिडेंट थे की उनका जवाब सही है, और एक बार फिर वे गेंद के रंग को लेकर एक दुसरे से बहस करने लगे।

मास्टर जी ने उन्हें शांत कराते हुए कहा, “ठहरो, अब तुम दोनों अपने अपने स्थान बदल लो और फिर बताओ की गेंद किस रंग की है ?”
दोनों ने ऐसा ही किया, पर इस बार उनके जवाब भी बदल चुके थे।

राहुल ने गेंद का रंग काला तो अमित ने सफ़ेद बताया।

अब मास्टर जी गंभीर होते हुए बोले , “बच्चों, ये गेंद दो रंगो से बनी है और जिस तरह यह एक जगह से देखने पे काली और दूसरी जगह से देखने पर सफ़ेद दिखती है उसी प्रकार हमारे जीवन में भी हर एक चीज को अलग – अलग दृष्टिकोण से देखा जा सकता है।”

ये ज़रूरी नहीं है, की जिस तरह से आप किसी चीज को देखते हैं।

उसी तरह दूसरा भी उसे देखे….. इसलिए अगर कभी हमारे बीच विचारों को लेकर मतभेद हो तो ये ना सोचें की सामने वाला बिलकुल गलत है बल्कि चीजों को उसके नज़रिये से देखने और उसे अपना ‪‎नजरिया‬ समझाने का प्रयास करें। तभी आप एक अर्थपूर्ण संवाद कर सकते हैं।

Please Share your comment`s.

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

———– @ Best of Luck @ ———–

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

Swami Vivekananda-kmsraj51

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए हिम्मत और उमंग-उत्साह बहुत जरूरी है।

जहाँ उमंग-उत्साह नहीं होता वहाँ थकावट होती है और थका हुआ कभी सफल नहीं होता।

 ~KMSRAJ51

 

_______Copyright © 2015 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

कहीं आप monkey business में तो नहीं लगे हैं?

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT09

Beware-of-Monkey-Business

Beware of Monkey Business

कहीं आप Monkey Business में तो नहीं लगे हैं? 

एक  समय  की  बात  है , एक  गाँव  में  एक  आदमी  आया  और  उसने  गाँव  वालों  से  कहा कि  वो  बन्दर  खरीदने  आया  है , और  वो  एक  बन्दर  के  10 रुपये  देगा . चूँकि  गाँव  में  बहुत  सारे  बन्दर  थे  इसलिए  गाँव  वाले  तुरंत  ही  इस  काम  में  लग  गए .

उस  आदमी  ने  10 रूपये  की  rate से  1000 बन्दर  खरीद  लिए  अब  बंदरों  की  supply काफी  घट  गयी  और  धीरे  धीरे  गाँव  वालों  ने  बन्दर  पकड़ने  का  प्रयास  बंद  कर  दिया . ऐसा  होने पर  उस  आदमी  ने  फिर  घोषणा  की  कि  अब  वो  20 रूपये  में  एक  बन्दर  खरीदेगा . ऐसा  सुनते  ही गाँव  वाले  फिर  से  बंदरों  को  पकड़ने  में  लग  गए .

बहुत  जल्द  बंदरों  की  संख्या  इतनी  घाट  गयी  की  लोग  ये  काम  छोड़  अपने  खेती -बारी  में  लगने  लगे . अब  एक  बन्दर  के  लिए  25 रुपये  दिए  जाने  लगे , पर  उनकी  तादाद  इतनी  कम  हो  चुकी  थी  की  पकड़ना  तो  दूर  उन्हें  देखने  के  लिए  भी  बहुत  मेहनत  करनी  पड़ती  थी .

तब  उस  आदमी  ने  घोषणा  की  कि  वो  एक  बन्दर  के  50 रूपये  देगा . पर  इस  बार  उसकी  जगह  बन्दर  खरीदने  का  काम  उसका  assistant करेगा  क्योंकि  उसे  किसी  ज़रूरी  काम  से  कुछ  दिनों  के  लिए  शहर  जाना  पद  रहा  है . उस  आदमी  की  गैरमौजूदगी   में  assistant ने  गाँव  वालों  से  कहा  कि  वो  पिंजड़े  में  बंद  बंदरों  को  35 रुपये  में  उससे  खरीद  लें  और  जब  उसका  मालिक  वापस  आये  तो  उसे  50 रुपये  में  बेंच  दें .

फिर  क्या  था  गाँव  वाले  ने  अपनी  जमा  पूँजी   बदारों  को   खरीदने  में  लगा  दी . और  उसके  बाद  ना  कभी  वो  आदमी  दिखा  ना  ही  उसका  assistant, बस  चारो  तरफ  बन्दर  ही  बन्दर  थे .

दोस्तों  कुछ  ऐसा  ही  होता  है  जब  Speak Asia जैसी  company अपना  business  फैलाती  है . बिना  ज्यादा  मेहनत  के  जब  पैसा  आता  दीखता  है तो  अच्छे-अच्छे  लोगों  की  आँखें  चौंधिया  जाती  हैं  और  वो  अपने  तर्क  सांगत  दिमाग  की  ना  सुनकर  लालच  में  फँस  जाते  हैं .

जब  Speak Aisa आई  थी  तो  मुझे  भी  कई  लोगों  ने  इस  join करने  के  लिए  कहा  था , पर  मैंने  join नहीं  किया  क्योंकि  मैं  उनके  business model से  संतुष्ट  नहीं  हो  पाया . और  यकीन  जानिये  ज्यादातर  लोग  संतुष्ट  नहीं  हो  पाते  , जब  बहुत  आसानी  से  पैसा  आता  दीखता  है  तो  कहीं  ना  कहीं  आपके  अन्दर  से  आवाज़  आती  है  कि  कहीं  कुछ  गड़बड़  है , पर  हम  ये  सोच  के  पैसे  लगा  देते  हैं  की  अगर  company 6 महीने  और  नहीं  भागी   तो  भी  मेरा  पैसा  निकल  जायेगा .

कई  लोगों  का  पैसा  निकल  भी  जाता  है , पर  जहाँ  एक  आदमी  को  फायदा  होता  है  वहीँ  10 लोगों  का  नुकसान  भी  होता  है  यानि  यदि  आप  अपने  लाभ  के  लिए  किसी  ऐसी  company से  जुड़ते  हैं  तो  आप  कई  लोगों  का  नुकसान  भी  कराते हैं . और  अधिकतर  नुकसान  उठाने  वाले  लोग  आपके  करीबी  होते  हैं . इसलिए  कभी  भी  ऐसे  लुभावने  वादों  में  मत  आइये ; आप  पैसे  तो  गवाएंगे  ही  साथ  में  रिश्तों  में  भी  दरार  पड़  जायेगी .

तो  अब  जब  कभी  कोई  आपसे  बिना  मेहनत  के  पैसा  कमाने   की  बात  करे  आप  उसे  इस  Monkey Business की कहानी सुना  दीजिये  और  अपना  पल्ला  झाड  लीजिये :)

*Monkey Business means mischievous, suspect, dishonest, or meddlesome behaviour or acts

 —————————————————————————-

निवेदन : यदि  यह  लेख  आपके लिए लाभप्रद रहा हो तो कृपया  कृपया  comment के  माध्यम  से  मुझे ज़रूर बताएं. और इसे अपने Facebook friends  के साथ ज़रूर share करें .

नोट:- Post inspired by AKC (http://www.achhikhabar.com/). We are grateful to My dear friend Mr. Gopal Mishra & AKC for sharing this inspirational story in Hindi for http://kmsraj51.com/ readers.

For more Hindi Story Visit at :- http://www.achhikhabar.com/

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

जीवन में सबसे बड़ी ख़ुशी तथा चुनाैती उस काम काे करने में है जिसे लाेग कहते हैं कि “तुम नहीं कर सकते”।

-पूज्य आचार्य श्री बाल कृष्ण जी महाराज

 

_______Copyright © 2014 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

‘‘सच्चा शिष्य’’

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

‘‘सच्चा शिष्य’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बहुत पुरानी बात है। एक विद्वान आचार्य थे। उनका एक गुरूकुल था।

प्राचीन काल में आचार्य विद्यार्थीयाें को निशुल्क शिक्षा दिया करते थे।

एक दिन आचार्य जी ने गुरूकुल के सारे विद्यार्थियों को अपने पास बुलाया और कहा-

‘‘प्रिय विद्यार्थियों मेरी कन्या विवाह योग्य हो गयी है। परन्तु इसका विवाह करने के लिए मेरे पास धन नही है। मेरी समझ में नही आ रहा है कि कैसे इसका विवाह करूँ।’’

कुछ विद्यार्थी जिनके माता-पिता धनवान थे।

उनसे बोले- ‘‘गुरू जी! हम लोग अपने माता‘पिता से कह कर आपको धन दिलवा देंगे।’’

आचार्य जी बोले- ‘‘शिष्यों! मुझे संकोच होता है, मैं लालची आचार्य नही कहाना चाहता।’’ फिर बोले कि मैं अपनी पुत्री का विवाह अपने शिष्यों के धन से ही करना चाहता हूँ। परन्तु ध्यान रहे कि तुममे से कोई भी धन माँग कर नही लायेगा। जो विद्यार्थी धनी परिवारों के नही थे उनसे आचार्य जी ने कहा कि तुम लोग भी अपने घरों से कुछ न कुछ ले आना परन्तु किसी को पता नही लगना चाहिए और उस वस्तु पर किसी की दृष्टि भी नही पड़नी चाहिए।”

कुछ ही दिनों में आचार्य जी के पास पर्याप्त धन व वस्तुएँ एकत्रित हो गयी।

तभी आचार्य जी के पास एक अत्यन्त धनी परिवार का शिष्य आकर बोला-

‘‘आचार्य जी मेरे घर में किसी प्रकार की कमी नही है, परन्तु मैं आपके लिए कुछ भी नही ला पाया हूँ।’’

आचार्य जी बोले- ‘‘ क्यों ? क्या तुम गुरू की सेवा नही करना चाहते हो?’’

शिष्य ने उत्तर दिया- ‘‘नही गुरू जी! ऐसी बात नही है। आपने ही तो कहा था कि कोई वस्तु या धन लाते हुए किसी को पता नही लगना चाहिए और उस वस्तु पर किसी की दृष्टि भी नही पड़नी चाहिए। मुझे वह स्थान नही मिला, जहाँ कोई देख न रहा हो।’’

आचार्य जी बोले- ‘‘तुम झूठ बोलते हो। कहीं तो कोई ऐसा समय व स्थान रहा होगा जब तुम्हें कोई देख नही रहा होगा।’’

शिष्य आँखों में आँसू भर कर बोला- ‘‘गुरू जी! ऐसा समय व स्थान तो अवश्य मिला परन्तु मैं भी तो उस समय अपने इस कृत्य को देख रहा था।’’

आचार्य जी ने उस शिष्य को गले से लगा लिया और बोले-

‘‘तू ही मेरा सच्चा शिष्य है। मुझे अपनी कन्या के लिए विवाह के लिए धन की आवश्यकता नही थी। मैं तो उसके वर के रूप में तेरे जैसा ही सदाचारी वर खोज रहा था।’’

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

We are grateful to DR. Rupcndra Shastri ‘Mayank Ji for sharing this very inspirational Hindi story with KMSRAJ51 readers.

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

DR. Rupcndra Shastri ‘Mayank` Blog:- http://powerofhydro.blogspot.in/

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

best hindi website-kmsraj51

“सपने देखना बेहद जरुरी है, लेकिन केवल सपने देखकर ही मंजिल को हासिल नहीं किया जा सकता,
सबसे ज्यादा जरुरी है जिंदगी में खुद के लिए कोई लक्ष्य तय करना|”

-Kmsraj51

 

_______Copyright © 2014 kmsraj51.com All Rights Reserved.________

 

प्रभु जरुर खुश होंगे।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-Kmsraj51

More quotes visit at kmsraj51 copy

एक बार एक अजनबी किसी के घर गया। वह अंदर गया और मेहमान कक्ष मे बैठ गया। वह खाली हाथ आया था तो उसने सोचा कि कुछ उपहार देना अच्छा रहेगा। तो उसने वहा टंगी एक पेन्टिंग उतारी और जब घर का मालिक आया,उसने पेन्टिंग देते हुए कहा, यह मै आपके लिए लाया हुँ। घर का मालिक, जिसे पता था कि यह मेरी चीज मुझे ही भेंट दे रहा है, सन्न रह गया। अब आप ही बताएं कि क्या वह भेंट पा कर, जो कि पहले से ही उसका है, उस आदमी को खुश होना चाहिए ? मेरे ख्याल से नहीं। लेकिन यही चीज हम भगवान के साथ भी करते है। हम उन्हें फूल, फल और हर चीज जो उनकी ही बनाई है, उन्हे भेंट करते हैं और सोचते हैं कि ईश्वर खुश हो जाएगें। हम यह नहीं समझते कि उनको इन सब चीजो कि जरुरत नही। अगर आप सच मे उन्हे कुछ देना चाहते हैं तो अपना प्यार दीजिए उन्हे अपने हर एक श्वास मे याद करके और विश्वास मानिए प्रभु जरुर खुश होंगे ।

English-

Once an alien has the inside someone’s House and guests sat in the room came up empty handed so she thought that would be nice to give some gifts so he find the owner of the House and launched a tangi came when painting, he said, were painting it I brought for you at work. the master of the House, which knew it is only offering me my stuffTell you now, shocking live. whether it can find, which is already offering his, that man should be happy? My guess is no, but the same thing we do with God we have them flowers, fruits and everything that has made his own, called them and think that God will be happy we don’t understand that they don’t need all these things with that. If you really want to give them something in your love remember every single breathing them in your hand and believe will be happy the Lord manie notice.

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@yahoo.inपसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

CYMT-KMSRAJ51

 

kmsraj51 की कलम से …..

Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

-KMSRAJ51 

 

_____ all @rights reserve under Kmsraj51-2013-2014 ______

पिता का आशीर्वाद॥

kmsraj51 की कलम से

 “अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

Soulword_kmsraj51 - Change Y M Tपिता का आशीर्वाद

_____________________
एक बार एक युवक अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने वाला था। उसकी बहुत दिनों से एक शोरूम में रखी स्पोर्टस कार लेने की इच्छा थी। उसने अपने पिता से कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने पर उपहारस्वरूप वह कार लेने की बात कही क्योंकि वह जानता था कि उसके पिता उसकी इच्छा पूरी करने में समर्थ हैं। कॉलेज के आखिरी दिन उसके पिता ने उसे अपने कमरे में बुलाया और कहा कि वे उसे बहुत प्यार करते हैं तथा उन्हें उस पर गर्व है। फिर उन्होंने उसे एक सुंदर कागज़ में लिपटा उपहार दिया । उत्सुकतापूर्वक जब युवक ने उस कागज़ को खोला तो उसे उसमें एक आकर्षक जिल्द वाली ‘भगवद् गीता’ मिली जिसपर उसका नाम भी सुनहरे अक्षरों में लिखा था। यह देखकर वह युवक आगबबूला हो उठा और अपने पिता से बोला कि इतना पैसा होने पर भी उन्होंने उसे केवल एक ‘भगवद् गीता’ दी। यह कहकर वह गुस्से से गीता वहीं पटककर घर छोड़कर निकल गया।

Father Day-kmsraj51

 

बहुत वर्ष बीत गए और वह युवक एक सफल व्यवसायी बन गया। उसके पास बहुत धन-दौलत और भरापूरा परिवार था। एक दिन उसने सोचा कि उसके पिता तो अब काफी वृद्ध हो गए होंगे। उसने अपने पिता से मिलने जाने का निश्चय किया क्योंकि उस दिन के बाद से वह उनसे मिलने कभी नहीं गया था। अभी वह अपने पिता से मिलने जाने की तैयारी कर ही रहा था कि अचानक उसे एक तार मिला जिसमें लिखा था कि उसके पिता की मृत्यु हो गई है और वे अपनी सारी संपत्ति उसके नाम कर गए हैं। उसे तुरंत वहाँ बुलाया गया था जिससे वह सारी संपत्ति संभाल सके।

वह उदासी और पश्चाताप की भावना से भरकर अपने पिता के घर पहुँचा। उसे अपने पिता की महत्वपूर्ण फाइलों में वह ‘भगवद् गीता’ भी मिली जिसे वह वर्षों पहले छोड़कर गया था। उसने भरी आँखों से उसके पन्ने पलटने शुरू किए। तभी उसमें से एक कार की चाबी नीचे गिरी जिसके साथ एक बिल भी था। उस बिल पर उसी शोरूम का नाम लिखा था जिसमें उसने वह स्पोर्टस कार पसंद की थी तथा उस पर उसके घर छोड़कर जाने से पिछले दिन की तिथि भी लिखी थी। उस बिल में लिखा था कि पूरा भुगतान कर दिया गया है।

कई बार हम भगवान की आशीषों और अपनी प्रार्थनाओं के उत्तरों को अनदेखा कर जाते हैं क्योंकि वे उस रूप में हमें प्राप्त नहीं होते जिस रूप में हम उनकी आशा करते हैं |

 

Post inspired by: 

Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj-KMSRAJ51

पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज

मैं श्री आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का बहुत आभारी हूँ!!

आपको दिल से शुक्रिया;

Ayurveda Product Available on;-

http://patanjaliayurved.org/



Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है:kmsraj51@yahoo.in. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

also send me E-mail:

kmsraj51@yahoo.in 

&

 cymtkmsraj51@hotmail.com

love-rose-kmsraj51



जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

kmsraj51- C Y M T

kmsraj51 की कलम से …..

Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

_________________ all rights reserve under kmsraj51-2013 _________________

 

 

 

विल्मा रुडोल्फ – अपंगता से ओलम्पिक गोल्ड मैडल तक

kmsraj51 की कलम से

Soulword_kmsraj51 - Change Y M Tयह कहानी है उस लड़की की जिसे ढाई साल की उम्र में पोलियो हुआ, जो 11 साल की उम्र तक बिना ब्रेस के चल नहीं पाई पर जिसने 21 साल की उम्र में 1960 के ओलम्पिक में दौड़ में 3 गोल्ड मैडल जीते…..

यह कहानी है उस लड़की की जिसका जन्म बेहद गरीब परिवार में हुआ पर गरीबी जिसके होंसलो को नहीं तोड़ पाई…..

यह कहानी है उस लड़की की जिसका जन्म  एक अश्वेत परिवार में हुआ (तब अमेरिका में अश्वेतों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता था ), पर जिसके सम्मान में आयोजित भोज समारोह में, पहली बार अमेरिका में, श्वेतो और अश्वेतों ने एक साथ हिस्सा लिया….

यह कहानी है विल्मा रुडोल्फ की….

Tribute

Wilma Rudolph-kmsraj51

Wilma Rudolph

  • Born: June 23, 1940
  • Died: November 12, 1994
  • Location: Brentwood , Tennessee

 

विल्मा का जन्म 1939 में अमेरिका के टेनेसी राज्य के एक कस्बे में हुआ। विल्मा के पिता रुडोल्फ कुली व माँ सर्वेंट का काम करती थी। विल्मा 22 भाई – बहनों में 19 वे नंबर की थी।
विल्मा बचपन से ही बेहद बीमार रहती थी, ढाई साल की उम्र में उसे पोलियो हो गया।  उसे अपने पेरों को हिलाने में भी बहुत दर्द होने लगा। बेटी की ऐसी हालत देख कर, माँ ने बेटी को सँभालने के लिए अपना काम छोड़ दिया और उसका इलाज़ शुरू कराया।  माँ सप्ताह में दो बार उसे, अपने कस्बे से 50 मील दूर स्तिथ हॉस्पिटल में इलाज के लिए लेकर जाती, क्योकि वो ही सबसे नजदीकी हॉस्पिटल था जहा अश्वेतों के इलाज की सुविधा थी। बाकी के पांच दिन घर में उसका इलाज़ किया जाता। विल्मा का मनोबल बना रहे इसलिए माँ ने उसका प्रवेश एक विधालय में करा दिया।  माँ उसे हमेशा अपने आपको बेहतर समझने के लिए प्रेरित करती।

पांच साल तक इलाज़ चलने के बाद विल्मा की हालत में थोडा सुधर हुआ।  अब वो एक पाँव में ऊँचे ऐड़ी के जूते पहन कर खेलने लगी। डॉक्टर ने उसे बास्केट्बाल खेलने की सलाह दी। विल्मा का इलाज कर रहे डॉक्टर के. एमवे. ने कहा था की विल्मा कभी भी बिना ब्रेस के नहीं चल पाएगी।  पर माँ के समर्पण और विल्मा की लगन के कारण, विल्मा ने 11 साल की उम्र में अपने ब्रेस उतारकर पहली बार बास्केट्बाल खेली।

Wilma Rudolph-file-kmsraj51

यह उनका इलाज कर रहे डॉक्टर के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। जब यह बात डॉक्टर के. एम्वे. को पता चली तो वो उससे मिलने आये। उन्होंने उससे ब्रेस उतारकर दौड़ने को कहा।  विल्मा ने फटाफट ब्रेस उतारा और चलने लगी।  कुछ फीट चलने के बाद वो दौड़ी और गिर पड़ी।  डॉक्टर एम्वे. उठे और किलकारी मारते हुए विल्मा के पास पहुचे।  उन्होंने विल्मा को उठाकर सीने से लगाया और कहा शाबाश बेटी। मेरा कहा गलत हुआ, पर मेरी साध पूरी हुई। तुम दौडोगी, खूब दौडोगी और सबको पीछे छोड़ दौगी। विल्मा ने आगे चलकर एक इंटरव्यू में कहा था की डॉक्टर एम्वे. की उस शाबाशी ने जैसे एक चट्टान तोड़ दी और वहां  से एक उर्जा की धारा बह उठी। मेनें सोच लिया की मुझे संसार की सबसे तेज धावक बनना है।

इसके बाद विल्मा की माँ ने उसके लिए एक कोच का इंतजाम किया। विल्मा की लगन और संकल्प को देखकर स्कुल ने भी उसका पूरा सहयोग किया।  विल्मा पुरे जोश और लग्न के साथ अभ्यास करने  लगी।  विल्मा ने 1953 में पहली बार अंतर्विधालीय दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।  इस प्रतियोगिता में वो आखरी स्थान पर रही।  विल्मा ने अपना आत्मविश्वास कम नहीं होने दिया उसने पुरे जोर – शोर से अपना अभ्यास जारी रखा।  आखिरकार आठ असफलताओं के बाद नौवी प्रतियोगिता में उसे  जीत  नसीब हुई। इसके बाद विल्मा ने पीछे मुड कर नहीं देखा वो लगातार बेहतरीन  प्रदर्शन करती रही जिसके फलस्वरूप उसे 1960 के रोम ओलम्पिक मे देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला ।

ओलम्पिक मे विल्मा ने 100 मिटर दौड, 200 मिटर दौड और 400 मिटर रिले दौड मे गोल्ड मेडल जीते । इस तरह विल्मा, अमेरिका की प्रथम अश्वेत महिला खिलाडी बनी जिसने दौड की तीन प्रतियोगिताओ मे गोल्ड मेडल जीते। अखबारो ने उसे ब्लैक गेजल की उपाधी से नवाजा जो बाद मे धुरंधर अश्वेत खिलाडीयो  का पर्याय बन गई।

national-day-in-black-history-wilma-rudolph-kmsraj51Wilma Rudolph was inducted into the Olympic Hall of Fame on Oct. 6, 1983. Rudolph was the first American woman to win three Olympic Gold Medals in track.
वतन वापसी पर उसके सम्मान में एक भोज समारोह का आयोजन हुआ जिसमे पहली बार श्वेत और अश्वेत अमेरिकियों ने एक साथ भाग लिया, जिसे  की विल्मा अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी जीत मानती थी।

Wilma Rudolph-olympic-kmsraj51Wilma Rudolph became the first American woman to win three gold medals in track and field during a single Olympic Games.
आखिर में एक बात विल्मा ने हमेशा अपनी जीत का सार श्रेय अपनी माँ को दिया, विल्मा ने हमेशा कहा की अगर माँ उसके लिय त्याग नहीं करती तो वो कुछ नहीं कर पाती।


Wilma Rudolph

  • Born: June 23, 1940
  • Died: November 12, 1994
  • Location: Brentwood , Tennessee

 

First American Woman to win three gold medals in track and field during a single Olympic Games


Wilma Rudolph became the first American woman to win three gold medals in track and field during a single Olympic Games, despite running on a sprained ankle.

Born Wilma Glodean Rudolph on June 23, 1940 in St. Bethlehem Tennessee, she was the twentieth of twenty-two children. When Wilma was four years old, her parents Ed and Blanche Rudolph were informed that their daughter had polio. By 1947 Blanche was making the 50 mile journey to Nashville twice a week for medical treatments for Wilma. Mrs. Rudolph would often treat Wilma herself with homemade remedies and nightly massages on her legs, promising she would one day walk without braces.

In 1952, when Wilma turned 12, her dream was realized and she no longer needed the braces that made her “different” from the other kids. While In high school, Wilma followed her older sisters and participated in basketball, eventually setting state records and leading her team to a state championship. However, a Tennessee state track and field coach, Edward Temple, spotted her and foresaw her amazing potential. He knew he had found a natural athlete. Wilma had already gained some track experience on Burt High School’s track team two years before, mostly as a way to keep busy between basketball seasons. By the age of 16, she had secured her place on the U.S. Olympic track and field team and returned from the 1956 Melbourne Games with a bronze medal in the 4 X 100 relay.

She returned to the 1960 Rome Olympic games to compete and won gold in three events, the 100m, 200m, and the 4 x 100 relay. She achieved Olympic records in all of her Rome competitions. She wanted her victories to pay tribute to Jesse Owens, who had been her inspiration.

Wilma Rudolph next won two races at a U.S. – Soviet meet and then announced her retirement from track competition in 1962.

1963 proved to be a busy year. She married her high school sweetheart with whom she had four children. After retiring from amateur sports, Wilma was granted a full scholarship to Tennessee State University and thus began her studies in 1963. She completed her studies and earned her bachelor’s degree in elementary education. She later coached at Burt High School and then moved on to serve as a sports commentator.

Wilma Rudolph was decorated with multiple awards and honors. She was named United Press Athlete of the Year in 1960 and Associated Press Woman Athlete of the Year in 1960. In 1961 she won the James E. Sullivan Award as the top amateur athlete in the United States. Her father died in that same year. She was voted in and inducted into four different Halls of Fame: National Black Sports and Entertainment hall of Fame in 1973 and the National Track and Field Hall of Fame in 1974, U.S. Olympic Hall of Fame in1983, and National Women’s Hall of Fame in 1994.

Wilma published her autobiography Wilma, “The Story of Wilma Rudolph,” in 1977, which NBC made into a movie that same year.

Wilma Rudolph was diagnosed with brain and throat cancer in July of 1994. She died four months later at age 54, on November 12, 1994. She was survived by four children, eight grandchildren, and over 100 nieces and nephews.



 

KENNEDY MEETS WITH WILMA RUDOLPHPresident Kennedy chats in his White House office April 14, 1961, with Wilma Rudolph, winner of three gold medals in the 1960 Olympic games. Wilma, a student at Tennessee State, won the 100- and 200-meter races in Rome and was the anchor runner on the winning 400-meter relay team.

 

ED TEMPLE RYLAND HOSKINSA statue of Olympic track star Wilma Rudolph makes up a portion of the Tennessee Sports Hall of Fame as member Ed Temple, left, looks over the track and field section with Ryland Hoskins, during the grand opening in the Gaylord Entertainment Center in Nashville, Tenn., on Tuesday, Jan. 11, 2000.

hitesh-KMSRAJ51मैं श्री-हितेश नरेंद्र सिंह का आभारी हूं.

सफलता प्रेरक कहानी साझा करने के लिए.

Mr. Hitesh Narendra Singh

Chip Editor of :- https://kmsraj51.wordpress.com/

 



 

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@yahoo.in. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

 also send mail:

kmsraj51@yahoo.in 

&

 cymtkmsraj51@hotmail.com



pink-sky-kmsraj51-10-Words for a success ful life

 https://kmsraj51.wordpress.com/

 

 95 + देश के पाठकों द्वारा पढ़ा जाने वाला वेबसाइट हैं॥

I am grateful to all of my dear readers.

 

https://kmsraj51.wordpress.com/

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

All rights reserve under: kmsraj51(सभी अधिकार रिज़र्व अंडर: kmsraj51)







 

 

कैसे आया जूता।

 Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

कैसे आया जूता।

Image

कैसे आया जूता।

एक बार की बात है एक राजा था। उसका एक बड़ा-सा राज्य था। एक दिन उसे देश घूमने का विचार आया और उसने देश भ्रमण की योजना बनाई और घूमने निकल पड़ा। जब वह यात्रा से लौट कर अपने महल आया। उसने अपने मंत्रियों से पैरों में दर्द होने की शिकायत की। राजा का कहना था कि मार्ग में जो कंकड़ पत्थर थे वे मेरे पैरों में चुभ गए और इसके लिए कुछ इंतजाम करना चाहिए।कुछ देर विचार करने के बाद उसने अपने सैनिकों व मंत्रियों को आदेश दिया कि देश की संपूर्ण सड़कें चमड़े से ढंक दी जाएं। राजा का ऐसा आदेश सुनकर सब सकते में आ गए। लेकिन किसी ने भी मना करने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह तो निश्चित ही था कि इस काम के लिए बहुत सारे रुपए की जरूरत थी। लेकिन फिर भी किसी ने कुछ नहीं कहा। कुछ देर बाद राजा के एक बुद्घिमान मंत्री ने एक युक्ति निकाली। उसने राजा के पास जाकर डरते हुए कहा कि मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूँ।

अगर आप इतने रुपयों को अनावश्यक रूप से बर्बाद न करना चाहें तो एक अच्छी तरकीब मेरे पास है। जिससे आपका काम भी हो जाएगा और अनावश्यक रुपयों की बर्बादी भी बच जाएगी। राजा आश्चर्यचकित था क्योंकि पहली बार किसी ने उसकी आज्ञा न मानने की बात कही थी। उसने कहा बताओ क्या सुझाव है। मंत्री ने कहा कि पूरे देश की सड़कों को चमड़े से ढंकने के बजाय आप चमड़े के एक टुकड़े का उपयोग कर अपने पैरों को ही क्यों नहीं ढंक लेते। राजा ने अचरज की दृष्टि से मंत्री को देखा और उसके सुझाव को मानते हुए अपने लिए जूता बनवाने का आदेश दे दिया।

यह कहानी हमें एक महत्वपूर्ण पाठ सिखाती है कि हमेशा ऐसे हल के बारे में सोचना चाहिए जो ज्यादा उपयोगी हो। जल्दबाजी में अप्रायोगिक हल सोचना बुद्धिमानी नहीं है। दूसरों के साथ बातचीत से भी अच्छे हल निकाले जा सकते हैं।

Please Share your comment`s.

© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  http://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51